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Ganesh Chaturthi 2024:श्रीगणेश का विग्रह ईशान कोण में स्थापित करें, स्‍थापना से पहले कर लें यह काम; बरसेगी बप्‍पा की कृपा

Ganesh Chaturthi 2024:श्री गणेश जी की प्रतिमा को ईशान कोण में स्थापित करने से वास्तु के अनुसार घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। Ganesh Chaturthi:बुद्धिऔर रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक सृष्टि के प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश का आह्वान ओम एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात, इस मंत्र से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। प्रथम पूज्य गणपति भगवान को सफेद रंग के फूल, वस्त्र, सफेद जनेऊ, सफेद चंदन आदि नहीं चढ़ाना चाहिए। केतकी का पुष्प जिस तरह भालेनाथ को नहीं चढ़ता, वैसे ही श्रीगणेश को भी नहीं चढ़ता। (Ganesh Chaturthi 2024)। बुद्धि और रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक सृष्टि के प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की चतुर्थी आसन्न है। अतएव, श्रीगणेश के विग्रह की स्थापना व पूजन-अर्चन से संबंधित मूलभूत जानकारियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। धार्मिक-विधान और वास्तुशास्त्र की दृष्टि से श्रीगणेश का विग्रह ईशान कोण में स्थपित किया जाना चाहिए। जिस चौकी पर बप्पा को विराजमान करना है, पहले उसे गंगाजल छिड़ककर शुद्ध अवश्य कर लेना चाहिए। Bhagwan Shri Ganesh:भगवान श्रीगणेश के मूलमंत्र के जाप से अविलंब दिव्य कृपा संस्कारधानी के धार्मिक विषयों के ज्ञाताओं ने बताया कि श्रीगणेश का आह्वान ओम एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात, इस मंत्र से किया जाना चाहिए। भगवान श्रीगणेश के इस मूलमंत्र के जाप से अविलंब दिव्य कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। Ganesh Chaturthi 2024:ईशान कोण में क्यों स्थापित करें? Ganesh Chaturthi 2024:स्थापना से पहले क्या करें? स्थापना के समय ध्यान रखने योग्य बातें Ganesh Chaturthi 2024:गणेश जी की पूजा Shri Ganesh Bhagwan:श्री गणेश की दाहिनी ओर माता गौरी का आह्वान करना चाहिए Ganesh Chaturthi 2024:ओम भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय गणपतये नमः, गणपतिमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च, इस मंत्र से आह्वान करते हुए हाथ के अक्षत को श्रीगणेश के विग्रह पर चढ़ा देना चाहिए। पुनः अक्षत लेकर श्री गणेश की दाहिनी ओर माता गौरी का आह्वान करना चाहिए। Ganesh Chaturthi 2024:तीन बार आचमन करते हुए माथे पर तिलक लगाएं Ganesh Chaturthi 2024:श्री गणेश भगवान की प्रतिमा की पूर्व दिशा में कलश-स्थापना करें। गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि को भी स्थापित करें और साथ में एक-एक सुपारी रखें। अपने ऊपर जल छिड़कते हुए ओम पुण्डरीकाक्षाय नमः मंत्र का जाप करें। भगवान गणेश को प्रणाम करें और तीन बार आचमन करते हुए माथे पर तिलक लगाएं। Ganesh Chaturthi Pujan Muhurat: गणेश चतुर्थी के दिन पूजन के लिए ये है शुभ मुहूर्त, जानें गणेश विसर्जन की Date दूर्वा अर्पण के साथ लड्डू और मोदक का भोग अवश्य लगाएं Ganesh Chaturthi 2024:श्रीगणेश की पूजा में लाल रंग के पुष्प, फल, और लाल चंदन का प्रयोग अवश्य करें। श्री गणेश भगवान की पूजा में दूर्वा, फूल, फल, दीपक, अगरबत्ती, चंदन और सिंदूर का भी प्रयोग करें। इसके साथ ही श्रीगणेश को अतिशय प्रिया लड्डू और मोदक का भोग लगाना कभी न भूलें। ककड़ा और केला के अलावा पंजीरी का भोग भी श्रीगणेश को पसंद है। इसका प्रसाद भक्तों में वितरित करने से वे प्रसन्न होते हैं। 10 दिवसीय पूजन में ओम गं गणपतये नम: मंत्र जपें श्रीगणेश चतुर्थी से अनंत चतुदर्शी तक 10 दिवसीय गणपति-पूजन में भगवान गणेश के मंत्र ओम गं गणपतये नमः का जाप करने से सुख, शांति, स्वास्थ्य व समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसी तरह वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विध्नं कुरूमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा और गजाननंत भूतगणदि सेविंतं कपित्थजम्बूफलचारूभक्षणम, उमासुतं शोक विनाशकारकम, नमामि विध्नेश्वर पाक पंकजम, मंत्र को नित उच्चारण करने से श्रीगणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जय गणेश-जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा, इस आरती का सस्वर पाठ करने से घर में खुशहाली आती है। Shri Ganesh:श्रीगणेश को ये वस्तुएं अर्पित न की जाएं प्रथम पूज्य गणपति भगवान को सफेद रंग के फूल, वस्त्र, सफेद जनेऊ, सफेद चंदन आदि नहीं चढ़ाना चाहिए। Ganesh Chaturthi 2024 श्री गणेश की पूजा में मुरझाए और सूखे फल का प्रयोग न हो। इसी तरह श्रीगणेश को टूटा हुआ खंडित चावल न चढ़ाकर सदैव अक्षत यानि साबुत चावल अर्पित करना चाहिए। भगवान श्रीगणेश को तुलसी भी अर्पित नहीं की जाती। केतकी का पुष्प जिस तरह भालेनाथ को नहीं चढ़ता, वैसे ही श्रीगणेश को भी नहीं चढ़ता। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Ganesh Stuti(गणेश स्तुति)

