July 2025

Sawan Bael Patra: सावन में बेलपत्र चढ़ाने का महत्व और नियम

Sawan Bael Patra: भोलेनाथ की पूजा में बेलपत्र का महत्व हर अनुष्ठान में है क्योंकि इसके बिना शिवजी की पूजा पूरी नहीं होती। मान्यता है कि बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने से महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है जैसे कि बेलपत्र की तीनों पत्तियों पर चंदन लगाना और सूखे पत्ते नहीं चढ़ाना। Sawan Right Way Of Offering Bael Patra: सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय है. इस महीने में कई ऐसी चीजें हैं, जो भगवान शिव को जरूर अर्पण करनी चाहिए. मान्यता है कि इससे प्रभु बेहद खुश होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं जरूर पूरी करते हैं. इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि की भी बढ़ोतरी होती है. वहीं, सावन के महीने में बेलपत्र का भी खास महत्व होता है, क्योंकि बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है. बेलपत्र दूर करता है सारी परेशानियां:Belpatra removes all the troubles शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि अगर सावन के महीने में, विशेषकर सोमवार के दिन, एक भी शुद्ध और पवित्र बेलपत्र विधि-विधान के साथ Sawan Bael Patra भगवान शिव के शिवलिंग पर अर्पण कर दिया जाए, तो भक्त के जीवन में रोग, दोष, कष्ट, दुख और काल सब खत्म हो जाता है. लेकिन बेलपत्र चढ़ाने के भी कुछ खास नियम होते हैं. क्या हैं वे नियम? जानते हैं…… Sawan Bael Patra: बेलपत्र की तीनों पत्तियों पर लगाएं चंदन बेल पत्र की पत्तियां त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। यह भगवान शिव के त्रिशूल का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। यह त्रिगुण यानी सत्व, रजस और तमस का भी प्रतीक हैं। ये तीन अवस्थाओं वात, पित्त और कफ प्रकृति को भी दर्शाती हैं।  इसीलिए शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र हमेशा तीन पत्ती वाला होना चाहिए। टूटी हुई, कटी-फटी और खंडित बेलपत्र को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। पूर्ण और अक्षत बेलपत्र ही भगवान शिव को प्रिय है। इसे चढ़ाते समय तीनों पत्तियों पर चंदन जरूर लगाएं।  सूखे पत्ते न चढ़ाएं : Do not offer dry leaves हमेशा ताजा और स्वच्छ बेलपत्र ही भोलेनाथ को चढ़ाना चाहिए। सूखा या मुरझाया Sawan Bael Patra बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। यदि ताजा बेलपत्र नहीं मिले, तो शिवलिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्र को उठा लें। इसके बाद उसे धोकर फिर से शिव पूजन में प्रयोग कर सकते हैं।  दरअसल, विधान है कि बेलपत्र कभी निर्माल्य नहीं होता है। शास्त्रों के अनुसार, बेलपत्र को 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता है। बशर्ते वह सूखा न हो और मुरझा न गया हो।  क्या हैं बेलपत्र चढ़ाने के खास नियम ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि बेलपत्र चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ बहुत खुश होते हैं. लेकिन Sawan Bael Patra बेलपत्र नियमपूर्वक चढ़ाना चाहिए, जो इस प्रकार हैं. कटा-फटा न हो बेलपत्र बेलपत्र हमेशा साफ-सुथरा ही भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. कटा-फटा या मुरझाया हुआ बेलपत्र भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए. तीन दलों का हो भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर हमेशा तीन दलों वाला ही Sawan Bael Patra बेलपत्र चढ़ाना चाहिए. तीन दल वाला बेलपत्र त्रिदेव का प्रतीक हैं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश. वहीं, अगर पांच दलों वाला बेलपत्र मिल जाए तो वह बहुत शुभ होता है. बेलपत्र की डंडी जलहरी की तरफ रखें लोग जैसे-तैसे शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण कर देते हैं. इससे आपकी पूजा व्यर्थ हो सकती है. शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा नियमपूर्वक अर्पण करें, जैसे बेलपत्र की जो डंडी होती है, वह जलहरी की तरफ रहनी चाहिए और जो पत्ता होता है यानी चिकना भाग, वह शिवलिंग के मस्तक पर होना चाहिए. राम नाम लिखा होना चाहिए भगवान भोलेनाथ को राम नाम बेहद प्रिय है. अगर आप बेलपत्र पर राम नाम लिखकर शिवलिंग पर अर्पण करते हैं, तो दोगुना फल मिलता है और आपकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं. इन नियमों का ध्यान रखकर बेलपत्र चढ़ाने से भक्त की सारी समस्याएं खत्म होने की मान्यता है.

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Sawan Food: सावन व्रत में क्या खाएं, क्या न खाएं ? पूरी सूची देखें

