DURGA

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Shri ambikAShTottarashatanAmAvalI: श्रीअम्बिकाष्टोत्तरशतनामावली

Shri ambikAShTottarashatanAmAvalI: श्रीअम्बिकाष्टोत्तरशतनामावली ॐ अस्यश्री अम्बिकामहामन्त्रस्य मार्कण्डेय ऋषिः उष्णिक् छन्दःअम्बिका दुर्गा देवता ॥ [ श्रां – श्रीं इत्यादिना न्यासमाचरेत् ]ध्यानम्या सा पद्मासनस्था विपुलकटतटी पद्मपत्रायताक्षीगम्भीरावर्तनाभिः स्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया ।लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेन्द्रैर्मणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भैःनित्यं सा पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमाङ्गल्ययुक्ता ॥ मन्त्रः – ॐ ह्रीं श्रीं अम्बिकायै नमः ॐ ॥ ॥अथ श्री अम्बिकायाः नामावलिः ॥ ॐ अम्बिकायै नमः ।ॐ सिद्धेश्वर्यै नमः ।ॐ चतुराश्रमवाण्यै नमः ।ॐ ब्राह्मण्यै नमः ।ॐ क्षत्रियायै नमः ।ॐ वैश्यायै नमः ।ॐ शूद्रायै नमः ।ॐ वेदमार्गरतायै नमः ।ॐ वज्रायै नमः ।ॐ वेदविश्वविभागिन्यै नमः । १०ॐ अस्त्रशस्त्रमयायै नमः ।ॐ वीर्यवत्यै नमः ।ॐ वरशस्त्रधारिण्यै नमः । ॐ सुमेधसे नमः ।ॐ भद्रकाल्यै नमः ।ॐ अपराजितायै नमः ।ॐ गायत्र्यै नमः ।ॐ संकृत्यै नमः ।ॐ सन्ध्यायै नमः ।ॐ सावित्र्यै नमः । २०ॐ त्रिपदाश्रयायै नमः ।ॐ त्रिसन्ध्यायै नमः ।ॐ त्रिपद्यै नमः ।ॐ धात्र्यै नमः ।ॐ सुपथायै नमः ।ॐ सामगायन्यै नमः ।ॐ पाञ्चाल्यै नमः ।ॐ कालिकायै नमः ।ॐ बालायै नमः ।ॐ बालक्रीडायै नमः । ३० ॐ सनातन्यै नमः ।ॐ गर्भाधारायै नमः ।ॐ आधारशून्यायै नमः ।ॐ जलाशयनिवासिन्यै नमः ।ॐ सुरारिघातिन्यै नमः ।ॐ कृत्यायै नमः ।ॐ पूतनायै नमः ।ॐ चरितोत्तमायै नमः ।ॐ लज्जारसवत्यै नमः ।ॐ नन्दायै नमः । ४०ॐ भवायै नमः ।ॐ पापनाशिन्यै नमः ।ॐ पीतम्बरधरायै नमः ।ॐ गीतसङ्गीतायै नमः ।ॐ गानगोचरायै नमः ।ॐ सप्तस्वरमयायै नमः ।ॐ षद्जमध्यमधैवतायै नमः ।ॐ मुख्यग्रामसंस्थितायै नमः ।ॐ स्वस्थायै नमः ।ॐ स्वस्थानवासिन्यै नमः । ५०ॐ आनन्दनादिन्यै नमः । ॐ प्रोतायै नमः ।ॐ प्रेतालयनिवासिन्यै नमः ।ॐ गीतनृत्यप्रियायै नमः ।ॐ कामिन्यै नमः ।ॐ तुष्टिदायिन्यै नमः ।ॐ पुष्टिदायै नमः ।ॐ निष्ठायै नमः ।ॐ सत्यप्रियायै नमः ।ॐ प्रज्ञायै नमः । ६०ॐ लोकेशायै नमः ।ॐ संशोभनायै नमः ।ॐ संविषयायै नमः ।ॐ ज्वालिन्यै नमः ।ॐ ज्वालायै नमः ।ॐ विमूर्त्यै नमः ।ॐ विषनाशिन्यै नमः ।ॐ विषनागदम्न्यै नमः ।ॐ कुरुकुल्लायै नमः । ॐ अमृतोद्भवायै नमः । ७०ॐ भूतभीतिहरायै नमः ।ॐ रक्षायै नमः ।ॐ राक्षस्यै नमः ।ॐ रात्र्यै नमः ।ॐ दीर्घनिद्रायै नमः ।ॐ दिवागतायै नमः ।ॐ चन्द्रिकायै नमः ।ॐ चन्द्रकान्त्यै नमः ।ॐ सूर्यकान्त्यै नमः ।ॐ निशाचरायै नमः । ८०ॐ डाकिन्यै नमः ।ॐ शाकिन्यै नमः ।ॐ हाकिन्यै नमः ।ॐ चक्रवासिन्यै नमः ।ॐ सीतायै नमः ।ॐ सीताप्रियायै नमः ।ॐ शान्तायै नमः ।ॐ सकलायै नमः ।ॐ वनदेवतायै नमः । ॐ गुरुरूपधारिण्यै नमः । ९०ॐ गोष्ठ्यै नमः ।ॐ मृत्युमारणायै नमः ।ॐ शारदायै नमः ।ॐ महामायायै नमः ।ॐ विनिद्रायै नमः ।ॐ चन्द्रधरायै नमः ।ॐ मृत्युविनाशिन्यै नमः ।ॐ चन्द्रमण्डलसङ्काशायै नमः ।ॐ चन्द्रमण्डलवर्तिन्यै नमः ।ॐ अणिमाद्यै नमः । १००ॐ गुणोपेतायै नमः ।ॐ कामरूपिण्यै नमः ।ॐ कान्त्यै नमः ।ॐ श्रद्धायै नमः ।ॐ पद्मपत्रायताक्ष्यै नमः ।ॐ पद्महस्तायै नमः ।ॐ पद्मासनस्थायै नमः ।ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नमः । १०८॥ॐ॥

