EKADASHI

Saphala Ekadashi

Saphala Ekadashi 2025 Date And Time: जानिए सफला एकादशी कब है 2025 में, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके लाभ

Saphala Ekadashi kab Hai 2025 Mein: हिंदू धर्म में सभी व्रतों में एकादशी व्रत को श्रेष्ठ माना जाता है, और यह हर महीने में दो बार (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) पड़ती है। हर वर्ष पौष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। ‘सफला’ शब्द का अर्थ ही सफलता होता है। यह मान्यता है कि इस Saphala Ekadashi एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी कार्य सफल हो जाते हैं, इसीलिए इसे सफला एकादशी कहा जाता है। इस पवित्र दिन अच्युत भगवान (Lord Achyut) की विशेष पूजा की जाती है। धर्मग्रंथों में इस दिन को दुःख और कष्ट दूर करने वाले तथा भाग्य खोलने वाले दिन के रूप में वर्णित किया गया है। सफला एकादशी 2025 में कब मनाई जाएगी? (Saphala Ekadashi 2025 Date and Muhurat) हिन्दू पंचांग के अनुसार, Saphala Ekadashi सफला एकादशी पौष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। विवरण (Detail) तिथि व समय (Date and Time) एकादशी तिथि का आरम्भ 14 दिसंबर 2025, रविवार, शाम 06 बजकर 49 मिनट से एकादशी तिथि की समाप्ति 15 दिसंबर 2025, सोमवार, रात 09 बजकर 19 मिनट तक सफला एकादशी व्रत (उदया तिथि) 15 दिसंबर 2025, सोमवार पारण (व्रत खोलने) का समय 16 दिसंबर 2025, मंगलवार, सुबह 07 बजकर 07 मिनट से लेकर 09 बजकर 11 मिनट तक सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा। सफला एकादशी की पूजा विधि (Saphala Ekadashi Puja Vidhi) सफला एकादशी Saphala Ekadashi के दिन भगवान अच्युत का विधिवत पूजन करने का विधान है। 1. व्रत का संकल्प: एकादशी के दिन प्रातः काल स्नान करने के बाद, भगवान अच्युत का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 2. स्नान और वस्त्र अर्पण: संकल्प लेने के बाद, भगवान की मूर्ति को ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए, पंचामृत से स्नान कराएँ। इसके बाद, भगवान को वस्त्र, चंदन, जनेऊ (sacred thread), धूप, दीप और फल आदि अर्पित करें। 3. विशेष पूजन सामग्री: भगवान अच्युत का पूजन नारियल (coconut), सुपारी (betel nut), आंवला (amla), अनार (pomegranate) और लौंग (cloves) से करना चाहिए। 4. आरती: पूजन के अंत में कपूर से भगवान की आरती उतारें। 5. रात्रि जागरण: इस दिन रात्रि में जागरण करके श्रीहरि के नाम का भजन करने का विशेष महत्व बताया गया है। Saphala Ekadashi माना जाता है कि इस दिन विष्णु सहस्रनाम का जाप करना बहुत फलदायक (fruitful) होता है। 6. पारण (व्रत तोड़ना): व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी को, किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराकर और दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए। सफला एकादशी व्रत करने के प्रमुख लाभ और महत्व (Benefits and Importance) सफला एकादशी Saphala Ekadashi नाम के अनुरूप ही, भक्तों के सभी कार्यों को पूरा और सफल करने वाली मानी गई है। 1. तपस्या के समान फल: यह मान्यता है कि हजारों साल तक तपस्या करने के बाद जिस पुण्यफल की प्राप्ति होती है, वह पुण्य अकेले सफला एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। 2. पाप नाश और संकटों से मुक्ति: यह व्रत मनुष्य को निरोगी रखता है, उनके पापों का नाश करता है, और उन्हें संकटों से मुक्ति दिलाता है। 3. अश्वमेध यज्ञ का फल: सफला एकादशी का व्रत रखने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। 4. सफलता और इच्छापूर्ति: कहा जाता है कि अगर जीवन के हर कार्य में Saphala Ekadashi सफल होना है, तो शास्त्रों के अनुसार विधि-विधान से यह व्रत रखना चाहिए। इस व्रत को रखने से मनुष्य की सभी इच्छाएं और सपने पूरे होते हैं। 5. मोक्ष प्राप्ति: सफला एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, साथ ही राक्षस, भूत, पिशाच आदि योनियों से भी मुक्ति मिलती है। 6. धन और समृद्धि: श्रीहरि के पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और श्रीहरि के साथ माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं, जिससे जीवन में धन-समृद्धि बढ़ती है। जो मनुष्य यह व्रत करता है, उसके जीवन में कभी भी संकटों की कमी नहीं होती और उसके जीवन में धन, समृद्धि, खुशियों और कीर्ति (fame) की कमी नहीं होती है। सफला एकादशी के दिन कौन से कार्य नहीं करने चाहिए? (Activities to Avoid) एकादशी के व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन आवश्यक है: 1. शयन (Sleeping): सफला एकादशी के दिन बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए, बल्कि जमीन पर सोने का महत्व है। 2. आहार: इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। 3. दातुन: इस एकादशी के सुबह दातुन (toothbrushing) करने की मनाही होती है। 4. प्रकृति से जुड़ाव: सफला एकादशी के दिन किसी भी पेड़-पौधे की फूल पत्ती को तोड़ना अशुभ माना जाता है।

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Ekadashi List 2026: वर्ष 2026 की संपूर्ण एकादशी व्रत सूची | जानें कौन सी एकादशी कब है ?

