ASTROLOGY

14 October 2023 Aaj Ka Panchang आज का पंचांग

🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 14 अक्टूबर 2023⛅दिन – शनिवार⛅विक्रम संवत् – 2080⛅शक संवत् – 1945⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – आश्विन⛅पक्ष – कृष्ण⛅तिथि – अमावस्या रात्रि 11:24 तक तत्पश्चात प्रतिपदा⛅नक्षत्र – हस्त शाम 04:24 तक तत्पश्चात चित्रा⛅योग – इन्द्र सुबह 10:25 तक तत्पश्चात वैधृति⛅राहु काल – सुबह 09:31 से 10:58 तक⛅सूर्योदय – 06:36⛅सूर्यास्त – 06:15⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:57 से 05:46 तक⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:01 से 12:50 तक⛅व्रत पर्व विवरण – आश्विन अमावस्या, सर्वपित्री अमावस्या का श्राद्ध, महालय समाप्त, अज्ञात तिथिवालों का श्राद्ध⛅विशेष – अमावस्या के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) 🔹सर्वपित्री अमावस्या : 14 अक्टूबर 2023🔹 🔸जो जाने-अनजाने रह गये हों, जिनके मरण की तिथि का पता न हो उन सभीका श्राद्ध सर्वपित्री अमावस्या को होता है । 🔸अमावस्या के दिन पितृगण वायुरूप में घर के दरवाजे पर उपस्थित रहते हैं और अपने स्वजनों से श्राद्ध की अभिलाषा करते हैं । जब तक सूर्यास्त नहीं हो जाता, तब तक वे भूख-प्यास से व्याकुल होकर वहीं खड़े रहते हैं । सूर्यास्त हो जाने के पश्चात वे निराश होकर दुःखित मन से अपने-अपने लोकों को चले जाते हैं । अतः अमावस्या के दिन प्रयत्नपूर्वक श्राद्ध अवश्य करना चाहिए । – गरुड़ पुराण 🔹आश्विन अमावस्या🔹 🔸13 अक्टूबर रात्रि 09:50 से 14 अक्टूबर रात्रि 11:24 तक अमावस्या । 🔹नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए🔹 🔹घर में हर अमावस्या अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं । 🔹अमावस्या विशेष🔹 🌹1. जो व्यक्ति अमावस्या को दूसरे का अन्न खाता है उसका महीने भर का किया हुआ पुण्य दूसरे को (अन्नदाता को) मिल जाता है ।(स्कंद पुराण, प्रभास खं. 207.11.13) 🌹2. अमावस्या के दिन पेड़-पौधों से फूल-पत्ते, तिनके आदि नहीं तोड़ने चाहिए, इससे ब्रह्महत्या का पाप लगता है ! (विष्णु पुराण) 🌹4. अमावस्या के दिन श्रीमद्भगवद्गीता का सातवाँ अध्याय पढ़ें और उस पाठ का पुण्य अपने पितरों को अर्पण करें । सूर्य को अर्घ्य दें और प्रार्थना करें । आज जो मैंने पाठ किया मेरे घर में जो गुजर गए हैं, उनको उसका पुण्य मिल जाए । इससे उनका आर्शीवाद हमें मिलेगा और घर में सुख-सम्पत्ति बढ़ेगी । 🔹गरीबी भगाने का शास्त्रीय उपाय🔹 🌹गरीबी है, बरकत नहीं है, बेरोजगारी ने गला घोंटा है तो फिक्र न करो । हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें । 🔹सामग्री : १. काले तिल २. जौ ३. चावल ४. गाय का घी ५. चंदन पाउडर ६. गूगल ७. गुड़ ८. देशी कपूर एवं गौ चंदन या कण्डा । 🌹विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवन कुण्ड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये मंत्रों से ५ आहुति दें ।आहुति मंत्र🌹 १. ॐ कुल देवताभ्यो नमः🌹 २. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः🌹 ३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः🌹 ४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः🌹 ५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः 🌹इस प्रयोग से थोड़े ही दिनों में स्वास्थ्य, समृद्धि और मन की प्रसन्नता दिखायी देगी । 🔹सूर्यग्रहण : 14 अक्टूबर 2023🔹 🔸भारतीय समय अनुसार, सूर्य ग्रहण रात में 8:34 मिनट से आरंभ होगा और मध्य रात्रि 2:25 मिनट तक रहेगा । 🔸यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा । 🔸सूर्यग्रहण दक्षिण अमेरिका के क्षेत्रों को छोड़कर उत्तर अमेरिका, कनाडा, ब्रिटिश, वर्जिन, आइलैंड, ग्वाटेमाला, मैक्सिको, अर्जेटीना, कोलंबिया, क्यूबा, बारबाडोस, पेरु, उरुग्वे, एंटीगुआ, वेनेजुएला, जमैका, हैती, पराग्वे, ब्राजील, डोमिनिका, बहामास, आदि जगहों पर दिखाई देगा । 🔹जहाँ पर सूर्यग्रहण दिखेगा वहाँ सूतक माना जायेगा । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 14 October 2023 Aaj Ka Panchang English me 🌞~Today’s Hindu Almanac~🌞⛅Date – 14 October 2023⛅Day – Saturday⛅Vikram Samvat – 2080⛅Shaka Samvat – 1945⛅Ayan – Dakshinayan⛅Season – Autumn⛅Month – Ashwin⛅ Side – Krishna⛅ Date – Amavasya till 11:24 pm and then Pratipada⛅Nakshatra – Hasta till 04:24 pm and then Chitra⛅Yoga – Indra till 10:25 in the morning and then Vaidhriti⛅Rahu Kaal – 09:31 to 10:58 in the morning⛅Sunrise – 06:36⛅Sunset – 06:15⛅Disha Shool – East direction⛅Brahmamuhurta – 04:57 to 05:46 in the morning⛅ Nishita Muhurta – 12:01 to 12:50 in the night⛅Vrat festival details – Ashwin Amavasya, Shraddha of Sarvapitri Amavasya, Mahalaya ends, Shraddha of unknown dates.⛅ Special – On the day of Amavasya, sexual intercourse with a woman and eating and applying sesame oil are prohibited. (Brahmavaivarta Purana, Brahma Khand: 27.29-38) 🔹Sarvapitri Amavasya: 14 October 2023🔹 🔸Shraddha of all those who are left behind knowingly or unknowingly, whose date of death is not known, is performed on Sarvapitri Amavasya. 🔸 On the day of Amavasya, the ancestors are present at the door of the house in the form of air and wish for Shraddha from their relatives. They stand there, distraught with hunger and thirst, until the sun sets. After the sunset, they become dejected and go to their respective worlds with a sad heart. Therefore, Shraddha must be performed with effort on the day of Amavasya. – Garuda Purana 🔹Ashwin Amavasya🔹 🔸Amavasya from 09:50 pm on 13th October to 11:24 pm on 14th October. 🔹To remove negative energy🔹 🔹 Mop the house every Amavasya or every 15 days by adding standing salt in water (50 grams of standing salt in 1 liter of water). This will remove negative energy. Or you can also add cowdung extract instead of salt. 🔹Amavasya special🔹 🌹1. The person who eats someone else’s food on Amavasya, his good deeds done during the month are passed on to the other person (the food giver).(Skanda Purana, Prabhas Volume 207.11.13) 🌹2. On the day of Amavasya, flowers, leaves, straws etc. should not be plucked from trees, this leads to the sin of Brahmahatya. (Vishnu Purana) 🌹4. On the day of Amavasya, read the seventh chapter of Shrimadbhagvadgita and offer the virtue of that chapter to your ancestors. Offer water to the Sun and pray. May those who have

