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Margashirsha Vinayak Chaturthi:मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी

Vinayak Chaturthi:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। Vinayak Chaturthi 2024 : दिसंबर महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाएगा। इस दिन संध्या में व्रती चंद्रमा को अर्घ्य देंगी और भगवान गणेश और चन्द्र देव की पूजा करेंगी। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Vinayak Chaturthi:विनायक चतुर्थी कब है? पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि दिसम्बर 04 को प्रारम्भ होगी दोपहर 1:10 मिनट पर। तिथि का समापन 5 दिसम्बर को दोपहर 12:49 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 5 दिसम्बर को विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। Vinayak Chaturthi:विनायक चतुर्थी पूजा विधि कैसे करें:मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि की पूजा दोपहर के समय करनी चाहिए। क्योंकि शाम के समय चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से झूठा कलंक लगता है। मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने विनायक चतुर्थी की रात को चंद्रमा देखा था, जिसके बाद उन्हें स्यामंतक मणि चोरी करने के लिए झूठा कलंक लगाया गया था। इस दिन प्रात:काल स्नान कर व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर पूजा प्रारंभ करें। भगवान गणेश को पीले फूलों की माला अर्पित करने के बाद धूप-दीप, नैवेद्य, अक्षत और उनकी प्यारी दूर्वा घास अर्पित करें। इसके बाद मिठाई या मोदक का भोग लगाएं। अंत में व्रत कथा पढ़कर गणेश जी की आरती करें। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को सिंदूर बहुत प्रिय होता है इसलिए Vinayak Chaturthi विनायक चतुर्थी के दिन पूजा के समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक लगाएं। सिंदूर चढ़ाते समय निम्न मंत्र का जाप करें-सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् ।शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ॥ Vinayak Chaturthi:पूजा-विधि 1- भगवान गणेश जी का जलाभिषेक करें 2- गणेश भगवान को पुष्प, फल चढ़ाएं और पीला चंदन लगाएं 3- मोदक का भोग लगाएं 4- मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी व्रत की कथा का पाठ करें 5- ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें 6- पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की आरती करें 7- चंद्रमा के दर्शन करें और अर्घ्य दें 8- व्रत का पारण करें 9- क्षमा प्रार्थना करें मंत्र– ॐ गणेशाय नमः Vinayak Chaturthi:गणेश जी की आरती जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी। कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Sankashti Chaturthi Vrat 2024 Dates : साल 2024 में कब-कब है संकष्टी चतुर्थी व्रत, नोट कर लें