Ekadashi List 2026: एकादशी व्रत से जुड़ा यह पृष्ठ यह जानकारी तो देता ही है कि एकादशी कब है, लेकिन साथ ही इस पर्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं की भी विस्तार से विवेचना करता है। हिंदू धर्म में एकादशी या ग्यारस एक महत्वपूर्ण तिथि है। एकादशी व्रत की बड़ी महिमा है। एक ही दशा में रहते हुए अपने आराध्य देव का पूजन व वंदन करने की प्रेरणा देने वाला व्रत ही एकादशी व्रत कहलाता है। पद्म पुराण के अनुसार स्वयं महादेव ने नारद जी को उपदेश देते हुए कहा था, एकादशी महान पुण्य देने वाली होती है। कहा जाता है कि जो मनुष्य एकादशी का व्रत रखता है उसके पितृ और पूर्वज कुयोनि को त्याग स्वर्ग लोक चले जाते हैं। आइए, एकादशी से जुड़े अनेकानेक आयामों को गहराई से देखते हैं– क्या है एकादशी:What is Ekadashi ? हिंदू पंचांग की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। एकादशी Ekadashi संस्कृत भाषा से लिया गया शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘ग्यारह’। प्रत्येक महीने में एकादशी दो बार आती है–एक शुक्ल पक्ष के बाद और दूसरी कृष्ण पक्ष के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं। प्रत्येक पक्ष की एकादशी का अपना अलग महत्व है। वैसे तो हिन्दू धर्म में ढेर सारे व्रत आदि किए जाते हैं लेकिन इन सब में एकादशी का व्रत सबसे पुराना माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस व्रत की बहुत मान्यता है। एकादशी का महत्व:Importance of Ekadashi पुराणों के अनुसार एकादशी Ekadashi को ‘हरी दिन’ और ‘हरी वासर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को वैष्णव और गैर-वैष्णव दोनों ही समुदायों द्वारा मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि एकादशी व्रत हवन, यज्ञ , वैदिक कर्म-कांड आदि से भी अधिक फल देता है। इस व्रत को रखने की एक मान्यता यह भी है कि इससे पूर्वज या पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। स्कन्द पुराण में भी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में बताया गया है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है उनके लिए एकादशी के दिन गेहूं, मसाले और सब्जियां आदि का सेवन वर्जित होता है। भक्त एकादशी व्रत की तैयारी एक दिन पहले यानि कि दशमी से ही शुरू कर देते हैं। दशमी के दिन श्रद्धालु प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करते हैं और इस दिन वे बिना नमक का भोजन ग्रहण करते हैं। एकादशी व्रत का नियम:Ekadashi fasting rules एकादशी Ekadashi व्रत करने का नियम बहुत ही सख्त होता है जिसमें व्रत करने वाले को एकादशी तिथि के पहले सूर्यास्त से लेकर एकादशी के अगले सूर्योदय तक उपवास रखना पड़ता है। यह व्रत किसी भी लिंग या किसी भी आयु का व्यक्ति स्वेच्छा से रख सकता है। एकादशी व्रत करने की चाह रखने वाले लोगों को दशमी (एकादशी से एक दिन पहले) के दिन से कुछ जरूरी नियमों को मानना पड़ता है। दशमी के दिन से ही श्रद्धालुओं को मांस-मछली, प्याज, दाल (मसूर की) और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। रात के समय भोग-विलास से दूर रहते हुए, पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन सुबह दांत साफ़ करने के लिए लकड़ी का दातून इस्तेमाल न करें। इसकी जगह आप नींबू, जामुन या फिर आम के पत्तों को लेकर चबा लें और अपनी उँगली से कंठ को साफ कर लें। इस दिन वृक्ष से पत्ते तोड़ना भी ‍वर्जित होता है इसीलिए आप स्वयं गिरे हुए पत्तों का इस्तेमाल करें और यदि आप पत्तों का इतज़ाम नहीं कर पा रहे तो आप सादे पानी से कुल्ला कर लें। स्नान आदि करने के बाद आप मंदिर में जाकर गीता का पाठ करें या फिर पंडितजी से गीता का पाठ सुनें। सच्चे मन से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जप करें। भगवान विष्णु का स्मरण और उनकी प्रार्थना करें। इस दिन दान-धर्म की भी बहुत मान्यता है इसीलिए अपनी यथाशक्ति दान करें। एकादशी Ekadashi के अगले दिन को द्वादशी के नाम से जाना जाता है। द्वादशी दशमी और बाक़ी दिनों की तरह ही आम दिन होता है। इस दिन सुबह जल्दी नहाकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और सामान्य भोजन को खाकर व्रत को पूरा करते हैं। इस दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न और दक्षिणा आदि देने का रिवाज़ है। ध्यान रहे कि श्रद्धालु त्रयोदशी आने से पहले ही व्रत का पारण कर लें। इस दिन कोशिश करनी चाहिए कि एकादशी व्रत का नियम पालन करें और उसमें कोई चूक न हो। एकादशी व्रत का भोजन:Ekadashi fasting food शास्त्रों के अनुसार श्रद्धालु एकादशी के दिन आप इन वस्तुओं और मसालों का प्रयोग अपने व्रत के भोजन में कर सकते हैं– ताजे फल मेवेचीनीकुट्टूनारियलजैतूनदूधअदरककाली मिर्चसेंधा नमकआलूसाबूदानाशकरकंद एकादशी व्रत का भोजन सात्विक होना चाहिए। कुछ व्यक्ति यह व्रत बिना पानी पिए संपन्न करते हैं जिसे निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। What not to do on Ekadashi:एकादशी को क्या न करें वृक्ष से पत्ते न तोड़ें।घर में झाड़ू न लगाएं। ऐसा इसीलिए किया जाता है क्यूंकि घर में झाड़ू आदि लगाने से चीटियों या छोटे-छोटे जीवों के मरने का डर होता है। और इस दिन जीव हत्या करना पाप होता है।बाल नहीं कटवाएं। ज़रूरत हो तभी बोलें। कम से कम बोलने की कोशिश करें। ऐसा इसीलिए किया जाता है क्यूंकि ज्यादा बोलने से मुँह से गलत शब्द निकलने की संभावना रहती है। एकादशी के दिन चावल का सेवन भी वर्जित होता है।  किसी का दिया हुआ अन्न आदि न खाएं।मन में किसी प्रकार का विकार न आने दें।यदि कोई फलाहारी है तो वे गोभी, पालक, शलजम आदि का सेवन न करें। वे आम, केला, अंगूर, पिस्ता और बादाम आदि का सेवन कर सकते है। एकादशी व्रत कथा:Ekadashi fast story हर व्रत को मनाये जाने के पीछे कोई न कोई धार्मिक वजह या कथा छुपी होती है। एकादशी व्रत मनाने के पीछे भी कई कहानियां है। एकादशी व्रत कथा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। जैसा कि हम सब जानते हैं एकादशी प्रत्येक महीने में दो बार आती है, जिन्हें हम अलग-अलग नामों से जानते हैं। सभी एकादशियों के पीछे अपनी अलग कहानी छुपी है। एकादशी व्रत के दिन उससे जुड़ी व्रत कथा सुनना अनिवार्य होता है। शास्त्रों के अनुसार बिना एकादशी

