October 2023

Hanuman Chalisa:श्री हनुमान चालीसा

दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।  चौपाई : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै। संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।  दोहा : पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।। Hanuman ji:आधुनिक दुनिया में हनुमान चालीसा का क्या महत्व है?

Hanuman Chalisa:श्री हनुमान चालीसा Read More »

Lalita Panchami 2023 Date: कब है ललिता पंचमी? जानें देवी ललिता की पूजा करने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Lalita Panchami 2023 Kab hai: ललिता पंचमी का व्रत हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पंचमी तिथि को रखा जाता है. इस दिन पूरे मन से व्रत रखने और पूजा करने से देवी ललिता अपने भक्तों को रोग दोष से मुक्त होने का आशीर्वाद देती हैं. शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन जब माता स्कन्दमाता की पूजा अर्चना की जाती है तब माता सती के देवी ललिता स्वरूप की भी पूजा की जाती है. इस पर्व को देश के अलग अलग राज्यों में मनाया जाता है लेकिन इसे गुजरात और महाराष्ट्र में मनाने की परंपरा अधिक है. आइए जानते हैं ललिता पंचमी के दिन पूजा का मुहूर्त क्या होने वाला है और इसका महत्व क्या है.  Lalita Panchami 2023: शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन ललिता पंचमी मनाई जाती है। दस महाविद्याओं में से एक माता ललिता है। उन्हें देवी ललिता के अलावा राजराजेश्वरी, षोडशी, लीलावती, लीलामती, और महा त्रिपुर सुंदरी भी कहते हैं। दस महाविद्याओं में वह सबसे महत्वपूर्ण देवी है और मां पार्वती के तांत्रिक रूप में पूजी जाती है। यहां हम ललिता पंचमी 2023 की तिथि, समय, महत्व और अनुष्ठान के बारे में जानकारी दे रहे है Lalita Panchami 2023 Date | ललिता पंचमी 2023 तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष अश्विन महीने के दौरान शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस साल यह गुरूवार, 19 अक्टूबर 2023 (Lalita Panchami 2023 Date) के दिन पड़ेगा। इस दिन भक्त देवी पार्वती के इस स्वरुप के सम्मान में उपवास करते हैं, जिसे “उपंग ललिता व्रत” भी कहा जाता है। Lalita Panchami 2023 Timings | ललिता पंचमी 2023 समय पंचमी तिथि प्रारंभ: 19 अक्टूबर को प्रातः 01:12 बजेपंचमी तिथि समापन : 20 अक्टूबर को रात्रि 12:32 बजे तक Significance of Lalita Panchami | ललिता पंचमी का महत्व • ‘कालिका पुराण’ सहित अनेक ग्रंथों में ललिता पंचमी के धार्मिक महत्व के बारे में बताया गया है। इन शास्त्रों में देवी ललिता की पूजा बहुत महत्वपूर्ण और विशेष बताया जाता है। • भारत के दक्षिणी हिस्से में क्षेत्र में देवी ललिता को देवी चंडी का ही स्वरुप माना जाता है। इस दिन भक्त श्रद्धापूर्वक देवी का पूजन पूजा करते हैं और उनके लिए दिनभर उपवास रखते है। मान्यता है कि, इस दिन देवी के दर्शन से जीवन के कष्टों और परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है। • किंवदंतियों के अनुसार इस शुभ दिन पर देवी ललिता ने राक्षस भंडासुर का संहार करने के लिए धरती पर प्रकट हुई थीं। इसलिए ललिता पंचमी (Significance of Lalita Panchami) को देवी ललिता की ‘जयंती’ के रूप में मनाया जाता है। देवी ललिता देवी दुर्गा का अवतार हैं और ‘पंच महाभूतों’ (पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल और आकाश) से जुड़ी है। Benefits of Lalita Panchami Fast | ललिता पंचमी पर व्रत के लाभ ललिता पंचमी 2023 के दिन ‘उपंग ललिता व्रत’ रखना अत्याधिक फलदायक (Lalita Panchami Fast benefits) माना जाता है। मान्यता है कि विधि विधान से ललिता पंचमी का व्रत करने से देवी ललिता के साथ ही दसों महाविद्याओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पुराणों के अनुसार यह व्रत भक्तों के जीवन में सुख, धन, समृद्धि और शांति को आकर्षित करता है। माता ललिता को सभी सुखों की दाता माना जाता है। इसलिए सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए ललिता पंचमी 2023 के अवसर पर उपंग ललिता व्रत अवश्य करना चाहिए। सच्चे मन से देवी की पूजा करने से जीवन में आने वाली सभी परेशानियों और दुःखों से छुटकारा मिलता है। ललिता पंचमी की पूजा विधि (Lalita Panchami Puja Vidhi) माता ललिता को समर्पित इस व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान सम्पन्न कर लेना चाहिए और फिर मंदिर जाकर ललिता पंचमी व्रत के लिए संकल्प करना चाहिए. सबसे पहले आपको भगवान श्री गणेश, भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए. इसके बाद माता अशोक सुन्दरी की पूजा करनी चाहिए. सुख-समृद्धि का आशीर्वाद पाने के लिए माता ललिता की प्रतिमा के आगे शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए और फिर माता ललिता सहस्रावली का पाठ करना चाहिए. पूजा के समय ध्यान रखना चाहिए कि मुख उत्तर की ओर न रहे.

Lalita Panchami 2023 Date: कब है ललिता पंचमी? जानें देवी ललिता की पूजा करने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि Read More »