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वेदों का अध्ययन कैसे करना चाहिए How should one study the Vedas

वेदों के अध्ययन को यादगार बनाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा रहे हैं: 1. **आचार्य के मार्गदर्शन में:** अगर संभव हो, एक गुरु या आचार्य के मार्गदर्शन में वेदों का अध्ययन करें। उनके प्रेरणास्त्रोत से आपको सही मार्ग दिखाया जा सकता है। 2. **नियमितता:** एक नियमित समय चुनें जब आप वेदों का अध्ययन कर सकते हैं, जैसे कि प्रातःकाल या शामकाल। 3. **मनोनिबद्धता:** अध्ययन के समय अपने मन को एकाग्र करने का प्रयास करें। अन्य विचारों को दूर रखें और ध्यान केंद्रित करें। 4. **समझने का प्रयास:** कोशिश करें कि आप वेदों के शब्दों के माध्यम से उनका अर्थ समझने का प्रयास करें, न कि सिर्फ रटने का। 5. **अध्ययन के नोट्स:** अध्ययन करते समय, महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट्स बनाएं, ताकि आप बाद में उन्हें दोहरा सकें। 6. **संवाद:** वेदों के बारे में दोस्तों और ज्ञानी लोगों के साथ विचारविमर्श करें, जिससे आपका ज्ञान विस्तार हो सकता है। 7. **आध्यात्मिक प्रयास:** अपने अध्ययन को सिर्फ विद्वान्ग्रंथों के रूप में नहीं देखें, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव के रूप में भी देखें। 8. **समर्पण:** वेदों के अध्ययन में समर्पण और धैर्य बनाए रखें, क्योंकि यह एक गहरा और लम्बा प्रक्रिया हो सकता है। 9. **स्वाध्याय:** वेदों के अध्ययन से प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में अमल में लाने का प्रयास करें और स्वाध्याय (स्वयं का अध्ययन) का महत्व समझें। यदि आप इन सुझावों का पालन करते हैं, तो वेदों के अध्ययन को यादगार और सार्थक बना सकते हैं।

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Diwali 2023 Date: इस साल कब है दिवाली, जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

दिवाली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस दिन भगवान राम, माता सीता और भगवान लक्ष्मण 14 साल के वनवास के बाद आए थे। इस साल दिवाली के लिए आपको थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं साल 2023 में कब है दिवाली का पर्व। दीपावली या दिवाली रोशनी का त्योहार है और साल के सबसे ज्यादा मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। जैसा कि रामायण में बताया गया है, इस दिन है जब भगवान राम, देवी सीता और भगवान लक्ष्मण 14 साल वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। दिवाली का पर्व धनतेरस से शुरू होता है और भाई दूज तक रहता है। आइए जानते हैं इस साल कब है दिवाली का त्योहार। दिवाली का शुभ मुहूर्तपंचांग के अनुसार, दिवाली का त्योहार हर साल कार्तिक मास के 15वें दिन अमावस्या को मनाई जाएगी। इस साल दिवाली का पर्व देशभर में 12 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है। 12 नवंबर को अमावस्या तिथि का आरंभ 12 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से प्रारंभ होगी और 13 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी। दिवाली 2023 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त लक्ष्मी पूजा (प्रदोष काल समय) – शाम 05.39 – रात 07.35 (12 नवंबर 2023) वृषभ काल – शाम 05:39 – रात 07:35 लक्ष्मी पूजा (निशिता काल समय) – 12 नवंबर 2023, रात 11:39- 13 नवंबर 2023, प्रात: 12:32 सिंह लग्न – प्रात: 12:10 – प्रात: 02:27 (13 नवंबर 2023) जानें दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का महत्वदिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है।। मान्यताओं के अनुसार, जब मुहूर्त में लक्ष्मी जी का पूजन किया जाता है तो लक्ष्मी जी वहां ठहर जाती हैं। इसलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह सबसे उत्तम समय माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस व्यक्ति के पास ज्ञान होता है इसके पास धन भी रहता है। इसलिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। साथ ही ऐसा कहा जाता है कि अमावस्या तिथि के दिन अगर माता लक्ष्मी किसी पर प्रसन्न हो जाती है तो उसे आरोग्य की प्राप्ति होती है। दिवाली 2023 पांच दिन का दीपोत्सव  दिवाली का त्योहार पांच दिन तक मनाया जाता है, इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन दिवाली, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवे दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. हर दिन का अपना अलग महत्व है. पांच दिन तक घर-आंगन में दीप जलाए जाते हैं और खुशियां मनाई जाती है. दिवाली क्यों मनाई जाती है दिवाली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है. धर्म ग्रंथों के अनुसार दिवाली के दिन श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद और 14 साल का वनवास पूरा कर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे. अयोध्या नरेश के श्रीराम के स्वागत के लिए इस दिन अयोध्या नगरी सहित पूरे भारत में दीप जलाए गए थे. इसी दिन से हर साल कार्तिक अमावस्या पर दिवाली मनाई जाने लगी. इस दिन घरों को रोशन कर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और सुख, समृद्धि, धन की कामना करते हैं.