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Devuthani Ekadashi

Devuthani Ekadashi 2025 Date And Time: कब जागेंगे भगवान विष्णु? नोट करें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Kab Hai Devuthani Ekadashi 2025: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi), देव प्रबोधिनी एकादशी (Dev Prabodhini Ekadashi) या देवोत्थान एकादशी के नाम से जाना जाता है. Devuthani Ekadashi यह वह पावन दिन है जब जगत के पालनहार भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग-निद्रा (नींद) से जागते हैं. भगवान विष्णु के जागने के साथ ही पिछले चार महीनों से बंद हुए सभी मांगलिक काम, जैसे विवाह आदि, Devuthani Ekadashi एक बार फिर से शुरू हो जाते हैं. यह दिन एक नए और शुभ समय की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. देव उठनी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त (DevUthani Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) हिंदू पंचांग के अनुसार, Devuthani Ekadashi देवउठनी एकादशी कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की तिथि को पड़ती है. विवरण (Detail) तिथि एवं समय (Date & Time) कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि प्रारंभ 01 नवंबर 2025, सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त 02 नवंबर 2025, सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर देवउठनी एकादशी 2025 (गृहस्थों के लिए) 01 नवंबर 2025 देवउठनी एकादशी (वैष्णवों के लिए) 02 नवंबर 2025 ध्यान दें: इस वर्ष एकादशी का मान दो दिन (1 और 2 नवंबर) है. गृहस्थ लोग सामान्य पंचांग के अनुसार 1 नवंबर को व्रत रखेंगे, जबकि वैष्णव परंपरा में हरिवासर (भगवान विष्णु के जागने का सटीक मुहूर्त) के कारण 2 नवंबर को व्रत रखा जाता है. देव उठनी एकादशी का महत्व और चातुर्मास का समापन देव उठनी एकादशी Devuthani Ekadashi का महत्व सिर्फ भगवान विष्णु के जागने तक ही सीमित नहीं है, Devuthani Ekadashi बल्कि यह सनातन धर्म में एक नए और अत्यंत शुभ समय के आगमन का प्रतीक है. 1. मांगलिक कार्यों की शुरुआत: इस दिन भगवान विष्णु के जागने से चार महीने के चातुर्मास का अंत होता है. चातुर्मास के दौरान बंद हुए सभी मांगलिक काम (Auspicious activities) जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और यज्ञोपवीत संस्कार आदि, फिर से शुरू हो जाते हैं. 2. पापों का नाश: ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने और व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. साथ ही, व्रत रखने और भगवान विष्णु का ध्यान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है. 3. माता लक्ष्मी की कृपा: यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त करने का एक विशेष अवसर होता है. देव उठनी एकादशी 2025 पूजा विधि (Puja Vidhi) इस शुभ दिन पर, भक्तजन उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना करते हैं. पूजन विधि के चरण: तैयारी: एकादशी के एक दिन पहले, शाम के समय सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थल को साफ करें. पीले रंग के कपड़े पहनें. अभिषेक: घर के मंदिर में दीप जलाएं. भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें और उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं. जल, दूध, और गंगा जल से अभिषेक करें. सामग्री अर्पण: भगवान विष्णु को पीला चंदन, पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत का भोग लगाएं. अन्य सामग्री: पूजा में नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूपबत्ती, दीपक, घी, अक्षत (चावल), मिठाई, और मौसमी फल जैसे मूली, शकरकंद, सिंघाड़ा, आंवला, बेर, सीताफल और अमरुद भी अर्पित करने चाहिए. भोग में तुलसी: ध्यान रहे, भगवान विष्णु को बिना तुलसी के भोग अर्पित नहीं किया जाता. कथा श्रवण: दीपक और धूप जलाकर व्रत कथा सुनें या पढ़ें. आरती: पूजा के अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें और उन्हें सात्विक भोग लगाएं. भगवान विष्णु पूजन मंत्र और तुलसी विवाह इस दिन भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है: 1. ॐ विष्णवे नमः।। 2. ॐ नमो नारायण। श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि।। तुलसी विवाह का महत्व: Devuthani Ekadashi देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम रूप और माता तुलसी का विवाह किया जाता है. तुलसी विवाह का आयोजन करने से घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है. देवउठनी एकादशी व्रत पारण का समय (Parana Timing) एकादशी व्रत का पारण (व्रत तोड़ना) अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है. 1 नवंबर को व्रत रखने वाले (गृहस्थ): 2 नवंबर 2025 को पारण करेंगे.     पारण समय: 01:11 P.M. से 03:23 P.M. तक.     हरि वासर समाप्त होने का समय (2 नवंबर): 12:55 P.M.. 2 नवंबर को व्रत रखने वाले (वैष्णव): 3 नवंबर 2025 को पारण करेंगे.     पारण समय: 06:34 A.M. से 08:46 A.M. तक.     (ध्यान दें: इस दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी).

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Rama Ekadashi 2025

Rama Ekadashi 2025: बंद किस्मत के दरवाजे खोल देगा ये मंत्र, रमा एकादशी पर जरूर करें जाप

Rama Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी को बहुत शुभ और खास माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता और आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं।  Rama Ekadashi 2025: इस विशेष अवसर पर कुछ विशेष मंत्रों का जप करने से शुभ फल कई गुना बढ़ जाते हैं और Rama Ekadashi 2025 मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। Rama Ekadashi 2025 तो आइए जानते हैं कि रमा एकादशी के दिन कौन से मंत्रों का जाप करना चाहिए। Rama Ekadashi 2025:एकादशी मंत्र ऊँ श्री त्रिपुराय विद्महे तुलसी पत्राय धीमहि तन्नो: तुलसी प्रचोदयात।ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।। तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया ।। लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया ।। वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी || एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत || महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी ।आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते । देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः !नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।। दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।। शांताकारम भुजङ्गशयनम पद्मनाभं सुरेशम।विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम। लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम। ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि। मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा ।बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् ।करोमि यद्यत्सकलं परस्मै ।नारायणयेति समर्पयामि ॥ भगवान विष्ण के मंत्र अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।। कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।प्रणत क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् || ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् || श्री विष्णु स्तोत्र किं नु नाम सहस्त्राणि जपते च पुन: पुन: ।यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशव: ।। मत्स्यं कूर्मं वराहं च वामनं च जनार्दनम् ।गोविन्दं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम् ।। पदनाभं सहस्त्राक्षं वनमालिं हलायुधम् ।गोवर्धनं ऋषीकेशं वैकुण्ठं पुरुषोत्तमम् ।। विश्वरूपं वासुदेवं रामं नारायणं हरिम् ।दामोदरं श्रीधरं च वेदांग गरुड़ध्वजम् ।। अनन्तं कृष्णगोपालं जपतो नास्ति पातकम् ।गवां कोटिप्रदानस्य अश्वमेधशतस्य च ।। कन्यादानसहस्त्राणां फलं प्राप्नोति मानव:अमायां वा पौर्णमास्यामेकाद्श्यां तथैव च ।। संध्याकाले स्मरेन्नित्यं प्रात:काले तथैव च ।मध्याहने च जपन्नित्यं सर्वपापै: प्रमुच्यते ।।

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Rama Ekadashi

Rama Ekadashi 2025 Date And Time: किस दिन मनाई जाएगी रमा एकादशी? यहां जानें शुभ मुहूर्त एवं महत्व

