Ayodhya:अयोध्‍या में राम मंदिर बनने और अंतिम बार तोड़े जाने तक का इतिहास

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Ayodhya:अयोध्‍या में राम मंदिर बनने और अंतिम बार तोड़े जाने तक का इतिहास
KARMASU 31 December 2023 6 मिनट पढ़ें
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इस लेख में
  1. प्राचीन मंदिर Ayodhya
  2. Shree Ram Bhagwan Story:भगवान राम के बारे में सुनी-अनसुनी 10 कथाएं
  3. बाबर द्वारा Ayodhya मंदिर का विध्वंस
  4. विक्रमादित्य द्वारा निर्मित Ayodhya राम मंदिर की विशेषताएं

प्राचीन भारतीय महाकाव्य, रामायण के अनुसार, भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। हिंदू धर्म में राम Ram एक प्रमुख देवता हैं और अयोध्या उनके जन्मस्थान के रूप में पवित्र स्थान है। इतिहासकारों के अनुसार कौशल प्रदेश की प्राचीन राजधानी अवध को कालांतर में अयोध्या और बौद्धकाल में साकेत कहा जाने लगा। अयोध्या (Ayodhya) मूल रूप से मंदिरों का शहर था। हालांकि यहां आज भी हिन्दू, बौद्ध एवं जैन धर्म से जुड़े मंदिरों के अवशेष देखे जा सकते हैं। जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित 5 तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। बौद्ध मत के अनुसार यहां भगवान बुद्ध ने कुछ माह विहार किया था।

प्राचीन मंदिर Ayodhya

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कब हुआ, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है। हालांकि, माना जाता है कि यह मंदिर कम से कम 12वीं शताब्दी में मौजूद था। इस मंदिर का उल्लेख 11वीं शताब्दी के एक जैन ग्रंथ में भी मिलता है।

Ayodhya:अयोध्‍या में राम मंदिर बनने और अंतिम बार तोड़े जाने तक का इतिहास

अयोध्या को भगवान श्रीराम Shree ram के पूर्वज विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु ने बसाया था, तभी से इस नगरी पर सूर्यवंशी राजाओं का राज महाभारतकाल तक रहा। यहीं पर प्रभु श्रीराम का दशरथ के महल में जन्म हुआ था। महर्षि वाल्मीकि ने भी रामायण में जन्मभूमि की शोभा एवं महत्ता की तुलना दूसरे इन्द्रलोक से की है। धन-धान्य व रत्नों से भरी हुई अयोध्या नगरी की अतुलनीय छटा एवं गगनचुंबी इमारतों के अयोध्या नगरी में होने का वर्णन भी वाल्मीकि रामायण में मिलता है।

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कहते हैं कि भगवान श्रीराम के जल समाधि लेने के पश्चात अयोध्या Ayodhya कुछ काल के लिए उजाड़-सी हो गई थी, लेकिन उनकी जन्मभूमि पर बना महल वैसे का वैसा ही था। भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने एक बार पुन: राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण कराया। इस निर्माण के बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इसका अस्तित्व आखिरी राजा, महाराजा बृहद्बल तक अपने चरम पर रहा। कौशलराज बृहद्बल की मृत्यु महाभारत युद्ध में अभिमन्यु के हाथों हुई थी। महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़-सी हो गई, मगर श्रीराम जन्मभूमि का अस्तित्व फिर भी बना रहा।

Shree Ram Bhagwan Story:भगवान राम के बारे में सुनी-अनसुनी 10 कथाएं

लगभग 100 वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने अयोध्या में राम मंदिर Ram mandir का निर्माण करवाया था। इस मंदिर का निर्माण का उल्लेख कई ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलता है, जिनमें कालिदास की रघुवंशम्, बाणभट्ट की हर्षचरितम् और दंडी की दशकुमारचरितम् शामिल हैं।

कालिदास की रघुवंशम् में उल्लेख मिलता है कि विक्रमादित्य ने अयोध्या (Ayodhya )में राम जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर में 84 स्तंभ थे और इसकी ऊंचाई 100 फीट थी। मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की एक विशाल प्रतिमा स्थापित थी।

