अर्जुन ने महाभारत युद्ध में युधिष्ठिर को मारने के लिए क्यों उठाई तलवार

MYTHOLOGICAL STORIES
अर्जुन ने महाभारत युद्ध में युधिष्ठिर को मारने के लिए क्यों उठाई तलवार
KARMASU 24 July 2022 6 मिनट पढ़ें
MYTHOLOGICAL STORIES📅 24 July 2022🔄 अपडेट: 28 July 2022⏱ 6 मिनट

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ‘महाभारत’ एक बहुत ही विस्तृत ग्रन्थ है जिसमें अनेकों अनेक कहानियां है। आम जन इनमे से अनेक कहानियों और प्रसंगों से अवगत है लेकिन बहुतों से अनजान है। आज हम आपको महाभारत का एक ऐसा ही प्रसंग बताते है जब अर्जुन ने अपने ज्येष्ठ भ्राता युधिष्ठिर को मारने के लिए हथियार उठाए थे। आइए

जानते है आखिर अर्जुन ने ऐसा क्यों किया और इसका परिणाम क्या निकला।

महाभारत काल की यह कथा हमें वह समय याद कराती है जब कुरुक्षेत्र युद्ध चल रहा था। यह युद्ध का 17वां दिन था और राजकुमार युधिष्ठिर तथा कर्ण के बीच युद्ध हो रहा था। सभी को इस युद्ध से बेहद उम्मीदें थीं कि तभी शस्त्र विद्या में माहिर रहे कर्ण ने युधिष्ठिर पर एक ज़ोरदार वार किया।

🙏 पूजा सेवाएँ — अभी बुक करें

एक के बाद एक करके कर्ण के सभी वार युधिष्ठिर पर भारी पड़ते गए और वह बुरी तरह से घायल हो गया। अब कर्ण के पास एक मौका था कि वह युधिष्ठिर को मारकर पाण्डवों की नींव हिलाकर रख दे, लेकिन उसने यह मौका हाथ से जाने दिया। आखिर क्यों?

कर्ण ने युधिष्ठिर पर सिर्फ इसलिए वार नहीं किया क्योंकि उसने पांडवों की माता कुंती को यह वचन दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह उनके किसी भी पुत्र को जान से नहीं मारेगा। और यही कारण था कि ना चाहते हुए भी कर्ण ने युधिष्ठिर को जीवित ही जाने दिया।

अर्जुन ने महाभारत युद्ध में युधिष्ठिर को मारने के लिए क्यों उठाई तलवार

जब अनुज नकुल तथा सहदेव ने अपने ज्येष्ठ भ्राता राजकुमार युधिष्ठिर की यह हालत देखी तो शीघ्र ही उन्हें तंबू में ले गए, जहां उनकी मरहम-पट्टी के सभी इंतज़ाम किए गए। जब तीनों भाई तंबू में थे तो बाकी दो भाई अर्जुन तथा भीम अभी भी युद्ध में शत्रुओं की सेना से संघर्ष कर रहे थे।

अचानक ही अर्जुन को राजकुमार युधिष्ठिर की अनुपस्थिति का एहसास हुआ और उन्होंने भीम से इस बारे में पूछताछ की। तब भीम ने बताया कि किस तरह से कर्ण तथा युधिष्ठिर के बीच हुए द्वंद युद्ध में भ्राता युधिष्ठिर घायल हो गए, जिसके बाद उन्हें विश्राम करने के लिए ले जाया गया है।

तभी भीम ने अर्जुन से कहा कि वह शत्रुओं को अकेले ही संभाल लेंगे और अर्जुन से आग्रह किया कि वे भ्राता युधिष्ठिर के पास जाएं और उनके स्वास्थ्य का ब्योरा लें। आज्ञानुसार राजकुमार अर्जुन उस तंबू की ओर चले दिए, जहां युधिष्ठिर घायल आवस्था में पीड़ा से जूझ रहे थे।

