September 18, 2025

Kalash Sthapna

Kalash Sthapna 2025: शुभ मुहूर्त और विधान जानें !

Kalash Sthapna, जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है, नवरात्रि के नौ दिवसीय पर्व की शुरुआत का प्रतीक है। यह हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें देवी दुर्गा की ऊर्जा का आह्वान किया जाता है और उनकी दिव्य कृपा प्राप्त की जाती है। यह पवित्र अनुष्ठान वैदिक परंपराओं और नियमों के अनुसार किया जाता है। यदि आप 2025 में कलश स्थापना की योजना बना रहे हैं, तो यहां इसका शुभ मुहूर्त, प्रक्रिया और महत्व की पूरी जानकारी दी गई है। कलश स्थापना का महत्व:Importance of establishing Kalash Kalash Sthapna एक पवित्र अनुष्ठान है जो घर या मंदिर में दिव्य ऊर्जा की स्थापना का प्रतीक है। यह कलश (पवित्र घड़ा) समृद्धि, पवित्रता और देवी की उपस्थिति का प्रतीक है। यह देवी दुर्गा की उपस्थिति को दर्शाता है और उनकी दिव्य शक्ति को आमंत्रित करता है। कलश सकारात्मक ऊर्जा को संचित करता है और वातावरण से नकारात्मकता को दूर करता है। यह नवरात्रि के दौरान भक्ति और पूजा का केंद्र बनता है। Method of Kalash Establishment (Step-by-Step Process):कलश स्थापना की विधि (स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया) Kalash Sthapna करते समय मन, हृदय और वातावरण की शुद्धता आवश्यक होती है। इस प्रक्रिया को ध्यानपूर्वक करें: 1. तैयारी और शुद्धिकरण 2. कलश का चयन और स्थापना 3. देवी का आह्वान (संकल्प और मंत्र) 4. आरती और प्रार्थना अर्पण करें 5. नवरात्रि के नौ दिनों तक पूजन What not to do during Kalash installation: कलश स्थापना के दौरान क्या न करें? निष्कर्ष Kalash Sthapna एक अत्यंत पवित्र और शुभ अनुष्ठान है, जो नवरात्रि की शुरुआत को दिव्यता और सकारात्मकता से भर देता है। सही विधि और शुभ मुहूर्त में इस अनुष्ठान को करने से देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में समृद्धि, सुख और सुरक्षा मिलती है। कलश स्थापना 2025 के लिए पूरी तैयारी रखें और पूरी श्रद्धा से नवरात्रि मनाएं।