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17 September 2023 Aaj Ka Panchang आज का पंचांग

आज का पंचांग ~ 🌞🌤️ दिनांक – 17 सितम्बर 2023🌤️ दिन – रविवार🌤️ संवत्सर–पिंगल🌤️ विक्रम संवत – 2080 (गुजरात – 2079)🌤️ शक संवत – 1945🌤️ कलियुगाब्द-–5125🌤️ अयन – दक्षिणायन🌤️ ऋतु – शरद ॠतु🌤️ मास – भाद्रपद🌤️ पक्ष – शुक्ल🌤️ तिथि – द्वितीया सुबह 11:08 तक तत्पश्चात तृतीया🌤️ नक्षत्र – हस्त सुबह 10:02 तक तत्पश्चात चित्रा🌤️ योग – ब्रह्म 18 सितम्बर प्रातः 04:28 तक तत्पश्चात इन्द्र🌤️ राहुकाल – शाम 04:39 से शाम 06:11 तक🌞 सूर्योदय- 05:46🌤️ सूर्यास्त- 18:14_स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।👉 दिशाशूल- पश्चिम दिशा में🔥 अग्निवास🔥02+01+01=04÷4=00 पृथ्वी लोक में।✅✅🔱 शिववास🔱 02+02+5=07÷7 =00 श्मशान वासे। ❌❌🚩 व्रत पर्व विवरण – षणशीति-कन्या संक्रांति (पुण्यकाल:दोपहर 01:43 से सूर्यास्त तक💥 विशेष- द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)💥 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)💥 रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)💥 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)💥 स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। 🌷 हरितालिका तीज 🌷🙏🏻 भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज का व्रत किया जाता है। इस बार ये व्रत 18 सितम्बर, सोमवार को है। विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है, वहीं विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है। इस व्रत की विधि इस प्रकार है-🌷 विधिइस दिन महिलाएं निर्जल (बिना कुछ खाए-पिए) रहकर व्रत करती हैं। इस व्रत में बालूरेत से भगवान शंकर व माता पार्वती का मूर्ति बनाकर पूजन किया जाता है। घर को साफ-स्वच्छ कर तोरण-मंडप आदि से सजाएं। एक पवित्र चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती एवं उनकी सखी की आकृति (प्रतिमा) बनाएं।🙏🏻 प्रतिमाएं बनाते समय भगवान का स्मरण करें। देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन करें। व्रत का पूजन रात भर चलता है। महिलाएं जागरण करती हैं और कथा-पूजन के साथ कीर्तन करती हैं। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव को सभी प्रकार की वनस्पतियां जैसे बिल्व-पत्र, आम के पत्ते, चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण किया जाता है। आरती और स्तोत्र द्वारा आराधना की जाती है।🌷 भगवती-उमा की पूजा के लिए ये मंत्र बोलें-ऊं उमायै नम:, ऊं पार्वत्यै नम:, ऊं जगद्धात्र्यै नम:, ऊं जगत्प्रतिष्ठयै नम:, ऊं शांतिरूपिण्यै नम:, ऊं शिवायै नम:🌷 भगवान शिव की आराधना इन मंत्रों से करें-ऊं हराय नम:, ऊं महेश्वराय नम:, ऊं शम्भवे नम:, ऊं शूलपाणये नम:, ऊं पिनाकवृषे नम:, ऊं शिवाय नम:, ऊं पशुपतये नम:, ऊं महादेवाय नम:🙏🏻 पूजा दूसरे दिन सुबह समाप्त होती है, तब महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं और अन्न ग्रहण करती हैं।🌷 ससुराल में कोई तकलीफ 🌷👩🏻 किसी सुहागन बहन को ससुराल में कोई तकलीफ हो तो शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखें… उपवास माने एक बार बिना नमक का भोजन कर के उपवास रखें .. भोजन में दाल चावल सब्जी रोटी नहीं खाएं, दूध रोटी खा लें ..शुक्ल पक्ष की तृतीया को.. अमावस्या से पूनम तक की शुक्ल पक्ष में जो तृतीया आती है उसको ऐसा उपवास रखें… नमक बिना का भोजन(दूध रोटी) , एक बार खाएं बस…… अगर किसी बहन से वो भी नहीं हो सकता पूरे साल का तो केवल*होग➡ माघ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया➡ वैशाख शुक्ल तृतीया और भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया जरुर ऐसे ३ तृतीया का उपवास जरुर करें … नमक का उपयोग न करें …. जरुर लाभ होगा…💥 विशेष – 18 सितम्बर 2023 सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया है।🙏🏻🌷🍀🌼🌹🌻🌸🌺💐🙏🏻पंचक26 सितम्बर 2023 दिन मंगलवार रात्रि 08:28 बजे से 30 सितम्बर 2023 दिन शनिवार को रात्रि 09:08 बजे तक ।एकादशी25 सितम्बर 2023 दिन सोमवार पद्मा एकादशी (स्मार्त व्रत) ।26 सितम्बर 2023 दिन मंगलवार पद्मा एकादशी (वैष्णव व्रत) ।प्रदोष27 सितम्बर 2023 दिन बुधवार प्रदोष व्रत ।पूर्णिमा28 सितम्बर 2023 दिन गुरुवार अनन्त चतुर्दशी पूर्णिमा व्रत ।29 सितम्बर 2023 दिन शुक्रवार स्नान दान पूर्णिमा। श्राद्धपक्ष आरम्भ। 17 September 2023 Aaj Ka Panchang english me Jai Shri Ram 🌞 ~ Today’s Almanac ~ 🌞🌤️ Date – 17 September 2023🌤️ Day – Sunday🌤️ Samvatsara-Pingal🌤️ Vikram Samvat – 2080 (Gujarat – 2079)🌤️ Shak Samvat – 1945🌤️ Kaliyugabd ––5125🌤️ Ayan – Dakshinayan🌤️ Season – Autumn🌤️ Month – Bhadrapada 🌤️ Side – Shukla🌤️ Date – Dwitiya till 11:08 am followed by Tritiya🌤️ Nakshatra – Hasta till 10:02 am and then Chitra🌤️ Yoga – Brahma till 04:28 am on 18th September and then Indra🌤️ Rahukaal – 04:39 PM to 06:11 PM🌞 Sunrise- 05:46🌤️ Sunset- 18:14_According to local time, difference in Rahukaal sunset and sunrise time is possible.👉 Dishashul- in the west direction🔥Agnivaas🔥 02+01+01=04÷4=00 in the earth.✅🔱 Shivvas🔱 02+02+5=07÷7 =00 Cremation grounds.🚩 Fast festival details – Shanashiti-Kanya Sankranti (Punyakaal: 01:43 pm to sunset💥 Special- Eating Brihati (small brinjal or brinjal) is prohibited on Dwitiya. (Brahmavaivarta Purana, Brahma Khand: 27.29-34)💥 Sex with a woman and eating and applying sesame oil are prohibited on 💥 Sunday. (Brahmavaivarta Purana, Brahma Khand: 27.29-38) 💥 Lentils, ginger and red colored vegetables should not be eaten on Sunday. (Brahmavaivarta Purana, Shri Krishna section: 75.90)💥 One should not eat food in bronze utensils on Sunday. (Brahmavaivarta Purana, Shri Krishna Volume: 75)💥 According to Skanda Purana, Bilva tree should be worshiped on Sunday. By this the great sins like Brahmahatya etc. are also destroyed. 🌷 Haritalika Teej 🌷🙏🏻 Haritalika Teej fast is observed on the third day of Shukla Paksha of Bhadrapada month. This time this fast is on 18th September, Monday. By observing the fast of Haritalika Teej as per the rituals, unmarried girls get the groom of their choice, while married women get unbroken good fortune. The method of this fast is as follows- 🌷 MethodOn this day women observe Nirjal (without learning anything) fast. In this fast, the idol of Lord Shankar and Mother Parvati is worshipped. Clean the house and decorate it with Toran-Mandap etc. A sacred temple contains the idols (statues) of Ganesha, Parvati and his Sakhi along with Ganga water, Riddhi-Siddhi in pure soil. 🙏🏻 Remember