तंबू में लेटे हुए युधिष्ठिर ने अचानक ही अपने अनुज को अपनी ओर आते हुए देखा। अर्जुन को देख उनकी खुशी का ठिकाना ना रहा। वह समझ गए कि हो ना हो अर्जुन युद्ध में कर्ण पर विजय प्राप्त कर उनके पास खुशखबरी लेकर आ रहे हैं।

वह अंदर ही अंदर बेहद गर्व महसूस कर रहे थे कि उनकी इस हालत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को उनके अनुज ने दंड दे दिया है और अवश्य ही अर्जुन ने कर्ण को मार दिया होगा। लेकिन युधिष्ठिर सत्य से अनजान थे।

तंबू में प्रवेश करते ही अर्जुन ने ज्येष्ठ भ्राता को प्रणाम किया और उनसे उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा। लेकिन इससे ज्यादा तो युधिष्ठिर इस बात को सुनने के लिए ज्यादा उत्तेजित हो रहे थे कि अर्जुन ने कर्ण को मारा या नहीं। लेकिन तभी राजकुमार अर्जुन द्वारा वहां आने का असली कारण व्यक्त किया गया।

उन्होंने बताया कि कैसे भीम ने युधिष्ठिर के घायल होने की खबर सुनाई जिसके बाद वह दौड़े-दौड़े उनकी स्थिति का ब्योरा लेने आ गए। अर्जुन के मुख से सच्चाई सुनते ही युधिष्ठिर अपना आपा खो बैठे। वह सच उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा था।

उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो कोई उनके सम्मान को तीर के समान चीरता हुआ जा रहा हो। वे बेहद क्रोधित हो उठे और बोले, “तुम यहां केवल मेरे घावों के बारे में पूछने आए हो या फिर उन्हें और कुरेदने आए हो? तुम किस प्रकार के अनुज हो जो अब तक अपने ज्येष्ठ भ्राता के अपमान का बदला नहीं ले सके।“

युधिष्ठिर के इन कटु वचनों को सुनकर अर्जुन बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे थे, लेकिन युधिष्ठिर का क्रोध शांत नहीं हो रहा था। वे आगे बोले, “यदि तुम मेरे लिए इतना भी करने में असमर्थ हो तो तुम्हारे इस गांडीव अस्त्र का कोई लाभ नहीं है। उतार कर फेंक दो इसे।“

अपने प्रिय गांडीव अस्त्र की निंदा सुनते ही अर्जुन के मुख पर निराशा वाले भाव पल में ही क्रोध के साथ बदल गए। वह संसार में किसी से भी किसी भी प्रकार की निंदा सुन सकते थे, लेकिन उनके गांडीव के बारे में कोई एक भी अपशब्द बोले, यह उन्हें बर्दाश्त नहीं था।

दरअसल यह अर्जुन द्वारा लिए गए एक वचन का हिस्सा था, जिसके अनुसार कोई भी अपना या पराया व्यक्ति यदि उनके पवित्र एवं प्रिय गांडीव अस्त्र के बारे में बुरे वचन बोलेगा, तो वह उसका सिर कलम कर देंगे। यही कारण था कि युधिष्ठिर द्वारा गांडीव की निंदा करते ही अर्जुन ने अगले ही पल अपना गांडीव उठाया और क्रोध भरी आंखों से युधिष्ठिर को मारने के लिए आगे बढ़े।

अर्जुन ने महाभारत युद्ध में युधिष्ठिर को मारने के लिए क्यों उठाई तलवार

तभी श्रीकृष्ण वहां पहुंचे और अर्जुन के इस व्यवहार को देखते ही उन्हें रुकने की आज्ञा दी। श्रीकृष्ण राजकुमार अर्जुन का यह रूप देखकर बेहद अचंभित हुए। वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिरकार ऐसी क्या बात हुई जो अर्जुन अपने ही प्रिय भाई युधिष्ठिर के प्राण लेने को तैयार हो गए।

