July 2025

Lord Shiva Mantra: महादेव के इस महामंत्र को जपते ही कटते हैं सारे कष्ट, पूरी होती है हर मनोकामना

Lord Shiva Mantra: सनातन परंपरा में भगवान शिव (Lord Shiva) को कल्याण का देवता माना गया है, जिनकी साधना-आराधना से साधक सुख-संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. शिव की पूजा में जप-तप और व्रत का बहुत महत्व है, ऐसे में देवों के देव महादेव की कृपा बरसाने वाला महामंत्र जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. हिंदू (Hindu) धर्म में किसी भी देवी-देवता की कृपा पाने के लिए तमाम तरह की पूजा प​द्धति में मंत्र जप को अत्यंत ही उत्तम उपाय बताया गया है. मान्यता है कि मंत्रों (Mantra) में बहुत शक्ति होती है, जिसे श्रद्धा और विश्वास के साथ जपने साधक के जीवन से जुड़ी सभी दु:ख-दर्द और दुर्भाग्य दूर होता है और सुख-संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा में भी मंत्रों का बहुत महत्व है. आइए भगवान शिव से जुड़े पंचाक्षरी से लेकर महामृत्युंजय (Mahamritunjay Mantra) मंत्र आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसे जपते ही जीवन में चमत्कारिक बदलाव आता है और साधक की बड़ी से बड़ी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होती है. सोमवार को करें शिव के शक्तिशाली मंत्रों का जाप: Chant powerful mantras of Lord Shiva on Monday सोमवार के दिन भोलेनाथ की पूजा की जाती है. भगवान शिव की आराधना के लिए यह दिन सर्वोत्तम होता है. कहा जाता है कि भोलेनाथ इतने भोले हैं कि बहुत सरल उपायों से भी प्रसन्न हो जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार सोमवार के दिन पूजा अर्चना करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है. साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. सोमवार के दिन कुछ मंत्रों के जाप से भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं. आइए जानते हैं शिव के इन चमत्कारी मंत्रों के बारे में. रोग-शोक दूर करने वाला शिव मंत्र: Shiva mantra that removes diseases and sorrows मान्यता है कि तंत्र-मंत्र-यंत्र और ज्योतिष का उद्गम भगवान शिव के मुखारविंद से हुआ है. ऐसे में जीवन से जुड़े मानसिक, शारीरिक या आर्थिक कष्ट आदि को दूर करने के लिए भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और उनके महामंत्र यानि महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए. महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए. मंत्र जप करते समय आपकी माला किसी को न दिखाई दे, इसके लिए उसे गोमुखी में रखकर इस पावन मंत्र का जप करें. ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।। रोजी-रोजगार के लिए शिव मंत्र: Shiva mantra for livelihood यदि आप रोजी-रोजगार की कामना से भगवान शिव की पूजा कर रहे हैं और आप चाहते हैं कि आपकी शीघ्र ही आर्थिक उन्नति हो तो आप नीचे दिए गए मंत्र को कम से कम एक माला जप प्रतिदिन करें. विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे। श्रेय:प्राप्तिनिमित्ताय नम: सोमाद्र्धधारिणे।। यदि आपको शिव के किसी मंत्र को पढ़ने में दिक्कत आती है तो आप उनके अत्यंत ही सरल और पावन पंचाक्षरी मंत्र का जाप कर सकते हैं. मान्यता है कि शिव के इस मंत्र का जप करने से बड़ी से बड़ी समस्या पलक झपकते ही दूर हो जाती है और सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है. ॐ नम: शिवाय।। सभी बाधाओं से बचाने वाला शिव मंत्र : Shiva Mantra to protect from all obstacles यदि आपको हर किसी काम में अक्सर बाधाओं का सामना करना पड़ता है या फिर दूसरों के द्वारा करवाए जाने वाले टोने-टोटके का डर बना रहता है तो आप इन सभी चीजों से बचने के लिए रुद्राष्टकम् के इस मंत्र का प्रतिदिन श्रद्धा और विश्वास के साथ जाप करें. प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं। त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्।। सर्वोच्च पद दिलाने वाला शिव मंत्र यदि आप अपने जीवन में किसी बड़े पद या लाभ की प्राप्ति की कामना रखते हैं तो आपके लिए नीचे दिया गया शिव मंत्र किसी वरदान से कम नहीं है. ॐ देवाधिदेव देवेश सर्वप्राणभूतां वर। प्राणिनामपि नाथस्त्वं मृत्युंजय नमोस्तुते।। 12 राशियों के अनुसार शिव मंत्र मेष – ॐ नम: शिवाय।। वृष – ॐ नागेश्वराय नमः।। मिथुन – ॐ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नम:।। कर्क – ॐ चंद्रमौलेश्वर नम:।। सिंह – ॐ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नम:।। कन्या – ॐ नमो शिवाय कालं ॐ नम:।। वृश्चिक – ॐ हौम ॐ जूँ स:।। धनु – ॐ नमो शिवाय गुरु देवाय नम:।। मकर – ॐ हौम ॐ जूँ स:।। कुंभ – ॐ हौम ॐ जूँ स:।। मीन – ॐ नमो शिवाय गुरु देवाय नम:।। शिव नमस्कार मंत्र:Shiva Namaskar Mantra नम: श‍िव जी को प्रसन्‍न करना है तो इस मंत्र का जाप पूजन से पहले करें.शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।। पंचाक्षरी मंत्र: Panchakshari Mantra इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से सभी संकटों तथा कष्टों से मुक्ति मिलती है ॐ नम: शिवाय। श‍िव नामावली मंत्र: Shiva Namavali Mantra सोमवार को पूजा करते समय नामावली मंत्रों का जाप करना अधिक फलदायी माना जाता है.।। श्री शिवाय नम:।।।। श्री शंकराय नम:।।।। श्री महेश्वराय नम:।।।। श्री सांबसदाशिवाय नम:।।।। श्री रुद्राय नम:।।।। ओम पार्वतीपतये नम:।।।। ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।। महामृत्युंजय मंत्र: Mahamrityunjaya Mantra इस मंत्र का जाप नियमित रूप से करने से रोग, दोष तथा सभी सकंट समाप्त हो जाते हैं.ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ शिव गायत्री मंत्र: Shiv Gayatri Mantra गायत्री मंत्र का जाप करने से पितृ दोष, कालसर्प दोष, राहु केतु तथा शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है.।। ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात ।। लघु महामृत्युंजय मंत्र जिन लोगों के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना कठिन होता, उन्हें लघु महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए इससे असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं.ॐ हौं जूं सः