Sawan Food: सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है. इस पूरे माह भोलेनाथ की भक्ति की जाती है. लेकिन सावन के महीने में कुछ चीजों को खाने की मनाही होती है. Sawan Somvar Vrat: सावन सोमवार व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है, खासकर खान-पान से जुड़ी बातों का। इस दिन कुछ चीजों का सेवन वर्जित माना गया है, जिनका पालन न करने से व्रत का फल अधूरा रह सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन सोमवार व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं… सावन का महीना भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे पावन अवसर माना जाता है। Sawan Food इस माह में भोलेनाथ के साथ-साथ माता पार्वती की उपासना की जाती है। विशेष रूप से सावन सोमवार का व्रत बेहद कल्याणकारी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। हालांकि, इस व्रत को करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। अगर इन नियमों का पालन न किया जाए, तो इससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। ऐसे में आइए जानते हैं सोमवार व्रत के दौरान किन चीजों का सेवन वर्जित माना गया है और किन चीजों का सेवन करना चाहिए। Sawan Food सावन सोमवार व्रत में क्या खाना चाहिए- (What should be eaten during the Sawan Monday fast) 1. सात्विक भोजन- Sawan Food सावन सोमवार व्रत के दौरान फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा जैसी चीजें खानी चाहिए. यह भगवान शिव को भी अर्पित की जाती हैं. इसी के साथ यह शरीर को एनर्जी भी देती है. 2. फल और मेवे-  ताजे फल जैसे केला, सेब, अंगूर और सूखे मेवे जैसे बादाम, अखरोट आदि व्रत में खाए जाते है.  4. बेलपत्र- शिव जी की पूजा में बेलपत्र को खासतौर पर चढ़ाया जाता है. आप इसे प्रसाद के तौर पर खा भी सकते हैं.  सावन सोमवार व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए- (What should not be eaten during the Sawan Monday fast) 1. प्याज-लहसुन (Onion Garlic) सावन के महीने में आपको प्याज और लहसुन खाने से परहेज करना चाहिए. यह तामसिक भोजन माने जाते हैं इसलिए व्रत के दौरान इन्हें नहीं खाया जाता है. इसी के साथ दही, छाछ, कढ़ी जैसी ठंडी चीजों के सेवन से भी परहेज करना चाहिए. 2. मांस-मछली और अंडा (Meat and Egg) व्रत और पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से परहेज करना चाहिए. पूरे एक महीने तक मांसाहारी भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए और शुद्ध और सात्विक भोजन और करना चाहिए. 3. नमक (Salt) Sawan Food सावन सोमवार व्रत में सादे नमक का उपयोग नहीं किया जाता है. केवल सेंधा नमक ही खाया जाता है क्योंकि इस नमक को ही शुद्ध माना जाता है. 4. शराब- (Alcohol) सावन के दिनों और सोमवार व्रत शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. इसका सेवन इन दिनों वर्जित माना जाता है.

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Masik Shivratri 2025: मासिक शिवरात्रि के दिन जरूर करें ये उपाय, बिना रुकावट पूरा होगा हर काम

Masik Shivratri 2025: मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक शिव पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। May Masik Shivratri 2025 Upay: हर माह आने वाली शिवरात्रि का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अति शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ अन्न, वस्त्र और अन्य जरूरतमंद चीजों का दान करते हैं। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने और विधिपूर्वक शिव पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। Masik Shivratri puja Mein Jarur kare ye kaam: पूजा में जरूर करें ये काम मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करें। इसके साथ ही इस भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का जाप 11 बार रुद्राक्ष की माला से करें। ऐसा करने से शिव जी कृपा आपके ऊपर बनी रहती है। नहीं सातएगी धन की कमी अगर आप धन संबंधी परेशानियां झेल रहे हैं, तो इसके लिए मासिक शिवरात्रि के दिन आपको शिवलिंग पर गन्ने का रस जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से आपको अपनी स्थिति में काफी लाभ देखने को मिल सकता है। Masik Shivratri साथ ही धन लाभ के योग भी बनने लगते हैं। नहीं पड़ेगा ग्रहों का अशुभ प्रभाव मासिक शिवरात्रि के दिन आप पूजा के दौरान शिवलिंग का शहद से अभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे जातक को अशुभ ग्रहों के प्रभाव में मुक्ति मिल सकती है। Masik Shivratri वहीं शहद का संबंध गुरु ग्रह से माना गया है, ऐसे में मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग का शहद से अभिषेक करने से कुंडली में देवगुरु बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है। शिव जी के मंत्र 1. ॐ नमः शिवाय 2. ॐ नमो भगवते रूद्राय 3. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात 4. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् 5. कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

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Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप, जीवन में आएगा सुख-शांति

Shiv Mantra: भोलेनाथ अपने अनुयायियों पर अपनी कृपा बरसाते हैं, जिससे वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं. महादेव को अत्यधिक दयालु माना जाता है, इसलिए वे केवल एक लोटा जल से ही संतुष्ट हो जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र में महादेव के कुछ अद्भुत मंत्रों का उल्लेख किया गया है. यदि इन मंत्रों का जाप नियमों के अनुसार किया जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. आइए, शिवजी के चमत्कारिक मंत्रों के बारे में जानते हैं. Shiva Mantra: शिव के 5 दिव्य मंत्रों का करें नियमित जाप होगी आरोग्य की प्राप्ति 1. ॐ नमः शिवाय Shiva Mantra: यह मंत्र जीतना सरल है उतना प्रभावशाली भी माना गया है। यदि कोई साधक रोजाना इस मंत्र का जाप करता है तो उसे आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है। दूर होगा अकाल मृत्यु का भय 2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ Shiva Mantra: यह शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र है। माना जाता है कि रोजाना इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति की अकाल मृत्यु का भय टाला जा सकता है। साथ ही व्यक्ति की आयु भी लंबी होती है और हर प्रकार के भय से भी मुक्ति मिलती है। इस मंत्र से होगी इच्छा पूरी 3. ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः यह शिव जी का रूद्र मंत्र है। माना जाता है कि प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है। आर्थिक स्थिति होगी मजबूत 4. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ यह शिव जी का बहुत ही प्रभावशाली मंत्र है। यदि कोई साधक रोजाना शिव जी का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करता है तो उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। भय होगा दूर 5. ऊं पषुप्ताय नमः यह भी शिव जी का एक प्रभावशाली मंत्र है। पूजा के दौरान रोजाना इस शिव मंत्र का जाप करने से साधक को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।

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What Not To Eat On Ekadashi: एकादशी व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? जान लें नियम नहीं तो हो जाएगा सब व्यर्थ

