January 14, 2025

Mahakumbh 2025 Shahi Snan Date: देश का सबसे बड़ा धार्मिक मेला महाकुंभ आज से शुरू, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और सही नियम

Mahakumbh 2025 Shahi Snan Shubh Muhurat: प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत के साथ पहला शाही स्नान किया जाएगा. इस मेले में देश विदेश से भारी संख्या में लोग शमिल होने वाले हैं. आइए जानते हैं महाकुंभ के पहले शाही स्नान के शुभ मुहूर्त और नियम के बारे में. Mahakumbh 2025: प्रयागराज में आज से महाकुंभ की शुरुआत हो गई है. हिंदू धर्म में प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण है. यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का संगम होता है, जिसे ‘त्रिवेणी संगम’ कहा जाता है. महाकुंभ का आयोजन भारत में चार जगहों प्रयागराज, नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में होता है. इन पवित्र स्थलों पर होने वाले महापर्व का साधु-संतों और श्रद्धालुओं को बेसब्री से इंतजार होता है. कहते हैं कि महाकुंभ में त्रिवेणी घाट पर स्नान करने से व्यक्ति को जीवन के समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है, जिससे आत्मा और शरीर दोनों ही शुद्ध हो जाता है. इसके साथ ही बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाही स्नान का नाम बदलकर अमृत स्नान और नगर प्रवेश कर दिया है. पहले शाही स्नान का शुभ मुहूर्त| Mahakumbh 2025 Shahi Snan Shubh muhurat महाकुंभ का पहला स्नान पौष पूर्णिमा तिथि को होगा. वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सोमवार, 13 जनवरी को सुबह 5 बजकर 3 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 14 जनवरी को रात 3 बजकर 56 मिनट पर होगा. वहीं शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 27 मिनट से लेकर 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 15 मिनट से लेकर 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा गोधूलि मुहूर्त- शाम 5 बजकर 42 से लेकर 6 बजकर 09 तक रहेगा निशिता मुहूर्त- रात 12 बजकर 03 से लेकर 12 बजकर 57 तक रहेगा शाही स्नान की अन्य तिथियां |Mahakumbh 2025 Shahi Snan Dates प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मे आज पहला शाही स्नान होगा. इसके बाद अन्य शाही स्नान की तिथियां कुछ इस प्रकार हैं- शाही स्नान का नियम |Mahakumbh 2025 Shahi Snan Niyam महाकुंभ में शाही स्नान के कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है. महाकुंभ में सबसे पहले नागा साधु स्नान करते हैं. नागा साधुओं को स्नान करने की प्राथमिकता सदियों से चली आ रही है. इसके पीछे एक धार्मिक मान्यता है. इसके अलावा गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए महाकुंभ में स्नान के नियम कुछ अलग हैं. गृहस्थ लोगों नागा साधुओं बाद ही संगम में स्नान करना चाहिए. स्नान करते समय 5 डुबकी जरूर लगाएं, तभी स्नान पूरा माना जाता है. स्नान के समय साबुन या शैंपू का इस्तेमाल न करें. क्योंकि इसे पवित्र जल को अशुद्ध करने वाला माना जाता है. यहां जरूर करें दर्शन महाकुंभ में शाही स्नान-दान के बाद बड़े हनुमान और नागवासुकि का दर्शन जरूर करना चाहिए. मान्यता है कि शाही स्नान के बाद इन दोनों में से किसी एक मंदिर के दर्शन करने से महाकुंभ की धार्मिक यात्रा अधूरी मानी जाती है. महाकुंभ पर 144 साल बनेगा ये शुभ संयोग इस बार का महाकुंभ बहुत खास है क्योंकि ज्योतिष की मानें तो 144 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है। समुद्र मंथन के समय सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की जो स्थिति थी, वही इस बार भी बन रही है। इसके साथ ही इस बार रवि योग और भद्रावास योग भी बन रहे हैं। इन योगों में पूजा-पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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साध्वी कैसे बनती हैं? – वेदों के प्रमाण सहित विस्तृत जानकारी