Sankashti Chaturthi Vrat 2024 List:संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। ‘संकष्टी’ का अर्थ है संकट से मुक्ति और ‘चतुर्थी’ का अर्थ है चंद्रमा के चौथे दिन। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं और उनसे अपने जीवन की सभी समस्याओं का समाधान मांगते हैं। हिंदू धर्म में हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन गणेशजी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। Sankashti Chaturthi Vrat 2024 date :हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। यह विशेष दिन गणेशजी की पूजा-आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखना और गणेशजी की विधिवत पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। जीवन के सभी विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती हैं और घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2024 में संकष्टी चतुर्थी व्रत की सही डेट और मुहूर्त… जनवरी 2024 में संकष्टी चतुर्थी Sankashti Chaturthi 29 जनवरी 2024 (सोमवार)- लंबोदर संकष्टी चतुर्थी Sankashti Chaturthi:शुभ मुहूर्त : साल 2024 में जनवरी माह में सकंष्टी चतुर्थी तिथि का आरंभ 29 जनवरी को सुबह 6 बजकर 11 मिनट पर होगा और 30 जनवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगा। फरवरी 2024 में संकष्टी चतुर्थी  28 फरवरी 2024 (बुधवार)- द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त :2024 में फरवरी महीने में 28 फरवरी को सुबह 1 बजकर 53 मिनट पर संकष्टी चत्तुर्थी शुरू होगी और 29 फरवरी को सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगा। मार्च 2024 में संकष्टी चतुर्थी  29 मार्च 2024 (शुक्रवार)- भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी  Sankashti Chaturthi:शुभ मुहूर्त :साल 2024 में चैत्र यानी मार्च महीने में 28 मार्च को शाम 6 बजकर 57 मिनट पर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा और 29 मार्च को सुबह 8 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगा। उदयातिथि के अनुसार, 29 मार्च को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। Guru Purnima 2024:गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या न करें अप्रैल 2024 में संकष्टी चतुर्थी  27 अप्रैल 2024 (शनिवार)- विकट संकष्टी चतुर्थी  शुभ मुहूर्त :अप्रैल 2024 में संकष्टी चतुर्थी की शुरुआत 27 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 18 मिनट पर होगी और 28 अप्रैल को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। मई 2024 में संकष्टी चतुर्थी 26 मई 2024 (रविवार)- एकदंत संकष्टी चतुर्थी  शुभ मुहूर्त :साल 2024 में मई महीने में संकष्टी चतुर्थी की शुरुआत 26 मई को सुबह 6 बजकर 6 मिनट पर होगी और 27 मई को सुबह 4 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। जून 2024 में संकष्टी चतुर्थी 25 जून 2024 (मंगलवार)- कृष्णापिंगला संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त :आषाढ़ माह की संकष्टी चतुर्थी 25 जून को सुबह 1 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगी और  25 जून को ही 11 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। जुलाई 2024 में संकष्टी चतुर्थी  24 जुलाई 2024( बुधवार) -गजानन संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त :साल 2024 में जुलाई महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 24 जुलाई को सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर होगा और 25 जुलाई को सुबह 4 बजकर 39 मिनट पर खत्म होगा। अगस्त 2024 में संकष्टी चतुर्थी 22 अगस्त 2024 ( गुरुवार)- हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त :अगस्त माह के संकष्टी चतुर्थी 22 अगस्त को सुबह 1 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और  23 अगस्त को सुबह 10 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। सितंबर 2024 में संकष्टी चतुर्थी  21 सितंबर 2024 (शनिवार)- विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त : सितंबर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 20 सितंबर को शाम 9 बजकर 15 मिनट पर शुरू होगी और 21 सितंबर को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। अक्टूबर 2024 में संकष्टी चतुर्थी  20 अक्टूबर 2024 (रविवार)- वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त :साल 2024 में अक्टूबर महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 20 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 46 मिनट पर होगा और 21 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 17 मिनट पर खत्म होगा। नवंबर 2024 में संकष्टी चतुर्थी 19 नवंबर 2024 (मंगलवार)- गणाधिप संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त : नवंबर महीने में कृष्ण संकष्टी चतुर्थी की शुरुआत 18 नवंबर को शाम 6 बजकर 56 मिनट पर होगी और 19 नवंबर को शाम 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। दिसंबर 2024 में संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर 2024 (बुधवार)- अखुरठा संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त : साल 2024 के आखिरी महीने दिसंबर में संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और 19 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 3 मिनट पर समाप्त होगी। संकष्टी चतुर्थी का महत्व Sankashti Chaturthi:संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी कई कथाएं हैं। इन कथाओं में भगवान गणेश की लीलाओं का वर्णन किया गया है। इन कथाओं को सुनने से मन शांत होता है और भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा बढ़ती है। Sankashti Chaturthi2024 puja vidhi:संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर शुद्ध किया जाता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और उन्हें विभिन्न प्रकार के भोग लगाए जाते हैं। पूजा के दौरान गणेश चालीसा, गणेश स्तोत्र आदि का पाठ किया जाता है। Sankashti Chaturthi 2024 date:संकष्टी चतुर्थी व्रत नियम Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि  KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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गजाननं भूत गणादि सेवितं – गणेश मंत्र (Gajananam Bhoota Ganadhi Sevitam)

गजाननं भूत गणादि सेवितं – गणेश मंत्र का अर्थ और महत्व “गजाननं भूत गणादि सेवितं” यह गणेश स्तोत्र का एक बहुत ही प्रसिद्ध और शक्तिशाली श्लोक है। इस श्लोक में भगवान गणेश के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन किया गया है। आइए इस श्लोक का अर्थ और महत्व समझते हैं: श्लोक का अर्थ अर्थात: इस श्लोक में भगवान गणेश को हाथी के समान मुख वाले, भूत-गणों के सेवित, कपित्थ और जामुन के फल खाने वाले, उमा के पुत्र और सभी दुःखों को दूर करने वाले के रूप में वर्णित किया गया है। श्लोक का महत्व यह श्लोक गणेश जी के भव्य और दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। यह श्लोक हमें भगवान गणेश की शक्ति और कृपा के प्रति विश्वास दिलाता है। इस श्लोक का जाप करने से मन शांत होता है और सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं। श्लोक का उपयोग गजाननं भूत गणादि सेवितं – गणेश मंत्र (Gajananam Bhoota Ganadhi Sevitam) गजाननं भूत गणादि सेवितं,कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।उमासुतं शोक विनाशकारकम्,नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ॥ मंत्र का मूल रूप:गजाननं भूतगणाधिसेवितं,कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् ।उमासुतं शोकविनाशकारकम्न,मामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥

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गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra)

