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Sapne:सपने में बंदर का दिखना शुभ या अशुभ, जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Sapne सपने में बंदर का दिखना शुभ या अशुभ दोनों हो सकता है। यह सपने में बंदर की स्थिति और उसकी गतिविधियों पर निर्भर करता है सपनों में हम कई तरह की चीजें देखते हैं जो हमें हमारे भविष्य के बारे में भी संकेत देते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में अलग-अलग पशु-पक्षियों को देखने का अर्थ अलग-अलग होता है। सपने में बंदर को खाना चुराते हुए देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपको जल्द ही धन लाभ होने वाला है। सपने में बंदर को मस्ती करते हुए या प्रसन्न अवस्था में देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके किसी शत्रु से मित्रता हो सकती है। बंदर का हसते हुए दिखना Sapne सपने में बंदर को हंसते हुए देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन में अच्छा समय शुरू होने वाला है। आपके जीवन में धन, समृद्धि और मान-सम्मान बढ़ने वाला है।  किसी व्यक्ति को सपने (sapne) में बंदर हंसते हुए दिखता है, तो इसका अर्थ है कि उस व्यक्ति का अच्छा समय शुरू होने वाला है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति को भविष्य में धन-लाभ होने वाला है। वहीं, अगर सपने में बंदर को गुस्से में दिखाई दे तो समझ जाइए कि आप पर कोई भारी परेशानी आने वाली है। यह सपना एक अशुभ संकेत है और इसके बाद आपका लोगों से झगड़ा भी हो सकता है। साथ ही मान-सम्मान में कमी भी आ सकती है। बंदर को खाते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर किसी को सपने sapne में बंदर कुछ खाते हुए नजर आता है तो इसे अशुभ संकेत माना गया है। यह सपना बताता है कि आपको भविष्य के लिए सतर्क रहना चाहिए। वहीं अगर कोई व्यक्ति सपने में बंदरों का झुंड देखता है, तो इसका मतलब है कि जल्द ही उसे आर्थिक लाभ मिलने वाला है। बंदरों को लड़ते हुए देखना सपने में बंदर को लड़ते हुए देखना अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन में कोई समस्या उत्पन्न हो सकती है। अगर आप सपने में बंदरों को आपस में लड़ते हुए देखते हैं तो इसका मतलब है कि परिवार में किसी कारण दरार पड़ सकती है। इसलिए आपको संभलकर रहने की जरूरत है। अगर आप सपने में बंदर को खाना चुराते देखते हैं, तो इसका मतलब है कि व्यक्ति को जल्द ही धन लाभ होने वाला है। बंदर को तैरते हुए देखना सपने में बंदर को तैरते हुए देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप जल्द ही अपने सभी कष्टों और समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। अगर सपने में कोई बंदर तैरते हुए नजर आ रहा है, तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपको जीवन में आ रही किसी समस्या से छुटकारा मिलने वाला है। अगर सपने में आप देखते हैं कि किसी बंदर ने आपको काट लिया है, तो समझ लें कि भविष्य में कोई गंभीर चोट लगने वाली है। सपने में बंदर को आप पर हमला करते हुए देखना अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन में किसी प्रकार का खतरा या परेशानी आ सकती है। सपने में बंदर को चोरी करते हुए देखना अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपको आर्थिक नुकसान हो सकता है। सपने में बंदर को क्रोध में देखना अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपका किसी से विवाद हो सकता है।

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Sapne:सपने में दिखें ये चीजें तो बिल्कुल ना करें अनदेखी

सपने (Sapne) हमारे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति होते हैं। वे हमारी भावनाओं, इच्छाओं, भय और चिंताओं को दर्शाते हैं। कुछ सपने शुभ होते हैं, जबकि कुछ अशुभ। सपने में दिखने वाली कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। ऐसी चीजें अगर हमें सपने में दिखाई दें तो हमें उन्हें बिल्कुल अनदेखी नहीं करना चाहिए। कभी आप सपने में  कभी आप किसी जंगल में भटक जाते हैं तो कभी आप देखते हैं कि आप एग्जाम दे रहे हैं या कभी आप सपने में देखते हैं कि आप किसी ऊंची बिल्डिंग से गिर रहे हैं.  हम सब कुछ एक सपना समझकर भूल जाते हैं लेकिन हर सपने का कुछ मतलब होता है. सपने अचेतन अवस्था में बोले गए शब्दों की तरह हैं. सपने में हम जो भी देखते हैं, उसका कोई ना कोई अर्थ जरूर होता है. इन सपनों का संबंध हमारी असल जिंदगी से भी होता है. आइए जानते हैं आखिर ये सपने हमसे क्या कहना चाहते हैं… कई बार हम कुछ ऐसे सपने देखते हैं जो दुर्भाग्य और बुरे वक्त आने का संकेत होते हैं. अगर हम अपने सपनों को समझ लें तो उसके नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं वे बुरे सपने. सांप snek को सपने ( Sapne) में देखना अशुभ माना जाता है. अगर आपने अपने सपने में सांप देखे हैं तो सावधान हो जाइए. सपने में सांप दिखने का मतलब है कि आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. सपने में अगर आप अपने किसी करीबी की मौत देखते हैं तो निश्चित तौर पर यह बुरा संकेत है. इसका मतलब है कि आपके निजी और व्यावसायिक रिश्तों में मुसीबतें हैं. लोगों से मिलते वक्त सावधानी बरतें खासकर ऑफिस में. सपने (Sapne) में रोते हैं:  सपने में खुद को रोते हुए या चिल्लाते हुए देखना यह बताता है कि आप अपनी असल जिंदगी में भी परेशान हैं. आपको बेचैनी, दुख, पीड़ा, उलझन, तनाव, अवसाद जैसी भावनाएं घेरे हुए हैं. अगर आप सपने में देखते हैं कि कोई आपका पीछा कर रहा है तो इसका मतलब यह है कि आप अपनी लाइफ में किसी समस्या को सुलझाने के बजाए उससे भाग रहे हैं. आपका मस्तिष्क आपको यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि आपको अपनी जिंदगी की उलझनों का सामना करना चाहिए, उनसे भागना नहीं चाहिए. या फिर आप अगर देखते हैं कि आप भागना चाह रहे हैं लेकिन आपका कदम ही नहीं उठ रहा है तो इसके मायने यह है कि आपके अंदर आत्मविश्वास की बहुत कमी है.हिंदू संस्कृति में बिल्लियों को अशुभ माना गया है और सपने में भी बिल्ली का दिखना अशुभ समझा जाता है.  सपने में बिल्ली दिखने का मतलब है कि आपको किसी से धोखा मिला है या फिर मिलने वाला है.अगर आप खुद को किसी जगह फंसा हुआ या बंद देखते हैं तो भविष्य में भाग्य आपका साथ छोड़ने वाला है. आपके लिए अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को संभालना मुश्किल भरा हो सकता है. कई बार आप बेहद अटपटे से सपने देखते हैं. आप अगर अपने सपने में देखते हैं कि आप न्यूड हैं तो इसकी व्याख्या यह हो सकती है कि आप अपमानित, शर्मिन्दा या फिर आहत हो सकते हैं. आपका अपना कोई आपको नुकसान पहुंचा सकता है. आपके राज खुल सकते हैं और आपको कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. सपने में न्यूडिटी देखने को आजादी पाने और बंधन तोड़ने की इच्छा से भी देखा जा सकता है. अगर आप सपने में किसी की मौत को देखते हैं तो यह भी एक चेतावनी है. यह स्पष्ट संकेत है कि आपकी जिंदगी में कुछ बुरा हो सकता है. हालांकि अगर मृत व्यक्ति आपको कुछ दे रहा है तो यह आर्थिक लाभ का संकेत माना जाता है. अगर आप सपने में देखते हैं कि आपको कोई चोट पहुंचा रहा है या आपको चोट लग गई है तो इसका मतलब है कि आपको आने वाले वक्त में संघर्ष करना पड़ सकता है. अगर आप खुद को ऊंचाई से गिरते हुए देखते हैं तो यह आपकी जिंदगी की असफलताओं और मुश्किलों की तरफ इशारा कर रहा है. सपने (Sapne)में बच्चे को देखना भी अशुभ संकेत है. इससे किसी परिजन के दूर होने का संकेत समझा जाता है. अगर आप सपने में किसी बच्चे की दुलार करते हुए देखते हैं तो इसका मतलब आपको किसी से धोखा मिल सकता है.

