KARMASU

Version
File Size 0.00 KB
Downloads 251
Files 1
Published November 17, 2023
Updated November 17, 2023

अच्युताष्टक 2, आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक संस्कृत स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के अच्युत (अक्षय, अविनाशी) रूप की स्तुति करता है।

अच्युताष्टक 2 के छंद निम्नलिखित हैं:

achyutaashtakan 2

  1. अच्युताच्युत हरे परमात्मन् राम कृष्ण पुरुषोत्तम विष्णो जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे

  2. माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम् देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे

  3. रुक्मिणीरागिणे जानकीजानये कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः

  4. श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक

  5. दण्डकारण्यभूपुण्यताकारणम् अगस्त्यसम्पूजितो राघवः पातु माम्

  6. केशिहा कंसहृद्वंशिकावादकः बालगोपालकः पातु मां सर्वदा

अच्युताष्टक 2 का अर्थ निम्नलिखित है:

  1. हे अच्युत, हे हरे, हे परमात्मा, हे राम, हे कृष्ण, हे पुरुषोत्तम, हे विष्णु, मैं जानकी के पति, रामचंद्र की भक्ति करता हूं।

  2. हे माधव, हे श्रीधर, हे राधा द्वारा पूजित, हे देवकी के पुत्र, हे नंद के पुत्र, मैं आपकी वंदना करता हूं।

  3. हे रुक्मिणी के प्रियतम, हे जानकी के पति, हे कंस का वध करने वाले, हे वंश के स्वामी, मैं आपको नमस्कार करता हूं।

  4. हे श्रीपति, हे वासुदेव, हे श्री के विजेता, हे श्री के निधान, हे द्वारका के नायक, हे द्रौपदी के रक्षक, मुझे बचाओ।

  5. हे दंडकारण्य की भूमि को पवित्र करने वाले कारण, हे अगस्त्य द्वारा पूजित, हे राघव, मुझे बचाओ।

  6. हे केशियों को मारने वाले, हे कंस के हृदय के धनुष को तोड़ने वाले, हे बाल गोपाल, तुम मुझे हमेशा बचाओ।

अच्युताष्टक 2 एक बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

Download
or download free
[free_download_btn]
[changelog]

Categories & Tags

Similar Downloads

No related download found!
KARMASU

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *