May 7, 2026

Ganapati Stavaha

Shri Ganapati Stavaha:श्री गणपति स्तव:

Ganapati Stavaha: श्री गणपति स्तव: (Shri Ganapati Stavaha): श्री गणपति स्तव का पाठ ज्ञान को सुदृढ़ करने और बुद्धि को तीव्र करने के लिए किया जाता है। श्री गणपति स्तव केवल आठ श्लोकों का एक बहुत छोटा सा संग्रह है। 12 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चों को प्रति वर्ष कम से कम इक्कीस सौ (2100) बार इसका पाठ करना चाहिए। इससे उनकी बुद्धि तीव्र होती है और वे अपनी अपेक्षाओं से भी अधिक सफलता प्राप्त करते हैं। इस स्तोत्र का निरंतर और एकाग्र मन से पाठ करना, मन में ही भगवान गणेश का ध्यान करने के समान है। और इससे मूलाधार चक्र भी जागृत होता है। भगवान गणेश एक सजग रक्षक, एक गुरु और धन-संपत्ति के दाता हैं। Ganapati Stavaha इस प्रकार, गौरीपुत्र गणपति ही वह हैं जो जीवन की हर समस्या का समाधान करते हैं। उनकी आराधना करने से आपकी समस्त समस्याओं का अंत हो जाता है। Ganapati Stavaha हिंदू धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में, श्री गणेश की कृपा के महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। Ganapati Stavaha नारद पुराण में इस स्तव का संकलन मिलता है, जो आपके जीवन की सभी बाधाओं और कष्टों को दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। श्री गणपति स्तव, भगवान गणेश के सबसे प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। यह सभी प्रकार की समस्याओं का निवारण करता है। श्री गणपति स्तव का नित्य पाठ करने से व्यक्ति सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्त हो जाता है। Ganapati Stavaha भगवान गणेश समस्त समस्याओं का समाधान करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं। किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ करने से पूर्व सर्वप्रथम भगवान गणेश की ही पूजा-अर्चना की जाती है। श्री गणपति स्तव, जिसे ‘संकट नाशनम् गणपति स्तोत्र’ भी कहा जाता है, भगवान गणेश की आराधना हेतु सबसे प्रभावशाली प्रार्थनाओं में से एक है। Ganapati Stavaha यह गणपति स्तोत्र नारद पुराण से लिया गया है। यह सभी प्रकार की बाधाओं और कष्टों को दूर करता है। श्री गणपति स्तव का प्रतिदिन पाठ करने से व्यक्ति सभी प्रकार की विघ्न-बाधाओं से मुक्त हो जाता है और उसके समस्त दुखों का नाश हो जाता है। हिंदी भाषा में ‘संकट’ का अर्थ है समस्या या विपत्ति, और ‘नाशनम्’ का अर्थ है—सदैव के लिए समाप्त कर देना। अतः, श्री गणपति स्तव का पाठ करके कोई भी व्यक्ति अपनी समस्याओं को सदैव के लिए समाप्त कर सकता है। Ganapati Stavaha श्री गणपति स्तव में, महर्षि नारद ने भगवान गणेश की महिमा का गुणगान किया है। Ganapati Stavaha महर्षि नारद कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धापूर्वक शीश झुकाकर भगवान गणेश की आराधना करनी चाहिए और उनसे दीर्घायु तथा समस्त समस्याओं के निवारण का वरदान मांगना चाहिए। भगवान गणेश के विभिन्न नामों का उच्चारण करना चाहिए, जिनमें वक्रतुंड, एकदंत, कृष्ण पिंगाक्ष, गजवक्र, लंबोदर, छटा विकट, विघ्न राजेंद्र, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति आदि शामिल हैं। इन बारह नामों की पूजा दिन के तीनों प्रहरों में की जानी चाहिए। यह व्यक्ति को किसी भी प्रकार के भय से मुक्त करता है। Ganapati Stavaha भगवान गणेश की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है। धन की इच्छा रखने वाला व्यक्ति धनवान बनता है, ज्ञान की चाह रखने वाला