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Sapna:सपने में खुद को चोट लगते देखना कैसा होता है

सपने में खुद को चोट ( chot ) लगते हुए देखना एक अशुभ सपना sapna माना जाता है। इस सपने के कई अर्थ हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर यह आने वाले समय में कठिनाइयों और समस्याओं का संकेत देता है। Sapna:सपने में खुद का चेहरा आईने में देखने का क्या मतलब होता है ? हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सपनों का कोई निश्चित अर्थ नहीं होता है। सपनों का अर्थ व्यक्तिगत अनुभवों और विश्वासों के आधार पर भिन्न हो सकता है। इसलिए, यदि आप सपने में खुद को चोट लगते हुए देखते हैं, तो घबराएं नहीं। बस अपने आसपास की सावधानी बरतें और आने वाले समय में कठिनाइयों और समस्याओं के लिए तैयार रहें।

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Sapna:सपने में खुद का चेहरा आईने में देखने का क्या मतलब होता है ?

Sapna कुछ मामलों में, सपने में खुद का चेहरा आईने में देखना एक नकारात्मक संकेत माना जा सकता है। यह आत्म-संदेह, आत्म-निंदात्मक विचारों या आत्म-विनाशकारी व्यवहार का प्रतीक हो सकता है। यह सपना व्यक्ति को अपने स्वयं के विचारों और भावनाओं के बारे में जागरूक होने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकता है। ऐसा माना जाता है कि सपने भविष्य (Future) का संकेत देते हैं. हर व्यक्ति के सपने अलग-अलग होते हैं. किसी को अच्छे सपने आते हैं, किसी को बुरे सपने आते हैं. अच्छे सपने और बुरे सपने किसी व्यक्ति के वश में नहीं होते. यदि कोई व्यक्ति सोचे कि वह सिर्फ अच्छे सपने देखे तो ऐसा संभव नहीं है. विज्ञान (Science) यह भी मानता है कि हमारे दिनभर किए गए कार्यों को हमारा दिमाग रात में सोते समय सपने के रूप में हमें दिखाता है. इसी क्रम में आज हम बात करने जा रहे हैं कि यदि हमें सपने में खुद का चेहरा (Face) आईने में दिखाई दे तो इसका क्या मतलब होता है. Swapna Shastra:सपनों में दिखाई देने वाली ये आठ घटनाएं मानी जाती है शुभ सपने वो काल्पनिक दुनिया होते हैं, जो हमें असल दुनिया से बिल्कुल अलग दुनिया में ले जाते हैं, जिसे हम स्वप्न लोक कहते हैं. स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई ना कोई मतलब जरूर होता है. देखे जाने वाले कुछ सपने शुभ होते हैं और कुछ अशुभ माने जाते हैं. स्वप्न शास्त्र में उन सभी सपनों का अर्थ बताया गया है. सपने में शीशे में चेहरा देखनायदि किसी सपने में आप अपने आपको किसी दर्पण के सामने खड़े हुए देखते हैं या दर्पण में आप अपने आप को देख रहे हैं तो यह सपना आपके लिए एक चेतावनी हो सकती है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना आपको आने वाले दिनों में आपके जीवन में आने वाले शारीरिक और मानसिक कष्ट के बारे में संकेत देता है. इस प्रकार का सपना देखने का मतलब है कि आप दो मुंहे लोगों के बीच में फंस गए हैं, ऐसे में आपको सावधान रहने की बहुत जरूरत है. यह लोग कभी भी आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं. Sapna सपने में दर्पण देखना यदि आप सपने में आईना देखते हैं तो यह आपके लिए एक शुभ सपना हो सकता है. सपने में दर्पण देखने का मतलब है कि आप आर्थिक तरक्की करने वाले हैं. यह आपको आपके जीवन में होने वाले धन लाभ के बारे में संकेत देता है. सपने में दर्पण टूटनायदि कोई व्यक्ति अपने सपनों में दर्पण का टूटना देखता है, तो यह उसके लिए अच्छा सपना नहीं माना जाता. सपने में दर्पण टूटने का मतलब है कि आपके और आपके परिवार के संबंधों में कटुता बढ़ सकती है, इसलिए आपको अपने परिवार से मेलजोल बढ़ाना चाहिए और अपने संबंधों में मधुरता लानी चाहिए.