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Shardiya Navratri 2023 Date: शारदीय नवरात्रि कब से हो रहे शुरू, जानें महत्व, कलश स्थापना का मुहूर्त

सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शारदीय नवरात्रि में मां शक्ति के 9 स्वरूपों की उपासना करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में आ रही सभी समस्या दूर हो जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। बता दें कि हर वर्ष दो नवरात्रि पर मनाए जाते हैं। एक चैत्र मास में और दूसरा आश्विन मास में। आश्विन मास में पड़ने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना और नौ दिनों तक देवी दुर्गा की उपासना करने से साधक को सुख, समृद्धि एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं क्या करें, क्या नहीं? जानिए यहां शारदीय नवरात्रि 2023 तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 अक्टूबर रात्रि 11 बजकर 24 मिनट से शुरू होगी और 16 अक्टूबर मध्य रात्रि 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में शारदीय नवरात्रि पर्व का शुभारंभ 15 अक्टूबर 2023, रविवार के दिन होगा। इस विशेष दिन पर चित्रा नक्षत्र और स्वाति नक्षत्र का निर्माण हो रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए बहुत ही श्रेष्ठ माना जाता है। शारदीय नवरात्रि 2023 घटस्थापना समय शास्त्रों में बताया गया है कि शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर घटस्थापना मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त के दौरन तय होता है। घट स्थापना का समय निश्चित चित्रा नक्षत्र के दौरन ही होता है। ऐसे में इस दिन चित्रा नक्षत्र 14 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 24 मिनट से 15 अक्टूबर शाम 06 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 04 मिनट से सुबह 11 बजकर 50 मिनट के बीच रहेगा, इसलिए घटस्थापना पूजा भी इसी अवधि में की जाएगी। शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पहले चैत्र नवरात्रि को ही बहुत धूमधाम से मनाया जाता था लेकिन जब भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त की तब वह चैत्र नवरात्रि का इंतजार नहीं करना चाहते थे और आश्विन मास की प्रतिपदा को दुर्गा पूजा आयोजित की। तभी से शारदीय नवरात्रि की धूम होने लगी। देवी भागवत पुराण में भी भगवान श्रीराम द्वारा शारदीय नवरात्रि का व्रत और शक्ति पूजन करने का वर्णन मिलता है। इसके साथ ही आश्विन मास में ही मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस पर आक्रमण कर दिया और उससे नौ दिन तक युद्ध किया और दसवें दिन राक्षस का वध कर दिया इसलिए नौ दिन तक मां दुर्गी की पूजा शक्ति के रूप में की जाती है। कलश स्थापना का मुहूर्त शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि यानी पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू होती है। शक्ति पूजा से पहले मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर को 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक है। ऐसे में कलश स्थापना के लिए 46 मिनट का समय दिया गया है। नवरात्रि में इस दिन करें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा नवरात्रि का पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा – 15 अक्टूबर 2023नवरात्रि का दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा – 16 अक्टूबर 2023नवरात्रि का तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा – 17 अक्टूबर 2023नवरात्रि का चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा – 18 अक्टूबर 2023नवरात्रि का पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा – 19 अक्टूबर 2023 नवरात्रि का छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा – 20 अक्टूबर 2023नवरात्रि का सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा – 21 अक्टूबर 2023नवरात्रि का आठवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा – 22 अक्टूबर 2023नवरात्रि का नौवें दिन मां महागौरी की पूजा – 23 अक्टूबर 2023विजयदशमी या दशहरा पर्व – 24 अक्टूबर 2023

