December 2025

Dog

Dog In Dream: सपने में कुत्ता देखना—क्या यह किसी बड़ी घटना का संकेत है ?

Sapne Mein Dog Dekhna: सोते समय सपने देखना एक आम प्रक्रिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वप्न शास्त्र (Swapna Shastra) के अनुसार, हर सपने का कोई न कोई गहरा अर्थ जरूर होता है? सपने कभी-कभी भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देते हैं, हालांकि हमेशा ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है। लेकिन जब कोई वस्तु अचानक सपने में दिखती है, जिसका आपने न तो ज़िक्र किया हो और न ही कहीं देखा हो, तो वह अवश्य ही किसी बात का संकेत दे रही होती है। कुत्ता (Dog), जो सुरक्षा, संरक्षण और वफादारी का प्रतीक माना जाता है, उसे सपने में देखने के कई अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने सपने में कुत्ते को किस अवस्था में देखा है। आइए जानते हैं कि कुत्ते का सपना आपके जीवन में किस तरह के बदलाव या घटना का संकेत दे सकता है। सपने में कुत्ते को देखने का सामान्य अर्थ (General Dog Dream Meaning) आम तौर पर, सपने में कुत्ता देखना यह बताता है कि आप अपने जीवन में सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कुत्ता सुरक्षा और वफादारी का प्रतीक है। कुछ मामलों में, सपने में कुत्ता देखना सफलता और समृद्धि का प्रतीक भी होता है। इसका अर्थ है कि आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के करीब हैं। कुत्ते के रंग और व्यवहार पर आधारित विशिष्ट संकेत स्वप्न शास्त्र में कुत्ते को अलग-अलग रूप में देखने के निम्नलिखित अर्थ बताए गए हैं: 1. सपने में सफेद कुत्ता देखना (Seeing a White Dog) अगर आपको सपने में सफेद रंग का कुत्ता दिखाई देता है, तो यह आपके लिए एक अत्यंत शुभ संकेत हो सकता है। संकेत: इसका मतलब है कि आपके जीवन में कुछ लाभदायक परिस्थितियाँ बनने वाली हैं। परिणाम: आपका सोचा हुआ काम जल्द पूरा हो सकता है, और आपको नौकरी या व्यापार में मुनाफा (Profit) होने की संभावना है। 2. सपने में भूरा कुत्ता देखना (Seeing a Brown Dog) यदि आपने सपने में भूरा कुत्ता देखा है, तो यह एक चेतावनी का संकेत है। संकेत: इसका मतलब है कि आपके सामने कोई विकट परिस्थिति आ सकती है। सलाह: आपको निर्णय लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए कोई भी फैसला बहुत सावधानी से लेना चाहिए। यह सपना आर्थिक हानि (Financial loss) का भी संकेत हो सकता है। 