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aparAdhakShamApaNastotram:अपराधक्षमापणस्तोत्रम्

aparAdhakShamApaNastotram: अपराधक्षमापणस्तोत्रम् ॐ अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत् ।यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः ॥ १॥ सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके ।इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरु ॥ २॥ अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम् ।तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि ॥ ३॥ कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे ।गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि ॥ ४॥ सर्वरूपमयी देवी सर्वं देवीमयं जगत् ।अतोऽहं विश्वरूपां त्वां नमामि परमेश्वरीम् ॥ ५॥ यदक्षरं परिभ्रष्टं मात्राहीनञ्च यद्भवेत् ।पूर्णं भवतु तत् सर्वं त्वत्प्रसादान्महेश्वरि ॥ ६॥ यदत्र पाठे जगदम्बिके मया विसर्गबिन्द्वक्षरहीनमीरितम् ।तदस्तु सम्पूर्णतमं प्रसादतः सङ्कल्पसिद्धिश्व सदैव जायताम् ॥ ७॥ यन्मात्राबिन्दुबिन्दुद्वितयपदपदद्वन्द्ववर्णादिहीनंभक्त्याभक्त्यानुपूर्वं प्रसभकृतिवशात् व्यक्त्तमव्यक्त्तमम्ब ।मोहादज्ञानतो वा पठितमपठितं साम्प्रतं ते स्तवेऽस्मिन्तत् सर्वं साङ्गमास्तां भगवति वरदे त्वत्प्रसादात् प्रसीद ॥ ८॥ प्रसीद भगवत्यम्ब प्रसीद भक्तवत्सले ।प्रसादं कुरु मे देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥ ९॥ ॥ इति अपराधक्षमापणस्तोत्रं समाप्तम्॥

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Shravan Ashtami Vrat 2025 Date: कब है सावन की दुर्गाष्टमी, यहां जानिए मां दुर्गा की पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

Shravan Ashtami Vrat : सावन माह में केवल एक ही दुर्गाष्टमी आती है और इस दिन विधि विधान से मां दुर्गा की पूजा और व्रत करने से समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं. Sawan Durga Ashtami Date : सावन माह (sawan) में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी (Sawan Durga Ashtami) का व्रत किया जाता है. आपको बता दें कि सावन माह में केवल एक ही दुर्गाष्टमी आती है और इस दिन विधि विधान से मां दुर्गा की पूजा और व्रत करने से समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं कि सावन माह में दुर्गा अष्टमी कब पड़ रही है, साथ ही जानेंगे पूजा (Durga Ashtami puja) का शुभ मुहूर्त और उसकी विधि. हिन्दू पंचांग के अनुसार हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस दिन देवी दुर्गा के भक्त उनकी पूजा करते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है, कहा जाता है कि मां दुर्गा के सभी रूपों की व्यवस्थित तरीके से पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। मासिक दुर्गाष्टमी को मास दुर्गाष्टमी या Ashtami Vrat मासिक दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत के महत्व और मान्यताओं के बारे में: Shravan Ashtami Vrat 2025 Date: कब है सावन की दुर्गाष्टमी दुर्गाष्टमी पूजा मुहूर्त जुलाई 2025 – Durgashtami Puja Muhurat July 2025 1 अगस्त 2025, शुक्रवार को अष्टमी तिथि है। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसे Ashtami Vrat मासिक दुर्गाष्टमी के रूप में भी जाना जाता है।  1 अगस्त 2025 को, पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 31:23 तक रहेगी। मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व:Importance of monthly Durga Ashtami fast ऐसे में इस दिन देवी दुर्गा का व्रत करने से जगदंबा माता की कृपा प्राप्त होती है.भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। घर में सुख-समृद्धि आती है, सुख-समृद्धि आती है, धन-लक्ष्मी आती है। 2025 में पड़ने वाली मासिक दुर्गा अष्टमी तिथियां:Monthly Durga Ashtami dates falling in 2025: शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धालु शारदा दुर्गा की पूजा कर व्रत भी रखते हैं। Ashtami Vrat अष्टमी पूजा आप पूजा के समय के बीच में कभी भी कर सकते हैं। दुर्गा अष्टमी पूजा विधि: Durga Ashtami Puja Method दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह उठकर गंगाजल डालकर स्नान करें।लकड़ी का पाठ लें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।फिर मां दुर्गा के मंत्र का जाप करते हुए उनकी प्रतिमा या फोटो स्थापित करें।लाल या उधल के फूल, सिंदूर, अक्षत, नैवेद्य, सिंदूर, फल, मिठाई आदि से मां दुर्गा के सभी रूपों की पूजा करें।फिर धूप-दीप जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती भी करना न भूलें।इसके बाद हाथ जोड़कर उनके सामने अपनी इच्छाएं रखें।

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Shardiya Navratri 2025 Upay: शारदीय नवरात्रि में करें ये खास उपाय, हो जाएंगे मालामाल