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Vishwakarma Jayanti 2023 Date:  कब है विश्वकर्मा जयंती, जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

भगवान विश्वकर्मा को प्राचीन काल का सबसे पहला इंजीनियर कहा जाता है। उन्होंने भगवान शिव के त्रिशूल से लेकर कई और भी चीजों का निर्माण किया था। आइए जानते हैं इस साल कब है विश्वकर्मा जयंती और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा। विश्वकर्मा की जयंती हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।। भगवान विश्वकर्मा ने ही भगवान शिव की त्रिशूल, लंका महल, द्वारका और देवताओं के अस्त्र और शस्त्र का निर्माण किया था। आइए जानते हैं इस साल कब मनाई जाएगी भगवान विश्वकर्मा की जयंती। करवा चौथ व्रत कथा | Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi कब मनाई जाएगी विश्वकर्मा जयंती विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2023 को मनाई जाएगी। इसी के साथ पूजा के लिए सुबह 7 बजकर 50 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक का शुभ मुहूर्त है। विश्वकर्मा पूजा महत्व ऋषियों-मुनियों ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ विश्वकर्मा जी की पूजा आराधना का प्रावधान है। विश्वकर्मा जी को ही प्राचीन काल का पहला इंजीनियर माना जाता है। इस दिन औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े उपकर औजार, की पूजा की करने से कार्य में कुशलता आती है। साथ ही आपके कारोबार में बढ़ोतरी होती है। इतना ही नहीं आपके घर में धन धान्य और सुख समृद्धि का आगमन होता है। विश्वकर्मा ने की थी पुष्पक विमान की रचना विश्वकर्मा पुराण के अनुसार, नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्माजी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की थी। ब्रह्माजी के दिशा निर्देश के अनुसार, ही उन्होंने पुष्पक विमान की रचना की थी। इन सबके अलावा भगवान विश्वकर्मा को वास्तु शास्त्र का ज्ञान, यंत्र का निर्माण, विमान विद्या आदि के बारे में भी कई जानकारी प्राप्त हैं। विश्वकर्मा पूजन विधि विश्वकर्मा जयंती के दिन प्रतिमा को विराजित करके पूजा की जाती है। जिस व्यक्ति के प्रतिष्ठान में पूजा होनी है, वह प्रात:काल स्नान आदि करने के बाद अपनी पत्नी के साथ पूजन करें। हाथ में फूल, चावल लेकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए घर और प्रतिष्ठान में फूल व चावल छिड़कने चाहिए। इसके बाद पूजन कराने वाले व्यक्ति को पत्नी के साथ यज्ञ में आहुति देनी चाहिए। पूजा करते समय दीप, धूप, पुष्प, गंध, सुपारी आदि का प्रयोग करना चाहिए। पूजन से अगले दिन प्रतिमा का विसर्जन करने का विधान है।  पूजन के मंत्र भगवान विश्वकर्मा की पूजा में ‘ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:’, ‘ॐ अनन्तम नम:’, ‘पृथिव्यै नम:’ मंत्र का जप करना चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला होना चाहिए।  जप शुरू करने से पहले ग्यारह सौ, इक्कीस सौ, इक्यावन सौ या ग्यारह हजार जप का संकल्प लें। चूंकि इस दिन प्रतिष्ठान में छुट्टी रहती है तो आप किसी पुरोहित से भी जप संपन्न करा सकते हैं।

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गणेश चतुर्थी पर इस मुहूर्त में घर लाएं गणपति, जानिए गणपति स्थापना और पूजा विधि

गणेश उत्सव का यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तिथि के दिन तक चलता है. 10 दिन तक चलने वाला यह उत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है. करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं क्या करें, क्या नहीं? जानिए यहां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन सुख-समृद्धि के देवता भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। इसी उपलक्ष्य में हर साल गणेश उत्सव मनाया जाता है। यह पर्व पूरे दस दिनों तक चलता है। गणेश उत्सव का यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तिथि के दिन तक चलता है। 10 दिन तक चलने वाला यह उत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दौरान घरों और बड़े-बड़े पूजा पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इस दिन शुभ मुहूर्त में ही बप्पा का स्वागत किया जाता है। ऐसे में यदि आप भी अपने घर में गणपति स्थापित करने जा रहे हैं शुभ मुहूर्त जरूर देख लें। चलिए जानते हैं गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि.. गणेश चतुर्थी तिथि 2023 इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 18 सितंबर 2023 को दोपहर 02 बजकर 9 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 19 सितंबर 2023 को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर गणेश चतुर्थी 19 सितंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन से 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव की शुरुआत भी होगी। गणेश स्थापना की विधि गणपति की स्थापना करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें और इसके बाद अपने माथे पर तिलक लगाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठ जाएं. आपका आसन बिल्कुल शुद्ध होना चाहिए. इसके बाद गणेश जी की प्रतिमा को किसी लकड़ी के पटरे या गेहूं, मूंग, ज्वार के ऊपर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें. गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि को भी स्थापित करें और साथ में एक-एक सुपारी रखें. गणेश चतुर्थी पूजा विधि गणेश चतुर्थी तिथि पर शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर सबसे पहले अपने घर के उत्तर भाग, पूर्व भाग या पूर्वोत्तर भाग में गणेश जी की प्रतिमा रखें. पूजन सामग्री लेकर शुद्ध आसन पर बैठें. गणेश भगवान की प्रतिमा की पूर्व दिशा में कलश रखें और दक्षिण पूर्व में दीया जलाएं. अपने ऊपर जल छिड़कते हुए ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः मंत्र का जाप करें. भगवान गणेश को प्रणाम करें और तीन बार आचमन करें तथा माथे पर तिलक लगाएं. आसन के बाद गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं. उन्हें वस्त्र, जनेऊ, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य और फल चढ़ाएं. गणेश जी की आरती करें और मनोकामना पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांगे. 