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Swapna Shastra:सपनों में दिखाई देने वाली ये आठ घटनाएं मानी जाती है शुभ

Swapna Shastra: सपनों की व्याख्या करने के लिए, स्वप्न शास्त्र विभिन्न कारकों पर विचार करता है, जैसे कि सपने में क्या देखा गया, सपने का समय, सपने देखने वाले का व्यक्तित्व और वर्तमान परिस्थितियां। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने दो प्रकार के होते हैं: शुभ और अशुभ। शुभ सपने अच्छे संकेत देते हैं, जबकि अशुभ सपने बुरे संकेत देते हैं। सोने के बाद आत्मा शरीर से बाहर निकलकर यहां-वहां घूमती है और बाद में शरीर में प्रवेश कर जाती है। उस समय शरीर कोमा की स्थिति में होता है। लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है ये आज भी शोध का विषय है। समुद्र का पानी होता अशुभ संकेत Swapna Shastra अशांति और उथल-पुथल: सपने में समुद्र का पानी उथल-पुथल भरा देखना जीवन में अशांति और उथल-पुथल का संकेत देता है। परिवर्तन: सपने में समुद्र का पानी देखना जीवन में परिवर्तन का संकेत भी देता है। यह परिवर्तन अच्छा या बुरा हो सकता है। अंतर्विरोध: सपने में समुद्र का पानी देखना अंतर्विरोध का भी संकेत देता है। व्यक्ति अपने जीवन में किसी तरह के अंतर्विरोध से जूझ रहा हो सकता है। इस तरह के सपने देखने के बाद मनुष्य को वाहन सावधानी पूर्वक चलाना चाहिए और ऊंचाई वाली जगहों पर सावधानी से जाना चाहिए। ये सपना भविष्य में सावधानी बरतने की तरफ इशारा करता है। सपने में गुलाब का फूल देखना सपनों की व्याख्या व्यक्तिगत परिस्थितियों और सपने देखने वाले के व्यक्तित्व पर निर्भर करती है। किसी भी सपने की व्याख्या करने से पहले, सभी कारकों को ध्यान में रखना चाहिए। यदि आप सपने में गुलाब का फूल देखते हैं, तो यह एक अच्छा संकेत है। यह आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तनों का संकेत देता है। सपने में गुलाब का फूल देखते हैं तो ये आपके लिए शुभ माना जाता है। ये आपके जीवन में आने वाली सकारात्मकता का संकेत है। ऐसे सपनों का ये अर्थ भी होता है कि जल्द ही आपके मन की कोई इच्छा पूरी होने वाली है। सपने में डूब जाना सपने में डूबते हैं, तो यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है कि आपको अपने जीवन में कुछ बदलाव करने की आवश्यकता है। आपको अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के तरीके खोजने की आवश्यकता हो सकती है, अपनी चिंताओं का सामना करने के तरीके सीखने की आवश्यकता हो सकती है, या अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है।आप गहरे पानी में डूब रहे हैं। ये इस बात का संकेत है कि आप किसी डर या दुख में हैं। सपने में अपने आपको उस व्यक्ति को उन घटनाओं के बारे में सोचना बंद करना चाहिए जो गुजर चुकी हैं। आपको किसी भी तरह की चिंता नहीं करनी चाहिए और अपने मन को शांत करने का प्रयास करना चाहिए। खुद को दरिद्र रूप में देखना अपने सपनों को याद रखने की कोशिश करें। जितना अधिक आप अपने सपनों को याद रख पाएंगे, उतनी ही आसानी से आप उन्हें व्याख्या कर पाएंगे। सपने में क्या हुआ, इस पर ध्यान दें। सपने में क्या हुआ, इस पर ध्यान देने से आपको सपने का अर्थ समझने में मदद मिल सकती है। सपने का समय और स्थान ध्यान दें। सपने का समय और स्थान भी सपने के अर्थ को प्रभावित कर सकते हैं। सपने देखने वाले का व्यक्तित्व और वर्तमान परिस्थितियां पर विचार करें। सपने देखने वाले का व्यक्तित्व और वर्तमान परिस्थितियां भी सपने के अर्थ को प्रभावित कर सकती हैं। आपको इससे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे स्वप्न का मतलब आपके धन में वृद्धि होना है। ये अटके हुए धन के वापस मिलने का भी संकेत है। सपने में तोता देखना कौशल और प्रतिभा: सपने में तोता देखना कौशल और प्रतिभा का भी संकेत दे सकता है। यह व्यक्ति की कुछ नई प्रतिभा या कौशल के विकास का संकेत हो सकता है। माहौल और प्रभाव: सपने में तोता देखना माहौल और प्रभाव का भी संकेत दे सकता है। यह व्यक्ति के आसपास के माहौल या किसी अन्य व्यक्ति के प्रभाव को दर्शा सकता है।  इसका मतलब है कि आपको कोई अच्छा समाचार मिलने वाला है। आपके जीवन में सुख की शुरूआत होने वाली है। तोता हमेशा से सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। सपने में मृत्यु देखना सपनों में अपने किसी भी परिजन की मृत्यु होते हुए देखते हैं तो समझिए उनकी आयु में वृद्धि हो गई है। नई शुरुआत: सपने में मृत्यु देखने का एक अर्थ यह भी हो सकता है कि आप अपने जीवन में एक नई शुरुआत करने के लिए तैयार हैं। यह पुरानी आदतों या संबंधों को छोड़ने और नए अवसरों को खोजने का समय हो सकता है। परिवर्तन: सपने में मृत्यु देखने का एक अन्य अर्थ यह भी हो सकता है कि आपके जीवन में कुछ बदलाव होने वाले हैं। यह बदलाव अच्छे या बुरे हो सकते हैं। भवन का निर्माण देखना  भवन का निर्माण दिखाई देने का मलतब है आपके जीवन में उन्नति होने वाली है। आपको धन की प्राप्ति होने वाली है। आशा: सपने में भवन निर्माण देखना आशा का भी संकेत दे सकता है। यह व्यक्ति के जीवन में बेहतर समय आने की उम्मीद का संकेत हो सकता है। प्रतिभा: सपने में भवन निर्माण देखना प्रतिभा का भी संकेत दे सकता है। यह व्यक्ति की कुछ नई प्रतिभा या कौशल के विकास का संकेत हो सकता है। नया अवसर: सपने में भवन निर्माण देखना नए अवसर का भी संकेत दे सकता है। यह व्यक्ति के जीवन में नए अवसरों की संभावना का संकेत हो सकता है। सबसे दुर्लभ सपना क्या है सपने देखते समय आप सचेत रहते हैं कि आप सपना देख रहे हैं लेकिन आप सपने देखते रहते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, 55 प्रतिशत लोग अपने जीवन में कम से कम एक बार इस प्रकार के सपनों का अनुभव करते हैं। यह निर्धारित करना मुश्किल है कि कौन सा सपना सबसे दुर्लभ है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप “दुलर्भ” को कैसे परिभाषित करते हैं। यदि आप दुर्लभ को “बहुत कम लोगों को आने वाला” के रूप में परिभाषित करते हैं, तो ऐसे कई सपने हैं जो बहुत कम लोगों को आते हैं। यदि आप दुर्लभ को “बहुत ही अनोखा या असामान्य” के रूप में परिभाषित करते हैं, तो ऐसे भी कई सपने हैं जो बहुत ही अनोखे या असामान्य हैं।