3. सपने में रोता हुआ कुत्ता देखना (Seeing a Crying/Howling Dog) रोता हुआ कुत्ता देखना एक अशुभ घटना का संकेत माना जाता है। संकेत: यह सपना बताता है कि आपके जीवन में कोई बड़ी समस्या आने वाली है, और आपको बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है। प्रभाव: यह सेहत से जुड़ी समस्या का भी संकेत हो सकता है। इसके अलावा, इसका यह भी अर्थ हो सकता है कि किसी साथी से आपका झगड़ा हो सकता है या वह आपसे अलग हो सकता है। 4. सपने में आक्रामक या गुस्से वाला कुत्ता देखना (Seeing an Aggressive Dog) सपने में आक्रामक कुत्ता देखना अच्छा नहीं माना जाता। संकेत: यह नकारात्मक भावनाओं का प्रतीक होता है। यह सपना संकेत देता है कि आपको अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। खतरा: यह सपना यह भी दर्शाता है कि आपका कोई साथी आपके साथ धोखा कर सकता है या किसी बात को लेकर आपसे गुस्सा हो सकता है, जिससे आपके संबंधों में खटास पैदा हो सकती है। यह नए दुश्मन पैदा होने या किसी के द्वारा आपकी तरक्की से जलने का भी अशुभ संकेत हो सकता है। 5. सपने में कुत्ते का पीछा करना देखना (Seeing a Dog Chasing You) सपने में कुत्ते का पीछा करना या आपके पीछे दौड़ता हुआ दिखाई देना एक शुभ संकेत है। संकेत: यह सपना बताता है कि आपको वर्तमान हालात से घबराने की आवश्यकता नहीं है। परिणाम: आपको बहुत जल्दी आपकी मंजिल मिलने वाली है। यह सपना वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं के दूर होने का भी संकेत देता है। 6. सपने में कुत्ते को काटते हुए देखना (Seeing a Dog Biting You) यदि सपने में कोई कुत्ता आपको काटते हुए दिखाई देता है, तो यह भी एक शुभ संकेत है। संकेत: इसका यह मतलब होता है कि आपका कोई अटका हुआ काम बहुत जल्द पूरा होने वाला है। 7. सपने में कुत्ते के साथ खेलना (Playing with a Dog in a Dream) अपने सपने में स्वयं को किसी कुत्ते के साथ खेलते हुए देखना एक शुभ संकेत माना जाता है। संकेत: इसका अर्थ है कि बहुत जल्द आपके घर पर कोई मेहमान आने वाला है, या फिर किसी नए व्यक्ति से आपकी दोस्ती होने वाली है। परिणाम: यह संकेत देता है कि आपके जीवन में खुशियों की सौगात आने वाली है। 8. सपने में कुत्ते के बच्चे को देखना (Seeing a Puppy in a Dream) सपने में कुत्ते के बच्चे (Puppy) को देखना भी एक शुभ संकेत है। संकेत: इसका मतलब है कि आपको कोई अच्छी खबर मिलने वाली है, जो आपकी तरक्की या सफलता को लेकर होगी। सलाह: ऐसी स्थिति में आपको कुत्तों के बच्चों को दूध या बिस्किट आदि भी खिलाना चाहिए, जिससे कि आपको दान पुण्य का लाभ मिले।

