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Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay: भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए बुधवार के दिन करें ये आसान उपाय

Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay:भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देव हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है। बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान गणेश…. Budhwar ke totke:हिन्दू धर्म में हर एक दिन किसी न किसी देवी या देवता का माना जाता है. जैसे सोमवार भगवान शिव के लिए, तो मंगलवार हनुमानजी के लिए वैसे ही बुधवार भगवान गणेशजी के लिए माना जाता है. कहा जाता है, बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं Budhwar Upay: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम देव माना गया है Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay यानि की कोई भी शुभ कार्य हो या मांगलिक कार्य या प्रतिदिन होने वाली सामान्य पूजा , सभी तरह की पूजा में सबसे पहले गणेश जी की ही पूजा की जाती है,उसके बाद ही अन्य देवताओं का पूजन किया जाता है. बुधवार का दिन भगवान गणेश जी का दिन माना जाता है. मान्यता है कि बुधवार के दिन विधिविधान के साथ Ganesh ji का पूजन करने से गणेश जी सभी कष्टों से मुक्ति प्रदान करते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं ,साथ ही अगर किसी शुभ कार्य में रुकावट आ रही है तो वो रुकावट भी गणेश जी की कृपा से शीघ्र दूर हो जाती है. आइए जानते हैं बुधवार के दिन किस तरह गणेश जी का पूजन करने से बिगड़े काम बनते हैं और मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं. Solutions to remove obstacles and problems in work:कार्य में बाधा और परेशानी दूर करने के लिए उपाय अगर जीवन में कई तरह की बाधाएं आ रहीं हों या परेशानियां साथ न छोड़ रहीं हों इससे निजात पाने के Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay लिए प्रत्येक बुधवार के दिन गाय को हरी ताजी घास खिलाएं. इससे जीवन में आ रही परेशानियां दूर होंगी और घर में सुख- शांति का वास होगा. Remedies for Mercury being weak:बुध ग्रह कमजोर हो तो इसके लिए उपाय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार के दिन हरे रंग के कपड़े पहनना मंगलकारी माना जाता है और अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है तो इसके लिए हमेशा अपने पास हरे रंग का रूमाल रखें. Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay और बुधवार के दिन हरी मूंग की दाल और हरे वस्त्रों का दान किसी जरूरतमंद को दें, इससे आपकी कुंडली में बुध मजबूत होगा. Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay:मनोकामना पूर्ति के लिए उपाय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर आपके मन में कोई मनोकामना है तो उसकी पूर्ति के लिए प्रत्येक बुधवार के दिन गणेश जी के मंदिर जाएं और बार बार उनके सामने मनोकामना की पूर्ति के लिए अनुरोध करें,ऐसा तबतक करें जब तक की आपकी मनोकामना पूरी नहीं हो जाती. Remedies for happiness and peace at home:घर में सुख शांति के लिए उपाय दूर्वा भगवान गणेश को बहुत ज्यादा प्रिय मानी जाती है Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay इसलिए प्रत्येक बुधवार को 21 दूर्वा गणेश जी को अर्पित करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है. ऐसा करने से घर में सुख एवं शांति का वास होता है. Remedies to remove mental disturbance:मन की अशांति दूर करने के लिए उपाय अगर मन अशांत रहता हो तो मन की शांति के लिए प्रत्येक बुधवार के दिन गणेश जी को शमी के पत्ते अर्पित करें ,Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay ऐसा करने से मानसिक कष्ट दूर होते हैं. Tips for success in work:कार्य में सफलता के लिए उपाय बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा के समय गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं इसके बाद अपने और परिवार के लोगो को भी तिलक लगाएं. माना जाता है कि ऐसा करने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं. keep modak in prasad:प्रसाद में मोदक रखें गणेश जी को मोदक अति प्रिय हैं इसलिए उनकी पूजा में खासकर बुधवार के दिन प्रसाद में मोदक का भोग गणेशजी को लगाए ,इससे गणेश भगवान प्रसन्न होते हैं. Offer Durva to Lord Ganesha:भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें भगवान गणेश को दूर्वा घास अति प्रिय होती है। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उन्हें दूर्वा घास जरूर अर्पित करें। जो भक्त भगवान गणेश को दूर्वा घास अर्पित करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay आप रोजाना भी भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित कर सकते हैं। अगर आपके कार्यों में बार- बार विघ्न आ जाता है तो भगवान गणेश को दूर्वा जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से आपके कार्यों के विघ्न दूर हो जाएंगे। Apply vermillion to Lord Ganesha:भगवान गणेश को सिंदूर लगाएं भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उन्हें सिंदूर भी लगाएं। Ganesh Ji Ko Prasann Karne Ke Upay सिंदूर लगाने से गणपित भगवान प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश को सिंदूर लगाने के बाद अपने माथे में भी सिंदूर लगा लें। भगवान गणेश को सिंदूर लगाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। आप रोजाना भी भगवान गणेश को सिंदूर लगा सकते हैं।