जीवन के हर कष्ट को दूर करेंगे हनुमान जी के ये powerful मंत्र

बचपन में सूर्य को फल समझकर खा जाने वाले, बड़े-बड़े पर्वत उठाने वाले और स्वयं प्रभु का कार्य संवारने वाले महाबली हनुमान की पूजा के लिए मंगलवार का दिन उत्तम माना जाता है। मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा अर्चना करने से सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष है तो उसे हनुमान जी की आराधना जरूर करनी चाहिए। इससे मंगल दोष दूर होता है। प्रभु श्री राम के परम भक्त भगवान हनुमान को अमरता का वरदान प्राप्त है। कहा जाता है कि हनुमान जी ऐसे देवता हैं जो हमारे बीच धरती पर मौजूद हैं। आठों सिद्धियों और नौ निधियों के दाता की कृपा पाने के लिए मंगलवार के दिन पूजा के साथ ही हनुमान जी के कुछ चमत्कारी मंत्रों का भी जाप करना चाहिए। इसके अलावा संकट मोचन हनुमान के कुछ चमत्कारी मंत्र हैं, जिनका जाप करने से भय, संकट और शत्रुओं का नाश हो जाता है। तो आइए जानते हैं हनुमान जी के प्रभावशाली मंत्रों के बारे में… ‘ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।’रोगों से ग्रस्त व्यक्ति अगर बीमारियों से जल्द छुटकारा पाना चाहता है तो उसे इस मंत्र का प्रयोग करना चाहिए। ये मंत्र सारी बीमारियों को व्यक्ति से दूर रखता है। ‘ॐ हं पवननन्दनाय स्वाहा।’संकटमोचन का जल्द से जल्द आशीर्वाद पाने की चाह है तो ये मंत्र सबसे ज्यादा लाभदायक है। सच्चे मन से इस मंत्र का जाप करने से हनुमान जी की विशेष कृपा बनी रहती है। Hanuman Mantra: प्रत्येक मंगलवार को जपें हनुमान जी के ये मंत्र, जीवन की सभी परेशानियां होंगी दूर ओम नमो भगवते हनुमते नम: यदि घर-परिवार में हमेशा क्लेश होता है, परिवार के लोगों की आपस में बनती नहीं है तो ऐसे में आपको हनुमान जी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि इस मंत्र के प्रभाव से लोगों के जीवन में सुख एवं शांति आ सकती है।  ओम हं हनुमते नम: हनुमान जी का यह मंत्र बहुत चमत्कारी माना जाता है। इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को कोर्ट से जुड़े मामलों में लाभ मिलता है। कहा जाता है कि इस मंत्र के प्रभाव से फैसला आपके पक्ष में आ सकता है या फिर आपको कोर्ट की तरफ से कोई राहत मिल सकता है। मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥ मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से बजरगंबली आपसे प्रसन्न होते हैं और वे अपने भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। साथ ही अपने भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं।  ओम हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट राम भक्त हनुमान के इस मंत्र का जाप करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होता है। साथ ही उनसे उत्पन्न संकटों को दूर करने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।  ओम नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा। महाबली हनुमान के इस मंत्र का जाप करने से शत्रु परास्त होते हैं। साथ ही रोगों को दूर करने और संकटों से रक्षा के लिए भी इस मंत्र का जाप किया जाता है। 

जीवन के हर कष्ट को दूर करेंगे हनुमान जी के ये powerful मंत्र Read More »

आजीवन ब्रह्मचारी रहे Hanuman Ji का था बेटा, पसीने की बूंद से हुआ था पैदा

भगवान हनुमान ने आजीवन विवाह नहीं किया था, लेकिन उनका एक बेटा था मकरध्‍वज. पुत्र मकरध्‍वज के जन्‍म के पीछे एक रोचक कथा है. हनुमान जी (Hanuman Ji) ब्रह्मचारी थे, ये बात सभी जानते हैं लेकिन ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि आजीवन अविवाहित (Unmarried) रहने के बाद भी उनका एक पुत्र पैदा हुआ था. श्रीराम के अनन्य भक्त, अनंत बलशाली, समुद्र को एक छलांग मे लांघ जाने वाले, सोने की लंका जलाने वाले बजरंगबली को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. हालांकि उनके पुत्र के जन्‍म (Birth Story) की कथा कम ही लोग जानते हैं. आइए जानते हैं हनुमान जी के पुत्र का जन्‍म कैसे हुआ था.  अहिरावण ने रखा था हनुमान का रूप  जब रावण भगवान राम (Lord Ram) से युद्ध में हारने लगा तो उसने पाताल लोक के स्वामी अहिरावण को श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण करने के लिए मजबूर किया. अहिरावण अत्यंत मायावी राक्षस राजा था, उसने हनुमान का रूप धारण करके श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण किया और उन्‍हें पाताल लोक ले गए. जब इस बात का पता चला तो भगवान राम के शिविर में हाहाकार मच गया और उनकी खोज होने लगी. बजरंगबली श्रीराम और लक्ष्मण को ढूंढते हुए पताल में जाने लगे. पाताल लोक के सात द्वार थे और हर द्वार पर एक पहरेदार था. सभी पहरेदारों को हनुमान जी ने परास्त कर दिया, लेकिन अंतिम द्वार पर उन्हीं के समान बलशाली एक वानर पहरा दे रहा था. पाताल लोक में हनुमान जी को मिला अपना पुत्र  दिखने में एकदम अपने जैसे वानर को देखकर हनुमान जी को आश्चर्य हुआ. उन्‍होंने जब उस वानर से परिचय पूछा, तो उसने अपना नाम मकरध्वज (Makardhwaj) बताया और अपने पिता का नाम हनुमान बताया. मकरध्वज के मुंह से पिता के रूप में अपना नाम सुनकर हनुमान अत्यंत क्रोधित हो गए और बोले कि यह असंभव है, क्योंकि मैं आजीवन ब्रह्मचारी रहा हूं. फिर मकरध्वज ने बताया कि जब हनुमान जी लंका जला कर समुद्र में आग बुझाने को कूदे थे, तब उनके शरीर का तापमान बहुत ज्‍यादा था. जब वह सागर के ऊपर थे, तब उनके शरीर के पसीने की एक बूंद सागर में गिर गई थी, जिसे एक मकर ने पी लिया था, और उसी पसीने की बूंद से वह गर्भावस्था को प्राप्त हो गई. उसने ही मकरध्‍वज को जन्‍म दिया था. पूर्व जन्म में अप्सरा थी मछली ऐसा माना जाता है कि वह मछली पूर्व जन्म में कोई थी लेकिन श्राप के कारण वह मछली बन गई थी। बाद में उसी मछली को अहिरावण उसके मछुआरों ने पकड़ लिया और मार दिया था। आपको बता दें कि अहिरावण एक मायावी राक्षस राजा था। कुछ समय बाद वह अप्सरा श्राप से मुक्त हो गई था। यह सब सुनकर हनुमान जी ने मकरध्वज को अपने गले से लगा लिया। लेकिन अपने पिता के रूप में हनुमान जी को पहचानने के बाद भी मकरध्वज ने हनुमान जी को अंदर नहीं जाने दिया था। इससे हनुमान जी प्रसन्न भी हुए थे। बाद में हनुमान जी और मकरध्वज के बीच युद्ध भी हुआ और अंत में हनुमान जी ने अपनी पूंछ से उसे बांधकर दरवाजे से हटा दिया था और फिर श्री राम और लक्ष्मण को बंधन से मुक्त कराया था। बाद में भगवान श्री राम ने ही मकरध्वज को ही पाताल का नया राजा घोषित किया था।  

आजीवन ब्रह्मचारी रहे Hanuman Ji का था बेटा, पसीने की बूंद से हुआ था पैदा Read More »

