इस मंदिर को “राधा गोविंद देव मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है।
गोविंद देवी जी मंदिर श्री कृष्ण की नगरी मथुरा उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में स्थित है। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है। इस मंदिर को “राधा गोविंद देव मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर वृंदावन के प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह भगवान कृष्ण के गोविंद देव जी स्वरूप को समर्पित मंदिर है।
Govind Dev Ji Temple:मंदिर का इतिहास
इस मंदिर का निर्माण सन् 1590 में राजा मानसिंह ने करवाया था। इस मंदिर का निर्माण गुरु और महान कृष्णभक्त श्री कल्याणदास जी की निगरानी में किया गया। मंदिर का पूर्ण खर्च राजा मानसिंह द्वारा ही किया गया था। गोविंद देवी जी मंदिर जब यह मंदिर बना था तो यह सात मंजिला मंदिर था। इस मंदिर के सबसे ऊपरी भाग पर एक विशाल दीपक बनवाया गया था। यह दीपक इतना विशाल था कि इसमें हर रोज 50 किलोग्राम से ज्यादा देसी घी का इस्तेमाल कर इसे जलाया जाता था। इस दीपक की लौ कई किमी तक से भी दिखाई देती थी।
मंदिर में जलते इस लौ को देखकर औरंगजेब के मन में ईर्ष्या उत्पन्न हो गयी और वह इस मंदिर की सुंदरता को नष्ट करने का विचार करने लगा। अपनी सेना को भेजकर मंदिर को तुड़वाना चाहा। गोविंद देवी जी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत भगवान की कृपा से मंदिर के पुजारी को इस बात का अंदेशा हो गया। उन्होंने तुरंत ही भगवान गोविंद की पुरातन प्रतिमा को वहां से हटा दिया और बहुत दूर ले गए।
जयपुर के गोविंद वल्लभ मंदिर में वास्तविक प्रतिमाओं को स्थानांतरित कर दिया गया था। औरंगजेब की सेना इस मंदिर के 4 मंजिल को ही गिरा सकी। मंदिर को खंडित करने का भी प्रयास किया गया। 1873 तक मंदिर उसी अवस्था में रहा। औरंगजेब के जाने के बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया।
मंदिर का महत्व
ऐसी मान्यता है कि जब औरंगजेब ने इस मंदिर को तोड़ दिया था। उसके बाद उस मंदिर में कोई भी भक्त दर्शन करने नहीं जाता था। इस कारण मंदिर खंडहर बन गया था। गोविंद देवी जी मंदिर वहां पर भूतों का निवास हो गया था। परन्तु इन भूत प्रेतों ने किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया था। ऐसा भी कहा जाता है कि इस मंदिर का पुनः निर्माण भव्यता के साथ करना बहुत ही मुश्किल था। गोविंद देवी जी मंदिर इस मंदिर के निर्माण में यहाँ रहने वाले भूतों का भी योगदान है। वह इसलिए क्योंकि इस मंदिर की कारीगरी इस तरह की है जो कोई भी मनुष्य पांच से दस साल में नहीं बना सकता।
मंदिर की वास्तुकला
गोविंद देव जी मंदिर की वास्तुकला अन्य मंदिरों से अलग है। गोविंद देवी जी मंदिर यह मंदिर पहले सात मंजिला ईमारत थी। मंदिर में दोनों तरफ शानदार खम्भे बने हुए है जो गर्भगृह तक जाते है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है।
मंदिर का समय
गर्मियों में मंदिर खुलने का समय
04:30 AM – 12:00 PM
सर्दियों में गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय
05:00 AM – 12:30 PM
गर्मियों में मंगल आरती का समय
04:30 AM – 05:00 AM
गर्मियों में शाम को गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय
05:30 PM – 09:30 PM
सर्दियों में शाम को गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय
05:00 PM – 08:30 PM
सर्दियों में मंगला आरती का समय
05:00 AM – 06:00 AM
मंदिर का प्रसाद
गोविंद देव जी मंदिर में लड्डू ,माखन और मिश्री का भोग लगाया जाता है।