April 26, 2025

दत्ता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

मंदिर में दत्रात्रेय भगवान की पाषाण की प्रतिमा विराजमान है। दत्ता मंदिर:इंदौर मध्यप्रदेश के कान्ह नदी (खान) के समीप कृष्णपुरा छत्री के पास स्थित है दत्त मंदिर। दत्त मंदिर भगवान दत्तात्रेय को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान दत्तात्रेय विष्णु, महेश और ब्रह्मा का एक स्वरुप है। दत्ता मंदिर धर्म ग्रंथों में श्री दत्तात्रेय भगवान को विष्णु जी का छठा अवतार बताया गया है। भगवान दत्रात्रेय गुरु और भगवान दोनों का ही रूप है इसलिए इन्हे श्री गुरुदेवदत्त भी कहा जाता है। मंदिर का इतिहास दत्त मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो यह मंदिर 700 साल पुराना है। इंदौर शहर के अस्तित्व में आने से पहले से ही यह मंदिर स्थापित था। इस बात की पुष्टि होलकर रियासत के सूबेदार मल्हारराव होलकर ने मालवा आगमन से पूर्व की थी। माता अहिल्या बाई होल्कर भी इस मंदिर के दर्शन करने आती थी। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1896 में किया गया था। Shree Datta Mandir:मंदिर का महत्व ऐसा माना जाता है यदि कोई भक्त तीनों ईश्वरीय शक्तियों से निहित भगवान दत्तात्रेय की आराधना करता है तो उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। भक्त को दत्ता मंदिर भगवान दत्तात्रेय की आराधना से हर तरह की कठिनाई से मुक्ति मिल जाती है। छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके पुत्र औरंगजेब को चकमा देकर कुछ समय के लिए इसी दत्त मंदिर में सन्यासी के रूप में रहे थे। दत्ता मंदिर हर गुरुवार और दत्त जयंती पर मंदिर में श्रद्धालुओं का भीड़ रहती है। लोग दत्तात्रेय भगवान के दर्शन करने और अपनी कामना लेकर मंदिर आते है। भगवान उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। मंदिर की वास्तुकला दत्त मंदिर लकड़ी से निर्मित बहुत ही सुन्दर मंदिर है। मंदिर में दत्रात्रेय भगवान की पाषाण की प्रतिमा विराजमान है। दत्ता मंदिर में तीन मुख और 6 हाथ वाले त्रिदेव की मूर्ति है। उनके पीछे एक गाय और आगे चार कुत्ते रहते है। साथ ही आपको मंदिर में गूलर के वृक्ष के भी दर्शन करने को मिलेंगे। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 10:00 AM – 12:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद दत्त मंदिर में गुड़,चना और केले का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी चढ़ाये जाते है।

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Sapne Mai Saap Dekhna:अगर सपने में देखा है (Snake) सांप, तो समझिए कि जीवन में आने वाली हैं खुशियां