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कैसे हुआ सरस्वती का जन्म | saraswati ka janam kaise hua | माता सरस्वती के जन्म की कहानी |

Saraswati जब सृष्टि का निर्माण हुआ तो हर और अव्यवस्था थी। ब्रह्मा को यह समझ में नहीं आ रहा था कि सृष्टि में व्यवस्था कैसे बनाई जाए। समस्या पर विचार करते समय उन्हें एक आवाज सुनाई पड़ी कि ज्ञान ही सृष्टी में व्यवस्था बनाने में सहायता कर सकता है। तभी ब्रह्मा के मुख से सरस्वती (Saraswati) की चमत्कारी आकृति प्रकट हुई जो ज्ञान और बुद्धि की देवी थी, श्वेत वस्त्र धारण किए वह हंस पर सवार थी। उसके एक हाथ में पुस्तक और दूसरे में वीणा थी। विचार, समझ और संवाद के जरिए उन्होंने ब्रह्मा को यह समझाने में सहायता की की किस तरह से सृष्टि में व्यवस्था कायम की जाए। जब उसने वीणा बजाई तो हल्ला गुल्ला शांत होने लगा सूर्य, चंद्रमा और तारों का जन्म हुआ। समुंद्र भर गए और ऋतु परिवर्तन होने लगा। ब्रह्मा ने प्रसन्न होकर सरस्वती का नाम वाग्देवी रख दिया जिसका अर्थ शब्द और ध्वनि की देवी होता है। इस प्रकार ब्रह्मा, सरस्वती के ज्ञान की बदौलत सृष्टि के रचयिता बन गए। सरस्वती जी के जन्म की कथा हिंदू धर्म में बहुत प्रसिद्ध है। इस कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का कार्य संपन्न कर दिया तो उन्होंने पाया कि सृष्टि में सबकुछ है, लेकिन सब मूक, शांत और नीरस है। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल निकाला और छिड़क दिया, जिससे मां सरस्वती वहां पर प्रकट हो गईं। उन्होंने अपने हाथों में वीणा, माला और पुस्तक धारण कर रखा था। सृष्टि के रचयिता ब्रम्ह देव के 4 सिर क्यों है, जानें इसकी पौराणिक कथा वीणा से निकलने वाले मधुर स्वर से सृष्टि में ध्वनि का संचार हुआ। माला से निकलने वाले सुगंध से सृष्टि में सुगंध का संचार हुआ। और पुस्तक से निकलने वाले ज्ञान से सृष्टि में ज्ञान का संचार हुआ। मां सरस्वती को ज्ञान, कला, संगीत, और विद्या की देवी माना जाता है। वे सृष्टि में ज्ञान और कला का प्रसार करती हैं। मां सरस्वती का जन्म वसंत पंचमी के दिन हुआ था। इसलिए वसंत पंचमी को सरस्वती (saraswati )पूजा का पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन लोग मां सरस्वती की पूजा करते हैं और उनसे ज्ञान, कला और सफलता की कामना करते हैं। सरस्वती जी के जन्म की कुछ अन्य कथाएँ भी प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सृष्टि का निर्माण किया तो उन्होंने देखा कि सृष्टि में ज्ञान और कला का अभाव है। तब उन्होंने अपने नाभि से एक कमल उत्पन्न किया, जिस पर विराजमान होकर मां सरस्वती प्रकट हुईं। एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने सृष्टि का निर्माण किया तो उन्होंने देखा कि सृष्टि में ज्ञान और कला का विकास नहीं हो रहा है। तब उन्होंने अपने-अपने तेज से एक शक्ति उत्पन्न की, जिससे मां सरस्वती प्रकट हुईं। इन सभी कथाओं से स्पष्ट है कि मां सरस्वती ज्ञान, कला और विद्या की देवी हैं। वे सृष्टि में ज्ञान और कला का प्रसार करती हैं।

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Pauranik katha : कैसे हुई सूर्य देव की उत्पत्ति, जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

