May 9, 2025

Matangi Hridaya Stotra:मातंगी हृदय स्तोत्र

Matangi Hridaya Stotra:मातंगी हृदय स्तोत्र Matangi Hridaya Stotra:एकदा कौतुकाविष्टा भैरवं भूतसेवितम् ।भैरवी परिपप्रच्छ सर्वभूतहिते रता ॥ १ ॥ श्री भैरव्युवाच । भगवन्सर्वधर्मज्ञ भूतवात्सल्यभावन ।अहं तु वेत्तुमिच्छामि सर्वभूतोपकारम् ॥ २ ॥ केन मन्त्रेण जप्तेन स्तोत्रेण पठितेन च ।सर्वथा श्रेयसां प्राप्तिर्भूतानां भूतिमिच्छताम् ॥ ३ ॥ श्री भैरव उवाच । शृणु देवि तव स्नेहात्प्रायो गोप्यमपि प्रिये ।कथयिष्यामि तत्सर्वं सुखसम्पत्करं शुभम् ॥ ४ ॥ पठतां शृण्वतां नित्यं सर्वसम्पत्तिदायकम् ।विद्यैश्वर्यसुखाव्याप्तिमङ्गलप्रदमुत्तमम् ॥ ५ ॥ मातङ्ग्या हृदयं स्तोत्रं दुःखदारिद्र्यभञ्जनम् ।मङ्गलं मङ्गलानां च अस्ति सर्वसुखप्रदम् ॥ ६ ॥ ओं अस्य श्रीमातङ्गीहृदयस्तोत्रमन्त्रस्य दक्षिणामूर्तिरृषिः –विराट् छन्दः – श्री मातङ्गी देवता – ह्रीं बीजं – क्लीं शक्तिः – ह्रूं कीलकं ।सर्ववाञ्छितार्थसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ ऋष्यादिन्यासः । दक्षिणामूर्तिऋषये नमः शिरसि ।विराट्छन्दसे नमः मुखे ।मातङ्गीदेवतायै नमः हृदि ।ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये ।हूं शक्तये नमः पादयोः ।क्लीं कीलकाय नमः नाभौ ।विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।इति ऋष्यादिन्यासः ॥ करन्यासः । ओं ह्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ओं क्लीं तर्जनीभ्यां नमः ।ओं ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ओं ह्रीं अनामिकाभ्यां नमः ।ओं क्लीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ओं ह्रूं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । अङ्गन्यासः । ओं ह्रीं हृदयाय नमः ।ओं क्लीं शिरसे स्वाहा ।ओं ह्रूं शिखायै वषट् ।ओं ह्रीं नेत्रत्रयाय वौषट् ।ओं क्लीं कवचाय हुम् ।ओं ह्रूं अस्त्राय फट् । ॥ ध्यानम् ॥ श्यामां शुभ्रां सुफालां त्रिकमलनयनां रत्नसिंहासनस्थांभक्ताभीष्टप्रदात्रीं सुरनीकरकरासेव्यकञ्जाङ्घ्रियुग्माम् ।नीलाम्भोजातकान्तिं निशिचरनिकरारण्यदावाग्निरूपांमातङ्गीमावहन्तीमभिमतफलदां मोदिनीं चिन्तयामि ॥ ७ ॥ नमस्ते मातङ्ग्यै मृदुमुदिततन्वै तनुमतांपरश्रेयोदायै कमलचरणध्यानमनसां ।सदा संसेव्यायै सदसि विबुधैर्दिव्यधिषणैःदयार्द्रायै देव्यै दुरितदलनोद्दण्ड मनसे ॥ ८ ॥ परं मातस्ते यो जपति मनुमेवोग्रहृदयःकवित्वं कल्पानां कलयति सुकल्पः प्रतिपदम् ।अपि प्रायो रम्याऽमृतमयपदा तस्य ललितानटी चाद्या वाणी नटन रसनायां च फलिता ॥ ९ ॥ तव ध्यायन्तो ये वपुरनुजपन्ति प्रवलितंसदा मन्त्रं मातर्नहि भवति तेषां परिभवः ।कदम्बानां माल्यैरपि शिरसि युञ्जन्ति यदि येभवन्ति प्रायस्ते युवतिजनयूथस्ववशगाः ॥ १० ॥ सरोजैः साहस्रैः सरसिजपदद्वन्द्वमपि येसहस्रं नामोक्त्वा तदपि च तवाङ्गे मनुमितं ।पृथङ्नाम्ना तेनायुतकलितमर्चन्ति प्रसृतेसदा देवव्रातप्रणमितपदाम्भोजयुगलाः ॥ ११ ॥ तव प्रीत्यैर्मातर्ददति बलिमादाय सलिलंसमत्स्यं मांसं वा सुरुचिरसितं राजरुचितम् ।