July 7, 2023

शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं भगवान शिव

लक्ष्मी-गणेश, राधा-कृष्ण, राम-सीता, विष्णु, ब्रह्मा आदि अनेकों भगवान भारी-भारी गहनों और वस्त्रों से लदे होते हैं. इन भगवानों की मूर्तियां मंदिरों में देखें या फिर इनके चित्रों पर गौर करें. हर जगह यह सभी सोने-चांदी से जड़े आभूषणों में दिखाई देते हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर भगवान शिव क्यों बिना आभूषणों के रहते हैं. उनके गले में माला के नाम पर सांप, सिर पर मुकुट की जगह जटाएं, शरीर पर मलमल के कपड़ों के बजाय बाघ की खाल और शरीर पर चंदन के लेप के बजाय भस्म क्यों है?  कहते हैं भगवान शिव भोले हैं, क्योंकि वे अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाले हैं। वे अपने भक्तों के समक्ष स्वयं प्रकट होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं एवं मन मुताबिक वरदान देते हैं। हिंदू धर्म में शिवजी की बड़ी महिमा हैं। शिवजी का न आदि है ना ही अंत। शास्त्रों में शिवजी के स्वरूप के संबंध कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। इनका स्वरूप सभी देवी-देवताओं से बिल्कुल भिन्न है। जहां सभी देवी-देवता दिव्य आभूषण और वस्त्रादि धारण करते हैं वहीं शिवजी ऐसा कुछ भी धारण नहीं करते, वे शरीर पर भस्म रमाते हैं, उनके आभूषण भी विचित्र है। शिवजी शरीर पर भस्म क्यों रमाते हैं? इस संबंध में धार्मिक मान्यता यह है कि शिव को मृत्यु का स्वामी माना गया है और शिवजी शव के जलने के बाद बची भस्म को अपने शरीर पर धारण करते हैं। इस प्रकार शिवजी भस्म लगाकर हमें यह संदेश देते हैं कि यह हमारा यह शरीर नश्वर है और एक दिन इसी भस्म की तरह मिट्टी में विलिन हो जाएगा। अत: हमें इस नश्वर शरीर पर गर्व नहीं करना चाहिए। कोई व्यक्ति कितना भी सुंदर क्यों न हो, मृत्यु के बाद उसका शरीर इसी तरह भस्म बन जाएगा। अत: हमें किसी भी प्रकार का घमंड नहीं करना चाहिए। जब भगवान शिव और माता सति को यज्ञ के लिए निमंत्रण ना मिलने पर सति ने क्रोध में आकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था. उस वक्त भगवान शिव माता सति का शव लेकर धरती से लेकर आकाश तक हर जगह घूमे. विष्णु जी भगवान शिव की ये दशा देख ना पाए और माता सति के शव को छूकर उन्होंने उसे भस्म में बदल दिया. अपने हाथों में सति की जगह भस्म देखकर शिव जी और परेशान हो गए और बाद में भस्म को देखकर माता सति को याद कर वो राख उन्होंने अपने शरीर पर लगा ली इस संबंध में एक अन्य तर्क भी है कि शिवजी कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं, जहां का वातावरण अत्यंत ही ठंडा है और भस्म शरीर का आवरण का काम करती हैं। यह वस्त्रों की तरह ही उपयोगी होती है। भस्म बारिक लेकिन कठोर होती है जो हमारे शरीर की त्वचा के उन रोम छिद्रों को भर देती है जिससे सर्दी या गर्मी महसूस नहीं होती हैं। शिवजी का रहन-सहन सन्यासियों सा है। सन्यास का यही अर्थ है कि संसार से अलग प्रकृति के सानिध्य में रहना। संसारी चीजों को छोड़कर प्राकृतिक साधनों का उपयोग करना। ये भस्म उन्हीं प्राकृतिक साधनों में शामिल है।

शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं भगवान शिव Read More »

कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा और कब शिवलिंग पर चढ़ाया जाएगा जल, जानें शिव पूजा का शुभ समय