Ganesha Shubh Labh Mantra:गणेश शुभ लाभ मंत्र: धन और समृद्धि के लिए Ganesha Shubh Labh Mantra:गणेश जी को सभी कार्यों का आरंभ करने वाले देवता माना जाता है। व्यापार, उद्योग और धन से जुड़े मामलों में उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए कई मंत्र हैं। इन मंत्रों का जाप करने से धन लाभ, व्यापार में वृद्धि और समृद्धि प्राप्त होती है। कुछ प्रमुख गणेश शुभ लाभ मंत्र: Ganesha Shubh Labh Mantra:मंत्र जाप करने की विधि वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok) ध्यान रखें: अन्य उपाय: विशेष नोट: गणेश शुभ लाभ समृद्धि के लिए प्रार्थना है जो भगवान गणेश के बीज यानी बीज मंत्र पर आधारित है। गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) ॐ श्रीम गम सौभाग्य गणपतयेवर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः ॥ हिन्दी रूपांतरण:गम – भगवान गणेश के लिए बीज यानी बीज मंत्रसौभाग्य -सौभाग्यगणपतये – विघ्नहर्तावर्वर्द -ढेर सारी शुभकामनाएं और शुभकामनाएंसर्वजन्म में – हमारे वर्तमान और भविष्य के जीवन-काल के लिएवषमान्य – जो हमें स्वास्थ्य और खुशी के लंबे जीवन के साथ रक्षा करता हैनमः – नमन

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श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam – Mudakaratta Modakam)

Shri Ganesha Pancharatnam:श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं Shri Ganesha Pancharatnam:आपने बहुत ही सुंदर स्तोत्र का नाम लिया है! श्री गणेशपञ्चरत्नम्, विशेषकर ‘मुदाकरात्तमोदकं’ से शुरू होने वाला स्तोत्र, भगवान गणेश की अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली स्तुति है। Shri Ganesha Pancharatnam:स्तोत्र का अर्थ और महत्व श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं (Shri Ganesha Pancharatnam – Mudakaratta Modakam) श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र!मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् ।कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् ।अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् ।नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥ नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् ।नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् ।महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥ समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् ।दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् ।मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ 3 ॥ अकिञ्चनार्ति मार्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनम् ।पुरारि पूर्व नन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् ।प्रपञ्च नाश भीषणं धनञ्जयादि भूषणम् ।कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम् ॥ 4 ॥ नितान्त कान्ति दन्त कान्ति मन्त कान्ति कात्मजम् ।अचिन्त्य रूपमन्त हीन मन्तराय कृन्तनम् ।हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनाम् ।तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥ 5 ॥ महागणेश पञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहं ।प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् ।समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सोऽचिरात् ॥ 6 ॥श्रीमत् शंकर भगित्पादकृत श्रीगणेशपञ्चरत्न स्तोत्रम् संपूणकम्। मूल रूप: श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र! मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकंकलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् ।अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकंनताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥१॥ नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरंनमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् ।सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरंमहेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥२॥ समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरंदरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् ।कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करंमनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥३॥ अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनंपुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् ।प्रपञ्चनाशभीषणं धनंजयादिभूषणम्कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् ॥४॥ नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजंअचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तरायकृन्तनम् ।हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनांतमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥५॥ महागणेशपञ्चरत्नमादरेण योऽन्वहंप्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् ।अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतांसमाहितायुरष्टभूतिमभ्युपैति सोऽचिरात् ॥६॥ वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok) Shri Ganesha Pancharatnam:हिंदी रूपांतरणमैं मुक्ति के दाता-प्रदाता श्री गणेश भगवान को बहुत ही विनम्रता के साथ अपने हाथों से मोदक प्रदान (समर्पित) करता हूँ। जिनके सिर पर चंद्रमा एक मुकुट के समान विराजमान है, जो राजाधिराज हैं और जिन्होंने गजासुर नामक दानव हाथी का वध किया था, जो सभी के पापों का आसानी से विनाश कर देते हैं, ऐसे गणेश भगवान जी की मैं पूजा करता हूँ।1 मैं उन श्री गणेश भगवान पर सदा अपना मन और ध्यान अर्पित करता हूँ जो हमेशा उषा काल की तरह चमकते रहते हैं, जिनका सभी राक्षस और देवता सम्मान करते हैं, जो भगवानों में सबसे सर्वोत्तम हैं।2 मैं अपने मन को उस चमकते हुए गणपति भगवान के समक्ष झुकाता हूँ, जो पूरे संसार की खुशियों के दाता हैं, जिन्होंने दानव गजासुर का वध किया था, जिनका बड़ा सा पेट और हाथी की तरह सुन्दर चेहरा है, जो अविनाशी हैं, जो खुशियां और प्रसिद्धि प्रदान करते हैं और बुद्धि के दाता-प्रदाता हैं।3 मैं उन भगवान की पूजा-अर्चना करता हूँ जो गरीबों के सभी दुःख दूर करते हैं, जो ॐ का निवास हैं, जो शिव भगवान के पहले पुत्र (बेटे) हैं, जो परमपिता परमेश्वर के शत्रुओं का विनाश करने वाले हैं, जो विनाश के समान भयंकर हैं, जो एक गज के समान दुष्ट और धनंजय हैं और सर्प को अपने आभूषण के रूप में धारण करते हैं।4 मै सदा उस भगवान को प्रतिबिंबित करता हूँ जिनके चमकदार दन्त (दांत) हैं, जिनके दन्त बहुत सुन्दर हैं, स्वरूप अमर और अविनाशी हैं, जो सभी बाधाओं को दूर करते हैं और हमेशा योगियों के दिलों में वास करते हैं।5 जो भी भक्त प्रातःकाल में गणेश पंचरत्न स्तोत्र का पाठ करता है, जो भगवान गणेश के पांच रत्न अपने शुद्ध हृदय में याद करता है तुरंत ही उसका शरीर दाग-धब्बों और दुखों से मुक्त होकर स्वस्थ हो जायगा, वह शिक्षा के शिखर को प्राप्त करेगा, जीवन शांति, सुख के साथ आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि के साथ सम्पन्न हो जायेगा।