Rama Ekadashi Kab Hai: धार्मिक मत है कि एकादशी व्रत करने से जातक की हर मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। यह व्रत परम फलदायी है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन सफेद और पीले रंग की चीजों का दान करने से उत्तम फल मिलता है। रमा एकादशी हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और भगवद्गीता का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस दिन हिंदू व्रत भी रखते हैं। इस दिन का महत्व भगवान कृष्ण ने बताया था और ब्रह्म वैवर्त पुराण में वर्णित है। रमा एकादशी हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन आती है, जो आमतौर पर अप्रैल में पड़ता है। यह दिन भगवान विष्णु के अवतार, भगवान राम को समर्पित है और समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। कब मनाई जाती है रमा एकादशी:When is Rama Ekadashi celebrated? हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रमा एकादशी मनाई जाती है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है। रमा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेघ यज्ञ समान फल मिलता है। रमा एकादशी (Rama Ekadashi 2025) वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 17 अक्टूबर को है। इस तिथि की शुरुआत 16 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 17 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 12 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन होगा। इस प्रकार 17 अक्टूबर को रमा एकादशी मनाई जाएगी। कब मनाई जाती है देवउठनी एकादशी:When is Devuthani Ekadashi celebrated? कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इसके एक दिन बाद तुलसी विवाह मनाया जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन से चातुर्मास समाप्त होता है। इससे पहले आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास शुरू होता है। इस दिन से भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं। देवउठनी एकादशी व्रत करने से समस्त दुखों का नाश होता है। देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2025) वैदिक पंचांग के अनुसार, 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि शुरू होगी और 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त होगी। उदया तिथि गणना से 01 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। रमा एकादशी का महत्व:Importance of Rama Ekadashi शास्त्रों के अनुसार, मुचुकुंद नाम का एक राजा था। वह एक समृद्ध राज्य पर शासन करता था और उसके मित्रों में भगवान इंद्र, भगवान वरुण और भगवान कुबेर शामिल थे। वह भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था और उसे एक कन्या का आशीर्वाद प्राप्त हुआ जिसका नाम चंद्रभागा रखा गया। बाद में उसका विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र राजकुमार शोभन से हुआ। चंद्रभागा एकादशी का व्रत रखती थी, इसलिए उसने अपने ससुराल में भी इस परंपरा का पालन किया। उसने अपने पति से भी एकादशी का व्रत रखने को कहा। शोभन शारीरिक रूप से कमज़ोर महसूस करता था, इसलिए उसने व्रत रखने से इनकार कर दिया, जिससे चंद्रभागा व्यथित हो गई। उसे उसकी निराशा का एहसास हुआ, इसलिए उसने व्रत रखा, लेकिन जल्द ही वह भूख-प्यास से तड़पने लगा। राजकुमार व्रत का पालन नहीं कर सका, इसलिए सुबह होने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। भगवान राम, विष्णु के सातवें अवतार, अपने धर्म, न्याय और कर्तव्य के आदर्शों के लिए पूजनीय हैं। Rama Ekadashi रमा एकादशी भगवान राम के गुणों का सम्मान करती है और सदाचार और धार्मिकता से भरा जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन हेतु उनका आशीर्वाद मांगती है। भगवान राम का स्मरण करके, भक्तगण स्वयं को सत्य, सम्मान और कर्तव्य के उनके सिद्धांतों के साथ संरेखित करना चाहते हैं। Rama Ekadashi रमा एकादशी के पुण्य से शोभन को एक विशाल, किन्तु अदृश्य राज्य प्राप्त हुआ। एक बार, उसकी पत्नी के राज्य का एक ब्राह्मण भ्रमण पर निकला, तभी रास्ते में उसे वह राज्य मिला। शोभन ने उसे बताया कि Rama Ekadashi रमा एकादशी की कृपा से उसे राज्य प्राप्त हुआ है। उसने ब्राह्मण से कहा कि वह अपनी पत्नी को अपने राज्य के बारे में बताए। ब्राह्मण ने लौटकर चंद्रभागा को पूरी घटना बताई। चंद्रभागा, जो बचपन से ही एकादशी व्रत करती थी, ने अपने पुण्य से उसके राज्य को प्राप्त कर लिया। इसके बाद वे दोनों सुखपूर्वक रहने लगे। Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, जीवन में मिलेंगे सभी सुख एकादशी की कथा:Story of Ekadashi रमा एकादशी Rama Ekadashi का महत्व माया नामक राक्षसी की कथा से जुड़ा है , जिसे भगवान राम ने पराजित किया था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माया एक राक्षसी थी जिसने देवताओं और मनुष्यों दोनों को कष्ट और पीड़ा पहुँचाई थी। उसे पराजित करके, भगवान राम ने अपनी शक्ति और धर्म का प्रदर्शन किया। ऐसा माना जाता है कि रमा एकादशी का व्रत करने से भक्तों को अपनी बाधाओं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद मिलती है, ठीक उसी तरह जैसे भगवान राम ने माया पर विजय प्राप्त की थी। रमा एकादशी व्रत के लाभ:Benefits of Rama Ekadashi fast कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को Rama Ekadashi रमा एकादशी कहते हैं। इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । व्यक्ति को वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में बाधाओं से ग्रस्त है, तो उसे भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करनी चाहिए। रमा एकादशी Rama Ekadashi का व्रत रखने वाले सभी भक्तों को अनाज और चावल से बने भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए (अन्य नियम एकादशी व्रत के समान ही हैं)। इसके अलावा, इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करने से व्यक्ति के जीवन के सभी पिछले पाप धुल जाते हैं। भगवान विष्णु मोती, रत्न आदि से भी प्रसन्न होते हैं। रमा एकादशी पर मुख्य अभ्यास:Main practices on Rama Ekadashi कठोर

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Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, जीवन में मिलेंगे सभी सुख

Papankusha Ekadashi: सनातन धर्म में, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की सभी तिथियों का विशेष महत्व होता है, जिसमें एकादशी तिथि भी शामिल है. वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को (Papankusha Ekadashi) पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है. इस व्रत को करने से सभी पापों से भी छुटकारा मिलता है. पापांकुशा एकादशी 03 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी शुभ माना गया है। एकादशी के दिन महादेव की पूजा करने से जीवन खुशहाल रहता है और बिगड़े काम पूरे होते हैं। अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर विशेष चीजें अर्पित करें। इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी। पापांकुशा एकादशी 2025 कब है? (Papankusha Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में पापांकुशा एकादशी 03 अक्टूबर को मनाई जाएगी. तिथि की शुरुआत: आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 02 अक्टूबर को शाम 07 बजकर 10 मिनट पर होगी. तिथि का समापन: एकादशी तिथि का समापन 03 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 32 मिनट पर होगा. व्रत का पारण: व्रत का पारण 04 अक्टूबर को किया जाएगा. एकादशी पर क्यों करें भगवान शिव की पूजा:Why worship Lord Shiva on Ekadashi? पापांकुशा एकादशी Papankusha Ekadashi पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है. लेकिन, इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है. एकादशी के दिन महादेव की पूजा करने से जीवन खुशहाल रहता है, और साधक के बिगड़े काम पूरे होते हैं. अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर विशेष चीजें अर्पित करनी चाहिए. इससे शुभ फल की प्राप्ति होगी. शिवलिंग पर क्या-क्या चढ़ाएं और क्या लाभ मिलेगा:What should be offered to Shivling and what will be the benefit? यदि आप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता चाहते हैं, तो Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के दिन निम्नलिखित चीजें शिवलिंग पर अर्पित करें: 1. आर्थिक तंगी होगी दूर: कच्चे चावल (Raw Rice) अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी (Financial Difficulties) का सामना कर रहे हैं, तो Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के दिन शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करें. इसके साथ ही, महादेव से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें. धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और आपकी आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है. 2. मिलेगा मनचाहा वर: घी (Ghee) शिवलिंग पर घी अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है. एकादशी के दिन महादेव का घी से अभिषेक करने से साधक को मनचाहे वर (Desired Spouse) की प्राप्ति होती है और जीवन में सफलता (Success) मिलती है. 3. जीवन में मिलेंगे सभी सुख: गन्ने का रस (Sugarcane Juice) जीवन में सभी सुखों (All Worldly Comforts) की प्राप्ति के लिए Papankusha Ekadashi पापांकुशा एकादशी के अवसर पर शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें. ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं और उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. भगवान शिव के मुख्य मंत्र:Main mantras of Lord Shiva शिवलिंग पर अभिषेक और पूजन करते समय आप इन पवित्र मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं: 1. शिव जी का मूल मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥ 2. महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ 3. रूद्र मंत्र: ॐ नमो भगवते रूद्राय। 4. रूद्र गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

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Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन, पापों से मिलेगा छुटकारा