साध्वी बनने का अर्थ है अपने जीवन को धर्म, तपस्या और अध्यात्म के मार्ग पर समर्पित करना। भारतीय संस्कृति और वेदों में साध्वी बनने की प्रक्रिया का उल्लेख मिलता है, जिसमें संकल्प, दीक्षा, ब्रह्मचर्य पालन और संन्यास ग्रहण जैसी आवश्यक विधियाँ शामिल हैं। आइए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करें। 1. साध्वी बनने का संकल्प (Sankalp) साध्वी बनने के लिए सबसे पहले संकल्प लिया जाता है। यह संकल्प एक दृढ़ निश्चय होता है कि व्यक्ति अपने जीवन को तपस्या और सेवा में समर्पित करेगा। वेदिक प्रमाण: यजुर्वेद 40.1 में उल्लेख है – “ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।” इसका अर्थ है कि पूरे जगत में ईश्वर का वास है, और त्याग का मार्ग अपनाकर ईश्वर की सेवा में जीवन समर्पित करना चाहिए। 2. दीक्षा (Diksha) दीक्षा का अर्थ है गुरु द्वारा दिए गए धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन को स्वीकार करना। साध्वी बनने के लिए दीक्षा अनिवार्य है, जिसमें गुरु व्यक्ति को साध्वी जीवन के नियम और अनुशासन सिखाते हैं। वेदिक प्रमाण: तैत्तिरीय उपनिषद में कहा गया है, “शिक्षा और दीक्षा के द्वारा ही व्यक्ति अपने जीवन का उद्देश्य प्राप्त करता है।” यह प्रक्रिया साध्वी बनने के मार्ग में महत्वपूर्ण होती है। 3. ब्रह्मचर्य पालन (Brahmacharya Palan) साध्वी बनने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक होता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति शारीरिक और मानसिक शुद्धता का पालन करता है, जिसमें सांसारिक इच्छाओं से दूर रहना शामिल है। वेदिक प्रमाण: मनुस्मृति 6.1-2 में उल्लेख है, “ब्रह्मचर्येण तपसा…” इसका अर्थ है कि ब्रह्मचर्य और तपस्या के माध्यम से ही व्यक्ति साध्वी जीवन को प्राप्त करता है। 4. संन्यास ग्रहण (Sannyas Grahan) साध्वी बनने की अंतिम और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है संन्यास ग्रहण करना। इसमें व्यक्ति संसार के बंधनों से मुक्त होकर पूरी तरह से ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाता है। वेदिक प्रमाण: भगवद गीता 6.1 में कहा गया है, “अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः”। इसका अर्थ है कि जो बिना फल की इच्छा के कर्म करता है, वही सच्चा सन्यासी है। 5. धार्मिक अनुष्ठान और सेवा (Dharmik Anushthan aur Seva) साध्वी बनने के बाद व्यक्ति को धार्मिक अनुष्ठानों और समाज सेवा में संलग्न रहना होता है। यह सेवा समाज के कल्याण के लिए होती है और इसके माध्यम से व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है। वेदिक प्रमाण: ऋग्वेद 10.117.6 में कहा गया है, “न स धनं विन्दते यस्त्यजि: सन्”। इसका अर्थ है कि जो दूसरों की सेवा करता है, वही सच्चा धन प्राप्त करता है। निष्कर्ष साध्वी बनने की प्रक्रिया एक गहन तपस्या और समर्पण का कार्य है। वेदों में बताए गए मार्ग का अनुसरण कर व्यक्ति अपने जीवन को धर्म, तपस्या और सेवा के माध्यम से सार्थक बना सकता है। यह मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन इसका आध्यात्मिक लाभ अनंत है। यदि आप साध्वी बनने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं, तो इन वेदिक सिद्धांतों और प्रक्रियाओं का पालन अवश्य करें।

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मकर संक्रांति पर पहला स्नान… कौन अखाड़ा पहले और कौन आखिर में लगाएगा डुबकी, टाइमिंग जानिए