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Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date: उज्जैन में महाकाल की शाही सवारियों की तैयारी शुरू, कब-कब निकलेगी राजसी सवारी..

Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date: उज्जैन में बाबा महाकाल के शाही सवारी की तैयारियां शुरू हो गईं हैं. इस बार सावन-भाद्रपद माह में बाबा महाकाल की कुल 6 राजसी सवारियां निकाली जाएंगी. उज्जैन, श्रावण और भाद्रपद माह में बाबा श्री महाकालेश्वर की सवारी के भव्य आयोजन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. शुक्रवार को प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित बैठक में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने निर्देश दिए कि पूर्व वर्षों के अनुभवों के आधार पर इस वर्ष व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर एवं सुव्यवस्थित बनाया जाए. Mahakaleshwar sawari ujjain 2025 : इस बार 11 जुलाई 2025, दिन शुक्रवार से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। सावन मास का पहला सोमवार 14 जुलाई को रहेगा और इसी दिन महाकाल बाबा की पहली सवारी निकलने वाली है। सावन में उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की शाही सवारी 14 जुलाई से 18 अगस्त तक चलेगी। महाकालेश्वर भगवान Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date की सवारी निकलने के पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे।  Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date:महाकाल की शाही सवारी का मार्ग Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date:भगवान महाकाल की सवारी को सबसे पहले मंदिर के द्वार पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया जाएगा। इसके बाद सवारी आरंभ होगी। सवारी अपने पारंपरिक मार्ग यानी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्शी बाजार और कहारवाड़ी से होते हुए रामघाट पहुंचेगी। रामघाट पर, भगवान महाकाल को शिप्रा नदी के पवित्र जल से स्नान कराया जाएगा और पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद, सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस आएगी। बैठक में बताया गया कि श्रावण मास में 4 और भाद्रपद मास में 2 सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी निकाली जाएगी. अंतिम षष्ठम सवारी राजसी (शाही) स्वरूप में 18 अगस्त 2025 को निकलेगी. शाही सवारी का इतिहास:history of royal riding Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date:गौरतलब है श्रावण-भाद्रपद माह में हर सोमवार को निकलने वाली शाही सवारी का विशेष महत्व है. सावन सोमवार को बाबा महाकाले विशेष रूप के दर्शन तो होते ही हैं. साथ में सावन के हर सोमवार को महाकाल की सवारी भी निकाली जाती है, जिसमें बाबा महाकाल को विभिन्न वाहनों पर सजाकर नगर भ्रमण पर ले जाया जाता है. बाबा महाकाल की शाही सवारी दिव्य और अलौकिक होती है. बाबा महाकाल की शाही सवारी का इतिहास बहुत पुराना है. जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है. ग्यारहवीं शताब्दी के राजा भोज ने इस परंपरा को बड़े रूप में करना शुरू किया. कहा जाता है कि इस शाही सवारी में राजा भोज ने नए कलाकारों और संगीतकारों को शामिल किया, मुगल सम्राट अकबर और जहांगीर भी इस जुलूस में शामिल हुए थे, Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date सिंधिया वंश के राजाओं ने इस जुलूस को और अधिक भव्य बनाया उन्होंने जुलूस में कई नए रथ और हाथी घोड़ों को भी शामिल किया. कावड़ यात्रियों के लिए व्यवस्था:Arrangements for Kavad Yatris Mahakal Sawari Ujjain 2025 Date:कावड़ यात्रियों को पूर्व सूचना दिए जाने पर शनिवार, रविवार और सोमवार को छोड़कर द्वार नंबर 04 से प्रवेश देकर विश्रामधाम, रेम्प, सभा मंडपम में जल पात्र के माध्यम से बाबा महाकाल को जल अर्पण करने की व्यवस्था की गई है। द्वार नंबर 01 के रास्ते से भी फेसेलिटी सेंटर 01, टनल के रास्ते, मंदिर परिसर, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम से जल अर्पण कर सकते हैं। बिना किसी पूर्व सूचना के आने वाले कावड़ यात्री की व्यवस्था सामान्य दर्शन की तरह रहेगी। उक्त कावड़ यात्री कार्तिक मंडपम में लगे जल पात्र में जल अर्पण करेंगे।

