श्रीकृष्ण

श्रीकृष्णकुण्डाष्टकम् Sri Krishnakundashtakam

श्रीकृष्णकुण्डाष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के जन्मस्थान, मथुरा के कुण्डों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी के कवि केवलराम द्वारा रचित है। श्रीकृष्णकुण्डाष्टकम् की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: Sri Krishnakundashtakam श्रीकृष्णकुण्डाष्टकम् अयोध्यापुरे यमुना गंगा तीर्थी काशी हरिद्वारे गंगा त्रिवेणी संगम ससी अयोध्या में यमुना, काशी में गंगा, हरिद्वार में त्रिवेणी

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श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् 1 Sri Krishnachandrashtakam 1

श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् १ एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के आठ नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 16वीं शताब्दी के कवि केशवदास द्वारा रचित है। श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् १ की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: Sri Krishnachandrashtakam 1 श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् १ कृष्णचन्द्र त्रिभुवननाथा अर्जुनप्रिय मधुसूदन वृंदावनविहारी हरि गोपकुमार वंशीधर हे कृष्णचन्द्र, हे त्रिभुवननाथ, हे अर्जुनप्रिय मधुसूदन, हे वृंदावनविहारी

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श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् २ Sri Krishnachandrashtakam 2

श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् २ एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के आठ नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र 17वीं शताब्दी के कवि केवलराम द्वारा रचित है। श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् २ की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: Sri Krishnachandrashtakam 2 श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् २ वनभुवि विहरन्तौ तच्छविं वर्णयन्तौ सुहृदमनुसरन्तौ दुर्हृदं सूदयन्तौ उपयमुनमटन्तौ वेणुनादं सृजन्तौ भज हृदय हसन्तौ रामकृष्णौ लसन्तौ हे रामकृष्ण,

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श्रीकृष्णचरितम् Srikrishnacharitam

श्रीकृष्णचरित्रम् एक संस्कृत ग्रंथ है जो भगवान कृष्ण के जीवन और लीलाओं का वर्णन करता है। यह ग्रंथ 12वीं शताब्दी के कवि कविराज गोविन्दराज द्वारा रचित है। श्रीकृष्णचरित्रम् में भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर उनके महाभारत युद्ध में भाग लेने तक के जीवन का वर्णन किया गया है। ग्रंथ में भगवान कृष्ण की बाल

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श्रीकृष्णचारित्रमञ्जरी Shrikrishnacharitramanjari

श्रीकृष्णचरित्रमंजरी एक संस्कृत ग्रंथ है जो भगवान कृष्ण के जीवन और लीलाओं का वर्णन करता है। यह ग्रंथ 16वीं शताब्दी के कवि बलदेव द्वारा रचित है। Shrikrishnacharitramanjari श्रीकृष्णचरित्रमंजरी में भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर उनके महाभारत युद्ध में भाग लेने तक के जीवन का वर्णन किया गया है। ग्रंथ में भगवान कृष्ण की बाल

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श्रीकृष्णजयन्ती निर्णयः Shri Krishna Jayanti Decision:

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी निर्णय एक निर्णय है जो भगवान कृष्ण के जन्मदिन को निर्धारित करता है। यह निर्णय भारतीय पंचांग के अनुसार लिया जाता है। Shri Krishna Jayanti Decision: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है। यह हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन, भगवान कृष्ण के भक्त विशेष प्रार्थना और अनुष्ठान

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श्रीकृष्णदत्तवराष्टकम् Srikrishnadattavarashtakam

श्रीकृष्णदत्तावराष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के दस नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भक्तिकाल के संत कवि तुलसीदास द्वारा रचित है। श्रीकृष्णदत्तावराष्टकम् की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: Srikrishnadattavarashtakam श्रीकृष्णदत्तावराष्टकम् कृष्ण, गोविन्द, हरि, वासुदेव, यशोदा के लाल, माधव, मुरलीधर, राधे के प्रियतम, रास रसिक नायक, श्यामसुन्दर, अर्जुन प्रिय। हे कृष्ण, हे गोविन्द,

