September 19, 2025

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Shri Chamundeshvari Mangalam:श्रीचामुण्डेश्वरीमङ्गलम्

Shri Chamundeshvari Mangalam:श्रीचामुण्डेश्वरीमङ्गलम् श्रीशैलराजतनये चण्डमुण्डनिषूदिनि । मृगेन्द्रवाहने तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १॥ पञ्चविंशति सालाढ्य श्रीचक्रपुरनिवासिनि । बिन्दुपीठस्थिते तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २॥ राजराजेश्वरि श्रीमद्कामेश्वरकुटुम्बिनि । युगनाथ तते तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ३॥ महाकालि महालक्ष्मि महावाणि मनोन्मणि । योगनिद्रात्मके तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ४॥ मन्त्रिणि दण्डिनि मुख्ययोगिनि गणसेविते । भण्डदैत्यहरे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ५॥ निशुम्भमहिषाशुम्भेरक्तबीजादिमर्दिनि । महामाये शिवे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ६॥ कालरात्रि महादुर्गे नारायणसहोदरि । विन्ध्याद्रिवासिनि तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ७॥ चन्द्रलेखालसत्पाले श्रीमत्सिंहासनेश्वरि । कामेश्वरि नमस्तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ८॥ प्रपञ्चसृष्टिरक्षादि पञ्चकार्यधुरन्धरे । पञ्चप्रेतासने तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ९॥ मधुकैटभसंहर्त्रि कदम्बवनवासिनि । महेन्द्रवरदे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १०॥ निगमागमसंवेद्ये श्रीदेवि ललिताम्बिके । ओढ्याणपीठगदे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ११॥ पुण्ड्रेक्षुखण्डकोदण्डपुष्पकण्ठलसत्करे । सदाशिवकले तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १२॥ कामेशभक्तमाङ्गल्य श्रीमत्त्रिपुरसुन्दरि । सूर्याग्नीन्दुत्रिलोचनि (नित्यं) चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १३॥ चिदग्निकुण्डसम्भूते मूलप्रकृति(स्व)रूपिणि । कन्दर्पदीपके तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १४॥ महापद्माटवीमध्ये सदानन्दविहारिणि । पाशाङ्कुशधरे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १५॥ सर्वदोषप्रशमनि सर्वसौभाग्यदायिनि । सर्वसिद्धिप्रदे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १६॥ सर्वमन्त्रात्मिके प्राज्ञे सर्वयन्त्रस्वरूपिणि । सर्वतन्त्रात्मिके तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १७॥ सर्वप्राणिहृदावासे सर्वशक्तिस्वरूपिणि । सर्वाभिष्टप्रदे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १८॥ वेदमातः महाराज्ञि लक्ष्मि वाणि वसुप्रिये । त्रैलोक्यवन्दिते तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ १९॥ ब्रह्मोपेन्द्रसुरेन्द्रादि सम्पूजितपदाम्बुजे । सर्वायुधकरे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २०॥ महाविद्यासम्प्रदात्रि संवेद्यनिजवैभवे । सर्वमुद्राकरे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २१॥ एकपञ्चाशते पीठे निवासात्मविलासिनि । अपारमहिमे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २२॥ तेजोमयि दयापूर्णे सच्चिदानन्दरूपिणि । सर्ववर्णात्मिके तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २३॥ हंसारूढे चतुर्वक्त्रे ब्राह्मीरूपसमन्विते । धूम्राक्षसहन्त्रिके तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २४॥ माहेस्वरीस्वरूपे पञ्चास्ये वृषभवाहने । सुग्रीवपञ्चिके तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २५॥ मयूरवाहे षट्वक्त्रे कौमारीरूपशोभिते । शक्तियुक्तकरे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २६॥ पक्षिराजसमारूढे शङ्खचक्रलसत्करे । वैष्णवीसंज्ञिके तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २७॥ वाराहि महिषारूढे घोररूपसमन्विते । दंष्ट्रायुधधरे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २८॥ गजेन्द्रवाहनारुढे इन्द्राणीरूपवासुरे । वज्रायुधकरे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ २९॥ चतुर्भुजे सिंहवाहे जटामण्डिलमण्डिते । चण्डिके सुभगे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ३०॥ दंष्ट्राकरालवदने सिंहवक्त्रे चतुर्भुजे । नारसिंहि सदा तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ३१॥ ज्वलज्जिह्वाकरालास्ये चण्डकोपसमन्विते । ज्वालामालिनि तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ३२॥ भृङ्गिणे दर्शितात्मीयप्रभावे परमेश्वरि । नानारूपधरे तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ३३॥ गणेशस्कन्दजननि मातङ्गि भुवनेश्वरि । भद्रकालि सदा तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ३४॥ अगस्त्याय हयग्रीव प्रकटीकृतवैभवे । अनन्ताख्यसुते तुभ्यं चामुण्डायै सुमङ्गलम् ॥ ३५॥ ॥ इति श्रीचामुण्डेश्वरीमङ्गलं सम्पूर्णम् ॥

