Shivling

Sapne Mein Shivling Dekhna:सपने में काला शिवलिंग देखना: बड़ा संकेत, जानें किसके लिए शुभ और किसके लिए अशुभ?

Shivling Dekhna:महाशिवरात्रि का पर्व हर साल विशेष महत्व रखता है, और धार्मिक दृष्टिकोण से यह भगवान शिव की पूजा-अर्चना का एक बेहद पवित्र दिन माना जाता है. सपने में Shivling शिवलिंग का दिखाई देना अनेक प्रकार के संकेतों का प्रतीक है और यह एक सकारात्मक संकेत देता है. शिवलिंग को ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु और स्वयं भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शिवलिंग के दर्शन जीवन में शुभ फल लाते हैं. यदि कोई व्यक्ति सपने में शिवलिंग देखता है, तो यह उसके पूर्व जन्म से जुड़ा एक संकेत भी हो सकता है. Sapne Mein shivling Dekhna:सपने में शिवलिंग दिखने का अर्थ: स्वप्न शास्त्र और मनोविज्ञान क्या कहते हैं ? मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण (Psychological View) मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, सपने हमारे अवचेतन मन (subconscious mind) की उपज होते हैं. दिन भर की सोच, गतिविधियाँ, या यहाँ तक कि सालों पहले घटी कोई घटना जो हम भूल चुके होते हैं, वह अवचेतन मन में अंकित रहती है और तनाव या परेशानी के समय सपनों के रूप में दिखाई दे सकती है. चूंकि हम सभी Shivling शिवलिंग की पूजा करते हैं और मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रार्थना करते हैं, यही सब हमारे अवचेतन मन में घूमता रहता है, जिसके कारण हमें सपने में भगवान शिव के शिवलिंग दिखाई दे सकते हैं. स्वप्न शास्त्र का दृष्टिकोण (Swapn Shastra View) शुभ संकेत: सपने में Shivling शिवलिंग देखना ही अपने आप में बहुत अद्भुत बात है, यह दर्शाता है कि आप पर ईश्वर की कृपा है. यह आपके आंतरिक मन में चल रही गतिविधियों का रूपांतरण हो सकता है या आने वाले भविष्य के लिए अच्छा या बुरा संकेत हो सकता है. संघर्ष का प्रतीक: काला शिवलिंग संघर्ष (Struggle) और परिश्रम (Hard Work) का प्रतीक माना जाता है. विपत्ति का निवारण: यदि आपने सपने में काला Shivling शिवलिंग देखा है, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि आपके या आपके परिवार पर कोई विपत्ति आने वाली है. हालांकि, आपको हताश होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भगवान शिव हमेशा आपके साथ हैं और आपका भला अवश्य करेंगे. आस्था और समर्पण: यदि आपके जीवन में कोई समस्या चल रही है, तो काला शिवलिंग देखना यह संकेत देता है कि अब आपको घबराना नहीं है. ईश्वर आपकी सभी समस्याओं को दूर कर देंगे. भगवान शिव अपने Shivling शिवलिंग को सपने में दिखा कर आपको याद दिलाना चाहते हैं कि संकट के समय में घबराना नहीं है और अपनी हर समस्या उनके ऊपर छोड़ देनी है; समाधान वे स्वयं करेंगे. कब सच होते हैं सपने? वास्तु शास्त्री और ज्योतिषी कहते हैं कि ब्रह्म मुहूर्त में (ब्रह्म मुहूर्त) देखे गए सपने हमेशा सच होते हैं और उनका अर्थ अवश्य होता है. दिन या रात में देखे गए सपनों के सच होने पर संदेह किया जा सकता है. विशेष जातकों के लिए सपने में काला शिवलिंग देखने के विशिष्ट प्रभाव काला शिवलिंग देखने के अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं, यह जातकों पर निर्भर करता है. 1. बेरोजगार व्यक्तियों के लिए (For Unemployed) अगर कोई बेरोजगार व्यक्ति सपने में Shivling शिवलिंग देखता है, तो यह एक शुभ संकेत है. यह संकेत देता है कि उसके जीवन में जल्द ही कुछ अच्छा होने वाला है. उसकी नौकरी में आ रही विघ्न बाधाएं अवश्य दूर होंगी. उसे ईमानदारी और धैर्य के साथ निरंतर मेहनत करते रहना चाहिए, जिससे उसे निश्चित ही सफलता की प्राप्ति होगी और उसका जीवन नई ऊंचाइयों को छूएगा. उसे व्यर्थ वाद-विवाद से बचना चाहिए और काले शिवलिंग की नियमित पूजा करनी चाहिए. 2. विवाह की इच्छुक कन्याओं या युवकों के लिए (For Unmarried Seeking Marriage) कुंवारी कन्याओं या युवकों द्वारा सपने में काला Shivling शिवलिंग देखना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह सपना संकेत देता है कि उसके विवाह में आने वाली सभी अड़चनें दूर होने वाली हैं. विवाह में हो रहा विलंब समाप्त हो जाएगा. भगवान शिव की कृपा से उसे मनोवांछित वर या वधू प्राप्त होगा. कुंवारी कन्या को अपने जीवन साथी के रूप में ऐसा व्यक्ति मिलेगा, जो उसकी इच्छाओं और सपनों के अनुकूल होगा. उन्हें रोज़ भगवान शिव की नियमपूर्वक पूजा करनी चाहिए और शिव मंदिर में जल चढ़ाना चाहिए. 3. बीमार व्यक्ति के लिए (For Sick Individuals) बीमार व्यक्ति के संदर्भ में, स्वप्न शास्त्र में कुछ मतभेद दिखाई देते हैं, लेकिन अंतिम परिणाम शुभ ही माना जाता है: (शुभ और मुक्ति): यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार है और सपने में काले शिवलिंग को देखता है, तो यह शुभ संकेत है. इसका अर्थ है कि उसे जल्द ही अपनी बीमारियों से मुक्ति मिलेगी. इस स्थिति में, उसे भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना चाहिए, जिससे उसकी सेहत में सुधार हो. (संघर्ष और समाधान): यदि काला शिवलिंग किसी बीमार व्यक्ति को दिखता है, तो इसका एक अर्थ यह है कि अभी उसकी बीमारी बढ़ने वाली है. हालांकि, उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भगवान शिव उसके साथ हैं. उसे आस्था के साथ भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए, Shivling शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए, और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए. ऐसा करने से कुछ ही समय में उसकी सारी बीमारियां दूर हो जाएंगी और वह स्वस्थ हो जाएगा. 4. व्यापारियों के लिए (For Businessmen) यदि कोई व्यापारी काला शिवलिंग देखता है, तो इसका अर्थ है कि उसे व्यापार में समस्या होने वाली है. उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भगवान शिव उसे सभी आने वाली अड़चनों से मुक्त कराने के लिए उसके साथ हैं. उसे भगवान शिव की नियमित पूजा अर्चना शुरू कर देनी चाहिए. उसे शिवलिंग पर जलाभिषेक और दुग्ध अभिषेक भी करना चाहिए. यदि सातों दिन संभव न हो, तो कम से कम सोमवार के दिन शिव मंदिर में जाकर जलार्पण अवश्य करना चाहिए. निष्कर्ष: सभी के लिए शुभकारी है सपने में काला शिवलिंग देखना आप देखेंगे कि काले Shivling शिवलिंग को देखने के अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं, लेकिन अधिकतर ज्योतिषियों और स्वप्न शास्त्र के अनुसार, ये प्रभाव शुभकारी ही होते हैं. भगवान शंकर अंतर्यामी हैं और अपने भक्तों के हृदय में निवास करते हैं. वह जिसे जिस चीज की आवश्यकता होती है, उसे वही प्रदान करते हैं. संकट के समय में भी, भगवान शिव अपने भक्तों को अपनी उपस्थिति का

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Bhai Dooj

Bhai Dooj 2025 Puja Niyam: भाई दूज पर भूलकर भी ना करें यह गलती! वरना ठहर सकती है सुख-समृद्धि की राह