व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करता है, और मोक्ष की कामना करने वाला व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है। ऐसा माना जाता है कि ‘श्री गणपति स्तव’ छह महीने के भीतर ही फल देना शुरू कर देता है। एक वर्ष के भीतर, व्यक्ति को निश्चित रूप से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। श्री गणपति स्तव के लाभ: भगवान गणेश एक सजग रक्षक, एक गुरु और धन-संपदा के दाता हैं। गौरीपुत्र गणपति ऐसे ही हैं, जो जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करने में सक्षम हैं। मैं आपकी (गणपति की) पूजा करके अपनी सभी समस्याओं का निवारण करूँगा।यदि कोई व्यक्ति 21 दिनों तक भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करता है, तो उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। भगवान गणेश को ब्रह्मा, विष्णु और शिव से जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि अन्य सभी देवी-देवताओं की उत्पत्ति भगवान गणेश से ही हुई है। भगवान गणेश का आशीर्वाद व्यक्ति के जीवन को समृद्ध और सुखी बनाता है। ऐसा व्यक्ति जीवन की सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त करने में सक्षम हो जाता है। इस स्तव का पाठ किसे करना चाहिए: जो व्यक्ति अपनी शिक्षा या कार्यक्षेत्र को उच्च स्तर तक ले जाने के लिए उत्सुक हैं, और जो अपनी आजीविका को सुचारू रूप से चलाने हेतु धन अर्जित करने की इच्छा रखते हैं, उन्हें वैदिक नियमों के अनुसार नियमित रूप से ‘श्री गणपति स्तव’ का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री गणपति स्तव: हिंदी पाठ: Shri Ganapati Stavaha in Hindi अजं निर्विकल्पं निराहरारमेकं निरानन्दमानन्दमद्वैतपूर्णम् ।परं निर्गुणं निर्विशेषं निरीहं परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ।। १ ।। गुणातीतमानं चिदानन्दरूपं चिदाभासकं सर्वगं ज्ञानगम्यम् ।मुनिध्येयमाकाशरूपं परेशं परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम ।। २ ।। जगत्कारणं कारणज्ञानरूपं सुरादिं सुखादिं गुणेशं भजेम ।रजोयोगतो ब्रह्मरूपं श्रुतिज्ञं सदा कार्यसक्तं ह्र्दयाऽचिन्त्यरूपम् ।। ३ ।। जगत्कारणं सर्वविद्यानिधानं परब्रह्मरूपं गणेशं नता: स्म: ।सदा सत्ययोग्यं मुदा क्रीडमानं सुरारीन्हरंतं जगत्पालयंतम् ।। ४ ।। अनेकावतारं निजज्ञानहारं सदा विश्र्वरूपं गणेशं नमाम: ।तपोयोगिनं रूद्ररूपं त्रिनेत्रं जगद्धारकं तारकं ज्ञानहेतुम् ।। ५ ।। अनेकागमै: स्वं जनं बोधयंतं सद सर्वरूपं गणेशं नमाम: ।नम: स्तोमहारं जनाज्ञानहारं त्रयीवेदसारं परब्रह्मसारम् ।। ६ ।। मुनिज्ञानकारं विदूरे विकारं सदा ब्रह्मरूपं गणेशं नमाम: ।निजैरोषधीस्तर्पयंतं कराद्यै: सुरौघान्कलाभि: सुधास्त्राविणीभि: ।। ७ ।। दिनेशांशुसंतापहारं द्विजेश शशांकस्वरूपं गणेशं नमाम: ।प्रकाशस्वरूपं नभोवायुरूपं विकारादिहेतुं कलाधारभूतम् ।। ८ ।। अनेकक्रियानेकशक्तिस्वरूपं सदा शक्तिरूपं गणेशं नमाम: ।प्रधानस्वरूपं महत्तत्त्वरूपं धराचारिरूपं दिगीशादिरूपम् ।। ९ ।। असत्सत्स्वरूपं जगद्धेतुरूपं सदा विश्र्वरूपं गणेशं नता: सम: ।त्वदीये मन: स्थापयेदंघ्रियुग्मे स नो विघ्नसंघातपीडां लभेत ।। १० ।। लसत्सूर्यबिम्बे विशाले स्थितोऽयं जनो ध्वांतपीडां कथं वा लभेत ।वयं भ्रामिता: सर्थथाऽज्ञानयोगादलब्धास्तवांहघ्रिं बहून्वर्षपूगान् ।। ११ ।। इदानीमवाप्तास्तवैव प्रसादात्प्रपन्नान्सदा पाहि विश्र्वम्भराद्य ।एवं स्तुतो गणेशस्तु सन्तुष्टोऽभून्महामुने ।। १२ ।। कृपया परयोपेतोऽभिधातुमुपचक्रमे ।। १३ ।। ।। इति श्री गणपति स्तव: सम्पूर्णम् ।।