आज रविवार है और सूर्यदेव का दिन है। आज जागरण आध्यात्म के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि भगवान सूर्य की उत्पति कैसे हुई। पृथ्वी के दो साक्षात देव हैं सूर्य और चंद्र। ये दोनों देव ही प्रत्यक्ष हैं। Pauranik katha आज रविवार है और सूर्यदेव का दिन है। आज जागरण आध्यात्म के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि भगवान सूर्य की उत्पति कैसे हुई। पृथ्वी के दो साक्षात देव हैं सूर्य और चंद्र। ये दोनों देव ही प्रत्यक्ष हैं और उनके सर्वोच्च दिव्य स्वरूप में दिखाई देते हैं। वेदों के अनुसार, सूर्य को जगत की आत्मा माना गया है। इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य से ही है। हिंदू धर्म में लोग सूर्य को जल का अर्घ्य देते हैं। पुराणों में सूर्य की उत्पत्ति, प्रभाव, स्तुति, मन्त्र इत्यादि के बारे में बताया गया है। नवग्रहों में सूर्य को राजा का पद प्राप्त है। आइए जानते हैं कैसे हुई सूर्य देव की उत्पत्ति। नाग पंचमी पौराणिक कथा (Nag Panchami Pauranik Katha) Pauranik katha : हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना गया हैं और इनकी पूजा अर्चना भी की जाती हैं। पृथ्वी के दो साक्षात देवता हैं सूर्य और चंद्रमा। ये दोनों देव ही प्रत्यक्ष हैं और उनके सर्वोच्च दिव्य स्वरूप में दिखाई देते हैं वेदों के मुताबिक सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया हैं इस पृथ्वी पर हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना गया हैं और इनकी पूजा अर्चना भी की जाती हैं। पृथ्वी के दो साक्षात देवता हैं सूर्य और चंद्रमा। ये दोनों देव ही प्रत्यक्ष हैं और उनके सर्वोच्च दिव्य स्वरूप में दिखाई देते हैं वेदों के मुताबिक सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया हैं इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य से ही हैं हिंदू धर्म में सूर्य को जल का अर्घ्य दिया जाता हैं। हिंदू धर्म पुराणों में सूर्य की उत्पत्ति, प्रभाव, स्तुति, मंत्र आदि के बारे में बताया गया हैं नवग्रहों में सूर्य को राजा का पद मिलता हैं तो आज हम आपको अपने इस लेख में सूर्य देव की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं। हिंदू धर्म के मार्कंडेय पुराण के मुताबिक सारा जगत पहले प्रकाश रहित था। उस वक्त कमलयोनि ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा जी के मुंह से सबसे पहला शब्द जो निकला वो था ॐ, यह सूर्य का तेज रूप सूक्ष्म रूप था। इसके बाद ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेद प्रकट हुए। यह चारों ॐ के तेज में एकाकार हो गए। यह विश्व का अविनाशी कारण हैं सूर्य ही सृष्टि की उत्पत्ति, पालन व संहार का कारण हैं ब्रह्मा जी ने प्रार्थना की जिससे सूर्य ने अपने महातेज को समेट कर स्वल्प तेज को धारण किया। वही सृष्टि की रचना की गई तब ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि हुए। मरीचि के पुत्र ​ऋषि कश्यप का विवाह अदिति से हुआ। सूर्य को प्रसन्न करने के लिए अदिति ने घोर तप किया। फिर सुषुम्ना नाम की किरण ने अदिति के गर्भ में प्रवेश किया। इस अवस्था में भी अदिति ने चान्द्रायण जैसे कठिन व्रतों का पालन किया। इस ऋषि राज कश्यप क्रोधित हो गए। उन्होंने अदिति से कहा कि तुम इस तरह व्रत रख कर गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचा रही हो। इस तरह तुम शिशु को क्यों करना चा​हती हो। वही जब देवी अदिति ने यह सुना तो अदिति ने गर्भ के बालक को उदर से बाहर कर दिया जो अपने अत्यंत दिव्य तेज से प्रज्वल्लित हो रहा था। फिर सूर्य देव शिशु रूप में अदिति के गर्भ में प्रगट हुए। अदिति को मारिचम अन्डम कहा जाता था। इसके चलते ही इस बालक का नाम मार्तंड पड़ा। ब्रह्मपुराण में अदिति के गर्भ से जन्मे सूर्य के अंश को विवस्वान कहा गया हैं।

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Tulsi Vivah 2023: तुलसी विवाह कब है? जानें डेट, तिथि, शुभ मुहूर्त व महत्व