Bhai Dooj 2025 Subh Muhurat: भाई दूज या यम द्वितीया, दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला पवित्र पर्व है। इस दिन बहन अपने भाई की दीर्घायु और समृद्धि की कामना करते हुए स्नेहपूर्वक भोजन कराती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यमुना ने इसी दिन यमराज को भोजन कराया था, जिससे यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध हुई। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व भाई दूज, जिसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के स्नेह, प्रेम और आत्मीय संबंध का प्रतीक है। Bhai Dooj यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद आता है और इसका धार्मिक तथा पौराणिक दोनों ही दृष्टियों से गहरा महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर आमंत्रित किया और स्नेहपूर्वक भोजन कराया था। यमराज ने अपनी बहन के स्नेह और सत्कार से प्रसन्न होकर इस तिथि को सभी जीवों के कल्याण का दिन घोषित किया। उस दिन नरक में रहने वाले जीवों को भी यातनाओं से मुक्ति मिली और वे पापमुक्त होकर संतोषपूर्वक जीवन जीने लगे। तभी से यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध हुई। धार्मिक परंपरा के अनुसार, जिस दिन यमुना ने यमराज को भोजन कराया था, उसी दिन जो भाई अपनी बहन के हाथ से भोजन करता है, उसे उत्तम भोजन के साथ-साथ धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह दिन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र स्नेह का उत्सव है, जिसमें बहन अपने भाई की दीर्घायु और खुशहाली की कामना करती है। समझदार लोगों को इस तिथि को अपने घर मुख्य भोजन नहीं करना चाहिए। इस दिन बहन अपने भाई को शुभ आसन पर बैठाकर उसके हाथ-पैर धुलाती है, तिलक लगाती है Bhai Dooj और स्नेहपूर्वक भोजन कराती है। पारंपरिक रूप से इस भोजन में दाल-भात, पूरी, कढ़ी, चूरमा, सीरा, घेवर, जलेबी या खीर जैसे व्यंजन शामिल होते हैं। भाई भी बहन को वस्त्र, आभूषण या उपहार देकर उसके स्नेह का आदर करता है और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करता है। सगी बहन के अभाव में व्यक्ति अपनी चचेरी, ममेरी या किसी प्रिय मित्र की बहन के घर जाकर यह अनुष्ठान कर सकता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन बहन के हाथ से भोजन ग्रहण करना न केवल पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करता है, Bhai Dooj बल्कि जीवन में सौभाग्य, दीर्घायु और समृद्धि भी लाता है। Bhai Dooj भाई दूज केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि भारतीय समाज की उस परंपरा का प्रतीक है जो रिश्तों में प्रेम, आदर और कर्तव्यबोध को सर्वोपरि मानती है। यह पर्व हर वर्ष हमें यह स्मरण कराता है कि स्नेह और परिवार का बंधन जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। Bhai Dooj 2025 Puja Niyam:भाई दूज के दिन भूलकर भी ये न करें गलतियां 1. तिलक की दिशा का ध्यान रखें भाई को तिलक लगाते समय दिशा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. कहा जाता है Bhai Dooj कि गलत दिशा में मुख करके तिलक लगाने से पूजा का संपूर्ण फल नहीं मिलता. धार्मिक मान्यता के अनुसार, तिलक लगाते समय भाई का मुख उत्तर-पूर्व दिशा की ओर और बहन का मुख दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए. 2. तिलक की थाली तिलक के लिए इस्तेमाल की जाने वाली थाली खंडित, प्लास्टिक या काले रंग की नहीं होनी चाहिए. 3. तिलक का मुहूर्त तिलक लगाते समय मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक है. राहुकाल और भद्राकाल के समय तिलक लगाना शुभ नहीं माना जाता. 4. खान-पान में परहेज इस दिन तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मछली आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. 5. बहनों को क्या न दें उपहार में इस दिन बहनों को उपहार के रूप में नुकीली चीजें या जूते-चप्पल नहीं देने चाहिए. छठ पूजा नहाय-खाए से उषा अर्घ्य तक, जानें 4 दिनों के शुभ मुहूर्त और महत्व

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Swapna Shastra

Swapna Shastra:सपने में गंदे पानी का तालाब देखना शुभ है या अशुभ? जानें स्वप्न शास्त्र के अनुसार गहरे संकेत

Swapna Shastra: रात्रि के समय हम सभी सपने देखते हैं, और कई बार ये सपने इतने विचित्र होते हैं कि हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि इनका अर्थ क्या है। स्वप्न शास्त्र के जानकार मानते हैं कि सपने हमारे भविष्य की ओर गहरे संकेत करते हैं। यदि हम इन संकेतों को समझ लें, तो हम जीवन में आने वाली समस्याओं या खुशियों के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं। सपने में पानी देखना एक बहुत ही सामान्य अनुभव है, लेकिन इसका अर्थ पानी की स्थिति पर निर्भर करता है। कई बार सपने में पानी देखना जीवन को खुशियों से भर देता है, और कई बार यह किसी अप्रिय घटना की ओर भी इशारा कर सकता है। आइए जानते हैं कि स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में विभिन्न प्रकार के गंदे या साफ पानी देखने का क्या अर्थ होता है। सपने में गंदा पानी देखने के अलग-अलग संकेत (According to Swapna shastra) गंदा पानी आमतौर पर जीवन में अशांति या समस्याओं का संकेत देता है, लेकिन Swapna Shastra स्वप्न शास्त्र में गंदे पानी की अलग-अलग स्थितियों के लिए विशिष्ट और कभी-कभी शुभ फल भी बताए गए हैं। 1. गन्दे पानी का तालाब दिखना (Seeing a Dirty Water Pond) सपने में सिर्फ गंदे पानी का तालाब दिखाई देना अशुभ माना जाता है। • यह सपना आपके जीवन में आने वाली परेशानियों की ओर इशारा करता है। • अगर आप कोई शुभ कार्य करने वाले हैं या कहीं यात्रा पर जा रहे हैं, तो स्वप्न शास्त्र सलाह देता है कि फिलहाल उस योजना को टाल दें। 2. अशांत और गंदा पानी दिखना (Seeing Turbulent or Dirty Water) यदि आप सामान्य रूप से अशांत पानी या गंदा पानी देखते हैं, Swapna Shastra तो इसका अर्थ है कि कोई समस्या आपके जीवन में दस्तक देने वाली है और आपको परेशान कर सकती है। छोटी-छोटी समस्याएं भी आपके लिए चिंता का कारण बन सकती हैं। सपने में प्रसाद देखना क्या है बूंदी, पंचामृत और बांटने का गहरा रहस्य ? 3. बहता हुआ गंदा पानी दिखना (Seeing Flowing Dirty Water) सपने में बहता हुआ पानी दिखने का यह अर्थ है कि आपके जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। • मुश्किलें ज़रूर आएंगी, लेकिन वे ज्यादा देर तक आपके जीवन में नहीं ठहर पाएंगी। • यह संकेत यह भी देता है कि आपको किसी से बिना वजह वाद-विवाद नहीं करना चाहिए। 4. शांत और गहरे गंदे पानी का तालाब देखना (Seeing a Quiet and Deep Dirty Water Pond) शांत और गहरे गंदे पानी का तालाब देखना आपको शुभ संकेत देता है। • इसका अर्थ है कि आपके जीवन में शांति बनी रहेगी। • आप अपनी प्रगति और आगे बढ़ने के विषय में विचार-विमर्श करेंगे। 5. गंदे जमे हुए पानी में कोई चीज तैरते हुए देखना (Seeing Something Floating in Stagnant Dirty Water) यह सपना भी आपको शुभ संकेत देता है। • स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इसका अर्थ है कि आपके जीवन की जो भी उलझनें अभी चल रही हैं, उनके समाप्त होने का समय आ गया है। 6. गड्ढे या कुंड में गंदा पानी दिखना (Seeing Dirty Water in a Pit or Well) सपने में किसी गहरे कुंड या गड्ढे में गंदा पानी दिखने का अर्थ है कि आपको वहां से भी धन मिल सकता है Swapna Shastra जहां से आपको कोई उम्मीद न हो। • यह संकेत करता है कि आने वाले दिनों में आपके हाथ में लक्ष्मी (धन) आएगी। अन्य महत्वपूर्ण जल संबंधी संकेत गंदे पानी के विपरीत, साफ पानी और अन्य जल संबंधी सपने बहुत ही शुभ फल देते हैं: साफ पानी का तालाब दिखाई देना (Seeing a Clean Water Pond) साफ पानी का तालाब दिखना बहुत ही शुभ संकेत है। • आपको समाज में मान-सम्मान मिलेगा। • आपको किसी सम्मान समारोह में बुलाया जा सकता है। • नौकरी और व्यापार में खूब लाभ होगा। शांत पानी देखना (Seeing Calm Water) यदि आप सपने में शांत पानी देखते हैं, तो यह एक अच्छा संकेत है। यह सपना कहता है कि आने वाले समय में आपका जीवन शांत और सरल होने वाला है। Swapna Shastra किसी तरह की कोई समस्या या चिंता आप पर हावी नहीं रहेगी। सपने में पानी में तैरते हुऐ देखना (Seeing Yourself Swimming in Water) यदि आप सपने में खुद को पानी में तैरते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ है कि भविष्य में आने वाली हर समस्या पर आप भारी पड़ने वाले हैं। कोई भी समस्या या चिंता आपका बाल भी बांका नहीं कर सकती है। यह सपना भविष्य में आपकी मजबूत स्थिति की तरफ इशारा करता है। मुश्किल से मुश्किल कार्य को भी आप आसानी से निपटा देंगे। निष्कर्ष स्वप्न शास्त्र हमें यह जानने में मदद करता है कि हमारा आने वाला समय कैसा रहेगा और हमें किन घटनाओं से सचेत रहना है। जहां सामान्य रूप से गंदे पानी का तालाब देखना अशुभ माना जाता है, वहीं यदि गंदा पानी बहता हुआ हो या गड्ढे में हो, तो यह धन लाभ या समस्याओं के अंत का संकेत दे सकता है।