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Ganga Stotram

Shri Ganga Stotram: श्री गंगा स्तोत्रम

श्री गंगा स्तोत्रम हिंदी पाठ: Shri Ganga Stotram in Hindi देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे ।शङ्करमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥ १ ॥ भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः ।नाहं जाने तव महिमानंपाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥ २ ॥ हरिपदपाद्यतरङ्गिणि गङ्गे हिमविधुमुक्ताधवलतरङ्गे ।दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं कुरु कृपया भवसागरपारम् ॥ ३ ॥ तव जलममलं येन निपीतं, परमपदं खलु तेन गृहीतम् ।मातर्गङ्गे त्वयि यो भक्तः किल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः ॥ ४ ॥ पतितोद्धारिणि जाह्नवि गङ्गे खण्डितगिरिवरमण्डितभङ्गे ।भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये, पतितनिवारिणि त्रिभुवनधन्ये ॥ ५ ॥ कल्पलतामिव फलदां लोके, प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके ।पारावारविहारिणि गङ्गे विमुखयुवतिकृततरलापाङ्गे ॥ ६ ॥ तव चेन्मातः स्रोतःस्नातः पुनरपि जठरे सोऽपि न जातः ।नरकनिवारिणि जाह्नवि गङ्गे कलुषविनाशिनि महिमोत्तुङ्गे ॥ ७ ॥ पुनरसदङ्गे पुण्यतरङ्गे जय जय जाह्नवि करुणापाङ्गे ।इन्द्रमुकुटमणिराजितचरणे सुखदे शुभदे भृत्यशरण्ये ॥ ८ ॥ रोगं शोकं तापं पापं हर मे Ganga Stotram भगवति कुमतिकलापम् ।त्रिभुवनसारे वसुधाहारे त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे ॥ ९ ॥ अलकानन्दे परमानन्दे कुरु करुणामयि कातरवन्द्ये ।तव तटनिकटे यस्य निवासः खलु वैकुण्ठे तस्य निवासः ॥ १० ॥ वरमिह नीरे कमठो मीनः किं वा तीरे शरटः क्षीणः ।अथवा श्वपचो मलिनो दीनस्तव न हि दूरे नृपतिकुलीनः ॥ ११ ॥ भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये ।गङ्गास्तवमिमममलं नित्यं पठति नरो यः स जयति सत्यम् ॥ १२ ॥ येषां हृदये गङ्गाभक्तिस्तेषां भवति सदा सुखमुक्तिः ।मधुराकान्तापज्झटिकाभिः परमानन्दकलितललिताभिः ॥ १३ ॥ गङ्गास्तोत्रमिदं भवसारं Ganga Stotram वाञ्छितफलदं विमलं सारम् ।शङ्करसेवकशङ्कररचितं पठति सुखी स्तव इति च समाप्तः ॥ १४ ॥ देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे ।शङ्करमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥ ॥ इति श्री गंगा स्तोत्रम सम्पूर्णम् ॥

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Bada Mangal 2026

Dusra Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल के अचूक उपाय, शुभ तिथियां और पूजा विधि से चमकाएं अपनी किस्मत….

Dusra Bada Mangal 2026 Mein Kab Hai: सनातन धर्म में साक्षात भगवान हनुमान जी की महिमा अत्यंत निराली और असीम है। कलियुग में संकटमोचन हनुमान जी ही एक मात्र ऐसे तुरंत फल देने वाले और जाग्रत देवता माने जाते हैं, जो अपने सच्चे भक्तों की थोड़ी सी पुकार सुनकर ही उनके सभी संकटों को हर लेते हैं। हिंदू वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ का पूरा महीना भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी की विशेष आराधना के लिए पूरी तरह से समर्पित होता है, और इस पवित्र महीने में पड़ने वाले हर मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या आम बोलचाल की भाषा में ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाता है। इस साल Bada Mangal 2026 आम जनमानस के लिए कई मायनों में बहुत ही खास और अत्यंत शुभ संयोग लेकर आया है, क्योंकि इस बार ज्येष्ठ का यह पावन महीना अधिकमास (मलमास) के रूप में भी पड़ रहा है। Bada Mangal 2026 अगर आप भी अपने वर्तमान जीवन में चल रही तमाम तरह की भयंकर आर्थिक, मानसिक या पारिवारिक परेशानियों से बुरी तरह थक चुके हैं, तो इस ज्ञानवर्धक लेख में हम आपको Bada Mangal 2026 से जुड़ी संपूर्ण और बिल्कुल सटीक जानकारी विस्तार से देने जा रहे हैं। Dusra Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल के अचूक उपाय……. कब से कब तक है ज्येष्ठ माह और कुल कितने बड़े मंगल पड़ेंगे ? इस साल 2026 में ज्येष्ठ का पवित्र महीना 2 मई से आरंभ होकर 29 जून तक चलने वाला है। Bada Mangal 2026 इस साल की सबसे दिलचस्प और अद्भुत बात यह है कि इस बार ‘अधिक ज्येष्ठ मास’ पड़ने के कारण Bada Mangal 2026 के इस पूरे कालखंड में आपको पूजा-पाठ करने के लिए चार नहीं, बल्कि पूरे आठ बड़े मंगलवार के अत्यंत दुर्लभ और शुभ अवसर प्राप्त होने वाले हैं। आपकी सुविधा के लिए इन सभी आठ मंगलवार की स्पष्ट तिथियां इस प्रकार हैं…. पहला बड़ा मंगल: 5 मई (जो कि मूल नक्षत्र और अत्यंत शुभ शिव योग से युक्त था)। दूसरा बड़ा मंगल: 12 मई। तीसरा बड़ा मंगल: 19 मई। चौथा बड़ा मंगल: 26 मई। पांचवां बड़ा मंगल: 2 जून। छठा बड़ा मंगल: 9 जून। सातवां बड़ा मंगल: 16 जून। आठवां और आखिरी बड़ा मंगल: 23 जून। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में जिन लोगों को हर सप्ताह विधि-विधान से पूजा करने का समय नहीं मिल पाता है, उनके लिए Bada Mangal 2026 का यह समय बहुत ही ज्यादा भाग्यशाली और चमत्कारी है। क्यों मनाया जाता है बुढ़वा या बड़ा मंगल :Why is Budhwa or Bada Mangal celebrated ? धार्मिक मान्यताओं और हमारी प्राचीन कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के इन मंगलवारों का सीधा और गहरा संबंध रामायण काल की कई अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ है। Bada Mangal 2026 ऐसा दृढ़ता से माना जाता है कि इसी पावन महीने के मंगलवार के ही दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और उनके परम भक्त हनुमान जी का जंगल में पहली बार मिलन हुआ था। इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि इसी महीने के एक खास मंगलवार को वीर हनुमान जी ने अपनी पूंछ से रावण की विशाल स्वर्ण लंका का दहन किया था, जिससे माता