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Shiv ki puja ke Niyam: सावन में शिवलिंग की पूजा कैसे करें? जान लें सही विधि, नियम और पूजा सामग्री

Shiv ki puja ke Niyam: सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शिव (Lord Shiv) की पूजा और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन भगवान महादेव की सच्चे मन से पूजा और व्रत करने से साधक को बिजनेस में सफलता मिलती है और धन का लाभ मिलता है। Sawan Mein Shivling Puja Kaise Kare: सावन का महीना देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए सबसे खास होता है. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक सावन का महीना साल का पांचवां महीना होता है. धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार, यह महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना गया है. सावन के महीने में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और जलाभिषेक करने का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में माता पार्वती ने कठोर तपस्या करते हुए भगवान शिव को पति के रूप में पाया था.  Lord Shiv Puja Vidhi: Shiv ki puja ke Niyam सोमवार का दिन भगवान शिव को प्रिय है। यही वजह है कि इस दिन भगवन भोलेनाथ की पूजा और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, Shiv ki puja ke Niyam सोमवार के दिन भगवान महादेव की सच्चे मन से पूजा-व्रत करने से साधक को बिजनेस में सफलता मिलती है और धन का लाभ मिलता है। Shiv ki puja ke Niyam ऐसा माना जाता है कि अगर भगवान शिव की पूजा विधिपूर्वक और अंत में आरती की जाए, तो ईश्वर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा साधक पर सदैव बनी रहती है। आइए जानते हैं कि महादेव की पूजा किस तरह करना फलदायी होता है। Shiv ki puja ke Niyam:ऐसे करें पूजा सावन में शिवलिंग पूजा का महत्व (Sawan shiv puja significance) हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन को एक बेहद पूजनीय और पावन महीना माना जाता है जो विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है. इस शुभ महीने के दौरान भक्त समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास का आशीर्वाद पाने के लिए विभिन्न अनुष्ठान करते हैं. सावन में किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों में से एक है शिवलिंग की पूजा. धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा का विशेष लाभ मिलते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. शिव पुराण में सावन के दौरान शिवलिंग की पूजा का महत्व माना गया है क्योंकि सावन हिंदू चंद्र कैलेंडर का पांचवां महीना होता है. ऐसा माना जाता है कि इस महीने के दौरान, ब्रह्मांड शिव में दिव्य ऊर्जा भर जाती है, Shiv ki puja ke Niyam जिससे यह शिवलिंग की पूजा के लिए आदर्श समय बताया गया है. सावन चातुर्मास के दौरान पड़ता है और इस दौरान जगत पालनहार भगवान विष्णु सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव को सौंप देते हैं. इसी वजह से जो भी भक्त सावन में शिवलिंग की पूजा करता है, उसके जीवन की हर परेशानी दूर हो जाती है. घर में कौन से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए? Which Shivalinga should be worshiped at home? सावन में घर में शिवलिंग की पूजा करें तो आपको घर में कौन सा शिवलिंग रखना चाहिए यह भी बेहद महत्वपूर्ण होता है. ज्योतिष के अनुसार, घर में पारद शिवलिंग रखना सबसे शुभ माना गया है. इसके अलावा आप स्फटिक का शिवलिंग भी घर में रख सकते हैं. अगर आप नर्मदा नदी के शिवलिंग की पूजा करते हैं तो यह सबसे ज्यादा शुभ होता है. Shiv ki puja ke Niyam शिवलिंग भगवान शंकर के निराकार रूप का प्रतिनिधित्व करता है और उनके अनंत स्वरूप का प्रतीक भी माना गया है, इसलिए कुछ विशेष प्रकार के शिवलिंग की ही पूजा घर में करने की सलाह दी जाती है. सावन शिवलिंग पूजा सामग्री (Sawan Shivling puja samagri) अगर आप घर में शिवलिंग की पूजा या अभिषेक करने करने जा रहे हैं, तो आपको कुछ खास सामग्रियों की जरूरत होती है. आइए इनके बारे में जानें – बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, बिल्व पत्र, चंदन का लेप, आक के फूल, सफेद फूल, कमल, मौसमी फल, शहद, शक्कर, चीनी, गंगाजल, गाय का दूध, अगरबत्ती, कपूर, घी का दीपक, धूप, दीप, गंध, नैवेद्य, प्रसाद के लिए मिठाई, आचमन के लिए जल का पात्र. सावन में शिवलिंग की पूजा विधि (Sawan Shivling Puja vidhi) सावन में शिव पूजा के नियम (Sawan shivling puja niyam) 1. इन चीजों का करें त्याग- Shiv ki puja ke Niyam सावन के शुरू होते ही तामसिक चीजों जैसे मांस, शराब, नशीले पदार्थ, लहसुन, प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. सावन में पूरे महीने सात्विक भोजन करना चाहिए. पूजा से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए. 2. शिवलिंग पर ये चीजें न चढ़ाएं- महादेव की पूजा में तुलसी के पत्ते, हल्दी, केतकी का फूल, सिंदूर, शंख, नारियल आदि चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ये सभी चीजें शिव पूजा में वर्जित मानी गई हैं. 3. इन दिनों पर व्रत रखना है शुभ- Shiv ki puja ke Niyam सावन के सोमवार, प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए. ये तीनों ही दिन शिव जी की कृपा पाने के लिए सबसे विशेष माने गए हैं. 4. शिव जी मंत्रों का जाप करें- Shiv ki puja ke Niyam सावन में सामान्य पूजा के दौरान आप ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं. आप शिव चालीसा पढ़कर भी भगवान शिव की आरती कर सकते हैं. आरती करने से पूजा की कमियां दूर हो जाती हैं. 5. शिवलिंग के आकार का रखें ध्यान- Shiv ki puja ke Niyam ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर में स्थापित किए जाने वाले शिवलिंग का आकार हमेशा छोटा ही होना चाहिए. घर में अंगूठे के आकार का शिवलिंग स्थापित करना सबसे उत्तम है. इसके अलावा शिवलिंग अकेले नहीं रखना चाहिए. उसके साथ में नंदी या शिव परिवार की फोटो जरूर रखें. 6. जलधारा युक्त शिवलिंग- Shiv ki puja ke Niyam शास्त्रों के मुताबिक, शिवलिंग से हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. उस ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने के लिए ही शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है. शिवलिंग की ऊर्जा को शांत रखने के लिए जलधारा होना जरूरी है. 7. इस दिशा में रखें शिवलिंग