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kharmas 2025 Date:16 दिसंबर से शुरू हो रहा है खरमास, जानें कब तक रहेगी रोक और कौन से काम हैं वर्जित

kharmas 2025 Mein Kab Hai: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में खरमास (Kharmas) या मलमास की अवधि का विशेष महत्व होता है। यह वह समय होता है जब सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर एक महीने के लिए रोक लग जाती है। दिसंबर का महीना न केवल वर्ष समाप्ति के लिए जाना जाता है, बल्कि खरमास के आगमन के लिए भी जाना जाता है। खरमास तब लगता है, जब ग्रहों के राजा सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं। kharmas 2025 यह समय हमें जीवन की भागदौड़ से विराम देकर आत्मिक शुद्धि, साधना और ईश्वरीय भक्ति की ओर प्रेरित करता है। आइए जानते हैं कि साल 2025 में खरमास kharmas 2025 कब से शुरू हो रहा है, इसका ज्योतिषीय कारण क्या है, और इस दौरान हमें कौन से कार्य नहीं करने चाहिए। खरमास 2025: प्रारंभ तिथि और समापन मुहूर्त:Kharmas 2025: Start date and completion time साल 2025 में खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर से होगी और यह अवधि पूरे एक महीने तक चलेगी। विवरण तिथि और समय खरमास प्रारंभ (सूर्य का धनु राशि में प्रवेश) 16 दिसंबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर खरमास समापन (सूर्य का मकर राशि में प्रवेश) 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर (मकर संक्रांति) खरमास 2025 कब लगेगा 16 दिसंबर 2025 से जैसे ही सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को मकर राशि में अपना स्थान लेंगे, खरमास समाप्त हो जाएगा और पुनः सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो सकेगी। खरमास क्यों लगता है? (The Reason Behind Kharmas) खरमास का समय ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है और यह वर्ष में दो बार आता है—जब सूर्य धनु राशि (Dhanu Rashi) या मीन राशि (Meen Rashi) में स्थित होता है। सूर्य का तेज कम होना: धनु राशि के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति (Guru Brihaspati) हैं। जब सूर्य देव गुरु के घर (धनु राशि) में प्रवेश करते हैं, तो उनका तेज या शक्ति (energy) कम हो जाती है। शुभ कार्यों पर रोक: चूंकि सूर्य का तेज कम हो जाता है, इसलिए शुभ ग्रह स्थितियों का प्रभाव भी कमजोर माना जाता है। इस कारण, ज्योतिष में माना जाता है कि इस समय में मांगलिक कार्यों को करने से व्यक्ति को वांछित फल नहीं मिलता। इसलिए, इस अवधि के दौरान शुभ-मांगलिक कार्यों पर रोक लगा दी जाती है। खरमास में कौन से काम न करें (Manglik Karya Nishedh) खरमास kharmas 2025 के दिनों में कई मांगलिक और सामाजिक समारोहों को करने की सख्त मनाही होती है। 1. विवाह और रिश्ते: शादी-विवाह जैसे कार्यक्रम इस दौरान नहीं करने चाहिए। इसके अलावा, आप सगाई, रिश्ता पक्का करने (रिश्ता पक्का जैसे काम), और मुंडन जैसे कार्य भी न करें। 2. नए निर्माण/खरीददारी: खरमास में घर, जमीन या किसी भी तरह का वाहन खरीदना अशुभ माना जाता है। 3. नया कार्य शुरू करना: आप इस दौरान घर में किसी भी चीज का नया निर्माण कार्य प्रारंभ न करें। नए व्यापार, दुकान सहित अन्य कार्यों की भी शुरुआत नहीं करनी चाहिए। 4. निवेश और आभूषण: खरमास होने पर सोने-चांदी के गहने भी न खरीदें। 5. संस्कार: गृह प्रवेश, नामकरण जैसे संस्कार और जनेऊ धारण करना भी इस अवधि में उचित नहीं होता है। खरमास में क्या करें (Shubh Karya aur Sadhna) खरमास kharmas 2025 का महीना आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत पवित्र समय माना जाता है। भले ही मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन धार्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ होता है। 1. ईश्वरीय उपासना: खरमास में भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। 2. पूजा का फल: सूर्य देव की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता आती है। वहीं भगवान विष्णु की भक्ति से जीवन में स्थिरता, समृद्धि और कल्याण की प्राप्ति होती है। 3. धार्मिक क्रियाएं: इस समय व्रत, मंत्र-जप, हवन, पदयात्रा, तीर्थ-स्नान और पूजा-पाठ में अधिक समय लगाना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी शुभ होता है। 4. दान-पुण्य: इस अवधि में दान-पुण्य करना अत्यधिक फलदायी माना गया है। kharmas 2025 खरमास में किया गया दान सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक फल देता है।   दान की वस्तुएं: अन्न, वस्त्र, पानी, तिल, गुड़, कंबल या जरूरतमंदों को सहायता देना शुभ फल देता है। सूर्य देव के 12 शक्तिशाली मंत्र:12 powerful mantras of Sun God सूर्य देव की उपासना के लिए kharmas 2025 खरमास के दिनों में इन 12 मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभप्रद माना गया है: 1. ॐ आदित्याय नमः। 2. ॐ सूर्याय नमः। 3. ॐ रवेय नमः। 4. ॐ पूषणे नमः। 5. ॐ दिनेशाय नमः। 6. ॐ सावित्रे नमः। 7. ॐ प्रभाकराय नमः। 8. ॐ मित्राय नमः। 9. ॐ उषाकराय नमः। 10. ॐ भानवे नमः। 11. ॐ दिनमणाय नमः। 12. ॐ मार्तंडाय नमः। Saphala Ekadashi 2025 Date And Time: दिसंबर में कब रखा जाएगा सफला एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Saphala Ekadashi