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वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok)

Vakratunda Mahakaya:वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र – गणेश जी की स्तुति Vakratunda Mahakaya:वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।। Vakratunda Mahakaya:यह मंत्र भगवान गणेश को समर्पित एक बहुत ही प्रसिद्ध और शक्तिशाली मंत्र है। इसका जाप करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है और विघ्न दूर होते हैं। Vakratunda Mahakaya:मंत्र का अर्थ Vakratunda Mahakaya:मंत्र का महत्व श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti) मंत्र का जाप कैसे करें यहाँ कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है: अगर आप गणेश जी के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो आप इन विषयों पर खोज कर सकते हैं: वक्रतुण्ड महाकाय – गणेश मंत्र (Vakratunda Mahakaya Ganesh Shlok) किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने के पूर्व श्री गणेश जी का स्मरण इस मंत्र के साथ अवश्य करना चाहिए, आपके शुभकार्य निश्चित ही सिद्ध होंगे।वक्रतुण्ड महाकायसूर्यकोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरु मे देवसर्वकार्येषु सर्वदा ॥ हिन्दी रूपांतरण:वक्रतुण्ड: घुमावदार सूंडमहाकाय: महा काया, विशाल शरीरसूर्यकोटि: सूर्य के समानसमप्रभ: महान प्रतिभाशालीनिर्विघ्नं: बिना विघ्नकुरु: पूरे करेंमे: मेरेदेव: प्रभुसर्वकार्येषु: सारे कार्यसर्वदा: हमेशा, सदैव घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करें (करने की कृपा करें)॥

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सपने में दिख जाये गणपति जी की मूर्ति तो समज लीजिये होगा ऐसा – Sapne Me Dikhe Ganpati Ji Ki Murti To Samajh Lijiye Hoga Aesa.