सुपुण्यायै स्वान्तस्तव चरणप्रेमैकरसिकाःअहो भाग्यं तेषां त्रिभुवनमलं वश्यमखिलम् ॥ १२ ॥ लसल्लोलश्रोत्राभरणकिरणक्रान्तिललितंमितस्मेरज्योत्स्नाप्रतिफलितभाभिर्विकरितं ।मुखाम्भोजं मातस्तव परिलुठद्भ्रूमधुकरंरमा ये ध्यायन्ति त्यजति न हि तेषां सुभवनम् ॥ १३ ॥ परः श्रीमातङ्ग्या जपति हृदयाख्यः सुमनसाम्-अयं सेव्यः सुद्योऽभिमतफलदश्चातिललितः ।नरा ये शृण्वन्ति स्तवमपि पठन्तीममनुनिशंन तेषां दुष्प्राप्यं जगति यदलभ्यं दिविषदाम् ॥ १४ ॥ धनार्थी धनमाप्नोति दारार्थी सुन्दरीः प्रियाः ।सुतार्थी लभते पुत्रं स्तवस्यास्य प्रकीर्तनात् ॥ १५ ॥ विद्यार्थी लभते विद्यां विविधां विभवप्रदां ।जयार्थी पठनादस्य जयं प्राप्नोति निश्चितम् ॥ १६ ॥ नष्टराज्यो लभेद्राज्यं सर्वसम्पत्समाश्रितं ।कुबेरसमसम्पत्तिः स भवेद्धृदयं पठन् ॥ १७ ॥ किमत्र बहुनोक्तेन यद्यदिच्छति मानवः ।मातङ्गीहृदयस्तोत्रपठनात्सर्वमाप्नुयात् ॥ १८ ॥ ॥ इति श्री दक्षिणामूर्तिसंहितायां Matangi Hridaya Stotra मातंगी हृदय स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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मातंगी स्तोत्र:Matangi Stotra

मातंगी स्तोत्र:Matangi Stotra Matangi Stotra:नमामि वरदां देवीं सुमुखीं सर्वसिद्धिदाम् ।सूर्यकोटिनिभां देवीं वह्निरूपां व्यवस्थिताम् ॥ १ ॥ रक्तवस्त्र नितम्बां च रक्तमाल्योपशोभिताम् ।गुंजाहारस्तनाढ्यान्तां परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ २ ॥ मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनाकर्ष दायिनी ।मुण्ड कर्त्रिं शरावामां परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ ३ ॥ स्वयम्भुकुसुम प्रीतां ऋतुयोनिनिवासिनीम् ।शवस्थां स्मेरवदनां परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ ४ ॥ रजस्वला भवेन्नित्यं पूजेष्टफलदायिनी ।मद्यप्रियं रतिमयीं परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ ५॥ शिवविष्णुविरञ्चीनां साद्यां बुद्धिप्रदायिनीम् ।असाध्यं साधिनीं नित्यां परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ ६॥ रात्रौ पूजा बलियुतां गोमांस रुधिरप्रियाम् ।नानाऽलङ्कारिणीं रौद्रीं पिशाचगणसेविताम् ॥ ७ ॥ इत्यष्टकं पठेद्यस्तु ध्यानरूपां प्रसन्नधीः ।शिवरात्रौ व्रतेरात्रौ वारूणी दिवसेऽपिवा ॥ ८ ॥ पौर्णमास्याममावस्यां शनिभौमदिने तथा ।सततं वा पठेद्यस्तु तस्य सिद्धि पदे पदे ॥ ९ ॥ ॥ एकजटा कल्पलतिका शिवदीक्षायान्तर्गतम् मातंगी स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Sapne Mai Suar Dekhna:सपने में सफेद सूअर को देखना, सफेद गंदा सूअर देखना, बहुत सारे सूअर देखना, जंगली सूअर

