अंजनेया मंगलश्लोक हिंदी में हनुमान जी की स्तुति का एक छोटा पाठ है। इस पाठ में हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और दया की प्रशंसा की गई है।
अंजनेया मंगलश्लोक के श्लोक इस प्रकार हैं:
श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधारि बरनउँ रघुवर विमल जसु जो दायकु फल चारि बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन कुमार बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार
॥ दोहा ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुं लोक उजागर राम दूत अतुलित बलधामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा
अंजनेया मंगलश्लोक का पाठ करने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
- हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
- सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- जीवन में सुख समृद्धि आती है।
अंजनेया मंगलश्लोक का पाठ करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती है:
- किसी भी शुभ दिन और शुभ समय पर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर रखें।
- हनुमान जी को धूप, दीप, फूल आदि अर्पित करें।
- हनुमान चालीसा या अन्य हनुमान जी के भजनों का पाठ करें।
- अंत में, अंजनेया मंगलश्लोक का पाठ करें।
अंजनेया मंगलश्लोक का पाठ नियमित रूप से करने से भक्तों को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और वे सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त होकर सुखी और समृद्ध जीवन जीते हैं।
अंजनेया मंगलश्लोक का अर्थ इस प्रकार है:
श्लोक 1
मैं अपने मन को श्री गुरु के चरण कमलों की रज से निर्मल कर, भगवान राम के निर्मल यश की वर्णन करता हूँ, जो चारों फल देने वाला है। बुद्धिहीन शरीर को जानकर, मैं पवन कुमार का स्मरण करता हूँ। हे बल, बुद्धि और विद्या देने वाले, मेरे सारे कलेश और विकार दूर कर।
दोहा
जय हो हनुमान, ज्ञान और गुणों के सागर। जय हो कपिश, तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले। राम के दूत, अतुलित बल के धाम। अंजनी पुत्र, पवन के पुत्र नाम।
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