Sapne Mai Saap Dekhna:स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, सपने में दिखने वाले हर जीव का आपकी जिंदगी में होने वाली घटनाओं से जुड़ाव होता है. कुछ जीवन में खुशहाली आने की ओर इशारा करते हैं, तो कुछ किसी अनहोनी की ओर इशारा करते हैं. Dream Meaning: सनातन धर्म में स्वप्न शास्त्र का अधिक महत्व है। सपनों का इंसान के जीवन से गहरा संबंध है। कुछ सपने शुभ होते हैं, तो कुछ अशुभ माने जाते हैं। स्वप्न शास्त्र में सभी प्रकार के सपनों के बारे में बताया गया है। Sapne Mai Saap Dekhna सपने में सांप देखने से शुभ और अशुभ संकेत मिलते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में सांप देखने से धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में आने वाली परेशानियों के संकेत भी मिलते हैं। चलिए जानते हैं सपने में सांप देखने से किस तरह के संकेत मिलते हैं।   Swapna Shastra: सोते समय इंसान जो भी सपना देखता है, Sapne Mai Saap Dekhna उसका कोई न कोई मतलब जरूर होता है. सोते समय कुछ समय बहुत ही अच्छे आते हैं. कहीं अगर बीच में नींद टूट जाए तो मलाल रहता है कि पूरा सपना क्यों नहीं देख पाए. वहीं कुछ सपने ऐसे होते हैं, जो कि बहुत ही भयावह होता है. इंसान सपने को देखकर डर जाता है. कुछ लोग तो नींद में ही चिल्लाने लगते हैं. डर की वजह से इंसान की नींद खुल जाती है और कुछ देर तक उसे नींद नहीं आती है. इसके अलावा, कुछ लोगों को सपने में पशु-पक्षी और अलग-अलग तरह के जीव नजर आते हैं. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, सपने में दिखने वाले हर जीव का आपकी जिंदगी में होने वाली घटनाओं से जुड़ाव होता है. कुछ जीवन में खुशहाली आने की ओर इशारा करते हैं, Sapne Mai Saap Dekhna तो कुछ किसी अनहोनी की ओर इशारा करते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि सपने में सांप का दिखना, किस ओर इशारा करता है. क्या ख्वाब में सांप का दिखना शुभ माना जाता है या अशुभ. Sapne Mai Saap Dekhna:मिलते हैं ये संकेत अगर आपने सपने में रंग-बिरंगे सांप देखे हैं, तो यह सपना शुभ माना जाता है। Sapne Mai Saap Dekhna इस सपने का मतलब यह है कि आपके जीवन में खुशियों का आगमन होने वाला है और धन लाभ के योग बनेंगे।   अगर आप सपने में सांप को मार देते हैं, तो यह सपना शुभ माना जाता है। इस सपने का मतलब यह है कि आप जीवन में जल्द ही शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले हैं। इसके अलावा सपने में सफेद रंग के सांप को देखने से धन का लाभ होने वाला है। काले रंग के सांप को देखना अशुभ माना जाता है। इस सपने का मतलब यह है कि किसी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है और धन की कमी हो सकती है।     सपने में सांप का डसना अशुभ संकेत माना जाता है। यह सपना किसी बीमारी की चपेट में आने का इशारा करता है और कुंडली में पितृ दोष का भी सामना करना पड़ता है।   सपने में सांप के दांत देखना अशुभ माना जाता है। इसका मतलब यह है कि आपको जीवन में कोई नुकसान हो सकता है। ऐसे में आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है।   स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, सपने में अगर सांप दौड़ाते हुए नजर आए तो यह बहुत ही अशुभ संकेत होता है. यह माना जाता है कि इंसान के पीछे मुसीबत पड़ी हुई है. साथ ही यह भी मान्यता है कि घर या परिवार पर कोई मुसीबत आने वाली है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर आपके सपने में बार-बार सांप आ रहा है तो यह अशुभ होता है. Sapne Mai Saap Dekhna सपने में बराबर सांप का दिखना आपकी कुंडली में कालसर्प दोष या पितृ दोष की ओर इशारा करता है. ऐसे में व्यक्ति को इससे छुटकारा पाने के लिए पूजा करने की जरूर होती है.

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Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पर विवाह करना कितना शुभ होता है,जानिए महत्व और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय

