स्तंभेश्वर महादेव – शिव पुत्र कार्तिकेय ने करी थी स्थापना, दिन में दो बार नज़रों से ओझल होता है यह मंदिर

आज हम बात कर रहे हैं गुजरात में स्थित एक अनोखे मंदिर की। वैसे तो भारत में भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं, लेकिन गुजरात में वडोदरा से 85 किमी दूर स्थित जंबूसर तहसील के कावी-कंबोई गांव का यह मंदिर अलग ही विशेषता रखता है।स्तंभेश्वर नाम का यह मंदिर दिन में दो बार सुबह और शाम

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कहानी शृंग ऋषि और भगवान राम की बहन “शांता” की

श्रीराम के माता-पिता, भाइयों के बारे में तो प्रायः सभी जानते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि राम की एक बहन भी थीं जिनका नाम शांता था। वे आयु में चारों भाइयों से काफी बड़ी थीं। उनकी माता कौशल्या थीं। उनका विवाह कालांतर में शृंग ऋषि से हुआ था। आज हम आपको शृंग

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भीष्म पितामह – सम्पूर्ण कहानी – पूर्वजन्म से मृत्यु तक

महाभारत एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें कई नायक हैं। उनमें से एक नायक भीष्म पितामह भी हैं। सभी लोग जानते हैं कि भीष्म पितामह ने महाभारत की लड़ाई में कौरवों की ओर से युद्ध किया था, लेकिन बहुत से लोग उनके जीवन से जुड़ी बड़ी घटनाओं के बारे में नहीं जानते जैसे- भीष्म पितामह पूर्व

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क्यों काटा था काल भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवा शीश

शिव की क्रोधाग्नि का विग्रह रूप कहे जाने वाले कालभैरव का अवतरण मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ। इनकी पूजा से घर में नकारत्मक ऊर्जा, जादू-टोने, भूत-प्रेत आदि का भय नहीं रहता। काल भैरव के प्राकट्य की निम्न कथा स्कंदपुराण के काशी- खंड के 31वें अध्याय में है। कथा काल भैरव की कथा के अनुसार एक बार देवताओं ने

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भीम हनुमानजी प्रसंग – जानिए क्यों विराजित हुए हनुमान जी, अर्जुन के रथ के छत्र पर

धर्म ग्रंथो के अनुसार हनुमानजी और भीम भाई है क्योंकि दोनों ही पवन देवता के पुत्र है। महाभारत में एक प्रसंग आता है जब भीम और हनुमान की मुलाक़ात होती है। आज हम आपको वोही प्रसंग विस्तारपूर्वक बता रहे है। साथ ही इस प्रसंग का सम्बन्ध उस मान्यता से भी है जिसके अनुसार महाभारत युद्ध में श्रीकृष्ण, अर्जुन

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द्रोणागिरि – यहां वर्जित है हनुमान जी की पूजा

 हम सब जानते है हनुमान जी हिन्दुओं के प्रमुख आराध्य देवों में से एक है, और सम्पूर्ण भारत में इनकी पूजा की जाती है।  लेकिन बहुत काम लोग जानते है की हमारे भारत में ही एक जगह ऐसी है जहां हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती है।  ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ के रहवासी हनुमान जी द्वारा किए गए एक

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विष्णु पुत्रों का संहार करने के लिए लिया था भगवन शिव ने वृषभ अवतार

धर्म ग्रंथो के अनुसार भगवान शिव के 19 अवतार हुए है। इन्हीं में से एक है भगवान शिव का ‘वृषभ अवतार’। जहाँ भगवान शिव ने कई अवतार दानवों का विनाश करने के लिए लिये थे वही वृषभ अवतार, विष्णु पुत्रों का संहार करने के लिए लिया था। आइए जानते है आखिर क्यों भगवान शिव को विष्णु पुत्रों के संहार

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बभ्रुवाहन ने क्यों किया था अपने पिता अर्जुन का वध?

महाभारत की कथा में एक प्रसंग आता है जब बभ्रुवाहन एक युद्ध में अपने पिता अर्जुन का वध कर देता है।अर्जुन ने द्रोपदी और सुभद्रा के अलावा दो अन्य विवाह और किए थे। एक नाग कन्या उलूपी से जिससे की पुत्र अरावन पैदा हुआ था जिसने महाभारत युद्ध में अपनी स्वैचिछक बलि दी थी। तथा दूसरा विवाह

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लोहार्गल – यहां पानी में गल गए थे पांडवों के अस्त्र-शस्त्र, मिली थी परिजनों की हत्या के पाप से मुक्ति

राजस्थान के शेखावटी इलाके के झुंझुनूं जिले से 70 कि. मी. दूर अरावली पर्वत की घाटी में बसे उदयपुरवाटी कस्बे से करीब दस कि.मी. की दूरी पर स्थित है लोहार्गल। जिसका अर्थ होता है जहां लोहा गल जाए। यह राजस्थान का पुष्कर के बाद दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ है। इस तीर्थ का सम्बन्ध पांडवो, भगवन परशुराम, भगवान सूर्य

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अचलेश्वर महादेव – अचलगढ़ – एक मात्र मंदिर जहां होती है शिव के अंगूठे की पूजा

अचलेश्वर महादेव के नाम से भारत में कई मंदिर है जिसमे से एक धौलपुर के अचलेश्वर महादेव के बारे में हम आपको बता चुके है जहाँ पर दिन में तीन बार रंग बदलने  वाला शिवलिंग है। आज हम आपको माउंट आबू के अचलेश्वर महादेव के बारे में बताएंगे जो की दुनिया का ऐसा इकलौत मंदिर है

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श्रीकृष्ण और राधा की भेंट | जानें राधा और कृष्ण की प्रेम कहानी

एक दिन ग्वालों के मुखिया नंद बाबा को वृषभानु के घर पधारने का निमंत्रण मिला। नंद बाबा अपने परिवार के साथ उनके घर गए। वृषभानु अपने पिछले जन्म में महाराज सुचंद्र थे। एक राजा के रूप में वृषभानु तथा उनकी पत्नी कलावती को ब्रह्मा जी से यह वरदान मिला था कि अगले जन्म में उनके

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कृष्ण भगवान की जन्म कथा | भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पौराणिक कथा

जब भगवान कृष्ण के जन्म का समय निकट आया, तो आकाश में रोहिणी नक्षत्र उभर आया और चमकने लगा। यह सितारा केवल शुभ अवसरों पर ही चमकता है। सारे ग्रह और नक्षत्र अनुकूल हो गए। नदियां शांत होकर ठहर गईं। दिव्य संगीत की लहरी पर अप्सराएं और देवता नाचने लगे।  देवकी सूरज की तरह जगमगा

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