What Not To Eat On Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बड़ा महत्व है। शास्त्रों के अनुसार हर माह दो एकादशी आती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल कृष्ण पक्ष में। सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए। इन दिनों कुछ चीजों को सेवन निषेध माना गया है। आइए जानें… What Not To Eat On Ekadashi: एकादशी व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं एकादशी के दिन धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा करने से जातक के लाइफ में सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं आती है। इस व्रत के समय जातक को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए, जो बेहद अनिवार्य होते हैं। कहा जाता है कि यदि इन नियमों का पालन हो तो व्रत खंडित माना जाता है What Not To Eat On Ekadashi और जातक को लाभ की जगह हानि हो सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि एकादशी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? What cannot be eaten during Ekadashi : एकादशी के दौरान क्या नहीं खा सकते? What Not To Eat On Ekadashi: हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक, एकादशी के दिन जातक और उसके परिवार को चावल बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए। साथ ही व्रत के दौरान किसी प्रकार अन्न और सादा नमक से जातक को परेहज करना चाहिए। इसके अलावा, किसी भी परिस्थिति में जातक को तामसिक भोजन जैसे- प्याज, लहसुन और मसूर की दाल का सेवन भी नहीं करना चाहिए। What can you eat during Ekadashi :एकादशी के दौरान क्या खा सकते? जातक व्रत के दौरान संपूर्ण फल प्राप्ति के लिए नियमों के मुताबिक, शकरकंद, कुट्टू के आटे की रोटी, दूध, दही और फल खा सकते हैं। इसके अलावा, भगवान को भोग लगाया गया पंचामृत भी ग्रहण कर सकते हैं। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Kamika Ekadashi Vrat Katha: कामिका एकादशी व्रत कथा

Ekadashi Vrat Katha Kamika Ekadashi Vrat Katha: कुंतीपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन, आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी तथा चातुर्मास्य माहात्म्य मैंने भली प्रकार से सुना। अब कृपा करके श्रावण कृष्ण एकादशी का क्या नाम है, सो बताइए। श्रीकृष्ण भगवान कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! इस एकादशी की कथा एक समय स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद से कही थी, वही मैं तुमसे कहता हूँ। नारदजी ने ब्रह्माजी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है, उसका क्या नाम है? क्या विधि है और उसका माहात्म्य क्या है, सो कृपा करके कहिए। नारदजी के ये वचन सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- हे नारद! लोकों के हित के लिए तुमने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। श्रावण मास की कृष्ण एकादशी का नाम कामिका है। Ekadashi Vrat Katha उसके सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख, चक्र, गदाधारी विष्णु भगवान का पूजन होता है, जिनके नाम श्रीधर, हरि, विष्णु, माधव, मधुसूदन हैं। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। जो फल गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर स्नान से मिलता है, वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, समुद्र, वन सहित पृथ्वी दान करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी प्राप्त नहीं होता वह भगवान विष्णु के पूजन से मिलता है। जो मनुष्य श्रावण में भगवान का पूजन करते हैं, उनसे देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अत: पापों से डरने वाले मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्यमेव करना चाहिए। Ekadashi Vrat Katha पापरूपी कीचड़ में फँसे हुए और संसाररूपी समुद्र में डूबे मनुष्यों के लिए इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है। इससे बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। हे नारद! स्वयं भगवान ने यही कहा है कि कामिका व्रत से जीव कुयोनि को प्राप्त नहीं होता। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं, वे इस संसार के समस्त पापों से दूर रहते हैं। विष्णु भगवान रत्न, मोती, मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी दल से। Ekadashi Vrat Katha तुलसी दल पूजन का फल चार भार चाँदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है। हे नारद! मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूँ। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएँ नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है। कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का माहात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में अमृतपान करते हैं Ekadashi Vrat Katha तथा जो घी या तेल का दीपक जलाते हैं, वे सौ करोड़ दीपकों से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्माजी कहते हैं कि हे नारद! ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का माहात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।

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Kamika Ekadashi 2025 Daan: कामिका एकादशी पर इन चीजों का दान करेगा धन और सुख में वृद्धि

Kamika Ekadashi: एकादशी हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह दिन पूरी तरह से इस जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को (Kamika Ekadashi) कामिका एकादशी कहा जाता है। श्रावण मास में श्री हरि की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देने तथा भगवान नारायण की उपासना करने से उपासक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सावन महीने की पहली एकादशी यानी कामिका एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन साधक कठिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान के साथ पूजा करते है। वहीं, इस दिन दान और पुण्य का महत्व है। व्रत के साथ-साथ इस दिन (Kamika Ekadashi 2025 Importance) कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है, तो आइए उन वस्तुओं के बारे में जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। कामिका एकादशी पर जरूर करें ये विशेष दान (Kamika Ekadashi 2025 Daan List) दान के नियम Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का महत्व  कहा जाता है कि कामिका एकादशी के दिन व्रत रखने और दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देने से व्यक्ति सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। चातुर्मास में पड़ने वाली कामिका एकादशी का अपना अलग ही महत्व है। मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्रदान करती है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। 

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Sawan Somwar Vrat Katha In Hindi: इस कथा के बिना अधूरी है सावन सोमवार की पूजा, जरूर करें इसका पाठ