Akshaya Tritiya 2025:इस वर्ष अक्षय तृतीया पर बहुत ही अच्छा योग बन रहा है। वैदिक ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस बार 100 साल बाद अक्षय तृतीया पर गजकेसरी राजयोग बन रहा है। Akshaya Tritiya Significance: हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का खास महत्व होता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-आराधना करने पर घर खुशियों और धन-दौलत से भर जाता है। Akshaya Tritiya 2025 अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना गया है Akshaya Tritiya 2025 यानी इस तिथि पर बिना मुहूर्त का विचार किए कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य किया जा सकता है। अक्षय तृतीया पर पूजा और दान करने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी से बने आभूषणों को खरीदने की परंपरा होती है।  Akshaya Tritiya 2025:शुभ योग में अक्षय तृतीया इस वर्ष अक्षय तृतीया पर बहुत ही अच्छा योग बन रहा है। वैदिक ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस बार 100 साल बाद अक्षय तृतीया पर गजकेसरी राजयोग बन रहा है। दरअसल अक्षय तृतीया पर चंद्रमा और देवगुरु बृहस्पति की युति होने से गजकेसरी योग का निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र में गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ योग माना गया है। इस अलावा अक्षय तृतीया पर मालव्य योग, धन योग, रवियोग, उत्तम योग और शश योग को मिलाकर कुल पांच महा शुभ योग बनेगा।  Importance of buying and donating gold on Akshaya Tritiya:अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने और दान करने का महत्व 10 मई को अक्षय तृतीया है। अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। इस तिथि पर हर तरह के शुभ कार्य बिना मुहूर्त के संपन्न किए जा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि Akshaya Tritiya 2025 अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी की पूजा करने और सोने-चांदी की चीजों को खरीदने से सौभाग्य और सुक फलों की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना, दान करना और पूजा-पाठ करने से सभी तरह के लाभ जातकों को मिलते हैं। अक्षय तृतीया पर मां गंगा और देवी अन्नपूर्णा का अवतरण त्रेता युग में इसी तिथि को हुआ था इसलिए अक्षय तृतीया पर मां अन्नपूर्णा और मां गंगा की भी विशेष पूजा होती है। इसके अलावा अक्षय तृतीया तिथि पर ही भगवान परशुराम का जन्म भी हुआ था।  Akshaya Tritiya 2025 अक्षय तृतीया पर महर्षि वेदव्यास ने Mahabharata epic महाभारत महाकाव्य की रचना की थी। अक्षय तृतीया के दिन ही उत्तराखंड में स्थिति बद्रीनाथ और केदारनाथ के पट खुलते हैं। अक्षय तृतीया पर गृह प्रवेश, विद्यारंभ, नए प्रतिष्ठान का शुभारंभ, नया कारोबार,जमीन, विवाह और वाहन आदि की खरीदारी करना शुभ होता है। अक्षय तृतीया पर गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है।  Remedies on Akshaya Tritiya:अक्षय तृतीया पर उपाय धन की प्राप्ति के लिए अक्षय तृतीया पर अपने पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की विधि-विधान पूर्वक पूजा करें। साथ ही, Akshaya Tritiya 2025 मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अक्षय तृतीया के दिन उन्हें कमल या गुलाब फूल अर्पित करें,एवं खीर का भोग लगाएं। ऐसा करने से जीवन में धन एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। Why is Akshaya Tritiya auspicious for marriage:अक्षय तृतीया विवाह के लिए क्यों शुभ है ? शास्त्रों के मुताबिक इस दिन विवाह करने से जीवन भर साथ रहने का वरदान मिलता है. इसी कारण मुहूर्तों में इस दिन को विशिष्टता हासिल है. अक्षय तृतीया पर शादी करने वालों का जीवन सदा सुखमय रहता है, पति-पत्नी के बीच प्रेमभाव बना रहता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि सूर्य और चंद्रमा इस दिन अपने सबसे उज्ज्वल चरण में रहते हैं. जिन दंपत्तियों का विवाह मुहूर्त साल भर में नहीं निकल पाता है वे अक्षय तृतीया के दिन बिना पंचांग और मुहूर्त देखे विवाह कर सकते हैं. अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त रहता है. Akshaya Tritiya 2025 अबूझ का मतलब है कि बिना मुहूर्त निकाले भी इस दिन शादी कर सकते हैं. auspicious defect:मांगलिक दोष जानकारों के अनुसार जिन लोगों की कुंडली नहीं मिलती लेकिन वह विवाह की इच्छा रखते हैं तो ऐसे में Akshaya Tritiya 2025 अक्षय तृतीया के दिन वह विवाह कर सकते हैं. कहा जाता है कि अक्षय तृतीया पर विवाह करके बेमेल कुंडली के सभी नकारात्मक प्रभावों से छुटकारा पा सकते हैं. Do these remedies for marriage on Akshaya Tritiya:विवाह के लिए अक्षय तृतीया पर करें ये उपाय भगवान शिव और माता पार्वती का रुद्राभिषेक करें. शिवालय में मिट्टी का घड़ा दान करें. अपने हाथों में एक नारियल लें. अपने इष्ट देवता को ध्यान में रखते हुए अपना नाम और गोत्र बोलें और पवित्र बरगद के पेड़ के चारों ओर सात चक्कर लगाएं. फिर, अपने विवाह में आने वाली बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए नारियल को उस पेड़ के नीचे छोड़ दें.

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Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story:अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है? जानें इस त्योहार को मनाने की वजह

Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story : हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया के त्योहार का विशेष महत्व होता है। यह पर्व हर साल वैशाख माह के  शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। अक्षय तृतीया पर विवाह, गृहप्रवेश और चीजों की खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन सोना-चांदी और इससे बने आभूषण की खरीदारी करते हैं। Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story:अक्षय तृतीया की तिथि स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त मानी गई है। इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का महत्व इसलिए काफी होता है क्योंकि इस तिथि पर कई पौराणिक घटनाएं घटित हुई थी। आइए जानते हैं अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में विस्तार से। Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story:अक्षय तृतीया का महत्व  Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story:अक्षय तृतीया को आखा तीज और कृतयुगादि तृतीया भी कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार त्रेता युग का आरंभ भी इसी तिथि को हुआ था। धार्मिक नजरिए से अक्षय तृतीया का विशेष महत्व होता है इसलिए इस युगादि तिथि के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन परशुराम का जन्म हुआ था। इस तिथि पर भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को अक्षय पात्र दिया था। अक्षय तृतीया के दिन ही मां गंगा आक अवतरण हुआ था। मान्यता है कि इस दिन स्नान,दान,जप,होम,स्वाध्याय, तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं,वे सब अक्षय हो जाते हैं। अक्षय तृतीया तिथि पर सोना खरीदने का विशेष महत्व होता है।  Why is the festival of Akshaya Tritiya celebrated:अक्षय तृतीया का पर्व क्यों मनाया जाता है? Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story:धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम, हयग्रीव और नर-नारायण का अवतरण धरती पर हुआ था. ये तीनों ही श्रीहरि विष्णु के अवतार माने गए हैं. ऐसा माना जाता है कि इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत भी हुई थी. वहीं, मान्यता यह भी है कि इसी दिन पर द्वापर युग का समापन भी हुआ था. अक्षय तृतीया को मुख्य रूप से इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका अक्षय फल (असीम और कभी न खत्म होने वाला) प्राप्त होता है. अक्षय तृतीया तिथि इसलिए खास मानी जाती है, क्योंकि इसमें हर तरह के कार्य करना शुभ होता है और इसका फल हमेशा के लिए रहता है. Akshaya Tritiya Story: इस साल 2025 में अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल को मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया के त्योहार का विशेष महत्व माना गया है. हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है. Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story अक्षय तृतीया के दिन विवाह, गृह प्रवेश और कई चीजों की खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है. वहीं, इस दिन सोना-चांदी की खरीदारी करना भी लाभकारी माना गया है. ज्योतिष के अनुसार अक्षय तृतीया की तिथि स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त मानी गई है यानी इस दिन कोई भी शुभ-मांगलिक कार्य बिना शुभ मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं. Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story:धार्मिक मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का महत्व इसलिए काफी होता है क्योंकि इस तिथि से कई पौराणिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं. आइए जानते हैं अक्षय तृतीया का पर्व क्यों मनाया जाता है और इसका महत्व क्या है. When is Akshaya Tritiya in 2025:में अक्षय तृतीया कब है? Akshaya Tritiya Kyu Manate Hai Story:हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 5:31 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 30 अप्रैल को दोपहर 2:12 मिनट पर होगा. ऐसे में अक्षय तृतीया इस वर्ष 30 अप्रैल, दिन बुधवार को मनाई जाएगी. इस तिथि को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है.

