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Published October 30, 2023
Updated October 30, 2023

तुलसीप्रियाष्टकम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान विष्णु की पत्नी तुलसी की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 8 श्लोकों में रचित है और इसमें तुलसी के रूप और गुणों का वर्णन किया गया है।

स्तोत्र का प्रारंभ तुलसी के रूप और गुणों के वर्णन से होता है। स्तोत्र में तुलसी को भगवान विष्णु की परम प्रिय पत्नी बताया गया है।

तुलसीप्रियाष्टकम का पाठ करने से भगवान विष्णु और तुलसी की कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र भक्तों को तुलसी के प्रति प्रेम और भक्ति को बढ़ावा देता है।

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तुलसीप्रियाष्टकम के 8 श्लोक इस प्रकार हैं:

1. जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे । यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थितिलयकारिणः ॥ १ ॥

अर्थ:

हे जगद्धात्री! आपको मेरा नमस्कार है। आप भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी हैं। आपके कारण ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश सृष्टि, स्थिति और लय का कार्य कर पाते हैं।

2. नमस्तुलसि कल्याणि नमः प्रियवल्लभे । नमः मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥ २ ॥

अर्थ:

हे कल्याणि! आपको मेरा नमस्कार है। आप भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी हैं। आपको मेरा नमस्कार है, हे मोक्ष प्रदान करने वाली देवी। आपको मेरा नमस्कार है, हे समृद्धि प्रदान करने वाली देवी।

3. नमस्तुलसि पातु मां नित्यं सर्वपद्भयं हरे । कीर्तितापि स्मृतापि पावयति मनुष्यं ॥ ३ ॥

अर्थ:

हे तुलसी! आप मुझे हमेशा सभी भयों से बचाएं। आपकी कीर्तिका और स्मृतिका दोनों मनुष्य को पाप से मुक्त करती हैं।

4. नमस्तुलसि चतुर्भुजे नमः भक्तवत्सले । नमः ज्ञानप्रदायिके नमः सर्वार्थसिद्धिके ॥ ४ ॥

अर्थ:

हे चतुर्भुजे! आपको मेरा नमस्कार है। आप भक्तों की प्रिय हैं। आपको मेरा नमस्कार है, हे ज्ञान प्रदान करने वाली देवी। आपको मेरा नमस्कार है, हे सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली देवी।

5. नमस्तुलसि विष्णुप्रेमभक्तिसमुद्धे । नमस्ते सारभूते देवि नमस्ते सर्वरूपे ॥ ५ ॥

अर्थ:

हे तुलसी! आप भगवान विष्णु के प्रेम और भक्ति के समुद्र हैं। आप सभी प्राणियों में निवास करती हैं। आपको मेरा नमस्कार है, हे सर्वरूपिणी देवी।

6. नमस्तुलसि सर्वदेवे नमः सर्वसुंदरी । नमः सर्वगुणसम्पन्ने नमः सर्वशक्तिमते ॥ ६ ॥

अर्थ:

हे तुलसी! आप सभी देवताओं में हैं। आप सभी सुंदरियों में हैं। आप सभी गुणों से सम्पन्न हैं। आप सर्वशक्तिमान हैं।

7. नमस्तुलसि सर्वभूते नमस्ते सर्वधारिणे । नमस्ते सर्वमातायै नमस्ते सर्वदैवते ॥ ७ ॥

अर्थ:

हे तुलसी! आप सभी प्राणियों में हैं। आप सभी का आधार हैं। आप सभी माताओं में हैं। आप सभी देवताओं में हैं।

8. नमस्तुलसि सर्वश्रेष्ठे नमस्ते सर्वपूज्ये । नमस्ते सर्वमंगले नमस्ते सर्वसिद्धिदायिने ॥ ८ ॥

अर्थ:

हे तुलसी! आप सर्वश्रेष्ठ हैं। आप सभी पूजनीय हैं। आप सभी मंगलों की दात्री हैं। आप सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं।

तुलसीप्रियाष्टकम एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र तुलसी के प्रति प्रेम और भक्ति को बढ़ावा देता है।

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