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Three Chariots of Puri Jagannath Rath Yatra: पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ

Jagannath Rath Yatra: आज से पूरे देश में जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra) शुरू हो गई है, जो 8 जुलाई तक चलनी है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ माह से शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर आरंभ होती है। इसका आयोजन ओडिशा (Odisha) के पुरी (Puri) में खास तौर पर बड़े ही उत्सव के साथ मनाया जाता है, इसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। बता दें कि रथ यात्रा के दौरान 3 रथ (Three Chariots) निकाले जाते हैं, जिसमें से 2 रथों पर उनके भाई-बहन (Brother-Sister) सवार रहते हैं। Jagannath Rath Yatra रथ यात्रा शुरू होने से पहले तीनों रथों की पूजा की जाती है। पुरी के राजा सोने की झाड़ू से मंडप और रास्ते की सफाई करते हैं। रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ Jagannath Rath Yatra, बलदेव और सुभद्रा का वार्षिक रथ उत्सव है। Jagannath Rath Yatra वे तीन अलग-अलग रथों पर यात्रा करते हैं और लाखों लोग रथ खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं। हर साल नए रथ Jagannath Rath Yatra बनाए जाते हैं और निर्माण अक्षय तृतीया से शुरू होता है। रथ बनाने में 200 कारीगरों को 2 महीने लगते हैं।रथ यात्रा में रथों का डिज़ाइन और आयाम कभी नहीं बदलते। रथ बनाने के लिए 100 से ज़्यादा बढ़ई 1000 से ज़्यादा लकड़ी के लट्ठों पर काम करते हैं। रथों के लिए छतरियाँ 1200 मीटर कपड़े से बनी होती हैं। छतरियाँ बनाने के लिए 15 दर्जी की टीम काम करती है। रथ खींचने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रस्सियाँ नारियल के रेशे से बनी होती हैं और इनका व्यास 8 इंच मोटा होता है।शास्त्र कहते हैं, Jagannath Rath Yatra रथे च वामनं दृष्ट्वा पुनर जन्म न विद्यते अर्थार्थ जो रथ पर जगन्नाथ देवताओं के दर्शन करता है, उसका कोई पुनर्जन्म नहीं होता है। नंदिघोष – Jagannath Rath Yatra भगवान जगन्नाथ का रथ पहियों की संख्या – 16 लकड़ी के टुकड़ों की कुल संख्या – 832ऊंचाई – 13.5 मी.कपड़े लपेटने का रंग – लाल, पीला द्वारा संरक्षित – गरुड़ सारथियों के नाम – दारुकाध्वज – त्रैलोक्यमोहिनीघोड़े – शंख, बलाहक, श्वेत, हरिदाश्वरस्सियाँ – शंखचूड़ इष्टदेव नौ देवता – वराह, गोवर्धन, कृष्ण, गोपी – कृष्ण, राम, नारायण, त्रिविक्रम, हनुमान और रुद्र तालध्वज – भगवान बलभद्र का रथ पहियों की संख्या – 14 लकड़ी के टुकड़ों की कुल संख्या – 763 ऊंचाई – 13.2 मी. कपड़ा लपेटने का रंग – लाल, हरा संरक्षक – वासुदेव सारथियों के नाम – मातलिझंडा -उन्नानी घोड़े – तिबारा, घोरा, दीर्घाश्रम, स्वर्णनावारस्सियाँ – बासुकी इष्टदेव नौ देवता – वराह, गोवर्धन, कृष्ण, गोपी – कृष्ण, राम, नारायण, त्रिविक्रम, हनुमान और रुद्र दर्पदलन (या पद्मध्वज) – देवी सुभद्रा का रथ पहियों की संख्या – 12लकड़ी के टुकड़ों की कुल संख्या – 593ऊंचाई – 12.9 मी.कपड़ा लपेटने का रंग – लाल, कालासंरक्षित – जयदुर्गासारथियों के नाम – अर्जुनध्वज – नादंबिकाघोड़े – रोचिका, मोचिका, जीता, अपराजितारस्सियाँ – स्वर्णचूड़ाइष्टदेव नौ देवता – चंडी, चामुंडा, उग्रतारा, वनदुर्गा, शुलिदुर्गा, वाराही, श्यामा काली, मंगला और विमला

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Bhagwan Jagannath: भगवान जगन्नाथ के नील माधव के रूप में होने के पीछे क्या कहानी है?