तत्पश्चात अर्जुन ने उन्हें घटना का सार बताया और फिर श्रीकृष्ण को समझ आया कि आखिर बात क्या थी। उस समय भगवान कृष्ण ने अर्जुन को समझाया और बोले, “हे अर्जुन! मैं तुम्हारे अपने गांडीव के संदर्भ में लिए गए वचन का सम्मान करता हूं। वचनानुसार तुम्हें अपने ही ज्येष्ठ भ्राता को मार देने का पूरा हक है, परन्तु धार्मिक संदर्भों में यह पाप है।“

लेकिन दूसरी ओर अर्जुन भी अपने वचन से मजबूर थे। उनकी मंशा को और गहराई से समझते हुए श्रीकृष्ण बोले, “अर्जुन, यदि तुम्हे अपने वचन को पूरा करना है तो इसका एक अन्य साधन भी है। माना जाता है कि अपने से बड़ों का अनादर करना उन्हें मृत्यु दंड देने के समान होता है। यदि अभी तुम अपने ज्येष्ठ भ्राता का अपमान करो तो तुम्हारा वचन पूरा हो जाएगा।“

श्रीकृष्ण की आज्ञानुसार अर्जुन ने अगले ही पल युधिष्ठिर का तिरस्कार किया। अपने द्वारा किए गए इस अनादर को अर्जुन सहन ना कर सके और इस बार अपने ही प्राण लेने के लिए उन्होंने अपनी तलवार उठा ली। लेकिन भगवान कृष्ण ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया।

उन्होंने अर्जुन को बताया कि कैसे खुद के प्राणों का अंत करना यानी कि आत्मदाह करना शास्त्रों में अधर्म माना जाता है। और पाण्डवों द्वारा अधर्म के मार्ग पर चलना एक बहुत बड़ा पाप एवं अन्याय साबित होगा। इसीलिए उसे धर्म का मार्ग चुनना चाहिए।

इसके साथ ही श्रीकृष्ण ने कहा कि आत्मप्रशंसा, आत्मघात के समकक्ष है। इसलिए तुम दूसरों के सम्मुख अपनी वीरता की खुलकर तारीफ़ करो, जिससे तुम्हारा वचन पूरा हो जाएगा।

श्रीकृष्ण के इन वचनों को सुन धीरे-धीरे राजकुमार अर्जुन का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने खुद के सिर पर रखी उस तलवार को नीचे उतार कर फेंक दिया। इस प्रकार भगवान कृष्ण के निर्देशों से राजकुमार अर्जुन का वचन पूरा हुआ और साथ ही वह किसी भी प्रकार का अधर्म करने से बच गए।

KARMASU वीडियो

छोटे वीडियो — देखें, सुनें और सीखें

YouTube पर देखें ↗
हनुमान जी की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं | Hanuman…
Durga Mata Ji Ke 5 Important Mantra | माँ दुर्गा के 5…
Sunday Mantra for Peace | रविवार सूर्य देव का आशीर्वाद मंत्र |…
Shaniwar Special Shani Dev Mantra 🕉️ | शनि देव को प्रसन्न करने…
Shaniwar Special Shani Dev Mantra 🕉️ | शनि देव को प्रसन्न करने…
Shukravar Special 108 Lakshmi Mata Ke Mantra 🙏 | शुक्रवार को जरूर…
Budhvar Special Ganesh Ji Ke 108 Powerful Mantra 🙏 | बुधवार को…
Hanuman Ji Powerful Mantra | मंगलवार को जरूर सुनें हनुमान जी का…
रविवार स्पेशल मंत्र जरूर सुनें |रविवार के चमत्कारी सूर्य मंत्र |Surya Mantra…
Title: Durga Saptashati Path Ke Fayde | दुर्गा सप्तशती पाठ के चमत्कारी…
Shanivar Special Shani Ji Ke 108 Mantra | शनिवार विशेष शनि देव…
Om Namah Shivaya Mantra Jaap | ॐ नमः शिवाय मंत्र जाप |…
App Download