March 2023

इस दिन पड़ रही है मीन संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में मीन संक्रांति का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर माह एक संक्रांति तिथि पड़ती है। यानी पूरे साल में 12 महीनों की तरह 12 संक्रांति होती है। मीन संक्रांति भी उन्हीं में से एक है। हर माह में सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही एक नई संक्रान्ति शुरू होती

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तिरुपति बालाजी की क्या है कहानी, भक्त क्यों देते हैं अपने बालों का दान

तिरुपति बालाजी का विश्व प्रसिद्ध आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति के पास तिरूमाला पहाड़ी पर स्थित है, जहां पर भगवान श्रीहरि विष्णु की वेंकटेश्वर के रूप में पूजा होती है। भगवान श्री वेंकटेश्वर अपनी पत्नी पद्मावती (लक्ष्मी माता) के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। आओ जानते बालाजी की कहानी और भक्त क्यों

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सूर्य ग्रहण पौराणिक कथा

सूर्य ग्रहण पौराणिक कथा नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप सूर्य ग्रहण पौराणिक कथा प्राप्त कर सकते हैं।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। मंधन के बाद जब अमृत निकला तो देवों और दानवों के बीच अमृत पान को लेकर विवाद और युद्ध हो रहा था।

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भगवान् परशुराम ने क्यों किया था महाबली सहस्त्रबाहु का वध

एक बार सहस्त्रबाहु अर्जुन अपनी सेना के साथ जंगल में ब्रह्मण के लिए गए होते है। उसी जंगल में परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि का आश्रम भी रहता है । सहस्त्रबाहु अर्जुन जंगल में विश्राम करने लिए लिए जमदग्नि के आश्रम देख अपनी सेनाओ के साथ आश्रम की और चल देते है । आश्रम पहुंचने

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 महाभारत के सबसे शक्तिशाली अस्त्र सुदर्शन चक्र से जुडी कुछ रोचक कथा

के अनुसार ऐसा अस्त्र है जो विरोधी के हर वार को विफल कर देता था ऐसा अस्त्र जो अभेद और अपना कार्य  को  पूरा करने के बाद ही वापस आता था । आखिर महाभारत के बाद सुदर्शन का क्या हुआ और अब सुदर्शन चक्र कहां है और भगवान विषणु जी को यह अस्त्त्र कैसे प्राप्त

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शीतला अष्टमी को क्यों किया जाता है बासी भोजन, जानें पौराणिक कथा

चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा करने से चेचक और नेत्रों से संबंधित विकारों से मुक्ति प्राप्त होती है। शीतला अष्टमी पर लोग अपने

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शीतला सप्तमी व्रत कथा

शीतला सप्तमी का त्योहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। वहीं कुछ जगह पर ये व्रत अष्टमी तिथि पर भी मनाया जाता है। मुख्य रूप से ये त्योहार उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के क्षेत्रों में मनाया जाता है। शीतला माता को प्रसन्न करने के

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सबसे बड़ा पुण्य

एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था. वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था . यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन, उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था. एक सुबह राजा

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हनुमान जी की मां से हुई भूल, बन गई अप्सरा से वानरी 

एक बार देवराज इंद्र की सभा स्वर्ग में लगी हुई थी। इसमें दुर्वासा ऋषि भी भाग ले रहे थे। जिस समय सभा में विचार-विमर्श चल रहा था उसी समय सभा के मध्य ही ‘पुंजिकस्थली’ नामक इंद्रलोक की अप्सरा बार-बार इधर से उधर आ-जा रही थी। सभा के मध्य पुंजिकस्थली का यह  एक बार देवराज इंद्र

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कब है रंग पंचमी? जानिए, शुभ मुहूर्त, महत्व और उपाय

चैत्र मास की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा से होली का त्योहार आरंभ होता है जो कि रंगपंचमी तक मनाया जाता है। रंगपंचमी को श्रीपंचमी और देवपंचमी भी कहा जाना जाता है। इस दिन देवी-देवता भी रंगोत्सव मनाते हैं। रंगपंचमी का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है।

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय समय

फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस बार फाल्गुन मास की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 9 फरवरी दिन गुरुवार को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गौरी पुत्र श्री गणेश की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं

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इस कथा से करें होलिका माता की पूजा, होगी मनोकामनाएं पूरी

किसी भी पर्व पर पूजा-पाठ के साथ ही कथा का भी विशेष महत्‍व होता है। होलिका दहन के समय भी कथा करने का विधान है। मान्‍यता है इस दिन होलिका दहन की कथा करके पूजा होलिका दहन पर पढ़ें ये पौराणिक कथा होलिका दहन के मौके पर असुर राज हिरण्‍यकश्‍यप की कथा पढ़ी जाती है।

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