May 21, 2025

Gayatri Jayanti 2025 Date: गायत्री जयंती कब है?रहेगा भद्रा का साया, सही डेट, मुहूर्त और पूजा की विधि, यहां जानें

Gayatri Jayanti 2025 Kab Hai: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि को माता गायत्री प्रकट हुई थी. ऐसे में इस तिथि पर गायत्री जयंती का पर्व मनाने का विधान है. इस दिन क्या योग बन रहे हैं, भद्रा का साया होगा या नहीं, शुभ मुहूर्ते क्या रहने वाला है, आइए जानें. Gayatri Jayanti 2025: भारतीय संस्कृति की जननी कही जाने वाली मां गायत्री का जन्मोत्सव ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. इसे गायत्री जयंती भी कहते हैं. हिंदू धर्म में मां गायत्री को वेदमाता(Vedmata) कहा जाता है क्योंकि सभी वेदों (Veda) की उत्पत्ति इन्हीं से हुई है. आइए जानते हैं गायत्री जयंती 2025 में कब है ? नोट करें डेट, पूजा मुहूर्त और महत्व. गायत्री जयंती 2025 डेट (Gayatri Jayanti 2025 Date) वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 06 जून की देर रात 02 बजकर 15 मिनट पर शुरू हो रही है और तिथि का समापन 07 जून को सुबह 04 बजकर 47 मिनट पर हो रहा है. इस तरह उदयाति​थि में गायत्री जयंती  06 जून को मनाई जाएगी. Mata Gayatri Aarti:माता गायत्री आरती गायत्री जयंती 2024 मुहूर्त (Gayatri Jayanti 2024 Muhurat) गायत्री जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह के 04 बजकर 02 बजे से लेकर 04 बजकर 42 बजे तक होगा. गायत्री जयंती पर शुभ समय यानी अभिजीत मुहूर्त की शुरुआत सुबह के 11 बजकर 52 मिनट पर होगी.  गायत्री जयंती पर अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक बना रहेगा. Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा क्यों मनाई जाती है गायत्री जयंती ? (Why we celebrate Gayatri Jayanti) गायत्री संहिता में लिखा है ‘भासते सततं लोके गायत्री त्रिगुणात्मिका॥’यानी गायत्री माता सरस्वती, लक्ष्मी एवं काली का प्रतिनिधित्व करती हैं. मां गायत्री से आयु, प्राण, प्रजा, पशु, कीर्ति, धन एवं ब्रह्मवर्चस के सात प्रतिफल अथर्ववेद में बताए गए हैं. इनकी पूजा करने पर व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. लंबी आयु का वरदान मिलता है. गायत्री जयंती महत्व (Gayatri Jayanti Significance) शास्त्रों के अनुसार इस पृथ्वी पर प्रत्येक जीव के भीतर मां गायत्री प्राण-शक्ति के रूप में विद्यमान है, यही कारण है माता गायत्री को सभी शक्तियों का आधार माना गया है.  Gayatri Jayanti मान्यता है कि गायत्री जयंती के दिन ज्ञान की देवी गायत्री से की पूजा करने से वेदों का अध्यन करने के समान पुण्य मिलता है, परिवार में एकता बढ़ती है सुख का वास होता है, ज्ञान में वृद्धि होती है. गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) ॐ भूर् भुवः स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ गायत्री जयंती 2025 पर शुभ संयोग:Auspicious coincidence on Gayatri Jayanti 2025 ध्यान दें ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर Gayatri Jayanti गायत्री जयंती और निर्जला एकादशी व्रत का अद्भुत और सुंदर संयोग हो रहा है. इस दिन जो भी साधक मां गायत्री की पूजा के साथ साथ अगर निर्जला एकादशी के व्रत का संकल्प करता है तो उसे सभी 24 एकादशी का पुण्य प्राप्त होता है.  गायत्री जयंती 2025 पर भद्रा:Bhadra on Gayatri Jayanti 2025 गायत्री जयंती 2025 पर भद्रा का साया होगा. यह भद्रा पाताल लोक की है जिसका शुरुआत दोपहर के 03 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगी और 7 जून को सुबह के 04 बजकर 47 मिनट तक यह बनी रहेगी. भद्रा का वास पाताल है. भद्रा का साया जब तक होगा किसी भी तरह के शुभ कार्य को नहीं किया जाएगा.  वेदमाता गायत्री:Vedamata Gayatri माता गायत्री वेदमाता हैं, मान्यता है कि चारों वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद व सामवेद की उत्पत्ति गायत्री माता से ही हुई है. ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव भी  माता गायत्री की आराधना कर उनकी कृपा पाते हैं. पौराणिक मान्यता है कि पंचमुखी माता गायत्री की कुल 10 भुजाएं हैं. गायत्री मंत्र का जाप करने से मन शांत होता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. गायत्री मंत्र के जाप से साधक सकारात्मकता, बुद्धि के साथ ही ज्ञान की प्राप्ति कर पाता है. ये है गायत्री मंत्र- ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्.

