Batuk Bhairav Jayanti 2025 Date:बटुक भैरव भगवान शंकर का बाल रूप और सबसे भयानक, विकराल और प्रचंड रूप है. कहते हैं कि बटुक भैरव की पूजा करने से विरोधियों और शत्रुओं का कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होता.

Batuk Bhairav Jayanti 2025 : हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है. इस साल 5 जून 2025, गुरूवार को बटुक भैरव जयंती मनाई जाएगी. इस दिन भोलेनाथ (Lord Shiva) ने भैरव के रूप में अवतार लिया था. शास्त्रों में इस बात का वर्णन है कि वेदों में जिस परम पुरुष का नाम रूद्र है तंत्र शास्त्र में उसी का भैरव के नाम से वर्णन किया गया है.
आपको बता दें कि शिव पुराण (Shiv Puran) में भैरव को भगवान शिव का पूर्ण रूप बताया गया है. विद्वानी भगवान शंकर और भैरवनाथ में कोई अंतर नहीं मानते. बटुक भैरव भगवान शंकर का बाल रूप और सबसे भयानक, विकराल और प्रचंड रूप है. कहते हैं कि बटुक भैरव की पूजा करने से विरोधियों और शत्रुओं का कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होता.
How is the form of Lord Shri Batuk Bhairav:कैसा है भगवान श्री बटुक भैरव का स्वरूप ?
Batuk Bhairav Jayanti:कुछ साधक भगवान के बटुक भैरव रूप को शुद्ध आत्मा का प्रतिनिधित्व करने वाला उसका प्रतीकात्मक रूप मानते हैं। बटुक भैरव भगवन शिव का बाल रूप है जो अतिकोमल है और जिसका रंग गोरा है। इसलिये इन्हे गोरा भैरव के नाम से भी जाना जाता हैं।
बालक रुपी भगवान बटुक भैरव की देह की कान्ति स्फटिक की तरह चमकदार है।
केश घुंघराले और चमकता हुआ मुख।
कमर और पैरों में किंकिणी, नूपुर आदि नव मणियों के अलंकार सज्ज्ति हैं।
उनके तीन नेत्र है। भव्य और उज्जवल मुख है।
सदा प्रसन्न-चित्त दिखते है।
उन्होने हाथों में शूल और दण्ड धारण किए हुए हैं।
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How to worship Batuk Bhairav:कैसे करें बटुक भैरव की पूजा?
बटुक भैरव जयंती (Batuk Bhairav Jayanti) के दिन भगवान बटुक भैरव की पूजा किये जाने का विधान है। इस साधक को भगवान बटुक भैरव के मन्दिर जाकर उनकी पूजा करनी चाहिये। पूजा की विधि इस प्रकार है –
प्रात:काल नित्यक्रिया से निवृत्त होकर गंगा नदी में स्नान करें यदि गंगा स्नान सम्भव ना होतो स्नान के जल में गंगा जल डालकर स्नान करें। फिर स्वच्छ सफ़ेद वस्त्र धारण करें। स्नान के बाद व्रत का संकल्प करें।
भगवान बटुक भैरव के मंदिर जाकर पूजा करें। Batuk Bhairav Jayanti यदि ऐसा सम्भव ना हो तो शिवालय जाकर भी पूजा कर सकते है।
भगवान बटुक भैरव देव को सफ़ेद फूल और केला अर्पित करे। लड्डू और पंचामृत चढ़ाएं। यह सब चढ़ाते हुये इस मंत्र का जाप करते रहें। मंत्र – “ॐ बटुक भैरवाय नमः”।
फिर बटुक भैरव स्तोत्र (श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली ) का पाठ करें।
आरती करें।
गरीबों को प्रसाद बाँटें।
इसके बाद बाहर आकर कुत्ते को दूध अवश्य पिलायें। साथ ही पुआ या हलवा भी खिलायें।
Significance of Batuk Bhairav Jayanti:बटुक भैरव जयंती का महत्व
बटुक भैरव जयंती (Batuk Bhairav Jayanti) के दिन उत्तर भारत में बहुत से बटुक भैरव मंदिरों विशेष पूजा और अनुष्ठानों किये जाते है। तंत्रवाद में विश्वास करने वाले तांत्रिकों द्वारा भगवान शिव के रूप बटुक भैरव और काल भैरव की पूजा की जाती है। इस दिन Batuk Bhairav Jayanti भगवान बटुक भैरव की विधि अनुसार पूजा करने से
- राहु – केतु शांत होते है।
- ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते है।