भगवान शिव की भक्ति में भिगोने वाला श्रावण मास कब शुरू होगा? इस साल कब कांवड़ यात्रा पर निकलेंगे भोले के भक्त और कब चढ़ाया जाएगा भगवान शिव को जल? जानने के लिए पढ़ें ये लेख. भगवान शिव की पूजा के लिए श्रावण मास को सबसे ज्यादा शुभ और फलदायी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव को श्रावण का महीना बहुत ज्यादा प्रिय है. यही कारण है कि भोले के भक्त इस पूरे माह उनकी पूजा में मगन रहते हैं. महादेव की पूजा से जुड़ा श्रावण मास इस साल 4 जुलाई 2023 को प्रारंभ होगा और इसकी समाप्ति 31 अगस्त 2023 को होगी. ऐसे में इस साल शिव के भक्त अपने आराध्य देवता की तकरीबन दो महीने पूजा कर सकेंगे. आइए जानते हैं इस साल कांवड़ यात्रा कब शुरु होगी और कब शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाएगा. सावन में यह 5 काम जरूर करें, इन 7 कामों से बचें कब शुरू होगी कांवड़ यात्रा इस साल कावड़ यात्रा श्रावण मास के पहले दिन यानि 4 जुलाई 2023 से प्रारंभ होगी और 15 जुलाई 2023 तक चलेगी. इस साल 15 जुलाई 2023 को शिवरात्रि पड़ेगी और इसी दिन शिव भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाएंगे. शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए शुभ मुहूर्त रात्रि 08:32 बजे प्रारंभ होकर 16 जुलाई 2023 तक रहेगा. इस बार महादेव को जल चढ़ाने के लिए 2 दिन का मुहूर्त है. ऐसे में शिव भक्त दो दिन शिव को जल चढ़ाकर उनकी साधना-आराधना कर सकेंगे. वहीं चतुर्दशी तिथि 15 जुलाई को 8:32 से प्रारंभ होगी 16 जुलाई को 10:08 तक रहेगी. भले ही इस साल शिव भक्त दो दिन जल चढ़ा सकते हैं लेकिन इसका सबसे उत्तम मुहूर्त 15 जुलाई 2023 शिवरात्रि को 8:32 पर रहेगा. किसने की थी पहली कांवड़ यात्रा हरिद्वार स्थित गंगा सभा के स्वागत मंत्री आचार्य चक्रपाणि के अनुसार भले ही इस साल श्रावण मास दो महीने तक रहेगा, लेकिन कांवड़ यात्रा पहले की तरह होगी. जिसके लिए शिवभक्त 04 जुलाई से अपने-अपने स्थान से हर की पौड़ी जल लेने के लिए निकलेंगे और और 15 जुलाई 2023 को अपने आराध्य को अर्पित करेंगे. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव की साधना से जुड़ी पहली कांवड़ यात्रा भगवान परशुराम जी ने की थी और उन्होंने हरिद्वार से गंगाजल लेकर पुरा महादेव में जाकर चढ़ाया था. मान्यता है कि पुरा महादेव में शिवलिंग की स्थापना भी भगवान परशुराम जी ने की थी. वर्तमान में लोग अपनी-अपनी श्रद्धा और विश्वास से जुड़े शिव धाम जाकर महादेव की पूजा करते हैं. क्यों चढ़ाया जाता है शिव को जल हिंदू मान्यता के अनुसार जब देवताओं और दैत्यों द्वारा किए गये समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला तो भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उसे पीकर अपने गले में रोक लिया. जिसके बाद महादेव का कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए. मान्यता है कि भगवान शिव के गले में इकट्ठे हुए विष की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए शिव भक्त विशेष रूप से शिवरात्रि के दिन जल चढ़ाते हैं ताकि उनके गले में स्थित नकारात्म्क उर्जा दूर हो सके.

कब से शुरू होगी कांवड़ यात्रा और कब शिवलिंग पर चढ़ाया जाएगा जल, जानें शिव पूजा का शुभ समय Read More »

सावन में यह 5 काम जरूर करें, इन 7 कामों से बचें

सावन मास में क्या करें, क्या न करें इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है। आइए जानें महत्वपूर्ण जानकारी श्रावण मास में क्या करें और क्या न करें इसका विचार हर शिव भक्त को करना चाहिए। सावन मास की सावन के प्रत्येक सोमवार हर किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। जानें, बाबा की नगरी काशी के विश्वनाथ मंदिर की पौराणिक कथा सावन का पहला सोमवार इस बार 30 जुलाई को है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस बार सावन का हर सोमवार बेहद खास है।मनोकामना पूर्ति के लिए इस बार सावन का हर सोमवार अत्यधिक महत्व का माना जा रहा है। सावन में शिव कैलाश त्यागकर भूलोक पर निवास करते हैं।इसलिए सावन में भगवान शिव की आराधना सर्वोपरि है। इतना ही नहीं शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन का हर दिन विशेष महत्व का होता है। यह करें  1. धतूरा और भांग भगवान श‌िव को अर्प‌ित करें।  2. म‌िट्टी से श‌िवल‌िंग बनाकर न‌ियम‌ित इसकी पूजा करें।  3. दूध दान करें।  4. शाम के समय भगवान श‌िव की आरती पूजा करें। 5. इस महीने में अगर घर के दरवाजे पर सांड आ आए तो उसे कुछ खाने को दें। यह न करें   1. शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए  2. कांसे के बर्तन में नहीं खाना चाहिए।  3. पूजा के समय में शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं। 4. सावन के महीने में दूध का सेवन अच्छा नहीं होता है। 5. सावन के महीने में द‌िन के समय नहीं सोना चाह‌िए।  6 . सावन के महीने में बैंगन नहीं खाना चाह‌िए। बैंगन को अशुद्ध माना गया है।  7. भगवान शिव को केतकी का फूल भूल कर भी न चढ़ाएं।

सावन में यह 5 काम जरूर करें, इन 7 कामों से बचें Read More »