April 8, 2026

Rinmochan Mangal

Shri Rinmochan Mangal Stotra: श्री ऋणमोचन मंगल स्तोत्र

Shri Rinmochan Mangal Stotra श्री ऋणमोचन मंगल स्तोत्र : श्री ऋणमोचन मंगल स्तोत्र भगवान मंगल (मंगल ग्रह) की आराधना का एक विशेष माध्यम है। भगवान मंगल शक्ति, संपत्ति, समृद्धि, साहस, क्रोध और सफलता पर नियंत्रण रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस स्तोत्र का प्रतिदिन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने से सफलता के मार्ग खुल जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति ऋण-मुक्त जीवन जीना चाहता है, तो यह स्तोत्र अत्यंत सहायक सिद्ध होता है; विशेष रूप से तब, जब धन प्राप्ति के सभी मार्ग अवरुद्ध प्रतीत हो रहे हों। Rinmochan Mangal किसी भी प्रकार के ऋण, कर्ज या आर्थिक संकट से निश्चित रूप से मुक्ति प्राप्त होती है। इस पाठ को प्रारंभ करने से पूर्व, लाल वस्त्र धारण करें। इसके बाद, घी के दीपक की बाईं ओर और किसी अन्य आवश्यक तेल (जैसे तिल का तेल) के दीपक की दाईं ओर, मंगल यंत्र और महावीर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। Rinmochan Mangal हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें, तथा साथ ही उन्हें गुड़ और बेसन से बनी कोई वस्तु (जैसे बेसन के लड्डू) भोग के रूप में चढ़ाएं। भूमि-पुत्र भगवान मंगल देव ऋणों का नाश करने वाले और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले देवता हैं। Rinmochan Mangal जब किसी व्यक्ति पर ऋण का बोझ तेजी से बढ़ने लगता है, तो किसी शुभ तिथि से प्रारंभ करके, लाल फूलों की माला धारण करते हुए इस स्तोत्र का पाठ करें। यदि आप ऋण के भारी बोझ तले दबे हुए हैं और चाहने पर भी अपने कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ हैं, तो Rinmochan Mangal ‘ऋणमोचन मंगल स्तोत्र’ का नियमित पाठ करने से आपका ऋण धीरे-धीरे कम होने लगेगा। जैसा कि आप जानते हैं, मंगल ग्रह का संबंध हनुमान जी से है और हनुमान जी सर्वशक्ति प्रदाता हैं। अतः, इस स्तोत्र का पाठ हनुमान जी की आराधना के रूप में भी अत्यंत पूजनीय माना जाता है। श्री ऋणमोचन मंगल स्तोत्र के लाभ: इस स्तोत्र का प्रयोग करते हुए प्रतिदिन मंगल पूजा करने से व्यक्ति ऋण-मुक्त हो सकता है।भगवान मंगल के आशीर्वाद से आय-अर्जन में आने वाली बाधाओं को आसानी से दूर किया जा सकता है।व्यक्ति कार्य करने और सफलता पूर्वक धन कमाने की शक्ति विकसित कर सकता है।इस ‘ऋणमोचक स्तोत्र’ का प्रतिदिन पाठ करने से, संतोषजनक आर्थिक स्थिति प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति एक सफल जीवन व्यतीत कर सकता है।श्री ऋणमोचन मंगल स्तोत्र ‘कुज दोष’ (या ‘मांगलिक दोष’) के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।इसके अतिरिक्त, श्री ऋणमोचन मंगल स्तोत्र मंगल ग्रह के अशुभ या हानिकारक प्रभावों से मुक्ति पाने में भी सहायता करता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: Rinmochan Mangal जो व्यक्ति कर्ज़ में डूबा हुआ है और उसका भुगतान करने में असमर्थ है, उसे नियमित रूप से इस ‘श्री ऋणमोचन मंगल स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। श्री ऋणमोचक मंगल स्तोत्र हिंदी पाठShri Rinmochan Mangal Stotra in Hindi ।। श्रीगणेशाय नमः ।। मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः ।स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ।। लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः ।धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः ।। अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः ।व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः ।। एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत् ।ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ।। धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् ।कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ।। स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः ।न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित् ।। अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल ।त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय ।। ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः ।भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा ।। अतिवक्त्र दुरारार्ध्य भोगमुक्त जितात्मनः ।तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुश्टो हरसि तत्ख्शणात् ।। विरिंचिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा ।तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः ।। पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः ।ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः ।। एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम् ।महतिं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा ।। ।। इति श्री ऋणमोचन मंगल स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Angarak Stotra