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Govardhan Puja

Govardhan Puja 2025 Niyam: गोवर्धन पूजा के दिन क्या करें और क्या नहीं? जानें शुभ मुहूर्त और अन्नकूट के नियम

Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहते हैं, यह पर्व दीपावली के ठीक अगले दिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह शुभ दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाने की महान लीला का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पूजा-पाठ करने से जीवन में शुभता का आगमन होता है। इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि गोवर्धन पूजा 2025 कब मनाई जाएगी, शुभ मुहूर्त क्या है, और इस दिन आपको किन नियमों का पालन करना चाहिए। गोवर्धन पूजा 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त (Govardhan Puja 2025 Muhurat) हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। विवरण समय/तिथि गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2025) 22 अक्टूबर 2025 प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे प्रतिपदा तिथि का समापन 22 अक्टूबर शाम 8:16 बजे गोवर्धन पूजा मुहूर्त (Govardhan Puja Muhurat) सुबह 06 बजकर 26 मिनट से 08 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। (कुछ स्रोतों के अनुसार: सुबह 6:30 बजे से 8:47 बजे तक) Govardhan Puja 2025 Niyam: गोवर्धन पूजा के दिन क्या करें और क्या नहीं…… गोवर्धन पूजा के दिन क्या करें? (Govardhan Puja 2025 Par Kya Karen?) धर्म शास्त्रों में गोवर्धन पूजा के दिन कुछ विशेष अनुष्ठान करने का महत्व बताया गया है। इन कार्यों को करने से भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 1. गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ: घर के आंगन या मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनानी चाहिए। 2. श्रीकृष्ण की स्थापना: इस आकृति के मध्य में भगवान कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। 3. अन्नकूट और छप्पन भोग: इस दिन 56 भोग या अन्नकूट तैयार करना चाहिए। 4. भोग अर्पित करें: इस भोग को भगवान श्रीकृष्ण तथा गोवर्धन महाराज को श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। 5. खास भोग सामग्री: अन्नकूट में कढ़ी-चावल, बाजरा, और माखन-मिश्री को ज़रूर शामिल करना चाहिए। 6. गौ पूजा का महत्व: इस दिन गाय की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसे में, गाय को स्नान कराकर, तिलक लगाएं और फूल-माला पहनाएं। 7. हरा चारा खिलाएँ: गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए। 8. सात्विक भोजन: इस दिन सात्विक भोजन ही करना चाहिए। 9. सात बार परिक्रमा: गोवर्धन पर्वत की बनाई गई आकृति की सात बार परिक्रमा करें। 10. मंत्र जाप: परिक्रमा करते समय वैदिक मंत्रों का जाप करना चाहिए। 11. वास्तविक परिक्रमा: यदि संभव हो पाए, तो गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा भी करनी चाहिए। 12. मंदिर दर्शन: इस दिन भगवान कृष्ण के मंदिर में दर्शन के लिए ज़रूर जाएं। 13. शुभ वस्त्र: शुभ कार्यों में लाल, पीला, नारंगी जैसे रंग के कपड़े पहनना चाहिए। गोवर्धन पूजा के दिन क्या नहीं करें? (Govardhan Puja 2025 Par Kya Na Karen?) पूजा-अर्चना के साथ-साथ, गोवर्धन पूजा के दिन कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। 1. तुलसी के पत्ते न तोड़ें: गोवर्धन पूजा के दिन और इससे पहले आने वाली अमावस्या को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। 2. तामसिक भोजन से बचें: इस दिन घर में मांस, मदिरा या अन्य तामसिक भोजन नहीं बनाना चाहिए। साथ ही, ऐसे भोजन का सेवन करना भी वर्जित है। 3. वस्त्रों का ध्यान: पूजा के समय काले या नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। 4. द्वार बंद न रखें: इस दिन घर का मुख्य द्वार या खिड़की लंबे समय तक बंद नहीं रखनी चाहिए। 5. पेड़-पौधे न काटें: इस दिन किसी भी पेड़-पौधे को नहीं काटना चाहिए, क्योंकि यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। इन चीजों के बिना अधूरा है छठ व्रत, जानें पूजा सामग्री और सही नियम

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Prasad

Sapne Mein Prasad Dekhna: सपने में प्रसाद देखना क्या है बूंदी, पंचामृत और बांटने का गहरा रहस्य ?

