बाल रूप में ही भगवान कृष्ण ने आठ असुरों को दिखा दिया था यमलोक का रास्ता

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बाल रूप में ही भगवान कृष्ण ने आठ असुरों को दिखा दिया था यमलोक का रास्ता
KARMASU 17 August 2022 4 मिनट पढ़ें
MYTHOLOGICAL STORIES📅 17 August 2022⏱ 4 मिनट

जब देवकी और वसुदेव का विवाह संपन्न हुआ तो एक आकाशवाणी हुई. इस आकाशवाणी ने कहा था कि देवकी के गर्भ से जन्म लेने वाली आठवीं संतान कंस का वध करेगी. इस बात की जानकारी होते ही कंस ने दोनों को मथुरा के बंदीगृह में कैद कर दिया. इस बंदीगृह में कंस ने देवकी और वसुदेव की सात संतानों का बारी बारी से वध कर दिया लेकिन आठवीं संतान के रूप में जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो भगवान की माया से वसुदेव ने कृष्ण को यशोदा के घर पहुंचा दिया.

लेकिन यह बात अधिक दिनों तक छिप न सकी. कंस को मालूम पड़ गया कि देवकी की आठवीं संतान का जन्म हो चुका है और वह गोकुल में है. इसके बाद कंस ने कई राक्षसों को कृष्ण की हत्या करने के लिए भेजे लेकिन कृष्ण ने कान्हा के रूप में इन सभी राक्षसों का वध कर दिया.

ऐसे किया पुतना का वध भगवान कृष्ण ने सबसे पहले पुतना का वध किया. पुतना श्रीकृष्ण को स्तनपान के जरिए विष देकर मार देना चाहती थी. पुतना कृष्ण को विषपान कराने के लिए एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कान्हा के पास पहुंची. मौका पाकर पुतना ने पालने में खेल रहे कृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी. श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पुतना का वध कर दिया

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तृणावर्त को उतारा मौत के घाट

पुतना की मौत की खबर सुनकर कंस क्रोध से पागल हो गया और उसने बदला लेने के लिए तृणावर्त नामक राक्षस को भेजा. यह शक्तिशाली राक्षस था जो बवंडर का रूप धारण करके बड़े-बड़े पेड़ों को भी उखाड़ देता था. तृणावर्त बवंडर बनकर गया और कृष्ण को भी अपने साथ उड़ा लिया. इसके बाद श्रीकृष्ण ने अपना भार बहुत बड़ा लिया, जिसे तृणावर्त भी संभाल नहीं पाया. जब बवंडर शांत हुआ तो कृष्ण ने गला दबाकर तृणावर्त को मार डाला.

बाल रूप में ही भगवान कृष्ण ने आठ असुरों को दिखा दिया था यमलोक का रास्ता

वत्सासुर का वध कंस अब कृष्ण के खून प्यासा हो चुका था. उसने पुतना और तृणावर्त के बाद वत्सासुर को भेजा. वत्सासुर एक बछड़े का रूप धारण करके श्रीकृष्ण की गायों के साथ मिल गया. कृष्ण उस समय गायों का चरा रहे थे. कृष्ण ने उस बछड़े के रूप में दैत्य को पहचान लिया और उसकी पूंछ पकड़ घुमाया और एक वृक्ष पर पटक दिया. जिससे उसकी वहीं पर मौत हो गई.

बकासुर का वध कंस ने वत्सासुर के बाद बकासुर को कृष्ण को मारने के लिए भेजा. बकासुर एक बगुले का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को मारने के लिए पहुंचा. बगुले ने कृष्ण को निगल लिया और कुछ ही देर बाद कान्हा ने उस बगुले को चीरकर उसका वध कर दिया.

अघासुर का वध अघासुर पुतना और बकासुर का छोटा भाई था. अघासुर ने कृष्ण को मारने के लिए विशाल अजगर का रूप धारण किया. इसी रूप में अघासुर अपना मुंह खोलकर रास्ते में ऐसे बन गया जैसे कोई गुफा हो. उस समय श्रीकृष्ण और सभी बालक वहां खेल रहे थे. एक बड़ी गुफा देखकर सभी बालकों ने उसमें प्रवेश किया. मौका पाकर अघासुर ने अपना मुंह बंद कर लिया. जब सभी को अपने प्राणों पर संकट नजर आया तो श्रीकृष्ण से सबको बचाने की प्रार्थना करने लगे. तभी कृष्ण ने अपना शरीर तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया. इस कारण अघासुर को सांस लेने में परेशानी होने लगी और अंत में भगवान ने उसका भी वध कर दिया.

यमलार्जुन को श्राप से किया मुक्त कान्हा बचपन में बहुत ही शरारती थे. कई बार माता यशोदा श्रीकृष्ण की शरारतों से परेशान हो जाती थीं. एक बार जब ये अधिक परेशान हों गईं तो उन्होंने कृष्ण को ऊखल से बांध दिया. जब माता यशोदा घर के दूसरों कामों में व्यस्त हो गई तब कृष्ण ऊखल को ही खींचने लगे. वहां आंगन में दो बड़े-बड़े वृक्ष भी लगे हुए थे, कृष्ण ने उन दोनों वृक्षों के बीच में ऊखल फंसा दिया और जोर लगाकर खींच दिया। ऐसा करते ही दोनों वृक्ष जड़ सहित उखड़ गए. वृक्षों के उखड़ते ही उनमें से दो यक्ष प्रकट हुए, जिन्हें यमलार्जुन के नाम से जाना जाता था. ये दोनों यक्ष पूर्व जन्म कुबेर के पुत्र नलकूबर और मणिग्रीव थे. इन दोनों ने एक बार देवर्षि नारद का अपमान कर दिया था. इस कारण देवर्षि ने इन्हें वृक्ष बनने का शाप दे दिया. जिस बाल लीला के दौरान श्रीकृष्ण ने वृक्षों को उखाड़कर इन दोनों यक्षों को मुक्ति प्रदान की.

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