Shri Angarak Stotra: श्री अंगारक स्तोत्र

Shri Angarak Stotra श्री अंगारक स्तोत्र: श्री अंगारक स्तोत्र स्कंद पुराण ग्रंथ से लिया गया है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह अशुभ स्थिति में हो और उसके जीवन में बाधाएँ उत्पन्न कर रहा हो, तब प्रतिदिन अंगारक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए; इससे मंगल का अशुभ प्रभाव दूर हो जाता है और वह शुभ फल देने लगता है। Shri Angarak Stotra श्री अंगारक स्तोत्र संस्कृत भाषा में है। यह श्री स्कंद पुराण का एक अंश है। इस स्तोत्र के ऋषि विरूपांगिरस हैं। इस स्तोत्र के देवता अग्नि हैं। इसका छंद गायत्री है। भगवान मंगल से उत्पन्न होने वाली समस्त बाधाओं को दूर करने के लिए इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है। जो कोई भी व्यक्ति ऊपर वर्णित भगवान मंगल के नामों का नित्य पाठ करता है, भगवान मंगल उसके ऋण, दरिद्रता और दुर्भाग्य को नष्ट कर देते हैं। उसे प्रचुर मात्रा में धन और एक सुंदर पत्नी की प्राप्ति होती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि उसे एक अत्यंत गुणवान पुत्र भी प्राप्त होता है। Shri Angarak Stotra ऐसा पुत्र अपने परिवार का गौरव बनता है और परिवार की कीर्ति को चारों दिशाओं में फैलाता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में ‘अंगारक योग’ होता है, उसके विचार नकारात्मक हो जाते हैं। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के अपने भाइयों, मित्रों और अन्य सगे-संबंधियों के साथ मधुर संबंध नहीं रह पाते। इस स्तोत्र का पाठ करने से, समस्त ग्रहों के अशुभ प्रभावों से उत्पन्न होने वाली सभी बाधाओं का निश्चित रूप से नाश हो जाता है। इस प्रकार, यहाँ श्री स्कंद पुराण से उद्धृत ‘अंगारक स्तोत्र’ संपूर्ण होता है। यदि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह (Mars) अशुभ स्थिति में (दूसरे, छठे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में) विराजमान हो, अथवा शनि, हर्षल, राहु, केतु या बुध (Mercury) के साथ युति कर रहा हो, तो श्रद्धा, एकाग्रता और भक्तिभाव के साथ दिन में एक बार अंगारक स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। Shri Angarak Stotra यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ‘अंगारक योग’ विद्यमान हो, तो उसे मंगल तथा राहु-केतु ग्रहों की शांति के उपाय अवश्य करने चाहिए। साथ ही, उसे नियमित रूप से श्री अंगारक स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिए। श्री अंगारक स्तोत्र के लाभ: ‘अंगारक’ मंगल ग्रह का ही एक अन्य नाम है। मंगल को पृथ्वी का पुत्र माना जाता है। यह ‘मंगल स्तोत्र’ स्कंद पुराण से लिया गया है। ऐसी मान्यता है Shri Angarak Stotra कि जो कोई भी व्यक्ति इस अंगारक स्तोत्र का नित्य-प्रतिदिन पाठ करता है, उसके जीवन से समस्त ऋणों और दुर्भाग्य का पूर्णतः निवारण हो जाता है। उसे जीवन में प्रचुरता, धन-संपदा और एक अत्यंत सुंदर पत्नी की प्राप्ति होती है। Shri Angarak Stotra उनके जीवन से मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव भी दूर हो जाते हैं। जीवन में समग्र समृद्धि के लिए अंगारक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। यह स्तोत्र व्यक्ति के व्यक्तित्व में आकर्षण और सम्मोहन शक्ति बढ़ाने में भी सहायक होता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जो व्यक्ति भारी कर्ज़ में डूबा हुआ है, उसे इस ‘श्री अंगारक स्तोत्र’ का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए। श्री अंगारक स्तोत्र हिंदी पाठ: Shri Angarak Stotra in Hindi विनियोग – अस्य अंगारकस्तोत्रस्य विरूपांगिरस ऋषि: ।अग्निर्देवता । गायत्री छन्द: ।भौम प्रीत्यर्थे जपे विनियोग: । ।। अंगारक स्तोत्रम् ।। अंगारक: शक्तिधरो लोहितांगो धरासुत: ।कुमारो मंगलौ भौमो महाकायो धनप्रद: ।। 1 ।। ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृद्रोगनाशन: ।विद्युतप्रभो व्रणकर: कामदो धनहृत् कुज: ।। 2 ।। सामगानप्रियो रक्त वस्त्रो रक्तायतेक्षण: ।लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधक: ।। 3 ।। रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायक: ।नामान्येतानि भौमस्य य: पठेत्सततं नर: ।। 4 ।। ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्रस्यं च विनश्यति ।धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ।। 5 ।। वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशय: ।योsर्चयेदह्नि भौमस्य मंगलं बहुपुष्पकै: ।। 6 ।। सर्वा नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ।। 7 ।। ।। इति श्री अंगारक स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Basava Jayanti 2026

