September 23, 2025

Kalratri

Shardiya Navratri 2025 7th Day Maa Kalratri Puja Vidhi: नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा का महत्व, जानें पूजा विधि और भोग

Maa Kalratri: नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा होती है। उन्हें काली मां भी कहते हैं। दुर्गा मां का सातवां रूप, कालरात्रि, पापियों को समाप्त करने के लिए धरती पर आती हैं। इस दिन रात की रानी का फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। माता कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें, जैसे मालपुआ, का भोग लगाया जाता है। Shardiya Navratri: आज नवरात्रि का सातवां दिन है, जिसे महासप्तमी भी कहते हैं। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। माना जाता है कि मां कालरात्रि दुर्गा मां के नौ रूपों में सबसे ज्यादा गुस्से वाली हैं। जब धरती पर पाप बढ़ जाता है, तब वे पापियों को खत्म करने के लिए अवतार लेती हैं। उन्हें अंधकार को मिटाने वाली देवी भी कहा जाता है। जो भक्त उनकी पूजा करते हैं, उन पर मां कालरात्रि हमेशा दयालु रहती हैं और उन्हें अकाल मृत्यु का डर नहीं रहता। आइए, जानते हैं कि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा कैसे करें, उन्हें क्या भोग लगाएं और इस दिन का क्या महत्व है। माता दुर्गा का विकराल रूप है कालरात्रि:Kalratri is the monstrous form of Goddess Durga. नवरात्रि में सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का महत्व है। उनका नाम ‘कालरात्रि’ है, जिसका अर्थ है ‘अंधेरी रात’. यह नाम उनके भयानक रूप को दर्शाता है। जब मां कालरात्रि क्रोधित होती हैं, तो उनका रूप बहुत विकराल हो जाता है। मां कालरात्रि का रंग काला होता है। उनके बाल खुले और बिखरे हुए होते हैं। यह रूप अंधकार का प्रतीक है। उनके गले में मुंड माला होती है, जो बिजली की तरह चमकती है। मां कालरात्रि बुरी शक्तियों को नष्ट करती हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। भले ही उनका रूप अंधेरे में भयानक दिखता है, लेकिन उनके आने से दुष्टों का नाश होता है। चारों तरफ प्रकाश फैल जाता है। Shardiya Navratri 2025 7th Day Maa Kalratri Puja Vidhi Timings Mantra Aarti Samagri Muhurat Kahani Vrat Katha माता कालरात्रि की पूजा का महत्व:Importance of worshiping Mata Kalratri कालरात्रि की कृपा से भक्तों के भीतर से हर तरह का डर खत्म होता जाता है। कालरात्रि के भक्त निडर बनते हैं और किसी भी परेशानी से नहीं डरते हैं। कालरात्रि की कृपा से भक्तों के सभी शत्रुओं का नाश होता है और वे विजय पथ पर आगे बढ़ते रहते हैं। इसका मतलब है कि माता कालरात्रि अपने भक्तों को हमेशा सुरक्षित रखती हैं। माता कालरात्रि की पूजा विधि:Method of worship of Mata Kalratri पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठें। स्नान करके साफ कपड़े पहनें। फिर पूजा की तैयारी करें। एक चौकी सजाएं. माता कालरात्रि की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। तस्वीर पर काले रंग की चुन्नी चढ़ाएं। इसके बाद माता को रोली, अक्षत, दीप और धूप दिखाएं. माता कालरात्रि को रात रानी का फूल बहुत पसंद है इसलिए उन्हें यह फूल जरूर चढ़ाएं। गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के अंत में माता कालरात्रि का पाठ करें। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। माता कालरात्रि को कौन-सा भोग लगाएं:Which offering should be offered to Mata Kalratri? माता कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें पसंद हैं। इसका कारण यह है कि माता कालरात्रि का स्वभाव बहुत ही क्रोधी है। क्रोध की उष्मा को शीतलता में बदलने के लिए मीठे आहार की आवश्यकता होती हैं। इस कारण से माता कालरात्रि को मालपुए का भोग भी लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे माता कालरात्रि प्रसन्न होती हैं और कृपा बरसाती हैं। मां कालरात्रि के मंत्र:Mantras of Maa Kalratri दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे। चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते।। या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। ॐ कालरात्र्यै नम:ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। मां कालरात्रि की आरती:Aarti of Maa Kalratri कालरात्रि जय-जय-महाकाली।काल के मुह से बचाने वाली॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।महाचंडी तेरा अवतार॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा।महाकाली है तेरा पसारा॥ खडग खप्पर रखने वाली।दुष्टों का लहू चखने वाली॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा।सब जगह देखूं तेरा नजारा॥ सभी देवता सब नर-नारी।गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदंता और अन्नपूर्णा।कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिंता रहे बीमारी।ना कोई गम ना संकट भारी॥ उस पर कभी कष्ट ना आवें।महाकाली मां जिसे बचावे॥ तू भी भक्त प्रेम से कह।कालरात्रि मां तेरी जय॥ Sharad Purnima 2025 Start Date:कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के अचूक उपाय

