June 2024

चमत्कारी मोती वाला पौधा वैजयंती श्रीकृष्ण को भी है पसंद: KARMASU

चमत्कारी मोती वाला पौधा: वैजयंती आप जिस पौधे के बारे में पूछ रहे हैं, वह वैजयंती है। यह एक चमत्कारी बेल है जिसे भगवान श्रीकृष्ण का भी प्रिय माना जाता है।भगवान श्रीकृष्ण का हर कोई व्यक्ति दीवाना है. कृष्ण की एक झलक पाने के लिए हर कोई लालाहित रहता है. एक पौधा ऐसा है जो भगवान कृष्ण को अतिप्रिय है. यह पौधा फल फूल की जगह मोती देता है. वैजयंती को मोती वाला पौधा, चंद्रहार, हारसिंगार और कल्पवृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। यह पौधा अपनी सुगंधित सफेद माला जैसी फूलों के लिए जाना जाता है, जिनमें मोती जैसी चमक होती है। वैजयंती के बारे में कुछ रोचक बातें: वैजयंती की देखभाल: वैजयंती एक सुंदर और शुभ पौधा है जो आपके घर में सकारात्मकता और समृद्धि ला सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वैजयंती के मोतियों के बारे में किए गए दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं। अधिक जानकारी के लिए:

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क्या आपकी कुंडली में चन्द्रमा ख़राब है Is the MOON bad in your horoscope?

चंद्रमा कुंडली में चंद्रमा का “खराब” होना ज्योतिष शास्त्र में एक जटिल अवधारणा है। इसका अर्थ अलग-अलग लोगों के लिए भिन्न हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि चंद्रमा किस राशि, भाव और नक्षत्र में स्थित है, साथ ही साथ यह किन अन्य ग्रहों से प्रभावित है। यह कहना गलत होगा कि कुंडली में चंद्रमा का खराब होना हमेशा नकारात्मक परिणाम देता है। चंद्रमा की स्थिति के आधार पर, इसके कुछ सकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। यह जानने का सबसे अच्छा तरीका है कि आपके लिए चंद्रमा की स्थिति का क्या अर्थ है, यह है कि आप किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें। वे आपकी कुंडली का पूरा विश्लेषण कर सकते हैं और आपको बता सकते हैं कि चंद्रमा आपके जीवन को कैसे प्रभावित करता है और यदि कोई नकारात्मक प्रभाव है तो उसे कैसे कम किया जा सकता है। यहां कुछ सामान्य संकेत दिए गए हैं जो बताते हैं कि कुंडली में चंद्रमा “कमजोर” या “अशुभ” हो सकता है: यदि इनमें से कोई भी स्थिति आपकी कुंडली में मौजूद है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप निश्चित रूप से नकारात्मक परिणामों का अनुभव करेंगे। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ज्योतिष एक जटिल विज्ञान है और कई कारक किसी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति केवल एक कारक है। यदि आप अपनी कुंडली में चंद्रमा के बारे में चिंतित हैं, तो किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना और उनके द्वारा बताए गए उपायों का पालन करना सबसे अच्छा है। यहां कुछ उपाय दिए गए हैं जो ज्योतिषियों द्वारा चंद्रमा को मजबूत करने के लिए सुझाए जाते हैं: जीवन में तरक्की लाने के साथ आर्थिक संकट दूर करने वाले मन्त्र : KARMASU यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये केवल सामान्य उपाय हैं और किसी भी विशिष्ट व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं। ज्योतिषी से परामर्श करना और उनके द्वारा बताए गए व्यक्तिगत उपायों का पालन करना हमेशा सबसे अच्छा होता है।

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जीवन में तरक्की लाने के साथ आर्थिक संकट दूर करने वाले मन्त्र : KARMASU