Sapne Mein Prasad Pana: रात्रि में हम जो सपने देखते हैं, उन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। अक्सर हम इन्हें सामान्य समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हमारे देखे गए सपनों का एक दूसरा अर्थ भी निकलता है। कई बार ये सपने भविष्य में हमारे साथ घटने वाली घटनाओं की तरफ़ संकेत होते हैं। यदि हम इन संकेतों को समझ लें, तो हम भविष्य की किसी विपदा से बच सकते हैं या आने वाली अच्छी घटनाओं की जानकारी ले सकते हैं। आज के इस लेख में हम बात करेंगे यदि आपने सपने में प्रसाद (Prasad) देखा है, या खुद को मंदिर में Prasad प्रसाद चढ़ाते/बांटते हुए देखा है, तो इन सपनों का क्या अर्थ हो सकता है और ये आपके भविष्य को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं। Sapne Mein Prasad Dekhna: सपने में प्रसाद देखना: सकारात्मकता और उन्नति का प्रतीक……… अधिकांश स्वप्न विश्लेषणकर्ताओं ने सपने में प्रसाद को देखना सकारात्मकता का प्रतीक माना है। ऐसा कहा जाता है कि सपने में प्रसाद देखना आपकी उन्नति (प्रगति) का संकेत है। 1. सपने में बूंदी का प्रसाद देखना: हनुमान जी का सीधा संदेश यदि आपने सपने में बूंदी का प्रसाद देखा है, तो यह एक विशेष संदेश देता है। बूंदी का महत्व: बूंदी का प्रसाद संकट मोचन हनुमान जी का परम प्रिय प्रसाद है। मंगलवार और शनिवार के दिन बजरंग बली को बेसन के लड्डू या बूंदी का प्रसाद ही चढ़ाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि बूंदी का भोग लगाने से पवनसुत हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। क्या है सपने का अर्थ? सपने में बूंदी का Prasad प्रसाद दिखाई देना यह बताता है कि पवन पुत्र हनुमान जी आपको याद दिलाना चाहते हैं कि आपने उन्हें विस्मृत (भूल) कर दिया है। वे आपको याद दिला रहे हैं कि अब आप उनके मंदिर नहीं आते और न ही बूंदी का (Prasad) प्रसाद चढ़ाते हैं। हनुमान जी यह संदेश देना चाहते हैं कि भक्त और भगवान का संबंध उनकी तरफ से आज भी कायम है, लेकिन शायद आप उस मधुर संबंध को भूल गए हैं। सपने में मां लक्ष्मी और गणेश जी का दीदार: जानिए ये 7 शुभ संकेत जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत यह स्वप्न उन लोगों को भी दिखाई दे सकता है जिन्होंने बजरंग बली से कोई मनौती मांगी हो और मनोरथ पूरा होने के बाद वे प्रसाद चढ़ाना भूल गए हों। सपने में बूंदी का प्रसाद देखने पर क्या करें? यदि आपने यह सपना देखा है, तो आपको निम्नलिखित कार्य करने चाहिए: 1. मंगलवार या शनिवार को अपने क्षेत्र के हनुमान मंदिर जाएँ। 2. वहाँ श्रद्धा पूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करें। 3. बजरंग बली को मीठी बूंदी का भोग लगाएँ। 4. मंदिर में आए हुए अन्य भक्तों और गरीबों में बूंदी का प्रसाद बाँटें। 5. कुछ प्रसाद अपने परिवार के लिए लेकर घर आ जाएँ। ऐसा करने पर आप पर पुनः हनुमान जी की कृपा होगी और आपके जीवन में सब ‘मीठा-मीठा’ होने लगेगा। 2. सपने में प्रसाद खाते हुए देखना: बड़ा लाभ और ईश्वर का आशीर्वाद सपने में खुद को प्रसाद खाते हुए देखना बहुत ही अच्छा सपना माना जाता है। लाभ के संकेत: इसका अर्थ है कि आपको भविष्य में कोई बड़ा लाभ होने वाला है, और वह भी बहुत कम मेहनत में। यदि आप किसी नए कार्य में लगे हुए हैं, तो उसमें भी आपको काफी लाभ प्राप्त होगा। संपत्ति और निवेश: यदि आपने कोई भूखंड या संपत्ति खरीदी है और उसे वापस बेचने की सोच रहे हैं, तो आपको उसके तीन से चार गुना पैसे वापस मिलने वाले हैं। ईश्वरीय कृपा: यह सपना संकेत करता है कि ईश्वर की कृपा दृष्टि आप पर बनी हुई है। आप जो भी कार्य हाथ में ले रहे हैं, उसमें बड़ों और ईश्वर का आशीर्वाद आपके साथ बना हुआ है, इसलिए आपको निश्चिंत रहना चाहिए। Prasad आपको अपनी मेहनत का फल निश्चित रूप से बहुत जल्द मिलने वाला है। 3. सपने में पंचामृत देखना: सकारात्मक ऊर्जा और शुभता पंचामृत को बहुत ही ज्यादा पवित्र समझा जाता है, जिसका प्रयोग भगवान के अभिषेक में किया जाता है। पंचामृत में दही, दूध, घी, शक्कर आदि का प्रयोग किया जाता है। यदि आपने सपने में पंचामृत देखा है, तो यह बहुत ही शुभ सपना है। यह भविष्य में आपके साथ अच्छी घटनाओं के होने की तरफ इशारा करता है। यह संकेत देता है कि आप में एक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहने वाली है। 4. सपने में प्रसाद बांटते हुए देखना: धार्मिक जिम्मेदारी और पुण्य का लाभ यदि आप सपने में खुद को Prasad प्रसाद बांटते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ है कि बहुत जल्द आपको कोई धार्मिक कार्य करने का लाभ प्राप्त होने वाला है। या फिर आपको कोई जिम्मेदारी भरा कार्य सौंपा जाने वाला है, Prasad जिसे आप बखूबी निभाने वाले हैं। 5. सपने में प्रसाद चढ़ाना: मनोरथ की पूर्ति और धार्मिक यात्रा यदि आप सपने में खुद को प्रसाद चढ़ाते हुए देखते हैं, तो यह एक बहुत ही शुभ सपना है। यह सपना इशारा करता है कि आपको बहुत जल्द कोई धार्मिक यात्रा करने का लाभ प्राप्त हो सकता है। या फिर आप अपने परिवार के साथ किसी मंदिर या गुरुद्वारे आदि में कोई चढ़ावा चढ़ा सकते हैं। यह इस बात का भी संकेत है कि काफी समय से जिस वस्तु की आप कामना कर रहे थे, जिस लक्ष्य की प्राप्ति की आप इच्छा कर रहे थे, वह आपको मिलने वाली है। इसकी खुशी आप भगवान के मंदिर में Prasad प्रसाद चढ़ाकर जाहिर करने वाले हैं।

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Lakshmanakritam

Lakshmanakritam Ramanatha Stotram: लक्ष्मणकृतं रामनाथस्तोत्रम्

Lakshmanakritam Ramanatha Stotram: लक्ष्मणकृतं रामनाथस्तोत्रम् लक्ष्मण उवाच ।नमस्ते रामनाथाय त्रिपुरघ्नाय शम्भवे ।पार्वतीजीवितेशाय गणेशस्कन्दसूनवे ॥ १३॥ नमस्ते सूर्यचद्राग्निलोचनाय कपर्दिने ।नमः शिवाय सोमाय मार्कण्डेयभयच्छिदे ॥ १४॥ नमः सर्वप्रपञ्चस्य सृष्टिस्थित्यन्तहेतवे ।नम उग्राय भीमाय महादेवाय साक्षिणे ॥ १५॥ सर्वज्ञाय वरेण्याय वरदाय वराय ते ।श्रीकण्ठाय नमस्तुभ्यं पञ्चपातकभेदिने ॥ १६॥ नमस्तेऽस्तु परानन्दसत्यविज्ञानरूपिणे ।नमस्ते भवरोगघ्न स्नायूनां पतये नमः ॥ १७॥ पतये तस्कराणां ते वनानां पतये नमः ।गणानां पतये तुभ्यं विश्वरूपाय साक्षिणे ॥ १८॥ कर्मणा प्रेरितः शम्भो जनिष्ये यत्र यत्र तु ।तत्र तत्र पदद्वन्द्वे भवतो भक्तिरस्तु मे ॥ १९॥ असन्मार्गे रतिर्मा भूद्भवतः कृपया मम ।वैदिकाचारमार्गे च रतिः स्याद्भवते नमः ॥ १.४९.२०॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे ब्रह्मखण्डे सेतुखण्डे एकोनपञ्चाशत्तमाध्यायान्तर्गतं लक्ष्मणकृतं रामनाथस्तोत्रं समाप्तम् । स्कन्दपुराण । ब्रह्मखण्ड । सेतुल्खण्ड । अध्याय ४९/१३-२०॥

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Shri Lakshminrisimhastavana Stotram:श्रीलक्ष्मीनृसिंहस्तवनस्तोत्रम्