Hanuman Jayanti : यहां हुआ था हनुमान जी का जन्‍म, आज भी मौजूद हैं ये स्‍थान

भगवान राम और हनुमानजी के जीवन पर रचे गए महाकाव्‍य रामायण में हनुमानजी को भगवान राम का सबसे बड़ा भक्‍त बताया गया है। पुराणों में बजरंगबली को रुद्रावतार यानी भोले बाबा का 11वां अवतार बताया गया है। हनुमान जयंती को उनके जन्‍मदिवस के रूप में मनाया जाता है। हनुमान जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। पहली जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और दूसरी कार्तिक मास में दीपावली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी के दिन भी हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर आपको बताते हैं कि बजरंगबली का जन्‍म कहां हुआ था और अभी कहां स्थित हैं ये स्‍थान… ऐसे कहलाए अंजनि पुत्र हनुमानजी की माता का नाम अंजना था। जो अपने पूर्व जन्म में एक अप्सरा थीं। अंजना ब्रह्मा लोक की एक अप्‍सरा थीं, उन्हें एक ऋषि ने बंदरिया बनने का शाप दिया था। शाप के अनुसार जिस दिन अंजना को किसी से प्रेम हो जाएगा, उसी क्षण वह बंदरिया बन जाएगी और उनका पुत्र भगवान शिव का रूप होगा। अंजना को अपनी युवा अवस्था में केसरी से प्रेम हो गया और दोनों का विवाह हो गा। ऐसे हुआ हनुमान जी का जन्‍म उड़ते-उड़ते वह पक्षी देवी अंजना के आश्रम चला गया. यहां माता अंजना तपस्या कर रही थी. उस दौरान पक्षी के मुंह से खीर माता अंजना के हाथ में गिर गई. देवी ने इसे भोलेनाथ का प्रसाद मानकर ग्रहण कर लिया. इस प्रसाद के प्रभाव और ईश्वर की कृपा से माता अंजना ने शिव के अवतार बाल हनुमान को जन्म दिया. उस दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि थी. जन्मस्थान का पहला मत बजरंग बली के पिता केसरी कपि क्षेत्र के राजा थे। कपिस्थल कुरु साम्राज्य का एक प्रमुख भाग था। हरियाणा का कैथल पहले करनाल जिले का भाग था। यह कैथल ही पहले कपिस्थल था। कुछ शास्त्रों में ऐसा वर्णन आता है कि कैथल ही हनुमानजी का जन्म स्थान है। यहां हनुमानजी का बहुत बड़ा मंदिर भी स्थित है। जन्मस्थान का दूसरा मत गुजरात स्थित डांग जिला रामायण काल में दंडकारण्य प्रदेश के रूप में पहचाना जाता था। मान्यता के अनुसार यहीं भगवान राम व लक्ष्मण को शबरी ने बेर खिलाए थे। आज यह स्थल शबरी धाम के नाम से जाना जाता है। अंजनी पर्वत पर स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी का भी जन्म हुआ था। कहा जाता है कि अंजना माता ने अंजनी पर्वत पर ही कठोर तपस्या की थी और इसी तपस्या के फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न यानी हनुमान जी की प्राप्ति हुई थी। माता अंजना ने अंजनी गुफा में ही हनुमानजी को जन्म दिया था। जन्मस्थान का तीसरा मत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी का जन्म झारखंड राज्य के गुमला जिला के आंजन गांव की एक गुफा में हुआ था। आंजन गांव में ही माता अंजनी निवास करती थीं और इसी गांव की एक पहाड़ी पर स्थित गुफा में रामभक्त हनुमान का जन्म हुआ था। इसी विश्वास के साथ यहां की जनजाति भी बड़ी संख्या में भक्ति और श्रद्धा के साथ माता अंजना और भगवान महावीर की पूजा करते हैं। जन्मस्थान का चौथा मत पंपासरोवर अथवा पंपासर होस्पेट तालुका, मैसूर का एक पौराणिक स्थान है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में, पंपासरोवर स्थित है। यहां स्थित एक पर्वत में एक गुफा भी है जिसे रामभक्तनी शबरी के नाम पर शबरी गुफा कहते हैं। इसी के निकट शबरी के गुरु मतंग ऋषि का आश्रम था और कहते हैं कि इसी आश्रम में बजरंगबली जन्‍मे थे।

Hanuman Jayanti : यहां हुआ था हनुमान जी का जन्‍म, आज भी मौजूद हैं ये स्‍थान Read More »

Dream:सपने में जीवनसाथी से रिश्ता टूटना देता है ये संकेत

अगर आपको सपने में कभी अपने जीवनसाथी से रिश्ता टूटता हुआ  दिखे तो ये अलग बातों के संकेत देता है। आइए जानें ऐसे सपने से जुड़े मतलब के बारे में और इससे मिलने वाले सकेतों के बारे में।  हर सपने का एक आध्यात्मिक अर्थ भी होता है और यह सामान्य से अलग हो सकता है। कई बार सपने में कुछ ऐसी चीजें दिखती हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता है और कुछ सपने आपके भूत, वर्तमान और भविष्य का आइना दिखाते हैं। ऐसे ही एक सपना है जीवनसाथी से रिश्ता टूटने का सपना। ऐसा सपना आपके जीवन में कई संकेत देता है। दरअसल, ये इस बात का संकेत नहीं है कि आपका वास्तव में रिश्ता टूट रहा है बल्कि ये अन्य पहलुओं के बारे में भी बताता है। अगर आपको बार-बार ऐसे सपने दिखते हैं तो ये आपको बताते हैं कि आपको अपने रिश्ते के बारे में ज्यादा सोचने और उसे समय देने की आवश्यकता है। आइए ज्योतिषाचार्य