Ganesh Stuti गणेश स्तुति: किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले गणेश श्लोक का जाप करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और आपका जीवन स्वस्थ, समृद्ध और समृद्ध बनता है। उन्हें गणपति के नाम से भी जाना जाता है। गण का अर्थ है समूह। ब्रह्मांड परमाणुओं और विभिन्न ऊर्जाओं का एक समूह है। यदि इन विविध समूहों को नियंत्रित करने वाला कोई सर्वोच्च कानून नहीं होता तो यह ब्रह्मांड अराजकता में होता। इन सभी परमाणुओं और ऊर्जाओं के समूहों के स्वामी गणेश हैं। वे सर्वोच्च चेतना हैं जो सभी में व्याप्त हैं और इस ब्रह्मांड में व्यवस्था लाते हैं। भगवान गणेश का सिर आत्मा का प्रतीक है, जिसे मानवता की अंतिम वास्तविकता माना जाता है और उनका मानव शरीर माया का प्रतीक है, जो सांसारिक अस्तित्व का जाल है। शिव पुराण के अनुसार, शुभ और लाभ भगवान गणेश के दो पुत्र हैं। शुभ और लाभ क्रमशः शुभता और लाभ के अवतार हैं। शुभ देवी ऋद्धि के पुत्र थे और लाभ देवी सिद्धि के पुत्र थे। श्री गणेश की स्तुति की महिमा “नारदपुराण” में पाई जाती है। गणेश स्तुति का नियमित पाठ करने वाले साधकों को विद्या, धन प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जब जीवन में चारों ओर विपत्ति न हो, संकट न आए, गौरीपुत्र गजानन की पूजा से तुरंत प्रभाव मिलता है। भगवान गणेश की सात्विक साधनाएं बहुत सरल और प्रभावी हैं। इसमें अधिक विधान की आवश्यकता नहीं होती। मन में भावना रखने मात्र से ही गणेश अपने भक्त को हर संकट से उबार लेते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग दिखाते हैं। Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी : भगवान गणेश के मूषक की रोचक कथा Ganesh Stuti:गणेश स्तुति के लाभ:भगवान गणेश ज्ञान, सफलता और सिद्धि के देवता हैं। गणपति को आमंत्रित करने के लिए कई मंत्रों का जाप किया जा सकता है। इन मंत्रों को सिद्धि मंत्र भी कहा जाता है। ये गणेश मंत्र ऊर्जा और भगवान गणेश की शक्ति से भरपूर हैं। सच्ची श्रद्धा से गणेश मंत्र का जाप करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। यदि किसी व्यक्ति पर भारी कर्ज है, तो उस पर आर्थिक संकट आएंगे – दिन दुखद है। फिर गणेश जी की पूजा करने के बाद नियमित रूप से गणेश कुबेर मंत्र का जाप करने से व्यक्ति का कर्ज उतरना शुरू हो जाता है और धन के नए स्रोत प्राप्त होते हैं जिससे व्यक्ति का भाग्य चमकने लगता है।किसको करना चाहिए गणेश स्तुति का पाठ:जो लोग भारी कर्ज में डूबे हुए हैं और दिन-ब-दिन कर्जदार होते जा रहे हैं, उन्हें नियमित रूप से इस गणेश स्तुति का पाठ करना चाहिए। Ganesh Stuti:गणेश स्तुति: गणपति बप्पा मोरया! गणेश स्तुति Ganesh Stuti हिंदू धर्म में भगवान गणेश की स्तुति करने के लिए गाए जाने वाले मंत्र और भजन होते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है और माना जाता है कि वे किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले पूजित होने पर सफलता प्रदान करते हैं। Ganesh Stuti गणेश स्तुति के कुछ लोकप्रिय मंत्र और भजन: Ganesh Stuti गणेश स्तुति के लाभ कब करें गणेश स्तुति? आप किसी भी समय गणेश स्तुति कर सकते हैं। लेकिन विशेष रूप से सुबह के समय या पूजा के समय गणेश स्तुति करना अधिक फलदायी होता है। गणेश स्तुति कैसे करें? नियमित रूप से: नियमित रूप से गणेश स्तुति करने से अधिक लाभ मिलता है। मन एकाग्र करके: गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर मन एकाग्र करके स्तुति करें। भावना के साथ: स्तुति करते समय मन में भक्ति भाव रखें। Ganesh Stuti(गणेश स्तुति) गणेश स्तुति/Ganesh Stuti श्लोक ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम्। उमासुतम् शोक विनाश कारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्॥ स्तुति गाइये गनपति जगबंदन। संकर-सुवन भवानी नंदन ॥ 1 ॥ गाइये गनपति जगबंदन। सिद्धि-सदन, गज बदन, बिनायक। कृपा-सिंधु, सुंदर सब-लायक ॥ 2 ॥ गाइये गनपति जगबंदन। मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता। बिद्या-बारिधि, बुद्धि बिधाता ॥ 3 ॥ गाइये गनपति जगबंदन। मांगत तुलसिदास कर जोरे। बसहिं रामसिय मानस मोरे ॥ 4 ॥ गाइये गनपति जगबंदन।