जीवन में तरक्की लाने के साथ आर्थिक संकट दूर करने वाले मन्त्र यह सच है कि जीवन में आर्थिक संकट एक बड़ी बाधा बन सकते हैं। इन संकटों से निपटने और जीवन में तरक्की प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक शक्ति का सहारा लेना अनेक लोगों को लाभदायक लगता है। कुछ मन्त्रों का उच्चारण और कुछ धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सहायता करता है। यहाँ कुछ मन्त्र और धार्मिक उपाय दिए गए हैं जो जीवन में तरक्की लाने के साथ आर्थिक संकट दूर करने में सहायक हो सकते हैं: 1. कुबेर मन्त्र: यह मन्त्र भगवान कुबेर, जो धन और समृद्धि के देवता हैं, को समर्पित है। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥ 2. लक्ष्मी मन्त्र: यह मन्त्र देवी लक्ष्मी, जो धन और समृद्धि की देवी हैं, को समर्पित है। ॐ श्रीं महालक्ष्मिये नमः॥ 3. मां गायत्री मन्त्र: यह मन्त्र देवी गायत्री, जो ज्ञान और शक्ति की देवी हैं, को समर्पित है। ॐ महागायत्री देविये नमः॥ 4. गणेश मन्त्र: यह मन्त्र भगवान गणेश, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं, को समर्पित है। ॐ गं गणपतये नमः॥ 5. शिव मन्त्र: यह मन्त्र भगवान शिव, जो विनाश और पुनर्निर्माण के देवता हैं, को समर्पित है। ॐ नमः शिवाय॥ धार्मिक उपाय: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि केवल मन्त्रों का जाप या धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करना ही पर्याप्त नहीं है। जीवन में सफलता प्राप्त करने और आर्थिक संकटों से उबरने के लिए कठोर परिश्रम और दृढ़ संकल्प भी आवश्यक है। इन मन्त्रों और धार्मिक उपायों के साथ-साथ, यदि आप कड़ी मेहनत करते हैं और अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ठोस योजना बनाते हैं, तो निश्चित रूप से आपको सफलता मिलेगी। Mantras for Financial Success and Overall Prosperity in Life Financial difficulties can be a major hurdle in life. Many people find solace and strength in spiritual practices to overcome these challenges and achieve progress. Chanting certain mantras and following religious rituals can bring peace of mind and positive energy, aiding you in facing tough situations. Here are some mantras and practices that can help you overcome financial struggles and achieve success in life: 1. Kubera Mantra: Dedicated to Lord Kubera, the God of wealth and prosperity. Om Shrim Hrim Kleem Shrim Kleem Vitteshwaraya Namah॥ 2. Lakshmi Mantra: Dedicated to Goddess Lakshmi, the embodiment of wealth and abundance. Om Shrim Mahalakshmiye Namah॥ 3. Gayatri Mantra: Dedicated to Goddess Gayatri, the source of knowledge and power. Om Maha Gayatri Deviye Namah॥ 4. Ganesha Mantra: Dedicated to Lord Ganesha, the remover of obstacles and the God of wisdom. Om Gam Ganapataye Namah॥ 5. Shiva Mantra: Dedicated to Lord Shiva, the God of both destruction and renewal. Om Namah Shivaya॥ Additional Practices: It’s important to remember that simply chanting mantras or performing rituals isn’t enough. Achieving success in life and overcoming financial struggles also requires hard work and unwavering determination. By combining these mantras and practices with dedicated effort and a well-defined plan to improve your financial situation, you are sure to find success.

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योगिनी एकादशी : ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति का व्रत YOGINI EKADASHI VRAT

योगिनी एकादशी : ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति का व्रत योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह एकादशी सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस व्रत को रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और ज्ञान, मोक्ष और सभी पापों से मुक्ति मिलती है।आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष तिथि के दिन योगिनी एकादशी मनाई जाती है. एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त जन उनकी विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. योगिनी एकादशी को लेकर यह भी मान्यता है कि योगिनी एकादशी का विधि विधान के साथ व्रत रखने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. योगिनी एकादशी व्रत के कुछ नियम होते हैं. इस व्रत के को करने वाले व्यक्ति को कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है कब है योगिनी एकादशी 2024? इस वर्ष आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 1 जुलाई की सुबह 10 बजकर 26 मिनट से आरंभ होगी और इसका समापन अगले दिन 2 जुलाई की सुबह 8 बजकर 34 पर होगा. इसलिए उदयातिथि के अनुसार, इस वर्ष योगिनी एकादशी 2 जुलाई 2024 को मनाई जाएगी और इसका व्रत भी 2 जुलाई को रखा जाएगा. 2024 में योगिनी एकादशी 2 जुलाई, मंगलवार को रखी जाएगी। योगिनी एकादशी का महत्व: योगिनी एकादशी व्रत की विधि: योगिनी एकादशी की कथा– योगिनी एकादशी की कथा: YOGINI EKADASHI KI KATHA

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योगिनी एकादशी की कथा: YOGINI EKADASHI KI KATHA