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Vinayak Chaturthi 2025: विनायक चतुर्थी व्रत की जनवरी से दिसंबर की लिस्ट, देखें गणेश उत्सव कब होगा शुरू

Vinayak Chaturthi 2025:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Vinayak Chaturthi 2025: गणेश जी बुद्धि और विद्या के देवता हैं, Vinayak Chaturthi 2025 इनकी कृपा से व्यक्ति सुख, समृद्धि और ज्ञान पाता है. गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए विनायक चतुर्थी व्रत करना फलदायी माना गया है. Vinayak Chaturthi 2025: विनायकी चतुर्थी के दिन श्रद्वालू अपने बुरे समय व जीवन की कठिनाईओं को दूर करने के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं. माना जाता है कि Vinayak Chaturthi 2025 विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है और साधक के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है. अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है.इस दिन लोग सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत करते हैं. शाम को गणेशजी के वरद Vinayak Chaturthi 2025 विनायक रुप की पूजा करने के बाद व्रत खोला जाता है.आज नए साल की पहली विनायक चतुर्थी है. आइए जानते हैं साल 2025 में विनायक चतुर्थी कब-कब है. Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती विनायक चतुर्थी 2025 लिस्ट (Vinayak Chaturthi 2025 List) 3 जनवरी 2025 – पौष विनायक चतुर्थी 1 फरवरी 2025 – माघ विनायक चतुर्थी (गणेश जयंती) 3 मार्च 2025 – फाल्गुन विनायक चतुर्थी 1 अप्रैल 2025 – चैत्र विनायक चतुर्थी 1 मई 2025 – वैशाख विनायक चतुर्थी 30 मई 2025 – ज्येष्ठ विनायक चतुर्थी 28 जून 2025 – आषाढ़ विनायक चतुर्थी 28 जुलाई 2025 – सावन विनायक चतुर्थी 27 अगस्त 2025 – भाद्रपद विनायक चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) 25 सितंबर 2025 – अश्विन विनायक चतुर्थी 25 अक्टूबर 2025 – कार्तिक विनायक चतुर्थी 24 नवंबर 2025 – मार्गशीर्ष विनायक चतुर्थी 24 दिसंबर 2025 – पौष विनायक चतुर्थी Vinayak Chaturthi 2025:विनायक चतुर्थी व्रत क्यों महत्वपूर्ण है गणपति की कृपा से उसे बल-बुद्धि, सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. Vinayak Chaturthi 2025 गणपति की कृपा से उसके सारे काम सिद्ध होते हैं. इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और जीवन में आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है. विनायक चतुर्थी गणपति के विनायक रूप को समर्पित है. इस दिन व्रत पूजन करने से उनका आशीर्वाद मिलता है. गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) Vinayak Chaturthi 2025:विनायक चतुर्थी पर व्रत पूजा की विधि Vinayak Chaturthi 2025 Puja Mantra गणपति पूजा मंत्र प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्। तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।। प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्। अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Vinayak Chaturthi 2025 Date: मार्च महीने में कब है विनायक चतुर्थी? शुभ मुहूर्त एवं योग के लिए पढ़ें यह खबर

Vinayak Chaturthi 2025 Date:भगवान गणेश को कई नामों से जाना जाता है। भगवान गणेश की पूजा करने से धन की परेशानी दूर होती है। साथ ही सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में देवों के देव महाेदव के पुत्र भगवान गणेश की श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है। साथ ही चतुर्थी का व्रत (Vinayak Chaturthi 2025 Date) रखा जाता है। धार्मिक मत है कि चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के आय, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है। आइए, फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025 Date) की सही डेट एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं। विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Vinayak Chaturthi Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 02 मार्च को रात 09 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, चतुर्थी तिथि का समापन 03 मार्च को शाम 06 बजकर 02 मिनट पर होगा। इस दिन चन्द्रास्त रात 10 बजकर 11 मिनट पर होगा। साधक 03 मार्च को विनायक चतुर्थी का व्रत रख सकते हैं। विनायक चतुर्थी शुभ योग (Vinayak Chaturthi Shubh Yog) फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर शुक्ल और ब्रह्म योग का निर्माण हो रहा है। शुक्ल योग सुबह 08 बजकर 57 मिनट तक है। इसके बाद ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही भद्रावास योग का भी संयोग बनेगा। इसके अलावा, अश्विनी नक्षत्र का भी योग है। इन योग में भगवान गणेश की पूजा करने से साधक ही हर मनोकामना पूरी होगी। Vinayak Chaturthi 2025:पंचांग सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 44 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 22 मिनट पर चन्द्रोदय- सुबह 08 बजकर 40 मिनट पर चंद्रास्त- रात 10 बजकर 11 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 05 मिनट से 05 बजकर 55 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 16 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 45 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक

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Falgun Chaturthi 2025:फाल्गुन माह में कब है विनायक चतुर्थी? नोट करें शुभ मुहूर्त

Falgun Chaturthi 2025:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Falgun Chaturthi 2025 Puja Vidhi Kese kare :विनायक चतुर्थी पूजा विधि कैसे करें: Falgun Chaturthi 2025 मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि की पूजा दोपहर के समय करनी चाहिए। Falgun Chaturthi 2025 क्योंकि शाम के समय चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से झूठा कलंक लगता है। मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने विनायक चतुर्थी की रात को चंद्रमा देखा था, जिसके बाद उन्हें स्यामंतक मणि चोरी करने के लिए झूठा कलंक लगाया गया था। इस दिन प्रात:काल स्नान कर व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर पूजा प्रारंभ करें। भगवान गणेश को पीले फूलों की माला अर्पित करने के बाद धूप-दीप, नैवेद्य, अक्षत और उनकी प्यारी दूर्वा घास अर्पित करें। इसके बाद मिठाई या मोदक का भोग लगाएं। अंत में व्रत कथा पढ़कर गणेश जी की आरती करें। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को सिंदूर बहुत प्रिय होता है इसलिए Falgun Chaturthi 2025 विनायक चतुर्थी के दिन पूजा के समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक लगाएं। सिंदूर चढ़ाते समय निम्न मंत्र का जाप करें-सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् ।शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ॥ विनायक चतुर्थी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Vinayak Chaturthi 2025 Date and Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह (Vinayak Chaturthi Phalgun 2025 Shubh Muhurat) के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का प्रारंभ 02 मार्च को रात 09 बजकर 01 मिनट पर हो रहा है। वहीं, तिथि का समापन अगले दिन यानी 03 मार्च को शाम 06 बजकर 02 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi Kab hai) 03 मार्च को मनाई जाएगी। ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा (Lord Ganesh Puja Vidhi) Falgun Chaturthi 2025:चतुर्थी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। इसके बाद स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। अब दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें। सच्चे मन से भगवान गणेश की आरती करें। मोदक और फल समेत प्रिय चीजों का भोग लगाएं। इस दौरान भोग मंत्र का जप करें। आखिरी में लोगों में प्रसाद बाटें।

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Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2025:फरवरी में कब है विनायक और द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी? अभी नोट करें डेट और शुभ मुहूर्त

Dwijapriya Vinayak Chaturthi 2025:हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2025 Date) तिथि पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही जीवन में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। Dwijapriya Vinayak Chaturthi 2025 धार्मिक मान्यता है कि गणपति बप्पा की उपासना करने से सभी संकट दूर होते हैं। साथ ही गणेश जी की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं। Dwijapriya Vinayak Chaturthi:जल्द ही फरवरी का महीना शुरू होने वाला है। धर्मिक दृष्टि से इस माह को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस माह में कई व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi February 2025) और द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी शामिल है। चतुर्थी तिथि पर महादेव के पुत्र भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही श्रद्धा अनुसार लोगों में गर्म कपड़े और धन का दान भी किया जाता है। Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2025: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी के व्रत का खास महत्व माना जाता है. हर माह की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. इस शुभ तिथि पर भगवान गणेश की पूजा करने से हर काम में आ रही रुकावट से छुटकारा मिलता है Dwijapriya Vinayak Chaturthi 2025 और घर में सुख-शांति का आगमन होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि फरवरी में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है, इस दिन शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और पूजा विधि की विधि क्या है. Dwijapriya Vinayak Chaturthi:मान्यता है कि उपासना और दान करने से भक्त पर हमेशा गणपति बप्पा की कृपा बनी रहती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं Dwijapriya Vinayak Chaturthi 2025 कि फरवरी में मनाई जाने वाली विनायक चतुर्थी और द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की डेट और शुभ मुहूर्त के बारे में। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2025 कब है (Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2025 Date ) Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2025:पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष Dwijapriya Vinayak Chaturthi 2025 की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को रात 11 बजकर 52 मिनट पर होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 17 फरवरी को रात 2 बजकर 15 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 16 फरवरी को रखा जाएगा. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2025 शुभ मुहूर्त Dwijapriya Vinayak Chaturthi 2025 द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की पूजा कैसे करें (Dwijapriya Sankashti Chaturthi Puja Vidhi) Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2025 द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर और स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें. फिर चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश और शिव परिवार की प्रतिमा रखें. इसके बाद उन्हें मोदक, लड्डू, अक्षत और दूर्वा आदि चीजें चढ़ाएं. फिर भगवान गणेश के माथे पर तिलक लगाएं. देसी घी का दीया जलाकर भगवान गणेश की आरती करें. इसके बाद सच्चे मन से व्रत कथा का पाठ करें. कथा का पाठ कर बप्पा को मिठाई, मोदक और फल का भोग लगाएं. खुशहाल जीवन की कामना करें और लोगों में प्रसाद बाटें. श्री गणेश मंत्र ganesh mantra ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥ Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2025:गणेश गायत्री मंत्र ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥ Dwijapriya Vinayak Chaturthi 2025 ऋणहर्ता गणपति मंत्र ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥

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Ganesh Jayanti 2025: कब मनाई जाएगी गणेश जयंती? जानें सही तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Ganesh Jayanti 2025 Date: गणेश जयंती 2025 में 1 फरवरी को मनाई जाएगी. पूजा का मुहूर्त 11:38 से 1:40 तक है. इस दिन रवि योग, परिघ योग और शिव योग बन रहे हैं. भद्रा रात 10:26 से अगले दिन सुबह 7:09 तक है Ganesh Jayanti 2025 Date: हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस दिन को देशभर में विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे- गणेश जयंती, माघ विनायक चतुर्थी, तिल कुंड चतुर्थी और वरद चतुर्थी। हिंदू धर्म में गणेश जयंती का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से व्यक्ति को बुद्धि, बल और सुख-समृद्धि की प्राप्ती होती है। गणेश जयंती 2025 तारीख Ganesh Jayanti kab hai हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गणेश जयंती Ganesh Jayanti 2025 के लिए जरूरी माघ शुक्ल चतुर्थी तिथि 1 फरवरी को दिन में 11 बजकर 38 मिनट से शुरू होगी. यह ति​थि 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट तक मान्य है. ऐसे में पूजा मुहूर्त के आधार पर इस साल गणेश जयंती 1 फरवरी शनिवार को मनाई जाएगी. गणेश जयंती को माघ विनायक चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं. उस दिन गणप​ति बप्पा का जन्मदिन मनाया जाएगा. गणेश जयंती 2025 मुहूर्त Ganesh Jayanti 2025 Muhurat 1 फरवरी को गणेश जयंती की पूजा का मुहूर्त दिन में 11 बजकर 38 मिनट से दोपहर 1 बजकर 40 मिनट तक है. इस दिन गणेश जी की पूजा के लिए 2 घंटे 2 मिनट का शुभ समय प्राप्त प्राप्त होगा. गणेश जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त Ganesh Jayanti Puja Ka Subh Muhurat गणेश जयंती के दिन मध्याह्न गणेश पूजा का समय सुबह 11:38 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्तों को पूजा के लिए कुल 2 घंटे 2 मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा, इस दिन सुबह 9:02 बजे से रात 9:07 बजे तक चंद्रमा के दर्शन वर्जित माने गए हैं।  रवि योग में मनेगी गणेश जयंती 2025 Ravi yog me manegi Ganesh Jayanti इस साल गणेश जयंती Ganesh Jayanti 2025 के दिन रवि योग बन रहा है. उस दिन रवि योग सुबह में 7 बजकर 9 मिनट से बन रहा है, जो अगले दिन 2 फरवरी को तड़के 2 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. रवि योग में सूर्य देव का प्रभाव अधिक होता है, जिसमें सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं. गणेश जयंती Ganesh Jayanti 2025 पर परिघ और शिव योग भी बन रहे हैं. उस दिन प्रात:काल से परिघ योग बनेगा, जो दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगा. उसके बाद शिव योग बनेगा. उस दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र पूरे दिन है. 2 फरवरी को तड़के 2 बजकर 33 मिनट तक है. उसके बाद से उत्तर भाद्रपद नक्षत्र है. श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti) गणेश जयंती पर भद्रा का साया Ganesh Jayanti per bhadra ka saya इस बार गणेश जयंती के दिन भद्रा का साया है. भद्रा रात में 10 बजकर 26 मिनट पर लगेगी, जो अगले दिन 2 फरवरी को सुबह 7 बजकर 9 मिनट तक है. इस भद्रा का वास पृथ्वी पर है, ऐसे में इस समय में कोई शुभ कार्य नहीं होगा. हालांकि गणेश जयंती की पूजा के समय भद्रा नहीं है. गणेश जयंती पर पूरे दिन पंचक भी लगेगा. गणेश जयंती का महत्व Ganesh Jayanti ka mahetwa गणेश जयंती माघी विनायक चतुर्थी को है. Ganesh Jayanti 2025 उस दिन गणपति बप्पा का जन्म हुआ था. जो लोग गणेश जयंती पर व्रत रखकर गणपति महाराज की पूजा करते हैं, उनके सभी संकट दूर होते हैं और कार्य सफल सिद्ध होते हैं. जीवन में शुभता बढ़ती है. गणेश जयंती पूजा विधि Ganesh Jayanti puja vidhi गणेश जयंती Ganesh Jayanti 2025 के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल से पवित्र करें। एक चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। मूर्ति को जल, दूध, शहद और दही से स्नान कराएं। इसके बाद धूप-दीप जलाएं और गणेश मंत्रों का जाप करते हुए पूजा आरंभ करें। भगवान को फूल, रोली, दुर्वा, सुपारी, फल और मिठाई अर्पित करें। गणेश जयंती की कथा का पाठ करें और सुनें। अंत में भगवान गणेश की आरती करके पूजा को संपन्न करें। गणपति पूजा मंत्र Ganesh Jayanti Puja mantra प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्।तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।।प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्।अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Magh Vinayak Chaturthi:विनायक चतुर्थी 2025: जनवरी से दिसंबर तक व्रत तिथियों की सूची — जानें कब से शुरू होगा गणेश उत्सव

गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi) कहा जाता है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सभी देवताओं में गणेश जी का स्थान सर्वोपरि है। गणेश जी को सभी परेशानियों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। भगवान गणेश की नियमित पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। Magh Vinayak Chaturthi Puja vidhi kese kare:विनायक चतुर्थी पूजा विधि कैसे करें मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि की पूजा दोपहर के समय करनी चाहिए। क्योंकि शाम के समय चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से झूठा कलंक लगता है। मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने विनायक चतुर्थी की रात को चंद्रमा देखा था, जिसके बाद उन्हें स्यामंतक मणि चोरी करने के लिए झूठा कलंक लगाया गया था। इस दिन प्रात:काल स्नान कर व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर पूजा प्रारंभ करें। भगवान गणेश को पीले फूलों की माला अर्पित करने के बाद धूप-दीप, नैवेद्य, अक्षत और उनकी प्यारी दूर्वा घास अर्पित करें। इसके बाद मिठाई या मोदक का भोग लगाएं। अंत में व्रत कथा पढ़कर गणेश जी की आरती करें। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को सिंदूर बहुत प्रिय होता है इसलिए विनायक चतुर्थी के दिन पूजा के समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक लगाएं। सिंदूर चढ़ाते समय निम्न मंत्र का जाप करें-सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् ।शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ॥ Vinayak Chaturthi kya hai विनायक चतुर्थी क्या है? विनायक चतुर्थी अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भक्त सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत रखते हैं। शाम को भगवान गणेश के वरद विनायक रूप की विधिवत पूजा करने के बाद व्रत का समापन होता है। वर्ष 2025 की पहली विनायक चतुर्थी आज मनाई जा रही है। नीचे वर्ष 2025 की सभी विनायक चतुर्थी तिथियों की सूची दी गई है। विनायक चतुर्थी 2025 कैलेंडर विनायक चतुर्थी व्रत का महत्व Vinayak Chaturthi Vrat ka mahetwa भक्तों का मानना ​​है कि विनायक चतुर्थी पर व्रत रखने और प्रार्थना करने से उन्हें शक्ति, बुद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान गणेश अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करके और उनके जीवन से बाधाओं को दूर करके उन्हें आशीर्वाद देते हैं। यह दिन भगवान गणेश के विनायक रूप की पूजा के लिए समर्पित है, जो शुभता और सफलता का प्रतीक है। विनायक चतुर्थी व्रत की विधियां Vinayak Chaturthi Vrat ki vidhiya [अस्वीकरण: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से मान्यताओं पर आधारित है, और इसे सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लिया जाना चाहिए। व्यक्तिगत अनुभव भिन्न हो सकते हैं। KARMASU.IN प्रस्तुत किसी भी दावे या जानकारी की सटीकता या वैधता का दावा नहीं करता है।

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Sakat Chauth Vrat : सकट चौथ व्रत कब रखा जाएगा? जानें डेट, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त

