May 1, 2025

सोमेश्वर महादेव मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

हजारों साल पहले सोमेश्वर की स्थापना यमुना तट पर जंगल और घने वनों के बीच हुई थी। सोमेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यमुना तट पर स्थित है। इस मंदिर की गिनती संगमनगरी के प्राचीन मंदिरों में की जाती है, जिसकी महिमा पौराणिक कालों से बताई जाती है। मान्यता है कि सोमेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना के लिए स्वयं भगवान शिव ने चंद्रमा को इसे स्थापित करने को कहा था और उनके ही कहने पर चंद्र देव ने सोमेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना की थी। चंद्रदेव द्वारा स्थापित किये जाने और यहीं उनका कुष्ठरोग ठीक होने की वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु निरोगी होने की कामना के साथ यहां पूजन-अर्चन करने के लिए आते हैं। Someswarar Temple:मंदिर का इतिहास हजारों साल पहले सोमेश्वर की स्थापना यमुना तट पर जंगल और घने वनों के बीच हुई थी। इस मंदिर की स्थापना स्वयं चंद्रमा द्वारा की गई थी और भगवान शंकर की आराधना कर चंद्रमा को अपने क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। ऐसी पौराणिक कथा बताई जाती है कि राजा दक्ष प्रजापति ने जब चंद्रमा को श्राप दिया तो उससे चंद्रमा कुरूप होकर छय रोग से ग्रसित हो गए, श्राप मुक्त होने के लिए उन्होंने भगवान शिव की ज्योतिर्लिंग की स्थापना कर उनकी आराधना की थी। सोमेश्वर महादेव मंदिर का महत्व सोमेश्वर नाथ मंदिर के बारे में बताया जाता है कि इसके चंद्र कुंड में जो भक्त एक माह तक स्नान कर भगवान भोलेनाथ की आराधना करता है उसे क्षय रोग से मुक्ति मिल जाती है। ग्रंथों की माने तो चंद्रदेव श्राप की वजह से कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गये थे, सोमेश्वर महादेव मंदिर तब भोलेनाथ ने उन्हें इस रोग से मुक्ति का आशीर्वाद दिया था। ऐसी कहा जाता है कि सोमेश्वर नाथ मंदिर के गुंबद पर लगा त्रिशूल पूर्णिमा और अमावस्या को अपनी दिशा बदलता है और जिस तरफ चन्दमा रहता है उधर त्रिशूल घूम जाता है। सोमेश्वर महादेव मंदिर की वास्तुकला सोमेश्वर नाथ मंदिर को नागर शैली में बनाया गया है। मंदिर के शीर्ष पर विशाल शिखर और गुंबद बना है। शिखर के ठीक नीचे गर्भ गृह भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। मंदिर का गर्भ गृह छोटा है और उसमे संगमरमर लगा है। मंदिर एक प्रवेश द्वार है और ठीक सामने सीढ़ियां बनीं हैं। सोमेश्वर नाथ मंदिर में एक चंद्र कुंड बना है। मंदिर के ऊपर छत्र पर त्रिशूल लगा है जो चंद्रमा के पृथ्वी के चक्कर लगाने के अनुसार ही अपना कोड़ बदलता है। सोमेश्वर महादेव मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद सोमेश्वर नाथ मंदिर में शिव जी को फल, ड्राई फ्रूट्स,लड्डू, पेड़े का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु भगवान भोले नाथ को भांग, धतूरा, बेलपत्र और दूध भी चढ़ाते हैं।

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शंकर विमान मण्डपम:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

मंदिर भगवान शिव को समर्पित है इसलिए यह ‘शंकर विमान मंडपम’ कहलाता है। शंकर विमान मण्डपम भारत के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में स्थित है। त्रिवेणी संगम के उत्तर में बने इस तीन मंजिला मंदिर को आदि शंकराचार्य की स्मृति में बनाया गया है। शंकर विमान मंडपम भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। इसके प्रथम तल कांचिकामकोटि पीठ की आराध्य कामाक्षी देवी को समर्पित है। द्वितीय तल विष्णु भगवान के बाला जी स्वरूप पर आधारित है। शंकर विमान मण्डपम वहीं तृतीय तल योग सहस्त्र लिंग एक पत्थर में है। एक पत्थर में एक हजार शिवलिंग एवं रुद्राक्ष का मंडप बना है। श्रद्धालु मंदिर में पूजन-अर्चना कर अपनी मनोकामना मांगते है, जिसे भोलेनाथ पूरा करते हैं। Shankar Viman Mandapam:शंकर विमान मण्डपम मंदिर का इतिहास शंकर विमान मंडपम की नींव 1969 में रखी गई थी। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर 17 मार्च 1986 को खोला गया। शंकर विमान मंडपम को बनने में करीब 16 साल का समय लगा था। तीन मंजिला मंदिर का निर्माण कांचिकामकोटि 69वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने अपनी गुरु की इच्छापूर्ति के लिए कराया था। मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी कांचिकामकोटि मठ के पास है। मंदिर के दूसरे तथा तीसरे तल से त्रिवेणी संगम का नजारा अद्भुत नज़र आता है, जिसे देखने श्रद्धालु सुबह-शाम पहुंचते हैं। शंकर विमान मण्डपम मंदिर का महत्व चार खण्डों में शंकर विमान मंडपम 130 फीट ऊंचा है। मंदिर में कुमारिल भट्ट, जगतगुरु शंकराचार्य, कामाक्षी देवी (51 शक्तिपीठ समेत) और योगसहस्त्र सहस्त्रयोग लिंग (108 शिवलिंग हैं आसपास) स्थित हैं। शंकर विमान मंडपम मंदिर के प्रत्येक तल पर मुख्य मूर्तियों के कक्ष के बाहर काले रंग के द्वारपाल की मूर्तियां लगी हैं, जिसमें तमिल तथा हिंदी दोनों भाषाओं में श्री द्वारपाल लिखा है। शंकर विमान मंडपम मंदिर की दीवारों तथा छतो पर उकेरी गई मूर्तियां रामायण तथा शिव की कहानियों को बयां करती है। शंकर विमान मण्डपम मंदिर की वास्तुकला प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर बना शंकर विमान मंडपम द्रविड़ शैली में बना है। द्रविड़ संस्कृति में ही मंदिर का प्रवेश बना है, जो कि 16 विशाल खंभो पर बना है। मंदिर का गुंबद ‘विमान’ कहलाता है जिसे सीढ़ी दार पिरामिड की तरह बनाया जाता है जो ऊपर की ओर ज्यामिति रूप से उठा होता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है इसलिए यह ‘शंकर विमान मंडपम’ कहलाता है। चार मंजिला इस मंदिर की बनावट दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 01:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद शंकर विमान मंडपम में शिव जी को फल, ड्राई फ्रूट्स,लड्डू, पेड़े का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु भगवान भोले नाथ को भांग, धतूरा, बेलपत्र और दूध भी चढ़ाते हैं।

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Narad Jayanti 2025 date Hindi:मई महीने की इस तारीख को है नारद जयंती, यहां जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

Narad Jayanti 2025 date Hindi:देवर्षि नारद को श्रुति-स्मृति, इतिहास, पुराण, व्याकरण, वेदांग, संगीत, खगोल-भूगोल, ज्योतिष और योग जैसे कई शास्त्रों का विद्वान माना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं इस साल नारद जयंती कि तिथि और शुभ मुहूर्त क्या है… Narad Jayanti 2025 date Hindi:नारद जयंती के बारे में नारद जयंती महान देवर्षि नारद मुनि की जयंती के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष द्वितीया को आता है। Narad Jayanti 2025 date Hindi नारद मुनि ब्रह्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं और वे देवताओं तथा असुरों के बीच संवाद सेतु हैं। इस दिन भक्ति, संगीत और ज्ञान का विशेष महत्व होता है। Narada Jayanti 2025:नारद जयंती 2025 वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष तिथि में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन नारद मुनि का जन्म हुआ था। Narad Jayanti 2025 date Hindi आज हम आपको नारद मुनि का सनातन धर्म में महत्व, जन्म कथा और पूजा विधि की जानकारी देंगे लेकिन उससे पहले नारद जयंती से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी आपके साथ साझा कर देते हैं। Date and time of Narada Jayanti:नारद जयंती की तिथि एवं मुहूर्त नारद जयंती तिथि : 13 मई 2025, मंगलवार प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 12 मई, 2025 को 10:25 पी एम बजे से प्रतिपदा तिथि