Ganpati Ji Ki Murti:सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना एक शुभ संकेत माना जाता है। हिंदू धर्म में, गणपति जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे सभी बाधाओं को दूर करते हैं। इसलिए, सपने में उनकी मूर्ति देखना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके जीवन में आने वाली सभी मुश्किलें दूर होने वाली हैं। Ganpati Ji Ki Murti:सपने का अर्थ व्यक्ति के व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर आप सपने में गणपति जी की मूर्ति को पूजा करते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि आप अपनी आध्यात्मिकता को गहरा बनाना चाहते हैं। अगर आप सपने में गणपति जी की मूर्ति को टूटते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि आप किसी समस्या का सामना कर रहे हैं। यदि आपने सपने में गणपति जी की Ganpati Ji Ki Murti मूर्ति देखी है, तो इसका मतलब है कि आपको सकारात्मक रहना चाहिए और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। गणपति जी की कृपा से आप निश्चित रूप से सफल होंगे। Ganpati Ji Ki Murti:सपने में गणपति जी की मूर्ति: दोस्तों आज बात करने वाले है ऐसे सपने की जिससे आपके जीवन के सारे विघ्न दूर हो जायेगे। सपने में देवी देवताओ का आना बहुत ही शुभ माना जाता है क्युकी सपने में भगवान इंसान को आशीर्वाद और कुछ अच्छे संकेत देने के लिए आते है। Ganpati Ji Ki Murti सपने में इंसान जो भी देखता है उसका कोई न कोई रहस्य अवश्य होता है क्युकी सपने इंसान के भविष्य से जुड़े हुवे होते है। इसी तरह सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) जीवन में कोई संकेत जरूर देता है आइये जानते है आपके लिए क्या संकेत है। Ganpati Ji Ki Murti:इंसान के लिए सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) बहुत ही शुभ सपना है। क्युकी गणपति जी हिन्दू धर्म के प्रथम पूजनीय देव है किसी भी शुभ कार्य की शरुआत करने से पहले गणपति जी की पूजा की जाती है। गणपति जी विघ्नहर्ता है उसकी पूजा करने से आपके सभी कार्य शुभ होते है और सफल होते है। सच्चे मन से गणपति जी की पूजा अर्चना करने से जीवन में समृद्धि आती है और आप आने वाले विघ्न भी दूर हो जाते है। Ganpati Ji Ki Murti इंसान के जीवन में अगर कोई मुसीबत आये तो उसे गणेश जी पूजा करनी चाहिए जिससे मुसीबत दूर हो जाये गणपति जी सच्चे भक्तो की प्राथना सुनते है और उनका आशीर्वाद उन्हें दते है। सपनो की दुनिया (Sapno ki duniyaa) में आज बात करने वाले है विघ्नहर्ता श्री गणेश की जिसकी पूजा से सारी मुसीबते दूर जाती है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) आपके जीवन में अच्छे बदलाव की और इशारा करता है। गणपति जी आपको सपने में क्या क्या संकेत देने आये है आइये इसके बारे में जानते है। गणपति जी की मूर्ति आपको अलग अलग अवस्था में दिखाई दे सकती है आइये जानते है इस सपने से आपको क्या संकेत मिलता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना मतलब – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Dekhna Matlab पुराने शास्त्रों के आधारित यह सपना आपको संकेत देता है की इंसान के जीवन में खुशिया आने वाली है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) बेहद शुभ माना गया है। इस सपने से इंसान को यह संकेत मिलता है की आने वाले दिनों में बड़ी खुशखबर मिलने वाली है। ख़ुशी के इस समाचार से इंसान के जीवन में परेशानिया कम हो जाएगी और परिवार भी खुश रहेगा। Dream Astrology: मृत्यु के संकेत होते हैं ये डरावने सपने, देखने पर न करें अनदेखी सपने में गणपति जी की मूर्ति को मोदक का भोग लगाना – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Ko Modak Ka Bhog Lagana शास्त्रों के अनुसार यह सपना आपको संकेत देता है जल्द ही इंसान के जीवन से सारे दुःख दूर हो जायेंगे। सपने में गणपति जी की मूर्ति को मोदक का भोग लगाना (Sapne me ganpati ji ki murti ko modak ka bhog lagana) इस बात का इशारा है की आपको पारिवारिक समस्या से छुटकारा मिलने वाला है परिवार में चल रही समस्या जल्द ही दूर हो जाएगी। यह सपना आपके लिए शुभ संकेत है। गणपति जी को मोदक बहुत प्रिय है इस लिए उन्हें मोदक का भोग लगाया जाता है। सपने में मोदक देखना (Sapne me modak dekhna) भी अच्छा सपना होता है मोदक का अर्थ होता है ख़ुशी इससे जीवन में ख़ुशी आती है और गणपति जी का आशीर्वाद भी मिलता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति का विसर्जन देखना – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Ka Visarjan Dekhna Ganpati Ji Ki Murti:स्वप्न शास्त्र में लिखा है की बाप्पा का विसर्जन देखना आने वाले दिनों में बुरा होने का इशारा करता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति का विसर्जन देखना (Sapne me ganpati ji ki murti ka visarjan dekhna) इंसान को अशुभ संकेत देता है इंसान को व्यापार में धनहानि होगी। यह सपना आपको भविष्य में निराशा आने की और इशारा करता है और आपको चिंता में डाल सकता है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Ganesh bhagwan:भगवान गणेश को प्रिय हैं ये 5 फूल, पूजा में अर्पित करने से खुशियों से भर जाएगा घर

