अक्षत का क्या मतलब होता है और हिन्दू धर्म में पूजा में इसका क्या महत्व है ?

अक्षत का अर्थ है बिना टूटे चावल। क्योंकि अक्षत शिवलिंग स्वरूप होते हैं और गेहूं का आकार योनि की तरह होता है, जिसे नवरात्रों में माँ की पूजा के पहले गेहूं के जवाव बोए जाते हैं।

अक्षत शिवलिंग स्वरूप होने से धन्य-धान्य के प्रतीक हैं। समृद्धि कारक अक्षत चावलों से निकलने वाली सूक्ष्म तरंगे देवताओं को अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।
अक्षत यानि चावलों में पृथ्वी व जल तत्व की अधिकता होती है जिससे देव तत्वों को अक्षत सक्रिय कर घर-मन्दिर के वास्तु दोष, कलह-क्लेश का निवारण करने में सहायक होते हैं।
अक्षत में दुःख दूर करने की भी क्षमता होती है। इसलिए पूजन सामग्री में यदि कोई सामग्री नहीं होती है, तो उसके स्थान पर अक्षतो का ही उपयोग किया जाता है।
श्वेत एवं कुमकुम से रंग अक्षतो का उपयोग :- श्वेत अक्षत वैराग्य अर्थात निष्काम भावना के एवं निर्गुणता के और लाल अक्षत सकाम और सगुण साधना के प्रतीक होते हैं।
इसलिए निष्काम पूजा में श्वेत सकाम पूजा में कुमकुम केसर हल्दी से रंगे अक्षतो का उपयोग करना चाहिए देवी पूजन में लाल अक्षत ही चढ़ाना चाहिए।
मङ्गल दोष से मुक्ति के लिए भात को शिवलिंग पर लेपित करते है।
उज्जैन के मंगलनाथ पर केवल अक्षत ही नैवेद्य अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है।

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