Mahakumbh Amrit Snan Akhada Snan Timing: महाकुंभ 2025 का आगाज पौष पूर्णिमा पर शाही स्नान के साथ हो गया। इस महाकुंभ में छह शाही स्नान हैं। इसमें से तीन अमृत स्नान होंगे। पहला अमृत स्नान मकर संक्रांति के मौके पर मंगलवार 14 जनवरी को होगा। इसके अलावा मौनी अमावस्या पर 29 जनवरी और बसंत पंचमी पर 3 फरवरी अन्य दो अमृत स्नान होंगे। प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज prayagraj में भक्तों का सैलाब संगम तट पर उमड़ पड़ा है। पौष पूर्णिमा के मौके पर पहला शाही स्नान पर्व का आयोजन हुआ। सुबह से लोगों की भीड़ संगम तट पर उमड़ पड़ी। एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पहले शाही स्नान के दौरान संगम में डुबकी लगाई। पौष पूर्णिमा के साथ ही ही संगम तट पर 45 दिनों के कल्पवास की शुरुआत हो गई है। इसको लेकर देश-दुनिया से लोग संगम नगरी पहुंचे हैं। वहीं, सभी 13 अखाड़ों का डेरा संगम तट पर जम गया है। महाकुंभ के सबसे बड़े आकर्षण अखाड़ों के अमृत स्नान का कार्यक्रम मंगलवार सुबह से होगा। प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से अखाड़ों के अमृत स्नान का समय और क्रम जारी कर दिया है। अमृत स्नान पर्व पर सबसे पहले महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के संत-महंत और महामंडलेश्वर अमृत स्नान करेंगे। परंपरागत तरीके से सबसे पहले सातों संन्यासी, इसके बाद तीनों वैरागी और सबसे अंत में तीनों उदासीन अखाड़ों का अमृत स्नान होगा। रविवार को इस संबंध में अखाड़ों से चर्चा और विमर्श के बाद अमृत स्नान पर्व की समय सीमा का निर्धारण किया गया है। अमृत स्नान के लिए अखाड़ों के संत सुबह 5:15 बजे से अपने अखाड़ों से निकलना शुरू होंगे। 30 मिनट से एक घंटे का समय मेला प्राधिकरण की ओर से अमृत स्नान के दौरान अखाड़ों को 30 मिनट से एक घंटे का समय आवंटित किया गया है। अखाड़ों के स्नान के दौरान सड़कों को खाली रखा जाएगा। इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां पहले से पूरी कराई जा चुकी हैं। सबसे पहले श्री पंचायत अखाड़ा महानिर्वाणी एवं श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा के संत स्नान के लिए निकलेंगे। सबसे आखिर में निर्मल अखाड़े के संत पुण्य संगम की डुबकी लगाएंगे। अखाड़ों के अमृत स्नान की समय सारिणी अखाड़ों का नाम शिविर से प्रस्थान घाट पर आगमन स्नान का समय घाट से प्रस्थान श्री पंचायत अखाड़ा महानिर्वाणी एवंश्री शंभू पंचायती अटल अखाड़ा 5:15 बजे 6:15 बजे 40 मिनट 6:55 बजे श्री तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ाएवं श्री पंचायती अखाड़ा आनंद 6:05 बजे 7:05 बजे 40 मिनट 7:45 बजे श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ाएवं श्री पंच अग्नि अखाड़ा 7:00 बजे 8:00 बजे 40 मिनट 8:40 बजे अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अखाड़ा 9:40 बजे 10:40 बजे 30 मिनट 11:10 बजे अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाड़ा 10:20 बजे 11:20 बजे 50 मिनट 12:10 बजे अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अखाड़ा 11:20 बजे 12:20 बजे 30 मिनट 12:50 बजे श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा 12:15 बजे 13:15 बजे 55 मिनट 14:10 बजे श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण 13:20 बजे 14:20 बजे 60 मिनट 15:20बजे श्री पंचायत निर्मल अखाड़ा 14:40 बजे 15:40 बजे 40 मिनट 16:20 बजे अखाड़ों के संत सुबह 5.15 बजे से बैंडबाजा, डीजे के साथ रथों पर सवार होकर स्नान के लिए निकलेंगे। अमृत स्नान के लिए निकलने वाली यात्रा में संतों के शिष्य और अनुयायी चंवर, छत्र, दंड लिए पुष्पवर्षा करते हुए साथ-साथ चलेंगे। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने अखाड़ों से अनुरोध किया है कि उनके साथ स्नान के लिए जाने वाले खालसों, महामंडलेश्वरों, आचार्य महामंडलेश्वर की संख्या मेला प्रशासन को भेज गई सूची के अनुसार ही सीमित रखें। अखाड़ों के लिए रूट मैप जारी अमृत स्नान के साथ जाने वाले रथों एवं वाहनों की संख्या मेला पुलिस की ओर से जारी पास के अनुसार रखी जाएगी। त्रिवेणी मार्ग सेक्टर-20 से पीपा पुल संख्या-6 त्रिवेणी दक्षिणी और पीपा पुल संख्या-7 त्रिवेणी मध्य के जरिए गंगा पार कर संगम क्षेत्र (सेक्टर-3) में अमृत स्नान के लिए अखाड़ों का आगमन होगा। त्रिवेणी मार्ग और अखाड़ा मार्ग क्रॉसिंग से बाएं मुड़कर निर्धारित संगम घाट पर स्नान की व्यवस्था की गई है। संगम क्षेत्र में अखाड़ों के वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। संगम में स्नान के बाद अखाड़ों के संत और अनुयायी सेक्टर तीन अखाड़ा वापसी मार्ग से दाहिने मुड़कर पीपा पुल संख्या-3 महावीर दक्षिण और पीपा पुल संख्या-4 महावीर उत्तरी से गंगा पार कर सेक्टर-20 में प्रवेश करेंगे। पीपा पुल से महावीर मार्ग, महावीर संगम लोवर और उसके बाद महावीर संगम लोवर मार्ग क्रॉसिंग से बाएं (उत्तर मुड़कर) अखाड़ा वापसी मार्ग से होकर अपने-अपने शिविर में जाएंगे। संन्यासी अखाड़े काली मार्ग से होकर अपने शिविर में प्रवेश करेंगे।