Shri Lakshminrisimhastavana Stotram:श्रीलक्ष्मीनृसिंहस्तवनस्तोत्रम् श्रीगणेशाय नमः । श्रीलक्ष्मीनृसिंहाय नमः ।अथ ध्यानम् ।लक्ष्मीशोभितवामभागममलं सिंहासने सुन्दरंसव्ये चक्रधरं च निर्भयकरं वामेन चापं वरम् ।सर्पाधीशकृतान्तपत्रममलं Lakshminrisimhastavana श्रीवत्सवक्षःस्थलंवन्दे देवमुनीन्द्रवन्दितपदं लक्ष्मीनृसिंहं विभुम् ॥ १॥ नमोऽस्तु लीलामयविग्रहाय स्वरूपदृष्ट्या हतसद्भ्रमाय ।नमः परानन्दपरालयाय स्वभावसम्पत्तिमहोदयाय ॥ २॥ नमो गुणानां पतये महिम्ने विकारधाम्नेऽखिलकारणाय ।नमो जगद्भासयते गरिम्णे सते चिदात्माकृतये गुणाय ॥ ३॥ त्वमादिरस्यासि निदानमध्यं विश्वाकृतिस्त्वं प्रलयो विभुस्त्वम् ।त्वं सर्वयोनिस्त्वं सर्वयोनिस्त्वं सर्वशोऽसि त्वं सर्वशश्च ॥ ४॥ नमः पुरस्तादथ पार्श्वयोस्ते पश्चान्नमो ते बहिरीश्वराय ।पूर्णाद्वितीयाय नमः पराय अणीयसेऽनन्तचिदे परस्मै ॥ ५॥ वह्नेः स्फुल्लिङ्गा इव वारिभझ सिन्धोरिवौघा इव वासनानाम् ।भवन्ति तिष्ठन्ति वियन्ति यत्र ब्रह्माण्डसङ्घास्तमजं प्रपद्ये ॥ ६॥ यदीक्षया जनिरस्या प्रमेयो विभुर्नृसिंहो वरदो ममास्तु ।येनाहमस्मिन् विविधेऽत्रसर्गे सम्प्रेरितः कालविनष्टदृष्टिः ॥ ७॥ यस्यादेशात् सर्गकर्मप्रवृत्तो भूत्वाप्यहं कालसम्मूढचेताः ।स पुण्यवाचा ममसृष्टीमेतामलङ्करोतु प्रभविष्णुरीशः ॥ ८॥ इहैष लोके ह्यसमीक्ष्य बद्धो मायागुणैः कामयते तु कामान् ।यच्छन्नमुष्मै य इहाप्रमेयो हरन्त्यनन्तो निमिषं प्रसीद ॥ ९॥ नमो नियन्त्रे नियमालयाय नमो जगन्मोहतमोरुणाय ।नमो नृसिंहाय विलासधाम्ने नमः शिवायामितविक्रमाय ॥ १०॥ नमो मनोदूरचराय वाचां वाचामनिर्देश्य पदाय भूम्ने ।नमः स्वभासाखिलभासकाय प्रमाणमात्रे जगदीश्वराय ॥ ११॥ इति पद्मपुराणे श्रीनृसिंहस्तवनं सम्पूर्णम् । ॐ तत्सत् ।

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Diwali Par Kya Kare Hindi: दीपावली पर क्या करें, सुबह से लेकर रात तक की 25 जरूरी बातें

Diwali:अभी कार्तिक मास चल रहा है और इस महीने में धनतेरस, दीपावली, देवउठनी एकादशी और देव दीपावली जैसे व्रत-पर्व मनाए जाते हैं। दीपावली पर घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस साल दीपोत्सव 5 नहीं, 6 दिनों का है, क्योंकि कार्तिक मास की अमावस्या 20-21 अक्टूबर को दो दिन है। 20 तारीख की शाम को कार्तिक अमावस्या रहेगी, इसलिए इसी दिन दीपावली मनाई जाएगी। दीपोत्सव के दिनों में पूजा-पाठ के साथ ही परंपरागत 5 शुभ काम जरूर करना चाहिए। Diwali इन कामों की वजह से घर में सकारात्मकता और पवित्रता बनी रहती है। त्योहारों के दिनों में घर का वातावरण प्रसन्नता देने वाला और सुखद बना रहेगा। जानिए दीपावली पर कौन-कौन शुभ काम कर सकते हैं… ब्रह्म पुराण के अनुसार दिवाली Diwali पर अर्धरात्रि के समय महालक्ष्मीजी सद्ग्रहस्थों के घरों में विचरण करती हैं। इस दिन घर-बाहर को साफ-सुथरा कर सजाया-संवारा जाता है। दीपावली Diwali मनाने से श्री लक्ष्मीजी प्रसन्न होकर स्थायी रूप से सद्गृहस्थ के घर निवास करती हैं। दीपावली धनतेरस, नरक चतुर्दशी तथा महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाईदूज-इन 5 पर्वों का मिलन है। मंगल पर्व दीपावली के दिन सुबह से लेकर रात तक क्या करें कि महालक्ष्मी का घर में स्थायी निवास हो जाए.. आइए जानें विस्तार से…. Diwali Par Kya Kare Hindi:दीपावली के पूजन की संपूर्ण विधियां दी गई हैं। फिर भी संक्षेप में 25 बिंदुओं से जानें कि क्या करें इस दिन ….  1. प्रातः स्नानादि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 2 . अब निम्न संकल्प से दिनभर उपवास रहें-  मम सर्वापच्छांतिपूर्वकदीर्घायुष्यबलपुष्टिनैरुज्यादि-सकलशुभफल प्राप्त्यर्थं गजतुरगरथराज्यैश्वर्यादिसकलसम्पदामुत्तरोत्तराभिवृद्ध्‌यर्थं इंद्रकुबेरसहितश्रीलक्ष्मीपूजनं करिष्ये।  3.दिन में पकवान बनाएं या घर सजाएं। बड़ों का आशीर्वाद लें।  4 . सायंकाल पुनः स्नान करें। 5 . लक्ष्मीजी के स्वागत की तैयारी में घर की सफाई करके दीवार को चूने अथवा गेरू से पोतकर लक्ष्मीजी का चित्र बनाएं। (लक्ष्मीजी का चित्र भी लगाया जा सकता है।) 6 . भोजन में स्वादिष्ट व्यंजन, कदली फल, पापड़ तथा अनेक प्रकार की मिठाइयां बनाएं। 7 .लक्ष्मीजी के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर मौली बांधें। 8. इस पर गणेशजी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें। 9 . फिर गणेशजी को तिलक कर पूजा करें। 10. अब चौकी पर छः चौमुखे व 26 छोटे दीपक रखें। 11.इनमें तेल-बत्ती डालकर जलाएं। 12. फिर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें। 13. पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें। 14. एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर निम्न मंत्र से लक्ष्मीजी का पूजन करें-  दिवाली की संपूर्ण पूजा विधि मंत्र सहित, ऐसे करें दिवाली पर लक्ष्मी पूजन नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया। या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात॥  साथ ही निम्न मंत्र से इंद्र का ध्यान करें-  ऐरावतसमारूढो वज्रहस्तो महाबलः। शतयज्ञाधिपो देवस्तमा इंद्राय ते नमः॥ पश्चात निम्न मंत्र से कुबेर का ध्यान करें-  धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च। भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः॥ 15. इस पूजन के पश्चात तिजोरी में गणेशजी तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें। 16. तत्पश्चात इच्छानुसार घर की बहू-बेटियों को रुपए दें। 17. लक्ष्मी पूजन रात के बारह बजे करने का विशेष महत्व है। 18. इसके लिए एक पाट पर लाल कपड़ा Diwali बिछाकर उस पर एक जोड़ी लक्ष्मी तथा गणेशजी की मूर्ति रखें। 19. समीप ही एक सौ रुपए, सवा सेर चावल, गुड़, चार केले, मूली, हरी ग्वार की फली तथा पांच लड्डू रखकर लक्ष्मी-गणेश का पूजन करें। 20 उन्हें लड्डुओं से भोग लगाएं। 21. दीपकों का काजल सभी स्त्री-पुरुष आंखों में लगाएं। 22. फिर रात्रि जागरण कर गोपाल सहस्रनाम पाठ करें।  23. व्यावसायिक प्रतिष्ठान, गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करें। 24. रात को बारह बजे दीपावली पूजन के उपरान्त चूने या गेरू में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल तथा छाज (सूप) पर तिलक करें। 25. दूसरे दिन प्रातःकाल चार बजे उठकर पुराने छाज में कूड़ा रखकर Diwali उसे दूर फेंकने के लिए ले जाते समय कहें ‘लक्ष्मी-लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ’।

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Diwali 2025 Subh Muhurat: दीवाली से पहले मिल रहे हैं ये शुभ संकेत, समझिए मां लक्ष्मी आने वाली हैं आपके घर

