October 16, 2023

 Navratri 2023 Day 7: माता कालरात्रि की पूजा से आसुरीय प्रभावों से मिलती है मुक्ति, जानें पूजा विधि

 Navratri 2023 Day 7 शारदीय नवरात्र के सातवें दिन माता कालरात्रि की विधिवत पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार माता कालरात्रि सभी सिद्धियों की देवी हैं यही कारण है कि इस दिन इनकी आराधना करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। Navratri 2023 Day 7: नवरात्र पर्व में मां दुर्गा के सातवें सिद्ध स्वरूप माता कालरात्रि की पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि के दिन मां दुर्गा के सबसे शक्तिशाली स्वरूप की विधि-विधान से पूजा की जाती हैं। मान्यता है कि आज के दिन माता (Mata Kalratri Puja) की पूजा करने से और मंत्रों का जाप करने से सभी प्रकार के दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं। माता कालरात्रि को को सभी सिद्धियों की देवी के रूप में भी जाना जाता है इसलिए इस दिन तंत्र-मंत्र से भी माता की पूजा की जाती है। शास्त्रों में इस बात का भी वर्णन मिलता है कि माता कालरात्रि के मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करने से भूत-बाधाओं से मुक्ति मिलती है और घर से इस प्रकार की नकारात्मक शक्तियां भाग जाती हैं। आइए जानते हैं माता कालरात्रि का स्वरूप, पूजा विधि और ,मंत्र। कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप आपको बता दें कि मां कालरात्रि का रंग रात के समान काला है। मां के चार हाथ है। मां  कालरात्रि के दो हाथों में वज्र और खडग है और उनके अन्य दो हाथ अभय यानि रक्षा और वरदा यानि आशीर्वाद की स्थिति में हैं । मां कालरात्रि के लंबे और खुले बाल हैं। देवी कालरात्रि का वाहन गधा है। बता दें कि देवी कालरात्रि अपने भक्तों को सभी बुराईयों से बचाती हैं और उनपर कृपा करती हैं । नवरात्रि के सातवे दिन उनकी पूजा कि जाती है, क्योंकि वह सभी अंधकारों को नष्ट कर सकती है और दुनिया में शांति लाती है। मां कालरात्रि की पूजा का महत्व  मां कालरात्रि को मां काली भी कहा जाता है । ये देवी दुर्गा का  सातवां अवतार है । शास्त्रों  में इन्हें संकटों और विघ्न को दूर करने वाली देवी माना गया है। आपको बता दे कि नवरात्रि में मां कालरात्रि की पूजा करने से तनाव, अज्ञात भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है । इसके साथ ही मां कालरात्रि को शत्रु और दुष्टों का संहार करने वाला भी कहा जाता है। आपको बता दें कि मां कालरात्रि पूर्णता का प्रतीक है वो अपने भक्तों को पूर्णता और खुशी पाने में मदद करती हैं । वो अपने भक्तों को बिना भय के जीवन जीने में मदद करती हैं और उन्हें बुरी शक्तियों और आत्माओं से बचाती हैं। Navratri 2023 Day 8 : चैत्र नवरात्रि आठवां दिन, आज महागौरी की पूजा विधि, भोग, मंत्र इनकी पूजा से लाभ जानें करें इस मंत्र का जाप या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।। पूजा की विधि मां कालरात्रि की पूजा के लिए सुबह 6 बजे का समय उत्तम माना जाता है।  इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके मां की पूजा के लिए लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए।  इसके बाद मां के सामने दीप जलाएं। अब फल-फूल, मिठाई आदि से विधिपूर्वक मां कालरात्रि की आराधना करें। पूजा के समय मंत्रों का जाप करना चाहिए उसके बाद आरती करनी चाहिए। मां कालरात्रि के इन मंत्रों का उच्चारण करें। ‘ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। ‘दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।  इस दिन काली चालीसा, सिद्धकुंजिका स्तोत्र, अर्गला स्तोत्रम आदि चीजों का पाठ करना चाहिए।  इन सब के साथ नवरात्रि के सातवें दिन रात्रि में तिल के तेल या सरसों के तेल की अखंण्ड ज्योत जलाएं। माता कालरात्रि की आरती (Mata Kalratri Aarti) कालरात्रि जय-जय-महाकाली । काल के मुह से बचाने वाली ।। दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा । महाचंडी तेरा अवतार ।। पृथ्वी और आकाश पे सारा । महाकाली है तेरा पसारा ।। खड्ग-खप्पर रखने वाली । दुष्टों का लहू चखने वाली ।। कलकत्ता स्थान तुम्हारा । सब जगह देखूं तेरा नजारा ।। सभी देवता सब नर-नारी । गावें स्तुति सभी तुम्हारी ।। रक्तदंता और अन्नपूर्णा । कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ।। ना कोई चिंता रहे बीमारी । ना कोई गम ना संकट भारी ।। उस पर कभी कष्ट ना आवें । महाकाली मां जिसे बचाबे ।। तू भी भक्त प्रेम से कह । कालरात्रि मां तेरी जय ।।

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Navratri 2023 Day 6: माता कात्यायनी की पूजा से हो जाते हैं सभी दुःख दूर, जानें पूजा विधि और मंत्र

