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Somvar Vrat Katha

Somvar Vrat Katha: सोमवार का दिन शंकर भगवान को समर्पित होता है. आज के दिन भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. कुछ लोग आज के दिन व्रत भी रखते

हिन्दू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित होता है, और सोमवार का दिन देवों के देव महादेव, भगवान शंकर को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव बहुत ही भोले हैं, इसलिए उन्हें ‘भोलेनाथ’ भी कहा जाता है वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और क्षणिक मात्र की भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं जो भक्त शिव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, वे सोमवार का व्रत रखते हैं। हालांकि, शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि आप यह उपवास रखते हैं, तो आपको Somvar vrat katha पढ़ना या सुनना अनिवार्य है, क्योंकि इसके बिना व्रत का फल अधूरा माना जाता है

इस विस्तृत लेख में हम Somvar vrat katha के महत्व, व्रत रखने की सही विधि और उस प्राचीन कहानी के बारे में जानेंगे जिसने सदियों से भक्तों के विश्वास को अटूट बनाए रखा है।

Somvar Vrat Katha:सोमवार के व्रत में जरूर सुनें ये कथा……

1. सोमवार व्रत का महत्व और शिव कृपा:Importance of Monday fast and grace of Shiva

सोमवार के व्रत को लेकर यह दृढ़ मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से भगवान शिव अपने भक्तों की मुरादें बहुत जल्दी पूरी करते हैं। चूँकि महादेव को किसी विशेष तामझाम या कठिन पूजन की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए वे केवल जल और बेलपत्र चढ़ाने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। सावन के सोमवार हों या सामान्य सोमवार, इस व्रत का फल साधक को मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और संतान सुख के रूप में प्राप्त होता है।

2. सोमवार व्रत के प्रकार:types of monday fast

नारद पुराण और अन्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार का व्रत मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:

1. साधारण प्रति सोमवार व्रत: यह हर सप्ताह सोमवार को रखा जाता है।

2. सौम्य प्रदोष व्रत: यह विशेष तिथियों पर महादेव की पूजा के लिए रखा जाता है।

3. सोलह सोमवार का व्रत (Solah Somvar): यह कठिन संकल्प के साथ लगातार 16 सोमवारों तक किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इन सभी व्रतों की पूजा विधि और Somvar vrat katha सुनने की प्रक्रिया लगभग एक समान ही होती है।

3. सोमवार व्रत की सम्पूर्ण पूजन विधि:Complete worship method of Monday fast

किसी भी व्रत की सफलता उसकी विधि पर निर्भर करती है। सोमवार व्रत की विधि इस प्रकार है:

स्नान और शुद्धि: व्रत के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

शिव-गौरी पूजन: मंदिर या घर के देवालय में भगवान शिव और माता पार्वती (शिव-गौरी) की विधिवत पूजा करें।

अभिषेक और अर्पण: महादेव को शुद्ध जल, गंगाजल और उनका प्रिय बेलपत्र अर्पित करें।

कथा का श्रवण: पूजन के पश्चात Somvar vrat katha को श्रद्धापूर्वक पढ़ें या सुनें।

भोजन के नियम: सोमवार का व्रत साधारण रूप से दिन के तीसरे पहर (शाम) तक रखा जाता है। Somvar Vrat Katha इसके बाद केवल एक समय ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।

4. सम्पूर्ण पौराणिक Somvar Vrat Katha

प्राचीन समय की बात है, किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके पास धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह संतान न होने के कारण बहुत दुखी रहता था। पुत्र की प्राप्ति की इच्छा लिए वह हर सोमवार को व्रत रखता था और पूरी निष्ठा के साथ शिव मंदिर जाकर शिव-पार्वती की पूजा करता था।

माता पार्वती का आग्रह और शिव का वरदान

साहूकार की अटूट भक्ति देखकर एक दिन माता पार्वती बहुत प्रसन्न हुईं और उन्होंने भगवान शिव से उस साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने का निवेदन किया। इस पर भगवान शिव ने कहा, “हे पार्वती! इस संसार में हर प्राणी को उसके कर्मों का फल भुगतना पड़ता है और भाग्य में जो लिखा है, वही होता है”। Somvar Vrat Katha परंतु माता पार्वती के बार-बार आग्रह करने पर शिवजी ने अपना निर्णय बदला और साहूकार को पुत्र-प्राप्ति का वरदान तो दिया, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि उस बालक की आयु केवल 12 वर्ष ही होगी

साहूकार भगवान शिव और माता पार्वती की यह बातचीत सुन रहा था। उसे न तो वरदान की बहुत खुशी हुई और न ही पुत्र की अल्पायु का दुख। वह पहले की तरह ही भक्ति भाव से Somvar vrat katha सुनता रहा और शिवजी की पूजा करता रहा।