डॉ आरती दहिया जी से जानें ऐसे सपने से मिलने वाले संकेतों के बारे में जिससे आपका पार्टनर से रिश्ता टूटता हुआ दिखाई देता है। असुरक्षा की भावना कई बार आप वही सोने में देखते हैं जो वास्तव में सोचते हैं। यदि आपको ऐसा सपना दिखे जिसमें जीवनसाथी से रिश्ता टूटने जैसी बातें दिखाई दें तो ये आपकी असुरक्षा की भावना को दिखाता है। हो सकता है कि असल जिंदगी में आपको इस बात का डर बना रहता हो कि आपके रिश्ते में कहीं दरार न पड़ जाए। ऐसा सपना आने का मतलब है कि आपको पार्टनर के साथ ज्यादा समय बिताने की जरूरत है जिससे आप उन्हें अच्छी तरह से समझ सकें। बेवजह जीवनसाथी पर शक करना कई बार आपका अपने पार्टनर पर शक करना ऐसे सपने की वजह हो सकता है जिसमें आपका पार्टनर के साथ ब्रेकअप हो रहा हो। हो सकता है कि आपको असल जिंदगी में पार्टनर पर भरोसा नहीं है और आपको ऐसा लगता है कि वो आपको कभी भी धोखा दे सकता है। हालांकि ऐसा वास्तविक जीवन में भी हो ये जरूरी नहीं है। इसलिए ऐसे सपने से घबराने के बजाय पार्टनर पर भरोसा करें। कोई काम बिगड़ सकता है अगर सपने में आपको जीवनसाथी से रिश्ता टूटता हुआ दिखाई देता है तो समझें कि भविष्य में कोई बना हुआ काम बिगड़ सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि इससे वास्तव में आपका रिश्ता टूटने वाला है बल्कि कोई और काम भी बिगड़ सकता है। आपको हर एक काम सोच-समझकर करने की जरूरत है और ध्यान रखें कि कोई भी बड़ा निर्णय सोच समझकर ही लें। पारिवारिक कलह हो सकती है अगर आपको कभी ऐसा सपना दिखे कि आपका पार्टनर से ब्रेकअप हो गया है तो ये वास्तव में पारिवारिक कलह का संकेत भी हो सकता है। आपको सभी सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत है और झगड़ों से बचने की भी आवश्यकता है। पार्टनर से नाखुश होना ऐसा हो सकता है कि वास्तविक जीवन में भी आप पार्टनर से खुश न हों, इसलिए आपको ऐसे सपने दिखाई देते हों। सपने में रिश्ता टूटना इस बात का संकेत है कि आपको अपने रिश्ते को ज्यादा समय देने की जरूरत है। एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें और बेवजह मनमुटाव से बचें। नई शुरुआत ब्रेकअप का सपना देखना यह दर्शाता है कि आप अपने असल जीवन में अधिक स्वतंत्र होने की इच्छा रखती हैं। यह इस बात का भी संकेत हो सकता है कि आपके साथी ने आप पर कई सीमाएं लगाई हैं, जिनसे आप मुक्त होना चाहती हैं। साथ ही, हो सकता है कि आप अपने साथी पर बहुत अधिक निर्भर हो गए हों और अब आप सीमाओं से मुक्त जीवन जीने की इच्छा रखते हों। रिश्ते में अनिश्चितता आपके प्रेम या वैवाहिक जीवन में आपके लिए भविष्य क्या है, इसका स्पष्ट दृष्टिकोण न होने पर भी आपको ऐसे सपने दिखाई देते हैं। ऐसा सपना दिखने पर आपको यह सुनिश्चित करने के लिए बैठकर अपने रिश्ते का फिर से विश्लेषण करने की आवश्यकता है कि आप रिश्ते से संतुष्ट क्यों नहीं हैं। इस सपने का यह भी मतलब हो सकता है कि आप अपने पार्टनर के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अगर आपको भी रिश्ता टूटने जैसा कोई सपना दिखाई देता है तो ये आपके जीवन में मिले-जुले संकेत देता है। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर भेजें। सपने में शादी का टूटना कैसा होता है? दोस्तों यदि आपको कुछ ऐसा सपना आता है जहां सपने में शादी टूट जाती है या शादी के मंडप में दूल्हा या दुल्हन नहीं आते इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में आपके हाथों से शुभ कार्य होने वाला था वह सफल नहीं होता | आपके हाथों शुभ कार्य होते होते रह जाता है जिसके चलते आप पर मानसिक तनाव बढ़ सकता है और आप क्रोधित भी हो सकते हैं | सपने में शादी का टुकड़ा जो भी दर्शाता है कि आपका वैवाहिक जीवन कुछ अच्छा नहीं चल रहा और आप में मतभेद होने की शंका है | यदि आप सिंगल हो तो हो सकता है कि आने वाले लंबे समय तक आपको अपना जीवन साथी नहीं मिलेगा और अपना मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए आपको और भी वेट करना पड़ेगा | सपने में शादी का टूटना का क्या मतलब होता है? दोस्तों यदि आपको कुछ ऐसा सपना आता है जहां सपने में शादी टूट जाती है या शादी के मंडप में दूल्हा या दुल्हन नहीं आते इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में आपके हाथों से शुभ कार्य होने वाला था वह सफल नहीं होता | आपके हाथों शुभ कार्य होते होते रह जाता है जिसके चलते आप पर मानसिक तनाव बढ़ सकता है और आप क्रोधित भी हो सकते हैं | सपने में शादी का टुकड़ा जो भी दर्शाता है कि आपका वैवाहिक जीवन कुछ अच्छा नहीं चल रहा और आप में मतभेद होने की शंका है | यदि आप सिंगल हो तो हो सकता है कि आने वाले लंबे समय तक आपको अपना