- नकारात्मक और दुष्ट शक्तियों से सुरक्षा होती है।
- शत्रु का भय नही रहता।
- भगवान बटुक भैरव अपने भक्तों की सदा ही रक्षा करते है।
- दुख – दरिद्रता का नाश होता है।
- संकट दूर होता है।
- भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
- धन – समृद्धि में वृद्धि होती है।
- आयु में वृद्धि होती है। अकाल मृत्यु का नाश होता है।
- आरोग्य की प्राप्ति होती है।
- मरणोपरांत मोक्ष की प्रप्ति होती है।
The story of the origin of Batuk Bhairav:बटुक भैरव की उत्पत्ति की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार अति प्राचीन काल में आपद नाम का एक राक्षस था। Batuk Bhairav Jayanti उसने कठिन तपस्या के द्वारा यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसे कोई भी देवी-देवता नही मार सकेगा। उसकी मृत्यु सिर्फ पाँच वर्ष की आयु वाला कोई बालक ही कर सकेगा। यह वर पाने के बाद आपद निरंकुश हो गया और तीनों लोकों में उसका अत्याचार बहुत बढ़ गया। देवी – देवता और मनुष्य सभी उसके अत्याचार से परेशान हो गये थे। आपद के द्वारा प्रताडित देवी – देवताओं ने जाकर भगवान शिव से प्रार्थना करी कि वो उनकी आपद से रक्षा करें।
तब भगवान शिव जी ने पांच वर्ष के बालक रूप में बटुक भैरव को प्रकट किया। Batuk Bhairav Jayanti इस प्रकार से बटुक भैरव की उत्पत्ति हुई। इसके बाद भगवान बटुक भैरव ने आपद नामक राक्षस का वध करा। उसके बाद से ऐसा कहा जाता है कि इस कलियुग में यदि आपके उपर कोई मुसीबत आये तो बटुक भैरव का ध्यान करें।
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बटुक भैरव की पूजा करने से मिलता है लाभ:Benefits of worshiping Batuk Bhairav
इस बार बटुक भैरव जयंती मनाई जा रही है. Batuk Bhairav Jayanti जयंती पड़ने से इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है. कहा जाता है कि रविवार को भगवान बटुक भैरव की सच्चे मन से साधना और आराधना करने वाले साधक को बुद्धि, बल, विद्या और मान सम्मान की प्राप्ति होती है. Batuk Bhairav Jayanti ज्योतिषियों के मुताबिक राहु केतु के संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए भी बटुक की साधना बहुत ही ज्यादा फलदाई है.
बटुक भैरव जयंती के दिन करें उपाय:Remedies to be taken on the day of Batuk Bhairav Jayanti
- कहते हैं कि बटुक जयंती के दिन भैरव बाबा की सवारी श्वान यानी कुत्ते की पूजा करना बहुत ही फलदाई माना गया है. इस दिन श्वान को दूध पिलाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली मुसीबत से बचाव होता है.
- इस दिन काले कुत्ते की पूजा बहुत ही ज्यादा फलदाई मानी जाती है. आज के दिन उसे सरसों के तेल लगी रोटियां खिलाना शुभ माना गया है. सा ही ॐ बटुक भैरवाय नमः मंत्र का जाप करने से दुर्भाग्य दूर होता है.
- अशुभ और नकारात्मकता से बचने के लिए भैरव जयंती के दिन पूरे विधि-विधान और सच्चे भक्ति भाव से शिव जी की पूजा करें. इस दौरान शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं. कहते हैं कि ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
- भैरव जयंती के दिन भैरव बाबा को केला, लड्डू, मीठे पुए, सफेद फूल और पंचामृत चढ़ाएं. इससे भगवान की कृपा आप पर बनी रहेगी.
- बटुक जयंती के दिन सरसों के तेल में तले उड़द के पकौड़े, पुए, पापड़ आदि किसी शनि मंदिर में रख आएं या फिर गरीबों को बांटे. ऐसा करने से शनि दोष से छुटकारा मिलता है








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