Papankusha Ekadashi 2025: पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी व्रत (Papankusha Ekadashi 2025) एकादशी व्रत को अधिक शुभ माना जाता है। व्रत (Papankusha Ekadashi 2025 Vrat Niyam) के दौरान चावल और अन्न का सेवन वर्जित है। इससे भगवान विष्णु जी नाराज हो सकते हैं। आइए जानते हैं एकादशी में किन चीजों का सेवन कर सकते हैं। सनातन धर्म में जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर किया जाता है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी (Ekadashi Vrat Kab Hai) के नाम से जाना जाता है। इस दिन जीवन में सभी तरह के सुखों की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है। व्रत के दौरान खानपान के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। माना जाता है कि नियम का पालन न करने से साधक शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रहता है और जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं पापंकुशा एकादशी व्रत (Papankusha Ekadashi Vrat Me kya khayen) में क्या खाएं और क्या न खाएं? Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन पापों से मिलेगा छुटकारा एकादशी व्रत में करें इन चीजों का सेवन:Consume these things during Ekadashi fast पापांकुशा एकादशी व्रत में दही, दूध, फल का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा आलू साबूदाने की सब्जी, कुट्टू के आटे की रोटी, मिठाई और पंचामृत भी भोग थाली में शामिल कर सकते हैं। जरूर लगाएं भोग:Please enjoy एक बात का विशेष ध्यान रखें कि इन चीजों का सेवन करने से पहले प्रभु को भोग जरूर लगाएं। साथ ही तुलसी दल को शामिल करें, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते भूलकर भी न तोड़ें। मान्यता है कि एकादशी का धन की देवी मां लक्ष्मी व्रत करती हैं। ऐसे में तुलसी के पत्ते तोड़ने से उनका व्रत खंडित हो सकता है। इसलिए एकादशी से एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें। न करें इन चीजों का सेवन:Do not consume these things यदि आप पापांकुशा एकादशी व्रत में व्रत रख रहे हैं, तो खानपान का विशेष ध्यान रखें। व्रत के दौरान अन्न और चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मांस-मदिरा और तामसिक चीजों के सेवन से भी दूर रहना चाहिए। साथ ही भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस मंत्र का करें जप:Chant this mantra भोग लगाते समय निम्न मंत्र का जप करें। मान्यता है कि मंत्र के जप के बिना प्रभु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।

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Papankusha Ekadashi 2025 Date And Time: कब मनाई जाएगी इस साल पापांकुशा एकादशी? नोट कर लें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Papankusha Ekadashi 2025 Date: पापांकुशा एकादशी, जिसे पुण्य व्रत या शरीर एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में विशेष स्थान रखती है। यह एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन भक्त अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पापांकुशा एकादशी का व्रत आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। Papankusha Ekadashi 2025 Kab Hai: सनातन धर्म में आश्विन माह का विशेष महत्व है. यह महीना मां दुर्गे की आराधना का है. देवी मां दुर्गा व उनके नौ रूपों की विधि विधान से पूजा कर भक्त उनका आशीर्वाद पाता है. वहीं नवरात्रि और दशमी तिथि के बाद हर साल आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पापांकुशा एकादशी व्रत रखने का विधान है. Papankusha Ekadashi 2025 पापांकुशा एकादशी का व्रत का संकल्प करने से व्रती के सभी दुख दूर होते हैं और जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है. लक्ष्मी नारायण की विशेष कृपा पाने के लिए इस दिन भक्त पूरे विधि विधान से शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. पापांकुशा एकादशी 2025 (Papankusha Ekadashi 2025) Papankusha Ekadashi 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल एकादशी तिथि 02 अक्टूबर की शाम को 07:10 बजे मिनट पर शुरू हो रही है और 03 अक्टूबर को शाम 06:32 पर तिथि का समापन हो रहा है. इस तरह उदयातिथि में 03 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी व्रत रखा जाएगा. 3 अक्टूबर को ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाएगी. वहीं पापांकुशा एकादशी पारण शुभ मुहूर्त में सुबह 06:15 बजे से लेकर 08:37 के बीच किया जा सकेगा. पापांकुशा एकादशी 2025 पर महत्वपूर्ण समय Papankusha Ekadashi Important Time सूर्योदय 03 अक्टूबर, 2025 सुबह 6:23 बजे सूर्यास्त 3 अक्टूबर, 2025 शाम 6:08 बजे एकादशी तिथि प्रारंभ 2 अक्टूबर, 2025 शाम 7:11 बजे एकादशी तिथि समाप्त 03 अक्टूबर, 2025 शाम 6:33 बजे हरि वासरा अंतिम क्षण 04 अक्टूबर, 2025 12:12 पूर्वाह्न द्वादशी समाप्ति क्षण 04 अक्टूबर, 2025 शाम 5:09 बजे पारणा समय 4 अक्टूबर, सुबह 6:23 – 4 अक्टूबर, सुबह 8:44 पापांकुशा एकादशी का महत्व (Papankusha Ekadashi Ka Mahatav) पापांकुशा एकादशी व्रत कथा (Papankusha Ekadashi Vrat Katha) Papankusha Ekadashi 2025 प्राचीन काल में देवों और असुरों के बीच एक महान युद्ध हुआ था। इस युद्ध में देवता हारे और वे पृथ्वी पर आने लगे। असुरों ने देवताओं की स्त्री रूपिणी शक्ति को बंदी बना लिया। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और पपांकुशा एकादशी के दिन देवताओं की स्त्री रूपिणी शक्ति को मुक्त किया। व्रत के प्रभाव से देवता और असुर दोनों का कल्याण हुआ और पापों का नाश हुआ। Papankusha Ekadashi 2025 इस दिन की विशेषता यह है कि यह व्रत पापों को समाप्त करने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। पापांकुशा एकादशी व्रत विधि (Papankusha Ekadashi Vrat Vidhi) पापांकुशा एकादशी के लाभ (Papankusha Ekadashi Ke Labh) पापांकुशा एकादशी का संदेश (Papankusha Ekadashi 2025 Ka Sandesh) Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी हमें यह सिखाती है कि जीवन में पापों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है भगवान विष्णु की भक्ति और सच्ची श्रद्धा। इस व्रत से व्यक्ति अपने पापों को समाप्त करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। यह व्रत आत्मा की शुद्धि और जीवन की सही दिशा में चलने की प्रेरणा देता है Indira Ekadashi 2025 Date: इंदिरा एकादशी पितरों को मोक्ष और जीवन में सुख-समृद्धि दिलाने वाला पावन व्रत

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Indira Ekadashi 2025 Date: इंदिरा एकादशी पितरों को मोक्ष और जीवन में सुख-समृद्धि दिलाने वाला पावन व्रत