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Satyanarayan Vrat

Ashwin Satyanarayan Vrat 2025 Date and Time: साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की तिथि व मुहूर्त

Satyanarayan Vrat: सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त से जानिए पूजा का सही समय। इस पूजा से घर में सुख, समृद्धि और आशीर्वाद का वास होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त के बारे में:About Satyanarayan Puja date and time Satyanarayan Vrat: सत्यनारायण पूजा किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। इसे पूर्णिमा, संकष्टी चतुर्थी, एकादशी, या विशेष मांगलिक अवसरों पर किया जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त प्रायः प्रदोष काल या चंद्रमा की वृद्धि वाले समय में होता है। Satyanarayan Vrat इस पूजा के लिए पंचांग देखकर शुभ तिथि और समय का चयन करें, जिससे भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त हो। कब है शरद पूर्णिमा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धन वृद्धि के अचूक उपाय हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान सत्यनारायण व्रत करने से और कथा सुनने से पुण्य फल प्राप्त होती है। श्री सत्यनारायण पूजा भगवान नारायण का आशीर्वाद लेने के लिए की जाती है जो भगवान विष्णु के रूपों में से एक हैं। इस रूप में भगवान को सत्य का अवतार माना जाता है। हालांकि सत्यनारायण पूजा करने के लिए कोई निश्चित दिन नहीं है, लेकिन पूर्णिमा या पूर्णिमा के दौरान इसे करना बेहद शुभ माना जाता है। सत्यनारायण पूजा तिथि और मुहूर्त:Satyanarayan Puja date and time Satyanarayan Vrat श्री सत्यनारायण पूजा नारायण यानी भगवान विष्णु को समर्पित है। यह पूजा भगवान का आशीर्वाद पाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए की जाती है। वैसे तो सत्यनारायण पूजा किसी भी दिन की जा सकती है, Satyanarayan Vrat लेकिन पूर्णिमा के दिन इसका विशेष महत्व माना गया है। इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा उपवास रखने का विधान है। सत्यनारायण पूजा प्रातःकाल या सायंकाल दोनों समय की जा सकती है, लेकिन सायंकाल का समय अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय पूजा के बाद व्रती जातक प्रसाद ग्रहण कर अपना उपवास पूर्ण कर सकते हैं। Ashwin Satyanarayan Vrat Puja Puja: सत्यनारायण व्रत की पूजा विधि शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है ऐसा माना जाता है। Satyanarayan Vrat पूजा सुबह के साथ-साथ शाम को भी की जा सकती है और शाम को सत्यनारायण पूजा करना अधिक उपयुक्त माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।इसके बाद सत्यनारायण की मूर्ति को स्थापित करें और उसके चारों ओर केले के पत्ते बांध दें।पंचामृतम (दूध, शहद, घी/मक्खन, दही और चीनी का मिश्रण) का उपयोग देवता को साफ करने के लिए किया जाता है, आमतौर पर शालिग्राम, जो महा विष्णु का दिव्य पत्थर है।चौकी पर जल से भरा कलश रखें और देसी घी का दीपक जलाएं।अब सत्यनारायण की पूजा और कथा करें।भुने हुए आटे में शक्कर मिलाकर भगवान को अर्पित करें।प्रसाद में तुलसी जरूर डालें।पूजा के बाद प्रसाद बांटें। Satyanarayan Vrat पूजा एक आरती के साथ समाप्त होती है, जिसमें भगवान की छवि या देवता के चारों ओर कपूर से जलाई गई एक छोटी सी आग की परिक्रमा होती है। आरती के बाद व्रतियों को पंचामृत और प्रसाद ग्रहण करना होता है। व्रती पंचामृत से व्रत तोड़ने के बाद प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की तिथि व मुहूर्त:Ashwin Satyanarayan Vrat 2025 Date and Time सत्यनारायण पूजा डेट 2025:satyanarayan puja date 2025 13 जनवरी 2025, सोमवार (पौष, शुक्ल पूर्णिमा) 12 फरवरी 2025, बुधवार (माघ, शुक्ल पूर्णिमा) 13 मार्च 2025, बृहस्पतिवार (फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा) 12 अप्रैल 2025, शनिवार (चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा) 12 मई 2025, सोमवार (वैशाख, शुक्ल पूर्णिमा) 10 जून 2025, मंगलवार (ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा) 10 जुलाई 2025, बृहस्पतिवार (आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा) 09 अगस्त 2025, शनिवार (श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा) 07 सितम्बर 2025, रविवार (भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा) 06 अक्टूबर 2025, सोमवार (आश्विन, शुक्ल पूर्णिमा) 05 नवम्बर 2025, बुधवार (कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा) 04 दिसम्बर 2025, बृहस्पतिवार (मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा) तो ये थी जानकारी साल 2025 के श्री सत्यनारायण पूजा की डेट व तिथि के बारे में। आप भी इन पूर्णिमा तिथियों पर भगवान विष्णु को समर्पित ये अनुष्ठान अवश्य करें, और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य बनाएं। व्रत-त्यौहारों व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए ‘श्री मंदिर’ पर।

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