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Devi Skandmata

Devi Skandmata: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

Devi Skandmata मां दुर्गा का दूसरा रूप हैं और माना जाता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं, जैसे एक मां अपने बच्चे को नुकसान से बचाती है। Devi Skandmata एक शक्तिशाली देवी हैं जिनके प्यार और देखभाल ने भगवान कार्तिकेय को राक्षस तारकासुर को हराने में मदद की। भगवान शिव और मां पार्वती के पहले पुत्र, भगवान कार्तिकेय को “स्कंद” के नाम से भी जाना जाता था। इसलिए, माँ पार्वती को अक्सर स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ कार्तिकेय या स्कंद की माँ है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि बुद्ध ग्रह देवी स्कंदमाता द्वारा शासित हैं। Devi Skandmata का स्वरुप देवी स्कंदमाता क्रूर सिंह पर विराजमान हैं। वह बच्चे मुरुगन को गोद में उठाती हैं। भगवान मुरुगन को कार्तिकेय और भगवान गणेश के भाई के रूप में भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता को चार हाथों से चित्रित किया गया है। वह अपने ऊपर के दोनों हाथों में कमल के फूल लिए हुए हैं। वह अपने एक दाहिने हाथ में मुरुगन को रखती है और दूसरे को अभय मुद्रा में रखती है। वह कमल के फूल पर विराजमान हैं और इसी वजह से स्कंदमाता को देवी पद्मासन के नाम से भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता का रंग शुभ्रा (शुभ्र) है जो उनके सफेद रंग का वर्णन करता है। देवी पार्वती के इस रूप की पूजा करने वाले भक्तों को भगवान कार्तिकेय की पूजा का लाभ मिलता है। यह गुण केवल देवी पार्वती के स्कंदमाता रूप में है। Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि 5वें दिन स्कंदमाता पूजन विधि, मंत्र, आरती और प्रसाद का महत्व Devi Skandmata Mantra:देवी स्कंदमाता मंत्र ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ Om Devi Skandamatayai Namah॥ goddess skandamata prayer:देवी स्कंदमाता प्रार्थना सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ Simhasanagata Nityam Padmanchita Karadvaya।Shubhadastu Sada Devi Skandamata Yashasvini॥ Devi Skandmata Stuthi:स्तुति या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ Ya Devi Sarvabhuteshu Ma Skandamata Rupena Samsthita।Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥ देवी स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय को अपनी दाहिनी भुजा में पकड़े हुए दिखाई देती हैं Devi Skandmata Dyan:देवी स्कंदमाता ध्यान वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्॥ धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पञ्चम दुर्गा त्रिनेत्राम्।अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल धारिणीम्॥ प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् पीन पयोधराम्।कमनीयां लावण्यां चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥ Vande Vanchhita Kamarthe Chandrardhakritashekharam।Simharudha Chaturbhuja Skandamata Yashasvinim॥ Dhawalavarna Vishuddha Chakrasthitom Panchama Durga Trinetram।Abhaya Padma Yugma Karam Dakshina Uru Putradharam Bhajem॥ Patambara Paridhanam Mriduhasya Nanalankara Bhushitam।Manjira, Hara, Keyura, Kinkini, Ratnakundala Dharinim॥ Praphulla Vandana Pallavadharam Kanta Kapolam Pina Payodharam।Kamaniyam Lavanyam Charu Triwali Nitambanim॥ Devi Skandmata Stotra:देवी स्कंदमाता स्तोत्र नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।