Sawan Somwar Vrat Katha: हिंदू धर्म की पवित्र परंपराओं में सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत केवल एक नियम नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मिक जुड़ाव की गहराई से जुड़ा एक दिव्य साधन है। यह व्रत न केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग है, बल्कि भगवान शिव के चरणों में समर्पण का प्रतीक भी है। सावन (Sawan Somwar Vrat Katha) का महीना बेहद पावन होता है। इस महीने के प्रत्येक सोमवार पर भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। साथ ही सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत रखा जाता है। इस व्रत की महिमा का वर्णन शास्त्रों में निहित है। भगवान शिव की पूजा से हर मनोकामना पूरी होती है। Sawan Somvar Vrat Katha in Hindi: सावन सोमवार Somwar Vrat Katha के व्रत में कथा का पाठ करने का महत्‍व श‍िव पुराण में बहुत खास माना गया है। मान्‍यता है कि जो लोग सावन सोमवार का व्रत करते हैं उनको विधि विधान से पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। भगवान शिव का सबसे पहले दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है और फिर विधि विधान से पूजा करने के बाद सावन सोमवार के व्रत की कथा का पाठ करने से आपका व्रत संपूर्ण माना जाता है और पूजा का शुभ फल प्राप्‍त होता है। तो पढ़ें सावन सोमवार की व्रत कथा विस्‍तार से। Sawan Somwar Vrat Katha: सावन सोमवार की व्रत कथा मृत्युलोक में भ्रमण करने की इच्‍छा करके एक समय श्री भूतनाथ भगवान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ मृत्युलोक में पधारे। भ्रमण करते-करते दोनों विदर्भ देशांतर्गत अमरावती नाम की अति रमणीक नगरी में पहुंचे। अमरावती नगरी स्‍वर्ग के सदृश सभी प्रकार के सुखों से परिपूर्ण थी। उसमें वहां के महाराज द्वारा बनवाया हुआ अति रमणीक शिवजी का मंदिर भी था। भगवान शंकर भगवती पार्वती के साथ इस मन्दिर में निवास करने लगे। Somwar Vrat Katha एक समय माता पार्वतीजी भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न देखकर बोली, हे महाराज आज तो हम दोनों चौंसर खेलेंगे। शिवजी ने प्राण प्रिया की बात को मान लिया और चौंसर खेलने लगे। उसी समय मन्दिर का पुजारी ब्राह्मण मन्दिर में पूजा करने आया। माता पार्वती ने पुजारी से प्रश्‍न किया पुजारी जी, बताओ इस बाजी में हम दोनों में से किसी जीत होगी? ब्राह्मण बिना विचारे जल्‍दी से बोल उठा कि महादेव जी की जीत होगी। थोड़ी देर में बाजी समाप्‍त हो गई और पार्वतीजी जीत हुई। Somwar Vrat Katha पार्वतीजी को बहुत गुस्सा आया और ब्राह्मण को झूठ बोलने के अपराध के कारण श्राप देने चलीं। भोलेनाथ ने पार्वती को बहुत समझाया लेकिन उन्होंने ब्राह्मण को कोढ़ी होने का शाप दे दिया। कुछ समय बाद पार्वती जी के श्रापवश पुजारी के शरीर में कोढ़ पैदा हो गया। वह बहुत अधिक दुखी रहने लगा। पूजारी को कष्ट भोगते हुए जब बहुत दिन गुजर गए तब एक दिन देवलोक की अप्‍सराएं शिवजी की पूजा करने के लिए उस मंदिर में पधारीं। Somwar Vrat Katha पुजारी के कोड़ के कष्ट को देखकर उन्हें बड़ी दया आई। उन्‍होंने उससे रोगी होने का कारण पूछा। पुजारी ने निसंकोच सारी बातें बता दीं। वे अप्‍सराएं बोलीं हे पुजारी, अब तुम अधिक दुःखी मत होना। सावन सोमवार Somwar Vrat Katha का व्रत भक्तिभाव से करो। पुजारी ने अप्‍सराओं से व्रत की विधि पूछी। अप्‍सराओं ने बताया, सोमवार को भक्ति भाव से व्रत करो। साफ वस्‍त्र पहनो। संध्या व उपासना के बाद आधा सेर गेहूं का आटा लो और उसके तीन भाग कर लो। घी, गुड़, दीप, नैवेद्य, पूंगीफल, बेलपत्र, जनेऊ जोड़ा, चंदन, अक्षत पुष्‍पादि से प्रदोषकाल में भगवान शिव की पूजा करो। उसके बाद तीन भागों में से एक भाग शिवजी को अर्पण करो, बाकी दो शिवजी का प्रसाद समझकर उपस्थित लोगों में बांट दो और आप भी प्रसाद समझकर खाओ। इस विधि से सोलह सोमवार व्रत रखो। Somwar Vrat Katha सत्रहवें सोमवार को पाच-सेर पवित्र गेहूं के आटे की बाटी बनाओ, उसमें घी और गुड़ मिलाकर चूरमा बनाओ। भगवान भोलेनाथ को भोग लगाकर उपस्थित भक्तों में बांट दो। इसके बाद कुट्‌म्ब सहित प्रसाद लो तो शिवजी की कृपा से उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। “ऐसा कहकर अप्सराएं स्वर्ग को चली गईं। ब्राहाण ने यथाविधि षोड्श सोमवार व्रत किया तथा भगवान शिव की कृपा से रोग से मुक्ति पाकर आनन्द से रहने लगा। कुछ दिन बाद शिवजी और पार्वतीजी उस मन्दिर में पुनः पधारे। ब्राह्मण को निरोग देखकर पार्वती जी ने ब्राह्मण से रोग से मुक्त होने का उपाय पूछा। ब्राह्मण ने सोलह सोमवार व्रत कथा सुनाई। पार्वतीजी बहुत प्रसन्‍न हुईं। ब्राह्मण से व्रत विधि पूछकर स्‍वयं भी व्रत करने के लिए तैयार हो गई। व्रत करने के बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई हुई और उनके रूठे बेटे स्वामी कार्तिकेय स्वय माता के आज्ञाकारी हुए। कार्तिकेय जी को अपना यह विचार परिवर्तन का रहस्य जानने की इच्छा हुई। वे माता से बोले हे माता। आपने ऐसा कौन सा उपाय किया जिससे मेरा मम आपकी ओर आकर्षित हो गया?” पार्वती जी ने वही षोड्श सोमवार व्रत कथा की कथा उनको सुना दी। कार्तिकय जी कहा इस व्रत को में भी करूंगा, क्योंकि मेरा प्रिय मित्र ब्राह्मण बहुत दुःखी दिल से परदेश गया है। मेरी इसमे मिलने की बहुत इच्छा है। कार्तिकेय जी ने भी इस व्रत को किया और उनका प्यारा मित्र मिल गया। मित्र ने इस आकस्मिक मिलन का भेद पूछा तो कार्तिकेय जी बोले हे मित्र। हमने तुम्हारे मिलने की इच्छा करके सोलह सोमवार का व्रत किया था। अब तो ब्राह्मण मित्र को अपने विवाह की बड़ी चिन्ता हुई। Somwar Vrat Katha उसने कार्तिकेय जी से व्रत की विधि पूछी और यथाविधि व्रत किया। व्रत के प्रभाव से जब वह किसी कार्य से विदेश गया तो वहां के राजा की लड़की का स्वयंवर था। राजा ने प्रण किया था कि जिस राजकुमार के गले में सब प्रकार से श्रृङ्गारित हथिनी माला डालेगी, मैं उसी के साथ अपनी प्यारी बेटी का विवाह कर दूंगा। शिवजी की कृपा से वह ब्राह्मण भी उस स्वयंवर को देखने की इच्छा से राज्यसभा में एक ओर जाकर बैठ गया। Somwar Vrat Katha नियत समय पर हथिनी आई और उसने जयमाला उस ब्राह्मण