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30 अगस्त या 31 अगस्त को, रक्षाबंधन कब है? गलती से भद्रा के इस वक्त में ना बांधें राखी

रक्षाबंधन के त्योहार की तिथि को लेकर लोगों में इस बार बहुत कंफ्यूजन है. लोग संशय में हैं कि रक्षाबंधन 30 अगस्त को मनाएं या 31 अगस्त को. आपको बता दें कि रक्षाबंधन इस दिन 30 और 31 अगस्त दोनों दिन मनेगा लेकिन भद्रा के साए की वजह से आपको शुभ मुहूर्त का खास ख्याल रखना होगा. 30 अगस्त को लगभग पूरे दिन ही भद्रा का साया रहेगा और 31 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सिर्फ सुबह कुछ देर तक ही है. रक्षाबंधन का मतलब रक्षा बंधन एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है जो भाइयों और बहनों के बीच के बंधन का जश्न मनाता है. त्योहार का नाम संस्कृत शब्द ‘रक्षा’ से आया है जिसका अर्थ है- ‘सुरक्षा’ और ‘बंधन’ का अर्थ है- ‘बांधना’. रक्षा बंधन का इतिहास इस त्योहार का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व बहुत गहरा है. ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में, रानियां, और राजुकमारियां अपने गठबंधन और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में पड़ोसी राजाओं को राखी के धागे भेजती थीं. हालांकि रक्षा बंधन से जुड़ी कुछ लोकप्रिय कहानियां हैं: रक्षा बंधन से जुड़ी कहानियां 1. इंद्र और इंद्राणी: एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं के राजा इंद्र को शक्तिशाली राक्षस राजा बाली के खिलाफ लड़ाई में हार का सामना करना पड़ रहा था. साची, जिसे इंद्र की पत्नी इंद्राणी भी कहा जाता है, ने इंद्र की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर एक सुरक्षात्मक सूती धागा (राखी) बांधा था. शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु ने उन्हें पवित्र धागा दिया था. 2. कृष्ण और द्रौपदी: एक अन्य लोकप्रिय कथा महाकाव्य महाभारत से है. एक युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से गलती से कट गई थी. यह देखकर पांचों पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने खून रोकने के लिए अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया था. यह देखकर कृष्ण ने द्रौपदी को जरूरत पड़ने पर उनकी रक्षा करने और उनका समर्थन करने का वादा किया.  700 सालों बाद रक्षाबंधन पर दुर्लभ महायोग, भूलकर भी न करें ये गलतियां रक्षा बंधन 2023 शुभ मुहूर्त राखी बांधने का शुभ मुहूर्त – 30 अगस्त को रात्रि 09:01 बजे के बाद रक्षा बन्धन अनुष्ठान का समय 09:01 PM के बाद रक्षा बन्धन भद्रा अन्त समय  09:01 PM रक्षा बन्धन भद्रा पूँछ  05:30 PM से 06:31 PM रक्षा बन्धन भद्रा मुख 06:31 PM से 08:11 PM प्रदोष के बाद भद्रा समाप्त होने पर ही मुहूर्त मिलता है.   रक्षाबंधन (राखी) का महत्व रक्षा बंधन भारत और भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है. यह एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है जो भाइयों और बहनों के बीच के रिश्ते का सम्मान करता है. “रक्षा बंधन” शब्द का अनुवाद “सुरक्षा का बंधन” या “सुरक्षा की गांठ” है. यहां रक्षा बंधन के कुछ प्रमुख महत्व हैं  1. बंधन को मजबूत करना: रक्षा बंधन भाइयों और बहनों के बीच प्यार के रिश्ते का जश्न मनाता है. इस दिन, बहनें प्यार, सुरक्षा और सद्भावना के प्रतीक के रूप में अपने भाइयों की कलाई पर “राखी” नामक एक पवित्र धागा बांधती हैं. यह प्यार के अटूट बंधन और भाइयों के अपनी बहनों की रक्षा करने के कर्तव्य का प्रतीक है. रक्षाबंधन का पौराणिक महत्व रक्षा के लिए बांधा जाने वाला धागा रक्षासूत्र है. माना जाता है कि राजसूय यज्ञ के समय में भगवान कृष्ण को द्रोपदी ने रक्षासूत्र के रूप में अपने आंचल का टुकड़ा बांधा था. इसके बाद बहनों द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा शुरू हुई. साथ ही पहले के समय में ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को राखी बांधकर उनकी मंगलकामना की जाती है. इस दिन वेदपाठी ब्राह्मण यजुर्वेद का पाठ शुरू करते हैं. इसलिए रक्षाबंधन वाले दिन यानी श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा वाले दिन शिक्षा का आरंभ करना भी शुभ माना जाता है. भारत में अन्य धर्मों के बीच रक्षा बंधन का महत्व रक्षा बंधन भारत में मुख्य रूप से हिंदुओं के बीच मनाया जाने वाला एक पवित्र त्योहार है, लेकिन यह देश के विभिन्न धर्मों और समुदायों में भी महत्व रखता है. हालाँकि यह मुख्य रूप से हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है, लेकिन इसका प्रभाव अन्य धार्मिक समूहों तक फैल गया है, जिससे एकता और सद्भाव की भावना को बढ़ावा मिलता है. हिन्दू धर्म  रक्षा बंधन वैसे तो हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है. यह मुख्य रूप से भाई-बहन के बीच के बंधन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. बहनें अपने भाइयों की कलाई पर “राखी” नामक एक पवित्र धागा बांधती हैं, और भाई, बदले में, अपनी बहनों की रक्षा और समर्थन करने का वादा करते हैं. यह त्योहार भाई-बहन के बीच प्यार, देखभाल और आपसी सम्मान को दर्शाता है. जैन धर्म रक्षा बंधन जैनियों द्वारा भी मनाया जाता है. जैन अहिंसा में विश्वास करते हैं और राखी के पर्व को सभी जीवित प्राणियों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की याद के रूप में मनाते हैं. वे अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों की कलाई पर राखी बांधते हैं. सिख धर्म सिख रक्षाबंधन को “राखड़ी” के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं. सिख प्यार और सुरक्षा की निशानी के रूप में अपने प्रियजनों की कलाई पर राखी बांधते हैं. यह त्योहार निस्वार्थ सेवा, करुणा और भाईचारे के महत्व पर जोर देता है. बुद्ध धर्म रक्षा बंधन बौद्ध धर्म में व्यापक रूप से नहीं मनाया जाता है, लेकिन भारत के कुछ क्षेत्रों में बौद्धों के बीच इसके पालन के कुछ उदाहरण हैं. यह दोस्ती और सुरक्षा के बंधन का प्रतीक है, व्यक्तियों के बीच सद्भाव और भाईचारा को बढ़ावा देता है. रक्षा बंधन 2023 पूजा विधि 1. अपने आप को शुद्ध करो: पूजा शुरू करने से पहले पवित्रता के संकेत के रूप में स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. 2. पूजा की थाली तैयार करें: एक थाली लें और उस पर राखी का धागा, अक्षत, कुमकुम (सिंदूर) या चंदन, मिठाई, दीया (दीपक) और अगरबत्ती जैसी सामग्री रखें.  3. प्रार्थना करें: सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करें और उनका आशीर्वाद लें. आप गणेश मंत्र या गणेश आरती भी कर सकते हैं. 4. तिलक लगाएं और आरती करें: अपने भाई के माथे पर तिलक लगाएं और आरती की थाली को दक्षिणावर्त दिशा में घुमाकर आरती करें. 5.

