August 21, 2024

Sleep Talking:क्या आप भी सोते समय नींद में बड़बड़ाते हैं? ये हैं कारण और उपचार

Sleep Talking:जो लोग नींद में बात करते हैं उन्‍हें इस बात का एहसास ही नहीं होता है और उन्‍हें अगले दिन कुछ याद भी नहीं रहता है। नींद में बड़बड़ाने वाला व्‍यक्ति एक समय में 30 सेकेंड से ज्यादा नहीं बोलता है Sleep Talking क्या आपकी नींद भी पार्टनर के नींद में बातें करने की आदत से टूट जाती है? अगर जवाब हां है तो जान लें ये नींद में सपने देखते हुए बातें करना सामान्य नहीं बल्कि एक प्रकार का पैरासोमनिया है। जिसकी मतलब होता है-सोते समय अस्वाभाविक व्यवहार करना। हालांकि डॉक्टर न तो इस समस्या को बीमारी मानते हैं और न ही इसे सामान्‍य श्रेणी में ही रखते हैं। चिकित्‍सकों को नींद में बात करने के बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं है। वहीं जो लोग नींद में बात करते हैं उन्‍हें इस बात का एहसास ही नहीं होता है और उन्‍हें अगले दिन कुछ याद भी नहीं रहता है। नींद में बड़बड़ाने वाला व्‍यक्ति एक समय में 30 सेकेंड से ज्यादा नहीं बोलता है और कुछ देर बोलकर चुप हो जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर नींद में किस वजह से बड़बड़ाते हैं कुछ लोग और क्या है इस समस्या को दूर करने के उपाय।  Sleep Talking किन लोगों को होती है नींद में बड़बड़ाने की आदत?  एक शोध के अनुसार करीब 3 साल से 10 साल के आधे से ज्यादा बच्चे अपनी बातों को नींद में पूरा करते हैं। वहीं 5 फीसदी बड़े भी नींद में बात करते हैं। इतना ही नहीं शोध के अनुसार लड़कों से ज्‍यादा लड़कियां नींद में बड़बड़ाती हैं। Swapna Shastra:मृत्यु के 6 महीने पहले मिलने लगते हैं ये तीन संकेत, कभी सपने में तो कभी सामने होती हैं ये घटनाएं   Sleep Talking नींद में बात करने के कारण तनाव, डिप्रेशन, नींद की कमी, थकान महसूस करना, शराब या किसी दवा के कारण, बुखार के कारण नींद में व्यक्ति बड़बड़ा सकता है। इसके अलावा अगर किसी व्‍यक्‍ति के परिवार में किसी को नींद में बोलने की आदत रही हो तो भी इस वजह से स्‍लीप डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है। नींद में बड़बड़ाने की समस्या का उपचार-तनाव-Sleep Talkingनींद में बड़बड़ाने की पीछे सबसे बड़ी वजह तनाव हो सकता है। अगर किसी बात को लेकर आप लगातार चिंता में हैं तो आपको यह समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए अपने दिमाग को आराम दें। अगर आप बहुत ज्यादा बिजी रहते हैं तो अपने लिए थोड़ा सा समय निकालकर कहीं घूम आइए। आरईएम स्लीप बिहैवियर डिसआर्डर- सोते हुए चीखने-चिल्लाने या हाथ-पैर चलाने की आदत डिमेंशिया (निद्रारोग) अथवा पार्किंसन जैसी बीमारियों के लक्षण भी हो सकते हैं। इस बीमारी को ‘आरईएम स्लीप बिहैवियर डिसआर्डर’ कहा जाता है।Sleep Talkingआरईएम नींद का वो चरण है। जहां नींद के दौरान या सपने में जो कुछ भी हो रहा है उसे हम सच समझने लगते हैं। आरईएम के अलावा, दवा का रिएक्शन, तनाव, मानसिक स्वास्थ्य समस्या के कारण भी लोग नींद में बड़बड़ाने लगते हैं। समय पर सोएं- समय पर सोने और जागने से नींद में बड़बड़ाने की आदत से छुटकारा मिल सकता है। ऐसा करने से आपकी नींद पूरी होती है। ध्यान रखें, नींद पूरी न हो पाने पर भी यह समस्या होती है।  एक्‍सरसाइज- अक्सर कई बार बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से ना होने के कारण भी नींद में व्यक्ति बड़बड़ाने लगता है। ऐसे में इस समस्या से राहत पाने और शरीर में ब्‍लड सर्कुलेशन को नियमित रखने के ल‍िए नियमित योगा और एक्‍सरसाइज करें।  साइकोथैरेपिस्‍ट की लें मदद-अगर इन सब उपायों को आजमाने के बाद भी आपकी समस्या बनी हुई है तो किसी अच्छे साइकोथैरेपिस्ट से मिल कर सलाह जरूर लें। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Bhadrapad Sankashti Chaturthi 2024: हेरंब संकष्टी चतुर्थी कब ? भाद्रपद माह में बप्पा की पूजा का विशेष महत्व, जानें डेट, मुहूर्त