समग्रतत्वसागरम् पारपारगहराम्॥ शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रदीप्ति भास्कराम्॥ महेन्द्रकश्यपार्चितां सनत्कुमार संस्तुताम्।सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलाद्भुताम्॥ अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।मुमुक्षुभिर्विचिन्तितां विशेषतत्वमुचिताम्॥ नानालङ्कार भूषिताम् मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेदमार भूषणाम्॥ सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्र वैरिघातिनीम्।शुभां पुष्पमालिनीं सुवर्णकल्पशाखिनीम्॥ तमोऽन्धकारयामिनीं शिवस्वभावकामिनीम्।सहस्रसूर्यराजिकां धनज्जयोग्रकारिकाम्॥ सुशुध्द काल कन्दला सुभृडवृन्दमज्जुलाम्।प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरम् सतीम्॥ स्वकर्मकारणे गतिं हरिप्रयाच पार्वतीम्।अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥ पुनः पुनर्जगद्धितां नमाम्यहम् सुरार्चिताम्।जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवी पाहिमाम्॥ Namami Skandamata Skandadharinim।Samagratatvasagaram Paraparagaharam॥ Shivaprabha Samujvalam Sphuchchhashagashekharam।Lalataratnabhaskaram Jagatpradipti Bhaskaram॥ Mahendrakashyaparchita Sanantakumara Samstutam।Surasurendravandita Yatharthanirmaladbhutam॥ Atarkyarochiruvijam Vikara Doshavarjitam।Mumukshubhirvichintitam Visheshatatvamuchitam॥ Nanalankara Bhushitam Mrigendravahanagrajam।Sushuddhatatvatoshanam Trivedamara Bhushanam॥ Sudharmikaupakarini Surendra Vairighatinim।Shubham Pushpamalinim Suvarnakalpashakhinim॥ Tamoandhakarayamini Shivasvabhavakaminim।Sahasrasuryarajikam Dhanajjayogakarikam॥ Sushuddha Kala Kandala Subhridavrindamajjulam।Prajayini Prajawati Namami Mataram Satim॥ Swakarmakarane Gatim Hariprayacha Parvatim।Anantashakti Kantidam Yashoarthabhuktimuktidam॥ Punah Punarjagadditam Namamyaham Surarchitam।Jayeshwari Trilochane Prasida Devi Pahimam॥ Devi Skandmata Kavach:देवी स्कंदमाता कवच ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मधरापरा।हृदयम् पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥ श्री ह्रीं हुं ऐं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।सर्वाङ्ग में सदा पातु स्कन्दमाता पुत्रप्रदा॥ वाणवाणामृते हुं फट् बीज समन्विता।उत्तरस्या तथाग्ने च वारुणे नैॠतेअवतु॥ इन्द्राणी भैरवी चैवासिताङ्गी च संहारिणी।सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥ Aim Bijalinka Devi Padayugmadharapara।Hridayam Patu Sa Devi Kartikeyayuta॥ Shri Hrim Hum Aim Devi Parvasya Patu Sarvada।Sarvanga Mein Sada Patu Skandamata Putraprada॥ Vanavanamritem Hum Phat Bija Samanvita।Uttarasya Tathagne Cha Varune Nairiteavatu॥ Indrani Bhairavi Chaivasitangi Cha Samharini।Sarvada Patu Mam Devi Chanyanyasu Hi Dikshu Vai॥ Devi Skandmata Aarti:देवी स्कंदमाता आरती जय तेरी हो स्कन्द माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥तेरी जोत जलाता रहूं मैं। हरदम तुझे ध्याता रहूं मै॥कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥कही पहाड़ों पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥हर मन्दिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥इन्द्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खण्ड हाथ उठाए॥दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी॥

