कृष्ण के बालपन की 16 सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
1. कंस को भविष्यवाणी कंस मथुरा नामक राज्य का राजा था। और वह बहुत लालची और क्रूर भी था। वह अत्याचारी भी था, इसलिए मथुरा की प्रजा उससे डरी रहती थी। कंस अपनी बहन देवकी से बहुत प्यार करता था। जब देवकी का विवाह हुआ, तो कंस ने अपने बहन और उसके पति वासुदेव के रथ का सारथी बनने का निर्णय किया। जब वह रथ हांक रहा था, तभी उसे आकाशवाणी सुनाई दी, “अरे मूर्ख, तेरी मौत के दिन पास आ रहे हैं!” कंस यह सब सुनकर भौचक्का रह गया। आकाशवाणी दुबारा सुनाई दी, “देवकी का आठवां पुत्र तेरा वध करेगा।” कंस यह सुनते ही अपनी बहन को मारने के लिए उठा, लेकिन वासुदेव ने उसे रोका और वचन दिया कि वे अपनी सारी संतान पैदा होते ही उसे दे दीया करेगा। कंस मान गया लेकिन उसने दोनों को कारागार में डाल दिया। वासुदेव और देवकी की छह संतान को उसने पैदा होते ही मार डाला, लेकिन कृष्ण और बलराम को वासुदेव ने अपनी चतुराई से बचा लिया। कई सालों बाद भविष्यवाणी सच साबित हुई और कृष्ण जोकि देवकी का आठवां संतान था उसने कंस का वध कर दिया और मथुरा को कंस की गुलामी से आजाद कर दिया। 2. कृष्ण के जन्म की कहानी कृष्ण की कहानियां कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया था। देवकी ने विष्णु की आराधना की, तो विष्णु ने उसे वचन दिया कि वह स्वयं उसके आठवें पुत्र के रूप में जन्म लेगा। इसके बाद श्रावण महा में तूफानी रात में विष्णु ने देवकी के पेट से जन्म लिया। उस समय आश्चर्यजनक रूप से वासुदेव की हथकड़ियां और बेड़िया खुल गई। सैनिकों को नींद आ गई। तभी आकाशवाणी हुई, “अपने बच्चे को गोकुल में नंद के पास छोड़ आओ।”वासुदेव ने एक टोकरी में नवजात बच्चे को रखा और कारागार से निकल गया। रास्ते में भारी बारिश के बीच उन्होंने यमुना नदी पार की। वह अपने बच्चे को सुरक्षित यशोदा के पास छोड़ आए। आकाशवाणी सच निकली बड़े होकर देवकी की आठवीं संतान कृष्ण ही कंस के काल बने और सभी लोगों को उनके आतंक से मुक्त किया। 3. बलराम के जन्म की कहानी कंस ने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को कारागार में डाल दिया और उनके होने वाली हर संतान को दुष्ट कंस मार देता था। क्योंकि आकाशवाणी के अनुसार देवकी की आठवीं संतान कंस का काल बनेगा परंतु दुष्ट कंस ने हर संतान को मारने लगा। जब देवकी और वासुदेव के छठे पुत्र को दुष्ट कंस ने मार डाला, तो देवकी बहुत दुखी हुई। उसने भगवान विष्णु से प्रार्थना की।एक रात भगवान विष्णु उसके सपने में आए और बोले कि नागराज शेषनाग उनके सातवे पुत्र के रूप मैं पैदा होंगे। विष्णु ने यह भी कहा कि कंस उस बच्चे को मार नहीं पाएगा। जब देवकी गर्भवती हुई तो आश्चर्यजनक रूप से उसके पेट से भ्रूण रोहिणी के गर्भ मैं चला गया। रोहिणी वासुदेव की दूसरी पत्नी थी। यह बच्चा बलराम के रूप में पैदा हुआ, जो कृष्ण का बड़ा भाई था। 