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Published November 5, 2023
Updated November 5, 2023

Shreeshivapanchakam

श्री शिवपंचाकम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव की स्तुति करता है। यह एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो शिव को एक शक्तिशाली और करुणामय देवता के रूप में स्वीकार करता है। स्तोत्र में पाँच श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में शिव के एक विशेष गुण या विशेषता को उजागर किया गया है।

श्री शिवपंचाकम के कुछ महत्वपूर्ण श्लोकों में शामिल हैं:

  • श्लोक 1: शिव को "नमस्ते रुद्राय शम्भवाय, नमस्ते नीलकंठाय। नमस्ते पशुपतिनाथाय, नमस्ते महेश्वराय।।" के रूप में स्वीकार करता है।

अर्थ:

हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप रुद्र और शम्भव हैं। आप नीलकंठ हैं। आप पशुपतिनाथ हैं। आप महेश्वर हैं।

  • श्लोक 2: शिव को "नमस्ते सर्वेश्वराय, नमस्ते सर्वभूताधिपतये। नमस्ते सर्वधनाय, नमस्ते सर्वशक्तिपतये।।" के रूप में स्वीकार करता है।

अर्थ:

हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप सर्वेश्वर हैं। आप सभी जीवों के स्वामी हैं। आप सभी धन के स्वामी हैं। आप सभी शक्तियों के स्वामी हैं।

  • श्लोक 3: शिव को "नमस्ते सर्वलोकनाथाय, नमस्ते सर्वमंगलप्रदाय। नमस्ते सर्वसाक्षिणे, नमस्ते सर्वशक्तिसाक्षिणे।।" के रूप में स्वीकार करता है।

अर्थ:

हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप सभी लोकों के स्वामी हैं। आप सभी मंगलों के दाता हैं। आप सभी के साक्षी हैं। आप सभी शक्तियों के साक्षी हैं।

  • श्लोक 4: शिव को "नमस्ते सर्वव्यापिणे, नमस्ते सर्वशक्तिमान। नमस्ते सर्वसाधारणाय, नमस्ते सर्वहिताय।।" के रूप में स्वीकार करता है।

अर्थ:

हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप सर्वव्यापी हैं। आप सर्वशक्तिमान हैं। आप सभी के लिए समान हैं। आप सभी का भला करते हैं।

  • श्लोक 5: शिव को "नमस्ते सर्वदेवेभ्यो, नमस्ते सर्वमानवेभ्यः। नमस्ते सर्वभूतेभ्यो, नमस्ते सर्वलोकनाथाय।।" के रूप में स्वीकार करता है।

अर्थ:

हे भगवान शिव, मैं आपको सभी देवताओं, सभी मनुष्यों, सभी जीवों और सभी लोकों के स्वामी के रूप में नमस्कार करता हूं।

श्री शिवपंचाकम एक शक्तिशाली स्तोत्र है जिसका उपयोग शिव की उपासना और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। यह स्तोत्र शिव के भक्तों के बीच एक लोकप्रिय स्तुति है।

श्लोक 1 का अनुवाद:

Shreeshivapanchakam

नमस्ते रुद्राय शम्भवाय, नमस्ते नीलकंठाय। नमस्ते पशुपतिनाथाय, नमस्ते महेश्वराय।।

अर्थ:

हे भगवान शिव, मैं आपको नमस्कार करता हूं। आप रुद्र और शम्भव हैं। आप नीलकंठ हैं। आप पशुपतिनाथ हैं। आप महेश्वर हैं।

श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Shrikrishnaashtottarashatanamastotram

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