हेम माली की मुक्ति: योगिनी एकादशी की कथा, हेम माली नामक एक भक्त की कहानी है, जो भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। हेम माली कुबेर देवता के लिए फूलों की माला बनाता था। एक बार, जब वह माला भगवान कुबेर के लिए ले जा रहा था, तो रास्ते में उसकी मुलाकात एक अत्यंत सुंदर स्त्री से हुई। हेम उस स्त्री की सुंदरता से मोहित हो गया और उसे देखने में मग्न हो गया। इस कारण वह समय पर माला कुबेर देवता तक नहीं पहुंचा सका। देर से पहुंचने पर कुबेर देवता क्रोधित हो गए और उन्होंने हेम को शाप दे दिया कि वह स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर जाएगा और उसे कोढ़ रोग हो जाएगा। हेम माली शापित होकर पृथ्वी पर आ गिरा और उसे कोढ़ रोग हो गया। बीमारी से पीड़ित होकर उसने कई डॉक्टरों का इलाज कराया लेकिन उसे कोई आराम नहीं मिला। निराश होकर वह जंगल में जा कर रहने लगा। एक दिन वहां उसे एक ऋषि मिले। ऋषि ने उसकी दु:खी कहानी सुनी और उसे सलाह दी कि वह योगिनी एकादशी का व्रत रखे। हेम माली ने ऋषि की बात मानी और योगिनी एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ रखा। व्रत का फल: एकादशी के बाद द्वादशी के दिन हेम माली ने भगवान विष्णु की पूजा की और उनसे क्षमा प्रार्थना की। भगवान विष्णु उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उसे शाप से मुक्ति दे दी। हेम माली का कोढ़ रोग ठीक हो गया और वह फिर से स्वस्थ हो गया। इस प्रकार योगिनी एकादशी के व्रत द्वारा हेम माली को मोक्ष की प्राप्ति हुई। कथा का सार: योगिनी एकादशी की यह कथा हमें यह शिक्षा देती है कि भगवान विष्णु अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। चाहे उनके भक्त कितने भी पापी क्यों न हो लेकिन यदि वे सच्चे मन से भगवान की भक्ति करते हैं तो भगवान उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति भी कराते हैं।

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6 महीने तक इन राशियों पर मां लक्ष्मी रहेंगी मेहरबान, मिलेगा पैसा ही पैसा : Rashifal 6 months Horoscope 

ज्योतिष शास्त्र में, लक्ष्मी माता को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। यह माना जाता है कि कुछ राशियां मां लक्ष्मी को अधिक प्रिय होती हैं और इन राशियों के लोगों को धन-धान्य में वृद्धि, आर्थिक लाभ और समृद्धि प्राप्त होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। ऐसी 5 राशियां हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि मां लक्ष्मी इन पर विशेष रूप से मेहरबान रहती हैं: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह केवल सामान्य धारणाएं हैं और व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर भिन्नता हो सकती है। Rashifal 6 months Horoscope :लक्ष्मी माता धन की देवी कही जाती हैं। मां की कृपा बनी रहे तो घर में सुख-समृद्धि की कभी भी कमी नहीं रहती है। ग्रहों की चाल के मद्देनजर इस साल के अंत तक कुछ राशियों पर लक्ष्मी मां की कृपा-दृष्टि बनी रहेगी। इनकी कृपा बना रहे तो जीवन में धन-धान्य भी बना रहता है। वहीं, ज्योतिष विद्या के अनुसार, 12 राशियों में से कुछ राशियां लक्ष्मी माता को बेहद प्रिय हैं। इन राशियों पर लक्ष्मी जी की कृपा सदैव बनी रहती है। सिंह राशि लक्ष्मी मां के आशीर्वाद से सिंह राशि वालों को 6 महीनों में काफी फायदा हो सकता है। मां लक्ष्मी की कृपा से व्यापार में आपको मुनाफा होगा। धन आगमन के योग बन रहे हैं लेकिन खर्चों पर आपको पकड़ बनानी होगी। मन खुश रहेगा सेहत भी दुरुस्त रहेगी। वहीं, संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है धनु राशि आने वाले 6 महीने धनु राशि वालों के लिए बेहद ही लाभकारी साबित हो सकता है। माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि से आपकी इंकम बढ़ाने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहने वाली है। घर-परिवार का माहौल खुशनुमा रहेगा। व्यापार की दृष्टि से भी यह साल शुभ माना जा रहा है। कर्क राशि कर्क राशि वालों के लिए 2024 का साल लकी साबित हो सकता है। करियर में उन्नति के कई मौके मिल सकते हैं। वहीं, रुका हुआ धन भी वापस मिलने की संभावना है। हेल्थ दुरुस्त रहने वाली है। वहीं, सिंगल लोगों की लाइफ में किसी में किसी नए शख्स की एंट्री हो सकती है। Rashifal 6 months Horoscope 

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आषाढ़ मास में क्या करना चाहिए : What should be done in the month of Ashadh