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Vilakku Pooja 2025 Date:विलक्कु पूजा विधि, महत्त्व और लाभ

Vilakku Pooja 2025:विलक्कु पूजा, भाग्य और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी का प्रतीक है। एक समय में बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से महालक्ष्मी की पूजा दीप जलाकर किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और दुनिया में शांति आती है। थिरु विलक्कु पूजा Vilakku Pooja , ज्यादातर शुक्रवार को या तो सुबह या शाम को दीपक जलाकर की जाती है। यह मुख्य रूप से तमिल महीनों, चिथिरई और वैगासी के दौरान की जाती है, और यह पवित्र दीप पूजा अमावस और पूर्णिमा के दिनों में भी की जा सकती है। Vilakku Pooja विलक्कु पूजा: परिचय विलक्कु पूजा Vilakku Pooja में एक पारंपरिक दीपक (कुथु विलक्कु) को सजाकर, उसमें घी या तिल का तेल भरकर, दीपक जलाया जाता है। यह पूजा घर में या मंदिर में एकल या सामूहिक रूप से की जा सकती है। विशेष अवसरों पर, 108 या 1008 दीपकों के साथ सामूहिक पूजा का आयोजन भी होता है। विलक्कु पूजा कौन करता है? Who performs Vilakku puja? दक्षिण भारत – तमिलनाडु में, अधिकांश गृहिणियां इस तिरुविलक्कू पूजा को 108 जाप के साथ घर पर नियमित रूप से करतीं हैं। दीपक की मंद-मंद चमक मंदिर तथा मंदिर के कमरे को रोशन करती है, जिससे वातावरण शुद्ध और निर्मल रहता है। विलक्कु पूजा क्यों की जाती है?:Why is Vilakku puja performed? दक्षिण भारतीय हिंदुओं के घरों में थिरु-विलक्कू प्रतिदिन जलाया जाता है, क्योंकि थिरु-विलक्कू को माँ महालक्ष्मी का रूप माना जाता है, जो भाग्य और धन की देवी हैं। दिव्य मां लक्ष्मी देवी की कृपा पाने के लिए महिला भक्तों द्वारा थिरुविलक्कू पूजा की जाती है। यह पूजा परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए की जाती है Vilakku Pooja और यह प्रत्येक सदस्य के लिए अच्छाई लाती है। Vilakku Pooja ऐसा माना जाता है कि जो लोग ईमानदारी से मंदिरों में दीया जलाकर थिरु विलक्कू पूजा करते हैं, मां महालक्ष्मी भी उस शुभ कार्यक्रम में उपस्थित होंगी, और वह दीप पूजा में भाग लेने वालों को आशीर्वाद देती हैं। पूजा की विधि:Vilakku puja Vidhi 1. पूर्व तैयारी 2. दीपक की स्थापना 3. पूजा की प्रक्रिया विलक्कु पूजा 2025 की तिथियाँ:Vilakku Puja 2025 Dates विलक्कु पूजा Vilakku Pooja मुख्यतः शुक्रवार को की जाती है, और 2025 में इसकी प्रमुख तिथियाँ निम्नलिखित हैं:​ 108 पोत्री (स्तुति) विलक्कु पूजा के दौरान 108 पोत्री का पाठ किया जाता है, जिसमें देवी की विभिन्न रूपों में स्तुति की जाती है। यह पाठ श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाना चाहिए। विलक्कु पूजा एक सरल और प्रभावशाली पूजा विधि है जो देवी लक्ष्मी और शक्ति की आराधना के माध्यम से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है। इस पूजा को नियमित रूप से करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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Batuk Bhairav Jayanti 2025 Date:जानियें कब और कैसे करें बटुक भैरव जयंती की पूजा ?

