Pushkar Mela 2025

Pushkar Mela 2025 Date And Time: जानें कब से शुरू होगा विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला? तिथि, महत्व और मुख्य आकर्षण

Pushkar Mela 2025 Mein Kab Hai: अजमेर जिले के पुष्कर में आयोजित होने वाला अंतर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला 2025 (Pushkar Mela 2025) न केवल अपनी धार्मिक पवित्रता के लिए, बल्कि करोड़ों के पशुओं के व्यापार और राजस्थानी संस्कृति के अद्भुत संगम के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। यह मेला राजस्थान की लोक संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है, जहाँ सरोवर के घाटों से लेकर रेतीले मैदानों तक देशी-विदेशी पर्यटकों का सैलाब उमड़ता है।

आइए जानते हैं कि 2025 में यह ऐतिहासिक मेला कब शुरू हो रहा है, इसका क्या महत्व है, और इस बार कौन से मुख्य कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

पुष्कर मेला 2025: मुख्य तिथियां और अवधि:Pushkar Mela 2025: Key dates and duration

पुष्कर मेले को दो भागों में बांटा जाता है: प्रशासनिक/सांस्कृतिक मेला और धार्मिक मेला।

1. प्रशासनिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अवधि मेले की औपचारिक शुरुआत 22 अक्टूबर को पशु मेला कार्यालय की स्थापना के साथ हो गई थी। जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग और पर्यटन विभाग की देखरेख में आयोजित यह मेला इस बार 30 अक्टूबर से 5 नवंबर 2025 तक चलेगा।

ध्वजारोहण और सांस्कृतिक शुरुआत: 30 अक्टूबर को मेला स्टेडियम में ध्वजारोहण समारोह होगा, Pushkar Mela 2025 जिसके साथ सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियों की शुरुआत हो जाएगी। इसी दिन से “वॉइस ऑफ पुष्कर” जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे।

2. धार्मिक मेले की तिथियां (पुष्कर स्नान) पुष्कर मेला धार्मिक रूप से देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। इस दौरान तीर्थयात्री पुष्कर झील में पवित्र स्नान करते हैं।

धार्मिक मेला शुरू: 2 नवंबर को कार्तिक एकादशी स्नान के साथ धार्मिक मेले की शुरुआत होगी। धार्मिक मेला इस बार 4 दिनों का रहेगा।

समापन और महास्नान: 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर सरोवर में होने वाले पारंपरिक महास्नान (Mahasnan) के साथ मेले का समापन होगा।

महत्वपूर्ण तिथियां: पुष्कर मेले की आधिकारिक तिथियां शनिवार, 1 नवंबर 2025 से बुधवार, 5 नवंबर 2025 तक हैं।

पुष्कर मेले का धार्मिक महत्व (Pushkar Snan Ka Mahatva)

पुष्कर मेले को तीर्थराज मुचुकुन्द के नाम से भी जाना जाता है और इसका बहुत धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि पुष्कर स्नान के बिना चारधाम यात्रा भी अधूरी रहती है।

पौराणिक कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने कार्तिक माह की एकादशी से पूर्णिमा तक 5 दिनों के लिए पुष्कर में एक महान यज्ञ किया था। इस यज्ञकाल के दौरान, 33 करोड़ देवी-देवता भी पृथ्वी पर मौजूद थे। इन्हीं मान्यताओं के चलते कार्तिक मास की एकादशी से पूर्णिमा तक 5 दिनों का पुष्कर में विशेष महत्व होता है। Pushkar Mela 2025 इन पाँच दिनों को भीष्म पंचक के नाम से भी जाना जाता है।

अक्षय पुण्य की प्राप्ति: यह वर्ष का सबसे शुभ समय होता है। Pushkar Mela 2025 ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति पूर्णिमा (5 नवंबर 2025) के दिन पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान करता है, तो उसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह अक्षय पुण्य अर्जित करता है।