Bhagwan Jagannath: भगवान जगन्नाथ की उत्पत्ति के बारे में विभिन्न धर्मग्रंथों में अलग-अलग वर्णन हैं। यहाँ हम स्कंद पुराण के पुरुषोत्तम क्षेत्र महात्म्य और ओडिशा की जगन्नाथ परंपरा की लोकप्रिय कथाओं का उल्लेख कर रहे हैं। एक बार, सत्य युग में, इंद्रद्युम्न नामक एक महान सूर्यवंशी राजा अवंती (वर्तमान उज्जैन) पर शासन करता था। भगवान विष्णु के एक भक्त, उन्हें एक धर्मी राजा माना जाता है जो अपने राज्य पर न्याय और ईमानदारी से शासन करता था। एक बार, गर्भगृह में एक पूजा समारोह के दौरान, राजा इंद्रद्युम्न अपने एकत्रित पुजारियों, विद्वानों, कवियों और ज्योतिषियों को बहुत सम्मान के साथ संबोधित करते हैं। वह गंभीरता से पूछता है, “हम अपनी नश्वर आँखों से ब्रह्मांड के स्वामी जगन्नाथ को कहाँ देख सकते हैं?”राजा के प्रश्न के उत्तर में सभा में एक ज्ञानी तीर्थयात्री ने बहुत ही शानदार ढंग से कहा, “हे पुण्यात्माओं, तीर्थयात्रियों, मैंने बहुत यात्रा की है और अनेक तीर्थस्थानों के बारे में सुना है। भारत के उपमहाद्वीप में दक्षिणी महासागर के तट पर ओद्र देश (उत्कल, उड़ीसा) के नाम से एक भूमि है। वहां श्रीपुरुषोत्तम क्षेत्र नामक पवित्र स्थान है।”वे आगे कहते हैं, “इस क्षेत्र में नीलगिरि पर्वत है, जो घने जंगलों से घिरा हुआ है। इसके हृदय में तीन किलोमीटर तक फैला एक कल्प वृक्ष है, जो घोर पापों से भी मुक्ति प्रदान करता है। इसके पश्चिम में प्रसिद्ध रौहिना है, जो आदिम जल से भरा एक कुंड है, जिसके स्पर्श मात्र से ही मुक्ति मिल जाती है। Bhagwan Jagannath पूर्वी तट पर नीलम से बनी श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापित है, जिसके कारण इसे “नील माधव” नाम मिला है, जिसका अर्थ है श्री कृष्ण का नीला रूप।वे विस्तार से बताते हैं, “पश्चिम की ओर, सवारा (शिकारी जनजाति) के घरों से घिरा हुआ, नील माधव के मंदिर की ओर जाने वाला एक रास्ता है। यहां भगवान जगन्नाथ Bhagwan Jagannath शंख, चक्र और गदा धारण किए हुए खड़े हैं, जो करुणा के प्रतीक हैं और भौतिक दुनिया के दुखों से मुक्ति प्रदान करते हैं।”तीर्थयात्री श्री पुरुषोत्तम क्षेत्र में अपने साल भर के प्रवास का वर्णन करते हैं, Bhagwan Jagannath अनुष्ठानों में लीन रहते हैं और भगवान की प्रसन्नता के लिए जंगल में रहते हैं। वह स्वर्गीय सुगंधों और कल्प वृक्ष से फूल बरसाने वाले दिव्य आगंतुकों का वर्णन करते हैं, जो किसी अन्य विष्णु मंदिर में अद्वितीय दृश्य है।उन्होंने एक प्राचीन कथा के साथ समापन किया, जिसमें एक कौवा था, जो निम्न प्रजाति का था और गुण या ज्ञान से रहित था, तथा जो केवल नील माधव के दर्शन मात्र से मोक्ष प्राप्त कर लेता था।  इन कथाओं से गहराई से प्रभावित होकर, राजा इंद्रद्युम्न श्री कृष्ण की कृपा से अपने आध्यात्मिक विकास को स्वीकार करते हुए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। राजा की भक्ति को देखकर, तीर्थयात्री अचानक गायब हो जाता है, जिससे राजा आश्चर्यचकित हो जाता है और अपनी नई आध्यात्मिक खोज को पूरा करने के लिए उत्सुक हो जाता है। नील माधव की खोज: Neel Madhav’s discovery Bhagwan Jagannath राजा इंद्रद्युम्न अपने वफादार ब्राह्मण पुजारी विद्यापति को नील माधव का पता लगाने का काम सौंपते हैं। विद्यापति एक कठिन यात्रा पर निकलते हैं जो उन्हें दूर-दूर के इलाकों और सवारा जनजाति के घने जंगलों से होकर ले जाती है। इन सुदूर और एकांत क्षेत्रों में, विद्यापति की मुलाकात सवारा के मुखिया विश्वावसु से होती है। शुरुआती संदेह के बावजूद, विश्वावसु विद्यापति का अपने घर में स्वागत करते हैं, उन्हें आश्रय और आतिथ्य प्रदान करते हैं।