Tulsi Vivah 2023:हिंदू पंचांग के अनुसार, तुलसी विवाह हमेशा देवउठनी एकादशी के दिन किया जाता है. इस दिन तुलसी माता और शालिग्राम भगवान का विवाह किया जाता है. यह हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. आइए जानते हैं इस बार तुलसी विवाह कब है और इसका क्या महत्व है. Tulsi Vivah 2023: हिंदू रीति-रिवाजों में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है. इस दिन विष्णु भगवान के शालिग्राम स्वरुप के साथ तुलसी जी के विवाह का विधान है. मान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक तुलसी माता का विवाह संपन्न कराता है उसके दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रहती हैं. सारी मनोकामनाएं पूरी होती है और संतान सुख का भी वरदान मिलता है. पंचांग के अनुसार, तुलसी विवाह प्रति वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के एक दिन बाद रचाई जाती है. इस दिन देशभर में तुलसी विवाह का धूमधाम से आयोजन किया जाता है. इसके साथ हीं, शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त की भी शुरुआत हो जाती है. तो चलिए जानते हैं इस साल तुलसी विवाह कब है और इसका क्या महत्व है. कब है तुलसी विवाह? तुलसी विवाह हर साल हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के एक दिन बाद मनाई जाती है. लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, इस बार 23 नवंबर को एकादशी है और अगले दिन 24 नवंबर को द्वादशी तिथि है. द्वदशी तिथि पर घरों में तुलसी माता और शालिग्राम भगवान का विवाह रचाने का विधान है. कहते हैं, ऐसा करने से व्यक्ति जीवन में खूब तरक्की करते हैं और भाग्य में भी वृद्धि होती है. तुलसी विवाह की शुभ मुहूर्त तुलसी विवाह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर किया जाता है. पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि 23 नवंबर, गुरुवार की शाम 9 बजकर 01 मिनट से प्रारंभ होगी. वहीं इसका समापन 24 नवंबर, शुक्रवार की शाम 7 बजकर 06 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि को मानते हुए तुलसी विवाह 24 नवंबर को ही मनाया जाएगा. कहते हैं, इस शुभ संयोग में अपने घर तुलसी-शालिग्राम के विवाह रचाने से घर में अपार धन का आगमन होता है और वैवाहिक जीवन में भी खुशियां आती हैं. Tulsi Vivah katha तुलसी विवाह की पौराणिक कथा, जानें क्यों कराया जाता है प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह तुलसी विवाह पूजा विधि- व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करें और व्रत संकल्प लें।इसके बाद भगवान विष्णु की अराधना करें।अब भगवान विष्णु के सामने दीप-धूप जलाएं। फिर उन्हें फल, फूल और भोग अर्पित करें।मान्यता है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी जरुरी अर्पित करनी चाहिए। शाम को विष्णु जी की अराधना करते हुए विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। पूर्व संध्या को व्रती को सिर्फ सात्विक भोजन करना चाहिए। व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता।व्रत खोलने के बाद ब्राहम्णों को दान-दक्षिणा दें। तुलसी विवाह सामग्री लिस्ट पूजा में मूली, शकरकंद, सिंघाड़ा, आंवला, बेर, मूली, सीताफल, अमरुद और अन्य ऋतु फल चढाएं जाते हैं।   तुलसी पूजा में लगाएं ये चीजें देवउठनी एकादशी पर पूजा स्थल में गन्नों से मंडप सजाया जाता है। उसके नीचे भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान कर मंत्रों से भगवान विष्णु को जगाने के लिए पूजा की जाती है।तुलसी विवाह के दिन व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत करने से जन्म और जन्म के पूर्व के पापों से मुक्ति मिल जाती है। कार्तिक मास की एकादशी को तुलसी विवाह का त्यौहार बेहद शुभ माना जाता है। तुलसी को विष्णुप्रिया नाम से भी जाना जाता है। तुलसी विवाह का महत्व Tulsi Vivah 2023 सनातन धर्म में तुलसी विवाह का खास महत्व होता है. इस दिन तुलसी माता के साथ भगवान विष्णु के शालिग्राम अवतार की शादी रचाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से तुलसी-शालिग्राम के विवाह रचाने से जीवन में सकारात्मकता आती है. साथ ही विवाह में आ रही अड़चने भी दूर होती. कहते हैं जो व्यक्ति जीवन में एकबार भी तुलसी विवाह विधिपूर्वक कर लेता है तो उसे कन्यादान के बराबर फल मिल जाता है.

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Bhai Dooj 2023 Date: भाई दूज 2023 में कब? 14 या 15 नंवबर जानें भाई दूज ही सही डेट

Bhai Dooj 2023 Date: भाई दूज का पर्व भाई बहन के पवित्र रिश्ते है प्रतीक है. कार्तिक मास में मनाया जाने वाला ये पर्व दिवाली के दूसरे दिन आता है. आइये जानते हैं साल 2023 में किस दिन पड़ेगा भाई दूज. Bhai Dooj 2023 Date: भाई दूज का पर्व कार्तिक मास में दिवाली के बाद मनाया जाता है. कार्तिक मास में हिंदू धर्म में बहुत से त्योहार पड़ते हैं.करवाचौथ, धनतेरस, दिवाली, छठ पूजा आदि. इसी मास में भाई दूज का पर्व भी पड़ता है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की  द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है. साल 2023 में किस दिन मनाई जाएगा भाई दूज का पर्व आइये जानते हैं. भाई दूज भाई बहन का पवित्र त्योहार है. इस दिन बहने अपने भाईयों को टीका करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती है. साल 2023 में भाई दूज 15 नंवबर के दिन मनाया जाएगा. Diwali 2023 Date: इस साल कब है दिवाली, जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त भाई दूज की सही डेट (When is Bhai Dooj in 2023?) इस लिहाज से आप दोनों ही दिन भाई दूज का पर्व मना सकते हैं. 14 नंवबर को दोपहर के बाद से आप टीका कर सकते हैं. ये पर्व भाई- बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है. इस दिन भाई अपने बहन के पास जाकर टीका करवाते हैं. 15 नवंबर 2023 को क्यों मनाई जाएगी भाई दूज?हिंदू धर्म में कोई भी त्योहार उदया तिथि पर ही मनाया जाता है। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार भाई दूज का पर्व 15 नवंबर 2023 को मनाया जाएगा। इस दिन भाई को टीका करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक है। तिलक करने की विधिपौराणिक मान्यता है कि इस दिन यम अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे। ऐसे में भाईयों को अपनी बहन के ससुराल जाना चाहिए। वहीं कुंवारी लड़कियां घर पर ही भाई का तिलक करें। भाई दूज के दिन सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पूजा अवश्य करनी चाहिए। वहीं भाई का तिलक करने के लिए पहले थाली तैयार करें उसमें रोली, अक्षत और गोला रखें तत्पश्चात भाई का तिलक करें और गोला भाई को दें। फिर प्रेमपूर्वक भाई को मनपसंद का भोजन करवाएं। उसके बाद भाई अपनी बहन से आशीर्वाद लें और उन्हें भेंट स्वरूप कुछ उपहार जरूर दें। भाई दूज का महत्व हिंदू धर्म में भाई दूज के पर्व को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि ये पर्व भाइयों और बहनों के बीच के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। भाई दूज पर बहनें अपने भाई के माथे पर हल्दी और रोली का तिलक लगाती हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि भाई बहन यमुना नदी के किनारे बैठकर भोजन करते हैं तो जीवन में समृद्धि आती है। कैसे करें भाई दूज पर पूजा ? (Kaise Karen Bhai Dooj Par Pooja)भाई दूज पर बहने अपने भाईयों को टीका लगाती है. टीका लगाने के बाद भाई की आरती उतारती हैं. ऐसा माना जाता है कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर यमुना जी ने यमराज को अपने घर पर टीका किया और भोजन कराया था और इसी पूजा के बाद यमराज को सुख की प्राप्ति हुई. तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा चली आ रही है. इसीलिए इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है.