Saphala Ekadashi 2025 Date And Time: दिसंबर में कब रखा जाएगा सफला एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Saphala Ekadashi 2025 Mein Kab Hai: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का एक विशेष और खास महत्व होता है. वर्ष भर में कुल 24 एकादशियाँ आती हैं, जिनमें से एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में पड़ती है. इन सभी एकादशियों में सफला एकादशी का व्रत बहुत ही खास माना जाता है, Saphala Ekadashi क्योंकि जैसा कि इसका नाम है—’सफला’—इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी काम सफल होते हैं और जीवन में सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. सफला एकादशी (Saphala Ekadashi) हर साल पौष महीने के कृष्ण पक्ष में आती है और यह विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है. इस वर्ष, यह व्रत दिसंबर 2025 में पड़ रहा है। आइए जानते हैं सफला एकादशी 2025 की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसके पालन की विधि. सफला एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त (Saphala Ekadashi 2025 Tithi and Shubh Muhurat) इस साल सफला एकादशी 15 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार तिथियों का विवरण इस प्रकार है: विवरण समय एकादशी तिथि आरंभ 14 दिसंबर को रात 08 बजकर 47 मिनट पर (अन्य स्रोत: 08 बजकर 46 मिनट पर) एकादशी तिथि समाप्त 15 दिसंबर को रात 10 बजकर 08 मिनट पर (अन्य स्रोत: 10 बजकर 09 मिनट पर) व्रत धारण का दिन 15 दिसंबर 2025 पूजा का शुभ मुहूर्त (Abhijit Muhurat) सफला एकादशी के दिन अभिजीत मुहूर्त भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. आप इस समय में पूजा-अर्चना कर सकते हैं: अभिजीत मुहूर्त समय: दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. सफला एकादशी का महत्व (Saphala Ekadashi Significance) सफला एकादशी Saphala Ekadashi भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को रखने से व्यक्ति को हर क्षेत्र में अपार सफलता मिलती है और काम में आ रहीं सभी बाधाएं दूर होती हैं. सफलता और सौभाग्य: इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी काम सफल होते हैं, और उसे जीवन में सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. अक्षय पुण्य: सफला एकादशी पर पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. तपस्या का फल: जो साधक सफला एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें हजारों सालों की तपस्या के बराबर फल मिलता है. धन लाभ और समृद्धि: इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से खूब धन लाभ होता है, और घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है. मनोकामना पूर्ति: इस दिन जो भी मनोकामना होती है, उसे भगवान विष्णु से कहने पर वह अवश्य पूर्ण होती है. सफला एकादशी पूजा विधि और नियम (Saphala Ekadashi Puja Rituals) सफला एकादशी का व्रत रखते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है ताकि आपको पूर्ण फल प्राप्त हो सके: 1. दशमी तिथि (एक दिन पहले): व्रत से एक दिन पहले, यानी दशमी तिथि की शाम को सात्विक भोजन करें. 2. व्रत का संकल्प: एकादशी की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें, और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. 3. विष्णु पूजा: भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें. 4. अर्पण: उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित करें. 5. पाठ और भोग: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. भगवान को केला, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं. विशेष नियम: चावल और दान चावल वर्जित: ध्यान रखें कि एकादशी पर चावल का सेवन पूरी तरह से वर्जित है. दान: इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान अवश्य करें. पारण: अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान देकर ही व्रत का पारण करें. सफला एकादशी पर करें इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप पूजा करते समय इन मंत्रों का जाप करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है: 1. सामान्य विष्णु मंत्र:     ◦ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय     ◦ ॐ नमो नारायणाय 2. लक्ष्मी-वासुदेव मंत्र:     ◦ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः 3. लक्ष्मी विनायक मंत्र: (इस मंत्र का जाप भी अत्यंत फलदायी माना गया है)     ◦ दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्। धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

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Sankashti Chaturthi

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा-विधि, महत्व और शुभ योग

Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 Kab Hai: गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। Sankashti Chaturthi गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा-विधि, महत्व और शुभ योग जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025 And Time…… संकष्टी चतुर्थी कब है? – Sankashti Chaturthi Kab Hai अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत : रविवार, 7 दिसम्बर, 2025 | [Delhi]संकष्टी चन्द्रोदय समय – 7:55 PMसंकष्टी चतुर्थी तिथि : 7 दिसम्बर 2025 6:24 PM – 8 दिसम्बर 2025 4:03 PM संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि:Sankashti Chaturthi puja method गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं। गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें।शाम के पूजा के लिए गणेश जी की मूर्ति के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है। मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है। गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।गरीबों को दान भी किया जाता है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का महत्व:Importance of Akhurath Sankashti Chaturthi इस व्रत के मुख्य लाभ जीवन की रुकावटें और बाधाएं दूर होती हैं परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है आर्थिक स्थिति मजबूत होती है बुद्धि, स्मरण शक्ति और कार्यक्षमता बढ़ती है संतान की उन्नति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति होती है अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2025 के शुभ योग 1. शिव योग इस योग में किए गए कार्य सिद्ध होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 2. सिद्ध योग यह योग कार्यों की सफलता, धनलाभ और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इन दोनों योगों के संयोग से इस दिन भगवान गणेश की उपासना का फल कई गुना बढ़ जाता है।

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