Basava Jayanti 2026 Date And Time : बसव जयंती एक महान समाज सुधारक और दार्शनिक का पर्व….

Basava Jayanti 2026 Mein Kab Hai: भारत एक ऐसा महान और रहस्यमयी देश है जहां समय-समय पर कई महान संतों, समाज सुधारकों और उच्च कोटि के दार्शनिकों ने जन्म लिया है। इन महान विभूतियों ने समाज को अज्ञानता के अंधेरे से निकालकर ज्ञान और समानता के प्रकाश की ओर मोड़ा है। ऐसे ही एक अत्यंत महान और प्रतिष्ठित संत 12वीं शताब्दी के हिंदू कन्नड़ कवि और लिंगायत धर्म के संस्थापक भगवान बसवन्ना (Lord Basavanna) थे। उनके जन्म दिवस को Basava Jayanti 2026 के रूप में बहुत ही भव्य और श्रद्धापूर्ण तरीके से मनाया जाता है। Basava Jayanti 2026 अगर आप भी इस साल इस पावन दिन के इतिहास, इसके गहरे महत्व और इस पर्व को मनाने की सही विधि के बारे में पूरे विस्तार से जानना चाहते हैं, एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक और आपके व्यक्तिगत सहायक के रूप में, आज मैं आपको भगवान बसवन्ना के जीवन के उन अनसुने रहस्यों से रूबरू कराऊंगा, जो आपके जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। साल 2026 में कब है यह पर्व? (Basava Jayanti 2026 Date And Time) हिंदू पंचांग की सटीक और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, भगवान बसवेश्वर का जन्म वैशाख महीने के तीसरे दिन (तृतीया तिथि) को आनंदनाम संवत्सर में वर्ष 1134 ईस्वी में हुआ था। इसलिए हर साल इसी पावन तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। तिथियों के इस प्राकृतिक चक्र के अनुसार, साल 2026 में Basava Jayanti 2026 का यह महान और रूहानी त्योहार 20 अप्रैल, दिन सोमवार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन मुख्य रूप से दक्षिण भारत के कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बहुत ही अपार उत्साह के साथ मनाया जाता है Basava Jayanti 2026 और इन सभी राज्यों में इस दिन सरकारी छुट्टी (State Holiday) भी घोषित की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, उनके जन्म के समय से ही इस धरती पर एक नए और सुनहरे युग की शुरुआत मानी गई थी, जिसे आज भी पंचांगों में ‘बसवन्ना युग’ या ‘बसव युग’ (Basava Era) के नाम से बड़े आदर के साथ जाना जाता है। भगवान बसवन्ना का प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक इतिहास : Early life and family history of Lord Basavanna महान दार्शनिक और कवि बसवन्ना जी का जन्म 12वीं शताब्दी में बागेवाड़ी नामक स्थान पर हुआ था, जो हुनुगुंड से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है (हालांकि कुछ इतिहासकारों का यह भी मानना है कि उनका जन्म इंग्लेश्वर में हुआ था)। उनके पिता का नाम मदारस और उनकी माता का नाम मादलम्बे था। उन्होंने अपना बचपन कुडलसंगम की पवित्र भूमि पर बिताया, जहाँ उनके आध्यात्मिक विचारों को एक नई उड़ान मिली। बाद में उनका विवाह कलचुरी वंश के राजा बिज्जला के तत्कालीन प्रधानमंत्री की अत्यंत सुयोग्य बेटी गंगांबिके से हुआ। शुरुआत में एक साधारण एकाउंटेंट (लेखाकार) के रूप में अपना काम शुरू करने वाले बसवन्ना जी को बाद में उनकी अद्भुत बुद्धिमत्ता और सच्चाई के कारण राजा बिज्जला ने स्वयं आमंत्रित करके अपने राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया था। इसBasava Jayanti 2026 पर उनके इस संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक सफर को याद करना हर व्यक्ति के लिए बहुत ही गर्व की बात है। समाज सुधार और ‘अनुभव मंडप’ की ऐतिहासिक स्थापना:Social reform and historical establishment of ‘Anubhav Mandap’ बसवन्ना जी केवल एक चतुर राजनेता ही नहीं थे, बल्कि वे अपने समय के एक बहुत बड़े और दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। Basava Jayanti 2026 उन्होंने उस समय के समाज में गहराई तक फैली हुई क्रूर जाति व्यवस्था, छुआछूत और हिंदू धर्म की कुछ अंधविश्वासी कर्मकांडीय प्रथाओं के खिलाफ एक बहुत ही लंबी और मजबूत लड़ाई लड़ी। उन्होंने हमेशा एक ऐसे ‘जाति-रहित’ और समतामूलक समाज की स्पष्ट कल्पना की थी जहाँ हर एक इंसान को जीवन में आगे बढ़ने और तरक्की करने का बिल्कुल समान अवसर प्राप्त हो। अपने इन्हीं महान विचारों और आध्यात्मिक लोकतंत्र को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने “अनुभव मंडप” (Anubhava Mantapa) की ऐतिहासिक स्थापना की, जिसे दुनिया की सबसे पहली संसद (Open Parliament) की अवधारणा के रूप में भी पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। इस Basava Jayanti पर लिंगायत समुदाय के लाखों लोग उनके इसी आध्यात्मिक लोकतंत्र, करुणा और भाईचारे के संदेश को पूरे समाज में गर्व से फैलाते हैं। उन्होंने ही समाज में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता स्थापित करने के लिए ‘इष्टलिंग’ (Ishtalinga) नाम का पवित्र हार धारण करने की महान प्रथा शुरू की थी और एक निराकार भगवान (एकेश्वरवाद) की सच्ची पूजा पर अपना पूरा जोर दिया था। ‘कायक’ का महान सिद्धांत: कर्म ही आपकी सच्ची पूजा है:Great Principle of ‘Kayak’: Action is your true worship भगवान बसवन्ना जी का एक बहुत ही सुप्रसिद्ध और आधुनिक सिद्धांत ‘कायक’ (Kayaka) था, जिसका सीधा सा अर्थ है कि ‘श्रम या काम ही साक्षात कैलाश (स्वर्ग) है’। Basava Jayanti 2026 उन्होंने लोगों को यह कड़ा संदेश दिया कि कोई भी पेशा या काम जन्म से छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उस काम के प्रति आपकी ईमानदारी, लगन और सच्चाई ही आपकी असली पहचान और योग्यता तय करती है। जो भी सच्चा भक्त पूरे दिल से Basava Jayanti 2026 मनाता है, उसे उनके इस ‘कायक’ के अमूल्य सिद्धांत को अपने दैनिक जीवन में जरूर अपनाना चाहिए। दक्षिण भारत में कैसे मनाई जाती है Basava Jayanti और इसके मुख्य आयोजन : How is Basava Jayanti celebrated and its main events in South India ? इस पावन दिन पर देश के विभिन्न हिस्सों में बहुत ही भव्य और आकर्षक आयोजन किए जाते हैं। कर्नाटक में हर पांच में से एक व्यक्ति लिंगायत धर्म को मानता है, खासकर उत्तरी कर्नाटक के विजयपुरा, धारवाड़, और बेलगावी जैसे जिलों में इनका बहुत गहरा प्रभाव देखा जा सकता है। इस पवित्र Basava Jayanti के पावन अवसर पर लोग सुबह-सुबह उठकर भगवान बसवेश्वर के मंदिरों में जाते हैं, वहां विशेष प्रार्थनाएं करते हैं और उनके द्वारा रचित मधुर वचनों ( Basava Jayanti 2026 ) का सामूहिक रूप से पाठ करते हैं। लिंगायत समितियों द्वारा कई जगह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। लोग बड़ी खुशी से एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (यानी पूरी धरती एक परिवार है) का महान संदेश जन-जन तक पहुंचाते हैं। कर्नाटक के कुडलसंगम तीर्थ में तो यह भव्य उत्सव

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