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श्रीकृष्णद्वादशनामस्तोत्रम् Shrikrishnadvadashnamstotram

श्रीकृष्णद्वादशनामस्तोत्रम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के बारह नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र ब्रह्मवैवर्त पुराण में पाया जाता है। श्रीकृष्णद्वादशनामस्तोत्रम् की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: Shrikrishnadvadashnamstotram श्रीकृष्णद्वादशनामस्तोत्रम् कृष्ण गोविन्द हरि वासुदेव जन्मजन्मोत्तरं नमस्ते देवकीनन्दन मुकुन्द गोपनाथ नारायण वासुदेव नमस्ते हे कृष्ण, हे गोविन्द, हे हरि, हे वासुदेव, हे जन्म-जन्म से मेरे

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श्रीकृष्णद्वादशमञ्जरी shreekrshnaadavaadashamanjaree

श्रीकृष्णाद्वादाशशतनामावली एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण के बारह नामों की स्तुति करता है। यह स्तोत्र संत रैदास द्वारा रचित है, जो एक विख्यात कृष्ण भक्त थे। श्रीकृष्णाद्वादाशशतनामावली की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: shreekrshnaadavaadashamanjaree श्रीकृष्णाद्वादाशशतनामावली कृष्ण, गोविन्द, माधव, मुरलीधर, राधेश्याम, वंशीवल्लभ, श्यामसुंदर, नन्दलाल, यशोदानंदन, वासुदेव, अर्जुन प्रिय, जगन्नाथ, देवकी नन्दन, हे कृष्ण, तुम्हें मेरा

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श्रीकृष्णनामाष्टकम् shreekrshnanamashtakam

श्रीकृष्णनमस्कारम् एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण को नमस्कार करता है। यह स्तोत्र विद्यापति द्वारा रचित है, जो एक विख्यात मैथिली कवि थे। श्रीकृष्णनमस्कारम् की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: shreekrshnanamashtakam श्रीकृष्णनमस्कारम् नमस्ते कृष्ण नमस्ते वासुदेव नमस्ते देवकी नन्दन नमस्ते जगन्नाथ गोविन्द नमस्ते श्रीधर माधव नमस्ते गोपीजन वल्लभ नमस्ते मुरली मनोहर नमस्ते रास रसिक नायक

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श्रीकृष्णपुरुषोत्तमसिद्धान्तोपनिषत् shreekrshnapurushottamasiddhaantopanishat

श्रीकृष्णपुरुषोत्तमसिद्धान्तोपनिषद् एक लघु उपनिषद् है जो भगवान कृष्ण को सर्वोच्च पुरुष और सृष्टि का स्रोत मानता है। यह उपनिषद् अद्वैत दर्शन का एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। श्रीकृष्णपुरुषोत्तमसिद्धान्तोपनिषद् में कहा गया है कि भगवान कृष्ण ही ब्रह्म, परम सत्य और परमात्मा हैं। वे ही समस्त सृष्टि के स्रोत हैं। वे ही सबके स्वामी, पालनहार और उद्धारक

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श्रीकृष्णमुक्तकम् shreekrshnamuktakam

श्रीकृष्णमुक्तक भगवान कृष्ण की महिमा का वर्णन करने वाले संस्कृत मुक्तक हैं। ये मुक्तक विभिन्न कवियों द्वारा रचित हैं। श्रीकृष्णमुक्तक की कुछ पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं: shreekrshnamuktakam श्रीकृष्णमुक्तक कवि: विद्यापति हे कृष्ण, तुम हो सबके स्वामी, तुम हो सबके पालनहार, तुम हो सबके उद्धारक। तुम हो सत्य, तुम हो प्रेम, तुम हो करुणा, तुम हो ज्ञान,

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