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Vividh Dev Stotrani: श्री विविध देव स्तोत्राणि

श्री विविध देव स्तोत्राणि हिंदी पाठ: Vividh Dev Stotrani in Hindi ।। श्री गणपति स्तोत्रम् ।। Vividh Dev Stotrani जेतुं यस्त्रिपुरं हरेण हरिणा व्याजाद्वलिं बध्नता स्त्रष्टुं वारिभवोद्भवेन भुवनं शेषेण धर्तुं धराम् ।पार्वत्या महिषासुरप्रमथने सिद्धाधिपै: सिद्धये ध्यात: पञ्चशरेण विश्वजितये पायात्स नागानन: ।। 1 ।। विघ्नध्वान्तनिवारणैकतरणिर्विघ्नाटवीहव्यवाड् विघ्नव्यालकुलाभिमानगरुडो विघ्नेभपञ्चानन: ।विघ्नोत्तुंगगिरिप्रभेदनपविर्विघ्नाम्बुधेर्वाडवो विघ्नाघौघघनप्रचण्डपवनो विघ्नेश्वर: पातु न: ।। 2 ।। खर्वं स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगंडस्थलम् ।दन्ताघातविदारितारिरुधिरै: सिन्दूरशोभाकरं वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम् ।। 3 ।। Vividh Dev Stotrani गजाननाय महसे प्रत्यूहतिमिरच्छिदे ।अपारकरुणापूरतरंगितदृशे नम: ।। 4 ।। अगजाननपद्मार्कं गजाननमहर्निशम् ।अनेकदन्तं भक्तानामेकदंतमुपास्महे ।। 5 ।। श्वेतांग श्वेतवस्त्रं सितकुसुमगणै: पूजितं श्वेतगन्धै: क्षीराब्धौ रत्नदीपै: सुरनरतिलकं रत्नसिंहासनस्थम् ।दोर्भि: पाशांगकुशाब्जाभयवरमनसं चन्द्रमौलिं त्रिनेत्रं ध्यायेच्छान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम् ।। 6 ।। आवाहये तं गणराजदेवं रक्तोत्पलाभासमशेषवन्द्यम् ।विघ्नान्तकं विघ्नहरं गणेशं भजामि रौद्रं सहितं च सिद्धया ।। 7 ।। यं ब्रह्म वेदान्तविदो वदन्ति परं प्रधानं पुरुषं तथान्ये ।विश्वोद्गते: कारणमीश्वरं वा तस्मै नमो विघ्नविनाशनाय ।। 8 ।। विघ्नेश वीर्याणि विचित्रकाणि वंदीजनैर्मागधकै: स्मृतानि ।श्रुत्वा समुत्तिष्ठ गजानन त्वं ब्राह्मो जगन्मंगलकं कुरुष्व ।। 9 ।। गणेश हेरम्ब गजाननेति महोदर स्वानुभवप्रकाशिन् ।वरिष्ठ सिद्धिप्रिय बुद्धिनाथ वदन्त एवं त्यजत प्रभीती: ।। 10 ।। अनेकविघ्नान्तक वक्रतुंड स्वसंज्ञवासिंश्च चतुर्भुजेति ।कवीश देवान्तकनाशकारिन् वदन्त एवं त्यजत प्रभीती: ।। 11 ।। अनन्तचिद्रूपमयं गणेशं ह्राभेदभेदादिविहीनमाद्यम् ।ह्रदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 12 ।। विश्वादिभूतं ह्रदि योगिनां वै प्रत्यक्षरूपेण विभान्तमेकम् ।सदा निरलाम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 13 ।। Vividh Dev Stotrani यदीयवीर्येण समर्थभूता माया तया संरचितं च विश्वम् ।नागात्मकं ह्रात्मतया प्रतीतं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 14 ।। सर्वान्तरे संस्थितमेकगूढं यदाज्ञया सर्वमिदं विभाति ।अनन्तरूपं ह्रदि बोधकं वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 15 ।। यं योगिनी योगबलेन साध्यं कुर्वन्ति तं क: स्तवनेन नौति ।अत: प्रणामेन सुसिद्धिदोऽस्तु तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 16 ।। देवेन्द्रमौलिमन्दारमकरन्दकणारूणा: ।विघ्नान् हरन्तु हेरम्बचरणाम्बुजरेणव: ।। 17 ।। एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम् ।विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम् ।। 18 ।। यदक्षरं पदं भ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत् ।तत्सर्वं क्षम्यतां देव प्रसीद परमेश्वर ।। 19 ।। ।। इति श्री विविध देव स्तोत्राणि सम्पूर्णम् ।।