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Akshaya Tritiya 2025 date and time:अक्षय तृतीया कब है, जानें मुहूर्त और महत्व

Akshaya Tritiya 2025 date and time:अक्षय तृतीया को शास्त्रों में युगादि तिथि माना गया है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है। इस दिन किसी भी समय शुभ कार्य किए जा सकते हैं। सोना, संपत्ति, भवन, वाहन आदि खरीदना शुभ माना जाता है। Akshaya Tritiya 2025 date and time नया कार्य शुरू करना मंगलकारी होता है। इस दिन किए गए कार्यों का क्षय नहीं होता है इसलिए इस दिन अच्छे कर्म करने चाहिए। अक्षय तृतीया कब है और इसका महत्व क्या है, विस्तार से जानिए। अक्षय तृतीया 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2025 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 05 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 30 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर तिथि खत्म होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय तिथि का विशेष महत्व है। ऐसे में इस बार 30 अप्रैल को (Kab Hai Akshaya Tritiya 2025) अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। Akshaya Tritiya 2025 date and time अक्षय तृतीया के दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 41 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय साधक पूजा-अर्चना कर सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 15 मिनट से 04 बजकर 58 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 24 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग – पूरे दिन गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 16 मिनट तक अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व (Akshaya Tritiya 2025 Significance) अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर दान करने का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इस दिन दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। Akshaya Tritiya 2025 date and time पौराणिक कथा के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि यानी अक्षय तृतीया से सतयुग की शुरुआत हुई थी। मान्यता है कि अक्षय तृतीया से ही वेद व्यास जी ने महाभारत को लिखने की शुरुआत की थी।इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम जी का जन्म हुआ था। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम माने जाते हैं। Akshaya Tritiya 2025 date and time आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि और राजकुमारी रेणुका के पुत्र थे। अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। Akshaya Tritiya 2025 date and time:अक्षय तृतीया कब मनाई जाएगी 29 अप्रैल को शाम 5.32 बजे से तृतीया तिथि शुरू होगी और 30 अप्रैल को दोपहर 2.13 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी। उदया तिथि की वजह से अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, दिन बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है इसलिए कोई भी काम कभी भी शुरू किया जा सकता है। सोना, संपत्ति या वाहन की खरीदारी की जा सकती है। शास्त्रों में इसे युगादि तिथि कहा गया है, यानी इस दिन युग की शुरुआत हुई थी इसलिए इस दिन कोई मुहूर्त दोष नहीं माना जाता है। Akshaya Tritiya Story: इस साल 2025 में अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल को मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया के त्योहार का विशेष महत्व माना गया है. हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है. अक्षय तृतीया के दिन विवाह, गृह प्रवेश और कई चीजों की खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है. Akshaya Tritiya 2025 date and time वहीं, इस दिन सोना-चांदी की खरीदारी करना भी लाभकारी माना गया है. ज्योतिष के अनुसार अक्षय तृतीया की तिथि स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त मानी गई है यानी इस दिन कोई भी शुभ-मांगलिक कार्य बिना शुभ मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का महत्व इसलिए काफी होता है क्योंकि इस तिथि से कई पौराणिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं. आइए जानते हैं अक्षय तृतीया का पर्व क्यों मनाया जाता है और इसका महत्व क्या है.

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