NAVRATRI-दुर्गा सप्तशती तृतीय अध्याय धूम्रलोचन का अत्याचार Durga Saptashati
दुर्गा सप्तशती का तृतीय अध्याय देवी दुर्गा के अद्वितीय पराक्रम और उनके द्वारा असुरों के सेनापति धूम्रलोचन के वध का वर्णन करता है। यह अध्याय दिखाता है कि देवी दुर्गा केवल युद्ध कौशल में निपुण नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं सत्य और धर्म की अधिष्ठात्री हैं। इस अध्याय में असुरों द्वारा पुनः देवताओं पर आक्रमण
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