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Chandra Grahan 2023 date, time in India: भारत में कल कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें सूतक काल लगेगा या नहीं

Chandra Grahan 2023 on 28 October, date, time in India: साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28-29 अक्टूबर की मध्यरात्रि, शनिवार को लगने जा रहा है. यह चंद्र ग्रहण मेष राशि में लगेगा. साथ ही यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा और इसका असर देश दुनिया और मानव जीवन पर पड़ेगा. तो आइए जानते हैं कि साल 2023 के दूसरे चंद्र ग्रहण का सूतक मान्य होगा या नहीं. Chandra Grahan 2023 कब है: साल का पहला चंद्र ग्रहण लग चुका है. साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 और 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि को लगने जा रहा है. साथ ही इस दिन शरद पूर्णिमा भी है. ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण लगना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार लगने वाला चंद्र ग्रहण आंशिक होगा. यह ग्रहण मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में लगने जा रहा है. साल 2023 के आखिरी चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा और आखिर क्या इसका समय होगा. चलिए जानते हैं.  भारत में 28 अक्टूबर को कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2023 kitne baje lagega in India) ज्योतिष की मानें तो विश्व परिदृश्य में एक ही महीने में लगने वाले दो ग्रहण उत्पातकारी योग लेकर आए हुए है. इस महीने 28-29 अक्टूबर की रात में लगने वाला चंद्र ग्रहण पूरे भारतवर्ष में दृष्टिगोचर होगा. वैसे तो 28 अक्टूबर की रात 11.30 बजे से चांद पर हल्की छाया पड़ना शुरू हो जाएगी. इसे चंद्र ग्रहण का पेनब्रा स्टेज भी कहा जाता है. हालांकि, सूतक काल इसके हिसाब से नहीं बल्कि गहरी छाया पड़ने के 9 घंटे पहले ही माना जाता है. चंद्र ग्रहण के मुख्य चरण (अम्ब्रा स्टेज) या गहरी छाया पड़ने की बात की जाए तो ये 29 अक्टूबर की रात 1 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 24 मिनट पर खत्म होगा यानी ये एक घंटा 19 मिनट का होगा. ग्रहण का आरंभ मध्य रात्रि 1 बजकर 5 मिनट, मध्य 1 बजकर 44 मिनट और ग्रहण का मोक्ष 2 बजकर 40 मिनट पर होगा.  यह ग्रहण मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में लगने जा रहा है. ग्रहण जब भी लगता है तो इसका भौतिक, आध्यात्मिक और व्यक्तिगत जीव-जगत पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ता है.  चंद्र ग्रहण के सूतक काल की टाइमिंग (Chandra Grahan 2023 sutak timings) 28-29 अक्टूबर को खंडग्रास चंद्र ग्रहण चूंकि रात 1 बजकर 5 मिनट पर लग रहा है इसलिए इसका सूतक काल 9 घंटे पहले यानी 28 अक्टूबर की शाम 04 बजकर 05 मिनट से लग जाएगा.  कहां कहां दिखेगा ये चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2023 When and where to watch)   यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा देगा. इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका, उत्तर व पूर्व दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक महासागर, हिन्द महासागर, अंटार्कटिका में भी दिखेगा. साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कितने बजे से शुरू होगा: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में 28 अक्टूबर की रात 01 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगा और सुबह 02 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण 1 घंटे और 19 मिनट तक रहेगा चंद्र ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा: चंद्र ग्रहण को भारत के अलावा  पश्चिमी प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया, एशिया, यूरोप, अफ्रीका, पूर्वी दक्षिण अमेरिका, उत्तरपूर्वी उत्तरी अमेरिका, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर में भी देखा जा सकेगा। चंद्र ग्रहण कब लगता है: चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन ही होता है जब पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है। पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है, जिससे यह कुछ घंटों के लिए धुंधला हो जाता है और कभी-कभी लाल रंग का भी दिखाई देने लगता है।  चंद्र ग्रहण का सूतक काल कब से शुरू होगा: चंद्र ग्रहण का सूतक काल 09 घंटे पूर्व से प्रारंभ हो जाता है। इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल 28 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगा। किस समय चंद्र ग्रहण होगा अपने चरम पर: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण यानी परमग्रास चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर की देर रात 01:44 बजे अपने चरम पर होगा। भारत के किन शहरों में दिखेगा चंद्र ग्रहण: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरु, अहमदाबाद, कोलकाता और वाराणसी में दिखाई देगा।  

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सपने में कभी गाय देखी है,सपने में गाय दिखना माना जाता है बहुत शुभ

