Skanda Mata Ki Puja Kese Kare: नवरात्रि का पावन पर्व, देवी दुर्गा की शक्ति और भक्ति का उत्सव है. नौ दिनों और दस रातों तक चलने वाले इस महापर्व में, प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशिष्ट स्वरूप की पूजा की जाती है. Skanda Mata Puja Vidhi पांचवां दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप, मां स्कंदमाता को समर्पित है. यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मां स्कंदमाता अपने भक्तों पर पुत्र के समान स्नेह लुटाती हैं.
Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि के 5वें दिन करें मां स्कंदमाता का पूजन
मां स्कंदमाता का स्वरूप:Form of Mother skandamata
Skanda Mata मां स्कंदमाता, स्कंद कुमार भगवान कार्तिकेय की माता हैं. भगवान स्कंद बालरूप में उनकी गोद में विराजमान हैं. मां कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है. Skanda Mata मां का वाहन सिंह है. इन्हें गौरी, माहेश्वरी, पार्वती और उमा जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है.
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मां स्कंदमाता का महत्व और पूजा से लाभ:Importance and benefits of worshiping Mother Skandamata
नवरात्रि के पांचवें दिन पंचमी तिथि पर Skanda Mata मां स्कंदमाता की उपासना विशेष रूप से की जाती है. मां की उपासना से कई अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं:
संतान सुख की प्राप्ति: जिन व्यक्तियों को संतान की इच्छा होती है, वे Skanda Mata मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चन और मंत्र जप से निश्चित रूप से लाभ उठा सकते हैं.
नकारात्मक शक्तियों का नाश: मां की उपासना से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं.
बुद्धि का विकास: भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है.
परम शांति और सुख: देवी के इस स्वरूप की आराधना से व्यक्ति की सभी कामनाएं पूर्ण होती हैं, मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है और परम शांति व सुख का अनुभव होता है.
अलौकिक तेज की प्राप्ति: मां को विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है, और उनकी उपासना से अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है.
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स्कंदमाता पूजन विधि:Skandamata worship method
मां स्कंदमाता की पूजा अत्यंत सरल और फलदायी है. यहाँ चरण-दर-चरण पूजन विधि दी गई है:
1. शुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजन से पहले चौकी (बाजोट) पर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उसे गंगाजल या गोमूत्र से शुद्ध करें.
2. कलश स्थापना: चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर कलश स्थापित करें.
3. अन्य देवताओं की स्थापना: उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें.
4. संकल्प: इसके बाद व्रत और पूजन का संकल्प लें.
5. षोडशोपचार पूजा: वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा Skanda Mata स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें. इसमें निम्नलिखित क्रियाएं शामिल हैं: Skanda Mata आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा और मंत्र पुष्पांजलि.
6. भोग अर्पित करें: मां को मिष्ठान और पांच प्रकार के फलों का भोग लगाएं. विशेष रूप से, मां को केले का भोग अति प्रिय है और आप खीर का प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं.
7. ध्यान और आरती: मां स्कंदमाता का अधिक से अधिक ध्यान करें और अंत में मां की आरती अवश्य करें.
8. प्रसाद वितरण: पूजन संपन्न होने के बाद प्रसाद का वितरण करें.
मां स्कंदमाता के शक्तिशाली मंत्र:Powerful mantras of Mother Skandamata
मां की आराधना के लिए इन मंत्रों का जाप करें:
मूल मंत्र: सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
सरल मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
संतान प्राप्ति हेतु विशेष मंत्र: ‘ॐ स्कन्दमात्रै नम:।।’ (यह मंत्र संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत सरल और निश्चित लाभ देने वाला है).
सार्वभौमिक मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
भोग और प्रसाद:Bhog and Prasad
मां स्कंदमाता को केला अति प्रिय है. पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है. आप मां को खीर का प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं.
शुभ रंग
Skanda Mata मां स्कंदमाता को श्वेत रंग प्रिय है. मां की उपासना में श्वेत रंग के वस्त्रों का प्रयोग करना शुभ माना जाता है. पूजा के समय पीले रंग के वस्त्र धारण करना भी अत्यंत शुभ होता है.
मां स्कंदमाता की आरती:Aarti of Maa Skandamata
जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवा नाम तुम्हारा आता. सब के मन की जानन हारी, जग जननी सब की महतारी. तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हरदम तुम्हे ध्याता रहूं मैं. कई नामो से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा. कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरों में तेरा बसेरा. हर मंदिर में तेरे नजारे गुण गाये, तेरे भगत प्यारे भगति. अपनी मुझे दिला दो शक्ति, मेरी बिगड़ी बना दो. इन्दर आदी देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे. दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये, तुम ही खंडा हाथ उठाये दासो को सदा बचाने आई, चमन की आस पुजाने आई।









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