Sakat Chauth Vrat:हिंदू पंचांग के अनुसार माह की चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश के पूजन के लिए शुभ मानी गई है। सकट चौथ का व्रत, माघ कृष्णा चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। सकट चौथव्रत के दिन स्त्रियां अपने संतान की दीर्घायु एवं सफलता के लिये व्रत रखती हैं। व्रत के फलस्वरूप विघ्न हरण श्री गणेश व्रती स्त्रियों के संतानों को रिद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं। Sakat Chauth 2025: माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को सकट चौथ कहा जाता है। सकट चौथ व्रत में भगवान श्रीगणेश की विधि- विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विघ्नहर्ता की पूजा करने संतान की रक्षा होती है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। सकट चौथ व्रत के दिन चंद्र पूजन अनिवार्य माना गया है। सकट चौथ व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। इस दिन संकट हरण गणेश जी का पूजन होता है। पूजा में दूर्वा, शमी पत्र, बेल पत्र, गुड़ और तिल के लड्डू चढ़ाए जाते है। यह व्रत संतान के जीवन में विघ्न, बाधाओं को हरता है। संकटों व दुखों को दूर करने वाला और रिद्धि-सिद्धि देने वाला है। सकट चौथ पर तिल का विशेष महत्व है। इसलिए भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग जरूर लगाना चाहिए। 2025 में सकट चौथ व्रत की डेट-शुक्रवार, 17 जनवरी 2025 Sakat Chauth Vrat muhurat:मुहूर्त चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 17, 2025 को 04:06 ए एम बजे चतुर्थी तिथि समाप्त – जनवरी 18, 2025 को 05:30 ए एम बजे सकट चौथ के दिन चन्द्रोदय समय – 09:09 पी एम (देश के अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का टाइम भी अलग होता है) सकट चौथ के दिन दिया जाता है चंद्रमा को अर्घ्य- शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा को औषधियों का स्वामी और मन का कारक माना जाता है। चंद्रदेव की पूजा के दौरान महिलाएं संतान के दीर्घायु और निरोगी होने की कामना करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने से सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस विधि से दें अर्घ्य-चांदी के पात्र में पानी में थोड़ा सा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। संध्याकाल में चंद्रमा को अर्ध्य देना काफी लाभप्रद होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार, दुर्भावना और स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है। सकट चौथ व्रत के दौरान स्त्रियाँ पूरे ही दिन निर्जला व्रत (बिना पानी पिए) रखती हैं तथा संध्या के समय भगवान श्री गणेश का पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात् ही जल ग्रहण करती है। राजस्थान में सकट चौथ व्रत माता सकट को समर्पित किया जाता है। संकट चौथ माता का मंदिर, अलवर से 60 किमी दूर सकट गाँव में स्थित है। नैवेद्य के रूप में तिल तथा गुड़ से बने हुए लड्डू, ईख, शकरकंद (गंजी), अमरूद, गुड़ तथा घी को अर्पित करने की महिमा है, अतः सकट चौथ को तिल चौथ तथा तिलकुट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। पूजा-विधि: puja vidhi सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें। गणपित भगवान का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान गणेश को पुष्प अर्पित करें। भगवान गणेश को दूर्वाघास भी अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वाघास चढ़ाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश को सिंदूर लगाएं। भगवान गणेश का ध्यान करें। गणेश जी को भोग भी लगाएं। आप गणेश जी को मोदक या लड्डूओं का भोग भी लगा सकते हैं। इस व्रत में चांद की पूजा का भी महत्व होता है। शाम को चांद के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलें। भगवान गणेश की आरती जरूर करें।

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Lambodara Sankashti Chaturthi: कब है विनायक चतुर्थी और सकट चौथ? अभी नोट करें डेट एवं शुभ मुहूर्त

Lambodara Sankashti Chaturthi:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश ganesh bhagwan को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी 2025 शुभ मुहूर्त (Lambodara Sankashti Chaturthi 2025 Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 17 जनवरी (january) को सुबह 04 बजकर 06 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 18 जनवरी को सुबह 05 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में 17 जनवरी को लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ (Sakat chauth 2024) के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा (Lord Ganesh Puja Vidhi) चतुर्थी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद घर और मंदिर की सफाई करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। व्रत का संकल्प लें। पूजा की शुरुआत करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें। इसके बाद फल और मोदक का भोग लगाएं। जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। अंत में लोगों में प्रसाद का वितरण करें। श्रद्धा अनुसार दान करें। गणोश मंत्र (Ganesh Mantra) 1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥2. ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥3. ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥ संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि Sankashti Chaturthi Puja vidhi ❀ गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।❀ स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।❀ पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं।❀ गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।❀ शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें।❀ शाम के पूजा के लिए गणेश जी की मूर्ति murti के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है।❀ मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।❀ गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है।❀ गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।❀ इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।❀ पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।❀ गरीबों को दान भी किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा Sankashti Chaturthi Vrat ki mahima नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। ध्यान दें – संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