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Devi Skandmata

Devi Skandmata: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

Devi Skandmata मां दुर्गा का रूप हैं और माना जाता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं, जैसे एक मां अपने बच्चे को नुकसान से बचाती है। Devi Skandmata एक शक्तिशाली देवी हैं जिनके प्यार और देखभाल ने भगवान कार्तिकेय को राक्षस तारकासुर को हराने में मदद की। भगवान शिव और मां पार्वती के पहले पुत्र, भगवान कार्तिकेय को “स्कंद” के नाम से भी जाना जाता था। Devi Skandmata इसलिए, माँ पार्वती को अक्सर स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ कार्तिकेय या स्कंद की माँ है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि बुद्ध ग्रह देवी स्कंदमाता द्वारा शासित हैं। Devi Skandmata का स्वरुप देवी स्कंदमाता Devi Skandmata क्रूर सिंह पर विराजमान हैं। वह बच्चे मुरुगन को गोद में उठाती हैं। भगवान मुरुगन को कार्तिकेय और भगवान गणेश के भाई के रूप में भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता को चार हाथों से चित्रित किया गया है। वह अपने ऊपर के दोनों हाथों में कमल के फूल लिए हुए हैं। वह अपने एक दाहिने हाथ में मुरुगन को रखती है और दूसरे को अभय मुद्रा में रखती है। वह कमल के फूल पर विराजमान हैं और इसी वजह से स्कंदमाता को देवी पद्मासन के नाम से भी जाना जाता है। देवी स्कंदमाता Devi Skandmata का रंग शुभ्रा (शुभ्र) है जो उनके सफेद रंग का वर्णन करता है। Devi Skandmata देवी पार्वती के इस रूप की पूजा करने वाले भक्तों को भगवान कार्तिकेय की पूजा का लाभ मिलता है। यह गुण केवल देवी पार्वती के स्कंदमाता रूप में है। देवी स्कंदमाता मंत्र ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ Om Devi Skandamatayai Namah॥ देवी स्कंदमाता प्रार्थना सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ Simhasanagata Nityam Padmanchita Karadvaya।Shubhadastu Sada Devi Skandamata Yashasvini॥ Devi Skandmata स्तुति या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ Ya Devi Sarvabhuteshu Ma Skandamata Rupena Samsthita।Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥ देवी स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय को अपनी दाहिनी भुजा में पकड़े हुए दिखाई देती हैं देवी स्कंदमाता ध्यान वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्॥ धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पञ्चम दुर्गा त्रिनेत्राम्।अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल धारिणीम्॥ प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् पीन पयोधराम्।कमनीयां लावण्यां चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥ Vande Vanchhita Kamarthe Chandrardhakritashekharam।Simharudha Chaturbhuja Skandamata Yashasvinim॥ Dhawalavarna Vishuddha Chakrasthitom Panchama Durga Trinetram।Abhaya Padma Yugma Karam Dakshina Uru Putradharam Bhajem॥ Patambara Paridhanam Mriduhasya Nanalankara Bhushitam।Manjira, Hara, Keyura, Kinkini, Ratnakundala Dharinim॥ Praphulla Vandana Pallavadharam Kanta Kapolam Pina Payodharam।Kamaniyam Lavanyam Charu Triwali Nitambanim॥ देवी स्कंदमाता स्तोत्र नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।समग्रतत्वसागरम् पारपारगहराम्॥ शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रदीप्ति भास्कराम्॥ महेन्द्रकश्यपार्चितां सनत्कुमार संस्तुताम्।सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलाद्भुताम्॥ अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।मुमुक्षुभिर्विचिन्तितां विशेषतत्वमुचिताम्॥ नानालङ्कार भूषिताम् मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेदमार भूषणाम्॥ सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्र वैरिघातिनीम्।शुभां पुष्पमालिनीं सुवर्णकल्पशाखिनीम्॥ तमोऽन्धकारयामिनीं शिवस्वभावकामिनीम्।सहस्रसूर्यराजिकां धनज्जयोग्रकारिकाम्॥ सुशुध्द काल कन्दला सुभृडवृन्दमज्जुलाम्।प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरम् सतीम्॥ स्वकर्मकारणे गतिं हरिप्रयाच पार्वतीम्।अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥ पुनः पुनर्जगद्धितां नमाम्यहम् सुरार्चिताम्।जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवी पाहिमाम्॥ Namami Skandamata Skandadharinim।Samagratatvasagaram Paraparagaharam॥ Shivaprabha Samujvalam Sphuchchhashagashekharam।Lalataratnabhaskaram Jagatpradipti Bhaskaram॥ Sushuddha Kala Kandala Subhridavrindamajjulam।Prajayini Prajawati Namami Mataram Satim॥ Swakarmakarane Gatim Hariprayacha Parvatim।Anantashakti Kantidam Yashoarthabhuktimuktidam॥ Punah Punarjagadditam Namamyaham Surarchitam।Jayeshwari Trilochane Prasida Devi Pahimam॥ देवी स्कंदमाता कवच ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मधरापरा।हृदयम् पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥ श्री ह्रीं हुं ऐं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।सर्वाङ्ग में सदा पातु स्कन्दमाता पुत्रप्रदा॥ वाणवाणामृते हुं फट् बीज समन्विता।उत्तरस्या तथाग्ने च वारुणे नैॠतेअवतु॥ इन्द्राणी भैरवी चैवासिताङ्गी च संहारिणी।सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥ Aim Bijalinka Devi Padayugmadharapara।Hridayam Patu Sa Devi Kartikeyayuta॥ Shri Hrim Hum Aim Devi Parvasya Patu Sarvada।Sarvanga Mein Sada Patu Skandamata Putraprada॥ Vanavanamritem Hum Phat Bija Samanvita।Uttarasya Tathagne Cha Varune Nairiteavatu॥ Indrani Bhairavi Chaivasitangi Cha Samharini।Sarvada Patu Mam Devi Chanyanyasu Hi Dikshu Vai॥ देवी स्कंदमाता आरती जय तेरी हो स्कन्द माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥तेरी जोत जलाता रहूं मैं। हरदम तुझे ध्याता रहूं मै॥कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥कही पहाड़ों पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥हर मन्दिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥इन्द्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खण्ड हाथ उठाए॥दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी॥ Maa Kushmanda: मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