Batuk Bhairav Jayanti 2025 Date:बटुक भैरव भगवान शंकर का बाल रूप और सबसे भयानक, विकराल और प्रचंड रूप है. कहते हैं कि बटुक भैरव की पूजा करने से विरोधियों और शत्रुओं का कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होता. Batuk Bhairav Jayanti 2025 : हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है. इस साल  5 जून 2025, गुरूवार को बटुक भैरव जयंती मनाई जाएगी. इस दिन भोलेनाथ (Lord Shiva) ने भैरव के रूप में अवतार लिया था. शास्त्रों में इस बात का वर्णन है कि वेदों में जिस परम पुरुष का नाम रूद्र है तंत्र शास्त्र में उसी का भैरव के नाम से वर्णन किया गया है. आपको बता दें कि शिव पुराण (Shiv Puran) में भैरव को भगवान शिव का पूर्ण रूप बताया गया है. विद्वानी भगवान शंकर और भैरवनाथ में कोई अंतर नहीं मानते. बटुक भैरव भगवान शंकर का बाल रूप और सबसे भयानक, विकराल और प्रचंड रूप है. कहते हैं कि बटुक भैरव की पूजा करने से विरोधियों और शत्रुओं का कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होता. How is the form of Lord Shri Batuk Bhairav:कैसा है भगवान श्री बटुक भैरव का स्वरूप ? Batuk Bhairav Jayanti:कुछ साधक भगवान के बटुक भैरव रूप को शुद्ध आत्मा का प्रतिनिधित्व करने वाला उसका प्रतीकात्मक रूप मानते हैं। बटुक भैरव भगवन शिव का बाल रूप है जो अतिकोमल है और जिसका रंग गोरा है। इसलिये इन्हे गोरा भैरव के नाम से भी जाना जाता हैं। बालक रुपी भगवान बटुक भैरव की देह की कान्ति स्फटिक की तरह चमकदार है। केश घुंघराले और चमकता हुआ मुख। कमर और पैरों में किंकिणी, नूपुर आदि नव मणियों के अलंकार सज्ज्ति हैं। उनके तीन नेत्र है। भव्य और उज्जवल मुख है। सदा प्रसन्न-चित्त दिखते है। उन्होने हाथों में शूल और दण्ड धारण किए हुए हैं। How to worship Batuk Bhairav:कैसे करें बटुक भैरव की पूजा? बटुक भैरव जयंती (Batuk Bhairav Jayanti) के दिन भगवान बटुक भैरव की पूजा किये जाने का विधान है। इस साधक को भगवान बटुक भैरव के मन्दिर जाकर उनकी पूजा करनी चाहिये। पूजा की विधि इस प्रकार है – प्रात:काल नित्यक्रिया से निवृत्त होकर गंगा नदी में स्नान करें यदि गंगा स्नान सम्भव ना होतो स्नान के जल में गंगा जल डालकर स्नान करें। फिर स्वच्छ सफ़ेद वस्त्र धारण करें। स्नान के बाद व्रत का संकल्प करें। भगवान बटुक भैरव के मंदिर जाकर पूजा करें। Batuk Bhairav Jayanti यदि ऐसा सम्भव ना हो तो शिवालय जाकर भी पूजा कर सकते है। भगवान बटुक भैरव देव को सफ़ेद फूल और केला अर्पित करे। लड्डू और पंचामृत चढ़ाएं। यह सब चढ़ाते हुये इस मंत्र का जाप करते रहें। मंत्र – “ॐ बटुक भैरवाय नमः”। फिर बटुक भैरव स्तोत्र (श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली ) का पाठ करें। आरती करें। गरीबों को प्रसाद बाँटें। इसके बाद बाहर आकर कुत्ते को दूध अवश्य पिलायें। साथ ही पुआ या हलवा भी खिलायें। Significance of Batuk Bhairav Jayanti:बटुक भैरव जयंती का महत्व बटुक भैरव जयंती (Batuk Bhairav Jayanti) के दिन उत्तर भारत में बहुत से बटुक भैरव मंदिरों विशेष पूजा और अनुष्ठानों किये जाते है। तंत्रवाद में विश्वास करने वाले तांत्रिकों द्वारा भगवान शिव के रूप बटुक भैरव और काल भैरव की पूजा की जाती है। इस दिन Batuk Bhairav Jayanti भगवान बटुक भैरव की विधि अनुसार पूजा करने से The story of the origin of Batuk Bhairav:बटुक भैरव की उत्पत्ति की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार अति प्राचीन काल में आपद नाम का एक राक्षस था। Batuk Bhairav Jayanti उसने कठिन तपस्या के द्वारा यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसे कोई भी देवी-देवता नही मार सकेगा। उसकी मृत्यु सिर्फ पाँच वर्ष की आयु वाला कोई बालक ही कर सकेगा। यह वर पाने के बाद आपद निरंकुश हो गया और तीनों लोकों में उसका अत्याचार बहुत बढ़ गया। देवी – देवता और मनुष्य सभी उसके अत्याचार से परेशान हो गये थे। आपद के द्वारा प्रताडित देवी – देवताओं ने जाकर भगवान शिव से प्रार्थना करी कि वो उनकी आपद से रक्षा करें। तब भगवान शिव जी ने पांच वर्ष के बालक रूप में बटुक भैरव को प्रकट किया। Batuk Bhairav Jayanti इस प्रकार से बटुक भैरव की उत्पत्ति हुई। इसके बाद भगवान बटुक भैरव ने आपद नामक राक्षस का वध करा। उसके बाद से ऐसा कहा जाता है कि इस कलियुग में यदि आपके उपर कोई मुसीबत आये तो बटुक भैरव का ध्यान करें। बटुक भैरव की पूजा करने से मिलता है लाभ:Benefits of worshiping Batuk Bhairav इस बार बटुक भैरव जयंती मनाई जा रही है. Batuk Bhairav Jayanti जयंती पड़ने से इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है. कहा जाता है कि रविवार को भगवान बटुक भैरव की सच्चे मन से साधना और आराधना करने वाले साधक को बुद्धि, बल, विद्या और मान सम्मान की प्राप्ति होती है. Batuk Bhairav Jayanti ज्योतिषियों के मुताबिक राहु केतु के संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए भी बटुक की साधना बहुत ही ज्यादा फलदाई है. बटुक भैरव जयंती के दिन करें उपाय:Remedies to be taken on the day of Batuk Bhairav ​​Jayanti

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