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Vinayak Chaturthi 2025: साल 2025 में पहली विनायक चतुर्थी कब है, जानें भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Vinayak Chaturthi 2025 हिंदू धर्म में विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान Ganesh bhagwan गणेश की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। अब ऐसे में साल 2025 की पहली विनायक चतुर्थी कब है। इसके बारे में विस्तार से जानते हैं I Vinayak Chaturthi 2025:सनातन धर्म में विनायक चतुर्थी को सुख-समृद्धि और सौभाग्यशाली माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेष की पूजा विधिवत रूप से करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती है और सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि Vinayak Chaturthi 2025 विनायक चतुर्थी के दिन मनोकामना पूर्ति के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं। जिससे उत्तम फलों की प्राप्ति हो सकती है। अब ऐसे में साल 2025 में पहली विनायक चतुर्थी का व्रत कब रखा जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त कब है और भगवान गणेश की पूजा का महत्व क्या है? कब है पौष मास की विनायकी चतुर्थी? (Vinayak Chaturthi January 2025 Kab hai) Vinayak Chaturthi 2025 पंचांग के अनुसार, पौष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 2 जनवरी, गुरुवार की रात 01 बजकर 08 मिनिट से शुरू होगी, जो 03 जनवरी, शुक्रवार की रात 11 बजकर 39 मिनिट तक रहेगी। Vinayak Chaturthi 2025 चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 3 जनवरी को होगा, इसलिए इस दिन पौष मास की विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन सिद्धि, प्रजापति और सौम्य नाम के 3 शुभ योग होने से इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है। ये हैं पौष विनायकी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त (Vinayaka Chaturthi January 2025 Shubh Muhurat) – दोपहर 12:31 से 13:50 तक– दोपहर 12:10 से 12:52 तक (अभिजीत मुहूर्त)– शाम 04:30 से 05:49 तक इस विधि से करें विनायकी चतुर्थी व्रत-पूजा (Vinayaki Chaturthi 2025 Puja Vidhi) Vinayak Chaturthi 2025 3 जनवरी, शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद हाथ में जल-चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में घर में किसी साफ स्थान पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा या चित्र एक बाजोट यानी पटिए के ऊपर स्थापित करें। पूजा की शुरूआत में सबसे पहले गणेश प्रतिमा पर तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।इसके बाद दूर्वा, अबीर, गुलाल, रोली आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें। इस दौरान ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप करें।भगवान श्रीगणेश को भोग लगाएं और आरती करें। प्रसाद भक्तों में बांट दें। संभव हो तो मंत्र जाप भी कर सकते हैं।जो व्यक्ति विनायकी चतुर्थी का व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामना पूरी होती हैं Vinayak Chaturthi 2025 घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। भगवान श्रीगणेश की आरती (Lord Ganesha Aarti) जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ Disclaimerइस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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Sakat Chauth 2025: कब है सकट चौथ? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Sakat chauth 2025 mein kab hai date and time: सकट चौथ का व्रत भगवान श्रीगणेश व माता सकट को समर्पित है। जानें जनवरी में सकट चौथ कब है- Sakat chauth 2025 Kab Hai:हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश ganesh bhagwan को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतु्र्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। यह व्रत सकट माता को समर्पित है। इस दिन माताएं अपने संतान की अच्छे स्वास्थ्य व खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। मान्यता है कि इस दिन श्रीगणेश की पूजा करने से सुख-समृद्धि का आगमन होता है। सकट चौथ को तिलकुटा चौथ, माघी चौथ या व्रकतुण्ड चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। Sakat Chauth Significance: साल भर में 12 संकष्टी चतुर्थी व्रत आते हैं। इनमें से कुछ चतुर्थी साल की सबसे बड़ी चौथ में से एक हैं, उनमें से एक है सकट चौथ व्रत। सकट चौथ भगवान गणेश के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में से एक है। हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन सकट चौथ का त्योहार मनाया जाता है। सकट चौथ व्रत की महिमा से संतान की सभी चिंताएं दूर हो जाएंगी। भक्तों को सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। सकट चौथ वर्ष की शुरुआत में पड़ता है, इसलिए जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं।  उन्हें पूरे वर्ष अनंत सुख, धन, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं 2025 में कब है सकट चौथ। सकट चौथ चंद्रोदय टाइमिंग- सकट चौथ के दिन चन्द्रमा को जल अर्घ्य देने और पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होचा है और जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। सकट चौथ के दिन चंद्रमा निकलने का समय रात 09 बजकर 09 मिनट है। कब है सकट चौथ? Sakat Chauth 2025 17 जनवरी 2025, शुक्रवार को सकट चौथ है। इसे संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ, तिलकुट चौथ, माघी चौथ, लंबोदर संकष्टी, तिलकुट चतुर्थी और संकटा चौथ आदि नामों से भी जाना जाता है।  सकट चौथ 2025 Sakat Chauth माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ:  17 जनवरी 2025, प्रातः 4 बजकर 06 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त: 18 जनवरी 2025, प्रातः 5 बजकर 30 मिनट पर  गणपति पूजा मुहूर्त-   17 जनवरी 2025 प्रातः 7:15 – प्रातः 11:12 सकट चौथ 2025 Sakat Chauth 2025 चंद्रोदय समय17 जनवरी 2025 , रात्रि 09: 09 मिनट पर सकट चौथ व्रत क्यों किया जाता है ?सकट चौथ का दिन भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है। Sakat Chauth 2025 इस दिन माताएं अपने पुत्रों के कल्याण की कामना से व्रत रखती हैं। सकट चौथ के दिन भगवान गणेश की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पूरे दिन व्रत रखा जाता है।  रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा Sakat Chauth 2025 को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। यही कारण है कि सकट चौथ Sakat Chauth 2025 पर चंद्रमा दर्शन और पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन गणपति जी को पूजा में तिल के लड्डू या मिठाई अर्पित करते हैं, साथ में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पारण करते हैं।  सकट चौथ Sakat Chauth 2025 PUJA Vidhi:पूजा विधि डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। गणेश शुभ लाभ मंत्र (Ganesha Shubh Labh Mantra) श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti) Rinharta Ganesh Stotra:ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र: कर्ज से मुक्ति पाने का चमत्कारी उपाय Ganesh Chalisa:श्री गणेश चालीसा