दीवाली (Diwali 2025) हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या पर ही प्रभु श्री रामचंद्र, सीता माता व लक्ष्मण जी के संग वनवास से अयोध्या वापस लौटे थे। Diwali 2025 इस दिन लोग अपने घरों को दीयों और रोशनी से जगमग करते हैं और शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है। इस वर्ष दीवाली का त्योहार 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। Diwali 2025 आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका दीवाली से पहले दिखना काफी शुभ माना जाता है और ये चीजें आपको लक्ष्मी जी के आगमन का संकेत देती हैं। Diwali 2025 Subh Muhurat: दीवाली से पहले मिल रहे हैं ये शुभ संकेत…. 1. धन की देवी के प्रसन्न होने के भौतिक संकेत: Physical signs of the goddess of wealth being pleased दीवाली से पहले घर की साफ-सफाई भी जरूर की जाती है, क्योंकि माना जाता है Diwali 2025 कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। सफाई के दौरान या आपके आसपास कुछ चीजें दिखना अत्यंत शुभ माना जाता है: मोर पंख (Mor Pankh): अगर आपको दीवाली की सफाई करते समय घर में मोर पंख मिलता है, तो इसे एक शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है। इसका अर्थ यह माना जाता है कि घर के सदस्यों पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा बरसने वाली है। पशु-पक्षियों का आगमन: यदि दीपावली से पहले आपके घर या उसके आसपास उल्लू, छिपकली, छछूंदर या काली चींटी आती है, तो इसे भी धन की देवी के प्रसन्न होने के संकेत के रूप में देखा जाता है। गाय माता: अगर आपके द्वार पर रोजाना सुबह गाय माता आती है, तो इसे भी एक शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे में आपको गाय को रोटी जरूर खिलानी चाहिए, जिससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। 2. स्वप्न शास्त्र में शुभ संकेत:Auspicious signs in dream science स्वप्न शास्त्र (Swapn Shastra) में यह माना गया है कि अगर दीवाली के अवसर से पहले आपको कुछ विशेष चीजें सपने में दिखाई दें, तो यह भी मां लक्ष्मी की कृपा का संकेत होता है: शुभ दर्शन: $ \text{ॐ} $, शंख या देवी-देवताओं के दर्शन होना एक अच्छा संकेत माना जाता है। मंदिर प्रवेश: इसके साथ ही, अगर आपको मंदिर दिखाई देता है या आप खुद को मंदिर में प्रवेश करते हुए देखते हैं, तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। फल: इन सपनों का अर्थ यह है कि आपको जल्द ही मां लक्ष्मी की कृपा मिलने वाली है और Diwali 2025 आपकी धन संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं। दिवाली की संपूर्ण पूजा विधि मंत्र सहित, ऐसे करें दिवाली पर लक्ष्मी पूजन 3. दिवाली की सुबह करें ये महत्वपूर्ण कार्य (स्कंदपुराण के अनुसार): Do these important tasks on the morning of Diwali (according to Skandpuran) दिवाली की रात्रि को क्या किया जाता है, यह तो सबको पता है, पर सुबह में क्या किया जाता है, यह जानना भी महत्वपूर्ण है ताकि आपका पूरा दिन शुभ रहे। स्नान और पितरों को प्रणाम: स्कंदपुराण के हवाले से बताया है Diwali 2025 कि कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन सुबह-सुबह स्नान करें और देवी-देवताओं की पूजा करने के साथ-साथ अपने पितरों को भी प्रणाम करना चाहिए। सुबह की शुरुआत इस तरह से होनी चाहिए, तब आपका पूरा दिन शुभ रहता है। दान-दक्षिणा: श्रद्धालुओं को इस दिन उनके पितरों के नाम से दान-दक्षिणा भी करनी चाहिए। पार्वण श्राद्ध और व्रत: स्कंदपुराण के अनुसार, दूध, दही, घी आदि से पार्वण श्राद्ध करना आपके लिए शुभ होगा। बहुत सारे लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। शिवलिंग पर विशेष अर्पित: इस दिन भगवान शिव का भी अभिषेक किया जाता है। Diwali 2025 यदि आप आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं तो सुबह में शिवलिंग पर कच्चे चावल को चढ़ा सकते हैं। वहीं, अगर आप गेहूं अर्पित करेंगे तो संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। सुबह में इन सभी पूजा विधियों से गुजरने के बाद, आपको शाम को प्रदोष काल में धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। 20 अक्टूबर को दीवाली का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात्रि के 8 बजकर 18 मिनट तक है।

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Kamala Ashtakam:कमलाष्टकम्

Kamala Ashtakam:कमलाष्टकम् न्यङ्कावरातिभयशङ्काकुले धृतदृगङ्कायतिः प्रणमतां शङ्काकलङ्कयुतपङ्कायताश्मशितटङ्कायितस्वचरिता ।त्वं कालदेशपदशङ्कातिपातिपतिसङ्काश वैभवयुता शं काममातरनिशं कामनीयमिह सङ्काशयाशु कृपया ॥ १॥ आचान्तरङ्गदलिमोचान्तरङ्गरुचिवाचां तरङ्गगतिभिः काचाटनाय कटुवाचाटभावयुतनीचाटनं न कलये ।वाचामगोचरसदाचारसूरिजनताचातुरीविवृतये प्राचां गतिं कुशलवाचां जगज्जननि याचामि देवि भवतीम् ॥ २॥ चेटीकृतामरवधूटीकराग्रधृतपेटीपुटार्घ्यसुमनो- वीटीदलक्रमुकपाटीरपङ्कनवशाटीकृताङ्गरचना ।खेटीकमानशतकोटीकराब्जजजटाटीरवन्दितपदा या टीकतेऽब्जवनमाटीकतां हृदयवाटीमतीव कमला ॥ ३॥ स्वान्तान्तरालकृतकान्तागमान्तशतशान्तान्तराघनिकराः शान्तार्थकान्तवकृतान्ता भजन्ति हृदि दान्ता दुरन्ततपसा ।यां तानतापभवतान्तातिभीतजगतां तापनोदनपटुं मां तारयत्वशुभकान्तारतोऽद्य हरिकान्ताकटाक्षलहरी ॥ ४॥ यां भावुका मनसि सम्भावयन्ति भवसम्भावनापहृतये त्वं भासि लक्ष्मि सततं भाव्ययद्भवनसम्भावनादिविधये ।जम्भारिसम्पदुपलम्भादिकारणमहं भाव्यमङ्घ्रियुगलं सम्भावये श्रुतिषु सम्भाषितं वचसि सम्भाष्य तस्य तव च ॥ ५॥ दूरावधूतमधुधारागिरोच्चकुचभारानताङ्गलतिका- साराङ्गलिप्तघनसारार्द्रकुङ्कुमरसा राजहंसगमना ।वैराकरस्मरविकारापसंसरणवाराशिमग्रमनसः श्रीराविरस्तु धुरि ताराय मे गुरुभिरारधिता भगवती ॥ ६॥ श्रीवासधूपकनदावासदीपरुचिरावासभूपरिसरा श्रीवासदेशलसदावापकाशरदभावाभकेशनिकरा ।श्रीवासुदेवरमणी वामदेवविधिदेवाधिपावनपरा श्रीवासवस्तुनरदेवाहतस्तुतिसभावा मुदेऽस्तु सुतराम् ॥ ७॥ भाषादिदेवकुलयोषामणिस्तवनघोषाञ्चितस्वसविधा दोषाकुले जगति पोषाकुला सपदि शेषाहि शायिदयिता ।दोषालयस्य मम दोषानपोह्य गतदोषाभिनन्द्यमहिमा शेषाशनाहिरिपुशेषादिसम्पद विशेषां ददातु विभवान् ॥ ८॥ इति श्रीकमलाष्टकं सम्पूर्णम् ।स्तोत्रसमुच्चयः २ (८४)

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ShrIaShTalakShmImahAmantram:श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रम्