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Vishwavasu Gandharv Stotra: श्री विश्वावसु गन्धर्व स्तोत्र

Vishwavasu Gandharv Stotra: विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र (श्री विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र): विवाह के लिए ज्योतिष शास्त्र का एक नियम है, सप्तम भाव की दशा और नवम भाव की अंतर्दशा मंगलकारी होती है। गुरु गोचर या नवम भाव में केंद्र में हो और सप्तम भाव के स्वामी का लग्न हो। अतः यदि इनमें से कोई भी ग्रह शत्रु राशि, शत्रु राशि या नीच राशि में हो तो इन स्तोत्रों का जाप करें। Vishwavasu Gandharv Stotra यदि किसी व्यक्ति का विवाह किसी कारणवश नहीं हो पा रहा है Vishwavasu Gandharv Stotra तो उसे शीघ्र ही कुछ विशेष उपाय करने चाहिए। Vishwavasu Gandharv Stotra: विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र शास्त्रों के अनुसार, इन उपायों को करने से न केवल विवाह होता है, बल्कि सुंदर और सुयोग्य पत्नी भी प्राप्त होती है। यदि किसी अविवाहित युवक का किसी कारणवश विवाह नहीं हो पा रहा है, Vishwavasu Gandharv Stotra तो उसे प्रतिदिन प्रातः स्नानादि के पश्चात एकांत स्थान पर बैठकर मां दुर्गा का ध्यान करते हुए घी का दीपक जलाकर पंचपदी के विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र का 108 बार पाठ करना चाहिए। Vishwavasu Gandharv Stotra जगतजननी माता दुर्गा की कृपा से शीघ्र ही योग्य पत्नी की प्राप्ति होती है। गंधर्व-राज विश्वावसु (विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र Vishwavasu Gandharv Stotra) की उपासना मुख्यतः ‘वशीकरण’ एवं ‘विवाह’ के लिए की जाती है। स्त्रीत्व प्राप्ति एवं विवाह के लिए इनका प्रयोग अचूक है। शास्त्रों के अनुसार, गंधर्व या विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र विश्वावसु को जल की यह सात आहुति देने से, उपर्युक्त स्तोत्र का जप करने से एक माह के भीतर ही आभूषणों से सुसज्जित श्रेष्ठ पत्नी की प्राप्ति होती है। Vishwavasu Gandharv Stotra: यदि किसी अविवाहित व्यक्ति के विवाह में बार-बार बाधा आ रही हो, तो प्रतिदिन स्नान के पश्चात ‘विश्वावसु’ गंधर्व को जल की सात आहुति दें और निम्नलिखित स्तोत्र का मन ही मन 108 बार जप करें। ध्यान रहे कि इसे गुप्त रखें। इस क्रिया की जानकारी परिवार के अलावा किसी को न हो। Vishwavasu Gandharv Stotra संध्या के समय भी एक माला का मानसिक जप करना चाहिए। Vishwavasu Gandharv Stotra विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र के पाठ से एक माह में ही सुंदर, सुशील और योग्य कन्या से विवाह तय हो सकता है। विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र के लाभ: Vishwavasu Gandharv Stotra अविवाहित जातकों को शीघ्र वर की प्राप्ति हो सकती है।वर-वधू न केवल सुंदर होगा, बल्कि सुसंस्कारी भी होगा।वर-वधू जीवन में सौभाग्य लाएगा। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: Vishwavasu Gandharv Stotra: जिन व्यक्तियों का विवाह लंबे समय से नहीं हो रहा है या विवाह में बाधाएँ आ रही हैं, Vishwavasu Gandharv Stotra उन्हें विश्वावसु गंधर्व स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए। श्री विश्वावसु गन्धर्व स्तोत्र हिंदी पाठ:Vishwavasu Gandharv Stotra in Hindi Vishwavasu Gandharv Stotra: प्रणाम-मन्त्रः- ॐ श्रीगणेशाय नमः ।। ॐ श्रीगणेशाय नमः ।। ॐ श्रीगणेशाय नमः ।। ॐ श्रीसप्त-श्रृंग-निवासिन्यै नमः ।। ॐ श्रीसप्त-श्रृंग-निवासिन्यै नमः ।। ॐ श्रीसप्त-श्रृंग-निवासिन्यै नमः ।। ॐ श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय नमः ।। ॐ श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय नमः ।। ॐ श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय नमः ।। ।। पूर्व-पीठिका ।। ॐ नमस्कृत्य महा-देवं, सर्वज्ञं परमेश्वरम् ।। ।। श्री पार्वत्युवाच ।। भगवन् देव-देवेश, शंकर परमेश्वर ।कथ्यतां मे परं स्तोत्रं, कवचं कामिनां प्रियम् ।। जप-मात्रेण यद्वश्यं, कामिनी-कुल-भृत्यवत् ।कन्यादि-वश्यमाप्नोति, विवाहाभीष्ट-सिद्धिदम् ।। भग-दुःखैर्न बाध्येत, सर्वैश्वर्यमवाप्नुयात् ।। ।। श्रीईश्वरोवाच ।। अधुना श्रुणु देवशि ! कवचं सर्व-सिद्धिदं ।विश्वावसुश्च गन्धर्वो, भक्तानां भग-भाग्यदः ।। कवचं तस्य परमं, कन्यार्थिणां विवाहदं ।जपेद् वश्यं जगत् सर्वं, स्त्री-वश्यदं क्षणात् ।। भग-दुःखं न तं याति, भोगे रोग-भयं नहि ।