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Akhuratha Sankashti Chaturthi:अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024: महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Akhuratha Sankashti Chaturth:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। Akhuratha Sankashti Chaturth:संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । Akhuratha Sankashti Chaturth इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024 शुभ मुहूर्त (Akhuratha Sankashti Chaturthi 2024 Shubh Muhurat) Akhuratha Sankashti Chaturth पंचांग के अनुसार, इस बार पौष महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 18 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 43 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 19 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 02 मिनट पर होगा। ऐसे में खुरथ संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर (Kab Hai Akhuratha Sankashti Chaturthi 2024) को मनाई जाएगी। ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 19 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 01 मिनट से 02 बजकर 42 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 25 मिनट से 05 बजकर 52 मिनट तक अमृत काल- सुबह 06 बजकर 30 मिनट से 08 बजकर 07 मिनट तक गणोश मंत्र (Ganesh Mantra) 1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥2.ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥ Sankashti Chaturthi puja method:संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि ❀ गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।❀ स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।❀ पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं।❀ गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।❀ शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें। ❀ शाम के पूजा के लिए गणेश जी Akhuratha Sankashti Chaturth की मूर्ति के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है।❀ मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।❀ गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है।❀ गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।❀ इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।❀ पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।❀ गरीबों को दान भी किया जाता है। Akhuratha Sankashti Chaturth:सभी संकष्टी चतुर्थी के नाम आश्विन मास – विघ्नराज संकष्टी चतुर्थीकार्तिक मास – करवा चौथ, वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थीमार्गशीर्ष मास – गणाधिप संकष्टी चतुर्थीपौष मास – अखुरथ संकष्टी चतुर्थीमाघ मास – सकट चौथ, लम्बोदर संकष्टी चतुर्थीफाल्गुन मास – द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थीचैत्र मास – भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थीवैशाख मास – विकट संकष्टी चतुर्थीज्येष्ठ मास – एकदन्त संकष्टी चतुर्थीआषाढ़ मास – कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थीश्रावण मास – गजानन संकष्टी चतुर्थीअधिक मास – विभुवन संकष्टी चतुर्थीभाद्रपद मास – बहुला चतुर्थी, हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024 का महत्व Akhuratha Sankashti Chaturth:अखुरथ संकष्टी चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश भगवान की पूजा के साथ चन्द्रदर्शन का भी विशेष महत्व है। इस दिन चद्रोदय के समय चंद्र को अर्घ जरूर देना चाइये। धार्मिक मान्यता है की इस दिन गणेश जी की पूजा करने से जातक के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। और गणेश भगवान सुख शांति और आरोग्यता का वरदान  देतें है।

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