Shardiya Navratri 2025 Upay: शारदीय नवरात्रि में किए गए कुछ उपायों से मां दुर्गा और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. यह उपाय करने से व्यक्ति को कभी भी आर्थिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है एवं उसकी धन संबंधित समस्या दूर हो जाती है. Shardiya Navratri 2025 Upay: शक्ति का पर्व नवरात्रि धन के विशेष उपायों के लिए भी शुभ और असरकारी माना जाता है. मान्यता है Navratri 2025 Upay नवरात्रि के सभी 9 दिन स्वयं सिद्ध होते हैं. इसमें कोई भी जप तप, अनुष्ठान आदि करने पर उसका फल अतिशीघ्र मिलता है. अगर आपकी तमन्ना है जीवन में खूब धन कमाने की, खूब तरक्की पाने की तो यह 9 उपाय आपके लिए ही हैं. हम आपको यहां कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जो आपको नवरात्रि में ही करने हैं. नवरात्रि का प्रत्येक दिन मंगलकारी होता है. इसमें किसी भी दिन मुहूर्त आदि की आवश्यकता नहीं होती. पालकी पर सवार होकर माता स्वयं अपने भक्तों की रक्षा करेंगी एवं उनकी मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद देंगी.  किसी भी उपाय को पूर्ण भक्ति और श्रद्धा से करें एवं इसको परीक्षा के रूप में ना करें. इन उपायों को करने के बाद आपके पास धन की कमी नहीं रहेगी. आइये विस्तार से जानते हैं इन उपायों के बारे में. Shardiya Navratri 2025 Upay:शारदीय नवरात्रि में धन प्राप्ति के उपाय 1. नवरात्रि के दिनों में हर नौ दिन हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करें. 2. इन नौ दिनों में अगर अखंड दीपक नहीं जला पा रहे हैं तो सुबह-शाम घी या तेल का दीप जलाना न भूलें. दीपक में 4 लौंग डाल दें. 3. पांच प्रकार के सूखे मेवे लाल चुनरी में रखकर माता रानी को अर्पित करें. 4. देवी मंदिर में लाल रंग की ध्वजा (पताका, परचम, झंडा) किसी भी दिन जाकर चढ़ाएं. 5. देवी मां को ताजे पान के पत्ते पर सुपारी और सिक्के रखकर समर्पित करें. 6 . मां दुर्गा को 7 इलायची और मिश्री का भोग लगाएं. 7. मखाने के साथ सिक्के मिलाकर देवी को अर्पित करें और फिर उसे गरीबों में बांट दें. 8. छोटी कन्याओं को छोटे-छोटे पर्स में दक्षिणा रखकर लाल रंग के किसी भी गिफ्ट के साथ भेंट करें. 9. नवरात्र के दौरान अपने घर में सोना या चांदी की कोई भी शुभ सामग्री (स्वास्तिक, ॐ, श्री, हाथी, कलश,दीपक, गरूड़ घंटी, पात्र, कमल, श्रीयंत्र,आचमनी, मुकुट, त्रिशूल) खरीदें और देवी दुर्गा के चरणों में रखें और इसकी पूजा करें. फिर नवरात्र के अंतिम दिन उस सामग्री को गुलाबी रेशमी कपड़े में बांधकर तिजोरी व रुपए रखने की जगह रख दें. इससे धन में वृद्धि हो सकती है. 1. सुपारी सुपारी पूजा में अर्पित की जाने वाली एक विशेष वस्तु है. सुपारी के विशेष प्रयोग से विवाह का वरदान पाया जा सकता है.  कैसे करें इसका प्रयोग एक संपूर्ण सुपारी ले लें, यह जितनी बड़ी हो उतना ज्यादा अच्छा होगा. सुपारी के चारों तरफ सिंदूर लगा लें और इसके बाद इस सिंदूर लगी हुई सुपारी को छोटे से पीले कपड़े में रख कर के देवी को अर्पित कर दें और फिर देवी से शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें. Navratri 2025 Upay इस पीले कपड़े में सुपारी को पूरे नवरात्रि तक देवी के सामने रहने दें. Navratri 2025 Upay नवरात्रि के बाद कपड़े के साथ उस सुपारी को अपने शयकक्ष में रख लें या सिरहाने के आस पास रख लें तो बहुत अच्छा होगा. और विवाह के बाद भी इस सुपारी को अपने पास रखें. यह प्रयोग करने से विवाह जल्दी होगा और बाद में इस प्रयोग से आपका वैवाहिक जीवन अच्छा बना रहेगा.  2. हल्दी हल्दी एक अद्भुत रहस्यमयी और तांत्रिक मसाला है. हल्दी का प्रयोग अगर आप करते हैं तो इससे आपको स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों प्राप्त होती है.  कैसे करें प्रयोग नवरात्रि में देवी को किसी भी दिन दो गांठें हल्दी की अर्पित करें. इसके बाद देवी के सामने श्री सूक्तम का पाठ करें. फिर देवी से धन की समस्या को दूर करने की प्रार्थना करें. नवरात्रि तक इन दोनों हल्दी की गांठों को देवी के सामने रहने दें. नवरात्रि के बाद इन दोनों हल्दी की गांठों को लाल वस्त्र में या पीले वस्त्र में लपेट कर अपने धन के स्थान पर रख दें. ऐसा करने से धन आता रहेगा और धन की बचत आप अच्छी तरह से कर पाएंगे. Navratri 2025 Upay हर नवरात्रि में पुरानी हल्दी को जल प्रवाहित कर देंगे और नवरात्रि में पूजा के बाद दो नई गांठ हल्दी की धन स्थान पर रख दें. अगर ये प्रयोग आप नवरात्रि में करते हैं तो धन का आगमन भी होगा और धन की बचत भी होगी.  3. पान का पत्ता पान का पत्ता लगभग हर पूजा में बहुतायत में प्रयोग किया जाता है. पान का पत्ता एक औषधि भी है Navratri 2025 Upay और इसके चमत्कारी प्रयोग भी होते हैं ऐसे करें प्रयोग नवरात्रि में किसी भी दिन डंठल के डंडी की साथ 27 पान के पत्ते ले लें. और डंडी से बांध करके पीले धागे में या लाल धागे में इनकी माला बना लीजिए. इनको नवरात्रि में किसी भी रात को देवी को पहना दें. इसके बाद शीघ्र रोजगार प्राप्ति की प्रार्थना करें, Navratri 2025 Upay आपको शीघ्र रोजगार की प्राप्ति होगी और अगर रोजगार में कोई दिक्कत चली आ रही है तो वो दिक्कत दूर हो जाएगी.  सामान्य जीवन में आप ऐसा करें कि हर शुक्रवार को एक पान का पत्ता लें. पत्ते का जो चिकना हिस्सा है उसको नीचे रखें और खुरदुरे हिस्से को ऊपर रखें. इसके बाद दोनों हाथों से इसे मां लक्ष्मी को अर्पित करें. Navratri 2025 Upay अगर हर शुक्रवार को आप ऐसा करते हैं तो आपको दैनिक जीवन में धन का अभाव नहीं होगा. ये बात हमेशा याद रखें कि पान का पत्ता आप अपने घर में एक लता में एक बेल में लगा लें. पान का पत्ता समृद्धि और प्रसन्नता का प्रतीक है. पान का पत्ता अगर आप अपने घर में गमले आदि में लगा लेते हैं तो उससे आपकी संपन्नता बनी रहेगी.

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Shardiya Navratri 2025 Date: शारदीय नवरात्रि की तारीख क्या है,नोट कर लें सही डेट और शुभ मुहूर्त

Navratri 2025 Date: धार्मिक मत है कि शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2025) के दौरान मां दुर्गा की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख एवं संकट दूर हो जाते हैं। शारदीय नवरात्र के दौरान साधक भक्ति भाव से मां दुर्गा और उनके रूपों की पूजा करते हैं। इस विशेष अवसर पर मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा की जाती है।  सनातन धर्म में शारदीय नवरात्र का खास महत्व है। यह पर्व हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है। Navratri 2025 Date इन दौरान जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा और उनके नौ शक्ति रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही मां दुर्गा के निमित्त नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है। धार्मिक मत है कि जगत जननी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। Navratri 2025 Date देवी मां दुर्गा अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। उनकी कृपा से भक्तजनों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। आइए, शारदीय नवरात्र की सही डेट एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं- शारदीय नवरात्रि 2025 तारीख और मुहूर्त: Shardiya Navratri 2025 Date Navratri 2025 Date पंचांग के अनुसार, आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पहली तारीख 22 सितंबर को रात 1:23 बजे से शुरू होगी और 23 सितंबर को रात 2:55 बजे खत्म होगी. इसलिए शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को समाप्त होगी. भक्त इस अवसर पर देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और कलश स्थापना के साथ हवन व कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं. यह दिन शक्ति, भक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है. वहीं बात रही शारदीय नवरात्रि की तो यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हिंदू धर्म में देवी दुर्गा की शक्ति और महत्व को दर्शाता है. Navratri 2025 Date यह त्योहार नवरात्रि के दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से मनाया जाता है, जो देवी दुर्गा की आराधना और पूजा के लिए की जाती हैं. शारदीय नवरात्रि देशभर में में धूमधाम के साथ मनाई जाती है. शारदीय नवरात्रि 2025 घटस्थापना समय (Shardiya Navratri 2025 Ghatasthapana Muhurat) Navratri 2025 Date ज्योतिषियों की मानें तो शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर घटस्थापना मुहूर्त 22 सितंबर को सुबह 06 बजकर 09 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 06 मिनट तक है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक है। इन दोनों शुभ योग समय में घटस्थापना कर मां दुर्गा की पूजा की जाएगी। शारदीय नवरात्र 2025 कैलेंडर (Shardiya Navratri 2025 Calendar) नवरात्रि Navratri Pujan Kaise kare पूजन कैसे करें आराधना नवरात्रि में कैसे करें पूजन   आइए जानें नवरात्रि में पूजन कैसे करना चाहिए और इसके क्या नियम हैं?  आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।  घर के ही किसी पवित्र स्थान पर स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं।  वेदी में जौ और गेहूं दोनों को मिलाकर बोएं।  वेदी पर या समीप के ही पवित्र स्थान पर पृथ्वी का पूजन कर वहां सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें।  इसके बाद कलश में आम के हरे पत्ते, दूर्वा, पंचामृत डालकर उसके मुंह पर सूत्र बाधें।  कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें।  इसके बाद वेदी के किनारे पर देवी की किसी धातु, पाषाण, मिट्टी व चित्रमय मूर्ति विधि-विधान से विराजमान करें।  तत्पश्चात मूर्तिका आसन, पाद्य, अर्ध, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, पुष्पांजलि, नमस्कार, प्रार्थना आदि से पूजन करें।  इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा स्तुति करें।  पाठ स्तुति करने के बाद दुर्गाजी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।  इसके बाद कन्या भोजन कराएं। फिर स्वयं फलाहार ग्रहण करें।  प्रतिपदा के दिन घर में ही जवारे बोने का भी विधान है। नवमी के दिन इन्ही जवारों को सिर पर रखकर किसी नदी या तालाब में विसर्जन करना चाहिए। अष्टमी तथा नवमी महातिथि मानी जाती हैं।  इन दोनों दिनों में पारायण के बाद हवन करें फिर यथा शक्ति कन्याओं को भोजन कराना चाहिए।  Navratri Mein Kya kare Kya Na kare: नवरात्रि में क्या करें, क्या न करें   इन दिनों व्रत रखने वाले को जमीन पर सोना चाहिए।  ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।  व्रत करने वाले को फलाहार ही करना चाहिए।  नारियल, नींबू, अनार, केला, मौसमी और कटहल आदि फल तथा अन्न का भोग लगाना चाहिए।  व्रती को संकल्प लेना चाहिए कि हमेशा क्षमा, दया, उदारता का भाव रखेगा।  इन दिनों व्रती को क्रोध, मोह, लोभ आदि दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए।  देवी का आह्वान, पूजन, विसर्जन, पाठ आदि सब प्रातःकाल में शुभ होते हैं, Navratri 2025 Date अतः इन्हें इसी दौरान पूरा करना चाहिए।  यदि घटस्थापना करने के बाद सूतक हो जाएं, तो कोई दोष नहीं होता, लेकिन अगर पहले हो जाएं, तो पूजा आदि न करें। 

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Jyeshtha Masik Durga Ashtami Vrat 2025 Date:कब है ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी, नोट करले डेट टाइम, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व उपाय

Jyeshtha Masik Durga Ashtami Vrat:हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी व्रत रखा जाता है। इस दिन देवी दुर्गा के भक्त उनकी पूजा करते हैं और पूरे दिन व्रत रखते हैं। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है, कहा जाता है कि मां दुर्गा के सभी रूपों की विधि-विधान से पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। मासिक दुर्गाष्टमी को मास दुर्गाष्टमी या मासिक दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत के महत्व और मान्यताओं के बारे में: इसके अलावा यदि जो लोग मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा की पूजा करते है उनके द्वारा किये गए सभी पाप धुल जाते हैं और मन शुद्ध होता है। इस दिन देवी दुर्गा की पूजा करने से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। Jyeshtha Masik Durga Ashtami मान्यता है कि मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा की सच्चे मन से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। और ग्रहदोष से भी मुक्ति मिलती है। आईये जानते है साल 2025 में ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी कब मनाई जाएगी 02 या 03 जून, जानिए पूजा की सही तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इस दिन किये जाने वाले उपाय ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी कब है 2025 Jyeshtha Durga Ashtami 2025 Date Muhurat Jyeshtha Masik Durga Ashtami हिंदी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि प्रारम्भ होगी 02 जून 2025 को रात 08 बजकर 34 मिनट पर और ज्येष्ठ मास की दुर्गा अष्टमी तिथि समाप्त होगी 03 जून 2025 को रात 09 बजकर 56 मिनट पर इसलिए साल 2025 में ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी 03 जून दिन मंगलवार को मनाई जाएगी। दुर्गा अष्टमी पूजा विधि Durga Ashtami Puja Vidhi Jyeshtha Masik Durga Ashtami दुर्गा अष्टमी माता दुर्गा को समर्पित होती है। इसलिए ज्येष्ठ मासिक दुर्गाष्टमी के दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करे। और व्रत का संकल्प लें इसके बाद पूजा के स्थान को स्वच्छ करें और माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद माता दुर्गा के समक्ष धूप, दीप प्रज्वलित करें और माता दुर्गा को फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें। और माता दुर्गा का ध्यान करें और माता दुर्गा के मंत्रों का जाप करें. इसके Jyeshtha Masik Durga Ashtami अलावा दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इसके बाद कलश का जल पूरे घर में छिड़कें और प्रसाद ग्रहण करने से पहले माता दुर्गा को अर्पित करें। और फिर पूजा समाप्त होने के बाद किसी गरीबों व्यक्ति या किसी और जरूरतमंद लोगों को दान करे। दुर्गा अष्टमी उपाय Durga Asthami Upay यदि आप जीवन की परेशानियों से छुटकारा पाना चाहते है तो मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा को हलवा और उबले हुए चने का भोग लगाएं। और साथ ही 6 सफेद कौड़ियां लेकर उन्हें लाल कपड़े में बांधकर माता दुर्गा के मंदिर में ले जाकर चढ़ाये। Jyeshtha Masik Durga Ashtami यदि आप कौड़ियां ना ले पायें तो 6 कपूर और 36 लौंग लेकर माता दुर्गा को चढ़ाएं। आप की सभी मनोकामना पूरी होगी। यदि आप धन की समस्या से परेशान हैं धन रुकता नही है, तो इसके लिए अष्टमी तिथि के दिन पान के पत्ते पर चंदन से ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे लिखकर माता दुर्गा के चरणों में अर्पित करें। और अगले दिन इस पान के पत्तों को अपनी तिजोरी में रख लें। Jyeshtha Masik Durga Ashtami ऐसा करने से आपको अपनी आर्थिक स्थिति में लाभ मिलेगा। दुर्गा अष्टमी के दिन माता दुर्गा के समक्ष देसी घी का दीपक जलाने के बाद इस मंत्र या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।। का 11 बार जप करने से बच्चे के कैरियर में उन्नति होगी दुर्गा अष्टमी पर ना करे ये काम Jyeshtha Masik Durga Ashtami Per Na kare Ye kaam माता दुर्गा की पूजा में तुलसी, आंवला, दूर्वा, मदार, आक के फूल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बल्कि पूजा के दौरान माता दुर्गा की एक ही तस्वीर रखनी चाहिए। दुर्गा पूजा के दौरान तामसिक चीजो का सेवन नही करना चाहिए। Shri Durga 108 Name:श्री दुर्गा के 108 नाम Shri Durga 32 Name:माँ दुर्गा के 32 नाम सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम् (Saptashloki Durga Stotra) दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)