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Skanda Mata

Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि 5वें दिन स्कंदमाता पूजन विधि, मंत्र, आरती और प्रसाद का महत्व

Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम दिया गया है। भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। Skanda Mata ki Puja Kese Kare:  नवरात्रि की पंचमी तिथि को मां दुर्गा के पंचम स्वरूप माता स्कंदमाता की पूजा का विधान है। मान्यता है कि यह मां अपने भक्तों पर स्नेह लुटाती हैं। Skanda Mata Puja Vidhi मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने से नकारात्मक शक्तियों दूर होती हैं और कार्यों की विघ्न-बाधा भी खत्म होती है। मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि की पंचमी तिथि पर की जाती है। Skanda Mata स्कंदमाता की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करने व व्रत करने से जातक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण मां दुर्गा के इस स्वूप को स्कंदमाता का नाम मिला। जानें मां स्कंदमाता की पूजा विधि, भोग, मंत्र व आरती। मां स्कंदमाता का स्वरूप- Skanda Mata मां स्कंदमाता के स्वरूप की बात करें तो मां की गोद में स्कंद देव विराजमान हैं। मां कमल के आसन पर विराजमान हैं, जिसके कारण मां स्कंदमाता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है। Skanda Mata मां का वाहन सिंह है। मान्यता है कि मां भगवती के पंचम स्वरूप की उपासना करने से संतान संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। स्कंदमाता पूजा विधि– इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां स्कंदमाता को गंगाजल से स्नान कराएं। चुनरी व वस्त्र आदि अर्पित करें। रोली, कुमकुम आदि लगाएं। Skanda Mata इसके बाद मां को मिठाई व फलों का भोग लगाएं। मां की आरती करें। स्कंदमाता का प्रिय भोग- मान्यता है कि मां स्कंदमाता को केले का भोग अतिप्रिय है। Skanda Mata आप माता रानी को खीर का भोग भी लगा सकते हैं। स्कंदमाता का प्रिय रंग- नवरात्रि के पांचवें दिन का शुभ रंग पीला व सफेद है। मां की पूजा के समय श्वेत रंग या पीले रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं। Skanda Mata:स्कंदमाता का मंत्र या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः Skandmata Aarti:स्कंदमाता की आरती जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवां नाम तुम्हारा आता। सबके मन की जानन हारी, जग जननी सबकी महतारी। तेरी ज्योत जलाता रहू मैं, हरदम तुझे ध्याता रहू मैं। कई नामों से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा। कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरों में तेरा बसेरा। हर मंदिर में तेरे नजारे, गुण गाए तेरे भक्त प्यारे। भक्ति अपनी मुझे दिला दो, शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो। इंद्र आदि देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे। दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए, तू ही खंडा हाथ उठाए। दासों को सदा बचाने आयी, भक्त की आस पुजाने आयी। कैसे करें पूजन: How to Worship सबसे पहले चौकी (बाजोट) पर स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें।  चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर कलश रखें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें।  इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।  इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें। Skanda Mata Puja Vidhi:स्कंदमाता के मंत्र मां स्कंदमाता का वाहन सिंह है। इस मंत्र के उच्चारण के साथ मां की आराधना की जाती है।  सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ संतान प्राप्ति हेतु जपें स्कंद माता का मंत्र पंचमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी स्कन्द माता हैं। जिन व्यक्तियों को संतानाभाव हो, वे माता की पूजन-अर्चन तथा मंत्र जप कर लाभ उठा सकते हैं। मंत्र अत्यंत सरल है – ‘ॐ स्कन्दमात्रै नम:।।’ निश्चित लाभ होगा। इसके अतिरिक्त इस मंत्र से भी मां की आराधना की जाती है: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। भोग एवं प्रसाद – पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। Durga Puja 2025 Date And Time :दुर्गा पूजा 2025 कब से होगी शुरू? जानें महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