Indira Ekadashi: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और इनमें इंदिरा एकादशी (Indira Ekadashi 2025) का स्थान अत्यंत पवित्र है। यह व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली यह एकमात्र एकादशी है, जो इसे पितरों के उद्धार और मोक्ष के लिए समर्पित एक खास अवसर बनाती है। Indira Ekadashi इस दिन भगवान लक्ष्मी नारायण जी की विधिवत पूजा करने और व्रत रखने से न केवल साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बल्कि पितरों को भी नरक की यातनाओं से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए, इंदिरा एकादशी 2025 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व को विस्तार से जानते हैं। इंदिरा एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त:Date and auspicious time of Indira Ekadashi 2025 वैदिक पंचांग के अनुसार, इंदिरा एकादशी 2025: इंदिरा एकादशी 2025 की तिथि: बुधवार, 17 सितंबर 2025 एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 सितंबर को देर रात 12 बजकर 21 मिनट पर (कुछ स्रोतों में 16 सितंबर 2025 को मध्य रात्रि 12:21 बजे से शुरू होने का भी उल्लेख है) एकादशी तिथि समाप्त: 17 सितंबर को देर रात 11 बजकर 39 मिनट पर सनातन धर्म में उदया तिथि मान्य है, जिसके अनुसार सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इसलिए, Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी 17 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। पूजा के शुभ मुहूर्त:Auspicious time of puja • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 33 मिनट से सुबह 05 बजकर 20 मिनट तक • लाभ मुहूर्त (सुबह): सुबह 05:32 बजे से 07:04 बजे तक • अमृत मुहूर्त (सुबह): सुबह 07:04 बजे से 08:36 बजे तक • शुभ मुहूर्त (दोपहर): सुबह 10:08 बजे से 11:40 बजे तक • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:18 बजे से दोपहर 03:07 बजे तक • लाभ मुहूर्त (शाम): शाम 04:15 बजे से 05:47 बजे तक • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:24 बजे से शाम 06:47 बजे तक (अन्य स्रोत में 05:45 बजे से 06:10 बजे तक) • चर मुहूर्त (मध्यरात्रि): रात 10:11 बजे से 11:40 बजे तक • निशिता मुहूर्त (मध्यरात्रि): रात 11:16 बजे से 12:03 बजे तक इंदिरा एकादशी पारण का समय:Time of Indira Ekadashi Paran • इंदिरा एकादशी का पारण 18 सितंबर 2025 को किया जाएगा। • पारण का शुभ मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 07 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक (अन्य स्रोत में 05:33 बजे से 07:04 बजे तक) इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें और अन्न व धन का दान कर व्रत खोलें। इंदिरा एकादशी का महत्व: Significance of Indira Ekadashi सनातन धर्म में Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी का खास महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और पितृ पक्ष में पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। • पितरों को मोक्ष: धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से न केवल साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बल्कि उनके पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है और उन्हें नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है। • पितृ दोष का निवारण: जिन व्यक्तियों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है, क्योंकि यह दोष को शांत करने में मदद करता है। इसे श्राद्ध एकादशी भी कहा जाता है, और इस दिन पितरों का श्राद्ध व तर्पण अत्यंत शुभ माना गया है। • पापों से मुक्ति: नारद मुनि ने राजा इंद्रसेन को बताया था कि यह व्रत न केवल पितरों को मुक्ति दिलाता है, बल्कि व्रत करने वाले के स्वयं के पापों का भी नाश करता है। • सुख-समृद्धि: मान्यता है कि इस व्रत को करने से साधक को जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है और सभी सुखों को भोगकर वह बैकुंठ धाम को जाता है। • अश्वमेध यज्ञ के समान फल: शास्त्रों में कहा गया है कि Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। • अकाल मृत्यु से मुक्ति: मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों को भी मुक्ति मिल जाती है। इंदिरा एकादशी की पूजा विधि:Puja Vidhi of Indira Ekadashi इंदिरा एकादशी Indira Ekadashi का व्रत दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है और द्वादशी तिथि तक चलता है। 1. दशमी तिथि के दिन: • एक समय भोजन: दशमी के दिन भक्त केवल एक समय सात्विक भोजन करते हैं। मांसाहारी भोजन, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज किया जाता है। • ब्रह्मचर्य का पालन: दशमी की रात से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। • पितृ तर्पण (वैकल्पिक): यदि संभव हो तो दशमी के दिन दोपहर में नदी या पवित्र सरोवर में पितरों के लिए तर्पण किया जा सकता है। इसमें जल और काले तिल से पितरों को अर्घ्य दिया जाता है। • घर की शुद्धि: घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। 2. एकादशी तिथि के दिन • प्रातःकाल स्नान: सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र स्नान करें। • व्रत का संकल्प: स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय कहें कि “मैं इंदिरा एकादशी का व्रत अपने पितरों को मोक्ष दिलाने और अपने पापों का नाश करने के लिए कर रहा/रही हूं।” • भगवान शालिग्राम की पूजा: भगवान शालिग्राम (विष्णु का एक रूप) या भगवान विष्णु की मूर्ति/चित्र स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य (फल, मिठाई) अर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। • इंदिरा एकादशी व्रत कथा श्रवण: एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें। • पितृ तर्पण: इस दिन दोपहर में पितरों के लिए विशेष तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। Indira Ekadashi इसमें जल, दूध, काले तिल और कुश से पितरों को तर्पण दिया जाता है। • ब्राह्मण भोजन: यदि संभव हो, तो ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें। • रात्रि जागरण: रात में जागरण कर भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें और उनकी कथाएं सुनें। 3. द्वादशी तिथि के दिन (पारण) • प्रातःकाल पूजा: सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पुनः पूजा करें। • ब्राह्मण को भोजन और दान: पारण से पहले ब्राह्मणों को भोजन कराएं

Indira Ekadashi 2025 Date: इंदिरा एकादशी पितरों को मोक्ष और जीवन में सुख-समृद्धि दिलाने वाला पावन व्रत Read More »