Dream:सपने में जीवनसाथी से रिश्ता टूटना देता है ये संकेत Read More »

Hanuman:हनुमानजी भगवान राम के परम भक्त कैसे बने?

उत्तर देने या ईश्वरीय सत्य को जानने के लिए मुझे थोड़ा शोध करना पड़ा। इस प्रश्न को पोस्ट करने के लिए धन्यवाद, इसने मुझे अज्ञात दिव्यता में गहराई से उतरने का अवसर दिया। श्री हनुमान: जन्म से वे वानर (बंदर) जाति के थे – एक पशु जनजाति। वह श्री राम, नरोत्तम या मनुष्यों में सर्वश्रेष्ठ के साथ थे। श्रीहनुमान वास्तव में भगवान हैं। संस्कृत में एक कहावत है, जो यह घोषणा करती है कि यदि कोई श्री हनुमान की पूजा करता है, तो सभी देवताओं की पूजा हो जाती है (अंजनेयः पूजितश्चेत् पूजिता ससर्व देवताः)। श्री हनुमान को अप्रतिम बुद्धि भी प्रदान की गई है। उन्हें बुद्धिमान लोगों में सर्वश्रेष्ठ और आध्यात्मिक विकासकर्ताओं में प्रथम बताया गया है। (बुद्धि मातम वरिष्ठ, ज्ञानेन अग्रगण्य) श्री राम ने स्वयं पहली मुलाकात में ही श्री हनुमान की योग्यता की बौद्धिक प्रतिभा को पहचान लिया था। भगवान हनुमान कौन हैं? एक बार “गर्दबा निस्वाना” नाम का एक राक्षस, जो भगवान शिव का परम भक्त था, ऋषियों और उनकी पवित्र गतिविधियों को परेशान कर रहा था, उसे भगवान शिव से वरदान मिला था कि कोई भी देवता, दानव या यक्ष उसे नहीं मार पाएगा। चूँकि दुष्कर्मों ने स्वर्ग और अन्य ग्रहों को परेशान करना जारी रखा, भगवान शिव चिंतित थे और राक्षस को खत्म करने के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान शिव की इस घोषणा के बाद कि यदि राक्षस विष्णु द्वारा मारा जाता है, तो वह एक सेवक के रूप में उनकी सेवा करेंगे, अन्यथा विष्णु अपने निवास स्थान कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के साथ रहेंगे। अपना दांव हारने के बाद, भगवान शिव भगवान विष्णु की सेवा करने के लिए तैयार हो गए। भगवान विष्णु ने भगवान शिव को यह कहते हुए मना कर दिया कि उनका दांव ब्रह्मांड के कल्याण के लिए है। भगवान विष्णु ने कहा, “जब मैं त्रेता युग में श्री राम के रूप में अवतार लूंगा तो आप कपि वीर (वानर नायक) के रूप में अवतार लेकर मेरी सेवा करेंगे।” इस प्रकार भगवान शिव ने भगवान विष्णु की सेवा करने के अपने वचन को पूरा करने के लिए, श्री राम की सेवा करने के लिए श्री हनुमान के रूप में अवतार लिया अब मैं भगवान हनुमान के जन्म पर वापस नहीं जाऊंगा क्योंकि हममें से ज्यादातर लोग उनके माता-पिता के बारे में जानते होंगे। श्री हनुमान का जन्म कहाँ हुआ था? यह तिरुमाला में था. पुराण इस मत का समर्थन करते हैं। ब्रह्माण्ड पुराण में कहा गया है कि चूंकि अंजना ने पहाड़ी पर कड़ी तपस्या के माध्यम से एक बच्चे को जन्म दिया था, इसलिए पहाड़ी को “अंजनाद्रि” के नाम से जाना जाने का आशीर्वाद मिला। अंजनाद्रि वास्तव में उन सात पहाड़ियों में से एक है जो तिरुमाला पहाड़ियों को बनाती हैं। किष्किंधा कांड: वाल्मिकी रामायण । अपनी शिक्षा पूरी होने पर, हनुमान ने अपनी माँ से प्रार्थना की कि वह उन्हें भविष्य की कार्ययोजना के बारे में सलाह दें। वह अपने बेटे के अच्छे इरादों से प्रसन्न थी। उसने कहाः “बेटा! मैं अहल्या और गौतम ऋषि की पुत्री हूं। इन्द्र और सूर्य द्वारा ठगी गयी मेरी माता के दो पुत्र हुए। मेरे पिता, जो सच्चाई जानते थे, उन्होंने बच्चों को नदी में फेंक दिया और उन्हें बंदर के आकार का होने का श्राप दिया। शापित जोड़ी बाली और सुग्रीव हैं। बाली का जन्म इंद्र के कारण और सुग्रीव का जन्म सूर्य के कारण हुआ। दोनों मेरे भाई हैं. सुग्रीव धर्मात्मा है. बाली ने सुग्रीव को गलत समझा और सुग्रीव की पत्नी को छीन लिया। बाली दुष्ट मार्ग पर चल रहा है और वह सुग्रीव को मारने का इरादा रखता है। तुम सुग्रीव के पास जाओ और उसके मंत्री तथा रक्षक बनो। “मेरा बच्चा! अपने कर्तव्य की पुकार में, आप अपने भगवान से मिलेंगे। आप उसे तुरंत पहचान लेंगे, क्योंकि उसकी दृष्टि ही आपमें एक अज्ञात भावना उत्पन्न कर देगी। आप उनकी सेवा करें और अपने जीवन का उद्देश्य पूरा करें।” अंजना की सलाह ने अंजनेय को अपने मिशन, अपने भगवान के मिशन और अपने शिक्षक सूर्य के मिशन पर स्थापित किया। चूँकि सुग्रीव सूर्य की संतान थे, इसलिए सुग्रीव की सेवा करना उनके गुरु की सेवा करने के समान था। अपनी माँ की सलाह के अनुसार, अंजनेय सुग्रीव के मंत्री बने। रावण ने सीता का हरण किया। श्री राम और लक्ष्मण उनकी खोज में निकल पड़े। उन्होंने जटायु को देखा, जो मरने वाला था। जटायु ने उन्हें रावण के दुष्कर्म के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि रावण ने दक्षिण की ओर यात्रा की। तदनुसार श्री राम और लक्ष्मण ने दक्षिण की यात्रा की और पंपा नदी के तट पर पहुँचे। यह ऐसा था जैसे सुग्रीव ने उन्हें देखा था। उसने सोचा: “क्या वे बाली द्वारा भेजे गए थे?” वह परेशान हो गया। उन्होंने अपनी चिंता हनुमान से साझा की। हनुमान ने सुग्रीव को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा: “वे खतरनाक प्रतीत नहीं होते हैं। इसके अलावा वली या उसके अनुयायी हमारे यहाँ नहीं आ सकते। आप वानर जाति के विशिष्ट ढुलमुल रवैये से पीड़ित हैं।” सुग्रीव बेचैन थे. वह चाहते थे कि हनुमान एक भिक्षुक के भेष में उन दो अजनबियों के पास जाएँ। अजनबी श्री राम और लक्ष्मण गृहस्थ (विवाहित पुरुष) थे। हनुमान भिक्षुक के भेष में थे। स्थापित प्रथा के अनुसार, विवाहित पुरुषों को भिक्षुक का सम्मान करना चाहिए, लेकिन अन्यथा बुद्धिमान का नहीं। परंपरा के विपरीत, भिक्षुक के भेष में हनुमान ने हाथ जोड़कर श्री राम और लक्ष्मण को सम्मान दिया। श्री राम के दर्शन मात्र से ही हनुमान अत्यंत प्रसन्न हो गये। उन्हें अजीब सी भक्ति भावना का अनुभव हो रहा था. उसे तुरंत अपनी माँ की बातें याद आ गईं। हनुमान ने श्री राम में अपने भगवान को पहचान लिया । उन्होंने बोलना प्रारम्भ कियाः “महापुरुषों! आप साधुओं की तरह कपड़े पहने हुए हैं, लेकिन तलवार, धनुष और तीर पहनते हैं। आपके कंधे बताते हैं कि वे शाही प्रतीक चिन्ह के पात्र हैं। कृपया मुझे बताएं कि आप कौन हैं? मैं वायु देवता, वायु देवता के आशीर्वाद से केसरी और उनकी पत्नी अंजना नाम के एक वानर वंश में पैदा हुआ हूं। मेरा नाम हनुमंत है. मैं सुग्रीव का अनुयायी हूं।” अपने बारे में सब कुछ बताने के बाद, हनुमान कहते हैं: “मैंने इतना कुछ कहा है और आप जवाब नहीं देते हैं”। हनुमान की बातें श्रीराम को आश्चर्यचकित कर देती हैं। वह लक्ष्मण के साथ अपना आश्चर्य साझा करते हुए कहते हैं: “लक्ष्मण, केवल चार वेदों में पारंगत व्यक्ति ही इस तरह की बात कर सकता है। यदि वह नौ प्रकार के व्याकरणों का विद्वान न

Hanuman:हनुमानजी भगवान राम के परम भक्त कैसे बने? Read More »

Hanuman :श्री राम भक्त हनुमान जी के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र जो सभी प्रकार के कष्ट का निवारण