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Maa Durga

Sapne Mein Maa Durga ko Dekhna: सपने में मां दुर्गा को देखना: शुभ या अशुभ? जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Sapne Mein Maa Durga ko Dekhna: क्या आपने कभी सपने में मां दुर्गा के दर्शन किए हैं? स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने हमारे वास्तविक जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं और भविष्य में होने वाली घटनाओं, Maa Durga चाहे वे शुभ हों या अशुभ, की एक झलक दिखा सकते हैं। चिकित्सा शास्त्र भले ही सपनों को मन की गतिविधियों का परिणाम मानता हो, लेकिन स्वप्न शास्त्र हर सपने का एक अलग मतलब बताता है। मां दुर्गा से संबंधित सपने भी शुभ या अशुभ संकेत दे सकते हैं। आइए जानते हैं कि सपने में मां दुर्गा को अलग-अलग रूपों में देखने का क्या मतलब होता है: सपने में मां दुर्गा के शुभ संकेत:Auspicious signs of Maa Durga in dreams अगर आपको सपने में मां दुर्गा इन रूपों में दिखाई देती हैं, तो यह आपके लिए अच्छा संकेत हो सकता है: सपने में मां दुर्गा की मूर्ति देखना: स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में Sapne Mein Maa Durga ko Dekhna मां दुर्गा की मूर्ति देखना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह संकेत देता है कि आपके जीवन में चल रही कई परेशानियों से छुटकारा मिलने वाला है। आपको मानसिक और शारीरिक समस्याओं से निजात मिल सकती है। इसके साथ ही, नौकरी और व्यापार में अपार सफलता के साथ धन लाभ मिलने के भी आसार होते हैं। व्यापारियों को नई डील्स मिल सकती हैं जिनमें मुनाफा होने की संभावना है। सपने में मां दुर्गा का मंदिर देखना: सपने में मां दुर्गा का मंदिर देखना भी बहुत शुभ माना जाता है। Maa Durga यह दर्शाता है कि आपकी लंबे समय से चली आ रही इच्छाएं अब पूरी हो सकती हैं। जीवन के कई क्षेत्रों में आपको लाभ मिल सकता है और विभिन्न प्रकार की मुश्किलों से छुटकारा मिलेगा। यह माता रानी की कृपा का संकेत भी होता है। सपने में मां दुर्गा की आरती करते देखना: यदि आप सपने में खुद को मां दुर्गा की आरती करते हुए देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपकी कोई बड़ी समस्या का समाधान होने वाला है। यह आशा की एक नई किरण पैदा करता है Maa Durga और संकेत देता है कि आप भविष्य में सफलता की ओर बढ़ेंगे। व्यापार, नौकरी और विवाह जैसे क्षेत्रों में भी आपको लाभ मिलने के आसार हैं। •सपने में शेर पर सवार मां दुर्गा को देखना: सपने में मां दुर्गा को शेर पर सवार देखना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह संकेत है कि आपके अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं। आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और भविष्य भी बेहतर हो सकता है। आपको शुभ समाचार भी मिल सकते हैं। मां दुर्गा को लाल वस्त्र में देखना: अगर कोई व्यक्ति मां दुर्गा को लाल वस्त्र में देखता है, तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह बहुत शुभ होता है। इसका मतलब है कि आपका भविष्य अच्छा होने वाला है और तरक्की के द्वार खुल सकते हैं। Maa Durga रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और आपको उन्नति व तरक्की मिलने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। संतान पक्ष की ओर से भी खुशी की प्राप्ति हो सकती है। जिन लोगों की शादी नहीं हुई है, उन्हें विवाह के प्रस्ताव भी आ सकते हैं। सपने में श्रृंगार किये माता को देखना: सपने में श्रृंगार की हुई माता रानी को देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन में खुशियां आने वाली हैं और सकारात्मकता का वास होगा। आने वाले समय में आपको कोई अच्छी खबर मिल सकती है। वहीं, शादीशुदा लोगों की समस्याएं भी दूर हो सकती हैं। Durga Panchami 2025 Start Date: दुर्गा पूजा 2025: कब से शुरू होगी यह महापर्व, जानें शुभ तिथियां और महत्व  सपने में मां दुर्गा के अशुभ संकेत:Inauspicious signs of Maa Durga in dreams सभी सपने शुभ नहीं होते। कुछ सपने ऐसे भी होते हैं जो आपको भविष्य की चुनौतियों या समस्याओं के प्रति सचेत करते हैं: सपने में मां दुर्गा को दुखी या रोते हुए देखना: स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में मां दुर्गा को दुखी या रोते हुए देखना अशुभ माना जाता है। यह संकेत देता है कि आपको कार्य क्षेत्र या व्यापार में हानि हो सकती है। Sapne Mein Maa Durga ko Dekhna किसी अपने से धोखा मिलने की संभावना है। पैसों की तंगी बढ़ सकती है, जिससे कर्ज लेने तक की नौबत आ सकती है। इसके साथ ही, पारिवारिक कलह भी बढ़ सकता है। अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिषियों, पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं, धर्मग्रंथों और दंतकथाओं पर आधारित है। KARMASU.IN इस जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं देते हैं और न ही इसे अंतिम सत्य या दावा मानते हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। किसी भी तरह के उपयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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Durga Puja 2025