आषाढ़ मास में क्या करना चाहिए आषाढ़ मास, हिंदू पंचांग का चौथा महीना, भगवान विष्णु और देवराज इंद्र की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन का प्रतीक यह महीना, धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों और व्रतों के आयोजन के लिए प्रसिद्ध है। आइए जानते हैं कि आषाढ़ मास में क्या करना चाहिए: धार्मिक महत्व: त्यौहार और उत्सव: अन्य गतिविधियां: आषाढ़ मास में कुछ महत्वपूर्ण बातें: यह माना जाता है कि आषाढ़ मास में किए गए सभी कार्य शुभ फल देते हैं। इस पवित्र महीने में किए गए धार्मिक अनुष्ठान, व्रत और दान पुण्य, जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाते हैं।

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जीवन में परेशानियों से मुक्ति के लिए मंत्रों का जाप: MANTRA FOR HAPPY LIFE

जीवन में परेशानियों से मुक्ति के लिए मंत्रों का जाप : विस्तृत जानकारी जीवन में परेशानियां तो आती ही रहती हैं। इन परेशानियों से निपटने और मन को शांत रखने में मंत्रों का जाप सहायक हो सकता है। कुछ मंत्र जो जीवन में परेशानियों से मुक्ति दिलाने में सहायक हो सकते हैं: 1. ॐ गायत्री मंत्र: यह मंत्र सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक माना जाता है। इसका जाप करने से बुद्धि, विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है। साथ ही, नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है और मन शांत होता है। उदाहरण: 2. ॐ शांति मंत्र: यह मंत्र शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। इसका जाप करने से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उदाहरण: 3. महा मृत्युंजय मंत्र: यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसे अत्यंत शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इसका जाप करने से मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। उदाहरण: 4. हनुमान मंत्र: यह मंत्र भगवान हनुमान को समर्पित है और इसे शक्ति और साहस प्रदान करने वाला मंत्र माना जाता है। इसका जाप करने से बाधाओं से मुक्ति मिलती है और मनोबल बढ़ता है। उदाहरण:

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गीता के अनुसार जीवन : WHAT IS LIFE

गीता के अनुसार जीवन: श्लोक सहित गीता में जीवन को अनेक आयामों से देखा गया है। यहाँ कुछ प्रमुख पहलू और उनसे जुड़े श्लोक प्रस्तुत हैं: 1. कर्मयोग: गीता कर्मयोग पर विशेष बल देती है। कर्म का अर्थ है कर्तव्यनिष्ठा से عمل करना, फल की इच्छा किए बिना। कर्मयोग के अनुसार, मनुष्य को अपना कर्म सदैव उत्तम भाव से करना चाहिए, फल भगवान को समर्पित करते हुए। 2. ज्ञानयोग: ज्ञानयोग का अर्थ है आत्मज्ञान प्राप्ति का मार्ग। गीता में ज्ञान को कर्म से भी श्रेष्ठ बताया गया है। ज्ञानयोग के द्वारा मनुष्य अज्ञान और मोह से मुक्त होकर आत्मा की परम सत्ता का अनुभव करता है। 3. भक्ति योग: भक्ति योग का अर्थ है ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव। गीता में भक्ति को मोक्ष का साधन बताया गया है। भक्त ईश्वर को अपना सर्वस्व समर्पित कर देता है और बदले में कुछ नहीं चाहता। 4. जीवन का उद्देश्य: गीता के अनुसार जीवन का उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार है। मनुष्य को अपने कर्म, ज्ञान और भक्ति के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करना चाहिए। 5. जीवन में कठिनाइयाँ: गीता में स्वीकार किया गया है कि जीवन में कठिनाइयाँ और दुःख आते रहते हैं। इनका सामना धैर्य, संयम और कर्मठता से करना चाहिए। निष्कर्ष: गीता जीवन जीने की कला सिखाती है। कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्ति योग और आत्म-साक्षात्कार के माध्यम से मनुष्य जीवन को सार्थक और पूर्ण बना सकता है। गीता के श्लोक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन करते हैं और मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और संयम बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि गीता में जीवन के अनेक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है। यहाँ प्रस्तुत किए गए श्लोक केवल कुछ उदाहरण हैं। गीता का गहन अध्ययन करके जीवन के प्रति गहन समझ प्राप्त की जा सकती है।

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वट सावित्री व्रत कथा: सच्चे प्रेम और पतिव्रता का प्रतीक