अपने प्रवास के दौरान, विद्यापति विश्वावसु की बेटी ललिता के साथ घनिष्ठ संबंध बनाते हैं और अंततः वे विवाह कर लेते हैं। विद्यापति ने देखा कि विश्वावसु अक्सर लंबे समय तक जंगल में गायब हो जाता है। अपने ससुर के रहस्य के बारे में जानने के लिए उत्सुक विद्यापति इन रहस्यमय यात्राओं के बारे में पूछते हैं। ललिता बताती है कि विश्वावसु जंगल के भीतर छिपे नील माधव की पूजा करता है।विद्यापति नील माधव को देखने की अपनी गहरी इच्छा व्यक्त करते हैं। हालाँकि गोपनीयता की शपथ से बंधे हुए विश्वावसु अंततः अपनी बेटी ललिता द्वारा राजी किए जाने पर सहमत हो जाते हैं। हालाँकि, विश्वावसु यात्रा के दौरान विद्यापति की आँखों पर पट्टी बाँध देते हैं ताकि सटीक स्थान छिपा रहे। विद्यापति चतुराई से रास्ते में सरसों के बीज बिखेर देते हैं, ताकि बाद में बीज अंकुरित होने पर मार्ग का पता लगा सकें।गुप्त गुफा में पहुँचने पर विद्यापति नील माधव को देखकर अभिभूत हो जाते हैं। वह अपनी खोज के प्रमाण के रूप में देवता से कुछ प्रसाद लेते हैं। जब वह राज्य में वापस लौटते हैं, तो उनके द्वारा बिखेरे गए सरसों के बीज उग आए होते हैं, जो देवता के स्थान तक जाने वाले मार्ग को चिह्नित करते हैं। दैवीय हस्तक्षेप और जगन्नाथ मंदिर का निर्माण :Divine intervention and construction of Jagannath temple Bhagwan Jagannath विद्यापति की खोज की खबर राजा इंद्रद्युम्न तक पहुँचती है, जो अपने साथियों के साथ नील माधव को अवंती लाने के लिए निकल पड़ते हैं। सरसों के पौधों द्वारा चिह्नित मार्ग का अनुसरण करते हुए, वे गुफा तक पहुँचते हैं, लेकिन पाते हैं कि देवता गायब हो चुके हैं, जिससे राजा दुखी और निराश हो जाता है। अपने दुःख में, राजा इंद्रद्युम्न आमरण अनशन करने का संकल्प लेते हैं।निराशा के इस मार्मिक क्षण के दौरान, भगवान विष्णु फिर से प्रकट होते हैं, इस बार एक सपने में, एक दिव्य योजना का खुलासा करते हुए। भगवान विष्णु राजा इंद्रद्युम्न को पुरी में एक भव्य मंदिर बनाने और बलभद्र और सुभद्रा के साथ भगवान जगन्नाथ Bhagwan Jagannath की मूर्तियाँ स्थापित करने का निर्देश देते हैं। मूर्तियाँ साधारण नहीं हैं; उन्हें एक पवित्र लकड़ी के लट्ठे (दारू) से तराशा जाएगा, जिसे राजा समुद्र में तैरता हुआ पा सकता है। इस प्रकार, भगवान जगन्नाथ को “दारू ब्राह्मण” भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है लकड़ी के लट्ठे के रूप में ब्रह्म का प्रकट होना।भगवान विष्णु के दिव्य मार्गदर्शन का पालन करते हुए, राजा इंद्रद्युम्न पवित्र लकड़ी का पता लगाने के लिए खोज पर निकलते हैं। आखिरकार, उन्हें समुद्र पर तैरता हुआ दिव्य दारू मिल जाता है और वे उसे लेकर पुरी लौट आते हैं। देवताओं के वास्तुकार विश्वकर्मा, अनंत महाराणा के रूप में राजा के सामने