विक्रमादित्य के बाद के राजाओं ने समय-समय पर इस मंदिर की देख-रेख की। उन्हीं में से एक शुंग वंश के प्रथम शासक पुष्यमित्र शुंग ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। पुष्यमित्र का एक शिलालेख अयोध्या से प्राप्त हुआ था जिसमें उसे सेनापति कहा गया है तथा उसके द्वारा दो अश्वमेध यज्ञों के किए जाने का वर्णन है। अनेक अभिलेखों से ज्ञात होता है कि गुप्तवंशीय चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय और तत्पश्चात काफी समय तक अयोध्या गुप्त साम्राज्य की राजधानी थी। गुप्तकालीन महाकवि कालिदास ने अयोध्या का रघुवंश में कई बार उल्लेख किया है। इतिहासकारों के अनुसार 600 ईसा पूर्व अयोध्या में एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र था। इस स्थान को अंतरराष्ट्रीय पहचान 5वीं शताब्दी में ईसा पूर्व के दौरान तब मिली जबकि यह एक प्रमुख बौद्ध केंद्र के रूप में विकसित हुआ। तब इसका नाम साकेत था। कहते हैं कि चीनी भिक्षु फा-हियान ने यहां देखा कि कई बौद्ध मठों का रिकॉर्ड रखा गया है। यहां पर 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था। उसके अनुसार यहां 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3,000 भिक्षु रहते थे और यहां हिन्दुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर भी था, जहां रोज हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते थे।

बाबर द्वारा Ayodhya मंदिर का विध्वंस

Ayodhya:अयोध्‍या में राम मंदिर बनने और अंतिम बार तोड़े जाने तक का इतिहास

इसके बाद ईसा की 11वीं शताब्दी में कन्नौज नरेश जयचंद आया तो उसने मंदिर पर सम्राट विक्रमादित्य के प्रशस्ति शिलालेख को उखाड़कर अपना नाम लिखवा दिया। पानीपत के युद्ध के बाद जयचंद का भी अंत हो गया। इसके बाद भारतवर्ष पर आक्रांताओं का आक्रमण और बढ़ गया। आक्रमणकारियों ने काशी, मथुरा के साथ ही अयोध्या में भी लूटपाट की और पुजारियों की हत्या कर मूर्तियां तोड़ने का क्रम जारी रखा। लेकिन 14वीं सदी तक वे अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ने में सफल नहीं हो पाए।

विभिन्न आक्रमणों के बाद भी सभी झंझावातों को झेलते हुए श्रीराम की जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर 14वीं शताब्दी तक बचा रहा। कहते हैं कि सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान यहां मंदिर मौजूद था। 14वीं शताब्दी में हिन्दुस्तान पर मुगलों का अधिकार हो गया और उसके बाद ही राम जन्मभूमि एवं अयोध्या को नष्ट करने के लिए कई अभियान चलाए गए। अंतत: 1527-28 में इस भव्य मंदिर को तोड़ दिया गया और उसकी जगह बाबरी ढांचा खड़ा किया गया।

कहते हैं कि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के एक सेनापति ने बिहार अभियान के समय अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर स्थित प्राचीन और भव्य मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई थी, जो 1992 तक विद्यमान रही।

विक्रमादित्य द्वारा निर्मित Ayodhya राम मंदिर की विशेषताएं

  • यह मंदिर काले रंग के कसौटी पत्थर से बना था।
  • इस मंदिर में 84 स्तंभ थे।
  • इस मंदिर की ऊंचाई 100 फीट थी।
  • मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की एक विशाल प्रतिमा स्थापित थी।
  • मंदिर के चारों ओर एक विशाल दीवार थी और इसकी सुरक्षा के लिए कई सैनिक तैनात थे।
  • मंदिर को बहुत ही आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान बनाया गया था। मंदिर में कई धार्मिक अनुष्ठान और समारोह आयोजित किए जाते थे।

बाबरनामा के अनुसार 1528 में अयोध्या Ayodhya पड़ाव के दौरान बाबर ने मस्जिद निर्माण का आदेश दिया था। अयोध्या में बनाई गई मस्जिद में खुदे दो संदेशों से इसका संकेत भी मिलता है। इसमें एक खासतौर से उल्लेखनीय है। इसका सार है, ‘जन्नत तक जिसके न्याय के चर्चे हैं, ऐसे महान शासक बाबर के आदेश पर दयालु मीर बकी ने फरिश्तों की इस जगह को मुकम्मल रूप दिया।’

हालांकि यह भी कहा जाता है कि अकबर और जहांगीर के शासनकाल में हिन्दुओं को यह भूमि एक चबूतरे के रूप से सौंप दी गई थी लेकिन क्रूर शासक औरंगजेब ने अपने पूर्वज बाबर के सपने को पूरा करते हुए यहां भव्य मस्जिद का निर्माण कर उसका नाम बाबरी मस्जिद रख दिया था।

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