4. कंस और पूतना की कहानी बच्चों के लिए कृष्ण के बालपन की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ कंस जानता था कि आकाशवाणी के अनुसार देवकी का आठवां पुत्र उसे मार डालेगा। जब देवकी की आठवीं संतान ने जन्म लिया, तो कंस को पता चला कि वह आठवीं संतान एक लड़की है तो वह तुरंत देवकी के पास कारागार जा पहुंचा। कंस ने देवकी की गोद से संतान को छीन लिया। वह दरअसल देवी योगमाया थी। योगमाया कंस की मूर्खता पर हंसने लगी और बोली की उसको मारने वाला तो जन्म ले चुका है। और गोकुल में रह रहा है। कंस बहुत क्रोधित हुआ। उसने उस दिन जन्में सभी बच्चों को मार डालने का आदेश दिया। उसके सिपाहियों ने बहुत प्रयास किया लेकिन कृष्ण को वह नहीं मार पाए। कंस ने जब राक्षसी पूतना को कृष्ण को मारने के लिए भेजा। उसने अपना विशाला दूध पिलाकर कृष्ण को मारने की योजना बनाई लेकिन बालक कृष्ण ने उस राक्षसी पूतना को ही मार दिया। 5. कृष्ण का मक्खन प्रेम कृष्ण जैसे जैसे बड़े होते गए, वैसे वैसे उनकी शैतानियां भी बढ़ती गई। दूध और मक्खन के उनके शोक की कहानियां घर-घर में फैल चुकी थी। जब ग्वालिने दूध की मटकिया लेकर निकलती तो कृष्ण और उनके साथी पत्थर मारकर मटकिया फोड़ देते थे। कृष्ण का दूध मक्खन का लालच देखकर मक्खन को मटकी में अच्छी तरह से बंद कर ऊपर छींके पर लटका देती थी, ताकि कृष्ण के हाथ पुस्तक ना पहुंच पाए। एक दिन कृष्ण को सोता जानकर यशोदा पास के कुवे से पानी भरने चल दी। उनके जाते ही कृष्ण उठ बैठे और सिटी बजाकर उन्होंने अपने सारे साथियों को बुला लिया। सारे साथी एक के ऊपर एक खड़े होते गए और सबसे ऊपर चढ़कर किसने मटकी उतार ली। सारे साथी मिलकर मक्खन खाने लगे तभी, यशोदा वहां आ गई। क्रोध में आकर उन्होंने छड़ी उठाई और उसके पीछे दौड़ी। सारे बालक भाग निकले, लेकिन कृष्ण पकड़े गए और उनकी अच्छी पिटाई हुई। आज भी हम कृष्ण के इस दही माखन के प्रेम के लिए कृष्ण जयंती पर बालक एक के ऊपर एक चढ़कर भाई या माखन की मटकी फोड़ते हैं और उन्हें याद करते हैं। 6. तृणावर्त और कृष्णा की कहानी श्री कृष्ण की बचपन की कहानी एक दिन यशोदा अपने घर के कामकाज में व्यस्त थी, बालकृष्ण को उन्होंने आंगन में छोड़ दिया। तभी, कंस का सेवक असुर तृणावर्त तेज हवा के बवंडर के रूप में वहां प्रकट हुआ और कृष्ण को उड़ा ले गया। पूरे गोकुल नगर में धूल छा गई और तृणावर्त आकाश में लगातार ऊंचाई पर बढ़ता गया। पूरे नगर में धूल का घना बादल छा गया। किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। यशोदा को चिंता हुई। उन्होंने कृष्ण को ढूंढने की कोशिश की। जब कृष्ण ही नहीं मिला तो वह जोर जोर से रोने लगी। तृणावर्त ने नन्हे बालक को अपने कंधों पर उठाने की कोशिश की, लेकिन कृष्ण ने अपने आप को इतना भारी कर लिया कि वह विवश होकर नीचे जमीन की ओर आने लगा। कृष्ण ने अपना आकार किसी पहाड़ की तरह बड़ा कर डाला और तृणावर्त की गर्दन दबा ली। असुर कृष्ण की पकड़ से छूटने
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