विवाहित महिलाओं के बीच अत्यधिक प्रचलित ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन आने वाले सावित्री व्रत कथा निम्न प्रकार से है: भद्र देश के एक राजा थे, जिनका नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान न थी। उन्होंने संतान की प्राप्ति के लिए मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिदिन एक लाख आहुतियाँ दीं। अठारह वर्षों तक यह क्रम जारी रहा। इसके बाद सावित्रीदेवी ने प्रकट होकर वर दिया कि: राजन तुझे एक तेजस्वी कन्या पैदा होगी। सावित्रीदेवी की कृपा से जन्म लेने के कारण से कन्या का नाम सावित्री रखा गया। कन्या बड़ी होकर बेहद रूपवान हुई। योग्य वर न मिलने की वजह से सावित्री के पिता दुःखी थे। उन्होंने कन्या को स्वयं वर तलाशने भेजा। सावित्री तपोवन में भटकने लगी। वहाँ साल्व देश के राजा द्युमत्सेन रहते थे, क्योंकि उनका राज्य किसी ने छीन लिया था। उनके पुत्र सत्यवान को देखकर सावित्री ने पति के रूप में उनका वरण किया। ऋषिराज नारद को जब यह बात पता चली तो वह राजा अश्वपति के पास पहुंचे और कहा कि हे राजन! यह क्या कर रहे हैं आप? सत्यवान गुणवान हैं, धर्मात्मा हैं और बलवान भी हैं, पर उसकी आयु बहुत छोटी है, वह अल्पायु हैं। एक वर्ष के बाद ही उसकी मृत्यु हो जाएगी। ऋषिराज नारद की बात सुनकर राजा अश्वपति घोर चिंता में डूब गए। सावित्री ने उनसे कारण पूछा, तो राजा ने कहा, पुत्री तुमने जिस राजकुमार को अपने वर के रूप में चुना है वह अल्पायु हैं। तुम्हे किसी और को अपना जीवन साथी बनाना चाहिए। इस पर सावित्री ने कहा कि पिताजी, आर्य कन्याएं अपने पति का एक बार ही वरण करती हैं, राजा एक बार ही आज्ञा देता है और पंडित एक बार ही प्रतिज्ञा करते हैं और कन्यादान भी एक ही बार किया जाता है। वट सावित्री सावित्री हठ करने लगीं और बोलीं मैं सत्यवान से ही विवाह करूंगी। राजा अश्वपति ने सावित्री का विवाह सत्यवान से कर दिया।सावित्री अपने ससुराल पहुंचते ही सास-ससुर की सेवा करने लगी। समय बीतता चला गया। नारद मुनि ने सावित्री को पहले ही सत्यवान की मृत्यु के दिन के बारे में बता दिया था। वह दिन जैसे-जैसे करीब आने लगा, सावित्री अधीर होने लगीं। उन्होंने तीन दिन पहले से ही उपवास शुरू कर दिया। नारद मुनि द्वारा कथित निश्चित तिथि पर पितरों का पूजन किया। हर दिन की तरह सत्यवान उस दिन भी लकड़ी काटने जंगल चले गये साथ में सावित्री भी गईं। जंगल में पहुंचकर सत्यवान लकड़ी काटने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गये। तभी उसके सिर में तेज दर्द होने लगा, दर्द से व्याकुल सत्यवान पेड़ से नीचे उतर गये। सावित्री अपना भविष्य समझ गईं। सत्यवान के सिर को गोद में रखकर सावित्री सत्यवान का सिर सहलाने लगीं। तभी वहां यमराज आते दिखे। यमराज अपने साथ सत्यवान को ले जाने लगे। सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ीं। यमराज ने सावित्री को समझाने की कोशिश की कि यही विधि का विधान है। लेकिन सावित्री नहीं मानी। सावित्री की निष्ठा और पतिपरायणता को देख कर यमराज ने सावित्री से कहा कि हे देवी, तुम धन्य हो। तुम मुझसे कोई भी वरदान मांगो। सत्यवान जीवंत हो गया और दोनों खुशी-खुशी अपने राज्य की ओर चल पड़े। दोनों जब घर पहुंचे तो देखा कि माता-पिता को दिव्य ज्योति प्राप्त हो गई है। इस प्रकार सावित्री-सत्यवान चिरकाल तक राज्य सुख भोगते रहे। अतः पतिव्रता सावित्री के अनुरूप ही, प्रथम अपने सास-ससुर का उचित पूजन करने के साथ ही अन्य विधियों को प्रारंभ करें। वट सावित्री व्रत करने और इस कथा को सुनने से उपवासक के वैवाहिक जीवन या जीवन साथी की आयु पर किसी प्रकार का कोई संकट आया भी हो तो वो टल जाता है।

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