समाप्त – 14 मई, 2025 को 12:35 ए एम बजे तक Importance of Narad Muni in Sanatan Dharma:नारद मुनि का सनातन धर्म में महत्व Narad Jayanti 2025 date Hindi:भगवान विष्णु के परम भक्त और भगवान ब्रह्मा के पुत्र नारद मुनि से जुड़ी पौराणिक कथाएं पुरातन काल से ही कही सुनी जाती रही हैं। नारद जी को भगवान ब्रह्मा के छह पुत्रों में से छठवां पुत्र माना जाता है। नारद मुनि को सभी ऋषियों के बीच देवर्षि का दर्जा प्राप्त है। यानि कि नारद मुनि देवलोक के ऋषि माने जाते हैं। नारद मुनि की महत्ता इसी बात से समझ में आती है कि न सिर्फ देवता ही उनका सम्मान करते थे बल्कि असुरों के बीच भी उनका बेहद मान-सम्मान था। Narad Jayanti 2025 date Hindi भगवान कृष्ण ने नारद मुनि का जिक्र श्रीमद्भगवद्गीता में करते हुए कहा गया है कि, देवर्षीणाम् च नारद: अर्थात देवर्षियों में मैं नारद हूँ। देवर्षि नारद को श्रुति-स्मृति, इतिहास, पुराण, व्याकरण, वेदांग, संगीत, Narad Jayanti 2025 date Hindi खगोल-भूगोल, ज्योतिष और योग जैसे कई शास्त्रों का प्रकांड विद्वान माना जाता है। देवर्षि नारद के सभी उपदेशों का निचोड़ है- सर्वदा सर्वभावेन निश्चिन्तितै: भगवानेव भजनीय:। अर्थात् सर्वदा सर्वभाव से निश्चित होकर केवल भगवान का ही ध्यान करना चाहिए। नारद जयंती शुभ मुहूर्त 2025 – Narad Jayanti auspicious time 2025 ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 04 मिनट ए एम से 04 बजकर 46 मिनट ए एम तक प्रातः सन्ध्या 04 बजकर 25 ए एम से 05 बजकर 28 मिनट ए एम तक अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 46 मिनट ए एम से 12 बजकर 40 मिनट पी एम तक विजय मुहूर्त  02 बजकर 29 मिनट पी एम से 03 बजकर 23 मिनट पी एम तक गोधूलि मुहूर्त  06 बजकर 58 मिनट पी एम से 07 बजकर 19 मिनट पी एम तक सायाह्न सन्ध्या 06 बजकर 59 मिनट पी एम से 08 बजकर 02 मिनट पी एम तक अमृत काल  12 बजकर 14 ए एम, मई 14 से 02 बजकर 01 मिनट  ए एम, तक (14 मई) निशिता मुहूर्त 11 बजकर 52 मिनट पी एम  से 12 बजकर 34 मिनट ए एम, तक (14 मई) नारद जयंती पर क्या करें – What to do on Narad Jayanti इस दिन आप अगर दान करते हैं तो आपको इसका पुण्य फल प्राप्त होगा. माना जाता है Narad Jayanti 2025 date Hindi इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने से पुण्य फल प्राप्त होता है. साथ ही इस दिन जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा भी करना चाहिए, इसे इससे जीवन में सुख समृद्धि आती है.  कौन है नारद मुनि –  Importance of Sage Narad in Sanatan Dharma आपको बता दें कि नारद मुनि ऐसे हैं जिनके हाथ में किसी तरह का अस्त्र नहीं है.  इनके एक हाथ में वीणा और एक में वाद्य यंत्र होता है.  नारद मुनि देवताओं और असुरों के बीच संदेशवाहक के रूप में काम करते हैं. Narad Jayanti 2025 date Hindi इस दिन को पत्रकार दिवस के रूप में भी लोग मनाते हैं.  आपको बता दें कि नारद मुनि ऐसे हैं, जो सभी लोकों में वास करते हैं. इनकी सवारो बादल है.  How was Narad Muni born:नारद मुनि का जन्म कैसे हुआ? पौराणिक शास्त्रों में नारद मुनि को भगवान ब्रह्मा जी का पुत्र बताया गया है। लेकिन भगवान ब्रह्मा के पुत्र रूप में पैदा होने की इस घटना का संबंध नारद मुनि के पूर्व जन्म से भी हैं। मान्यता है कि पूर्व जन्म में नारद मुनि एक गंधर्व थे। उनका नाम हुआ करता था। बेहद सुन्दर काया वाले उपबर्हण को अपने रूप पर बेहद घमंड था। कहा जाता है कि एक बार कुछ अप्सराएँ और गंधर्व गीत और नृत्य से ब्रह्मा जी की उपासना कर रहे थे तब उपबर्हण स्त्रियों के साथ वहां आए और रासलीला में लग गए। जिससे भगवान ब्रह्मा जी उन पर कुपित हो गए और उन्हें श्राप दिया Narad Jayanti 2025 date Hindi कि अगले जन्म में वे एक शूद्र दासी के यहाँ जन्म लेंगे। भगवान ब्रह्मा के श्राप से उपबर्हण का जन्म एक शूद्र दासी के यहाँ हुआ लेकिन बालक उपबर्हण