ShrIaShTalakShmImahAmantram:श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रम् (ऋषिः – छन्दः – देवता – ध्यान सहितम्)श्रीलक्ष्मीनारायणःअस्य श्रीरमानाथमहामन्त्रस्य –नारायण ऋषिः – विराट् छन्दः – लक्ष्मीनारायणो देवता –अं बीजं – उं शक्तिः – मं कीलकं –अस्य श्रीलक्ष्मीनारायणप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ॐ नं तर्जनीभ्यां नमःॐ रं मध्यमाभ्यां नमः ॐ यं अनामिकाभ्यां नमःॐ णं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ यं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमःॐ हृदयाय नमः ॐ नं शिरसे स्वाहाॐ रं शिखायै वषट् ॐ यं कवचाय हुंॐ णं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ यं अस्त्राय फट्ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम्श्रीवत्सवक्षसं विष्णुं चक्रशङ्खसमन्वितम् ।वामोरुविलसल्लक्ष्म्याऽऽलिङ्गितं पीतवाससम् ॥ सुस्थिरं दक्षिणं पादं वामपादं तु कुञ्जितम् ।दक्षिणं हस्तमभयं वामं चालिङ्गितश्रियम् ॥ शिखिपीताम्बरधरं हेमयज्ञोपवीतिनम् ।एवं ध्यायेद्रमानाथं पश्चात्पूजां समाचरेत् ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ नमो नारायणाय ।श्री आदिलक्ष्मीःअस्य श्री आदिलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –भार्गव ऋषिः – अनुष्टुबादि नाना छन्दांसि – श्री आदिलक्ष्मीर्देवता –श्रीं बीजं – ह्रीं शक्तिः – ऐं कीलकं –श्रीमदादि महालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ श्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नम ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमःॐ ऐं मध्यमाभ्यां नम ॐ श्रीं अनामिकाभ्यां नमःॐ ह्रीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ ऐं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमःॐ श्रीं हृदयाय नमः ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहाॐ ऐं शिखायै वषट् ॐ श्रीं कवचाय हुंॐ स्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ स्रः अस्त्राय फट्ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम्द्विभुजां च द्विनेत्रां च साभयां वरदान्विताम् ।पुष्पमालाधरां देवीं अम्बुजासनसंस्थिताम् ॥ पुष्पतोरणसम्युक्तां प्रभामण्डलमण्डिताम् ।सर्वलक्षणसम्युक्तां सर्वाभरणभूषिताम् ॥ पीताम्बरधरां देवीं मकुटीचारुबन्धनाम् ।सौन्दर्यनिलयां शक्तिं आदिलक्ष्मीमहं भजे ॥ मूलमन्त्रं – ॐ श्रीं आदिलक्ष्म्यै नमः । श्रीसन्तानलक्ष्मीअस्य श्रीसन्तानलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –भृगु ऋषिः – निचृत् छन्दः – श्रीसन्तानलक्ष्मीः देवता –श्रीं बीजं – ह्रीं शक्तिः – क्लीं कीलकं –अस्य श्रीसन्तानलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ स्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ॐ स्रीं तर्जनीभ्यां नमःॐ स्रूं मध्यमाभ्यां नमः ॐ स्रैं अनामिकाभ्यां नमःॐ स्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ स्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमःॐ स्रां हृदयाय नमः ॐ स्रीं शिरसे स्वाहाॐ स्रूं शिखायै वषट् ॐ स्रैं कवचाय हुंॐ स्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ स्रः अस्त्राय पट्ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम्जटामकुटसम्युक्तां स्थिरासन्समन्विताम् ।अभयं कटकञ्चैव पूर्णकुम्भं करद्वये ॥ कञ्चुकं सन्नवीतञ्च मौक्तिकञ्चापि धारिणीम् ।दीपचामरहस्ताभिः सेवितां पार्श्वयोर्द्वयोः ॥ बालसेनानिसङ्काशां करुणापूरिताननाम् ।महाराज्ञीं च सन्तानलक्ष्मीमिष्टार्थसिद्धये ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ श्रीं सन्तानलक्ष्म्यै नमः । श्रीगजलक्ष्मीःअस्य श्रीगजलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –शुक्र ऋषिः – अनुष्टुप् छन्दः – गजलक्ष्मीः देवता –कं बीजं – मं शक्तिः – लं कीलकं –श्रीगजलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ क्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ क्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ क्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ क्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ क्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ क्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ क्रां हृदयाय नमः ।ॐ क्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ क्रूं शिखायै वषट् ।ॐ क्रैं कवचाय हुं ।ॐ क्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ क्रः अस्त्राय पट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।चतुर्भुजां महालक्ष्मीं गजयुग्मसुपूजिताम् ।पद्मपत्राभनयनां वराभयकरोज्ज्वलाम् ॥ ऊर्ध्वं करद्वये चाब्जं दधतीं शुक्लवस्त्रकम् ।पद्मासने सुखासीनां गजलक्ष्मीमहं भजे ॥ मूलमन्त्रं – ॐ श्रीं गजलक्ष्म्यै नमः । श्रीधनलक्ष्मीःअस्य श्रीधनलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –परब्रह्म ऋषिः – अनुष्टुप्छन्दः – श्रीधनलक्ष्मीः देवता –लं बीजं – धं शक्तिः – मं कीलकं –श्रीधनलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ त्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ॐ त्रीं तर्जनीभ्यां नमःॐ त्रूं मध्यमाभ्यां नमः ॐ त्रैं अनामिकाभ्यां नमःॐ त्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ त्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमःॐ त्रां हृदयाय नमः ॐ त्रीं शिरसे स्वाहाॐ त्रूं शिखायै वषट् ॐ त्रैं कवचाय हुंॐ त्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ त्रः अस्त्राय फट्ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम्किरीटमुकुटोपेतां स्वर्णवर्णसमन्विताम् ।सर्वाभरणसम्युक्तां सुखासनसमन्विताम् ॥ परिपूर्णञ्च कुम्भञ्च दक्षिणेन करेण तु ।चक्रं बाणञ्च ताम्बूलं तदा वामकरेण तु ॥ शङ्खं पद्मञ्च चापञ्च कुण्डिकामपि धारिणीम् ।सकञ्चुकस्तनीं ध्यायेत् धनलक्ष्मीं मनोहराम् ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ श्रीं धनलक्ष्म्यै नमः । श्रीधान्यलक्ष्मीःअस्य श्रीधान्यलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –परब्रह्म ऋषिः – अनुष्टुप्छन्दः – श्री धान्यलक्ष्मीः देवता –धं बीजं – लं शक्तिः – मं कीलकं –श्रीधान्यलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ द्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ द्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ द्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ द्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ द्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ द्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ द्रां हृदयाय नमः ।ॐ द्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ द्रूं शिखायै वषट् ।ॐ द्रैं कवचाय हुं ।ॐ द्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ द्रः अस्त्राय फट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।वरदाभयसम्युक्तां किरीटमकुटोज्ज्वलाम् ।अम्बुजञ्चेक्षुशालिञ्च कदम्बफलद्रोणिकाम् ॥ पङ्कजञ्चाष्टहस्तेषु दधानां शुक्लरूपिणीम् ।कृपामूर्तिं जटाजूटां सुखासनसमन्विताम् ॥ सर्वालङ्कारसम्युक्तां सर्वाभरणभूषिताम् ।मदमत्तां मनोहारिरूपां धान्यश्रियं भजे ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ श्रीं धान्यलक्ष्म्यै नमः । श्रीविजयलक्ष्मीः ।अस्य श्रीविजयलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –नारद ऋषिः – नाना छन्दांसि – श्रीविजयलक्ष्मीः देवता –लं बीजं – क्षं शक्तिः – यं कीलकं –सर्वकार्यसिद्धिद्वारा श्रीविजयलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ व्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ व्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ व्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ व्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ व्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ व्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ व्रां हृदयाय नमः ।ॐ व्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ व्रूं शिखायै वषट् ।ॐ व्रैं कवचाय हुं ।ॐ व्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ व्रः अस्त्राय फट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।अष्टबाहुयुतां देवीं सिम्हासनवरस्थिताम् ।सखासनां सुकेशीञ्च किरीटमुकुटोज्ज्वलाम् ॥ श्यामाङ्गीं कोमलाकारां सर्वाभरणभूषिताम् ।खड्गं पाशं तदा चक्रमभयं सव्यहस्तके ॥ खेटकञ्चाङ्कुशं शङ्खं वरदं वामहस्तके ।राजरूपधरां शक्तिं प्रभासौन्दर्यशोभिताम् ॥ हंसारूढां स्मरेद्देवीं विजयां विजयप्रदे ॥ मूल्मन्त्रं – ॐ श्रीं विजयलक्ष्म्यै नमः । श्रीधैर्य(वीर)लक्ष्मीःअस्य श्रीवीरलक्ष्मीमहामन्त्रस्य –नारद ऋषिः – त्रिष्टुप्छन्दः – श्रीवीरलक्ष्मीः देवता –लं बीजं – रं शक्तिः – लं कीलकं –आरोग्यभाग्यसिद्धिद्वारा श्रीवीरलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ व्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ व्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ व्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ व्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ व्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ व्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ व्रां हृदयाय नमः ।ॐ व्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ व्रूं शिखायै वषट् ।ॐ व्रैं कवचाय हुं ।ॐ व्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ व्रः अस्त्राय फट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।अष्टबाहुयुतां लक्ष्मीं सिम्हासनवरस्थिताम् ।तप्तकाञ्चनसङ्काशां किरीटमकुटोज्ज्वलाम् ॥ स्वर्णकञ्चुकसंयुक्तां सन्नवीततरां शुभाम् ।अभयं वरदं चैव भुजयोः सव्यवामयोः ॥ चक्रं शूलञ्च बाणञ्च शङ्खं चापं कपालकम् ।दधतीं धैर्यलक्ष्मीं च नवतालात्मिकां भजे ॥ मूलमन्त्रम् – ॐ श्रीं वीरलक्ष्म्यै नमः । श्री ऐश्वर्य(महा)लक्ष्मीःअस्य श्रीमहालक्ष्मीमहामन्त्रस्य –ब्रह्मा ऋषिः – जगती छन्दः – श्रीमहालक्ष्मीः देवता –ह्रां बीजं – ह्रीं शक्तिः – ह्रूं कीलकं –श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।ॐ क्ष्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ क्ष्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॐ क्ष्रां हृदयाय नमः ।ॐ क्ष्रीं शिरसे स्वाहा ।ॐ क्ष्रूं शिखायै वषट् ।ॐ क्ष्रैं कवचाय हुं ।ॐ क्ष्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।ॐ क्ष्रः अस्त्राय फट् ।ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥ ध्यानम् ।चतुर्भुजां द्विनेत्राञ्च वराभयकरान्विताम् ।अब्जद्वयकराम्भोजां अम्बुजासनसंस्थिताम् ॥ ससुवर्णघटोराभ्यां प्लाव्यमानां महाश्रियम् ।सर्वाभरणशोभाढ्यां शुभ्रवस्त्रोत्तरीयकाम् ॥ चामरग्रहनारीभिः सेवितां पार्श्वयोर्द्वयोः ।आपादलम्बिवसनां करण्डमकुटां भजे ॥ मूलमन्त्रम् – अं श्रीं श्रीमहालक्ष्म्यै नमः ॥ इति श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रं सम्पूर्णम् ।