मंत्र श्री हनुमान मूल मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र: हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्.फल: से इस मंत्र के बारे शास्त्रो में वर्णित हैं की यह मंत्र स्वतंत शिवजी ने श्रीकृष्ण को बताया और श्रीकृष्ण नें यह मंत्र अर्जुन को सिद्ध करवाया था जिसे अर्जुन ने चर-अचर जगत् को जीत लिया था.प्रेत बाधा दूर करे चमत्कारी हनुमान मंत्र:हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार हनुमानजी का नाम लेने से भूत-प्रेत आदि सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. यदि आप भी ऐसी ही किसी बाधा से पीडि़त हैं तो नीचे लिखे हनुमान मंत्र से इस समस्या का हल संभव है. यदि इस मंत्र का जप विधि-विधान से किया जाए तो कुछ ही समय में ऊपरी बाधा का निवारण हो सकता है. यह हनुमान मंत्र इस प्रकार हैमंत्र :हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।जप विधि : स्वच्छ अवस्था में यानी स्नान आदि करने के बाद हनुमानजी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर तथा गुड़-चना चढ़ाएं. इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश का आसन ग्रहण करें. तत्पश्चात लाल चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें. इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा.मुसीबतों को दूर करे हनुमान मंत्रहिन्दू धर्म शास्त्रों श्री हनुमान की इसी शक्ति और महिमा का गान करते हुए उनको शक्ति स्वरूपा माता सीता के शोक का नाश करने वाले देवता बताकर जानकी शोक नाशनम् कहकर पुकारा गया है. संकेत है कि श्री हनुमान की उपासना जीवन से हर शोक दूर रखती है. चूंकि श्री हनुमान मंगलमूर्ति भगवान शिव के अवतार भी हैं. यही कारण है कि संकट और शोक नाश के लिए श्री हनुमान की उपासना परंपराओं में शिव भक्ति की तरह आसान उपाय भी बताए गए हैं. इनको श्री हनुमान की उपासना में आचरण व विचारों की पवित्रता के साथ अपनाना निर्भय और बेदाग जीवन का मंत्र भी माना गया है. नीचे बताई पूजा सामग्री और विशेष छोटे-पर असरदार हनुमान मंत्र से श्री हनुमान की उपासना आज करना न चूकें !मंत्र : ॐ हं हनुमंताय नम:।जप विधि : स्नान के बाद श्री हनुमान मंदिर में जाकर श्री हनुमान की पूजा में केसर चंदन, अक्षत, लाल गुलाब के साथ अलावा विशेष रूप से चमेली का फूल आसान, किंतु अचूक हनुमान मंत्र के साथ अर्पित करें.इस मंत्र की 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप भी संकटनाश में बहुत असरदार माने गए हैं. इसके साथ ही चमेली के तेल के साथ श्री हनुमान को सिंदूर चढ़ावें या चोला चढ़ाना भी शोक-पीड़ा मुक्ति की कामना के लिए मंगलकारी सिद्ध होगा. श्री हनुमान को यथाशक्ति भोग लगाकर गुग्गल धूप व गाय के घी के दीप से आरती करें व अक्षय सुख की कामना करें.संकटों को दूर करे ये हनुमान मंत्र!जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. कभी कोई विरोधी परेशान करता है तो कभी घर के किसी सदस्य को बीमार घेर लेती है. इनके अलावा भी जीवन में परेशानियों का आना-जाना लगा ही रहता है. ऐसे में हनुमानजी की आराधना करना ही सबसे श्रेष्ठ है. यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन में कोई संकट न आए तो नीचे लिखे मंत्र का जप हनुमान जयंती व प्रति मंगलवार को कर सकते हैं.मंत्र : ॐनमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा जप विधि := सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुल देवता को नमन कर कुश का आसन ग्रहण करें. पारद हनुमान प्रतिमा के सामने इस मंत्र का जप करेंगे तो विशेष फल मिलता है. जप के लिए लाल हकीक की माला का प्रयोग करें.मनोकामना पूरी करे ये हनुमान मंत्र !हर सुबह बोलें यह हनुमान मंत्र !सांसारिक जीवन की आपाधापी में हर इंसान जीवन से जुड़े हर काम में अच्छे नतीजे ही चाहता है. लेकिन जीवन ही किसी प्रकार अच्छा बना लें? इस बारे में बिरले लोग ही विचार कर पाते हैं. अगर जीवन को ही अच्छे आचरण, अनुशासन और संकल्पों से जोड़ लिया जाए तो फिर किसी भी कार्य की सफलता में भय, संशय पैदा नहीं होता. हनुमान भक्ति जीवन में अच्छे आचरण को अपनाने के लिये सर्वश्रेष्ठ मानी गई है. शास्त्रों में हनुमान का स्मरण किसी भी वक्त अच्छे कामों व सोच की प्रेरणा ही देता है. इसलिए शास्त्रों में बताया गया विशेष हनुमान मंत्र हर रोज सुबह खासतौर पर हनुमान जयंती यानी चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर स्मरण किया जाए तो लक्ष्य की सफलता को लेकर पैदा होने वाले भय-संशय व बाधाएं खत्म हो जाते हैं. साथ ही अशुभ बातों से हमेशा रक्षा होती है. जानिए हैं यह मंत्र –जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. कभी कोई विरोधी परेशान करता है तो कभी घर के किसी सदस्य को बीमार घेर लेती है. इनके अलावा भी जीवन में परेशानियों का आना-जाना लगा ही रहता है. ऐसे में हनुमानजी की आराधना करना ही सबसे श्रेष्ठ है. यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन में कोई संकट न आए तो नीचे लिखे मंत्र का जप हनुमान जयंती या प्रतियेक मंगलवार को भी इस मंत्र का जप कर सकते हैं. मंत्र :  ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहाजप विधि:  सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद अपने माता-पिता, गुरु, इष्ट व कुल देवता को नमन कर कुश का आसन ग्रहण करें. पारद हनुमान प्रतिमा के सामने इस मंत्र का जप करेंगे तो विशेष फल मिलता है. जप के लिए लाल हकीक की माला का प्रयोग करें.भय का नाश करता है यह हनुमान मंत्र !क्या आप किसी अज्ञात भय से ग्रसित हैं या आपको हर समय किसी का डर सताता रहता है. कुछ लोगों को इस प्रकार की समस्या रहती है. उन्हें हर समय किसी न किसी बात का डर सताता रहता है. जब यह भय अधिक बढ़ जाता है तो एक रोग का रूप ले लेता है. यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो नीचे लिखे मंत्र का विधि-विधान से जप करने से इसका निदान संभव है.मंत्र : अंजनीर्ग सम्भूत कपीन्द्रसचिवोत्तम. राम प्रिय नमस्तुभ्यं हनुमते रक्ष सर्वदा।। विधि :  सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें उस के बाद अज्ञात भय से रक्षा के लिए इस

Hanuman :श्री राम भक्त हनुमान जी के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र जो सभी प्रकार के कष्ट का निवारण Read More »

नवरात्री की पूजा कैसे करें NAVRATRI 2023 PUJA VIDHI

नवरात्री का त्योहार हिन्दू धर्म में मां दुर्गा की पूजा और आराधना के रूप में मनाया जाता है। यह पूजा नौ दिनों तक चलती है और इसके दौरान नौ रूपों की पूजा की जाती है, जिनका नाम है – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री। नवरात्रि की पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधियाँ हैं: पूजा सामग्री पूजा विधि नवरात्रि के दौरान व्रत नवरात्रि के दौरान, कई लोग व्रत रखते हैं। व्रत रखने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। नवरात्रि के दौरान व्रत रखने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए: नवरात्रि के दौरान अन्य अनुष्ठान नवरात्रि के दौरान, कई अन्य अनुष्ठान भी किए जाते हैं, जैसे कि:

नवरात्री की पूजा कैसे करें NAVRATRI 2023 PUJA VIDHI Read More »

शारदीय नवरात्रि 2023 विशेष क्या है  NAVRATRI

2023 की शारदीय नवरात्रि कई मायनों में विशेष है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार के दिन हो रही है, जो एक शुभ दिन माना जाता है। इसके अलावा, इस बार नवरात्रि के दौरान कई दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं। इनमें से कुछ संयोग निम्नलिखित हैं: इन दुर्लभ संयोगों के कारण, इस बार की शारदीय नवरात्रि को बहुत ही शुभ माना जा रहा है। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होने की संभावना है। उदाहरण सहित रवियोग के उदाहरण के लिए, हम कह सकते हैं कि इस योग में मां दुर्गा की पूजा करने से आत्मिक और बौद्धिक उन्नति की संभावना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जो किसी परीक्षा की तैयारी कर रहा है, वह इस योग में मां दुर्गा की पूजा करके परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकता है। या, एक व्यक्ति जो अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है, वह इस योग में मां दुर्गा की पूजा करके अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। विस्तारित इसके अलावा, 2023 की शारदीय नवरात्रि भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर भी है। इस बार नवरात्रि के दौरान, भारत में होने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजे आने की संभावना है। इसलिए, इस बार की नवरात्रि देश के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर पर, देश के सभी लोग मां दुर्गा की पूजा करके देश में शांति, समृद्धि और विकास की कामना कर सकते हैं। वे मां दुर्गा से यह भी प्रार्थना कर सकते हैं कि वे देश के नेताओं को सही दिशा में ले जाने की शक्ति प्रदान करें। कुल मिलाकर, 2023 की शारदीय नवरात्रि कई मायनों में विशेष है। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा करके देश और समाज को नई ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने की कोशिश करनी चाहिए। NAVRATRI KAB HAI , NAVRATRI KA YOG

शारदीय नवरात्रि 2023 विशेष क्या है  NAVRATRI Read More »

Hanuman Putra:जानिये कौन हैं हनुमान पुत्र और क्या है उनके जन्म की कथा?