Parivartini Ekadashi

Parivartini Ekadashi 2025: परिवर्तिनी एकादशी 2025: कब है व्रत, जानें तारीख, महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Parivartini Ekadashi 2025: सितंबर माह में आने वाली पहली एकादशी परिवर्तिनी एकादशी (Parivartini Ekadashi) के नाम से जानी जाती है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत शुभ और लाभकारी महत्व बताया गया है, और यह व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में करवट लेते हैं, जिससे इस एकादशी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। यह व्रत करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। आइए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी 2025 की सही तारीख, इसका महत्व, पूजा विधि और व्रत पारण का समय। Parsva Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी 2025: कब है व्रत, जानें तारीख, महत्व, शुभ मुहूर्त और….. Parivartini Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी 2025 कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी की तिथि इस प्रकार है: • एकादशी तिथि का आरंभ: 3 सितंबर 2025, बुधवार को सुबह 03 बजकर 53 मिनट से होगा। • एकादशी तिथि का समापन: अगले दिन 4 सितंबर 2025, गुरुवार को सुबह 04 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। • व्रत का दिन: ऐसे में, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 3 सितंबर 2025, बुधवार को रखा जाएगा। यह सितंबर 2025 महीने का पहला एकादशी व्रत होगा। नोट: एकादशी व्रत 2025 की एक सामान्य सूची में परिवर्तिनी एकादशी की तारीख 14 सितंबर 2025 भी दी गई है। हालांकि, नवभारत टाइम्स और लाइव हिंदुस्तान जैसे प्रमुख स्रोतों ने 3 और 4 सितंबर 2025 को परिवर्तिनी एकादशी के रूप में विशेष रूप से विस्तृत जानकारी दी है। इसलिए, अधिक विशिष्ट जानकारी के आधार पर, 3 सितंबर को व्रत रखा जाएगा। Parivartini Ekadashi: परिवर्तिनी एकादशी का महत्व परिवर्तिनी एकादशी Parivartini Ekadashi को पद्म एकादशी, पार्श्व एकादशी और जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान योग निद्रा में वास कर रहे भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं। यही वजह है कि इस दिन को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी पर व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है और उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है। अंत में, व्यक्ति वैकुंठ लोक को प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में धन, धान्य, सुख और समृद्धि आती है। परिवर्तिनी एकादशी 2025 पूजा विधि परिवर्तिनी एकादशी Parivartini Ekadashi का व्रत विधि-विधान से करने पर शुभ फल प्राप्त होते हैं। यहाँ पूजा विधि के चरण दिए गए हैं: 1. सुबह उठें और संकल्प लें: परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान के बाद पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें। 2. मंदिर की सफाई और पंचामृत स्नान: इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को प्रणाम करें। पूजा के लिए मंदिर की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें और सबसे पहले भगवान विष्णु को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का मिश्रण) से स्नान कराएं। 3. सामग्री अर्पित करें: स्नान के बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, अक्षत (साबुत चावल), सुपारी और तुलसी के पत्ते अर्पित करें। 4. मंत्र जप: इस दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का लगातार जप करते रहें। 5. व्रत कथा और आरती: इसके बाद परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें। 6. व्रत पारण: एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि में किया जाता है। शुभ योग और पूजन मुहूर्त परिवर्तिनी एकादशी 2025 पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिनमें किए गए कार्य शुभ फलदायी होते हैं: • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 30 मिनट से सुबह 05 बजकर 15 मिनट तक। • रवि योग: सुबह 06 बजे से रात 11 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। • अन्य शुभ योग: इस दिन आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। परिवर्तिनी एकादशी 2025 व्रत पारण का समय व्रत का पारण द्वादशी तिथि में करना चाहिए। परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 4 सितंबर 2025, गुरुवार को किया जाएगा। • पारण का शुभ मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 36 मिनट से शाम 04 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। पारण करने से पहले ब्राह्मणों को भोजन करवाने या अन्न का दान करने का विधान है। एकादशी व्रत के सामान्य नियम एकादशी व्रत के कुछ सामान्य नियम भी हैं जिनका पालन करना महत्वपूर्ण है: • चावल वर्जित: एकादशी के दिन चावल और चावल से बनी चीजों का सेवन वर्जित माना गया है। • सात्विक भोजन: मांस-मदिरा, लहसुन, प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। • संयम: इस दिन स्त्री-पुरुष को संयम भाव से रहना चाहिए और मन तथा वाणी से किसी के प्रति द्वेष का भाव नहीं रखना चाहिए। • रात्रि जागरण: एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए रात्रि में जागरण करके भगवान का ध्यान और भजन करने का भी विधान है। • दान-पुण्य: एकादशी के दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। यह व्रत श्रद्धा और भक्तिभाव से करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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Ekadashi

Do not do this work on Ekadashi: एकादशी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम, वरना पाप के बनेंगे भागी

Do’s and Dont’s on Ekadashi: शास्त्रों में एकादशी तिथि को बहुत पवित्र बताया गया है। इस तिथि के पुण्य फल से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती है और भगवान का आशीर्वाद बना रहता है। शास्त्रों में एकादशी का महत्व बताते हुए कुछ नियम भी बताए हैं। इन नियमों के अनुसार एकादशी तिथि को भूलकर भी इन कार्यों को करने से बचना चाहिए… हिंदू धर्म में सभी तिथियों में एकादशी तिथि को सर्वश्रेष्ठ माना गया है और एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन किए गए उपवास, जप तप व ध्यान का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी का व्रत करने से सांसारिक जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है और अंत में बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है। धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि इस पुण्य तिथि पर कुछ ऐसे कार्य हैं, जिनको वर्जित बताया गया। ऐसा करने से जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और भगवान विष्णु की नाराजगी का भी सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि एकादशी के दिन ऐसे कौन से कार्य हैं, जिनको भूलकर भी नहीं करना चाहिए… Do not do this work on Ekadashi: एकादशी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम एकादशी तिथि पर करें यह कार्य:Do this work on Ekadashi date एकादशी के दिन रात में सोना नहीं चाहिए, यह तिथि बेहद पुण्यदायी होती है। इस तिथि को पूरी रात भगवान विष्णु के भजन गाने चाहिए, मंत्र या आरती करनी चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर पूरी रात जागरण करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और उनके आशीर्वाद से जीवन में उन्नति के योग बनते हैं। एकादशी तिथि पर ना करें इसका सेवन:Do not consume it on Ekadashi date एकादशी तिथि के दिन भूलकर भी चावल नहीं खाने चाहिए, चाहे आप उपवास ना भी रख रहे हों। धार्मिक कथाओं के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाली योनि में जन्म लेता है। हालांकि अगर आप द्वादशी तिथि को चावल खाते हैं तो आपको इस योनि से मुक्ति भी मिल जाती है। अजा एकादशी अगस्त में कब ? जानें डेट, इस एकादशी को करने से क्या लाभ मिलता है एकादशी तिथि पर ना करें ये कार्य:Do not do these things on Ekadashi date एकादशी के दिन दातुन या मंजन करना वर्जित बताया गया है। इसके साथ ही इस दिन क्रोध करना, झूठ बोलना, चुगली करना और दूसरों की बुराई करना, ऐसी चीजों से बचना चाहिए। ऐसा करने से ना केवल परिवार बल्कि पूरे समाज में सम्मान नहीं मिलता और पाप के भागी भी बनते हैं। इन सब कार्यों के करने से अच्छा है कि इस दिन भगवान विष्णु का भजन कर लें। एकादशी तिथि पर ध्यान रखें यह बात:Keep this thing in mind on Ekadashi date एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए, शास्त्रों में इसे वर्जित बताया गया है। वहीं द्वादशी तिथि को जब पारण करें तो तुलसी के पत्ते से ही करें। लेकिन उस दिन भी व्रती को तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए। घर में अगर बच्चा या बुजुर्ग है, जिसने एकादशी का व्रत ना किया हो, उसको पत्ता तोड़ने के लिए द्वादशी तिथि में कहना चाहिए। एकादशी तिथि पर ना करें इन चीजों का सेवन:Do not consume these things on Ekadashi date एकादशी तिथि के दिन कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनको खाने से बचना चाहिए। जैसे मसूर दाल, चना दाल, उड़द दाल, गोभी, गाजर, शलजम, पालक का साग आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन शारीरिक व मानसिक तौर पर किए जाने वाले बुरे कार्यों को करने से बचना चाहिए। शास्त्रों में एकादशी तिथि को मोक्षदायिनी तिथि कहा गया है इसलिए एकादशी तिथि के दिन इन कार्यों करने से बचना चाहिए। एकादशी तिथि पर भूलकर भी ना करें ये काम:Do not do this work even by mistake on Ekadashi date एकादशी तिथि के दिन पान खाना, चोरी करना, हिंसा करना, क्रोध करना, मैथुन, स्त्रीसंग, कपट आदि चीजों से बचना चाहिए। वहीं अगर आपसे कोई गलती हो जाए तो उसके लिए माफी मांगनी चाहिए। साथ ही इनको आदत बना लेनी चाहिए, जो आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। शारीरिक व मानसिक तौर पर अगर आप किसी को नुकसान पहुंचाते हैं तो यह बहुत गलत है, ऐसा करने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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Aja Ekadashi Vrat Katha

