2023

राधाष्टमी व्रत कथा | व्रत विधि | महत्व

भाद्र पद माह की शुक्ल अष्टमी को राधाष्टमी मनाई जाती है। शास्त्रों में इस तिथि को श्री राधाजी का प्राकट्य दिवस माना गया है। में राधा अष्टमी 6 सितम्बर को मनाई जाएगी। पद्म पुराण के अनुसार राधा जी राजा वृषभानु की पुत्री थीं एवं राधा जी के माता का नाम कीर्ति था। कथानुसार एक बार

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भारत के प्रसिद्ध 16 हनुमान मंदिर

इस लेख में आप सब भारत के विभिन्न हिस्सों में स्तिथ 16 प्रसीद्ध हनुमान मंदिरों की बारे में जानकारी पाएंगे। इनमे से हर मंदिर की अपनी एक विशेषता है कोई मंदीर अपनी प्राचीनता की लिये फेमस है तो कोइ मंदीर अपनी भव्यता के लिए। जबकि कई मंदिर अपनी अनोखी हनुमान मूर्त्तियों के लिए जैसे की इलाहबाद का

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12 ज्योतिर्लिंग 

हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। ये संख्या में 12 है। हिंदुओं में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया

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जब भगवान विष्णु ने किया माता पार्वती के साथ छल

माना जाता है कि बद्रीनाथ धाम कभी भगवान शिव और पार्वती का विश्राम स्थान हुआ करता था। यहां भगवान शिव अपने परिवार के साथ रहते थे लेकिन श्रीहरि विष्णु को यह स्थान इतना अच्छा लगा कि उन्होंने इसे प्राप्त करने के लिए योजना बनाई। पुराण कथा के अनुसार सतयुग में जब भगवान नारायण बद्रीनाथ आए

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मत्स्य जयंती की पौराणिक कथा

मत्स्य जयंती की पौराणिक कथा |  चैत्र में शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था। इसलिए मत्स्य जयन्ती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस अवतार की कथा मत्स्य पुराण में मिलती है। इस दिन मत्स्य अवतार में विष्णु की पूजा की जाती है।

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एकलव्य की गुरुभक्ति ।

आचार्य द्रोण राजकुमारों को धनुर्विद्या की विधिवत शिक्षा प्रदान करने लगे। उन राजकुमारों में अर्जुन के अत्यन्त प्रतिभावान तथा गुरुभक्त होने के कारण वे द्रोणाचार्य के प्रिय शिष्य थे। द्रोणाचार्य का अपने पुत्र अश्वत्थामा पर भी विशेष अनुराग था इसलिये धनुर्विद्या में वे भी सभी राजकुमारों में अग्रणी थे, किन्तु अर्जुन अश्वत्थामा से भी अधिक

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योद्धा अश्वत्थामा की पौराणिक कथा

अश्वत्थामा ने कौरवों की एक सेना का नेतृत्व किया और पांडव पक्ष के कई योद्धाओं को मार गिराया। कहते हैं कि जब घटोत्कच के नेतृत्व में राक्षसों की सेना ने आक्रमण किया, तब सभी कौरव भाग खड़े हुए। मगर अश्वत्थामा अकेले वहां खड़ा रहा और घटोत्कच के पुत्र अंजनपर्वा को मार गिराया। अश्वत्थामा ने घटोत्कच

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पीपल की पूजा की कथा ।

एक पौराणिक कथा के अनुसार लक्ष्मी और उसकी छोटी बहन दरिद्रा विष्णु के पास गई और प्रार्थना करने लगी कि हे प्रभो! हम कहां रहें? इस पर विष्णु भगवान ने दरिद्रा और लक्ष्मी को पीपल के वृक्ष पर रहने की अनुमति प्रदान कर दी। इस तरह वे दोनों पीपल के वृक्ष में रहने लगीं। विष्णु

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शरद पूर्णिमा व्रत कथा

आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला त्यौहार शरद पूर्णिमा की कथा कुछ इस प्रकार से है- एक साहूकार के दो पुत्रियां थी। दोनों पुत्रियां पूर्णिमा का व्रत रखती थी, परन्तु बड़ी पुत्री विधिपूर्वक पूरा व्रत करती थी जबकि छोटी पुत्री अधूरा व्रत ही किया करती थी।परिणामस्वरूप साहूकार के छोटी पुत्री की संतान पैदा

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राधा कृष्ण की कथा

सतयुग और त्रेता युग बीतने के बाद जब द्वापर युग आया तो पृथ्वी पर झूठ, अन्याय, असत्य, अनाचार और अत्याचार होने लगे और फिर प्रतिदिन उनकी अधिकता में वृद्धि होती चली गई| अधर्म के भार से पृथ्वी दुखित हो उठी| उसने ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास पहुंचकर प्रार्थना की कि वे उसे इस असहनीय

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भगवती तुलसी की कथा 

तुलसी से जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है। श्रीमद देवि भागवत पुराण में इनके अवतरण की दिव्य लीला कथा भी बनाई गई है। एक बार शिव ने अपने तेज को समुद्र में फैंक दिया था। उससे एक महातेजस्वी बालक ने जन्म लिया। यह बालक आगे चलकर जालंधर के नाम से पराक्रमी दैत्य राजा बना। इसकी

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गोविंदा द्वादशी 

महत्वपूर्ण जानकारी गोविंदा द्वादशी व्रत को हिन्दू धर्म में विशेष माना जाता है। यह व्रत हिन्दू मास के ‘फाल्गुन’ के दौरान शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर आता है। अंग्रेजी कैलेंडर के फरवरी महीने में आता है। भगवान विष्णु के भक्तों के लिए गोविंदा द्वादशी का बहुत महत्व है। इस दिन हिंदू भक्त सुखी और समृद्ध

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