ने बचपन से ही अपना पूरा जीवन भगवान की आराधना और उनकी खोज में लगा दिया। यह देख कर भगवान बहुत प्रसन्न हुए और अगले जन्म में उन्हें ब्रह्मा पुत्र होने का वरदान दिया। समय आने पर इनका जन्म ब्रह्मदेव के मानस पुत्र के रूप में हुआ जो नारद मुनि के नाम से चारों ओर प्रसिद्ध हुए। Donate on Narada Jayanti:नारद जयंती पर करें दान भगवान विष्णु के परम भक्त नारद जी के जन्म दिवस पर दान-पुण्य को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दिन दान जरूर करें। माना जाता है कि इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान-दक्षिणा देने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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Kurma Jayanti 2025 date:कूर्म जयंती कब और कैसे मनाएं आइए इसके महत्व के बारे में जानते हैं…

Kurma Jayanti 2025 date:कब और इसे क्यों मनाई जाती है। आइए इसके महत्व के बारे में जानते हैं… Kurma Jayanti 2025 date:अपनी परंपराओं और विरासत में समृद्ध होने के कारण भारत में कई सारे त्योहार मनाएं जाते हैं, इन्हीं त्योहारों में से एक है, कूर्म जयंती। कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) का त्योहार हिंदूओं के बीच काफी प्रसिद्ध है। इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु के कूर्म अवतार यानी उनके दूसरे अवतार की पूजा की जाती है। देश भर में लोग इस त्योहार को जीवन के प्रतीक के रूप में मानते हैं और इसे पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। समृद्धि और लंबी उम्र का आशीर्वाद पाने के लिए भगवान विष्णु के मंदिरों में कई अनुष्ठान और पूजा विधियां की जाती हैं। कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) 2025 तिथि हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) वैशाख महीने के दौरान पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। कूर्म जयंती 2025 की तिथि और तिथि का समय इस प्रकार है: कूर्म जयंती: सोमवार, मई 12, 2025कूर्म जयंती मुहूर्त: 04:34 पी एम से 07:12 पी एम पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: मई 11, 2025 को 08:01 पी एम बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: मई 12, 2025 को 10:25 पी एम बजे कुर्म जयंती (Importance of Kurma Jayanti ) का महत्व लोग कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) को उस दिन के रूप में मनाते हैं, जब भगवान विष्णु कूर्म (कछुआ) के रूप में अवतरित हुए थे। हिंदू किंवदंतियों के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि इस विशेष दिन पर, भगवान विष्णु ने ‘मंदरांचल पर्वत’ (पहाड़) को अपनी पीठ पर उठा लिया था। ऐसा कहा जाता है कि जब सागर मंथन किया जा रहा था, तब ‘मंदरांचल पर्वत’ का कोई आधार न होने के कारण वह समुद्र में डूबने लगा था, तभी भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लेकर उसे अपनी पीठ पर रखा। तब से, कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) को भगवान कूर्म के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। भगवान विष्णु के इस दूसरे अवतार की हिंदुओं द्वारा अत्यंत भक्ति और महिमा के साथ पूजा की जाती है। Kurma Jayanti 2025 date:कूर्म जयंती (Kurma Jayanti Story) कहानी Kurma Jayanti 2025 date:हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ‘क्षीर सागर मंथन’ के दौरान, ‘मंदरांचल पर्वत’ को मदानी के रूप में इस्तेमाल किया गया था और नागराज वासुकी को समुद्र मंथन के लिए रस्सी के रूप में लिया गया था। Kurma Jayanti 2025 date भगवान विष्णु ने अमरता का अमृत निकालने के लिए समुद्र मंथन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए असुरों के साथ देवों को बुलाया। लेकिन पहाड़ डूबने लगा, इसलिए भगवान विष्णु एक बड़े कछुए के रूप में प्रकट हुए और उसे अपनी पीठ पर