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Method of Kanya Pujan in Navratri:कन्या पूजन कैसे करना चाहिए ? जानिए इसका सही तरीका और महत्व

Method of Kanya Pujan in Navratri:नवरात्रि में विधि-विधान से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इसके साथ ही अष्टमी और नवमी तिथि को बहुत ही खास माना जाता है, क्योंकि इन दिनों कन्या पूजन का भी विधान है। ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि में कन्या की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है। इससे मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं। पूजन के लिए आमंत्रित छोटी लड़कियों (कन्याओं) को कंजक / कंजकें भी कहा जाता है, अतः यह पूजा कंजक पूजन के नाम से भी प्रसिद्ध है। कन्या पूजन को कंजक पूजा के नाम से भी जाना जाता है। Method of Kanya Pujan in Navratri इस दौरान नौ छोटी लड़कियों को देवी दुर्गा के नौ अवतारों के रूप में पूजा जाता है, जिन्हें नवदुर्गा भी कहा जाता है। तो आइए कन्या पूजन विधि और इससे जुड़ी कुछ बातों को जानते हैं Kanya Pujan कन्या पूजन / कंजक पूजा का शुभ मुहूर्त Navratri:नवरात्रि में अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त में कन्या की पूजा करना शुभ रहेगा। Method of Kanya Pujan in Navratri:कन्या पूजन की विधि अष्टमी के दिन कन्या की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर लें।स्नान करने के बाद सबसे पहले विधि अनुसार भगवान गणेश और महागौरी की पूजा करें।कन्या पूजा के लिए दो साल से लेकर 10 साल तक की 9 लड़कियों और एक लड़के को घर पर बुलाएं। कन्याओं के पैर धोने के बाद उनके हाथों में रोली, कुमकुम और अक्षत का टीका लगाकर मौली बांधें। अब कन्या और बालक को दीप दिखाकर आरती उतारकर यथासम्भव उन्हें अर्पित करें। Method of Kanya Pujan in Navratri आमतौर पर कन्या पूजन के दिन लड़कियों को पुरी, चना और हलवा खाने के लिए दिया जाता है।भोजन के बाद लड़कियों को यथासंभव उपहार दिए जाते हैं। इसके बाद पैर छूकर उन्हें आशीर्वाद दें और मां की स्तुति करते हुए गलती के लिए माफी मांगें। उसके बाद, उन्हें आतिथ्य सत्कार के साथ विदा करें। Importance of Kanya Puja:कन्या पूजा का महत्व कन्या पूजन कन्याओं का सम्मान और पूजा करने का एक उत्तम तरीका है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कुमारी पूजा के लिए दो से दस साल की कन्या उपयुक्त होती हैं। दो से दस वर्ष तक की कन्याएं मां दुर्गा के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके अलावा लंगूर के रूप में एक लड़के को भी इस पूजा में शामिल किया जाता है, जिसे भैरव बाबा व हनुमान जी का प्रतीक माना जाता है। Significance Of Kalash: सुख-समृद्धि का प्रतीक है कलश, जानिए इसके चमत्कारी लाभ Significance Of Kalash: हिंदू संस्कृति में कलश का विशेष महत्व है। कलश के गोल आकार को गर्भ के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जो प्रचुरता और जीवनदायी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। Method of Kanya Pujan in Navratri इसका उपयोग सनातन धर्म के सभी शुभ कार्य में किया जाता है। कहा जाता है कि कलश के बिना कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है। तो चलिए इसके महत्व और इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य के बारे में जानते हैं, जो इस प्रकार हैं symbol of happiness and prosperity:सुख-समृद्धि का प्रतीक कलश प्रचुरता, समृद्धि और आध्यात्मिक पवित्रता का आधार है। यह आमतौर पर पवित्र गंगा नदी के पानी से भरा होता है, जो अपने जीवनदायी और शुद्ध करने वाले गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं। कलश के भीतर मौजूद यह जल उस दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है, Method of Kanya Pujan in Navratri जिसके बारे में कहा जाता है कि यह सभी प्रकार के दुखों को दूर करता है। हिंदू परंपराओं में जल, दिव्य ऊर्जा और जीवन और सृजन के चल रहे चक्र के बीच पवित्र संबंध को उजागर करता है। Benefits of installing Kalash:कलश स्थापित करने के लाभ कलश धार्मिक अनुष्ठानों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसे शादियों, पूजा- पाठ आदि में शुभता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाता है। इसके साथ ही यह सुरक्षात्मक के रूप में भी कार्य करता है। Method of Kanya Pujan in Navratri मान्यताओं के अनुसार, कलश के प्रभाव से सकारात्मक शक्तियों का घर में वास होता है और जीवन से नकारात्मकता समाप्त होती है। इसके अलावा इसका प्रयोग जीवन में धन, वैभव, सुख- शांति की कमी नहीं होने देता है। Method of Kanya Pujan in Navratri इसलिए ज्योतिष शास्त्र में भी इसे बेहद शुभ माना गया है।

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Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि में कब है अष्टमी, नोट करें तारीख और पूजा की विधि

Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से होगी और समापन 6 अप्रैल को. इस बार नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 8 दिनों की होगी. अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा, हवन और कन्या पूजन का विधान है. Chaitra Navratri 2025: हिंदू धर्म में नवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण होती है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है.आइए जानते हैं, नवरात्रि के बारे में: इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो रही है. यह त्योहार हिंदू धर्म में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इस दौरान व्रत रखने और पूजा करने से मां दुर्गा सभी इच्छाएं पूरी करती हैं. आइए जानते हैं कि इस बार चैत्र नवरात्रि कितने दिनों की होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल Chaitra Navratri 2025 चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी और इसका समापन 6 अप्रैल, रविवार को होगा. इस बार तिथियों में बदलाव के कारण अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं, इसलिए नवरात्रि केवल 8 दिन की होगी. ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की सही तरीके से पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. Chaitra Navratri 2025 चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 5 अप्रैल 2025, शनिवार को है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. दुर्गाष्टमी के दिन नौ छोटे कलश स्थापित किए जाते हैं और उनमें देवी दुर्गा की नौ शक्तियों को आमंत्रित किया जाता है. पूजा के दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की आराधना की जाती है. चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू 4 अप्रैल 2025, रात 8 बजकर 12 मिनट पर चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि खत्म 5 अप्रैल 2025, रात 7 बजकर 26 मिनट पर Chaitra Navratri 2025:चैत्र नवरात्रि 2025 की अष्टमी तिथि 5 अप्रैल, शनिवार को है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और विशेष रूप से दुर्गाष्टमी व्रत रखा जाता है. भक्त इस अवसर पर देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और कलश स्थापना के साथ हवन व कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं. यह दिन शक्ति, भक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है. Chaitra Navratri 2025:चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी कब है: पंडित मोहन कुमार दत्त मित्र ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 05 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। जबकि राम नवमी या नवमी 06 अप्रैल को है। 30 मार्च को कलश स्थापना की जाएगी और पहला नवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। 31 मार्च 2025 को द्वितीय नवरात्रि व्रत रखा जाएगा। 1 अप्रैल को तीसरा नवरात्रि व्रत रखा जाएगा। 2 अप्रैल 2025, बुधवार को चौथी और पंचमी की पूजा होगी। 3 अप्रैल को षष्ठी तिथि और 4 अप्रैल को सप्तमी तिथि मनाई जाएगी। चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का मुहूर्त– कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 30 मार्च 2025, रविवार को सुबह 06 बजकर 13 मिनट से सुबह 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 12 बजकर 01 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। घटस्थापना के शुभ चौघड़िया मुहूर्त- लाभ – उन्नति: 09:20 ए एम से 10:53 ए एम अमृत – सर्वोत्तम: 10:53 ए एम से 12:26 पी एम शुभ – उत्तम: 01:59 पी एम से 03:32 पी एम

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Chaitra Navratri :नवरात्रि के दौरान व्रत कैसे रखा जाता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Chaitra Navratri 2025: Dates, Significance, व्रत नियम और पूजा विधि नवरात्रि Chaitra Navratri 2025 कब से शुरू होगी? Chaitra Navratri 2025 की शुरुआत 30 मार्च से होगी और यह 7 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान 9 दिनों तक माता दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। Chaitra Navratri 2025 Dates & Tithi List दिन तिथि देवी स्वरूप 30 मार्च प्रतिपदा माता शैलपुत्री 31 मार्च द्वितीया माता ब्रह्मचारिणी 1 अप्रैल तृतीया माता चंद्रघंटा 2 अप्रैल चतुर्थी माता कूष्मांडा 3 अप्रैल पंचमी माता स्कंदमाता 4 अप्रैल षष्ठी माता कात्यायनी 5 अप्रैल सप्तमी माता कालरात्रि 6 अप्रैल अष्टमी माता महागौरी (महाष्टमी) 7 अप्रैल नवमी माता सिद्धिदात्री (राम नवमी) Chaitra Navratri का महत्व (Significance) Chaitra Navratri हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इस दौरान देवी दुर्गा की पूजा करने से व्यक्ति को शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह समय आत्मशुद्धि और साधना का भी होता है। Shri Durga 108 Name:श्री दुर्गा के 108 नाम Ghatasthapana (Kalash Sthapana) Vidhi नवरात्रि की पूजा का प्रारंभ घटस्थापना से होता है। इसके लिए: Navratri Vrat Rules & Food नवरात्रि में उपवास रखने वाले भक्त सात्विक आहार ग्रहण करते हैं। लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। व्रत के दौरान निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है: इन पांच बातों का रखें ध्यान कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के दिनों में किसी भी कन्या व महिला का अपमान न करें। इस दौरान आप अष्टमी या नवमी पर कन्याओं को भरपेट हलवा पूरी का भोजन कराएं। इससे देवी की कृपा प्राप्त होती है। नवरात्रि का यदि आपने व्रत रखा है, तो नियमानुसार माता की पूजा करें। इन दिनों घर को कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करना अशुभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शारदीय नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा घरों में भ्रमण करती हैं। ऐसे में घर में उजाला रखें। इससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। नवरात्रि के नौ दिनों में प्याज लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आपने व्रत नहीं रखा है, तब भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। यही नहीं घर में भी इसका उपयोग करने से बचें। नवरात्रि का समय मां की भक्ति को समर्पित है। इन दिनों पूजा पाठ करने से जातक की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं। साथ ही मनोवांछित फल मिलता है। ऐसे में अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो दिन के अनुसार देवी की पूजा जरूर करें। Navratri Vrat रखने के नियम (Vrat Rules) Chaitra Navratri 2025 Dates:चैत्र नवरात्रि कब से शुरू होती है और इसकी तिथियाँ क्या हैं ? Navratri Vrat में क्या खाएं? (Fasting Foods) Shri Durga Manasa Puja:श्री दुर्गा मानस पूजा Chaitra Navratri 2025 की FAQs 1. Chaitra Navratri 2025 कब शुरू होगी? Chaitra Navratri 2025 30 मार्च से 7 अप्रैल तक चलेगी। 2. नवरात्रि में कौन से रंग पहनने चाहिए? हर दिन एक विशेष रंग पहना जाता है, जैसे कि पहला दिन लाल, दूसरा दिन सफेद, आदि। 3. Chaitra Navratri का धार्मिक महत्व क्या है? यह नवरात्रि देवी दुर्गा की कृपा पाने और नववर्ष की सकारात्मक शुरुआत के लिए विशेष मानी जाती है। Durga Maa Kali Aarti:जगदम्बे काली आरती  4. नवरात्रि में कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए? 5. नवरात्रि में कन्या पूजन कब करना चाहिए? अष्टमी (6 अप्रैल) या नवमी (7 अप्रैल) को कन्या पूजन करना सबसे शुभ माना जाता है।