Ganesh Chaturthi 2024: शास्त्रों के अनुसार गणेश बुद्धि और सिद्धि के देवता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि वह किन फूलों से खुश होंगे। तो पूजा से पहले जान लें कि भगवान गणपति के पसंदीदा पुष्प कौन-से हैं। भगवान गणेश को विभिन्न प्रकार के फूल बहुत प्रिय हैं। इन फूलों को पूजा में अर्पित करने से न केवल भगवान प्रसन्न होते हैं बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। आइए जानते हैं उन 5 फूलों के बारे में जो भगवान गणेश को विशेष रूप से प्रिय हैं: हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा फूलों के बिना अधूरी है। फूलों की सुगंध से जहां वातावरण सुशोभित होता है। वहीं, भगवान भी प्रसन्न होते हैं। वैसे हर देवी-देवता का एक पसंदीदा फूल होता है। अगर उस पुष्प से उनकी पूजा की जाए तो भगवान अधिक प्रसन्न होते हैं।  शास्त्रों के अनुसार गणेश बुद्धि और सिद्धि के देवता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि वह किन फूलों से खुश होंगे। तो पूजा से पहले जान लें कि भगवान गणपति के पसंदीदा पुष्प कौन-से हैं। 1.गुड़हल का फूल (Hibiscus flower) गुड़हल का फूल भगवान गणेश को बहुत प्रिय है। अगर उनकी पूजा में यह पुष्प चढ़ाया जाए तो वह समृद्धि प्रदान करते हैं और दुश्मनों का नाश करते हैं। 2.कमल का फूल(Lotus flower) गणेश जी के लिए महत्व: कमल का फूल भगवान गणेश को ज्ञान और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। महत्व: कमल का फूल शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक है। यह भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को भी अर्पित किया जाता है। 3.अपराजिता फूल (Aparajita Flower) अपराजिता का फूल शनि को बहुत प्रिय है। यह पुष्प गणेश जी को भी अत्यंत प्रिय है। इस फूल से लंबोदर की पूजा करने से विवाद में आ रही बाधा दूर हो जाती है। 4.गेंदे का फूल (Marigold) सभी पूजा में पीले गेंदे का उपयोग किया जाता है। भगवान गणेश को यह फूल प्रिय है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए गेंदे के फूल की माला सिद्धिदाता को अर्पित करें। Ganesh Chaturthi Pujan Muhurat: गणेश चतुर्थी के दिन पूजन के लिए ये है शुभ मुहूर्त, जानें गणेश विसर्जन की Date 5. गुलाब का फूल (Rose flower) महत्व: गुलाब का फूल प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक है। इसे विभिन्न रंगों में पाया जाता है और प्रत्येक रंग का अपना अलग महत्व होता है। गणेश जी के लिए महत्व: गुलाब का फूल भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए एक बहुमुखी फूल है। ध्यान रखने योग्य बातें: दूर्वा अर्पण के साथ लड्डू और मोदक का भोग अवश्य लगाएं Ganesh Chaturthi 2024:श्रीगणेश की पूजा में लाल रंग के पुष्प, फल, और लाल चंदन का प्रयोग अवश्य करें। श्री गणेश भगवान की पूजा में दूर्वा, फूल, फल, दीपक, अगरबत्ती, चंदन और सिंदूर का भी प्रयोग करें। इसके साथ ही श्रीगणेश को अतिशय प्रिया लड्डू और मोदक का भोग लगाना कभी न भूलें। ककड़ा और केला के अलावा पंजीरी का भोग भी श्रीगणेश को पसंद है। इसका प्रसाद भक्तों में वितरित करने से वे प्रसन्न होते हैं। Shri Ganesh:श्रीगणेश को ये वस्तुएं अर्पित न की जाएं प्रथम पूज्य गणपति भगवान को सफेद रंग के फूल, वस्त्र, सफेद जनेऊ, सफेद चंदन आदि नहीं चढ़ाना चाहिए। Ganesh Chaturthi 2024 श्री गणेश की पूजा में मुरझाए और सूखे फल का प्रयोग न हो। इसी तरह श्रीगणेश को टूटा हुआ खंडित चावल न चढ़ाकर सदैव अक्षत यानि साबुत चावल अर्पित करना चाहिए। भगवान श्रीगणेश को तुलसी भी अर्पित नहीं की जाती। केतकी का पुष्प जिस तरह भालेनाथ को नहीं चढ़ता, वैसे ही श्रीगणेश को भी नहीं चढ़ता। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Ganesh Chaturthi 2024: (Modak ka bhog) भगवान गणेश को क्यों लगाया जाता है मोदक का भोग ,क्या है वजह ?