Hanuman Putra वह प्रभु राम और लक्ष्मण को पाताल लोक लेकर चला गया था। तब हनुमान जी प्रभु राम और लक्ष्मण को खोजते हुए पाताल लोक पहुंच गए। वहां उन्होंने अपने जैसे पहरेदार को देखकर अचंम्भा हो गए। भगवान हनुमान प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त हैं। हम सभी जानते हैं कि पवनपुत्र हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी थे। इसी वजह से उनका एक पुत्र होने की बात पर आश्चर्य होना स्वभाविक है। हालांकि महर्षि वाल्मीकि के रामायाण में बताया गया है कि भगवान हनुमान का एक पुत्र भी था। वाल्मीकि रामायण में इससे संबंधित एक प्रसंग का वर्णन भी मिलता है। आइए पढ़ते हैं उससे जुड़ी कथा के बारे में। हनुमान पुत्र मकरध्वज की कथा जब पाताल लोक के असुरराज अहिरावण ने भाई रावण के कहने पर प्रभु राम और लक्ष्मण को बंदी बना लिया था। वह प्रभु राम और लक्ष्मण को पाताल लोक लेकर चला गया था। तब हनुमान जी प्रभु राम और लक्ष्मण को खोजते हुए पाताल लोक पहुंच गए। वहां उन्होंने अपने जैसे पहरेदार को देखकर अचंभित हो गए। हनुमान जी की तरह दिखाई देने वाले पहरे पर खड़े हुए मकरध्वज ने स्वयं को हनुमान का पुत्र बताया। हनुमान जी इस बात को मानने को तैयार नहीं हुए, तो मकरध्वज Makardhwaj ने अपनी उत्पत्ति की कथा सुनाई। मकरध्वज ने हनुमान जी से बोला कि आप जब माता सीता की खोज में लंका पहुंचे। आपको मेघनाद द्वारा पकड़कर रावण के दरबार में प्रस्तुत किया गया। वहां पर रावण ने आपकी पूंछ में आग लगवा दी थी, जिसके बाद आप अपनी जलती पूंछ की आग बुझाने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे। आग बुझाते हुए आपके पसीने की एक बूंद पानी में टपकी, जिसे एक बड़ी मछली ने पी लिया था। उसी एक बूंद की वजह से वह मछली गर्भवती हो गई।  क्या आपको पता है हनुमान जी के पांच भाईयो के बारे में ? एक दिन पाताल के असुरराज अहिरावण के सेवकों ने खाने के लिए उस मछली को पकड़ लिया। लेकिन जब उसका पेट चीर रहे थे, तभी उसमें से वानर की आकृति का एक मनुष्य निकला, जो कि मैं था। सेवक बालक को अहिरावण के पास लेकर गए। अहिरावण ने मुझे पाताल पुरी का रक्षक नियुक्त कर दिया। वह मैं ही हूं, जो मकरध्वज के नाम से प्रसिद्ध हुआ। हनुमानजी ने अहिरावण का वध कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया। इसके बाद उन्होंने अपने पुत्र मकरध्वज को पाताल लोक का राजा नियुक्त कर दिया। हनुमान जी ने मकरध्वज को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। हनुमान पुत्र मकरध्वज हनुमान जी के एक पुत्र थे, जिनका नाम मकरध्वज था। मकरध्वज का जन्म एक मछली के गर्भ से हुआ था। पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, जब हनुमान जी ने लंका पर चढ़ाई की थी, तब उन्हें मेघनाद ने पकड़ लिया था। मेघनाद ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी थी। हनुमान जी अपनी जलती हुई पूंछ की आग बुझाने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे। आग बुझाते हुए उनके पसीने की एक बूंद पानी में टपकी, जिसे एक बड़ी मछली ने पी लिया था। उसी एक बूंद की वजह से वह मछली गर्भवती हो गई। जब मछली ने एक बच्चे को जन्म दिया, तो उसने उस बच्चे का नाम मकरध्वज रखा। मकरध्वज एक शक्तिशाली वानर था। उसने अपने पिता हनुमान जी की तरह ही भगवान राम की सेवा की। मकरध्वज की कथा का एक और संस्करण मकरध्वज की कथा का एक और संस्करण भी है। इस संस्करण के अनुसार, मकरध्वज हनुमान जी के पुत्र नहीं थे, बल्कि उनके शिष्य थे। मकरध्वज एक शक्तिशाली वानर थे, जिन्हें हनुमान जी ने अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया था। कथा का विश्लेषण हनुमान पुत्र मकरध्वज की कथा एक पौराणिक कथा है। इस कथा का कोई भी प्रमाण नहीं है। हालांकि, यह कथा हनुमान जी की भक्ति और शक्ति का एक प्रतीक है। कथा का महत्व हनुमान पुत्र मकरध्वज की कथा हिंदू धर्म में बहुत लोकप्रिय है। यह कथा हनुमान जी की भक्ति और शक्ति का एक प्रतीक है। यह कथा यह भी बताती है कि भगवान राम की भक्ति सभी को आशीर्वाद देती है, चाहे वह मनुष्य हो या पशु। कथा का नैतिक हनुमान पुत्र मकरध्वज की कथा से हमें यह नैतिक शिक्षा मिलती है कि हमें भगवान की भक्ति करनी चाहिए। भगवान की भक्ति से हमें सभी सुख और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। कथा का अंत मकरध्वज ने अपने पिता हनुमान जी की तरह ही भगवान राम की सेवा की। उसने रावण के साथ लड़ाई में भी हिस्सा लिया। मकरध्वज एक शक्तिशाली योद्धा था। उसने कई राक्षसों को मार डाला। अंत में, मकरध्वज ने रावण के पुत्र इंद्रजीत को भी मार डाला। इस तरह, मकरध्वज ने भगवान राम की मदद से रावण का वध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Hanuman Putra:जानिये कौन हैं हनुमान पुत्र और क्या है उनके जन्म की कथा? Read More »

 क्या आपको पता है हनुमान जी के पांच भाईयो के बारे में ?