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मौनी अमावस्या पर करें ये महाउपाय उपाय, मिलेगी पितृदोष से मुक्ति

मौनी अमावस्या पर मौन रहकर पवित्र नदी या जलकुंड में स्नान और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा कहते हैं कि मौनी अमावस्या पर दान-स्नान करने से इंसान के सारे पाप मिट जाते हैं और उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. कब है मौनी अमावस्या? (Mauni Amavasya 2023 Date and Time)इस वर्ष मौनी अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों में बहुत कन्फ्यूजन है. कुछ लोग 21 जनवरी तो कुछ 22 जनवरी को मौनी अमावस्या बता रहे हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या शनिवार, 21 जनवरी को सुबह 06 बजकर 16 मिनट से लेकर अगले दिन रविवार, 22 जनवरी को रात 02 बजकर 22 मिनट तक रहेगी. लेकिन उदया तिथि के कारण मौनी अमावस्या 21 जनवरी को ही मनाई जाएगी. दान-स्नान का शुभ मुहूर्त (Mauni Amavasya 2023 Shubh Muhurt) 21 जनवरी को सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 52 मिनट के बीच स्नान और दान-धर्म से जुड़े कार्य करने का शुभ मुहूर्त रहेगा. इस दौरान पवित्र नदी या कुंड में स्नान करने के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचने के लिए कम्बल, गुड़ और तिल का दान कर सकते हैं. पवित्र नदी में आस्था की डुबकी लेते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ और ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप जरूर करें. पितृदोष दूर करने के उपायआप शनिश्चरी अमावस्या के दिन घर के दक्षिण दिशा में अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाएं और फूल माला चढ़ाकर आशीर्वदा लें. साथ ही नियमित इनके ऊपर सफेद फूल अर्पित करें. ऐसा करने से पितरों की कृपा आप पर आने लगती है और पितृदोष से मुक्ति मिल जाती है. पीपल के पेड़ के नीचे करें ये उपायमाघ माह की मौनी अमावस्या के दिन पीपल स्नान-दान करने के बाद दोपहर के समय में पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं. साथ ही पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल अर्पित करें और पूर्वजों से आशीर्वाद मांगे. इस दिन शाम के वक्त सरसों के तेल में पीपल के पेड़ के नीचे 7 दीपक जलाएं. ऐसा करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं और पितृदोष से मुक्ति मिलती है.  क्यों खास होती है मौनी अमावस्या? (Mauni Amavasya 2023 Significance)हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है. इससे तर्पण करने वालों को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दिन नदी के घाट पर जाकर पितरों का तर्पण और दान करने से कुंडली के दोषों से मुक्ति पाई जाती है. इसके अलावा, इस दिन मौन व्रत रखने से वाक् सिद्धि की प्राप्ति होती है. मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का विशेष महत्व होता है. मौन व्रत का अर्थ खुद के अंतर्मन में झांकना, ध्यान करना और भगवान की भक्ति में खो जाने से है.

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मकर संक्रांति आज या कल? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त में इन चीजों का करें दान