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First Monday in sawan: सावन का पहला सोमवार, कुछ खास लेकर आया

First Monday in sawan: यदि आप भी भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं तो सावन सोमवार का व्रत जरूर रखें। मान्यता है कि भोलेनाथ की भक्ति से जीवन का हर कष्ट दूर होता है और सुख-समृद्धि मिलती है। Sawan ka pahela Somwar: हिंदू धर्म में सावन माह को बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है। यह महीना खासतौर पर भगवान शिव की भक्ति के लिए समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि सावन में भोलेनाथ की पूजा करने से जातकों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। खासकर सावन के सोमवार का विशेष महत्व है। इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस साल सावन मास में भक्तों को पूरे 30 दिनों तक शिव भक्ति करने का अवसर मिलेगा। ऐसे में आइए जानते हैं इस बार सावन कब से शुरू हो रहा है, पहला सावन सोमवार कब है और श्रावणी सोमवार की सभी तिथियां। कब से शुरू हो रहा है सावन 2025? When is Saavan 2025 starting? First Monday in sawan इस साल 2025 में सावन मास की शुरुआत 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से हो रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार यह महीना विशेष रूप से शुभ रहेगा क्योंकि इस बार सावन के दौरान किसी भी तिथि का क्षय (लोप) नहीं हो रहा है। इसका मतलब है कि भक्तों को पूरे 30 दिनों तक भगवान शिव की पूजा और उपासना का अवसर मिलेगा। सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाना, रुद्राभिषेक करना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना और सोमवार के दिन व्रत रखना विशेष फलदायी माना जाता है। First Monday in sawan start date 2025: सावन का पहला सोमवार कब है? First Monday in sawan सावन के पहले सोमवार को प्रथम श्रावणी सोमवार कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। शिव भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं। 2025 में सावन का पहला सोमवार 14 जुलाई 2025 को पड़ेगा। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होती है और भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। सावन सोमवार 2025 की तिथियां:Sawan Monday 2025 dates कब शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2025?: When will Kanwar Yatra 2025 start? First Monday in sawan सावन महीने में शिव भक्तों द्वारा की जाने वाली कांवड़ यात्रा का भी खास महत्व है। इस यात्रा में भक्त पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा नदी से जल भरकर पैदल यात्रा करते हैं और उसे अपने नजदीकी या प्रसिद्ध शिव मंदिरों में अर्पित करते हैं। First Monday in sawan इस साल कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी 11 जुलाई 2025 से ही हो रही है। सोलह सोमवार 16 somwar प्रमुखतया कुछ भक्त सावन के सोमवार व्रतों को सावन के बाद तक भी जारी रखते हैं, एसे भक्त सावन के प्रथम सोमवार से प्रारंभ करते हुए लगातार सोलह(१६) और सोमवारों को यह व्रत जारी रखते हैं। इस प्रक्रिया को सोलह सोमवार उपवास के नाम से जाना जाने लगा। सावन सोमवार का महत्व: Importance of Sawan Monday First Monday in sawan सावन सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। सावन के महीने में भक्त हर सोमवार का व्रत रखते हैं और सावन का महीना सबसे शुभ महीना माना जाता है। भगवान शिव को सोमनाथ या सोमेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। सोमवार शब्द चंद्रमा से जुड़ा है और सोम का अर्थ चंद्र होता है। भगवान शिव की कई महिला भक्त सोलह सोमवार की शुरुआत पहले सवाम सोमवार से करती हैं और वे इसे 16 सोमवार पूरे होने तक जारी रखती हैं। First Monday in sawan पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रावण मास के दौरान भगवान शिव अपने ससुराल जाते हैं और देवी पार्वती के साथ वहीं रहते हैं। एक बार भगवान शिव ने प्रजापति दक्ष को वचन दिया कि वे श्रावण मास में उनके यहाँ आयेंगे और पूरे मास वहीं रहेंगे। इसीलिए श्रावण मास के दौरान बड़ी संख्या में भक्त दक्षेश्वर महादेव मंदिर आते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। First Monday in sawan सावन का महीना उन भक्तों के लिए शुभ माना जाता है जो अविवाहित हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त श्रावण मास के दौरान पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है या मनचाही इच्छा पूरी होती है। भगवान शिव को भोलेनाथ के नाम से जाना जाता है और भोलेनाथ हमेशा भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सावन सोमवार पूजा अनुष्ठान: Sawan Monday Puja Ritual 1. सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।2. घर में भगवान शिव का स्मरण करके घी का दीया जलाएं।3. मंदिर जाएं और भगवान शिव की पूजा करें। जलाभिषेक करें और पंचामृत से अभिषेक करें और फिर से जलाभिषेक करें।4. बेल पत्र, भांग, धतूरा, लाल या सफेद फूलों की माला, कोई फल और मिठाई चढ़ाएं। 5. महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षर मंत्र का जाप करें और फिर घी का दीया जलाएं और आरती करें।6. जो लोग सात्विक भाव एवं नियमों से भगवान की पूजा, स्तुति करते हैं उन्हें मनवांछित फल प्राप्त होता है। इन व्रतों में सफेद वस्त्र धारण करके सफेद चंदन का तिलक लगाना ही पूजनीय है तथा सफेद वस्त्र के दान की ही सबसे बड़ी महिमा है।7. अपने इच्छित संकल्प के अनुसार व्रत करके अपना संकल्प उद्यापन करना चाहिए। सावन सोमवार मंत्र: Sawan Monday Mantra ओम नम: शिवाय,’ के अतिरिक्त चन्द्र बीज मंत्र ‘ओम श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रयसे नम:’ और चन्द्र मूल मंत्र ‘ओम चं चन्द्रमसे नम:’ आदि मंत्र सावन सोमवार के दिन उच्चारण करें। मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत और पूजा करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

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Flowers In Dreams: सपने में किस फूल को देखने से क्या मिलेगा फल,क्या होगा शुभ अशुभ संकेत…