सपने में गाय देखना एक खास संकेत देता है. गाय दिखना बहुत शुभ माना जाता है. ये इस पर भी निर्भर करता है कि आपको सपने में किस तरह की गाय दिखाई देती है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार रात के समय गहरी नींद में आने वाले सपने हमें अपने भविष्य में होने वाले शुभ या अशुभ संकेतों के बारे में बताते हैं. कई बार हमें ऐसे सपने दिखाई देते हैं, जो उठने के बाद भी हमारे दिमाग में रह जाते हैं और कुछ जिन्हें हम पूरी तरह से भूल जाते हैं. ऐसे सपनों को जानने के लिए हम उत्सुक रहते हैं कि आखिर उस सपने के पीछे का अर्थ क्या है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार आने वाला हर सपना अपने साथ कोई ना कोई संकेत जरूर लेकर आता है. हर सपने का कोई ना कोई अर्थ जरूर निकलता है. अगर आप उस अर्थ को जान लें तो हो सकता है कि आने वाला समय आपके लिए शुभ हो जाए, इसलिए हर व्यक्ति को अपने आने वाले सपनों को नजरअंदाज करने के बजाय, उसके मतलब को समझने की कोशिश करनी चाहिए. यदि आपको सपने में गाय दिखाई देती है तो इस सपने का क्या अर्थ है? यदि सपने में व्यक्ति गाय को खुद की ओर आता देखता है तो इस स्वप्न को शुभ मानिए। इस सपने को देखने के बाद सुबह आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि भी आती है। मालूम हो कि ऐसी स्थिति में गाय देखना धन आगमन का भी संदेश होता है। Dream Interpretation अगर आपको सपने में सफेद गाय दिखाई देती है तो इसका मतलब है कि भविष्य में आपको कई तरह की खुशियां मिलने वाली हैं. आपके परिवार में कुछ अच्छी खबर सुनने को मिलने वाली है. सपने में सफेद गाय दिखना बेहद शुब संकेत माना जाता है. सपने में गाय का बछड़ा देखना भी बहुत अच्छा माना जाता है. यह सपना बताता है कि आने वाले दिनों में आपकी आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत होने वाली है. आप जिस भी काम में हाथ डालेंगे उसमें आपको सफलता मिलेगी. यह सपना बताता है कि आपके जीवन से परेशानियां जल्दी ही समाप्त होने वाली हैं. गाय का सपने में आना एक गंभीर अर्थ लिए हुए है. शास्त्रों के मुताबिक गाय को एक पवित्र पशु माना गया है. साथ ही इसे कामधेनु का रूप भी मानते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन से अमृत कलश के साथ 14 अन्य रत्नों की प्राप्ति हुई थी, जिनमें से एक कामधेनु गाय थी, इसलिए गाय को पशुधन भी कहा जाता है और हिंदू धर्म में इसे विशेष दर्जा दिया गया है.

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Dussehra 2024: दशहरा पर घर में रावण की अस्थियां लाना क्यों माना जाता है शुभ, जानिए इसके पीछे का कारण

आज दशहरे का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाता है। सनातन धर्म में यह दिन अधर्म पर धर्म की जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हर साल लोग रावण का पुतला जलाकर बुराई के प्रतीक को जलाते हैं, लेकिन साथ ही रावण एक महान विद्वान और विद्वान था। रावण के ज्ञान और विद्वता की प्रशंसा स्वयं भगवान श्री राम ने की थी। विजयादशमी की तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है और इस दिन शस्त्र पूजन का भी विधान है। इसके अलावा भी इस तिथि को लेकर कई मान्यताएं हैं, उनमें से एक है रावण के दहन के बाद बची राख को अपने घर ले जाना। यह बहुत ही शुभ माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि रावण की राख को घर ले जाना क्यों शुभ माना जाता है और कैसे शुरू हुई यह परंपरा। अधर्म और असत्य पर सत्य और सत्य की जीत के उपलक्ष्य में रावण का पुतला दहन किया जाता है। इस दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था और माता सीता को रावण से मुक्त कराया था। हर साल नवरात्रि से लेकर दशहरा तक देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण के अंत को याद करने के लिए रामलीला का मंचन किया जाता है और दशहरे पर रावण दहन का त्योहार मनाया जाता है, लेकिन दिल्ली से सटे नोएडा के एक गांव बिसरख में रामलीला का मंचन किया जाता है. न तो किया जाता है और न ही रावण दहन। इसके पीछे एक पौराणिक मान्यता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी यहां रामलीला का आयोजन होता है या रावण दहन किया जाता है तो यहां किसी की मृत्यु हो जाती है। इस वजह से रामलीला हमेशा अधूरी रहती है, इसलिए लोगों ने रामलीला और रावण दहन का आयोजन हमेशा के लिए बंद कर दिया। शिव पुराण में भी बिसरख गांव का उल्लेख है। पुराणों के अनुसार त्रेता युग में इसी गांव में ऋषि विश्रवा का जन्म हुआ था। उन्होंने इसी गांव में शिवलिंग की स्थापना की थी। रावण का जन्म ऋषि विश्वास के घर हुआ था। रावण ने इस गांव में भगवान शिव की तपस्या भी की थी और इससे प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें बुद्धिमान और पराक्रमी होने का वरदान दिया था। दानव जाति बच गई यहां रहने वाले लोगों का तर्क है कि रावण ने राक्षस जाति को बचाने के लिए माता सीता का हरण किया था। इसके अलावा रावण को कहीं भी बुरा नहीं कहा गया है। रावण ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से अपनी लंका भगवान शिव से छीन ली थी। इसलिए यह माना जाता है कि राख को लोगों के और हमारे जीवन से नकारात्मकता को दूर करके समृद्धि में वृद्धि के संकेत के रूप में लेना चाहिए। इस कथा से जुड़ी है रावण की अस्थियां घर लाने की परंपराप्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्री राम ने रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त कर ली थी, तब उनकी सेना रावण वध और लंका पर विजय प्राप्ति के प्रमाण स्वरूप लंका की राख अपने साथ ले आई थी। यही वजह है कि लोग आज भी लंका और रावण दहन के बाद अवशेषों को अपने घर ले जाते हैं। क्या कहती हैं मान्यताएंपौराणिक ग्रंथों में जानकारी मिलती है कि स्वर्ग के कोषाध्यक्ष कुबेर रावण के भाई थे, और उन्होंने ही स्वर्ण की लंका बनाई गई थी, जिसमें रावण निवास करता था। इसलिए माना जाता है कि रावण की अस्थियां व लंका अवशेषों को घर में लाने से धन-धान्य की कमी नहीं रहती है और धन कोषाध्यक्ष कुबेर के द्वारा बनाई गई लंका के अवशेष घर में रखने से स्वयं कुबेर वास करते हैं, जिससे घर में धन स्थाई रूप से टिका रहता है। नकारात्मक ऊर्जा रहती है दूररावण के ज्ञान की प्रशंसा स्वयं भगवान श्री राम ने भी की थी और यही वजह थी कि उन्होंने अपने छोटे भ्राता लक्ष्मण को मृत्यु शैय्या पर लेटे रावण से ज्ञान लेने को को कहा था। कहा जाता है कि आज तक को रावण जैसा महाज्ञानी, पराक्रमी नहीं है। इसलिए मान्यता है कि यदि घर में रावण की अस्थियां हो तो भय से मुक्ति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है।

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