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Radha Chalisa राधा चालीसा

Radha Chalisa:राधा चालीसा, देवी राधा के प्रति समर्पित एक भक्ति स्तोत्र है, जिसे विशेष रूप से वैष्णव परंपरा में पढ़ा जाता है। इसे पढ़ने से भक्तों को मां राधा और भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, राधा चालीसा विशेष रूप से अधिक प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन राधा रानी की भक्ति में अन्य प्रार्थनाएं और स्तोत्र अधिक प्रचलित हैं। Radha Chalisa:चालीसा, एक प्रकार का स्तोत्र होता है जिसमें 40 छंद होते हैं। अगर आप Radha Chalisa राधा चालीसा या इस से संबंधित किसी विशेष पाठ के लाभ के बारे में जानना चाहते हैं, Radha Chalisa तो आपको निम्न लाभ मिल सकते हैं: Radha Chalisa:अगर आप राधा चालीसा या कोई और राधा से संबंधित पाठ चाहते हैं, Radha Chalisa तो मैं वह भी उपलब्ध करा सकता हूँ। Radha Chalisa राधा चालीसा ॥ दोहा ॥श्री राधे वुषभानुजा,भक्तनि प्राणाधार ।वृन्दाविपिन विहारिणी,प्रानावौ बारम्बार ॥ जैसो तैसो रावरौ,कृष्ण प्रिया सुखधाम ।चरण शरण निज दीजिये,सुन्दर सुखद ललाम ॥ ॥ चौपाई ॥जय वृषभान कुँवरी श्री श्यामा ।कीरति नंदिनी शोभा धामा ॥ नित्य विहारिनि श्याम अधारा ।अमित मोद मंगल दातारा ॥ रास विलासिनि रस विस्तारिनि ।सहचरि सुभग यूथ मन भावनि ॥ नित्य किशोरी राधा गोरी ।श्याम प्राणधन अति जिय भोरी ॥ करुणा सागर हिय उमंगिनी ।ललितादिक सखियन की संगिनी ॥ दिनकर कन्या कूल विहारिनि ।कृष्ण प्राण प्रिय हिय हुलसावनि ॥ नित्य श्याम तुमरौ गुण गावैं ।राधा राधा कहि हरषावैं ॥ मुरली में नित नाम उचारें ।तुव कारण लीला वपु धारें ॥ प्रेम स्वरूपिणि अति सुकुमारी ।श्याम प्रिया वृषभानु दुलारी ॥ नवल किशोरी अति छवि धामा ।द्युति लघु लगै कोटि रति कामा ॥१० गौरांगी शशि निंदक बदना ।सुभग चपल अनियारे नयना ॥ जावक युत युग पंकज चरना ।नूपुर धुनि प्रीतम मन हरना ॥ संतत सहचरि सेवा करहीं ।महा मोद मंगल मन भरहीं ॥ रसिकन जीवन प्राण अधारा ।राधा नाम सकल सुख सारा ॥ अगम अगोचर नित्य स्वरूपा ।ध्यान धरत निशिदिन ब्रज भूपा ॥ उपजेउ जासु अंश गुण खानी ।कोटिन उमा रमा ब्रह्मानी ॥ नित्य धाम गोलोक विहारिणि ।जन रक्षक दुख दोष नसावनि ॥ शिव अज मुनि सनकादिक नारद ।पार न पाँइ शेष अरु शारद ॥ राधा शुभ गुण रूप उजारी ।निरखि प्रसन्न होत बनवारी ॥ ब्रज जीवन धन राधा रानी ।महिमा अमित न जाय बखानी ॥२० प्रीतम संग देइ गलबाँही ।बिहरत नित वृन्दावन माँही ॥ राधा कृष्ण कृष्ण कहैं राधा ।एक रूप दोउ प्रीति अगाधा ॥ श्री राधा मोहन मन हरनी ।जन सुख दायक प्रफुलित बदनी ॥ कोटिक रूप धरें नंद नंदा ।दर्शन करन हित गोकुल चंदा ॥ रास केलि करि तुम्हें रिझावें ।मान करौ जब अति दुःख पावें ॥ प्रफुलित होत दर्श जब पावें ।विविध भांति नित विनय सुनावें ॥ वृन्दारण्य विहारिणि श्यामा ।नाम लेत पूरण सब कामा ॥ कोटिन यज्ञ तपस्या करहु ।विविध नेम व्रत हिय में धरहु ॥ तऊ न श्याम भक्तहिं अपनावें ।जब लगि राधा नाम न गावें ॥ वृन्दाविपिन स्वामिनी राधा ।लीला वपु तब अमित अगाधा ॥३० स्वयं कृष्ण पावैं नहिं पारा ।और तुम्हें को जानन हारा ॥ श्री राधा रस प्रीति अभेदा ।सादर गान करत नित वेदा ॥ राधा त्यागि कृष्ण को भजिहैं ।ते सपनेहुँ जग जलधि न तरि हैं ॥ कीरति कुँवरि लाड़िली राधा ।सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा ॥ नाम अमंगल मूल नसावन ।त्रिविध ताप हर हरि मनभावन ॥ राधा नाम लेइ जो कोई ।सहजहि दामोदर बस होई ॥ राधा नाम परम सुखदाई ।भजतहिं कृपा करहिं यदुराई ॥ यशुमति नन्दन पीछे फिरिहैं ।जो कोऊ राधा नाम सुमिरिहैं ॥ रास विहारिणि श्यामा प्यारी ।करहु कृपा बरसाने वारी ॥ वृन्दावन है शरण तिहारी ।जय जय जय वृषभानु दुलारी ॥४० ॥ दोहा ॥श्री राधा सर्वेश्वरी,रसिकेश्वर धनश्याम ।करहुँ निरंतर बास मैं,श्री वृन्दावन धाम ॥॥ इति श्री राधा चालीसा ॥

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नवरात्रि का नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि महत्व….