Durga Puja 2025 Date And Time :दुर्गा पूजा 2025 कब से होगी शुरू? जानें महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

Durga Puja 2025 Mein Kab suru hogi: हिंदू धर्म में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्रि के दौरान मनाई जाने वाली दुर्गा पूजा विशेष रूप से पूर्वी भारत में, खासकर बंगाल, ओडिशा और असम में बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई जाती है। इस पर्व को दुर्गोत्सव के नाम से भी जाना जाता है और यह देवी दुर्गा की पूजा का एक प्रमुख त्योहार है। यह अवधि नवदुर्गाओं की उपासना के लिए उत्तम मानी गई है। देवी दुर्गा का धरती पर आगमन देवी पक्ष के पहले दिन होता है और Durga Puja 2025 दुर्गा विसर्जन के दिन वह प्रस्थान करती हैं। मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान वाले दिन महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इन दिनों से आने वाले समय का अनुमान किया जाता है और यह माना जाता है कि मां के आगमन और प्रस्थान से भविष्य में शुभ और अशुभ स्थितियों का संकेत मिलता है। आइए, जानते हैं साल 2025 में दुर्गा पूजा और शारदीय नवरात्रि से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त और पूजा सामग्री के बारे में: Shardiya Navratri 2025 start and end Date: शारदीय नवरात्रि 2025: कब से कब तक? वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025, सोमवार से हो रही है, जो 1 अक्टूबर 2025, बुधवार तक चलेगी। इस बार नवरात्रि 10 दिनों की होगी, क्योंकि तृतीया तिथि दो दिन रहेगी। इस दौरान Durga Puja 2025 मां दुर्गा की पूजा और व्रत करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। Durga Puja 2025: Important dates of Durga festival:दुर्गा पूजा 2025: दुर्गोत्सव की प्रमुख तिथियां Durga Puja 2025:दुर्गोत्सव पांच दिनों तक मनाया जाता है, Durga Puja 2025 जिसमें षष्ठी, महासप्तमी, महाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी के दिन विशेष रूप से पूजे जाते हैं। Durga Puja vidhi 2025:दुर्गा पूजा की विधि क्या है? Durga Puja 2025:दुर्गा पूजा विधि में सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, फिर अपने घर के मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें. कलश स्थापना करें, दीप जलाकर गंगाजल छिड़कें, फिर अक्षत, सिंदूर, लाल फूल और फल-मिठाई मां को अर्पित करें. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, और अंत में मां की आरती करके प्रसाद बांटें.  Durga Puja 2025:मुख्य पूजा विधि अतिरिक्त जानकारी Start of Durga Puja (Shashthi Tithi): 28 September 2025, Sunday:दुर्गा पूजा की शुरुआत (षष्ठी तिथि): 28 सितंबर 2025, रविवार     ◦ इस दिन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है।     ◦ दुर्गा पूजा की मूर्ति स्थापना के लिए यह दिन शुभ माना गया है।     ◦ मूर्ति स्थापना का उत्तम मुहूर्त: सुबह 06:08 बजे से लेकर 10:30 बजे तक।     ◦ इस दिन बिल्व निमंत्रण और पंडाल सजाने की परंपरा भी निभाई जाती है। संधि पूजा (अष्टमी तिथि): 30 सितंबर 2025, मंगलवार     ◦ संधि पूजा अष्टमी और नवमी के संधिकाल में की जाती है।     ◦ संधिकाल का मुहूर्त: रात्रि 07:36 बजे से 08:24 बजे तक।     ◦ इस समय 108 दीपों और 108 कमल पुष्पों से मां की पूजा की जाती है।     ◦ यह समय मां दुर्गा के चामुंडा रूप की आराधना के लिए अत्यंत विशेष होता है। दुर्गा विसर्जन (विजयादशमी): 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों और तालाबों में किया जाएगा। शारदीय नवरात्रि 2025: घटस्थापना का महत्व और मुहूर्त शारदीय नवरात्रि Durga Puja 2025 के पहले दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाती है। Durga Puja 2025 ऐसा माना जाता है कि कलश स्थापना में विशेष चीजों को शामिल करने से साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और मां दुर्गा जीवन के सभी दुखों को दूर करती हैं। घटस्थापना के शुभ मुहूर्त: 22 सितंबर 2025, सोमवार को घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं: • पहला मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 06 मिनट तक। • दूसरा मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त): 11 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक। आप इन दोनों में से किसी भी मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं। Durga Panchami 2025 Start Date: दुर्गा पूजा 2025: कब से शुरू होगी यह महापर्व, जानें शुभ तिथियां और महत्व ! Shardiya Navratri 2025 Puja Samagri: घटस्थापना की सामग्री लिस्ट शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए आपको इन चीजों की आवश्यकता होगी: • अनाज, साफ जवा • कलश • गंगाजल • सुपारी, मौली, रोली • जटा वाला नारियल • आम या अशोक के पत्ते • मिट्टी का बर्तन • किसी पवित्र स्थान की मिट्टी (मंदिर आदि) • अखंड ज्योति के लिए बड़ा दीया, रुई की बाती • लाल सूत्र, सिक्का • लाल कपड़ा • फूल, फूल माला • इलायची, लौंग, कपूर • अक्षत, हल्दी इस तरह करें घटस्थापना (कलश स्थापना विधि) • सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। • इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करें। • कलश स्थापना के लिए घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। • कलश में साफ जल भरकर उसमें सिक्का, फूल और अक्षत डालें। • इसके बाद कलश पर स्वास्तिक बनाएं और कलावा लपेट दें। • लाल चुनरी में नारियल को लपेट कर कलश के ऊपर रख दें। • देसी घी का दीपक जलाकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करें। • व्रत कथा का पाठ करें। • फल और मिठाई का भोग लगाएं। मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्र मां दुर्गा की उपासना के दौरान आप इन मंत्रों का जप कर सकते हैं: • ॐ ह्रींग डुंग दुर्गायै नमः • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। मां दुर्गा का आह्वान मंत्र: • ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

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