नवरात्र महापर्व के छठे दिन मां दुर्गा के सिद्ध स्वरूप माता कात्यायनी की पूजा का विधान है। इस दिन माता के प्रिय रंग पसंदीदा भोग और मंत्रों को जानना बहुत आवश्यक होता है।  माता कात्यायनी को भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्री के रूप में भी जाना जाता है। माता कात्यायनी (Navratri 2023 Day 6 Puja) का रूप सबसे सुंदर है और  बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में इन्हें छठ मैया के रूप में भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के छठे दिन माता कात्यायनी की विधि-विधान से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। जानिए माता कात्यायनी का स्वरूप, पूजा विधि, पूजा मंत्र और आरती- मां कात्यायनी का स्वरूप शास्त्रों के अनुसार माता का स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला है और उनकी चार भुजाएं हैं। प्रत्येक भुजा में माता ने तलवार, कमल, अभय मुद्रा और वर मुद्रा धारण किया है। माता कात्यायनी को लाल रंग सर्वाधिक पसंद है। किंवदंतियों के अनुसार महर्षि कात्यायन की तपस्या के बाद माता कात्यायनी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया था। मां दुर्गा इन्हीं के रूप में महिषासुर का वध कर उसके आतंक से देव और मनुष्यों को भय मुक्त किया था। मां कात्यायनी पूजा विधि (Maa Katyayani Puja Vidhi) नवरात्रि पर्व के छठे दिन सबसे पहले स्नान-ध्यान के बाद कलश पूजा करें और इसके बाद मां दुर्गा की और माता कात्यायनी की पूजा करें। पूजा प्रारंभ करने से पहले मां को स्मरण करें और हाथ में फूल लेकर संकल्प जरूर लें। इसके बाद वह फूल मां को अर्पित करें। फिर कुमकुम, अक्षत, फूल आदि और सोलह श्रृंगार माता को अर्पित करें। उसके बाद उनके प्रिय भोग शहद को अर्पित करें और मिठाई इत्यादि का भी भोग लगाएं। फिर जल अर्पित करें और घी के दीपक जलाकर माता की आरती करें। आरती से पहले दुर्गा चालीसा व दुर्गा सप्तशती का पाठ करना ना भूले। करें इन मंत्रों का जाप (Maa Katyayani Mantra) 1. या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।। 2. चंद्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना । कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि ।। माता कात्यायनी की आरती (Maa Katyayani Aarti) जय जय अम्बे, जय कात्यायनी। जय जग माता, जग की महारानी। बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहां वरदाती नाम पुकारा। कई नाम हैं, कई धाम हैं। यह स्थान भी तो सुखधाम है। हर मंदिर में जोत तुम्हारी। कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी। हर जगह उत्सव होते रहते। हर मंदिर में भक्त हैं कहते। कात्यायनी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की। झूठे मोह से छुड़ाने वाली। अपना नाम जपाने वाली। बृहस्पतिवार को पूजा करियो। ध्यान कात्यायनी का धरियो। हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी। जो भी मां को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे।

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Navratri 2023 Day 5: स्कंदमाता की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और भोग

नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। माना जाता है कि स्कंदमाता संतान देने के साथ सभी इच्छाएं पूरी करती हैं। जानिए मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप की कैसे करें पूजा। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन के साथ शारदीय नवरात्र का पांचवा दिन है। नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। माना जाता है कि स्कंदमाता की विधिवत पूजा करने से सुख-समृद्धि के साथ-साथ संतान प्राप्ति होती है। जानिए नवरात्र के पांचवें दिन कैसे करें स्कंदमाता की पूजा, साथ ही जानिए शुभ मुहूर्त, भोग और मंत्र। Navratri 2023 Day 6: माता कात्यायनी की पूजा से हो जाते हैं सभी दुःख दूर, जानें पूजा विधि और मंत्र कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप स्कंदमाता की स्वरूप काफी प्यारा है। मां दुर्गा की स्वरूप स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं, जिसमें दो हाथों में कमल लिए हैं, एक हाथ में कार्तिकेय बाल रूप में बैठे हुए हैं और एक अन्य हाथ में मां आशीर्वाद देते हुए नजर आ रही हैं। बता दें कि मां का वाहन सिंह है, लेकिन वह इस रूप में कमल में विराजमान है। स्कंदमाता का पूजा विधि नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा की पूजा करने से पहले कलश की पूजा करें। इसके बाद मां दुर्गा और उनके स्वरूप की पूजा आरंभ करें। सबसे पहले जल से आचमन करें। इसके बाद मां को फूल, माला चढ़ाएं। इसके बाद सिंदूर, कुमकुम, अक्षत आदि लगाएं। फिर एक पान में सुपारी, इलायची, बताशा और लौंग रखकर चढ़ा दें। इसके बाद मां स्कंदमाता को भोग में फल में केला और इसके अलावा मिठाई चढ़ा दें। इसके बाद जल अर्पित कर दें। इसके बाद घी का दीपक, धूप जलाकर मां के मंत्र का जाप करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में दुर्गा मां के साथ स्कंदमाता की आरती करें। मां स्कंदमाता का मंत्र (Maa Skandmata Mantra) ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम: या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।। मां स्कंदमाता के उपाय (Maa Skandmata Upay) संतान प्राप्ति की कामना के लिए एक चुनरी में नारियल बांध लें और “नन्दगोपगृहे जाता यशोदागर्भ सम्भवा. ततस्तौ नाशयिष्यामि विन्ध्याचलनिवासिनी”. ये मंत्र बोलते हुए देवी को नारियल और चुनरी को देवी स्कंदमाता का ध्यान करते हुए माता के चरणों में चढ़ाएं. इसके बाद इसे शयनकक्ष में सिरहाने पर रखें. मान्यता है कि स्कंदमाता की पूजा से संतान की प्राप्ति में आ रही बाधाओं का अंत होता है.

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