सीता ने अत्यंत प्रसन्न होकर उन्हें हमेशा के लिए अजर-अमर होने का महान आशीर्वाद प्रदान किया था। इसी कारण से Bada Mangal 2026 के दौरान की गई कोई भी साधारण सी पूजा कभी भी खाली नहीं जाती और उसका फल भक्त को अनंत गुना होकर मिलता है। हनुमान जी की शास्त्रोक्त और अचूक पूजा विधि:Shastra and infallible method of worship of Hanuman ji इस महान दिन बजरंगबली को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए एकदम सही और वैदिक पूजा विधि का पालन करना बहुत ही ज्यादा आवश्यक होता है। Bada Mangal 2026 के दिन सुबह जल्दी (ब्रह्म मुहूर्त में) उठकर शुद्ध जल से स्नान करें और लाल या नारंगी रंग के एकदम स्वच्छ वस्त्र धारण करें, क्योंकि ज्योतिष और शास्त्रों में ये रंग बजरंगबली को अत्यधिक प्रिय बताए गए हैं। इसके बाद अपने घर के शांत मंदिर या किसी भी सिद्ध हनुमान मंदिर में जाकर सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें। Bada Mangal 2026 भगवान की मूर्ति के सामने चमेली के तेल या फिर शुद्ध देसी घी का एक बड़ा दीपक प्रज्वलित करें। हनुमान जी को भोग के रूप में बूंदी के लड्डू, गुड़-चना, ताजे केले या साबुत नारियल अत्यंत आदर के साथ अर्पित करें। इसके पश्चात पूरी एकाग्रता और गहरी भक्ति-भाव से श्री हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या फिर शक्तिशाली हनुमान अष्टक का पाठ करें। Bada Mangal 2026 पूजा के दौरान भगवान को लाल चोला (सिंदूर और चमेली का तेल मिलाकर) अर्पित करना बहुत ही चमत्कारिक उपाय माना जाता है; शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से जीवन के सारे भारी संकट तुरंत दूर हो जाते हैं और भगवान अति प्रसन्न होते हैं। जीवन की हर परेशानी के लिए सिद्ध और विशेष उपाय:Proven and special remedies for every problem of life (Upay) इस पवित्र अवसर पर केवल सामान्य पूजा ही नहीं, बल्कि कुछ विशेष तांत्रिक और ज्योतिषीय उपाय भी सफलतापूर्वक किए जाते हैं। Bada Mangal 2026 पर आप अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के अनुसार नीचे दिए गए अचूक उपाय आजमा सकते हैं: सुंदरकांड का विशेष पाठ: जीवन के हर क्षेत्र में अपार सफलता पाने के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके सुंदरकांड का पाठ करें। अपने सामने भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की तस्वीर अवश्य रखें और आप इसे अपनी सुविधानुसार 11, 21, 31 या 41 दिनों तक नियमित भी कर सकते हैं। लव लाइफ और प्रेम संबंधों की कड़वाहट के लिए: यदि आपके लवमेट (प्रेमी/प्रेमिका) के साथ रिश्ते में कोई बहुत बड़ी अनबन आ गई है, तो मंगलवार को एक ताज़ा केले का पत्ता लें। केसरिया सिंदूर में थोड़ा सा चमेली का तेल मिलाकर उस पत्ते पर एक त्रिकोण (Triangle) बनाएं। उसके बीच में 50 ग्राम सिंदूर की पुड़िया और चमेली के तेल की एक छोटी शीशी रखकर ‘अवन्ती समुत्थं सुमेषानस्थ धरानन्दनं रक्त वस्त्रं समीड़े’ मंत्र का जाप करें। बाद में यह सारी सामग्री हनुमान जी को चढ़ाएं और पत्ते को किसी नदी में विसर्जित कर दें। दांपत्य जीवन की खोई खुशियों के लिए: पति-पत्नी के बीच दोबारा प्यार जगाने के लिए तीन कच्चे

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