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Sapne mein bhagwan:सपने मे भगवान से बात करना या भगवान को देखना का सही मतलब

Sapne mein bhagwan:सपने में भगवान को देखना या उनसे बात करना: क्या है इसका मतलब? Sapne mein bhagwan:सपने में भगवान को देखना या उनसे बात करना एक अद्भुत और गहरा अनुभव हो सकता है। यह अनुभव व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक विकास, मानसिक शांति और दिव्य मार्गदर्शन का संकेत हो सकता है।  Sapne mein bhagwan:भगवान देखने से पहले आपको यह समझना होगा कि सपनों से हमें संकेत मिलते हैं जो यह पता करने में मदद करते हैं कि आने वाले भविष्य में और चल रहे वर्तमान काल में हमारे साथ क्या शुभ या अशुभ होने वाला है सपने में भगवान को देखना या भगवान से बात करना बहुत ही उच्च कोटि का स्वपन माना जाता है तो यदि आप सपने में भगवान के दर्शन कर लेते हैं तो ऐसे में आपके साथ क्या अच्छा या क्या बुरा होने वाला है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने भगवान को किस तरह से की स्थिति में देखा है| Sapne mein bhagwan:सपने मे भगवान से बात करना या भगवान को देखना का सही मतलबसपने में भगवान को देखना भगवान से बात करना यह सपने में भगवान को अलग-अलग स्थिति में देखना आपको किस तरह से कैसा फल देता है और आने वाले भविष्य में इसका असर आपके जीवन पर क्या होने वाला है तो चलिए जानते हैं सपने में भगवान से बात करना या भगवान देखने का सही अर्थ क्या होता है| सपने में भगवान देखने का मतलब शुभ या अशुभ sapne mein bhagwan dekhna  सपने में भगवान देखना बहुत किस्मत वालों को नसीब होता है सपने में भगवान के दर्शन हो जाए तो इसका अर्थ होता है कि आपकी प्रार्थना इस समय भगवान स्वयं सुन रहे हैं तो ऐसे में आप जो भी मनोकामना मांगते हैं इन दिनों या आगे चलकर आने वाले दिनों में वह जल्दी पूर्ण हो जाएगी और आपको आपकी मेहनत के परिणाम शीघ्र मिलेंगे इस समय भगवान की छत्रछाया आप पर बनी हुई है तो ऐसे में आपका शुभ और मंगल ही होने वाला है तो ऐसे में आपको खुश होना चाहिए | Swapna Shastra: सपने में दिखे हाथी तो समझिए खुल गई आपकी किस्मत, मिलते हैं शुभ संकेत सपने में भगवान देखना यह भी आपको इशारा देता है कि आने वाले समय के अंदर जो भी घर परिवार या कार्यक्षेत्र में आपको परेशानियां आ रही है उनका निवारण होगा और आपके जीवन में ढेर सारी  सुख शांति और समृद्धि आने का योग बनेगा| सपने में भगवान से बात करते हुए देखना sapne me bhagwan se baat karna Sapne mein bhagwan:सपने में यदि आप अपने आप को भगवान से बात करते हुए देखते हैं तो यह भी बहुत शुभ स्वप्न होता है इसका अर्थ होता है कि आने वाले जीवन में आपको अपने कार्य क्षेत्र व्यापार धंधे और कैरियर में सफलता मिलेगी और इस समय भगवान का आशीर्वाद आप के ऊपर बना हुआ है तो ऐसे में आपकी कभी भी हानि नहीं होगी किसी भी क्षेत्र के अंदर और ऐसा जब होगा तो आपको धन प्राप्ति के योग बनेंगे आर्थिक समस्याएं दूर होगी और आपका आगे आने वाले जीवन में उद्धार होगा जिससे कि आपके परिवार का भी उद्धार होने वाला है| सपने में भगवान Sapne mein bhagwan से बात करना उन लोगों के लिए भी अच्छा साबित होता है जिन लोगों की शादी नहीं हुई उनकी शादी जल्दी होने के योग बनते हैं और जिन भाइयों या बहनों की नौकरी नहीं लग पा रही है उनको जल्दी ही जोड़ते ऑफर आने लग जाते हैं तो ऐसे में सपने में भगवान से बात करना एक बहुत ही उच्च कोटि का  सपना माना जाता है| सपने में भगवान गुस्से मे देखना sapne me bhagwan ko gusse me dekhna भगवान को गुस्से में देखते हैं तो इससे डरने की जरूरत नहीं है इसका अर्थ यह भी होता है कि आप इस समय किसी ना किसी मानसिक परेशानी में चल रहे हैं या कोई ऐसा कार्य कर रहे हैं जो कि आपको नहीं करना चाहिए तो इसमें आपको अपनी विवेक शक्ति से कार्य लेना होगा कि आपके लिए आपके जीवन के लिए आपके परिवार के लिए और आपके अपनों के लिए क्या सही है और क्या गलत है तो ही सोच समझकर आपको आगे विचार करना है और सही पथ पर भरने की कोशिश करनी है और यदि आपको किसी प्रकार की समस्या आ रही है तो अपने इष्ट की आराधना आज से ही करना शुरू कर दीजिए आपको निश्चित तौर पर कोई अच्छा रास्ता मिल जाएगा जिससे कि आपके जीवन में चल रही परेशानियों से आपको मुक्ति मिलेगी और थोड़ा कॉन्फिडेंस मिलेगा वे जीवन में  बढ़ने के लिए| सपने में भगवान उदास देखना sapne me bhagwan ko udas dekhna आपके कर्मों से उदास दिखाई दे रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप कुछ ऐसा कर रहे हैं जो कि आपको इस समय नहीं करना चाहिए या कोई ऐसा कार्य जैसे कि कोई काम आप कर रहे हैं जो कि आपका मन गवाही नहीं दे रहा है तो उस कार्य को करने से परहेज करें और यदि आप किसी प्रकार का कोई नशा करते हैं अपनों को दुख दे रहे हैं या अपनों को तंग कर रहे हैं तो ऐसा करने से बचें अन्यथा आपका नुकसान होगा तो यह आपको जगाने के लिए भगवान का संदेश है कि आप जाग जाइए और अपने दिमाग को सही जगह पर लगाएं और अपने कर्म पथ पर सही दिशा में चलने की कोशिश करें| Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Ganesh Chaturthi Date: इस साल गणेश चतुर्थी कब है? जानें आने वाले 5 सालों की तिथियां