Sapne Mai Suar Dekhna:दोस्तों हमरे जीवन में बहुत से जीव ऐसे है जिनके बारे में हम बिना जाने उस जीव से घृणा करते है । और वो जीव हमारे लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है, जैसे सूअर को हम घृणा की नजर से देखते है ,हम सुनते आए है की सूअर अशुभ जानवर है । लेकिन बतादूँ दोस्तों भगवान की बनाई हुई कोई भी चीज अशुभ या अनुपयोगी नहीं होती है । सूअर गंदगी को खतम करने वातावरण को शुद्ध बनाता है। सूअर को बदनामी का  मिला हुआ है । ये शब्द बहुत बार इंसान की लिए भी काम में लिया जाता है । जब कोई इंसान खाना खाता है वह खाने को चारों और बिखेर देता है अपने पूरे शरीर पर खाना बिखेर लेता है तब हम उसे सूअर की उपमा देते है और कहते है, कैसे सूअर की तरह खाना खा रहा है । किसी आलसी आदमी को हम सूअर नाम से संबोधित करते है ।बात करते है, सपने की तो दोस्तों सपने में सूअर देखना स्व्पनशास्त्र के अनुसार शुभ संकेत नहीं माना जाता है, सपने में सूअर देखना बुरे लोगों के साथ दोस्ती का संकेत देता है ।  सपने में सूअर देखना sapne mai suar dekhna यदि आप अपने सपने में किसी सूअर को देखते है तो ये सपना आपके लिए अशुभ माना जाता है । Sapne Mai Suar Dekhna स्व्पनशास्त्र के सानुसार सपने में सूअर देखना इस बात का संकेत देता है की आने वाले दिनों में आप किसी बुरे और बदनामी वाले संकट में फसने वाले है । या आने वाले समय में आपकी जिंदगी में बहुत बुरे लोगों का प्रवेश होने वाला है । और वो बुरे लोग आपकी आपके जीवन को बहुत ही ज्यादा कठिन बनाने वाले है । इस प्रकार अगर सपने में सूअर देखना बहुत बड़ी परेसानी का न्योता देता है । अगर सपने में आप अपने बेडरूम में सूअर की तस्वीर लगाते हुए देखते है तो ये सपना आपके मन के अंदर आने वाले बुरे विचारों की और संकेत करता है । ये सपना बताता है की आने वाले समय में आपकी बूढ़ी भ्रष्ट होने वाली है, जिसके कारण आपके चरित्र में दाग लग सकते है । सपने में सफ़ेद सूअर देखना Sapne me white suar dekhna यदि हम सपने में सफेद सुअर देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आने वाला समय बहुत ही अच्छा गुजरने वाला है। Sapne Mai Suar Dekhna अर्थात यह एक बहुत ही शुभ सपना है। यह हमारे अच्छे स्वास्थ की तरफ इशारा करता है। जिसका मतलब है कि जो भी बीमारी अथवा कुछ चिंताएं हमें काफ़ी समय से परेशान कर रही हैं वह बहुत जल्द दूर होने वाली है। और आने वाले समय में आप शारीरिक रूप में बहुत ज्यादा मजबूत होने वाले हैं। सफेद सुअर को सहलाते हुए देखना Sapne Mai Suar Dekhna यदि आप सफेद सूअर को अपने हाथों से सहलाते हुए देखते हैं तो यह बहुत ही अच्छा सपना है। इसका यह अर्थ है कि आने वाले समय में आप आर्थिक रूप से भी मजबूत होने वाले हैं। क्योंकि कई धर्मों में सुअर को बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है। Sapne Mai Suar Dekhna अतः यह एक बहुत ही शुभ सपना है जो हर दृष्टिकोण से आपके संबल को मजबूत करने का कार्य करेगा। दूसरी तरफ यदि आप सपने में सफेद सुअर देखते हैं तो इसका यह अर्थ है कि आपका भाग्य बहुत अच्छा होने वाला है। यह आपके भाग्य में कुछ बहुत ही बढ़िया चीज लिखी हुई है जो आपको मिलने वाली है। सपने में सूअर को देखना भाग्य से जोड़कर देखा जाता है। सपने में सुअर का बच्चा देखना यदि आप सपने में सुअर का बच्चा देखते है तो इसका मतलब है Sapne Mai Suar Dekhna की आप को भविष्य