पशु मेला: कारोबार और व्यापार की धमक (Pashu Mela)

पुष्कर मेला Pushkar Mela 2025 दुनिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है। यह मुख्य रूप से ऊंटों (Camels) और घोड़ों (अश्ववंश) की खरीद-फरोख्त के लिए प्रसिद्ध है।

2024 के व्यापारिक आंकड़े: वर्ष 2024 में कुल 8,366 पशु पुष्कर मेले में पहुंचे थे। Pushkar Mela 2025 इनमें ऊंटों और घोड़ों की मुख्य रूप से खरीद-फरोख्त हुई थी।

कुल व्यापार 11 करोड़ 5 लाख 83 हजार रुपए का दर्ज किया गया था।

सबसे महंगी बिक्री में, पंजाबी नुकरी नस्ल की एक घोड़ी 4 लाख 30 हजार रुपए में खरीदी गई थी।

2025 की उम्मीदें: पशुपालन विभाग को उम्मीद है कि इस Pushkar Mela 2025 वर्ष पशुओं की आवक पिछले वर्ष की तुलना में अधिक होगी। पशुपालक भी यह उम्मीद जता रहे हैं Pushkar Mela 2025 कि इस बार ऊंटों और घोड़ों की बिक्री का कारोबार पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 20 प्रतिशत अधिक रहेगा।

ऊंटों की संख्या में गिरावट के कारण: बीते कुछ वर्षों में ऊंटों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। इसके मुख्य कारण सीमित व्यापारिक मांग, परिवहन पर प्रतिबंध और लंपी और ग्लैंडर जैसे पशु रोग रहे हैं।

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इस बार के मुख्य सांस्कृतिक आकर्षण:Main cultural attractions of this time

पुष्कर मेले में इस बार कला और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है:

51 फीट ऊंची वीर तेजाजी की सैंड आर्ट

मशहूर सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने पुष्कर के रेतीले धोरों में लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की एक भव्य सैंड आर्ट (Sand Art) तैयार की है।

विशाल कलाकृति: यह कलाकृति लगभग 51 फीट ऊंची है।

निर्माण: इसे बनाने में अजय रावत ने करीब एक लाख टन बालू मिट्टी और 22 टैंकर पानी का उपयोग किया।

संदेश: इस कलाकृति के माध्यम से वीर तेजाजी महाराज के साहस, बलिदान और गौ-रक्षा (Cow Protection) के संदेश को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है।

विदेशी पर्यटक इस भव्य कलाकृति को देखकर मंत्रमुग्ध हो रहे हैं और इसे “Unbelievable India!” या “सैंड वंडर ऑफ पुष्कर” कहकर संबोधित कर रहे हैं।

अन्य कार्यक्रम: मेले में 2 से 4 नवंबर तक विकास और गीर प्रदर्शनी के साथ-साथ पशु प्रतियोगिताएं, लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। पशु प्रतियोगिताओं में सफेद चिट्टी का आयोजन 30 अक्टूबर और रवन्ना काटा 31 अक्टूबर को होगा।

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सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटन पर असर

मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अजमेर पुलिस प्रशासन ने व्यापक तैयारियाँ की हैं। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगभग दो हज़ार पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। मेले क्षेत्र में 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निरंतर नजर रखी जाएगी। Pushkar Mela 2025 सरोवर क्षेत्र में सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ टीम और गौताख़ोर भी तैनात रहेंगे।

हालांकि, इस बार विदेशी पर्यटकों की रफ्तार सुस्त दिखाई दे रही है, और बुकिंग में 20 से 25 प्रतिशत कमरे खाली हैं। फिर भी, घरेलू पर्यटक संख्या ने स्थिरता बनाए रखी है और यह मेला अभी भी देशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

पुष्कर मेला 2025 राजस्थान की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, जहां व्यापार, धर्म और संस्कृति एक साथ जीवंत होते हैं।

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