लिंगोत्कृष्ट-बल-प्राप्तिर्वीर्य-वृद्धि-करं परम् ।। महदैश्वर्यमवाप्नोति, भग-भाग्यादि-सम्पदाम् ।नूतन-सुभगं भुक्तवा, विश्वावसु-प्रसादतः ।। विनियोगः सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे । ॐ अस्यं श्री विश्वावसु-गन्धर्व-राज-कवच-स्तोत्र-मन्त्रस्य विश्व-सम्मोहन वाम-देव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राज-देवता, ऐं क्लीं बीजं, क्लीं श्रीं शक्तिः, सौः हंसः ब्लूं ग्लौं कीलकं, श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राज-प्रसादात् भग-भाग्यादि-सिद्धि-पूर्वक-यथोक्त॒पल-प्राप्त्यर्थे जपे विनियोगः ।। ऋष्यादि-न्यास: विश्व-सम्मोहन वाम-देव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राज-देवतायै नमः हृदि, ऐं क्लीं बीजाय नमः गुह्ये, क्लीं श्रीं शक्तये नमः पादयो, सौः हंसः ब्लूं ग्लौं कीलकाय नमः नाभौ, श्रीविश्वावसु-गन्धर्व-राज-प्रसादात् भग-भाग्यादि-सिद्धि-पूर्वक-यथोक्त॒पल-प्राप्त्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।। षडङ्ग-न्यास-कर-न्यास-अंग-न्यास ॐ क्लीं ऐं क्लीं अंगुष्ठाभ्यां नमः हृदयाय नमःॐ क्लीं श्रीं गन्धर्व-राजाय क्लीं तर्जनीभ्यां नमः शिरसे स्वाहाॐ क्लीं कन्या-दान-रतोद्यमाय क्लीं मध्यमाभ्यां नमः शिखायै वषट्ॐ क्लीं धृत-कह्लार-मालाय क्लीं अनामिकाभ्यां नमः कवचाय हुम्ॐ क्लीं भक्तानां भग-भाग्यादि-वर-प्रदानाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः नेत्र-त्रयाय वौषट्ॐ क्लीं सौः हंसः ब्लूं ग्लौं क्लीं करतल-कर-पृष्ठाभ्यां नमः अस्त्राय फट् मन्त्रः- ॐ क्लीं विश्वावसु-गन्धर्व-राजाय नमः ॐ ऐं क्लीं सौः हंसः सोहं ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं सौः ब्लूं ग्लौं क्लीं विश्वावसु-गन्धर्व-राजाय कन्याभिः परिवारिताय कन्या-दान-रतोद्यमाय धृत-कह्लार-मालाय भक्तानां भग-भाग्यादि-वर-प्रदानाय सालंकारां सु-रुपां दिव्य-कन्या-रत्नं मे देहि-देहि, मद्-विवाहाभीष्टं कुरु-कुरु, सर्व-स्त्री वशमानय, मे लिंगोत्कृष्ट-बलं प्रदापय, मत्स्तोकं विवर्धय-विवर्धय, भग-लिंग-रोगान् अपहर, मे भग-भाग्यादि-महदैश्वर्यं देहि-देहि, प्रसन्नो मे वरदो भव, ऐं क्लीं सौः हंसः सोहं ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं सौं ब्लूं ग्लौं क्लीं नमः स्वाहा ।। (200 अक्षर, 12 बार जपें) गायत्री मन्त्रः- ॐ क्लीं गन्धर्व-राजाय विद्महे कन्याभिः परिवारिताय धीमहि तन्नो विश्वावसु प्रचोदयात् क्लीं ।। (10 बार जपें) ध्यान:- क्लीं कन्याभिः परिवारितं, सु-विलसत् कह्लार-माला-धृतन्,स्तुष्टयाभरण-विभूषितं, सु-नयनं कन्या-प्रदानोद्यमम् । भक्तानन्द-करं सुरेश्वर-प्रियं मुथुनासने संस्थितम्,स्रातुं मे मदनारविन्द-सुमदं विश्वावसुं मे गुरुम् क्लीं ।। ।। कवच मूल पाठ ।। क्लीं कन्याभिः परिवारितं, सु-विलसत् माला-धृतन्-स्तुष्टयाभरण-विभूषितं, सु-नयनं कन्या-प्रदानोद्यमम् । भक्तानन्द-करं सुरेश्वर-प्रियं मिथुनासने संस्थितं,त्रातुं मे मदनारविन्द-सुमदं विश्वावसुं मे गुरुम् क्लीं ।। 1 ।। क्लीं विश्वावसु शिरः पातु, ललाटे कन्यकाऽधिपः ।नेत्रौ मे खेचरो रक्षेद्, मुखे विद्या-धरं न्यसेत् क्लीं ।। 2 ।। क्लीं नासिकां मे सुगन्धांगो, कपोलौ कामिनी-प्रियः ।हनुं हंसाननः पातु, कटौ सिंह-कटि-प्रियः क्लीं ।। 3 ।। क्लीं स्कन्धौ महा-बलो रक्षेद्, बाहू मे पद्मिनी-प्रियः ।करौ कामाग्रजो रक्षेत्, कराग्रे कुच-मर्दनः क्लीं ।। 4 ।। क्लीं हृदि कामेश्वरो रक्षेत्, स्तनौ सर्व-स्त्री-काम-जित् ।कुक्षौ द्वौ रक्षेद् गन्धर्व, ओष्ठाग्रे मघवार्चितः क्लीं ।। 5 ।। क्लीं अमृताहार-सन्तुष्टो, उदरं मे नुदं न्यसेत् ।नाभिं मे सततं पातु, रम्भाद्यप्सरसः प्रियः क्लीं ।। 6 ।। क्लीं कटिं काम-प्रियो रक्षेद्, गुदं मे गन्धर्व-नायकः ।लिंग-मूले महा-लिंगी, लिंगाग्रे भग-भाग्य-वान् क्लीं ।। 7 ।। क्लीं रेतः रेताचलः पातु, लिंगोत्कृष्ट-बल-प्रदः ।दीर्घ-लिंगी च मे लिंगं, भोग-काले विवर्धय क्लीं ।। 8 ।। क्लीं लिंग-मध्ये च मे पातु, स्थूल-लिंगी च वीर्यवान् ।सदोत्तिष्ठञ्च मे लिंगो, भग-लिंगार्चन-प्रियः क्लीं ।। 9 ।। क्लीं वृषणं सततं पातु, भगास्ये वृषण-स्थितः ।वृषणे मे बलं रक्षेद्, बाला-जंघाधः स्थितः क्लीं ।। 10 ।। क्लीं जंघ-मध्ये च मे पातु, रम्भादि-जघन-स्थितः ।जानू मे रक्ष कन्दर्पो, कन्याभिः परिवारितः क्लीं ।। 11 ।। क्लीं जानू-मध्ये च मे रक्षेन्नारी-जानु-शिरः-स्थितः ।पादौ मे शिविकारुढ़ः, कन्यकादि-प्रपूजितः क्लीं ।। 12 ।। क्लीं आपाद-मस्तकं पातु, धृत-कह्लार-मालिका ।भार्यां मे सततं पातु, सर्व-स्त्रीणां सु-भोगदः क्लीं ।। 13 ।। क्लीं पुत्रान् कामेश्वरो पातु, कन्याः