ले गए। अगर कूर्म अवतार न होता तो मंथन की प्रक्रिया विफल हो जाती और देवताओं को 14 दिव्य उपहार नहीं मिलते। इसके अलावा, समुद्र मंथन ने ‘हलाहल’ नाम का एक विष भी निकाला, जिसे भगवान शिव ने ब्रह्मांड को आपदा और विनाश से बचाने के लिए सेवन किया था। Kurma Jayanti 2025 date उस समय से, कूर्म जयंती हिंदुओं के बीच अत्यधिक महत्व रखती है और लोग भगवान विष्णु की महिमा के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। How to celebrate Kurma Jayanti:कुर्मा जयंती कैसे मनाएं? भक्त कुर्मा जयंती को अत्यंत समर्पण और उत्साह के साथ मनाते हैं। Kurma Jayanti 2025 date इस विशेष दिन पर, भगवान विष्णु के विभिन्न मंदिरों में या पूजा स्थल पर विशेष समारोह और पूजा का आयोजन किया जाता है। कूर्मा जयंती के अनुष्ठान क्या हैं:(What are the rituals of Kurma Jayanti) Kurma Jayanti 2025 date अन्य हिंदू त्योहारों के समान, इस दिन सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान करना पवित्र माना जाता है। स्नान करने के बाद, भक्त साफ़ और सुथरे पूजा के वस्त्र पहनते हैं । भक्त भगवान विष्णु को चंदन, तुलसी के पत्ते, कुमकुम, अगरबत्ती, फूल और मिठाई का चढ़ावा चढ़ा कर पूजा और अर्चना करते हैं। श्री कूर्मा जयंती के व्रत का पालन अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। तो, भक्त इस विशेष दिन पर एक मौन व्रत या एक कठोर कुर्मा जयंती का व्रत रखते हैं। जो भक्त उपवास करते हैं, वे दाल या अनाज का सेवन करने से खुद को रोकते हैं और केवल दूध उत्पादों और फलों का सेवन करते हैं। कूर्म जयंती व्रत के पालन के दौरान, पर्यवेक्षक किसी भी तरह के पाप या बुराई करने के लिए प्रतिबंधित होते हैं और झूठ बोलने के लिए भी प्रतिबंधित होते हैं । प्रेक्षकों को रात्रि के समय सोने की अनुमति नहीं होती है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अपना पूरा समय मंत्रों को पढ़ने में लगाना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम‘ का पाठ करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। एक बार सभी अनुष्ठान समाप्त हो जाने के बाद, भक्त आरती करते हैं। कूर्म जयंती की पूर्व संध्या पर दान करना अत्यधिक फलदायक माना जाता है। Kurma Jayanti 2025 date पर्यवेक्षक को ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और पैसे दान करने चाहिए। कुर्मा जयंती के लिए अनुष्ठान(Rituals for Kurma Jayanti) Kurma Jayanti 2025 date सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान करें। साफ-सुथरे या पूजा वस्त्र धारण करें। धूप, तुलसी के पत्ते, चंदन, कुमकुम, फूल और मिठाई लेकर प्रसाद के साथ भगवान विष्णु की पूजा करके प्रार्थना करें। इस दिन व्रत करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसलिए, कई भक्त मौन उपवास या कठोर कूर्म जयंती व्रत करते हैं। व्रत के दौरान दाल या अनाज का सेवन वर्जित है और फलों के साथ केवल दुग्ध उत्पादों का ही सेवन किया जा सकता है। पूर्ण तपस्या करनी चाहिए और प्रेक्षकों को किसी भी प्रकार के पाप कर्म या झूठ बोलने से बचना चाहिए। रात के समय जागरण करें और पूरी रात भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप करें। प्रसिद्ध ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। सभी रस्में पूरी होने के बाद आरती करें। Kurma Jayanti 2025 date कूर्म जयंती के दिन आप दान या दान कर सकते हैं क्योंकि इससे अत्यधिक फल की प्राप्ति होती है। आप जरूरतमंद या ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े, या धन सहित कुछ भी दान कर सकते हैं। कूर्म जयंती (Kurma Jayanti Mantra) मंत्र ॐ कूर्माय नम:ॐ हां ग्रीं कूर्मासने बाधाम नाशय नाशयॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम:ॐ ह्रीं कूर्माय वास्तु पुरुषाय स्वाहा

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