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Published November 2, 2023
Updated November 2, 2023

Shivataandavastutih

शिवतांडवस्तुति एक संस्कृत स्तोत्र है जो भगवान शिव के तांडव नृत्य की स्तुति करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव की शक्ति और ऊर्जा का वर्णन करता है।

स्तोत्र के 13 श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक में एक विशेष पहलू है।

श्लोक 1

डमरुभिः शङ्खैः चैव तालप्रभृतयैः।

नृत्ते नृत्ते जयशब्दमकुर्वतां।

अर्थ:

डमरू, शंख, और अन्य वाद्ययंत्रों की ध्वनि के साथ,

जयशब्द का उच्चारण करते हुए वे नृत्य करते हैं।

श्लोक 2

त्रिशूलखङ्गगदांस्त्रिपुरहारं।

भस्मावृत्तं भवभयहारं।

अर्थ:

त्रिशूल, खड्ग, गदा, और त्रिपुरहार धारण करने वाले,

भस्म से लिप्त, भय को दूर करने वाले।

श्लोक 3

नागधरं गिरिजापतिं सुरेशं।

सदा शंकरं भक्तवत्सलं।

अर्थ:

नागों को धारण करने वाले, पार्वती के पति, देवताओं के स्वामी,

सदा शंकर, भक्तों के प्रिय।

श्लोक 13

तस्य ताण्डवस्य नृत्यस्य प्रभावात्।

सृष्टिस्थितिसंहारकार्यं भवति।

अर्थ:

उस तांडव नृत्य के प्रभाव से,

सृष्टि, स्थिति, और संहार होता है।

Shivataandavastutih

शिवतांडवस्तुति एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है। यह स्तोत्र ध्यान और साधना के लिए भी उपयोग किया जाता है।

स्तोत्र का हिंदी अनुवाद:

शिवतांडवस्तुति

भगवान शिव के तांडव नृत्य की स्तुति

डमरू, शंख, और अन्य वाद्ययंत्रों की ध्वनि के साथ,

जयशब्द का उच्चारण करते हुए वे नृत्य करते हैं।

त्रिशूल, खड्ग, गदा, और त्रिपुरहार धारण करने वाले,

भस्म से लिप्त, भय को दूर करने वाले।

नागों को धारण करने वाले, पार्वती के पति, देवताओं के स्वामी,

सदा शंकर, भक्तों के प्रिय।

उस तांडव नृत्य के प्रभाव से,

सृष्टि, स्थिति, और संहार होता है।

श्लोक 1 से 13 तक, भक्त भगवान शिव के तांडव नृत्य के विभिन्न पहलुओं की प्रशंसा करता है।

भक्त यह विश्वास करता है कि भगवान शिव के तांडव नृत्य से सृष्टि, स्थिति, और संहार होता है।

स्तोत्र के रचयिता अज्ञात हैं।

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