श्रीगोकुलेशष्टकम् २ एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करता है। यह स्तोत्र २०वीं सदी के भक्ति कवि गोविन्ददास द्वारा रचित है। स्तोत्र में, गोविन्ददास भगवान कृष्ण को गोकुल के राजकुमार के रूप में दर्शाते हैं, जो अपनी बालसुलभ हरकतों से सभी को प्रसन्न करते हैं।
श्रीगोकुलेशष्टकम् २ का हिंदी अनुवाद निम्नलिखित है:
प्रथम श्लोक
गोकुल में जो बालक खेलता है, वह है श्याम सुन्दर, वह है श्रीकृष्ण, वह है सर्वस्व।
द्वितीय श्लोक
जो गाय के दूध को पीता है, जो ग्वाल बालों के साथ खेलता है, जो राधा के साथ प्रेम करता है, वह है श्रीकृष्ण, वह है हमारा भगवान।
तृतीय श्लोक
जो गोकुल में रास रचाता है, जो गोपियों को मोहित करता है, जो माखन चोरी करता है, वह है श्रीकृष्ण, वह है हमारे दिलों में बसा हुआ।
चतुर्थ श्लोक
जो कंस को मारता है, जो गोकुल को बचाता है, जो दुष्टों का नाश करता है, वह है श्रीकृष्ण, वह है हमारा नायक।
पंचम श्लोक
जो प्रेम का सागर है, जो करुणा का अवतार है, जो सभी के लिए प्रकाश है, वह है श्रीकृष्ण, वह है हमारा उद्धारकर्ता।
षष्ठ श्लोक
जो हर दिल में बसा है, जो हर श्वास में है, जो हर जगह है, वह है श्रीकृष्ण, वह है हमारा सर्वस्व।
सप्तम श्लोक
जो हमें खुशी देता है, जो हमें शांति देता है, जो हमें मोक्ष देता है, वह है श्रीकृष्ण, वह है हमारा सब कुछ।
Shrigokulesashtakam 2
अष्टम श्लोक
हे श्रीकृष्ण, हम आपके चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित करते हैं, हम आपके प्रेम में लीन हो जाते हैं, हम आपके साथ एक हो जाते हैं।
श्रीगोकुलेशष्टकम् २ एक लोकप्रिय स्तोत्र है जिसे अक्सर भजनों और कीर्तनों में गाया जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम को जागृत करता है।
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