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Sawan upay: सावन में कहां जलाएं दीया? जानिए 5 शुभ स्थान और उनका महत्व

Sawan upay: सावन के दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक के जीवन में मंगल का आगमन होता है। साथ ही घर में सुख समृद्धि एवं खुशहाली होती है। सावन महीने में दान करने से व्यक्ति को जीवन में अक्षय फल मिलता है। सावन सोमवार पर दो राशि ( Sawan upay ) के जातकों को लाभ मिलने वाला है। Sawan upay: वैदिक पंचांग के अनुसार, 14 जुलाई को सावन माह का पहला सोमवार है। सावन सोमवार के दिन देवों के देव महादेव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस शुभ अवसर पर साधक गंगा स्नान कर देवों के देव महादेव का गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं। भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में आने वाली बलाएं भी टल जाती हैं। Sawan mah me shiv ji ko khush karne ke upay : श्रावण मास जिसे “सावन” भी कहा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का पांचवा माह होता है. यह मास धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. आपको बता दें कि श्रावण मास भगवान शिव Sawan upay का प्रिय माह है. इस महीने में विशेष रूप से सोमवार का व्रत रखकर शिवजी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है सावन माह में भोलेनाथ की आराधना करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस माह में आप पूजा पाठ के अलावा कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है… कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न: Sawan upay सावन के पवित्र महीने में रोजाना सुबह और प्रदोष काल में शिवलिंग के पास दीपक जलाने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं जो आपको शांति प्रदान करता है. आप इस माह में तुलसी और शमी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं तो घर में सकारात्मकता आती है. इससे दुख-दरिद्र दूर होता है. इस माह में पीपल के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसे देव वृक्ष कहा गया है. मान्यता है इस पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश निवास करते हैं. Sawan upay आप प्रदोष काल में पीपल के वृक्ष के नीचे दीया जलाते हैं तो त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.  सावन माह में घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में लक्ष्मी जी का वास होता है. इसके अलावा सावन में स्नान के बाद नाग देवता का ध्यान करते हुए सुनसान स्थान में और घर के बाहर एक दीपक जरूर जलाएं. सावन के महीने में रोजाना पूजा घर में एक दीपक उत्तर मुंह करके भगवान शिव को अर्पित करने से कैलाश पर्वत पर विराजमान भगवान शिव का ध्यान करें. 

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Fast Rules Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं ?

Fast Rules Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी का व्रत बहुत ही खास माना जाता है। एकादशी व्रत हर महीने में दो बार आता है। इस बार यह व्रत 21 जुलाई 2025 को रखा जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन (Kamika Ekadashi 2025) उपवास करने के साथ भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। Fast Rules Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। Fast Rules Kamika Ekadashi: कामिका एकादशी का व्रत हर साल सावन महीने में एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21, जुलाई 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का व्रत विष्णु जी को बहुत ज्यादा प्रिय है, तो चलिए कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2025 2025 Fast Rules) के नियम को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं। Fast Rules Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं ? कामिका एकादशी में क्या खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Khayein?) Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी पर जो साधक उपवास रख रहे हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही व्रती भगवान विष्णु की पूजा के बाद ही कुछ सेवन करें। वहीं, भोग को तैयार करते इसके समय सफाई का अच्छी तरह से ध्यान रखें। कामिका एकादशी में क्या न खाएं? (Kamika Ekadashi 2025 Me Kya Nahin Khayein?) अगर आप कामिका एकादशी पर व्रत कर रहे हैं, तो अपने खाने का पूरा ध्यान दें, क्योंकि यह व्रत को सफल और असफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है। बता दें, व्रती को एकादशी व्रत के दिन भोजन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा इस तिथि पर तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही इस व्रत (Kamika Ekadashi 2025 Significance) पर चावल और नमक का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए। ऐसे में अगर आप इस व्रत का पालन कर रहे हैं, तो इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखें। भोग चढ़ाने का मंत्र (Kamika Ekadashi 2025 Bhog Mantra) कामिका एकादशी Fast Rules Kamika Ekadashi पर नारायण को भोग लगाते समय इस मंत्र ”त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।” का भावपूर्ण जप करें। ऐसा करने से भगवान प्रसाद स्वीकार कर लेते हैं। इसके साथ ही मनचाहा फल प्रदान करते हैं।

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