में कोई छोटा मोटा लाभ हो सकता है। या कोई कार्य काफ़ी समय से नहीं हो रहा है वो बहुत जल्द हो सकता है। यह सपना जीवन में छोटी छोटी खुशियों के दस्तक देने की तरफ भी इशारा करता है। सपने में सुअर को मारना Sapne Me Suar Ko Marna Sapne Mai Suar Dekhna यदि आप कोई ऐसा सपना देखते हो जिसमें आप सब के सूअर को मार रहे हैं तो यह अच्छा सपना नहीं है क्योंकि सफेद सूअर को भाग्य से जोड़कर या धन से जोड़कर देखा जाता है नशे में यदि आप सपने में उसे मारता हुआ देख रहे हैं तो आप अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाले हैं अर्थात भविष्य में आप ऐसा कार्य करने वाले हैं जिससे आपको हानि हो सकती है ऐसा कोई भी कार्य करने से बचें जिसमें बहुत ज्यादा रिस्क हो। सपने में सफेद गंदा सूअर देखना यदि आप सपने में सफेद सूअर को कीचड़ में हुआ या फिर मल खाते हुआ देखते हैं तो इसका यह अर्थ है Sapne Mai Suar Dekhna कि आने वाले समय में आपको किसी तरह की कोई बेज्जती झेलनी पड़ सकती है। या आपके द्वारा किए गए कार्य को समाज अप्रिशिएट नहीं करेगा। आपके किसी कार्य को लेकर आपकी इज्ज़त पर दाग लग सकता है।

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Vat Savitri 2025 in UP:पहली बार रख रही हैं वट सावित्री व्रत ? तो यहां जानें पूजा विधि से लेकर संपूर्ण सामग्री

Vat Savitri 2025 in UP:इस साल 26 मई 2025 को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। आप पहली बार वट सावित्री व्रत रखने वाली हैं तो आपको वट सावित्री व्रत के पूजन सामग्री, पूजा मुहूर्त, कथा, पूजन की विधि आदि के बारे में सही से जानना चाहिए. इसके बारे में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं विस्तार से. Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जिसे हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। Vat Savitri 2025 in UP इसके अलावा सुहागिनें पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और तरक्की के लिए निर्जला उपावस भी रखती है। मान्यता है कि इसी दिन देवी सावित्री ने अपनी कठोर तपस्या से पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे। इसलिए इस तिथि पर उनकी पूजा और त्याग का स्मरण किया जाता है। यदि वट सावित्री के दिन सच्चे भाव से वट वृक्ष की उपासना की जाए, तो वैवाहिक जीवन सुखमय और रिश्तों में प्रेम बढ़ता है। भारत में हर साल इस व्रत को बड़े प्रेम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। Vat Savitri 2025 in UP हालांकि इसकी खास रौनक उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में देखने को मिलती है। यहां सभी महिलाएं एकजुट होकर वट वृक्ष की पूजा करते हुए कथा सुनती हैं। Vat Savitri 2025 in UP इसे बड़मावस, बरगदाही और वट अमावस्या भी कहते हैं। इस साल 26 मई 2025 को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि और सामग्री के बारे में विस्तार से जानते हैं। Vat Savitri 2025 in UP Vrat ki Puja Samagri List वट सावित्री