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Skanda Mata

Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि के 5वें दिन करें मां स्कंदमाता का पूजन: विधि, मंत्र और आरती सहित सम्पूर्ण जानकारी

Skanda Mata Ki Puja Kese Kare: नवरात्रि का पावन पर्व, देवी दुर्गा की शक्ति और भक्ति का उत्सव है. नौ दिनों और दस रातों तक चलने वाले इस महापर्व में, प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशिष्ट स्वरूप की पूजा की जाती है. Skanda Mata Puja Vidhi पांचवां दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप, मां स्कंदमाता को समर्पित है. यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मां स्कंदमाता अपने भक्तों पर पुत्र के समान स्नेह लुटाती हैं. Skanda Mata Puja Vidhi: नवरात्रि के 5वें दिन करें मां स्कंदमाता का पूजन मां स्कंदमाता का स्वरूप:Form of Mother skandamata Skanda Mata मां स्कंदमाता, स्कंद कुमार भगवान कार्तिकेय की माता हैं. भगवान स्कंद बालरूप में उनकी गोद में विराजमान हैं. मां कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है. Skanda Mata मां का वाहन सिंह है. इन्हें गौरी, माहेश्वरी, पार्वती और उमा जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है. मां स्कंदमाता का महत्व और पूजा से लाभ:Importance and benefits of worshiping Mother Skandamata नवरात्रि के पांचवें दिन पंचमी तिथि पर Skanda Mata मां स्कंदमाता की उपासना विशेष रूप से की जाती है. मां की उपासना से कई अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं: संतान सुख की प्राप्ति: जिन व्यक्तियों को संतान की इच्छा होती है, वे Skanda Mata मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चन और मंत्र जप से निश्चित रूप से लाभ उठा सकते हैं. नकारात्मक शक्तियों का नाश: मां की उपासना से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं. बुद्धि का विकास: भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है. परम शांति और सुख: देवी के इस स्वरूप की आराधना से व्यक्ति की सभी कामनाएं पूर्ण होती हैं, मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है और परम शांति व सुख का अनुभव होता है. अलौकिक तेज की प्राप्ति: मां को विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है, और उनकी उपासना से अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है. स्कंदमाता पूजन विधि:Skandamata worship method मां स्कंदमाता की पूजा अत्यंत सरल और फलदायी है. यहाँ चरण-दर-चरण पूजन विधि दी गई है: 1. शुद्धिकरण: सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजन से पहले चौकी (बाजोट) पर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उसे गंगाजल या गोमूत्र से शुद्ध करें. 2. कलश स्थापना: चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर कलश स्थापित करें. 3. अन्य देवताओं की स्थापना: उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें. 4. संकल्प: इसके बाद व्रत और पूजन का संकल्प लें. 5. षोडशोपचार पूजा: वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा Skanda Mata स्कंदमाता सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें. इसमें निम्नलिखित क्रियाएं शामिल हैं: Skanda Mata आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा और मंत्र पुष्पांजलि. 6. भोग अर्पित करें: मां को मिष्ठान और पांच प्रकार के फलों का भोग लगाएं. विशेष रूप से, मां को केले का भोग अति प्रिय है और आप खीर का प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं. 7. ध्यान और आरती: मां स्कंदमाता का अधिक से अधिक ध्यान करें और अंत में मां की आरती अवश्य करें. 8. प्रसाद वितरण: पूजन संपन्न होने के बाद प्रसाद का वितरण करें. मां स्कंदमाता के शक्तिशाली मंत्र:Powerful mantras of Mother Skandamata मां की आराधना के लिए इन मंत्रों का जाप करें: मूल मंत्र: सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ सरल मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥ संतान प्राप्ति हेतु विशेष मंत्र: ‘ॐ स्कन्दमात्रै नम:।।’ (यह मंत्र संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत सरल और निश्चित लाभ देने वाला है). सार्वभौमिक मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। भोग और प्रसाद:Bhog and Prasad मां स्कंदमाता को केला अति प्रिय है. पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है. आप मां को खीर का प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं. शुभ रंग Skanda Mata मां स्कंदमाता को श्वेत रंग प्रिय है. मां की उपासना में श्वेत रंग के वस्त्रों का प्रयोग करना शुभ माना जाता है. पूजा के समय पीले रंग के वस्त्र धारण करना भी अत्यंत शुभ होता है. मां स्कंदमाता की आरती:Aarti of Maa Skandamata जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवा नाम तुम्हारा आता. सब के मन की जानन हारी, जग जननी सब की महतारी. तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हरदम तुम्हे ध्याता रहूं मैं. कई नामो से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा. कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरों में तेरा बसेरा. हर मंदिर में तेरे नजारे गुण गाये, तेरे भगत प्यारे भगति. अपनी मुझे दिला दो शक्ति, मेरी बिगड़ी बना दो. इन्दर आदी देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे. दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये, तुम ही खंडा हाथ उठाये दासो को सदा बचाने आई, चमन की आस पुजाने आई। Durga Panchami 2025 Start Date: दुर्गा पूजा 2025: कब से शुरू होगी यह महापर्व, जानें शुभ तिथियां और महत्व !