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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति आज, जानें पुण्य और महापुण्य काल का मुहूर्त और महत्व

Makar Sankranti 2025: मकर संक्राति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं जिस कारण से इसे उत्तरायण पर्व भी कहते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, सूर्यदेव की विशेष पूजा का विशेष महत्व होता है। Makar Sankranti 2025: आज मकर संक्रांति का पावन पर्व है। तीर्थराज प्रयागराज में मकर संक्रांति पर साधु-संत और गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग गंगा, यमुना, त्रिवेणी, नर्मदा और शिप्रा जैसी अन्य पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य लाभ की प्राप्ति करते हैं। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक साल यह त्योहार पौष महीने में मनाया जाता है। लेकिन इस बार मकर संक्रांति पौष माह के खत्म होने के बाद मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस सूर्य धनु राशि की अपनी यात्रा को विराम देकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। जिसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्राति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं जिस कारण से इसे उत्तरायण पर्व भी कहते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, सूर्यदेव की विशेष पूजा का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति का महत्व, पूजा विधि और स्नान का शुभ मुहूर्त। मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Shubh Muhurat)  उदयातिथि के अनुसार, मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी 2025 यानी आज ही मनाई जाएगी. आज सुबह सूर्य 8 बजकर 41 मिनट मकर राशि में प्रवेश करेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति पुण्य काल का समय आज सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और महापुण्य काल का समय आज सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. दान करना शुभ Makar Sankranti dhan karna subh मकर संक्राति के पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है. इस दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्व है. इस दिन किया गया दान अक्षय फलदायी होता है. शनि देव के लिए प्रकाश का दान करना भी बहुत शुभ होता है. पंजाब, यूपी, बिहार और तमिलनाडु में ये नई फसल काटने का समय होता है. इसलिए किसान इस दिन को आभार दिवस के रूप में भी मनाते हैं. इस दिन तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है. इसके अलावा मकर संक्रांति पर कहीं-कहीं पतंग उड़ाने की भी परंपरा है. मकर संक्रांति का महत्व  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं. चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है. लिहाजा यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है. एक अन्य कथा के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति मनाई जाती है. बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था. तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा मकर संक्रांति पूजा विधि Makar Sankranti puja vidhi मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस त्योहार के देशभर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की विधि-विधान के साथ पूजा करने का महत्व होता है। मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर घर के साफ-सफाई करने के बाद घर के पास किसी पवित्र नदी में स्नान करने जाएं और वहां पर स्नान करने के बाद सूर्य देव अर्घ्य दें। फिर सूर्यदेव से जुड़े मंत्रों का जाप करें और दान-दक्षिणा करें।   मकर संक्रांति पर प्रयागराज के त्रिवेणी में स्नान का महत्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश काल के समय जब सभी देवों के दिन का शुभारंभ होता है तो तीनों लोकों में प्रतिष्ठित गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगमतट ‘त्रिवेणी’ पर साठ हजार तीर्थ और साठ करोड़ नदियाँ, सभी देवी-देवता, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर आदि तीर्थराज प्रयाग’ में एकत्रित होकर गंगा-यमुना-सरस्वती के पावन संगम तट पर स्नान, जप-तप और दान-पुण्य कर अपना जीवन धन्य करते हैं। तभी इसे तीर्थों का कुंभ भी कहा जाता है। 