व्रत की पूजा सामग्री लिस्ट 1. रक्षा सूत्र, कच्चा सूत,2. बरगद का फल, बांस का बना पंखा,3. कुमकुम, सिंदूर, फल, फूल, रोली, चंदन4. अक्षत्, दीपक, गंध, इत्र, धूप5. सुहाग सामग्री, सवा मीटर कपड़ा, बताशा, पान, सुपारी6. सत्यवान, देवी सावित्री की मूर्ति7. वट सावित्री व्रत कथा और पूजा विधि की पुस्तक8. पानी से भरा कलश, नारियल, मिठाई, मखाना आदि9. घर पर बने पकवान, भींगा चना, मूंगफली, पूड़ी, गुड़,10. एक वट वृक्ष वट सावित्री व्रत की पूजा विधि Vat Savitri Vrat Ki Puja Vidhi वट सावित्री के दिन महिलाएं सुबह स्नान करें। फिर साफ लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें। इस दौरान पूरा सोलह श्रृंगार अवश्य करें। अब वट वृक्ष के पास सावित्री और सत्यवान की तस्वीर को स्थापित कर दें। इसके बाद वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें। कुछ ताजा फूल चढ़ाएं। अक्षत, भीगा चना व गुड़ अर्पित करें। अब आप वट के वृक्ष पर सूत लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें। परिक्रमा पूरी करने के बाद वृक्ष का प्रणाम करें।  अब हाथ में चने लेकर वट सावित्री की कथा पढ़ें।  अंत में फल और वस्त्रों का दान करें और पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे। वट सावित्री व्रत कथा Vat Savitri Vrat Katha स्कंद पुराण में वट सावित्री व्रत की कथा के बारे में वर्णन मिलता है, Vat Savitri 2025 in UP जिसमें देवी सावित्री के पतिव्रता धर्म के बारे में बताया गया है. देवी सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था, लेकिन वे अल्पायु थे. एक बार नारद जी ने इसके बारे में देवी सावित्री को बता दिया और उनकी मृत्यु का दिन भी बता दिया. सावित्री अपने पति के जीवन की रक्षा के लिए व्रत करने लगती हैं. वे अपने पति, सास और सुसर के साथ जंगल में रहती थीं. जिस दिन सत्यवान के प्राण निकलने वाले थे, उस दिन वे जंगल में लकड़ी काटने गए थे, तो उनके साथ सावित्री भी गईं. उस दिन सत्यवान के सिर में तेज दर्द होने लगा और वे वहीं पर बरगद के पेड़ के नीचे लेट गए. Vat Savitri 2025 in UP देव सावित्री ने पति के सिर को गोद में रख लिया. कुछ समय में यमराज वहां आए और सत्यवान के प्राण हरकर ले जाने लगे. उनके पीछे-पीछे सावित्री भी चल दीं. यमराज ने उनको समझाया कि सत्यवान अल्पायु थे, इस वजह से उनका समय आ गया था. Vat Savitri 2025 in UP तुम वापस घर चली जाओ. पृथ्वी पर लौट जाओ. लेकिन सावित्री नहीं मानीं. उनके पतिव्रता धर्म से खुश होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए, जिससे सत्यवान फिर से जीवित हो उठे. ज्येष्ठ अमावस्य तिथि को यह घटनाक्रम हुआ था और अपने पतिव्रता धर्म के लिए देवी सावित्री प्रसिद्ध हो गईं. उसके बाद से ज्येष्ठ अमावस्य को ज्येष्ठ देवी सावित्री की पूजा की जाने लगी. वट वृक्ष में त्रिदेव का वास होता है और सत्यवान को वट वृक्ष के नीचे ही जीवनदान मिला था. इस वज​​ह से इस व्रत में वट वृक्ष, सत्यवान और देवी सावित्री की पूजा करते हैं.