Ganesh Chaturthi Date 2024: गणेश चतुर्थी के दिन भक्त पूरे विधि-विधान से गणेश पूजा करते हैं, जिसे षोडशोपचार गणपति पूजा भी कहा जाता है। जानें इस साल कब है गणेश चतुर्थी व आने वाले पांच सालों की गणेश उत्सव की तिथियां…. बप्पा के भक्तों के लिए खास होता है गणेश चतुर्थी भगवान गणेश हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय देवता हैं। भगवान गणेश को गणपति व विनायक आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान गणेश, भगवान शिव व माता पार्वती के पुत्र और भगवान कार्तिकेय के भाई हैं। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्म के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सौभाग्य, बुद्धि के देवता श्रीगणेश की विधिवत पूजा की जाती है। जानें इस साल कब है गणेश चतुर्थी व आने वाले पांच सालों की गणेशोत्सव की तिथियां… Ganesh Chaturthi Date 2024 में गणेश चतुर्थी कब है हिंदू धर्म के अनुसार, भाद्रपद मास के शु्क्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ था। इस साल 2024 में गणेश चतुर्थी 7 सितंबर, शनिवार को है। Ganesh Chaturthi Date 2025 में गणेश चतुर्थी कब है साल 2025 में गणेश चतुर्थी 27 अगस्त 2025, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीगणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय Ganesh Chaturthi Date 2026 में भगवान गणेश का जन्मोत्सव कब है साल 2026 में भगवान गणेश का जन्मोत्सव 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व 10 दिन के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। Ganesh Chaturthi Date 2027 में गणेश चतुर्थी कब है 2027 में गणेश चतुर्थी 04 सितंबर 2027, शनिवार को मनाई जाएगी। विघ्नहर्ता के भक्तों को इस पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता है। Ganesh Chaturthi Date 2028 में गणेश चतुर्थी कब है साल 2028 में गणेश चतुर्थी का पर्व 23 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। यह पर्व बप्पा के भक्तों के लिए बेहद खास होता है। Ganesh Chaturthi Date 2029 में गणेश चतुर्थी कब है 2029 में गणेश चतुर्थी 11 सितंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, गणेश चतुर्थी का दिन अगस्त या सितंबर महीने में आता है। Ganesh Chaturthi Date गणेश विसर्जन 2024 कब है गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिन के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। इस साल गणेश विसर्जन 17 सितंबर 2024, मंगलवार को है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्नमाध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Ganesh Chaturthi Pujan Muhurat: गणेश चतुर्थी के दिन पूजन के लिए ये है शुभ मुहूर्त, जानें गणेश विसर्जन की Date

Ganesh Chaturthi Puja Muhurat 2024: गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान श्रीगणेश को समर्पित है। यह पर्व गणपति बप्पा के जन्म उत्सव के रूप में जाना जाता है। जानें इस साल गणेश चतुर्थी कब है, क्या है पूजन मुहूर्त व गणेश विसर्जन कब है Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान गणेश को समर्पित है। इस साल 2024 में गणेश चतुर्थी 7 सितंबर को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का खास महत्व है। यह पर्व भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। इस बार गणेश महोत्सव (Ganesh Chaturthi 2024 Date) की शुरुआत 6 सितंबर दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर होगी। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्नों एवं बाधाओं का नाश होता है। साथ ही जीवन में शुभता का आगमन होता है। Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय  गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व को भक्त बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। यह ज्ञान, सौभाग्य और समृद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है। यह त्योहार (Ganesh Chaturthi 2024 Date) हर साल भाद्रपद माह में मनाया जाता है, जो दस दिनों तक चलता है। वहीं, इसका समापन गणेश मूर्ति विसर्जन के साथ होगा, तो इसकी शुरुआत से पहले संपूर्ण जानकारी जान लेते हैं। Ganesh Chaturthi 2024 Date and Pujan Muhurat: हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी पर्व का विशेष महत्व है। इस त्योहार को भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव के रूप में मनाते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन बुद्धि, समृद्धि व सौभाग्य के देवता भगवान श्रीगणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को श्रीगणेश जी का जन्म हुआ था। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार गणेश चतुर्थी आमतौर पर अगस्त या सितंबर महीने में आती है। Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी 2024 कब है: 2024 में गणेश चतुर्थी 07 सितंबर, शनिवार को है। Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी के दिन लोग बप्पा को अपने घर पर लाकर विराजित करते हैं। इस त्योहार की रौनक महाराष्ट्र में देखने लायक होती है। गणपति स्थापना व गणेश चतुर्थी पूजन मुहूर्त- मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के समय हुआ था, इसलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजन के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। मध्याह्न काल अंग्रेजी समय के अनुसार दोपहर के समान होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन मध्याह्न गणपति पूजा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 03 मिनट से दोपहर 01 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि 02 घंटे 31 मिनट है। Ganesh Chaturthi:पूजन का शुभ मुहूर्त गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की मूर्ति की स्थापना और पूजा का विशेष महत्व होता है। पूजन का शुभ मुहूर्त दिन के समय होता है। यह मुहूर्त पंचांग के अनुसार बदलता रहता है। चतुर्थी तिथि कब से कब तक रहेगी- द्रिक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 06 सितंबर 2024 को दोपहर 03 बजकर 01 मिनट से 07 सितंबर 2024 को शाम 05 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। गणेश विसर्जन 2024 कब है- गणेश उत्सव या गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलता है। यह अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। इस दिन को गणेश विसर्जन के नाम से भी जानते हैं। इस साल गणेश विसर्जन 17 सितंबर 2024, मंगलवार को है। अनंत चतुर्दशी के दिन भक्त धूमधाम से बप्पा की विदाई करते हैं। भगवान गणेश की प्रतिमा को तालाब, झील या नदी में विसर्जित करने की परंपरा है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी : भगवान गणेश के मूषक की रोचक कथा