Aja Ekadashi Vrat Katha In Hindi: अजा एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा ,इसके पाठ से अश्वमेध यज्ञ का मिलता फल

Aja Ekadashi Vrat Katha in Hindi: अजा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति दिलाने वाला है। पद्म पुराण में वर्णित अजा एकादशी की कथा के अनुसार, इस कथा का पाठ करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। अजा एकादशी का व्रत रखने वालों को इस कथा का पाठ जरुर करना चाहिए। तभी व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। Aja Ekadashi Vrat Katha Sunne Ka Fayda :अजा एकादशी की कथा सुनने से फायदा सनातन धर्म(Sanatan Dharma) में अजा एकादशी(Aja Ekadashi) का अपना महत्व है. इस दिन व्रत रखने से कई प्रकार के दुखों से राहत मिलती है. माना जाता है कि जो भी सच्चे मन से इस व्रत को रखता है, उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते है Aja Ekadashi Vrat Katha अजा एकादशी से जुड़ी वास्तविक कथा, जिससे पढ़ने और सुनने मात्र से आपके सभी पाप खत्म हो सकते हैं.  Aja Ekadashi Vrat Katha:अजा एकादशी की व्रत कथा, भगवान राम के पूर्वज से जुड़ी है दरासल अजा एकादशी व्रत की कथा भगवान श्रीराम (Ram) के पूर्वंज इक्ष्वाकु वंश के राजा हरिश्चन्द्र(Raja Harishchandra) की है. राजा हरिश्चंद्र सत्यवादी राजा थे. जो अपने मुख से निकले वचनों और अपनी कही वाणी को पूरा करने के लिए अपनी अर्धांगिनी तारामती(Taramati) और पुत्र राहुल रोहिताश्व तक को बेच देते हैं और खुद भी एक चाण्डाल(Chanadala) की सेवा करने लग जाते हैं. अजा एकादशी अगस्त में कब ? जानें डेट, इस एकादशी को करने से क्या लाभ मिलता है गौतम ऋषि(Gautam Rishi) के कहने पर राजा हरिश्चन्द्र ने Aja Ekadashi Vrat Katha अजा एकादशी का व्रत किया, तब जाकर उन्हें कष्टों से छुटकारा मिला. आइए जानते हैं इस कथा को विस्तार से, जिसे भगवान श्रीकृष्ण(Shri Krishna) ने युधिष्ठिर(yudhishthir) समेत पांडवों को सुनाई थी.  Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी की व्रत कथा युधिष्ठिर ने कहा, “हे वासुदेव!  मैनें पुत्रदा एकादशी के बारे में सविस्तार वर्णन सुना. अब कृपा करके मुझे अजा एकादशी के बारे में विस्तार से बताएं. इस एकादशी(Ekadashi) को क्या कहते हैं और इस व्रत को करने के नियम हैं? इस व्रत को करने से किस तरह का फल मिलता है?  श्रीकृष्ण ने कहा कि, “हे कुंती पुत्र! भाद्रपद की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं. इस व्रत को करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है. इस लोक और परलोक में कल्याण करने वाली इस एकादशी व्रत के समान दुनिया में कोई दूसरा व्रत नहीं है. Aja Ekadashi Vrat Katha अब ध्यान से इस कथा को सुनिए. “पौराणिक काल में भगवान राम के वंशज में अयोध्या नगरी के राजा हरिश्चन्द्र नाम का एक राजा था. अपनी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के कारण राजा के दूर-दूर तक चर्चे थे.  एक बार सभी देवताओं ने राजा की परीक्षा लेने की योजना बनाई, राजा ने सपना देखा की ऋषि विश्वामित्र को उन्होंने अपना सारा वैभव दे दिया है. अगली सुबह राजा जब उठा तो सच में विश्वामित्र राजा के द्वार पर खड़े थे. Aja Ekadashi Vrat Katha विश्वामित्र ने राजा हरिश्चन्द्र से कहा, कल रात जो तुमने सपने में मुझे अपना सारा राज-पाठ दान कर दिया है.  राजा ने सत्यनिष्ठा की भावना के साथ अपनी तमाम संपत्ति विश्वामित्र को दान कर दी. दान दक्षिणा देने के लिए राजा हरिश्चन्द्र ने अपनी पत्नी, बेटा और खुद को बेच दिया. राजा हरिश्चन्द्र को डोम जात के एक व्यक्ति ने खरीद लिया, जो श्मशान घाट में दाह-संस्कार का काम करवाता था. राजा हरिश्चन्द्र एक चाण्डाल के सेवक बन गए. Aja Ekadashi Vrat Katha राजा ने चाण्डाल के लिए कफन लेने का कार्य भी किया, किंतु इस आपत्तिजनक काम करने के बाद भी उन्होंने कभी सच का मार्ग नहीं छोड़ा.  इस काम को करते-करते कई वर्ष बीत जाने के बाद राजा हरिश्चन्द्र को काम पर काफी अफसोस होने लगा, और वह उसे निकालने का रास्ता तलाशने लगे. राजा हरिश्चन्द्र हर वक्त इस काम से मुक्ति के रास्ते तलाशने की कोशिश करते. एक बार राजा की मुलाकात गौतम ऋषि से हुई, राजा ने गौतम ऋषि को प्रणाम कर उन्हें अपनी दुःख-भरी बात बताई.  राजा की दुःख-भरी बातों को सुनकर गौतम ऋषि को भी दुःख हुआ और उन्होंने राजा को बताया,“हे राजन! भादो माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी आती है जिसे अजा एकादशी भी कहा जाता है. तुम उस व्रत को विधि-विधान के साथ करो और रात के वक्त जागरण भी, इससे तुम्हारे सभी तरह के पाप का नाश हो जाएगा. गौतम ऋषि इतनी बात कहकर अंतर्धान हो गए.   अजा एकादशी के आने पर राजा ने महर्षि गौतम के कहे के मुताबिक ही नियमपूर्वक व्रत और रात को जागरण किया. इस व्रत को करने से राजा को सभी पापों से मुक्ति मिल गई. उस वक्त स्वर्ग में जश्न मनाया जाने लगा फूलों की बारिश होने लगी. Aja Ekadashi Vrat Katha राजा हरिश्चन्द्र ने अपने सामने ब्रह्मा, विष्णु, महेश और देवेन्द्र देवताओं को अपने सामने पाया. राजा ने अपने मृत पुत्र और पत्नी को वस्त्रों और आभूषणों से लदा देखा.  व्रत की वजह से राजा को दोबारा उसका राज्य मिल गया, असल में एक ऋषि के द्वारा राजा की परीक्षा लेने के लिए ये सब खेल रचा गया था, लेकिन अजा एकादशी के व्रत के कारण ऋषि द्वारा रची गई माया खत्म हो गई और आखिरी वक्त में हरिश्चंद्र अपने परिवार सहित स्वर्ग लोक में चले गए.  इस कथा को सुनने के बाद श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा,“हे राजन! ये सब Aja Ekadashi Vrat Katha अजा एकादशी व्रत का असर था. जो भी मनुष्य इस व्रत कथा का विधि-विधान के साथ पालन करता है और रात के वक्त जागरण तो उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है और अंत में वे स्वर्ग लोक को प्राप्त करता है. कहा जाता है कि इस एकादशी को करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है.

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