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Laxmi prapti upay : रूठी लक्ष्मी को मनाकर घर कैसे लाऐं, लक्ष्मी आओ हमारे द्वार, दूर करो दरिद्रता, भर दो घर को धन-धान्य से

Laxmi prapti upay : आज दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है और शाम के समय भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाएगी। रूठी लक्ष्मी को मनाने और घर पर बुलाने के लिए अनेक उपाय तंत्र-मंत्र के ग्रंथों से लेकर लाल किताब, वास्तु शास्त्र एवं धार्मिक ग्रंथों में वर्णित हैं। दीपावली के दिन इन उपायों को अवश्य करें। दीपावली के दिन सर्वप्रथम घर की अच्छी प्रकार से सफाई करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मुख्य द्वार को स्वच्छ और साफ करके उसकी सजावट करें तथा रंगोली फूलों और दीयों से सजाऐं। लक्ष्मी जी का स्वागत करने के लिए प्रवेश द्वार पर कमल का फूल या रंगोली में श्री का चिन्ह बनाना शुभकारी है। प्रदोषकाल में स्थिर लग्न का चयन कर लक्ष्मी पूजन हेतु संपूर्ण पूजा सामग्री एकत्रित करके लक्ष्मी गणेश जी की मूर्तियों को सम्मुख रखकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके साफ कपड़े से पोंछ कर पूजा घर में शुद्ध आसन पर स्थापित करें। कम से कम पांच अथवा ग्यारह, दीपक जलाकर पूजा स्थल पर भगवान के सम्मुख रखें, जिसके पश्चात् पूरे घर में दीपमालिका प्रज्जविलत करें। धूप-दीप से पूजा करें, नैवेद्य मिठाई खील, बताशे फल आदि का भोग लगाएं, तथा दक्षिणा अर्पण करें। कपूर से आरती करें तथा पूजा आदि में कोई त्रुटि आदि हो गई हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना करें । लक्ष्मी जी की प्रसन्नता के लिए पूरे परिवार के साथ गणेश, लक्ष्मी, हनुमान जी, सरस्वती जी, काली एवं कुबेर आदि देवों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। धन, भवन, वाहन, स्त्री, कन्या, यश, एकता, सद्बुद्धि, आठ रूपों में लक्ष्मी का वास माना गया है। धन लक्ष्मी, सौभाग्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, यश लक्ष्मी आदि स्वरूपों में लक्ष्मी का पूजन करें। दीपावली देने का त्योहार है, जो व्यक्ति जरूरतमंदों को दान-पुण्य करता है, उसके इस पुण्य कार्य से मां लक्ष्मी उस पर प्रसन्न होकर उसे और ज्यादा धन-दौलत देती हैं। जैसे मान लीजिए आप दस लोगों को रोज़ भोजन कराने का संकल्प करते हैं, अगर आप उन्हें भोजन नहीं भी कराते तो किसी न किसी माध्यम से वे भोजन करेंगे ही, भूखे नहीं रहेंगे, लेकिन जब आप उन्हें भोजन कराते हैं, तो उनसे संबंधित भाग्य, धन-लाभ आपको प्राप्त होता है। ये देने का नियम है, इसलिए जो व्यक्ति नियमित रूप से दान-पुण्य, भण्डारा आदि कराते रहते हैं, उनका धनकोष कभी खाली नहीं होता, बल्कि और बढ़ता जाता है। यह लक्ष्मीजी की कृपा और दान-पुण्य की महिमा है।