Ganesh and mushak story in hindi: शास्त्रों और पुराणों में सिंह, मयूर और मूषक को गणेश जी का वाहन बताया गया है। गणेश पुराण के क्रीडाखण्ड (1) – में उल्लेख है कि सतयुग में गणेशजी का वाहन सिंह है। त्रेता युग में उनका वाहन मयूर है। द्वापर युग में उनका वाहन मूषक हैं और कलयुग में वे घोड़े पर आरूढ़ होंगे। आओ जानते हैं कि किस तरह गणेशजी का मूषक वाहन बना। Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर हम सभी भगवान गणेश की पूजा करते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है और उनकी सवारी मूषक यानी चूहा होती है। क्या आप जानते हैं कि गणेश जी और उनके मूषक के बीच का यह रिश्ता इतना खास क्यों है? आइए जानते हैं इस रोचक कथा के बारे में। Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय पहली कथा पूर्वजन्म में मूषक था एक गंधर्व : एक पौराणिक कथा के अनुसार राजा इंद्र के दरबार में क्रौंच नामक गंधर्व था। एक बार इंद्र किसी गंभीर विषय पर चर्चा कर रहे थे लेकिन क्रौंच किसी और ही मूड में था। वह अप्सराओं से हंसी ठिठोली कर रहा था। इंद्र का ध्यान उस पर गया तो नाराज इंद्र ने उसे चूहा बन जाने का शाप दे दिया। Ganesh ji पराशर ऋषि के आश्रम में मूषक रूप में लिया जन्म इंद्र के श्राप के चलते मूषक के रूप में वह सीधे पराशर ऋषि के आश्रम में आ गिरा। क्रौंच का चंचल स्वभाव तो बदलने से रहा। आते ही उसने भयंकर उत्पात मचा दिया, आश्रम के सारे मिट्टी के पात्र तोड़कर सारा अन्न समाप्त कर दिया। आश्रम की वाटिका उजाड़ डाली, ऋषियों के समस्त वल्कल वस्त्र और ग्रंथ कुतर दिए।  आश्रम की सभी उपयोगी वस्तुएं नष्ट हो जाने के कारण पराशर ऋषि बहुत दुखी हुए और अपने पूर्व जन्म के कर्मों को कोसने लगे कि किस अपकर्म के फलस्वरूप मेरे आश्रम की शांति भंग हो गई है। अब इस चूहे के आतंक से कैसे निजात मिले? तब पराशर ऋषि श्री गणेश की शरण में गए। गणेश जी ने पराशर जी को कहा कि मैं अभी इस मूषक को अपना वाहन बना लेता हूं।  Ganesh ji गणेशजी ने इस तरह किया मूषक को अपने वश में  Ganesh ji गणेश जी ने अपना तेजस्वी पाश फेंका, पाश उस मूषक का पीछा करता पाताल तक गया और उसका कंठ बांध लिया और उसे घसीट कर बाहर निकाल गजानन के सम्मुख उपस्थित कर दिया। पाश की पकड़ से मूर्छित मूषक जब आंख खुली तो भयभीत होकर उसने गणेश जी की आराधना शुरू कर दी और अपने प्राणों की भीख मांगने लगा। Ganesh ji गणेश जी मूषक की स्तुति से प्रसन्न तो हुए लेकिन उन्होंने कहा कि तूने ऋषियों को बहुत कष्ट दिया है। मैंने दुष्टों के नाश एवं साधु पुरुषों के कल्याण के लिए ही अवतार लिया है, लेकिन शरणागत की रक्षा भी मेरा परम धर्म है, इसलिए जो वरदान चाहो मांग लो। ऐसा सुनकर उस उत्पाती मूषक का अहंकार फिर से जाग उठा और वह बोला, ‘मुझे आपसे कुछ नहीं मांगना है, आप चाहें तो मुझसे वर की याचना कर सकते हैं। मूषक की गर्वभरी वाणी सुनकर गणेश जी मन ही मन मुस्कराए और कहा, ‘यदि तेरा वचन सत्य है तो तू मेरा वाहन बन जा। मूषक के तथास्तु कहते ही गणेश जी तुरंत उस पर आरूढ़ हो गए।  भारी भरकम गजानन के भार से दबकर मूषक को प्राणों का संकट बन आया। तब उसने गणेशजी से प्रार्थना की कि वे अपना भार उसके वहन करने योग्य बना लें। इस तरह मूषक का गर्व चूरकर गणेश जी ने उसे अपना वाहन बना लिया। Ganesh ji दूसरी कथा Ganesh ji गजमुखासुर नामक दैत्य ने अपने बाहुबल से देवताओं को बहुत परेशान कर दिया। सभी देवता एकत्रित होकर भगवान गणेश के पास पहुंचे। तब भगवान श्रीगणेश ने उन्हें गजमुखासुर से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिलाया। तब श्रीगणेश का गजमुखासुर दैत्य से भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में श्रीगणेश का एक दांत टूट गया। तब क्रोधित होकर श्रीगणेश ने टूटे दांत से गजमुखासुर पर ऐसा प्रहार किया कि वह घबराकर चूहा बनकर भागा लेकिन गणेशजी ने उसे पकड़ लिया। मृत्यु के भय से वह क्षमायाचना करने लगा। तब श्रीगणेश ने मूषक रूप में ही उसे अपना वाहन बना लिया। मूषक का महत्व Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय

Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान गणेश को समर्पित है। इस साल 2024 में गणेश चतुर्थी 7 सितंबर को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का खास महत्व है। यह पर्व भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। इस बार गणेश महोत्सव (Ganesh Chaturthi 2024 Date) की शुरुआत 6 सितंबर दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर होगी। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्नों एवं बाधाओं का नाश होता है। साथ ही जीवन में शुभता का आगमन होता है।  गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व को भक्त बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। यह ज्ञान, सौभाग्य और समृद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है। यह त्योहार (Ganesh Chaturthi 2024 Date) हर साल भाद्रपद माह में मनाया जाता है, जो दस दिनों तक चलता है। वहीं, इसका समापन गणेश मूर्ति विसर्जन के साथ होगा, तो इसकी शुरुआत से पहले संपूर्ण जानकारी जान लेते हैं। कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? (Ganesh Sthapana Subh Muhurat 2024) Ganesh Chaturthi:वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि को देखते हुए गणेश चतुर्थी का शुभारंभ 7 सितंबर दिन शनिवार को होगा और इसी दिन गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना और व्रत की शुरुआत होगी। इसके साथ ही 7 सिंतबर को गणेश चतुर्थी की पूजा (Ganesh Puja Muhurat 2024) सुबह 11 बजकर 03 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 34 मिनट के बीच होगी। गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त Ganesh Chaturthi:गणेश पूजा विधि गणेश पूजा की विधि काफी विस्तृत है। इसमें षोडशोपचार पूजा, आरती, भोग आदि शामिल हैं। पूजा के दौरान गणेश मंत्रों का जाप किया जाता है। Ganesh Chaturthi:गणेश विसर्जन Ganesh Chaturthi:गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इस साल विसर्जन की तारीख 17 सितंबर है। विसर्जन के समय भक्त गणेश जी से विदा लेते हुए भावुक हो जाते हैं। गणेश महोत्सव का महत्व गणेश चतुर्थी का महत्व भारतीय संस्कृति में बहुत अधिक है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्त गणेश जी से बुद्धि, विवेक और समृद्धि की कामना करते हैं। अन्य महत्वपूर्ण जानकारी: कब होगा गणेश चतुर्थी का समापन? Ganesh Chaturthi:पंचांग को देखते हुए गणेश चतुर्थी का समापन 17 सितंबर, 2024 दिन मंगलवार को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। वहीं, इसी दिन गणेश जी का विसर्जन किया जाएगा। ऐसा मान्यता है कि जो लोग इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें भगवान गणेश का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही उनके परिवार में खुशहाली आती है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्नमाध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Ganesh Chalisa:श्री गणेश चालीसा

Ganesh Chalisa श्री गणेश चालीसा: भगवान गणेश की भक्ति में डूब जाइए Ganesh Chalisa श्री गणेश चालीसा हिंदू धर्म में भगवान गणेश की स्तुति में गाया जाने वाला एक बहुत ही लोकप्रिय स्तोत्र है। यह चालीसा भगवान गणेश के विभिन्न रूपों और उनके गुणों का वर्णन करता है। Ganesh Chalisa भक्त गणेश चालीसा का पाठ करते हुए भगवान गणेश से आशीर्वाद और कृपा प्राप्त करते हैं। Ganesh Chalisa गणेश चालीसा का महत्व Ganesh Chalisaगणेश चालीसा का पाठ कैसे करें Ganesh Chalisa जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥ जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥ जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥ वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥ राजित मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥ पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥ सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥ धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विधाता॥ ऋद्धि सिद्धि तव चँवर डुलावे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥ कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगल कारी॥ एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥ भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा। अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥ अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥ मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥ गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥ अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥ बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥ सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥ शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं। सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥ लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आए शनि राजा॥ निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥ गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥ कहन लगे शनि मन सकुचाई। का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥ नहिं विश्वास उमा कर भयऊ। शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥ पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥ गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी। सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥ हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥ तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए। काटि चक्र सो गज शिर लाए॥ बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥ नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥ बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥ चले षडानन भरमि भुलाई। रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥ चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥ धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥ तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहस मुख सकै न गाई॥ मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी॥ भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥ अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥ Ganesh Chalisa दोहा श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान। नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत सन्मान॥ सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश। पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