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Vat Savitri Vrat Puja Vidhi:वट सावित्री व्रत इन चीजों के बिना रह जाएगा अधूरा, अभी देख लें पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

Vat Savitri Vrat Puja Vidhi:वट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाओं के द्वारा रखा जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को रखने का विधान है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर सुखी दांपत्य जीवन और पारिवारिक सुख की कामना करती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करके आपकी सभी कामनाएं पूरी हो सकती हैं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे वट सावित्री व्रत की पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के बारे में।  वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री Vat Savitri Vrat Pooja Material Vat Savitri Vrat Puja Vidhi:वट सावित्री व्रत की पूजा विधि वट सावित्री के दिन सुबह जल्दी उठकर व्रतियों को स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके बाद वट वृक्ष के पास पहुंचकर सबसे पहले सत्यवान, सावित्री की तस्वीर या प्रतिमा वट वृक्ष की जड़ पर स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद धूप, दीप जलाना चाहिए और उसके बाद फूल, अक्षत आदि आर्पित करना चाहिए। इस के उपरांत कच्चे सूत को लेकर कवट वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करनी चाहिए। इसके बाद अपने हाथ में भीगा हुआ चना आपको लेना चाहिए और वट सावित्री व्रत की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपको वस्त्र और भीगा हुआ चना अपनी सास को भेंट करना चाहिए, और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। इसके बाद वट वृक्ष का फल खाकर व्रत आपको तोड़ना चाहिए। Vat Savitri Vrat Puja Vidhi व्रत तोड़ने के बाद सामर्थ्य अनुसार आपको दान भी करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि वट सावित्री व्रत के बाद दान करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।  इस व्रत में क्यों होती है बरगद की पूजा Why is banyan tree worshiped during this fast?  Vat Savitri Vrat Puja Vidhi:वट वृक्ष (बरगद) एक देव वृक्ष माना जाता है. ब्रह्मा, विष्णु, महेश और ,सावित्री भी वट वृक्ष में रहते हैं. प्रलय के अंत में श्री कृष्ण भी इसी वृक्ष के पत्ते पर प्रकट हुए थे. तुलसीदास ने वट वृक्ष को तीर्थराज का छत्र कहा है. ये वृक्ष न केवल अत्यंत पवित्र है बल्कि काफी ज्यादा दीर्घायु वाला भी है. लंबी आयु, शक्ति, धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर इस वृक्ष की पूजा होती है. पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस वृक्ष को ज्यादा महत्व दिया गया है.  क्या करें विशेष? What to do special ? Vat Savitri Vrat Puja Vidhi:एक बरगद का पौधा जरूर लगवाएं. बरगद का पौधा लगाने से पारिवारिक और आर्थिक समस्या नहीं होगी. निर्धन सौभाग्यवती महिला को सुहाग की सामग्री का दान करें. बरगद की जड़ को पीले कपड़े में लपेटकर अपने पास रखें. वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा का महत्व Importance of worshiping banyan tree in Vat Savitri fast पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमराज ने माता सावित्री के पति के पाण वट वृक्ष के नीचे ही लौटाये थे। Vat Savitri Vrat Puja Vidhi इसके साथ ही यमराज ने सावित्री को 100 पुत्रों की प्राप्ति का वरदान भी दिया था। माना जाता है कि तब से ही वट सावित्री व्रत रखने की परंपरा शुरू हई और साथ ही वट वृक्षी की भी पूजा की जाने लगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति वट सावित्री का व्रत रखता है और इस दिन वट वृक्ष की परिक्रमा करता है उसे यमराज की कृपा के साथ ही त्रिदेवों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। Vat Savitri Vrat Puja Vidhi इस व्रत के प्रभाव से दांपत्य जीवन तो सुखी रहता ही है, साथ ही योग्य संतान की प्राप्ति भी होती है। इसलिए आज भी महिलाओं के द्वारा इस दिन व्रत रखा जाता है। Vat Savitri Vrat Katha Hindi: इस कथा के बिना अधूरा है वट सावित्री व्रत,वट वृक्ष का क्या है महत्व जान लीजिए ? Vat Savitri Vrat 2025 Date: वट सावित्री का व्रत कैसे रखें कब किया जाएगा वट सावित्री व्रत ? अभी नोट करें डेट और पूजा सामग्री लिस्ट

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