April 2023

भगवान विष्णु के चरणों से निकला अमृत है गंगा

नीराकार ब्रह्म अर्थात् जलरूप ब्रह्म या द्रवरूप में ब्रह्म कोई ‘नराकार ब्रह्म’ (राम, कृष्ण) को भजता है , तो कोई ‘निराकार ब्रह्म’ को; परन्तु कलियुग में मनुष्य के पाप-तापों की शान्ति ‘नीराकार ब्रह्म’ से ही होती है । हिन्दी में ‘नीर’ जल को कहते हैं । ‘द्रव’ तरल पदार्थ को कहते हैं । अत: नीराकार ब्रह्म

भगवान विष्णु के चरणों से निकला अमृत है गंगा Read More »

गंगा सप्तमी 2023 देवी गंगा के सम्मान का दिन

गंगा सप्तमी को ज्यादातर भारत के उत्तरी भागों में बहुत जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में, गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता है और इसे देवी के रूप में पूजा जाता है। इस प्रकार, गंगा सप्तमी को हिंदुओं के लिए एक शुभ दिन माना जाता है और यह

गंगा सप्तमी 2023 देवी गंगा के सम्मान का दिन Read More »

गंगा सप्तमी पर बन रहा है अत्यंत शुभ योग, जरूर करें ये खास उपाय

तिष पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन गंगा सप्तमी मनाई जाती है। गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा की विशेष उपासना की जाती है और इस दिन को मां गंगा के धरती पर प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि इस वर्ष 27 अप्रैल

गंगा सप्तमी पर बन रहा है अत्यंत शुभ योग, जरूर करें ये खास उपाय Read More »

शनिवार को पीपल की पूजा करने से क्यों प्रसन्न होते हैं शनिदेव,जानिए पौराणिक कथा

पीपल का पेड़ वैज्ञानिक दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है धार्मिक दृष्टि से भी उतना ही महत्तवपूर्ण है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में पीपल के पेड़ पर पितरों का वास माना गया है अतः पितृ पूजा में पीपल के पेड़ का विशेष स्थान है । इसके अतिरिक्त स्कंदपुराण में पीपल के वृक्ष की तुलना श्री हरि विष्णु से

शनिवार को पीपल की पूजा करने से क्यों प्रसन्न होते हैं शनिदेव,जानिए पौराणिक कथा Read More »

जानें भारत के प्राचीन मंदिरों के बारे में, जिसका वर्षों पुराना है इतिहास

भारत में ऐसे कई पुराने मंदिर हैं, जिनका इतिहास अति प्राचीन है। इनकी सुंदरता और प्रसिद्धि आज भी बरकरार है। आइए जानें इन मंदिरों के बारे में भारत की संस्कृति और आध्यात्मिकता की चर्चा विश्व भर में फैली हुई हैं। विभिन्न धर्मों के संगम की धरती भारत में एक से बढ़कर एक पुराने व भव्य

जानें भारत के प्राचीन मंदिरों के बारे में, जिसका वर्षों पुराना है इतिहास Read More »

सृष्टि के रचयिता ब्रम्ह देव के 4 सिर क्यों है, जानें इसकी पौराणिक कथा

हिन्दू धर्म कई रहस्यों से भरा हुआ है. जितना जानने की कोशिश करें उतना ही कम है. हिन्दू पुराणों में उल्लेख है कि सृष्टि की रचना परमपिता ब्रम्हा द्वारा की गई है. हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार संसार के जीव-जंतु, पेड़-पौधे, नर-नारी सभी की रचना भगवान ब्रम्हा ने की है. यह कार्य उन्हें भगवान शिव

सृष्टि के रचयिता ब्रम्ह देव के 4 सिर क्यों है, जानें इसकी पौराणिक कथा Read More »

माँ सरस्वती की कथा

माँ सरस्वती की कथा हंस एवं मोर की सवारी करने वाली सरस्वती देवी हिन्दुओं की मुख्य देवी माना जाता हैं, इन्हें शारदा, शतरूपा, वीणावादिनी, वीणापाणि, वाग्देवी, वागेश्वरी, भारती आदि नामों से भी भक्त पुकारते हैं. विद्या की अधिष्ठात्री देवी की उपासना करने से ज्ञान तथा सद्बुद्धि की प्राप्ति होती हैं. कहा जाता हैं कि कालिदास अपने

माँ सरस्वती की कथा Read More »

क्‍यों अपनी ही पुत्री सरस्वती की ओर आकर्षित हुए थे ब्रह्मा? जानें इससे जुड़ी दो भिन्न कथाएं

भारत वर्ष के दो ग्रंथों ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का अपनी ही बेटी सरस्वती से विवाह करने का प्रसंग है पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी की पत्नी माँ सावित्री देवी हैं, पुराणों के ही अनुसार ब्रह्मा जी ने एक और स्त्री से विवाह किया था जिनका नाम माँ गायत्री

क्‍यों अपनी ही पुत्री सरस्वती की ओर आकर्षित हुए थे ब्रह्मा? जानें इससे जुड़ी दो भिन्न कथाएं Read More »

महाकाली की कहानी

महाकाली विनाश और प्रलय की पूजनीय देवी हैं। महाकाली सार्वभौमिक शक्ति, समय, जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म और मुक्ति की देवी हैं। वह काल (समय) का भक्षण करती है और फिर अपनी काली निराकारता को फिर से शुरू कर देती है। वह महाकाल की पत्नी भी हैं, महाकाली भगवान शिव का ही एक रूप है। संस्कृत

महाकाली की कहानी Read More »

दुर्गा कथा : मां पार्वती की पवित्र पौराणिक गाथा

‘या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।’  कैलाश पर्वत के निवासी भगवान शिव की अर्धांगिनी मां सती पार्वती को ही शैलपुत्री‍, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री आदि नामों से जाना जाता है। इसके अलावा भी मां के अनेक नाम हैं जैसे दुर्गा, जगदम्बा, अम्बे, शेरांवाली आदि, लेकिन सबमें सुंदर नाम

दुर्गा कथा : मां पार्वती की पवित्र पौराणिक गाथा Read More »

मंगलनाथ में भात पूजा- ONLINE PUJA

जिस जातक की जन्म कुंडली, लग्न/चंद्र कुंडली आदि में मंगल ग्रह, लग्न से लग्न में (प्रथम), चतुर्थ, सप्तम, अष्टम तथा द्वादश भावों में से कहीं भी स्थित हो, तो उसे मांगलिक कहते हैं। मांगलिक कुंडली वालों को विवाह के पूर्व मंगलनाथ में भात पूजा करने की सलाह दी जाती है। भात पूजा : भात अर्थात चावल।

मंगलनाथ में भात पूजा- ONLINE PUJA Read More »

कालसर्प दोष निवारण पूजा

कालसर्प दोष निवारण पूजा – ONLINE KARMASU

व्यक्ति के कर्म या उसके द्वारा किए गए कुछ पिछले कर्मों के परिणामस्वरूप कालसर्प योग दोष कुंडली में होना माना जाता है। इसके अलावा, यदि व्यक्ति ने अपने वर्तमान या पिछले जीवन में सांप को नुकसान पहुंचाया हो तो भी काल सर्प योग दोष की निर्मिति होती है। हमारे मृत पूर्वजों की आत्माए नाराज होने

कालसर्प दोष निवारण पूजा – ONLINE KARMASU Read More »

App Download