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Sankashti Chaturthi List: 2024 संकष्टी चतुर्थी: भगवान POWER FULL गणेश का आशीर्वाद और मोक्ष प्राप्ति का पर्व

Sankashti Chaturthi 2024 List: संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी हर महीने में दो बार आती है, जिसे लोग बहुत श्रद्धा से मनाते हैं. संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर लोग भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है. संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi URL) भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदू त्योहार है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस दिन, भक्त भगवान गणेश की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी मनाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं. संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदू त्योहार है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस दिन, भक्त भगवान गणेश की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी मनाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं. संकष्टी चतुर्थी, हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार, भगवान गणेश को समर्पित है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। भगवान गणेश, बुद्धि, बल और विवेक के देवता, अपने भक्तों की सभी परेशानियों और विघ्नों को दूर करते हैं, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता और संकटमोचन भी कहा जाता है। संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है “संकट को हरने वाली चतुर्थी“। इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर अपने दुखों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। पुराणों के अनुसार, चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2024 में संकष्टी चतुर्थी: संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि: संकष्टी चतुर्थी का महत्व: इस दिन गणपति जी की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से बुद्धि, विवेक और ज्ञान प्राप्त होता है। Sankashti Chaturthi कब है संकष्टी चतुर्थी ? संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी हर महीने में दो बार आती है, जिसे लोग बहुत श्रद्धा से मनाते हैं. संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर लोग भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है. पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, वहीं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना करने के लिए विशेष दिन माना गया है. शास्त्रों के अनुसार माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी बहुत शुभ होती है. यह दिन भारत के उत्तरी और दक्षिणी राज्यों में ज्यादा धूम-धाम से मनाया जाता है. धर्म की खबरें Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी के अलग-अलग नाम भगवान गणेश को समर्पित इस त्योहार में श्रद्धालु अपने जीवन की कठिनाईओं और बुरे समय से मुक्ति पाने के लिए उनकी पूजा-अर्चना और उपवास करते हैं. संकष्टी चतुर्थी को कई अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. कई जगहों पर इसे संकट हारा कहते हैं तो कहीं-कहीं सकट चौथ के नाम से जाना जाता है. यदि किसी महीने में यह पर्व मंगलवार के दिन पड़ता है तो इसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है. अंगारकी चतुर्थी 6 महीनों में एक बार आती है और इस दिन व्रत करने से जातक को पूरे संकष्टी का लाभ मिल जाता है. दक्षिण भारत में लोग इस दिन को बहुत उत्साह और उल्लास से मनाते हैं. गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या न करें Sankashti Chaturthi:2024 में संकष्टी चतुर्थी कब कब है? 29 जनवरी 2024 दिन सोमवार को संकष्टी चतुर्थी 28 फरवरी 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी 28 मार्च 2024 दिन गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी 27 अप्रैल 2024 दिन शनिवार को संकष्टी चतुर्थी 26 मई 2024 दिन रविवार को संकष्टी चतुर्थी 25 जून 2024 दिन मंगलवार को अंगारकी चतुर्थी 24 जुलाई 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी 22 अगस्त 2024 दिन गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी 21 सितंबर 2024 दिन शनिवार को संकष्टी चतुर्थी 20 अक्टूबर 2024 दिन रविवार को संकष्टी चतुर्थी 18 नवंबर 2024 दिन सोमवार को संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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December 2023:Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी जानिए कब है ?

संकष्टी गणेश चतुर्थी आपको बता दें कि संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) का काफी मान है। भगवान गणेश की पूजा इस दिन करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है। तो वहीं महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में इस दिन मांएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत भी करती हैं और शाम को गणेश जी की पूजा करने और चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। इस दिन कुछ खास मंत्रों से गणपति की पूजा होती है। वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ निर्विघ्नम कुरू मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा।। ‘ॐ गं गणपतये नम:। … ‘ॐ नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा। … ‘ॐ वक्रतुंडा हुं। … ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा। … सिद्ध लक्ष्मी मनोरहप्रियाय नमः। संकष्टी चतुर्थी 2023: पूजा अनुष्ठान1. सुबह जल्दी उठें और घर पर पवित्र स्नान करें।2. अपने घर विशेषकर पूजा कक्ष को साफ करें।3. भगवान गणेश की मूर्ति रखें और उन्हें पीले गेंदे के फूल की माला से सजाएं।4. एक दीया जलाएं और उन्हें बूंदी के लड्डू या मोदक और दुर्वा घास अर्पित करें।5. पूजा करें, कथा पढ़ें और आरती करें। Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी 2023: महत्व हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी Sankashti Chaturthi का अपना महत्व है क्योंकि यह भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। लोग व्रत रखते हैं और पूरी आस्था और भक्ति के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान गणेश को भक्तों के जीवन से बाधाओं को दूर करने के लिए जाना जाता है क्योंकि उन्हें विघ्न हर्ता के रूप में जाना जाता है, जो जीवन से समस्याओं को दूर करते हैं। गणपति जी की पूजा के बिना कोई भी पूजा अनुष्ठान से लेकर शादी-सगाई के आयोजन तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

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Ganesh bhagwan:भगवान गणेश को दूर्वा क्यों अर्पित की जाती है?