ब्रह्मांडपुराण के अनुसार, हनुमान जी के पांच भाई थे, जिनके नाम हैं: इन सभी भाइयों का जन्म अंजना और केसरी के गर्भ से हुआ था। हनुमान जी इन सबमें बड़े थे। मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान सभी विवाहित थे और सभी संतान से युक्त थे। हनुमान जी के इन भाइयों के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। केवल उनके नाम ही ब्रह्मांडपुराण में उल्लिखित हैं। कुछ लोगों का मानना ​​है कि हनुमान जी के ये भाई भी भगवान शिव के अवतार थे। हालांकि, इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। हनुमान जी के भाइयों के नाम और उनके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए और शोध की आवश्यकता है। देवराज इंद्र के लोक में एक अप्सरा कुंजीस्थली रहती थी जब एक बार दुर्वासा ऋषि इंद्र की सभा में उपस्थित थे जब अप्सरा बार-बार अंदर बाहर आकर सभा में विघ्न उत्पन्न कर रही थी जिससे दुर्वासा ऋषि क्रोधित हो गए और उन्होंने उस अप्सरा को बंदरिया हो जाने का श्राप दे दिया इसके बाद अप्सरा ने ऋषि से श्राप वापस लेने के लिए बहुत प्रार्थना की तब दुर्वासा ऋषि ने उन्हें इच्छा अनुसार रूप धारण करने का वरदान दिया कुछ वर्षों बाद अप्सरा कुंजीस्थली ने वानर श्रेष्ठ ब्रज के यहां वानरी रूप में जन्म लिया और उनका नाम अंजनी रखा गया विवाह योग्य होने पर उनके पिता ने अपनी पुत्री अंजनी का विवाह महान पराक्रमी, शिरोमणि वानरराज केसरी से कर दिया बहुत समय तक जब अंजनी मां को संतान नहीं हुई तब उन्होंने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कठिन तप किया फिर एक बार वानर राज केसरी प्रभास तीर्थ के निकट थे तब उन्होंने देखा की वहां बहुत से साधु ध्यान लगाकर पूजा अर्चना कर रहे हैं तभी एक विशाल हाथी आया और उसने वहां बैठे ऋषियों को मारना प्रारंभ कर दिया वहीं ऋषि भरद्वाज Bhardwaj अपने आसन पर ध्यान लगाकर बैठे थे वह हाथी उनकी ओर बढ़ रहा था तभी वानर राज केसरी ने बलपूर्वक हाथी के दांतो को पकड़कर उसे मार डाला तब सभी ऋषियों ने प्रसन्न होकर राजा केसरी को वरदान मांगने को कहा,तब उन्होंने इच्छा अनुसार रूप धारण करने वाला पवन के समान तेज तथा रूद्र के समान पुत्र प्राप्त करने का वरदान मांगा था इसके बाद सभी ऋषि उन्हें यह वरदान देकर वहां से चले गए | बजरंगबली क्यों कहा जाता है  हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार है जो सबसे बलशाली और बुद्धिमान है हनुमान जी का जन्म श्री राम और श्री राम भक्तों की सहायता करने के लिए हुआ है इस संपूर्ण कलयुग में हनुमान जी उपस्थित रहकर श्री राम भक्तों की सहायता अवश्य करते हैं जो सच्चे मन, कर्म, और वचन से श्री राम जी का भक्त हैं स्वयं हनुमान जी की कृपा उस पर हमेशा बनी रहती है इस पृथ्वी पर जिन 7 ऋषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है उनमें हनुमान जी भी शामिल है हनुमान जी के पराक्रम की अनेक कथाएं रामायण एवं अन्य ग्रंथों में प्रचलित है इनका शरीर वज्र के समान होने के कारण इन्हें “बजरंगबली” और पवन के समान वेग होने के कारण इन्हें “मारुति” कहा जाता है बचपन में मां अंजनी और पिता केसरी ने इनका नाम मारुति रखा था लेकिन जब सूर्य को निगल लेने पर इंद्र ने मारुति पर वज्र प्रहार किया तब मारुति की टोडी का रूप बिगड़ गया जब से इनका नाम हनुमान पड़ गया हनुमान का अर्थ होता है बिगड़ी हुई टोंडी हनुमान जी के 108 और नाम है और हर नाम का अलग-अलग अर्थ है इन के 108 नामों का जप करने से समस्त दुख रोगों का नाश हो जाता है कहते हैं कि हनुमान जी आज भी अयोध्या में श्री राम नवमी पर सरयू नदी के किनारे साधु का वेश धारण कर ब्राह्मणों को भोजन कराने आते हैं |  Hanuman Putra:जानिये कौन हैं हनुमान पुत्र और क्या है उनके जन्म की कथा? हनुमान जी के पांच भाई  एक बार हनुमान जी ने श्रीराम की याद में अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था क्योंकि उन्होंने 1 दिन माता सीता को सिंदूर लगाते हुए देख लिया था जब उन्होंने माता सीता से इसका कारण पूछा तो माता सीता ने कहा यह सिंदूर श्री राम के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक है यह जानने के बाद हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया यह दर्शाने के लिए कि वह भी श्री राम से बहुत प्रेम करते हैं इस घटना के बाद हनुमान जी का लाल रंग में उनका रूप बहुत ही प्रचलित हुआ महाभारत काल में भीम Bheem अपने बल के कारण जाने जाते थे वह भी हनुमान जी के भाई थे  इनके अलावा हनुमान जी के पांच भाई और भी थे हनुमान जी के पांच सगे भाई और भी थे और वह सभी विवाहित थे इस बात का उल्लेख ब्रह्मांड पुराण में मिलता है पांचों भाइयों में बजरंगबली सबसे बड़े थे हनुमान जी को शामिल करने के बाद वानर राज केसरी के 6 पुत्र थे सभी में सबसे बड़े बजरंगबली थे इनके बाद मति मान, श्रुति मान ,केतु मान, गतिमान धूती मान थे इन सभी की संताने भी थी जिसके कारण इनका वंश कई वर्षों तक चला था | हनुमान जी की सत्य घटना  जब बाली को यह वरदान मिला कि जो भी उस से युद्ध करने उसके सामने आएगा तो उसकी आदि शक्ति वाली में चली जाएगी और बाली हर युद्ध में जीत जाएगा सुग्रीव और बाली दोनों ब्रह्मा के औरस पुत्र थे बाली पर ब्रह्मा जी की सदैव कृपा बनी रहती थी बाली को अपनी शक्ति पर बहुत ही घमंड था उसका घमंड और भी अधिक बढ़ गया जब उसने तीनों लोकों के सबसे शक्तिशाली योद्धा रावण से युद्ध किया था बाली ने रावण को अपनी पूंछ से बांधकर पूरी दुनिया में भ्रमण किया था रावण जैसे योद्धा को हराकर बाली के घमंड की कोई सीमा नहीं रही थी इसके बाद बाली अपने आपको संसार का सबसे बड़ा योद्धा समझने लगा था 1 दिन बाली अपने घमंड में हरे भरे पौधों को तिनके के समान उखाड़ कर फेंक रहा था बाली अपनी ताकत के नशे में पूरे जंगल को उजाड़ रहा था और वह बार-बार युद्ध करने की चेतावनी दे रहा था उसी जंगल में

 क्या आपको पता है हनुमान जी के पांच भाईयो के बारे में ? Read More »