Flowers In Dreams:सपना प्रत्येक इंसान देखता है कुछ सपने ऐसे भी होते हैं। जिन्हें देखकर इंसान भयभीत होकर डर जाता है। कुछ सपने ऐसे भी होते हैं जिन्हें देखकर इंसान काफी खुशनुमा महसूस करता है। लेकिन कुछ ऐसे सपने हैं जिनका संकेत बहुत ही कम लोग जानते हैं जैसे – सपने में फूल देखना sapne me phool dekhna इंसान जो भी सपना देखता है उसका संबंध उसके भविष्य से जुड़ा हुआ होता है सपना इंसान के भविष्य में शुभ अशुभ हा घटनाओं के बारे में संकेत देता है।  सपने में फूल देखने (Flowers In Dreams) का आप पर क्या होगा असर… Sapne me phool dekhna सपने में फूल देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में फूल देखना आपके लिए शुभ संकेत लेकर आता है। फूल भी कई रंग के होते हैं। उनका आपको अलग-अलग संकेत मिलता है। फूलों से जुड़ी एक बात हमेशा कॉमन रहती है की आने वाले दिनों में आपके परिवार में जल्दी खुशी आने वाली है। आप कोई सरकारी नौकरी या कहीं पर जॉब करते हैं तो उसमें आपका प्रमोशन भी होने वाला है। Flowers In Dreams आपने अपना पैसा कहीं किसी को दे रखा है तो उसे वापस आने के बहुत ज्यादा चांस हैं। इस सपने का अर्थ हम यह भी लगा सकते हैं कि आप पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसाने वाली है।  Sapne me lal phool dekhna सपने मे लाल फूल देखना लाल फूल – सपने में दिखे लाल रंग का फूल तो समझिए कि आपका घर में खुशियां ही खुशियां आने वाली है। अगर वही आप किसी कंपनी में प्राइवेट जॉब या सरकारी नौकरी करते हैं तो आपके ऑफिस में आपकी तरक्की होने वाली है इसके अलावा आपका कर्ज में दिया हुआ पैसा भी वापस आ सकता है।  सपने में सफेद फूल देखना ( sapne me safed phool dekhna)  स्वप्न शास्त्र के अनुसार – आपने भी सपने में सफेद फूल देखा है तो यह आपके लिए बहुत ही शुभ संकेत देने वाला सपना है यह आपके जीवन में परेशानियां दूर होने तथा सुख शांति और आर्थिक समस्याओं को का दूर होने का संकेत है।  सपने में पीला फूल देखना ( sapne me pila phool dekhna )  स्वप्न शास्त्र के अनुसार – आपने सपने में पीला फूल देखा है । Flowers In Dreams ये सपना आपके लिए शुभ संकेत है मतलब जल्द ही आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति आएगा जिससे मिलकर आपकी सारी परेशानियों का समाधान हो जाएगा।  सपने में गुलाब का फूल देखना ( sapne me gulab ka phool dekhna )  स्वप्न शास्त्र की माने तो सपने में गुलाब का फूल Flowers In Dreams देखना आपके लिए बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है इसे देखने का मतलब है कि आपके जीवन में बहुत ही जल्दी खुशियों का आगमन होने वाला है साठी धान की देवी मां लक्ष्मी की कृपा आपको प्राप्त होगी अगर आप सपने में गुलाब का फूल देखते हैं तो आपके लिए भरपूर आर्थिक लाभ होगा।  सपने में कनेर का फूल देखना ( sapne me kaner ka phool dekhna )  दोस्तों ज्यादा आप सपने में कनेर का फूल देते हैं तो यह सपना आपके लिए बहुत ही शुभ सपना माना जाता है स्वप्न शास्त्र के अनुसार – यह सपना आपके दीर्घायु का संकेत देता है । अगर आप बीमार है तो अब आपके स्वास्थ्य में सुधार होने वाला है। इस कारण से आपको इस सपने से खुश होना चाहिए।  सपने में पीला कनेर का फूल देखना ( sapne me pila kaner dekhna )  स्वपन शास्त्र के अनुसार अगर आप सपने में पीला कनेर का फूल देखते हैं तो यह सपना आपके लिए अति उत्तम माना जाता है। खासकर यदि आप किसी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं/कर रही हैं! तो यह आपके लिए काफी अच्छा होता है। यह सपना बताता है कि आप जो भी अपने जीवन में लक्ष्य साधना चाहते हैं। उसे साधने में बहुत ज्यादा मदद मिलेगी। Flowers In Dreams इसके अलावा यह विवाहित स्त्रियों के लिए काफी अच्छा सपना माना जाता है। इसका मतलब होता है कि उनके जीवन में कोई मांगलिक कार्य आ सकता है। जैसे कि – किसी शादी विवाह में सम्मिलित हो सकती है या किसी पार्टी में भी सम्मिलित हो सकते हैं। सपने में सफेद कनेर का फूल देखना ( sapne me safed kaner ka phool )  स्वपन शास्त्र के अनुसार यदि अपने सपने में सफेद कनेर का फूल देखा है तो यह सपना आपके लिए सकारात्मक और शुभ संकेत देने वाला सपना माना जाता है। यह विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं में अलग हो सकता है लेकिन आमतौर पर सफेद रंग शुद्धता, निर्दोस्ता, शांति और अध्यातमिता से जुड़ा होता है। इसलिए सपने में सफेद कनेर देखना आपके जीवन इन गुणों मे वृद्धि का संकेत हो सकता है। Flowers In Dreams कनेर का फूल आपके जीवन में नई शुरुआत, उम्मीद और प्रेरणा का भी प्रतीक माना जाता है। इसलिए आप या कोई शुरुआत कर रहे हैं तो उसमें आपको सफलता मिलेगी और कोई नई उम्मीद है तो उसे करने में आपको आसानी होगी।  सपने में गेंदा का फूल देखना (sapne me genda ka phool dekhna)  स्वपन् शास्त्र के अनुसार यदि आप सपने में गेंदा का फूल देखते हैं Flowers In Dreams तो इसका मतलब है कि आपके हाथों से कोई बहुत बड़ा पुण्य का कार्य होने वाला है। सपने में रंग-बिरंगे फूलों का देखना भी शुभ समाचार का संकेत माना जाता है।  सपने में गुड़हल का फूल देखना ( sapne me gudhal ka phool dekhna)  अगर अपने सपने में गुड़हल का फूल देखा है तो समझ जाइए कि आपकी किस्मत जल्द ही चमकने वाली है। Flowers In Dreams यह सपना आपको संकेत करता है कि आप जिस लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं उस लक्ष्य के ऊपर कार्य करने का अब समय आ गया है। सपने में कमल का फूल देखना sapne me kamal ka phool dekhna स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने मे कमल का फूल देखना बहुत ही अच्छा होता है। ये शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपको जल्द ही धन का लाभ होने वाला है। कमल के फूल को धन की देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए भी सपने में कमल का फूल देखना धन की

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