पौष माह की शुक्ल की द्वादशी तिथि को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. पुराणों में मकर संक्रांति को देवताओं का दिन बताया गया है. मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है. मकर संक्रांति से ही ऋतु परिवर्तन भी होने लगता है. मकर संक्रांति से सर्दियां खत्म होने लगती हैं और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है. इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी 2023, रविवार को मनाई जाएगी.  मकर संक्रांति का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान सूर्य को समर्पित माना गया है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के ग्रह गोचर को संक्रांति कहा जाता है। मकर राशि में जाने को मकर संक्रांति कहते हैं। इस पर्व में लोग नई फसलों की पूजा भी करते हैं। मकर संक्रांति का पर्व हर राज्य में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। इसलिए इसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति को पूर्वी उत्तर प्रदेश खिचड़ी, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, हरियाणा, पंजाब में माघी  और तमिलनाडु में पोंगल के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति का पर्व हर साल जनवरी महीने में ही आता है। लेकिन इस साल इस पर्व की तारीख को लेकर लोगों के बीच कंफ्यूजन है। मकर संक्रांति 2023 शुभ मुहूर्त- मकर संक्रांति पुण्य काल 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शाम 05 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। अवधि 10 घंटे 31 मिनट की है। मकर संक्रांति महा पुण्यकाल का समय 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से सुबह 09 बजे तक रहेगा। अवधि 01 घंटा 45 मिनट की है। मकर संक्रांति पर किन चीजों का करें दान 1. तिल –  मकर संक्रांति पर  तिल का दान करना शुभ माना जाता है. तिल का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं. 2. खिचड़ी-  मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाना जितना शुभ है उतना ही शुभ इसका दान करना भी माना जाता है.  3.  गुड़- इस दिन गुड़ का दान करना भी शुभ होता है. गुड़ का दान करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. 4. तेल- इस दिन तेल दान करना शुभ होता है. ऐसा करने से शनि देव का आर्शीवाद मिलता है.  5. अनाज- मकर संक्रांति के दिन पांच तरह के अनाज दान करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है.6. रेवड़ी – मकर संक्रांति के दिन रेवड़ी का भी दान करना भी शुभ माना जाता है.  7. कंबल – इस दिन कंबल का दान करना शुभ होता है. इससे राहु और शनि शांत होते हैं.  

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आज का पंचांग

आज शुक्रवार को पौष माह की पूर्णिमा तिथि है। आज पूर्णिमा का व्रत भी रहेगा। पूर्णिमा तिथि अगले दिन 7 जनवरी 2023 को सुबह 4.37 बजे तक रहेगी। आज पूरे दिन आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्र रहेंगे। पंचांग के अनुसार सूर्योदय सुबह 7.17 बजे एवं सूर्यास्त सायं 5.48 बजे होगा। चन्द्रोदय 5.11 बजे होगा तथा चन्द्रास्त नहीं होगा। शुभ-अशुभ मुहूर्त एवं राहुकाल (Aaj ka Rahukaal) आज दुष्ट मुहूर्त सुबह 9.19 बजे से 10.01 बजे तक एवं दोपहर 12.47 बजे से 1.29 बजे तक रहेगा। कुलिक योग सुबह 9.19 बजे से 10.01 बजे तक एवं कंटक योग दोपहर 1.29 बजे से 2.10 बजे तक रहेगा। कालवेला/ अर्द्धयाम का समय दोपहर 2.52 बजे से 3.34 बजे तक रहेगा। यमघण्ट योग दोपहर 4.15 बजे से 4.57 बजे तक एवं यमगंड योग दोपहर 3.02 बजे से 4.20 बजे तक रहेगा। आज राहुकाल सुबह 11.08 बजे से दोपहर 12.26 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य करने से बचें। शुक्रवार, 06 जनवरी 2023  तिथि पूर्णिमा नक्षत्र आर्द्रा करण विष्टि पक्ष शुक्ल पक्ष योग इंद्र till 08:54:59 AM, 07 जनवरी दिन शुक्रवार सूर्य एवं चन्द्र गणना सूर्योदयसूर्यास्त 07:05:49 AM05:40:04 PM चंद्र उदयचन्द्रास्त 05:03:15 PM06:39:02 AM चंद्र राशि मिथुन ऋतु हेमंत हिन्दू मास एवं वर्ष शक संवत् 1944 विक्रम संवत् 2079 माह-अमान्ता पौष माह-पुर्निमान्ता पौष अशुभ मुहूर्त राहु कालं 11:03:39 AM to 12:22:56 PM यंमघन्त कालं 03:01:30 PM to 04:20:47 PM गुलिकालं 08:25:005 AM to 09:44:22 AM शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त 12:01:00 PM to 12:43:00 PM

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आज का पंचांग रविवार, 25 दिसम्बर 2022 

आज का पंचांग यानि दैनिक पंचांग अंग्रेंजी में Daily Panchang भी कह सकते हैं। दिन की शुरुआत अच्छी हो, जो काम हम आज करने वाले हैं उसमें हमें सफलता मिले। घर से लेकर दफ्तर तक, पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल लाइफ में आज हम जो निर्णय लेने वाले हैं उनके परिणाम हमें सकारात्मक मिलें इसके लिये जरुरी है कि वह कार्य शुभ समय, शुभ मुहूर्त में शुरु किये जायें। महत्व पूर्ण निर्णय लेने के समय ग्रह, नक्षत्र एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हमारे लिये कर रहे हों। इसी की जानकारी हमें आज का पंचांग से मिलती है। रविवार, 25 दिसम्बर 2022  तिथि शुक्ल तृतीया नक्षत्र उत्तराषाढ़ा करण तैतिल पक्ष शुक्ल पक्ष योग व्याघात till 12:58:24 AM, 26 दिसम्बर दिन रविवार सूर्य एवं चन्द्र गणना सूर्योदयसूर्यास्त 07:02:07 AM05:32:18 PM चंद्र उदयचन्द्रास्त 09:01:06 AM07:41:29 PM चंद्र राशि मकर ऋतु हेमंत हिन्दू मास एवं वर्ष शक संवत् 1944 विक्रम संवत् 2079 माह-अमान्ता पौष माह-पुर्निमान्ता पौष अशुभ मुहूर्त राहु कालं 04:13:31 PM to 05:32:18 PM यंमघन्त कालं 12:17:12 PM to 01:35:58 PM गुलिकालं 02:54:45 PM to 04:13:31 PM शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त 11:56:00 AM to 12:38:00 PM पौष शुक्ल पक्ष द्वितीया, राक्षस संवत्सर विक्रम संवत 2079, शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर), पौष | द्वितीया तिथि 08:24 AM तक उपरांत तृतीया तिथि 04:51 AM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 07:21 PM तक उपरांत श्रवण | व्याघात योग 12:58 AM तक, उसके बाद हर्षण योग | करण कौलव 08:24 AM तक, बाद तैतिल 06:36 PM तक, बाद गर 04:51 AM तक, बाद वणिज |

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