Ganesh bhagwan भगवान गणेश को दूर्वा क्यों अर्पित की जाती है, इसके पीछे कई कथाएँ हैं। एक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक राक्षस था जिसका नाम अनलासुर था। वह बहुत शक्तिशाली था और उसने देवताओं और ऋषियों को बहुत परेशान किया था। देवताओं ने भगवान शिव से मदद मांगी। भगवान शिव ने कहा कि अनलासुर का वध केवल भगवान गणेश के द्वारा ही किया जा सकता है। गणेश जी की व्रत कथा |  Ganesh Chaturthi Vrat Katha In Hindi भगवान (Gansh)गणेश ने अनलासुर से युद्ध किया और उसे मार डाला। युद्ध के बाद, भगवान गणेश के पेट में बहुत जलन होने लगी। कश्यप ऋषि ने भगवान गणेश को दूर्वा खाने के लिए दी। दूर्वा खाने से भगवान गणेश के पेट की जलन दूर हो गई। तब से ही भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित की जाने लगी। एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश ने एक राक्षस का वध किया। उस राक्षस के शरीर से निकला विष भगवान गणेश के पेट में चला गया। विष के कारण भगवान गणेश के पेट में बहुत जलन होने लगी। देवताओं ने भगवान शिव से मदद मांगी। भगवान शिव ने कहा कि भगवान गणेश को दूर्वा खाने के लिए दी जाए। दूर्वा खाने से भगवान गणेश के पेट की जलन दूर हो गई। तब से ही भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित की जाने लगी। भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने के पीछे एक अन्य मान्यता भी है। मान्यता है कि दूर्वा एक पवित्र घास है जो भगवान गणेश को बहुत प्रिय है। दूर्वा को अमृता, अनंता और महौषधि भी कहा जाता है। दूर्वा अर्पित करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करते हैं।

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2023 गणेश उत्सव के दस दिनों में लगाएं इन 10 चीजों का भोग, बप्पा पूरी करेंगे आपकी हर मनोकामना

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन सुख-समृद्धि के देवता भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हर साल गणेश उत्सव मनाया जाता है। यह पर्व पूरे दस दिनों तक चलता है। गणेश उत्सव का यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तिथि के दिन तक चलता है। इस साल गणेश उत्सव की शुरुआत 19 सितंबर को हो रही है। वहीं इसका समापन 28 सितंबर 2023 को अनंत चतुर्थी वाले दिन होगा। गणेश उत्सव के इन 10 दिनों में गणपति बप्पा को 10 अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इन दिनों भगवान गणेश को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाने से गणपति बप्पा अति प्रसन्न होते हैं। आइए जानते हैं गणेश उत्सव के दौरान बप्पा को कौन से भोग लगाने चाहिए….. गणेश चतुर्थी पर इस मुहूर्त में घर लाएं गणपति, जानिए गणपति स्थापना और पूजा विधि गणेश उत्सव पर गणपति बप्पा को  अर्पित करने योग्य चीजें पहला दिन उन्हें मोदक बहुत प्रिय है, इसलिए गणेश उत्सव के पहले दिन मोदक चढ़ाने से भी उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होती है। दूसरा दिन  गणेश जी को मोतीचूर के लड्डू भी बहुत प्रिय हैं. ऐसे में गणेश उत्सव के दूसरे दिन भगवान गणेश को मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाना सर्वोत्तम होता है। तीसरा दिन  विघ्नहर्ता गणेश को बेसन के लड्डू भी पसंद हैं. इसलिए गणेश उत्सव के तीसरे दिन लड्डुओं का भोग लगाने की सलाह दी जाती है। दिन 4  भगवान गणेश को केले का भोग लगाना सर्वोत्तम प्रसादों में से एक है। इसलिए गणेश उत्सव के चौथे दिन प्रसाद में केले का फल जरूर शामिल करें। दिन 5  धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी को मखाने की खीर भी बहुत पसंद है. इसलिए पांचवें दिन बप्पा को प्रसाद के रूप में मखाना खीर का भोग अवश्य लगाएं। दिन 6  हिंदू धर्म में, नारियल का उपयोग अक्सर पूजा के दौरान किया जाता है और अधिकांश पूजा थालियों, यज्ञ, हवन आदि पर देखा जाता है। नारियल को प्रसाद के रूप में भी वितरित और खाया जाता है। ऐसे में छठे दिन बप्पा को नारियल का भोग लगा सकते हैं. दिन 7  पूजा के दौरान गुड़ का भोग लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है. यह एक पारंपरिक प्रसाद है जो भगवान गणेश को बहुत प्रिय है। इसलिए सातवें दिन बप्पा को घी और गुड़ का भोग लगाना अच्छा विचार है। दिन 8 ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश को मोदक और लड्डू बहुत पसंद हैं. इसलिए आठवें दिन मोतीचूर और बेसन का भोग लगाने के अलावा आप मावा के लड्डू का भी भोग लगा सकते हैं. दिन 9 दूध से बनी कलाकंद और खोपरपाक जैसी स्वादिष्ट मिठाइयाँ भी गौरी पुत्र गणेश को बहुत प्रिय हैं। ऐसे में नौवें दिन भगवान गणेश को दूध और घी से बनी मिठाई का भोग लगाना बहुत शुभ होता है। दिन 10 – हिंदू धर्म में 56 भोग का बहुत महत्व है. ऐसे में गणेशोत्सव के दसवें यानी आखिरी दिन बप्पा को 56 भोग लगाना चाहिए।

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