Modak ka bhog:गणेश चतुर्थी पर मोदक का भोग: एक दिलचस्प कहानी Ganesh Chaturthi 2024:गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाना एक बहुत ही लोकप्रिय परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों मोदक गणेश जी को इतना प्रिय है? इस प्रश्न का उत्तर कई प्राचीन कहानियों में छिपा हुआ है। Ganesh ji ko kyo lagate hai Modak ka bhog: भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव की शुरुआत होती है. इस दौरान लोग अपने घर गाजे बाजे के साथ बप्पा का स्वागत करते हैं. गणेश उत्सव के दौरान गणेश जी की स्थापना कर लोग विधि विधान से उनकी पूजा करते हैं और बप्पा को मोदक का भोग लगाते हैं. लेकिन बप्पा की पूजा में मोदक भोग लगाना क्यों जरूरी होता है. इसके पीछे की वजह क्या है? Ganesh Chaturthi Modak bhog : गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को उनके प्रिय मोदक का भोग लगाया जाता है. कहा जाता है कि मोदक के बिना गणेश चतुर्थी की पूजा अधूरी मानी जाती है. इस दिन बप्पा को 21 मोदकों का भोग लगया जाता है. वैसे तो लंबोदर को बहुत सी मिठाईयां बहुत सी मिठाइयां पसंद हैं. लेकिन मोदक का भोग लगाना इतना जरूरी क्यों माना जाता है. पुराणों में इससे जुड़ी कहानी का वर्णन मिलता है. Modak ka bhog:एक लोकप्रिय कथा एक कथा के अनुसार, जब देवी पार्वती स्नान कर रही थीं, तब उन्होंने अपने शरीर से उभरे हुए मिट्टी से एक पुत्र की रचना की। उन्होंने उस पुत्र को गणेश नाम दिया और उसे द्वारपाल बना दिया। जब भगवान शिव घर लौटे और उन्हें द्वार पर रोक दिया गया, तो क्रोधित होकर उन्होंने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। देवी पार्वती के विलाप सुनकर भगवान शिव ने एक हाथी का सिर लेकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया। इस प्रकार गणेश जी का एक हाथी का सिर हो गया। इस घटना के बाद, देवी पार्वती ने गणेश जी को बहुत सारे मिष्ठान खिलाए, जिनमें मोदक भी शामिल थे। कहा जाता है कि मोदक खाने के बाद गणेश जी का गुस्सा शांत हो गया और वह बहुत प्रसन्न हुए। तभी से मोदक को गणेश जी का प्रिय भोग माना जाता है। Modak ka bhog:गणेश जी को खिलाएं मोदक Modak ka bhog:युद्ध के दौरान दांत टूटने की वजह से गणेश जी को भोजन चबाने में परेशानी होने लगी. बप्पा की ऐसी स्थिति को देखकर माता पार्वती ने उनके लिए मोदक तैयार करवाए. मोदक बहुत ही मुलायम होते हैं और उन्हें चबाना भी नहीं पड़ता है. इसलिए गणेश जी ने पेट भर कर मोदक खाए. जिसके बाद से ही मोदक गजानंद का प्रिय व्यंजन बन गया. Kyu lagate hai 21 Modak ka bhog:क्यों लगाते हैं 21 मोदक का भोग? कथा के अनुसार, एक बार जब भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान गणेश जंगल में ऋषि अत्रि की पत्नी देवी अनुसूइया से घर गए थे. यहां पहुंचते ही भगवान शिव और गणेश को भूख लगने लगी, जिसके बाद उन्होंने सभी के लिए भोजन का प्रबंध किया है. खाना खाने के बाद देवी पार्वती और भगवान शिव की भूख शांत हो गई, लेकिन गणपति बप्पा का पेट कुछ भी खाने से भर ही नहीं रहा था. बप्पा की भूख शांत कराने के लिए अनुसूया ने उन्हें सभी प्रकार के व्यंजन खिलाए, लेकिन उनकी भूख शांत ही नहीं हुई. Ganesh Chaturthi 2024:श्रीगणेश का विग्रह ईशान कोण में स्थापित करें, स्‍थापना से पहले कर लें यह काम; बरसेगी बप्‍पा की कृपा Modak ka bhog:मोदक चढ़ाने की परंपरा Modak ka bhog:गणेश जी की भूख शांत नहीं होने पर देवी अनुसूइया ने सोचा कि शायद कुछ मीठ उनका पेट भरने में मदद कर सकता है. जिसके बाद उन्होंने गणेश जी को मिठाई का एक टुकड़ा दिया और उसे खाते ही गणपति बप्पा को डकार आ गई और उनकी भूख शांत हुई. गणेश जी भूख शांत होते ही भगवान शिव ने भी 21 बार डकार ली और उनकी भूख शांत हो गई. जिसके बाद माता पार्वती के पूछने पर देवी अनुसूइया ने बताया कि वह मिठाई मोदक थी. जिसके बाद से ही गणेश पूजन में मोदक चढ़ाने का परंपरा शुरू हुई. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् – Shri Rinamochanamahaganapati Stotram

श्री ऋणमोचन महागणपति स्तोत्रम् एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसका पाठ ऋण मुक्ति और आर्थिक संकटों से उबरने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र भगवान गणेश को समर्पित है, जो सभी विघ्नों और समस्याओं को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से ऋणों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। अस्य श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः,अनुष्टुप्छन्दः, श्रीऋणमोचक महागणपतिर्देवता ।मम ऋणमोचनमहागणपतिप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥रक्ताङ्गं रक्तवस्त्रं सितकुसुमगणैः पूजितं रक्तगन्धैःक्षीराब्धौ रत्नपीठे सुरतरुविमले रत्नसिंहासनस्थम् ।दोर्भिः पाशाङ्कुशेष्टाभयधरमतुलं चन्द्रमौलिं त्रिणेत्रंध्यायेत् शान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम् ॥स्मरामि देव देवेशं वक्रतुण्डं महाबलम् ।षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये ॥ १॥एकाक्षरं ह्येकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम् ।एकमेवाद्वितीयं च नमामि ऋणमुक्तये ॥ २॥महागणपतिं देवं महासत्वं महाबलम् ।महाविघ्नहरं शम्भोः नमामि ऋणमुक्तये ॥ ३॥कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम् ।कृष्णसर्पोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये ॥ ४॥रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम् ।रक्तपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ५॥पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम् ।पीतपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ६॥धूम्राम्बरं धूम्रवर्णं धूम्रगन्धानुलेपनम् ।होम धूमप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ७॥भालनेत्रं भालचन्द्रं पाशाङ्कुशधरं विभुम् ।चामरालङ्कृतं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ८॥इदं त्वृणहरं स्तोत्रं सन्ध्यायां यः पठेन्नरः ।षण्मासाभ्यन्तरेणैव ऋणमुक्तो भविष्यति ॥ ९॥इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।ऋणहरस्तोत्रम् ऋणमोचन

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ऋणहरगणेशस्तोत्रम् – RiNaharagaNeshastotram

ऋणहरगणेशस्तोत्रम् एक विशेष स्तोत्र है, जो गणपति जी की कृपा से ऋण मुक्ति पाने के लिए किया जाता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और व्यक्ति पर धन-धान्य की कृपा होती है। यह स्तोत्र इस प्रकार है: कैलासपर्वते रम्ये शम्भुं चन्द्रार्धशेखरम् ।षडाम्नायसमायुक्तं पप्रच्छ नगकन्यका ॥ १॥पार्वत्युवाच -देवेश परमेशान सर्वशास्त्रार्थपारग ।उपायं ऋणनाशस्य कृपया वद साम्प्रतम् ॥ २॥श्रीशिवः -सम्यक्पृष्टं त्वया भद्रे लोकानां हितकाम्यया ।तत्सर्वं सम्प्रवक्ष्यामि सावधानावधारय ॥ ३॥ॐ अस्य श्रीऋणहरमहागणपतिस्तोत्रस्य सदाशिव ऋषिः-अनुष्टुप्छन्दः- श्रीऋणहर महागणपतिर्देवता ।ग्लौं बीजम् । गः शक्तिः । गों कीलकम् । मम ऋणनाशने जपेविनियोगः- ॐ गणेश अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ऋणं छिन्धि तर्जनीभ्यांनमः । वरेण्यं मध्यमाभ्यां नमः । हुं अनामिकाभ्यां नमः । नमःकनिष्ठिकाभ्यां नमः । फट् करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । एवंहृदयादिन्यासाः ।ध्यानं -सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम् ।ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम् ॥पञ्चपूजाः ।सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फलसिद्धये ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ १॥त्रिपुरस्यवधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ २॥हिरण्यकशिप्वादीनां वधार्ते विष्णुनार्चितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ३॥महिषस्य वधे देव्या गणनाथः प्रपूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ४॥तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ५॥भास्करेण गणेशो हि पूजितश्च स्वसिद्धये।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ६॥शशिना कान्तिवृद्ध्यर्थं पूजितो गणनायकः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ७॥पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ८॥इदं ऋणहरं स्तोत्रं तीव्रदारिद्र्यनाशनम् ।एकवारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं समाहितः ॥ ९॥दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेरसमतां व्रजेत् ।फडन्तोऽयं महामन्त्रः सार्धपञ्चदशाक्षरः ॥ १०॥मन्त्रो यथा-ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट् ।इमं मन्त्रं पठेदन्ते ततश्च शुचिभावनः ॥ ११॥एकविंशति सङ्ख्याभिः पुरश्चरणमीरितम् ।सहस्रावर्तनात्सम्यक् षण्मासं प्रियतां व्रजेत् ॥ १२॥बृहस्पतिसमो ज्ञाने धने धनपतिर्भवेत् ।अस्यैवायुतसङ्ख्याभिः पुरश्चरणमीरितम् ॥ १३॥लक्षमावर्तनात्सम्यग्वाञ्छितं फलमाप्नुयात् ।भूतप्रेतपिशाचानां नाशनं स्मृतिमात्रतः ॥ १४॥इति श्रीकृष्णयामलतन्त्रान्तर्गतं ऋणहरगणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

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श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् -Shri Ashtavinayaka Stotram

स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथ मढे चिन्तामणिस्थेवरे ।लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥इति अष्टविनायकस्तोत्रं सम्पूर्णम् । श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् Shri Ashtavinayaka Stotramआपने श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का उल्लेख किया है।अष्टविनायक गणेश जी के आठ स्वरूपों का एक समूह है, जिनकी पूजा महाराष्ट्र में विशेष रूप से की जाती है। ये आठ स्वरूप हैं:1. मोरेश्वर: पुणे के मोरगांव में स्थित।2. सिद्धिविनायक: मुंबई में स्थित।3. विघ्नेश्वर: महाराष्ट्र के लेणी में स्थित।4. बालाजी विनायक:महाराष्ट्र के कल्याण में स्थित।5. वराद विनायक: महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में स्थित।6. गणेशपुरी: महाराष्ट्र के रायगढ़ में स्थित।7. मांगेश:महाराष्ट्र के गोवा में स्थित।8. छत्रपति: महाराष्ट्र के रायगढ़ में स्थित।अष्टविनायक स्तोत्रम् इन आठों स्वरूपों की स्तुति करने वाला एक मंत्र है। यह स्तोत्र भक्तों को इन देवताओं की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में सफलता पाने में मदद करता है। स्तोत्र का महत्वविघ्न निवारण:यह स्तोत्र जीवन में आने वाले सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करने में मदद करता है।सफलता: यह स्तोत्र भक्तों को अपने जीवन में सफलता दिलाता है।ज्ञान:यह स्तोत्र भक्तों को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है।समृद्धि:यह स्तोत्र भक्तों को धन और समृद्धि प्रदान करता है।स्तोत् का पाठ कैसे करेंआप इस स्तोत्र का पाठ किसी भी समय कर सकते हैं। लेकिन इसे सुबह के समय उठकर स्नान करने के बाद करना अधिक फलदायी होता है।

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