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Papankusha Ekadashi

Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन, पापों से मिलेगा छुटकारा

Papankusha Ekadashi 2025: पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी व्रत (Papankusha Ekadashi 2025) एकादशी व्रत को अधिक शुभ माना जाता है। व्रत (Papankusha Ekadashi 2025 Vrat Niyam) के दौरान चावल और अन्न का सेवन वर्जित है। इससे भगवान विष्णु जी नाराज हो सकते हैं। आइए जानते हैं एकादशी में किन चीजों का सेवन कर सकते हैं। सनातन धर्म में जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर किया जाता है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी (Ekadashi Vrat Kab Hai) के नाम से जाना जाता है। इस दिन जीवन में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है। व्रत के दौरान खानपान के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। माना जाता है कि नियम का पालन न करने से साधक शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रहता है और जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं पापंकुशा एकादशी व्रत (Papankusha Ekadashi Vrat Me kya khayen) में क्या खाएं और क्या न खाएं? Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन पापों से मिलेगा छुटकारा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन:Consume these things during Ekadashi fast पापांकुशा एकादशी व्रत में दही, दूध, फल का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा आलू साबूदाने की सब्जी, कुट्टू के आटे की रोटी, मिठाई और पंचामृत भी भोग थाली में शामिल कर सकते हैं। जरूर लगाएं भोग:Please enjoy एक बात का विशेष ध्यान रखें कि इन चीजों का सेवन करने से पहले प्रभु को भोग जरूर लगाएं। साथ ही तुलसी दल को शामिल करें, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते भूलकर भी न तोड़ें। मान्यता है कि एकादशी का धन की देवी मां लक्ष्मी व्रत करती हैं। ऐसे में तुलसी के पत्ते तोड़ने से उनका व्रत खंडित हो सकता है। इसलिए एकादशी से एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें। न करें इन चीजों का सेवन:Do not consume these things यदि आप पापांकुशा एकादशी व्रत में व्रत रख रहे हैं, तो खानपान का विशेष ध्यान रखें। व्रत के दौरान अन्न और चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मांस-मदिरा और तामसिक चीजों के सेवन से भी दूर रहना चाहिए। साथ ही भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस मंत्र का करें जप:Chant this mantra भोग लगाते समय निम्न मंत्र का जप करें। मान्यता है कि मंत्र के जप के बिना प्रभु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।

