Angarak Stotra

Shri Angarak Stotra: श्री अंगारक स्तोत्र

Shri Angarak Stotra श्री अंगारक स्तोत्र: श्री अंगारक स्तोत्र स्कंद पुराण ग्रंथ से लिया गया है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह अशुभ स्थिति में हो और उसके जीवन में बाधाएँ उत्पन्न कर रहा हो, तब प्रतिदिन अंगारक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए; इससे मंगल का अशुभ प्रभाव दूर हो जाता है और वह शुभ फल देने लगता है। Shri Angarak Stotra श्री अंगारक स्तोत्र संस्कृत भाषा में है। यह श्री स्कंद पुराण का एक अंश है। इस स्तोत्र के ऋषि विरूपांगिरस हैं। इस स्तोत्र के देवता अग्नि हैं। इसका छंद गायत्री है। भगवान मंगल से उत्पन्न होने वाली समस्त बाधाओं को दूर करने के लिए इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

जो कोई भी व्यक्ति ऊपर वर्णित भगवान मंगल के नामों का नित्य पाठ करता है, भगवान मंगल उसके ऋण, दरिद्रता और दुर्भाग्य को नष्ट कर देते हैं। उसे प्रचुर मात्रा में धन और एक सुंदर पत्नी की प्राप्ति होती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि उसे एक अत्यंत गुणवान पुत्र भी प्राप्त होता है। Shri Angarak Stotra ऐसा पुत्र अपने परिवार का गौरव बनता है और परिवार की कीर्ति को चारों दिशाओं में फैलाता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में ‘अंगारक योग’ होता है, उसके विचार नकारात्मक हो जाते हैं। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के अपने भाइयों, मित्रों और अन्य सगे-संबंधियों के साथ मधुर संबंध नहीं रह पाते।

इस स्तोत्र का पाठ करने से, समस्त ग्रहों के अशुभ प्रभावों से उत्पन्न होने वाली सभी बाधाओं का निश्चित रूप से नाश हो जाता है। इस प्रकार, यहाँ श्री स्कंद पुराण से उद्धृत ‘अंगारक स्तोत्र’ संपूर्ण होता है।

यदि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह (Mars) अशुभ स्थिति में (दूसरे, छठे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में) विराजमान हो, अथवा शनि, हर्षल, राहु, केतु या बुध (Mercury) के साथ युति कर रहा हो, तो श्रद्धा, एकाग्रता और भक्तिभाव के साथ दिन में एक बार अंगारक स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। Shri Angarak Stotra यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ‘अंगारक योग’ विद्यमान हो, तो उसे मंगल तथा राहु-केतु ग्रहों की शांति के उपाय अवश्य करने चाहिए। साथ ही, उसे नियमित रूप से श्री अंगारक स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिए।

श्री अंगारक स्तोत्र के लाभ:

‘अंगारक’ मंगल ग्रह का ही एक अन्य नाम है। मंगल को पृथ्वी का पुत्र माना जाता है। यह ‘मंगल स्तोत्र’ स्कंद पुराण से लिया गया है। ऐसी मान्यता है Shri Angarak Stotra कि जो कोई भी व्यक्ति इस अंगारक स्तोत्र का नित्य-प्रतिदिन पाठ करता है, उसके जीवन से समस्त ऋणों और दुर्भाग्य का पूर्णतः निवारण हो जाता है।

उसे जीवन में प्रचुरता, धन-संपदा और एक अत्यंत सुंदर पत्नी की प्राप्ति होती है। Shri Angarak Stotra उनके जीवन से मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव भी दूर हो जाते हैं। जीवन में समग्र समृद्धि के लिए अंगारक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। यह स्तोत्र व्यक्ति के व्यक्तित्व में आकर्षण और सम्मोहन शक्ति बढ़ाने में भी सहायक होता है।

इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए:

जो व्यक्ति भारी कर्ज़ में डूबा हुआ है, उसे इस ‘श्री अंगारक स्तोत्र’ का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए।

विनियोग –

अस्य अंगारकस्तोत्रस्य विरूपांगिरस ऋषि: ।
अग्निर्देवता । गायत्री छन्द: ।
भौम प्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ।

।। अंगारक स्तोत्रम् ।।

अंगारक: शक्तिधरो लोहितांगो धरासुत: ।
कुमारो मंगलौ भौमो महाकायो धनप्रद: ।। 1 ।।

ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृद्रोगनाशन: ।
विद्युतप्रभो व्रणकर: कामदो धनहृत् कुज: ।। 2 ।।

सामगानप्रियो रक्त वस्त्रो रक्तायतेक्षण: ।
लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधक: ।। 3 ।।

रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायक: ।
नामान्येतानि भौमस्य य: पठेत्सततं नर: ।। 4 ।।

ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्रस्यं च विनश्यति ।
धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ।। 5 ।।

वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशय: ।
योsर्चयेदह्नि भौमस्य मंगलं बहुपुष्पकै: ।। 6 ।।

सर्वा नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ।। 7 ।।

।। इति श्री अंगारक स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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