KARMASU

श्री अनन्तकृष्णवरदराजाष्टकम् shree anantakrshnavaradaarajaashtakam

श्री अनंतकृष्णवरदाराजाष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 17वीं शताब्दी के कवि श्रीधर भट्टाचार्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। वे कहते…

उत्कलिकावल्लरीः utkaalikaavallareeh

उत्कालिकत्व शब्द का अर्थ है “समय से पहले” या “अकारण”। यह अक्सर ऐसी घटनाओं का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है जो अपेक्षित समय से पहले होती हैं, या ऐसी घटनाओं का वर्णन करने के लिए उपयोग किया…

मनःशिक्षा manahshiksha

मनोविज्ञान में, मनोशिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाने के लिए अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहारों को समझने और प्रबंधित करने के लिए सीखता है। मनोशिक्षा में व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर…

श्रीमानसाष्टकस्तोत्रम् Srimanasashtakstotram

श्रीमनाष्टकस्तोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण की आठ विशेषताओं का वर्णन करता है। इसे 14वीं शताब्दी के कवि श्रीनाथ ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। स्तोत्र का…

मुकुन्दमालास्तोत्रम् Mukundamalastotram

मुकुंदमालास्तोत्रम एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण को समर्पित है। इसे 11वीं शताब्दी के कवि श्रीनारदाचार्य ने लिखा था। स्तोत्र में, कवि भगवान कृष्ण के रूप, गुणों और कार्यों का वर्णन करते हैं। स्तोत्र का अनुवाद इस प्रकार है:…

श्रीमुकुन्दमुक्तावली shreemukundamuktavallee

श्रीमुकुंदमुक्तावल्ली एक संस्कृत पद्य है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित है। इसे 16वीं शताब्दी के कवि श्रीमुकुंद ने लिखा था। पद्य में, कवि श्रीकृष्ण के रूप और गुणों का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि श्रीकृष्ण के…

श्रीमुकुन्दवन्दनाष्टकम् shreemukundavandanaashtakam

श्रीमुकुंदवंदनाष्टक भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रचित एक संस्कृत श्लोकों का समूह है। इसे 16वीं शताब्दी के कवि श्रीमुकुंद ने लिखा था। श्लोकों का अनुवाद इस प्रकार है: shreemukundavandanaashtakam हे श्रीकृष्ण, आप मुरली के धारक हैं। आपके रूप में सभी…

श्रीयादवाष्टकम् shreeyaadavaashtakam

श्रीयदावाष्टक एक संस्कृत श्लोकों का एक समूह है जो भगवान श्रीकृष्ण की आठ विशेषताओं का वर्णन करता है। इसे 15वीं शताब्दी के कवि श्रीयदा ने लिखा था। श्लोकों का अनुवाद इस प्रकार है: shreeyaadavaashtakam श्री कृष्ण, आप दयालु और करुणामय…

श्रीराधाकृष्णप्रादुर्भावः shreeraadhaakrshnapraadurbhaavah

श्रीराधाकृष्णप्रादुर्भावा एक संस्कृत महाकाव्य है जो श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम की कहानी बताता है। इसे 12वीं शताब्दी के कवि श्रीजयदेव ने लिखा था। श्रीराधाकृष्णप्रादुर्भावा की शुरुआत भगवान विष्णु के एक अवतार के रूप में श्रीकृष्ण के जन्म से होती…

श्रीललितोक्ततोटकाष्टकम् shreelalalitokotkaashtakam

श्रीलालितोक्ताष्टक एक संस्कृत श्लोकों का एक समूह है जो भगवान श्रीकृष्ण की आठ विशेषताओं का वर्णन करता है। इसे महाभारत के अनुशासनपर्व में उद्धृत किया गया है। श्लोकों का अनुवाद इस प्रकार है: shreelalalitokotkaashtakam श्री कृष्ण, आपका रूप अद्भुत है,…

यमकभारतम् yamakabharatam

यमकाभारतम एक संस्कृत कृति है जो महाभारत के कथानक का एक व्यंग्यपूर्ण संस्करण है। इसे 16वीं शताब्दी के लेखक श्रीनिवास ने रचा था। यमकाभारतम में, महाभारत के पात्रों को यमराज के दूतों के रूप में चित्रित किया गया है। वे…

श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् Shrikrishnaashtottarashatanamastotram

श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की 108 नामों की प्रशंसा करता है। इसे 11वीं शताब्दी के वैष्णव संत श्रीपदाचार्य ने रचा था। स्तोत्र में कृष्ण के विभिन्न रूपों और लीलाओं का वर्णन किया गया है। स्तोत्र के…