Sankashti Chaturthi 2024: भाद्रपद हेरंब संकष्टी चतुर्थी अगस्त में ही मनाई जाएगी. गणपति जी (ganesh ji) की कृपा से सारे बिगड़े काम बन जाते हैं. बप्पा के आशीर्वाद से जीवन में खुशहाली आती है भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो गणेश जी को समर्पित है। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। यह व्रत विशेष रूप से भाद्रपद माह में मनाया जाता है और इसे “हेरंब संकष्टी चतुर्थी” के नाम से भी जाना जाता है। Bhadrapada Sankashti Chaturthi 2024:  भगवान गणेश (Ganesh ji) को साक्षात् बुद्धि का स्वरूप,  ज्ञान का देवता एवम् सभी बाधाओं या कष्टों को दूर करने वाला देवता माना जाता है. इसे भगवान गणेश की पूजा करने का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.  हर साल भाद्रपद (Bhado chaturthi) के महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन हेरंब संकष्टी चतुर्थी (Heramba Sankashti Chaturthi) का पर्व मनाया जाता है, जो भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से एक हेरम्ब देवता को समर्पित है. इस साल भाद्रपद माह की हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2024 में कब है, जान लें डेट, पूजा मुहूर्त. Sankashti Chaturthi क्यों है खास भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी? भाद्रपद हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2024 डेट (Bhadrapada Sankashti Chaturthi 2024 Date) भाद्रपद माह की हेरंब संकष्टी चतुर्थी 22 अगस्त 2024 को है. इसी दिन बहुला चौथ (Bahula Chauth) भी मनाई जाएगी. भगवान गणेश को किसी भी पूजा या अनुष्ठान का आरम्भ करने से पहले देवताओं में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है. हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2024 मुहूर्त (Heramba Sankashti Chaturthi 2024 Time) पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 22 अगस्त  2024 को दोपहर 01 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 23 अगस्त 2024 को सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर इसका समापन होगा. Dahi Handi 2024: दही हांडी उत्सव कब? जानिए तिथि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा Sankashti Chaturthi हेरंब संकष्टी चतुर्थी पूजा मंत्र हे हेरंब त्वमेह्योहि ह्माम्बिकात्र्यम्बकात्मज सिद्धि-बुद्धि पते त्र्यक्ष लक्षलाभ पितु: पित: नागस्यं नागहारं त्वां गणराजं चतुर्भुजम् भूषितं स्वायुधौदव्यै: पाशांकुशपरश्र्वधै: भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी महत्व (Bhadrapada Sankashti Chaturthi Importance) Sankashti Chaturthi भाद्रपद माह में गणपति जी (Ganpati ji) की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि इसी महीने में बप्पा का जन्म हुआ था. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है और ये उत्सव 10 दिन तक चलता है. भादो में बप्पा की पूजा से संकट, कष्ट, रोग, दोष दूर होते हैं. हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि (Heramba Sankashti Chaturthi Puja vidhi) ध्यान रखने योग्य बातें Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि  KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Dahi Handi 2024: दही हांडी उत्सव कब? जानिए तिथि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा

Dahi Handi 2024 Date: कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हर साल भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इसके साथ भगवान श्री कृष्ण के जन्ममोत्सव के रूप में दही हांडी उत्सव भी मनाया जाता है। Dahi Handi 2024 यह उत्सव मुख्य रूप से गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार हमेशा कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 26 अगस्त को और दही हांडी उत्सव 27 अगस्त को मनाया जाएगा।  आइए जानते हैं इस वर्ष कब मनाई जाएगी दही हांडी? Dahi Handi 2024: दही हांडी जिसे गोपालकला (Gopal kala) के नाम से भी जाना जाता है, ये मुख्य रूप से श्रीकृष्ण (Krishna) की लीलाओं से जुड़ा त्योहार है. हर साल कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का पर्व मनाया जाता है. Dahi Handi 2024 दही हांडी के उत्सव में एक मिट्टी के बर्तन में दही भरकर रस्सी पर लटका दिया जाता है और गोविंदाओं की टोली पिरामिड बनाकर उस हांडी को तोड़ते हैं. आइए जानें इस साल दही हांडी 2024 में कब मनाया जाएगा. दही हांडी 2024 तिथिदही हांडी का त्योहार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी और दही हांडी का त्योहार 27 अगस्त के दिन मनाया जाएगा। Dahi Handi 2024 दही हांडी क्यों मनाई जाती है ? (Why Dahi Handi Celebrate) दही हांडी की परंपरा में भगवान कृष्ण के बचपन की लीलाओं को सामने रखा जाता है. दही हांडी के आयोजन को गोपाल कला या दहिकला भी कहा जाता है. हिंदु धर्म में मान्यता है कि प्राचीन काल में कान्हा घर-घर जाकर चुपके से लोगों की मटकी से माखन चुराकर खाया करते थे. मटकी (हांडी) ऊपर लटकी हो तो उसे फोड़कर माखन चुराते थे. कहते हैं कि जिस घर में कान्हा के कदम पड़ते थे उनके सारे दुख दूर हो जाते थे. मान्यता है कि घर में माखन चोरी के लिए मटकी फोड़ने से घर के दुख दूर हो जाते हैं और खुशियों का वास होता है. Dahi Handi 2024 कैसे मनाई जाती है दही हांडी ? Dahi Handi 2024 दही हांडी उत्सव के दौरान मिट्टी के बर्तन में दही या मक्खन को ऊंचाई पर लटकाया जाता है। फिर पुरुषों और महिलाओं का एक समूह एक मानव पिरामिड बनाता है और मटके को तोड़ने का प्रयास करता है। Dahi Handi 2024 दही हांडी का प्रदर्शन कई स्थानों पर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले लोगों को गोविंदा कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी समूह मटकी तोड़ता है उसे भगवान कृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। Dahi Handi 2024 दही हांडी का इतिहास (Dahi Handi History) पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान कृष्ण बचपन में अपने दोस्तों के साथ माखन मिश्री की चोरी करते थे और अपने मित्रों में बांट देते थे. माखन चोरी से परेशान होकर गोपियां माखन को ऊंचे स्थान पर लटकाना शुरू कर दिया था लेकिन गोपियों का यह प्रयास भी असफल हो गया. नटखट कान्हा अपने दोस्तों की टोली के साथ वहां से भी माखन चुरा लेते थे और बड़े चाव के साथ सबके साथ खाते हैं. भगवान कृष्ण की इन्हीं बाल लीलाओं को दहीं हांडी के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. Dahi Handi कृष्ण जन्माष्टमी महत्वभारत में जन्माष्टमी के पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन पूरे विधि-विधान से कृष्ण जी के बाल रूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण को विष्णु जी का 8वां अवतार माना जाता है। ऐसे में जन्माष्टमी का व्रत रखने से विष्णु जी की कृपा भी बनी रहती है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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