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Papankusha Ekadashi 2025

Papankusha Ekadashi 2025 Date And Time: कब मनाई जाएगी इस साल पापांकुशा एकादशी? नोट कर लें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी, जिसे पुण्य व्रत या शरीर एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में विशेष स्थान रखती है। यह एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन भक्त अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पापांकुशा एकादशी का व्रत आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। Papankusha Ekadashi 2025 Kab Hai: सनातन धर्म में आश्विन माह का विशेष महत्व है. यह महीना मां दुर्गे की आराधना का है. देवी मां दुर्गा व उनके नौ रूपों की विधि विधान से पूजा कर भक्त उनका आशीर्वाद पाता है. वहीं नवरात्रि और दशमी तिथि के बाद हर साल आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पापांकुशा एकादशी व्रत रखने का विधान है. Papankusha Ekadashi 2025 पापांकुशा एकादशी का व्रत का संकल्प करने से व्रती के सभी दुख दूर होते हैं और जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है. लक्ष्मी नारायण की विशेष कृपा पाने के लिए इस दिन भक्त पूरे विधि विधान से शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. पापांकुशा एकादशी 2025 (Papankusha Ekadashi 2025) Papankusha Ekadashi 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल एकादशी तिथि 02 अक्टूबर की शाम को 07:10 बजे मिनट पर शुरू हो रही है और 03 अक्टूबर को शाम 06:32 पर तिथि का समापन हो रहा है. इस तरह उदयातिथि में 03 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी व्रत रखा जाएगा. 3 अक्टूबर को ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाएगी. वहीं पापांकुशा एकादशी पारण शुभ मुहूर्त में सुबह 06:15 बजे से लेकर 08:37 के बीच किया जा सकेगा. पापांकुशा एकादशी 2025 पर महत्वपूर्ण समय Papankusha Ekadashi Important Time सूर्योदय 03 अक्टूबर, 2025 सुबह 6:23 बजे सूर्यास्त 3 अक्टूबर, 2025 शाम 6:08 बजे एकादशी तिथि प्रारंभ 2 अक्टूबर, 2025 शाम 7:11 बजे एकादशी तिथि समाप्त 03 अक्टूबर, 2025 शाम 6:33 बजे हरि वासरा अंतिम क्षण 04 अक्टूबर, 2025 12:12 पूर्वाह्न द्वादशी समाप्ति क्षण 04 अक्टूबर, 2025 शाम 5:09 बजे पारणा समय 4 अक्टूबर, सुबह 6:23 – 4 अक्टूबर, सुबह 8:44 पापांकुशा एकादशी का महत्व (Papankusha Ekadashi Ka Mahatav) पापांकुशा एकादशी व्रत कथा (Papankusha Ekadashi Vrat Katha) Papankusha Ekadashi 2025 प्राचीन काल में देवों और असुरों के बीच एक महान युद्ध हुआ था। इस युद्ध में देवता हारे और वे पृथ्वी पर आने लगे। असुरों ने देवताओं की स्त्री रूपिणी शक्ति को बंदी बना लिया। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और पपांकुशा एकादशी के दिन देवताओं की स्त्री रूपिणी शक्ति को मुक्त किया। व्रत के प्रभाव से देवता और असुर दोनों का कल्याण हुआ और पापों का नाश हुआ। Papankusha Ekadashi 2025 इस दिन की विशेषता यह है कि यह व्रत पापों को समाप्त करने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। पापांकुशा एकादशी व्रत विधि (Papankusha Ekadashi Vrat Vidhi) पापांकुशा एकादशी के लाभ (Papankusha Ekadashi Ke Labh) पापांकुशा एकादशी का संदेश (Papankusha Ekadashi 2025 Ka Sandesh) Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी हमें यह सिखाती है कि जीवन में पापों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है भगवान विष्णु की भक्ति और सच्ची श्रद्धा। इस व्रत से व्यक्ति अपने पापों को समाप्त करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। यह व्रत आत्मा की शुद्धि और जीवन की सही दिशा में चलने की प्रेरणा देता है Indira Ekadashi 2025 Date: इंदिरा एकादशी पितरों को मोक्ष और जीवन में सुख-समृद्धि दिलाने वाला पावन व्रत

Papankusha Ekadashi 2025 Date And Time: कब मनाई जाएगी इस साल पापांकुशा एकादशी? नोट कर लें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि Read More »