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Dream Interpretation Money : सपने में पैसे देखना शुभ या अशुभ, जानें क्या शुरु होंगे अच्छे दिन या होगा बैड लक

Dream Interpretation about Money: सपने हमारे जीवन का आईना होते हैं। कहा जाता है कि इंसान जिस तरह की स्थिति से गुजर रहा होता है, उसे वैसे ही सपने आते हैं। स्वप्न विज्ञान के जानकारों की मानें तो कुछ सपने ऐसे भी होते हैं जिनसे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हमें अक्सर जो सपने आते हैं वह हम तुरंत अपनों के साथ या फिर दोस्तों के साथ साझा कर लेते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, आने वाले हर सपने का कोई ना कोई संकेत जरूर होता है, जो हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं को लेकर सचेत करता है। हर व्यक्ति पैसा कमाने की चाह रखता है। ऐसे में यदि सपने में पैसे दिख जाएं तो व्यक्ति को बहुत खुशी होती है। लेकिन सपने में रुपये पैसे का दिखना शुभ होता है या अशुभ आइए जानते हैं विस्तार से। सपने में सिक्के दिखाई देना का मतलब Sapne me coin dikhai dena ka matlab स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आपको सपने में सिक्के देखते हैं या फिर सिक्कों को खड़कते देखते हैं तो इस तरह के सपने शुभ संकेत नहीं देते हैं। इस तरह के सपनों का आर्थिक है कि आने वाला समय आपके लिए काफी कष्टकारी रहने वाला है। आपको आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस तरह के सपने आने पर आपको किसी जरूरतमंद कुछ धनराशि दान करनी चाहिए। या फिर आप किसी मंदिर में भी दान कर सकते हैं। सपने में किसी से पैसे लेने का मतलब sapne me kisi se pese lene ka matlab कई बार लोगों को ऐसे सपने भी आते हैं कि कोई व्यक्ति उन्हें नोट दे रहा है। इस तरह के सपनों को स्वप्न शास्त्र में बहुत ही शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह के सपने आने का मतलब है कि आपको जल्द ही अचानक से धन लाभ मिल सकता है। साथ ही इस तरह के सपने आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले भी रहेंगे। इस तरह के सपनों का अर्थ है कि आप यदि पिछले लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं तो उसमें आपको थोड़ी राहत मिलेगी। सपने में फटे पुराने नोट दिखाई देना sapne me fate purane note dikhai dena स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आप सपने में फटे हुए नोट देखते हैं तो इस तरह के सपनों को भी स्वप्न शास्त्र में अशुभ माना गया है। इस तरह के सपनों का अर्थ है कि आने वाला समय आपके लिए काफी मुश्किल भरा होने वाला है। आपको करियर से जुड़े कुछ उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस तरह के सपने आने पर आपको सबसे पहले किसी जरुरमंद व्यक्ति को उनकी जरूरत की कोई चीज भेट करनी चाहि सपने में धन चोरी होते दिखाई देना sapne me dhan chori hote dikhai dena सपने में यदि आप देखते हैं कि आपका धन कोई चोरी कर रहा है तो इस तरह के सपनों को स्वप्न शास्त्र में शुभ माना गया है। इस तरह के सपने आने का अर्थ है कि आपको आने वाले कुछ ही दिनों में बड़ी मात्रा में धन प्राप्त होगी। साथ ही आपके जो काम पिछले काफी समय से अटके हुए थे वह अब पूरे हो जाएंगे। इस तरह के सपने आने पर आपको किसी के साथ इन्हें साझा नहीं करना चाहिए। बल्कि, आपको अगले दिन तुरंत भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन करके आना चाहिए।

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