बालक का जन्म और काशी की यात्रा

समय बीतने पर साहूकार की पत्नी ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। जब वह बालक 11 वर्ष का हुआ, तो उसे विद्या प्राप्त करने के लिए काशी भेजने का निर्णय लिया गया। साहूकार ने बालक के मामा को बुलाकर बहुत सारा धन दिया और निर्देश दिया कि रास्ते में जगह-जगह यज्ञ करवाते जाना और ब्राह्मणों को भोजन व दक्षिणा देते हुए जाना। मामा और भांजा दोनों इसी मार्ग पर चल पड़े।

Somvar Vrat Katha:सोमवार के व्रत में जरूर सुनें ये कथा, मिलेगी श‍िव-पार्वती की कृपा Somvar Vrat Katha

Somvar Vrat Katha:सोमवार के व्रत में जरूर सुनें ये कथा, मिलेगी श‍िव-पार्वती की कृपा

Somvar Vrat Katha: सोमवार का दिन शंकर भगवान को समर्पित होता है. आज के दिन भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने…

राजकुमारी का विवाह और साहूकार के पुत्र की ईमानदारी

रास्ते में एक नगर पड़ा जहाँ के राजा की पुत्री का विवाह था। जिस राजकुमार से विवाह तय हुआ था, वह एक आँख से काना था। राजकुमार के पिता ने अपनी कमी छुपाने के लिए साहूकार के पुत्र को दूल्हा बनाकर विवाह मंडप में बिठा दिया और सोचा कि विवाह के बाद इसे विदा कर देंगे और असली राजकुमार के साथ राजकुमारी को भेज देंगे।

साहूकार का पुत्र बहुत ईमानदार था। उसे यह छल पसंद नहीं आया, इसलिए उसने राजकुमारी की चुन्नी के पल्ले पर लिख दिया कि “तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है, लेकिन तुम्हें जिस राजकुमार के साथ भेजा जा रहा है, वह एक आँख से काना है”। जब राजकुमारी ने यह पढ़ा, तो उसने उस राजकुमार के साथ जाने से मना कर दिया और बारात वापस लौट गई। इधर साहूकार का पुत्र और उसके मामा काशी पहुँच गए।

12 वर्ष की आयु और शिव का चमत्कार

काशी पहुँचकर उन्होंने यज्ञ शुरू किया। जिस दिन बालक 12 वर्ष का हुआ, उस दिन भी यज्ञ का आयोजन था। बालक की तबीयत खराब हुई और वह अंदर जाकर सो गया। शिवजी के वरदान के अनुसार, कुछ ही समय में उस बालक के प्राण निकल गए। Somvar Vrat Katha जब मामा ने मृत भांजे को देखा, तो वे विलाप करने लगे।

उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती वहां से गुजर रहे थे। माता पार्वती ने रोने का स्वर सुनकर महादेव से उस व्यक्ति का कष्ट दूर करने का अनुरोध किया। जब शिवजी पास गए, तो उन्होंने पहचाना कि यह वही साहूकार का पुत्र है। माता पार्वती के हृदय में ममता जाग उठी और उन्होंने बालक को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया, ताकि उसके माता-पिता वियोग में न मरें। माता पार्वती के पुन: निवेदन पर महादेव ने बालक को जीवनदान दिया और वह शिवजी की कृपा से जीवित हो उठा।

बालक की वापसी और साहूकार का सपना

अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वह बालक अपने मामा के साथ वापस घर की ओर चल दिया। रास्ते में वे उसी नगर में रुके जहाँ उसका विवाह हुआ था। राजा ने लड़के को पहचान लिया और अपनी पुत्री को बहुत सारे धन के साथ विदा किया। इधर साहूकार और उसकी पत्नी ने प्रण लिया था कि यदि उन्हें बेटे की मृत्यु का समाचार मिला, तो वे भी प्राण त्याग देंगे। लेकिन जब उन्होंने अपने बेटे और बहू को सही-सलामत देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा।

उसी रात भगवान शिव ने साहूकार के स्वप्न में दर्शन दिए और कहा, “हे श्रेष्ठी! मैं तुम्हारे सोमवार व्रत करने और Somvar vrat katha सुनने से प्रसन्न हूँ, इसलिए मैंने तुम्हारे पुत्र को लंबी आयु प्रदान की है”।

5. सोमवारी व्रत के लाभ और फल

महादेव की महिमा अपरंपार है। Somvar vrat katha के अंत में यह स्पष्ट कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करता है या इस कथा को पढ़ता और सुनता है, उसके जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। भगवान शिव न केवल संकटों से रक्षा करते हैं, बल्कि समस्त मनोकामनाएं भी पूर्ण करते हैं।

यह कथा हमें सिखाती है कि भाग्य में जो भी लिखा हो, शिव की अनन्य भक्ति और माता पार्वती की करुणा से उसे भी बदला जा सकता है। इसलिए हर सोमवार को पूजन के बाद Somvar vrat katha का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।

6. निष्कर्ष

भगवान भोलेनाथ केवल एक लोटा जल चढ़ाने से मान जाते हैं, बशर्ते आपकी भक्ति सच्ची हो। Somvar vrat katha हमें विश्वास दिलाती है कि ईश्वर हमेशा अपने भक्तों के साथ हैं। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो सोमवार के व्रत का संकल्प लें और इस कथा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

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