नवरात्रि नवम दिन – मां सिद्धिदात्री नवरात्रि का नवम और अंतिम दिन देवी दुर्गा के नवम रूप, मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना को समर्पित होता है। मां सिद्धिदात्री का नाम दो शब्दों “सिद्धि” और “दात्री” से मिलकर बना है। “सिद्धि” का अर्थ है विशेष उपलब्धियां या अद्वितीय शक्तियां, और “दात्री” का अर्थ है देने वाली। अर्थात, मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन उनकी पूजा करने से भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं, जिससे वे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं। नवरात्रि मां सिद्धिदात्री का स्वरूप मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली देवी हैं, जिन्हें सामान्यतः कमल के फूल पर विराजित दर्शाया जाता है। उनके एक हाथ में गदा, दूसरे में चक्र, तीसरे में शंख और चौथे में कमल का फूल होता है। नवरात्रि मां का रंग हल्का लाल या गुलाबी होता है, जो सौम्यता और दिव्यता का प्रतीक है। उनकी सुंदरता, शांति और कांति से संसार भरपूर हो जाता है। मां सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। मां सिद्धिदात्री की उत्पत्ति पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब संसार की रचना हो रही थी और देवता, ऋषि, मुनि अपनी आध्यात्मिक शक्तियों की खोज कर रहे थे, तब भगवान शिव ने भी सिद्धियों की प्राप्ति के लिए मां सिद्धिदात्री की पूजा की। मां ने भगवान शिव को अष्ट सिद्धियों से विभूषित किया। यही कारण है नवरात्रि कि भगवान शिव को अर्धनारीश्वर रूप में भी पूजा जाता है, जिसमें आधा भाग देवी का और आधा भाग शिव का होता है। मां सिद्धिदात्री ने ही देवताओं और ऋषियों को भी इन अष्ट सिद्धियों का ज्ञान दिया था। अष्ट सिद्धियों के नाम हैं: आध्यात्मिक महत्ता मां सिद्धिदात्री की उपासना से साधक को सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होती है, और वह सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर हो सकता है। नवरात्रि इस दिन का ध्यान विशेष रूप से ध्यान और समाधि में लीन साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन साधक के सभी चक्र जाग्रत हो जाते हैं, और वह पूर्ण रूप से आत्मा और परमात्मा के मिलन की ओर बढ़ता है। कुंडलिनी जागरण के संदर्भ में भी मां सिद्धिदात्री की पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि जब साधक की कुंडलिनी शक्ति सहस्रार चक्र में प्रविष्ट होती है, तब मां सिद्धिदात्री की कृपा से उसे ब्रह्मांडीय शक्ति की प्राप्ति होती है, जिससे उसे सभी सिद्धियों और दिव्य शक्तियों का अनुभव होता है। भक्तों के लिए लाभ मां सिद्धिदात्री की पूजा करने वाले भक्तों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। ये लाभ न केवल भौतिक जीवन में होते हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी सुनिश्चित करते हैं। भक्त को स्वास्थ्य, धन, वैभव और सफलता प्राप्त होती है। इसके अलावा, मां सिद्धिदात्री की कृपा से जीवन के सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं, और व्यक्ति के भीतर एक दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। साधक को मानसिक शांति, धैर्य और संतुलन की प्राप्ति होती है, जिससे वह जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकता है। पूजा विधि नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा विशेष रूप से की जाती है। भक्त प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करते हैं और मां की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप जलाते हैं। इसके बाद फूल, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। मां को सफेद फूल अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा, मां को मिठाई, विशेषकर खीर, अर्पित की जाती है। मां के मंत्र का जाप भी इस दिन किया जाता है: “ॐ सिद्धिदात्री नमः“ इस मंत्र का जाप करने से भक्त को सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होती है और उसका जीवन सुखमय और समृद्धिशाली हो जाता है। मां सिद्धिदात्री और नवमी का महत्व नवमी का दिन देवी की पूर्णता का प्रतीक होता है। नवरात्रि के नौ दिन, एक साधक के लिए आत्मशुद्धि, ध्यान और साधना के दिन होते हैं। यह दिन साधक की यात्रा का अंतिम चरण होता है, जहां उसे मां सिद्धिदात्री की कृपा से समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती है और वह जीवन के हर पहलू में संतुलन और सफलता प्राप्त करता है। नवमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है। मां सिद्धिदात्री को कन्याओं का रूप माना जाता है, इसलिए इस दिन छोटी कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। यह पूजा इस बात का प्रतीक है कि हर कन्या में देवी का वास होता है और उनकी सेवा से देवी की कृपा प्राप्त होती है। निष्कर्ष मां सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्रि के अंतिम दिन भक्तों को आध्यात्मिक शांति, सिद्धियों की प्राप्ति और सांसारिक सुखों की प्राप्ति का मार्ग प्रदान करती है। मां सिद्धिदात्री की कृपा से भक्त अपने जीवन के सभी कठिनाइयों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। उनकी भक्ति और उपासना से साधक को मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और संतुलित जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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नवरात्रि का सातवां दिन: माँ कालरात्रि की पूजा विधि महत्व….

नवरात्रि का सातवां दिन: माँ कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप, माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। माँ कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत उग्र और भयानक है, परंतु वे भक्तों के लिए अत्यंत शुभकारी मानी जाती हैं। उनके इस स्वरूप को ‘काल का नाश करने वाली’ के रूप में जाना जाता है। उनका यह रूप विशेषतः तामसिक और आसुरी शक्तियों का विनाश करने के लिए प्रकट हुआ था। माँ कालरात्रि का स्वरूप नवरात्रि का सातवां दिन:माँ कालरात्रि का रंग काला है और उनके चार हाथ हैं। एक हाथ में तलवार, दूसरे में लोहे की कांटी (लौह शस्त्र), तीसरे हाथ से वे अभय मुद्रा में हैं, और चौथे हाथ से वरदान देती हैं। उनकी सवारी गधा है, और उनके गले में नरमुंडों की माला है। उनका यह उग्र स्वरूप विनाशकारी शक्तियों और दुष्ट आत्माओं को नष्ट करने वाला है, लेकिन उनके भक्तों को माँ हमेशा रक्षा का आश्वासन देती हैं। माँ कालरात्रि का दर्शन मात्र ही सभी प्रकार के भय से मुक्ति दिलाता है। नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि का महत्व नवरात्रि का सातवां दिन :माँ कालरात्रि की पूजा जीवन से नकारात्मकता को दूर करती है। इस दिन पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है और बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है। माना जाता है कि माँ कालरात्रि की उपासना से भक्त सभी प्रकार के भय, संकट और दु:खों से मुक्त हो जाता है। यह दिन भक्तों के लिए शक्ति, साहस और आत्म-नियंत्रण प्राप्त करने का समय होता है। माँ कालरात्रि उन भक्तों को विशेष आशीर्वाद देती हैं, जो निर्भय और दृढ़ निश्चयी होते हैं। उनका एक नाम “शुभंकरी” भी है, क्योंकि वे अपने भक्तों के लिए शुभ फल प्रदान करती हैं। माँ कालरात्रि की पूजा विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए लाभकारी मानी जाती है, जिन्हें अपने जीवन में भयंकर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनकी उपासना से सभी प्रकार की बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। व्रत का महत्व नवरात्रि के सातवें दिन का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को अन्न का त्याग करना चाहिए और फलाहार या केवल जल ग्रहण करके व्रत करना चाहिए। यह व्रत साधकों को मानसिक और शारीरिक शक्ति प्रदान करता है। माँ कालरात्रि की कृपा से भक्तों को कठिन परिस्थितियों में विजय प्राप्त होती है और उनका आत्मबल बढ़ता है। इस व्रत का पालन करने से बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति व सुख की प्राप्ति होती है। यह व्रत संयम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का प्रतीक होता है। नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि पूजा विधि माँ कालरात्रि की पूजा के लिए विशेष विधि अपनाई जाती है। आइए जानते हैं इस पूजा की विधि: नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि को भोग माँ कालरात्रि को विशेष रूप से गुड़ का भोग लगाया जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाने से माँ शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। गुड़ के साथ इमरती या हलवा का भोग भी चढ़ाया जा सकता है। उपासना के विशेष लाभ माँ कालरात्रि की पूजा से जो विशेष लाभ प्राप्त होते हैं, वे इस प्रकार हैं: निष्कर्ष नवरात्रि का सातवां दिन माँ कालरात्रि की पूजा और उपासना के लिए समर्पित होता है। उनकी पूजा से न केवल मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है, बल्कि सभी प्रकार के भय और दु:खों से भी मुक्ति मिलती है। यह दिन शक्ति, साहस और साधना का प्रतीक है। माँ कालरात्रि की कृपा से भक्त जीवन के हर क्षेत्र में सफल होते हैं और सभी संकटों का समाधान होता है।

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