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Chhath Puja

Chhath Puja 2025 Vrat Niyam:इन चीजों के बिना अधूरा है छठ व्रत, जानें पूजा सामग्री और सही नियम

Chhath Puja: छठ व्रत, सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है. यह व्रत चार दिनों तक चलता है और इसमें कुछ विशेष सामग्रियों का उपयोग किया जाता है. आइए छठ व्रत की पूजा सामग्री और सही नियमों के बारे में जानते हैं. Kab Hai Chhath Puja 2025: छठ व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है. छठ व्रत सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है. इस व्रत को करने से संतान की लंबी आयु, परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. Chhath Puja छठी मैया को संतान सुख देने वाली देवी माना जाता है, इसलिए खासकर महिलाएं यह व्रत पूरी श्रद्धा से करती हैं. छठ पूजा सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है. इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने से भगवान सूर्य और छठी मईया की कृपा प्राप्त होती है. Chhath Puja 2025 Vrat Niyam:इन चीजों के बिना अधूरा है छठ व्रत…. छठ पूजा के लिए पूजा सामग्री:puja material for chhath puja बांस की टोकरी और सूप: छठ पूजा में बांस की टोकरी और सूप का विशेष महत्व है. Chhath Puja छठ पूजा में ठेकुआ एक प्रमुख प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है, जो गेंहू के आटे, गुड़ और घी से तैयार किया जाता है. इसके अतिरिक्त, अन्य फल, मिठाईयां और पकवान भी प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं. गन्ना छठ पूजा के दौरान शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसके साथ ही, सेब, अनार, संतरा, बेल, शरीफा और नींबू जैसे फलों को भी चढ़ाया जाता है. छठ पूजा Chhath Puja के अवसर पर लाल और पीले रंग के वस्त्र धारण करना बहुत ही शुभ माना जाता है. Chhath Puja छठ पूजा में मिट्टी के दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके अतिरिक्त, गंगाजल का उपयोग स्नान, प्रसाद और अर्घ्य के लिए किया जाता है. सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए तांबे या कांसे का लोटा उपयोग किया जाता है. इसके अलावा पूजा में चावल, आटा, जल, शहद, चंदन, सिंदूर, धूपबत्ती, कुमकुम, कपूर, दूध, तेल, बाती, नारियल, सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंदी, मूली, बैंगन, केले, गेहूं आदि शामिल किए जाते हैं. प्रसाद की सामग्री:Ingredients of Prasad चम्मच, लड्डू, हल्दी, नाशपाती पत्ते लगे हुए ईख, दूध, तेल और बाती नारियल, शरीफा, दूध से बनी मिठाइयाँ बड़ा नींबू, सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंदी, मूली, बैंगन, केले, गेहूं छठ व्रत के नियम:rules of chhath fast छठ पूजा में स्वच्छता का विशेष महत्व है. पूजा की सभी सामग्री और स्थान स्वच्छ होने चाहिए. Chhath Puja छठ पूजा के दौरान सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए. लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए. छठ पूजा के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना उचित माना जाता है. छठ पूजा पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करनी चाहिए. छठ पूजा के सभी नियमों का पालन करना चाहिए. छठ पूजा का महत्व:Importance of Chhath Puja मान्यता है कि छठ सूर्य देव और Chhath Puja छठी मैया की पूजा के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है, जो शारीरिक और मानसिक शुद्धता का प्रतीक है. यह व्रत जीवन में संयम, शुद्धता, और आत्म-नियंत्रण की भावना को जागृत करता है. 36 घंटे के इस व्रत के बाद व्यक्ति को संतान सुख, समृद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं. यह उपवास मानसिक शांति, शारीरिक स्वच्छता और भगवान सूर्य से आशीर्वाद पाने के लिए किया जाता है. इस व्रत को करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. छठ पर इन नियमों का रखें ध्यान: Keep these rules in mind on Chhath छठ पूजा के दौरान सफाई का विशेष ध्यान रखें।  व्रत के सभी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए, जिससे पूजा सही विधि से पूरी हो सके।  पूजा के दौरान घर के सभी सदस्य सात्विक भोजन ग्रहण करें।  नहाय-खाय के दिन से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक लहसुन और प्याज का सेवन न करें।  व्रती को प्रसाद स्वयं बनाएं, यदि आप प्रसाद नहीं बना पा रहे हैं तो किसी न किसी रूप में मदद जरूर करें।  प्रसाद बनाते समय स्वच्छता और शुद्धता का ध्यान रखें।  इस बात का विशेष ध्यान रखें कि छठ पूजा से जुड़े सभी प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाए जाएं।  पूजा के कपड़ों में सुई का उपयोग न करें।  पूजा में बांस से बनी सूप और टोकरी का ही इस्तेमाल करें।   व्रती पूरी पूजा के दौरान जमीन पर चटाई बिछाकर ही सोए।

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